PUC II · Hindi · Chapter 7
भोलाराम का जीव
हरिशंकर परसाई की यह व्यंग्य कहानी भोलाराम नामक एक सामान्य सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी की मार्मिक गाथा है, जो पाँच वर्षों तक पेंशन के लिए दर-दर भटकता रहा और अंततः भूख तथा चिंता में दम तोड़ बैठा। नारद जी की पड़ताल के माध्यम से सरकारी दफ्तरों की लालफीताशाही, भ्रष्टाचार तथा 'वज़न' (रिश्वत) की व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य किया गया है — भोलाराम का जीव मृत्यु के बाद भी अपनी अटकी हुई दरख्वास्तों में उलझा रह जाता है।
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