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PUC II · Hindi · Chapter 9

रैदास बानी

भक्तिकाल के संत कवि रैदास की इन पदावलियों में भगवान के प्रति सम्पूर्ण दास्यभाव, समर्पण तथा प्रेमा-भक्ति की सरल-सहज अभिव्यक्ति है। कवि ने स्वयं को पानी, बाती, धागा तथा दास कहकर और प्रभु को चंदन, दीपक, मोती तथा स्वामी के रूप में स्वीकार करते हुए परिश्रम के महत्व तथा समता-आधारित समाज की कल्पना प्रस्तुत की है।

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Topics in this chapter

  1. 1

    कवि परिचय एवं सारांश

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  2. 2

    शब्दार्थ एवं भावार्थ

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  3. 3

    महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

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  4. 4

    अभ्यास एवं वस्तुनिष्ठ प्रश्न

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