लघु-उत्तरीय प्रश्न (आदर्श उत्तर)
प्रश्न 1: चित्रगुप्त ने धर्मराज से क्या कहा?
उत्तर: चित्रगुप्त ने बताया कि रिकॉर्ड के अनुसार भोलाराम के जीव ने पाँच दिन पहले देह त्यागी और यमदूत के साथ यमलोक के लिए रवाना भी हुआ, परन्तु वह अभी तक वहाँ नहीं पहुँचा। बाद में उन्होंने व्यंग्यपूर्वक यह भी कहा कि आजकल पृथ्वी पर चीज़ों के रास्ते में गायब होने का व्यापार बहुत चला है — रेलवे में सामान चोरी होता है, राजनीतिक विरोधी अपहृत होते हैं — शायद भोलाराम के जीव को भी किसी विरोधी ने उड़ा दिया हो।
प्रश्न 2: यमदूत ने हाथ जोड़कर चित्रगुप्त से क्या विनती की?
उत्तर: यमदूत ने हाथ जोड़कर कहा कि उसे नहीं मालूम कि क्या हुआ — आज तक उसने कभी धोखा नहीं खाया था, पर भोलाराम का जीव उसे चकमा दे गया। नगर के बाहर एक तीव्र वायु-तरंग पर सवार होते ही जीव उसकी पकड़ से छूटकर गायब हो गया, और उसने पाँच दिनों तक सारा ब्रह्मांड छान डाला, फिर भी उसका पता नहीं चला। उसने अपनी सावधानी में कोई कमी न होने की दुहाई भी दी।
प्रश्न 3: नरक में निवास-स्थान की समस्या कैसे हल हुई?
उत्तर: धर्मराज ने बताया कि नरक में निवास-स्थान की समस्या कई भ्रष्ट लोगों के आने से हल हो गई — इमारतों के ऐसे ठेकेदार आए जिन्होंने पूरे पैसे लेकर रद्दी इमारतें बनाईं, बड़े इंजीनियर आए जिन्होंने ठेकेदारों से मिलकर पंचवर्षीय योजनाओं का पैसा खाया, और ओवरसीयर आए जिन्होंने अनुपस्थित मज़दूरों की हाज़िरी भरकर पैसा हड़पा। इन सभी ने बहुत जल्दी नरक में कई इमारतें खड़ी कर दीं, जिससे स्थान की समस्या हल हो गई।
प्रश्न 4: भोलाराम का परिचय दीजिए।
उत्तर: भोलाराम जबलपुर शहर के घमापुर मुहल्ले में नाले के किनारे एक टूटे-फूटे डेढ़ कमरे के मकान में परिवार सहित रहते थे। उनकी एक पत्नी, दो बेटे तथा एक बेटी थी। लगभग साठ वर्ष की उम्र में वे एक सामान्य सरकारी नौकरी से रिटायर हुए थे। पाँच साल पहले सेवानिवृत्त होने के बावजूद उन्हें पेंशन नहीं मिली थी। मकान का किराया न देने के कारण मकान-मालिक उन्हें निकालना चाहता था, और अंततः चिंता व भूख में घुलते-घुलते उन्होंने दम तोड़ दिया।
प्रश्न 5: भोलाराम की पत्नी ने नारद से भोलाराम के संबंध में क्या कहा?
उत्तर: भोलाराम की पत्नी ने बताया कि उनके पति को 'ग़रीबी की बीमारी' थी। पाँच साल से पेंशन पर बैठे थे, हर दस-पंद्रह दिन में दरख्वास्त देते थे, पर या तो जवाब न आता या यही आता कि मामले पर विचार हो रहा है। इन पाँच सालों में सारे गहने और फिर बर्तन बिक गए, फाके होने लगे, और चिंता तथा भूख में घुलते-घुलते उन्होंने दम तोड़ दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भोलाराम आजीवन एकनिष्ठ रहे और किसी अन्य स्त्री की ओर आँख उठाकर नहीं देखा।
प्रश्न 6: भोलाराम की पत्नी ने नारद से क्या विनती की?
उत्तर: भोलाराम की पत्नी ने नारद से विनती की कि वे साधु और सिद्ध पुरुष हैं, इसलिए कुछ ऐसा करें कि उनके पति की रुकी हुई पेंशन मिल जाए, ताकि उनके बच्चों का पेट भर सके।
प्रश्न 7: बड़े साहब ने नारद से दफ्तरों के रीति-रिवाज़ के बारे में क्या कहा?
उत्तर: साहब ने कहा कि नारद बैरागी हैं और दफ्तरों के रीति-रिवाज़ नहीं जानते। दफ्तर भी एक मंदिर की तरह है, जहाँ दान-पुण्य करना पड़ता है — दरख्वास्तों पर 'वज़न' रखना ज़रूरी है। सरकारी पैसे का मामला होने के कारण पेंशन का केस बीसों दफ्तरों में जाता है और हर जगह वही बात बार-बार लिखनी पड़ती है, इसीलिए देर लगती है। परन्तु 'वज़न' (रिश्वत) देने पर काम जल्दी भी हो सकता है।
प्रश्न 8: नारद आखिर भोलाराम का पता कैसे लगाते हैं?
उत्तर: बड़े साहब को वीणा (रिश्वत के रूप में) देने के बाद साहब ने चपरासी से भोलाराम की फ़ाइल मँगवाई। जब फ़ाइल आई, तो साहब ने नाम की पुष्टि के लिए पूछा और नारद ने ज़ोर से 'भोलाराम' पुकारा। तभी अप्रत्याशित रूप से फ़ाइल के भीतर से ही भोलाराम के जीव की आवाज़ आई, जिससे नारद को पता चला कि जीव पाँच दिनों से इसी पेंशन-फ़ाइल में अटका हुआ था।