PUC II · Hindi · Chapter 9
रैदास बानी
भक्तिकाल के संत कवि रैदास की इन पदावलियों में भगवान के प्रति सम्पूर्ण दास्यभाव, समर्पण तथा प्रेमा-भक्ति की सरल-सहज अभिव्यक्ति है। कवि ने स्वयं को पानी, बाती, धागा तथा दास कहकर और प्रभु को चंदन, दीपक, मोती तथा स्वामी के रूप में स्वीकार करते हुए परिश्रम के महत्व तथा समता-आधारित समाज की कल्पना प्रस्तुत की है।
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