PUC II Hindi
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Chapter 1: सुजान भगत
मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित यह कहानी ग्राम्य जीवन के परिवेश पर आधारित है। किसान सुजान महतो के भगत बनने के बाद गाँव में उसकी प्रतिष्ठा तो बढ़ जाती है, पर अपने ही घर में पुत्र और पत्नी उसका अनादर करने लगते हैं। कठिन परिश्रम से वह अपना खोया हुआ अधिकार फिर प्राप्त करता है — यही कहानी का केंद्रीय संदेश है।
Chapter 2: कर्त्तव्य और सत्यता
डॉ. श्यामसुंदर दास द्वारा रचित यह निबंध कर्त्तव्य-पालन और सत्यता के घनिष्ठ संबंध को स्पष्ट करता है। लेखक बताते हैं कि मनुष्य का जीवन घर और समाज में अनेक कर्त्तव्यों से भरा है, और सत्य बोलना ही सच्चे कर्त्तव्य-पालन की पहचान है। डूबते जहाज़ के दृष्टांत से लेखक कर्त्तव्य-पालन के सर्वोच्च आदर्श को उजागर करते हैं।
Chapter 3: गंगा मैया से साक्षात्कार
डॉ. बरसाने लाल चतुर्वेदी द्वारा रचित यह व्यंग्यात्मक साक्षात्कार गंगा मैया के माध्यम से आज के भ्रष्टाचार, महँगाई, चरित्र के पतन और धर्म के व्यापारीकरण पर तीखा कटाक्ष करता है। काल्पनिक इंटरव्यू शैली में लिखा यह पाठ हास्य-व्यंग्य के माध्यम से गंभीर सामाजिक विसंगतियों को उजागर करता है।
Chapter 4: एक कहानी यह भी
प्रसिद्ध कथाकार मन्नू भंडारी के इस आत्मकथात्मक अंश में लेखिका अपने बचपन, अंतर्विरोधी व्यक्तित्व वाले पिता, त्यागमयी माँ, बहन सुशीला के साथ के खेल, प्राध्यापिका शीला अग्रवाल के प्रभाव और 1946-47 के स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी सक्रिय भागीदारी का सजीव वर्णन करती हैं। व्यक्तित्व-निर्माण में परिवार और गुरुजनों की भूमिका इस पाठ का केंद्रीय विषय है।
Chapter 5: भारतरत्न विश्वेश्वरैया
डॉ. बालशौरि रेड्डी द्वारा लिखित यह जीवनी भारतरत्न सर एम. विश्वेश्वरैया के जीवन, व्यक्तित्व और कार्यकुशलता का परिचय देती है। गरीब परिवार से उठकर विश्व-प्रसिद्ध इंजीनियर, प्रशासक और मैसूर के दीवान बनने तक की उनकी यात्रा प्रतिभा, कठोर परिश्रम, समय-पाबंदी और ईमानदारी की प्रेरक मिसाल है। उनका जन्मदिन आज पूरे भारत में 'इंजीनियर्स डे' के रूप में मनाया जाता है।
Chapter 6: चीफ़ की दावत
भीष्म साहनी की यह कहानी मिस्टर शामनाथ के घर होने वाली एक पार्टी की पृष्ठभूमि में मध्यमवर्गीय समाज के दिखावे, वृद्धों की उपेक्षा तथा माँ की निश्छल ममता का मार्मिक चित्रण करती है। पार्टी के लिए बाधा समझी जाने वाली माँ ही अंततः बेटे की तरक्की की सम्भावना का कारण बनती है — यह विडंबना कहानी का केंद्रीय भाव है।
Chapter 7: भोलाराम का जीव
हरिशंकर परसाई की यह व्यंग्य कहानी भोलाराम नामक एक सामान्य सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी की मार्मिक गाथा है, जो पाँच वर्षों तक पेंशन के लिए दर-दर भटकता रहा और अंततः भूख तथा चिंता में दम तोड़ बैठा। नारद जी की पड़ताल के माध्यम से सरकारी दफ्तरों की लालफीताशाही, भ्रष्टाचार तथा 'वज़न' (रिश्वत) की व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य किया गया है — भोलाराम का जीव मृत्यु के बाद भी अपनी अटकी हुई दरख्वास्तों में उलझा रह जाता है।
Chapter 8: यात्रा जापान की
ममता कालिया का यह यात्रा-वृत्तांत तोक्यो तथा ओसाका विश्वविद्यालयों में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन में भाग लेने के अनुभवों पर आधारित है। इसमें जापान के जनजीवन, संस्कृति, तकनीकी प्रगति, जापानियों की अनुशासनप्रियता एवं कर्मनिष्ठता, वहाँ हिन्दी भाषा के प्रति प्रेम, तथा तोदायजी मंदिर व ओसाका के किले जैसे ऐतिहासिक स्थलों का रोचक वर्णन किया गया है।
Chapter 9: रैदास बानी
भक्तिकाल के संत कवि रैदास की इन पदावलियों में भगवान के प्रति सम्पूर्ण दास्यभाव, समर्पण तथा प्रेमा-भक्ति की सरल-सहज अभिव्यक्ति है। कवि ने स्वयं को पानी, बाती, धागा तथा दास कहकर और प्रभु को चंदन, दीपक, मोती तथा स्वामी के रूप में स्वीकार करते हुए परिश्रम के महत्व तथा समता-आधारित समाज की कल्पना प्रस्तुत की है।
Chapter 10: सूरदास के पद
कृष्ण-भक्ति शाखा के शिरोमणि कवि सूरदास के इन पदों में श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य, गोपिकाओं के समर्पण-भाव तथा माखन-चोरी प्रसंग का अत्यंत मार्मिक एवं सरस चित्रण हुआ है। ब्रजभाषा की मधुरता और वात्सल्य-माधुर्य भाव की प्रधानता इन पदों की विशेष पहचान है।
Chapter 11: रहीम के दोहे
कवि रहीम के इन नीतिपरक दोहों में मनुष्य-जन्म की सार्थकता, कर्मयोग, मनुष्य की प्रतिष्ठा, अहंकार-त्याग, वाणी की संयमित मधुरता तथा सांसारिक वस्तुओं की नश्वरता जैसे गूढ़ जीवन-दर्शन को अत्यंत सरल एवं प्रभावी भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
Chapter 12: बिहारी के दोहे
'गागर में सागर' भरने वाले रीतिकाल के श्रेष्ठ कवि बिहारी लाल के इन दोहों में श्रीकृष्ण-गोपिका के प्रेम, मन की शुद्धता, दान की महत्ता, धन और अहंकार के संबंध तथा मन की दुर्बलता का अत्यंत चित्ताकर्षक एवं सूक्ष्म वर्णन किया गया है।
Chapter 13: अधिकार
छायावाद की प्रमुख कवयित्री महादेवी वर्मा की इस कविता में वेदना के सच्चे स्वरूप का चित्रण करते हुए जीवन की सार्थकता संघर्ष और पीड़ा को अपनाने में बताई गई है। कवयित्री अमरता के प्रलोभन को ठुकराकर अपने 'मिटने के अधिकार' को बचाए रखना चाहती हैं।
Chapter 14: गहने
महाकवि कुवेंपु की कन्नड़ कविता 'ओडवेगळु' का डॉ. एम. विमला द्वारा किया गया हिन्दी अनुवाद। माँ और बेटी के मार्मिक संवाद के माध्यम से बाल-सुलभ निश्छलता, बचपन की सहज सुंदरता तथा माँ-बेटी के अटूट स्नेह-बंधन को ही सच्चे 'गहने' के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
Chapter 15: कायर मत बन
कवि नरेन्द्र शर्मा की ओजपूर्ण कविता, जिसमें मनुष्य को कायरता त्यागकर मानवता, साहस और आत्म-सम्मान के साथ जीवन जीने तथा दुष्टों के सम्मुख कभी आत्मसमर्पण न करने का प्रेरक संदेश दिया गया है।
Chapter 16: एक वृक्ष की हत्या
ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि कुँवर नारायण की यह कविता एक पुराने वृक्ष के कट जाने पर कवि की गहरी संवेदना व्यक्त करती है तथा नदी, हवा, जंगल और मानवीय भावनाओं के संरक्षण का महत्वपूर्ण पर्यावरणीय संदेश देती है।
Chapter 17: भारत की धरती
डॉ. पुण्यचन्द 'मानव' की यह राष्ट्रभक्ति-पूर्ण कविता भारत के विभिन्न प्रांतों — उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, दक्षिण भारत तथा विशेष रूप से कर्नाटक — के गौरवमयी इतिहास, वीरता एवं सांस्कृतिक विरासत का सजीव चित्रण करते हुए राष्ट्रीय गौरव की भावना जगाती है।
Chapter 18: हो गई है पीर पर्वत-सी
'नई कविता' और गज़ल विधा के प्रसिद्ध कवि दुष्यन्त कुमार की यह मार्मिक गज़ल समाज में व्याप्त पीड़ा, अन्याय और शोषण के विरुद्ध जन-जागरण एवं क्रांतिकारी परिवर्तन का सशक्त आह्वान करती है।
Chapter 19: सूखी डाली
प्रसिद्ध एकांकीकार उपेन्द्रनाथ 'अश्क' रचित यह एकांकी एक संयुक्त परिवार में शिक्षित छोटी बहू बेला के आगमन से उत्पन्न पारिवारिक तनाव तथा दादा जी की परिपक्व बुद्धि से उस तनाव के समाधान का यथार्थवादी एवं मनोवैज्ञानिक चित्रण प्रस्तुत करती है — संयुक्त परिवार को एक विशाल वट वृक्ष के प्रतीक के माध्यम से दर्शाया गया है।
Chapter 20: प्रतिशोध
डॉ. रामकुमार वर्मा रचित यह सांस्कृतिक एकांकी संस्कृत महाकवि भारवि के जीवन पर आधारित है, जिसमें पिता-पुत्र के बीच अहंकार व अनुशासन का द्वंद्व, प्रतिशोध की भावना तथा अंततः प्रायश्चित एवं आत्म-सुधार के माध्यम से भारवि के महाकवि बनने की मार्मिक गाथा प्रस्तुत की गई है।
Chapter 21: वाक्य शुद्धि
इस अध्याय में वाक्यों में होने वाली सामान्य अशुद्धियों (लिंग, वचन, कारक, काल, पुनरुक्ति, शब्द-क्रम आदि) की पहचान तथा उन्हें शुद्ध करने के नियमों एवं अभ्यास का समावेश है। परीक्षा में यह भाग 3 अंकों का होता है (चार वाक्यों की शुद्धि)।
Chapter 22: रिक्त स्थान की पूर्ति
इस अध्याय में वाक्यों में उचित कारक-चिह्न (ने, को, से, के लिए, में, पर, का/की/के आदि) अथवा उचित शब्द भरकर वाक्य पूर्ण करने के नियमों एवं अभ्यास का समावेश है। परीक्षा में यह भाग 3 अंकों का होता है (चार रिक्त स्थान)।
Chapter 23: काल परिवर्तन
इस अध्याय में क्रिया के तीन प्रमुख काल (वर्तमान, भूत, भविष्य) एवं उनके भेदों की पहचान तथा किसी दिए गए वाक्य को एक काल से दूसरे काल में बदलने (काल-परिवर्तन) के नियमों एवं अभ्यास का समावेश है। परीक्षा में यह भाग 3 अंकों का होता है (तीन वाक्य)।
Chapter 24: मुहावरे
इस अध्याय में परीक्षा-दृष्टि से महत्वपूर्ण मुहावरों के अर्थ, वाक्य-प्रयोग तथा उन्हें अर्थ के साथ सुमेलित करने के अभ्यास का समावेश है। परीक्षा में यह भाग 3 अंकों का होता है (मुहावरों को अर्थ के साथ जोड़ना)।
Chapter 25: लिंग
इस अध्याय में संज्ञा शब्दों के पुल्लिंग से स्त्रीलिंग (तथा स्त्रीलिंग से पुल्लिंग) रूप बनाने के नियमों, प्रत्ययों एवं महत्वपूर्ण शब्द-युग्मों का समावेश है। परीक्षा में यह भाग 3 अंकों का होता है (तीन शब्दों के अन्य लिंग रूप लिखना)।
Chapter 26: अनेक शब्दों के लिए एक शब्द
इस अध्याय में किसी वाक्यांश/वाक्य के लिए प्रचलित एक-शब्दी विकल्प (शब्द-समूह के लिए एक शब्द) ढूँढने के अभ्यास का समावेश है। परीक्षा में यह भाग 3 अंकों का होता है (तीन वाक्यांशों के लिए एक-एक शब्द)।
Chapter 27: उपसर्ग
इस अध्याय में उपसर्ग की परिभाषा, संस्कृत एवं हिंदी/उर्दू के प्रमुख उपसर्गों तथा उनसे बनने वाले शब्दों के अभ्यास का समावेश है। परीक्षा में यह भाग 2 अंकों का होता है (दो शब्दों में उपसर्ग जोड़ना)।
Chapter 28: प्रत्यय
इस अध्याय में प्रत्यय की परिभाषा, कृत् एवं तद्धित प्रत्ययों तथा उनसे बनने वाले शब्दों के अभ्यास का समावेश है। परीक्षा में यह भाग 2 अंकों का होता है (दो शब्दों में से प्रत्यय अलग करना)।
Chapter 29: निबंध
इस अध्याय में निबंध-लेखन की तकनीक, प्रारूप (भूमिका, विषय-विस्तार, उपसंहार) तथा परीक्षा में प्रायः पूछे जाने वाले विषयों पर आदर्श निबंधों (नमूना) का समावेश है। परीक्षा में यह भाग 4-5 अंकों का होता है (तीन विषयों में से किसी एक पर निबंध, अथवा पत्र लेखन का विकल्प)।
Chapter 30: पत्र लेखन
इस अध्याय में औपचारिक (प्रार्थना-पत्र, शिकायती पत्र, संपादक को पत्र) एवं अनौपचारिक पत्रों के प्रारूप तथा आदर्श नमूना पत्रों का समावेश है। परीक्षा में यह भाग निबंध के विकल्प के रूप में 3-4 अंकों का होता है।
Chapter 31: अपठित गद्यांश
इस अध्याय में अपठित गद्यांश हल करने की तकनीक तथा नमूना गद्यांश एवं उनके हल किए गए प्रश्नोत्तर का समावेश है। परीक्षा में यह भाग 3-4 अंकों का होता है — एक अपरिचित गद्यांश देकर उस पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं।
Chapter 32: अनुवाद
इस अध्याय में कन्नड़/अंग्रेज़ी से हिंदी में अनुवाद करने की तकनीक तथा हल किए गए नमूना वाक्यों का समावेश है। परीक्षा में यह भाग 3 अंकों का होता है (पाँच वाक्यों का अनुवाद)।