विस्तृत हल: CBSE कक्षा 10 विज्ञान सैंपल पेपर 2027 – सेट 3
प्रश्न पत्र के सभी लिखित प्रश्न (2, 3, 4 और 5 अंक) यहाँ क्रम से हल किए गए हैं, हर चरण के अंकों के साथ, ताकि आप अपनी उत्तर पुस्तिका परीक्षक की तरह जाँच सकें। जहाँ आंतरिक विकल्प (अथवा) है, वहाँ दोनों विकल्प हल किए गए हैं। 1 अंक वाले प्रश्नों के उत्तर व्याख्या सहित प्रश्न पत्र वाले पृष्ठ की क्विज़ में हैं।
खण्ड क – जीव विज्ञान (30 अंक)
प्रश्न 10 (2 अंक)
निम्नलिखित के उत्तर दीजिए:
(a) नागफनी जैसे मरुस्थलीय पौधे दिन में अपने रंध्र बंद रखते हैं और रात में खोलते हैं। क्यों? फिर वे दिन में प्रकाशसंश्लेषण कैसे कर पाते हैं? (1 अंक)
उत्तर।
- गर्म दिन में रंध्र बंद रखने से वाष्पोत्सर्जन द्वारा जल की हानि कम होती है — 0.5 अंक
- वे रात में कार्बन डाइऑक्साइड लेकर उसे एक मध्यवर्ती पदार्थ के रूप में संचित करते हैं, जिसका उपयोग दिन में तब होता है जब क्लोरोफिल प्रकाश ऊर्जा अवशोषित करता है — 0.5 अंक
(b) ATP को कोशिका की ऊर्जा मुद्रा कहा जाता है। इसका क्या अर्थ है? शरीर की एक क्रिया बताइए जिसमें इसका उपयोग होता है। (1 अंक)
उत्तर।
- श्वसन में मुक्त ऊर्जा से ATP बनता है; जब कोशिका को ऊर्जा चाहिए, तो ATP टूटकर एक निश्चित मात्रा में ऊर्जा मुक्त करता है — 0.5 अंक
- कोई एक: पेशियों का संकुचन, प्रोटीन का निर्माण, तंत्रिका आवेग का संचरण — 0.5 अंक
प्रश्न 11 (2 अंक)
फ़रीदा ने हरी फलियों वाले लंबे शुद्ध वंशक्रम मटर के पौधों का संकरण पीली फलियों वाले बौने शुद्ध वंशक्रम पौधों से कराया। F1 के सभी पौधे हरी फलियों वाले लंबे थे। F1 पौधों के स्वपरागण से मिली F2 पीढ़ी में चार प्रकार के पौधे थे, जिनमें कुछ पीली फलियों वाले लंबे और कुछ हरी फलियों वाले बौने पौधे भी थे। F2 के चारों प्रकार के पौधों का अपेक्षित अनुपात लिखिए। ये परिणाम कैसे दिखाते हैं कि दोनों लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं?
उत्तर।
- लंबे-हरे : लंबे-पीले : बौने-हरे : बौने-पीले = 9 : 3 : 3 : 1 — 1 अंक
- लंबे-पीले और बौने-हरे ऐसे नए संयोजन हैं जो किसी भी जनक में नहीं थे, अतः लंबाई और फली के रंग के जीन साथ-साथ नहीं गए; हर लक्षण अलग से अब भी 3 : 1 देता है, अर्थात् दोनों स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं — 1 अंक
प्रश्न 12 (2 अंक)
विकल्प (A) या (B) में से किसी एक का उत्तर दीजिए।
(A) एक डॉक्टर तीसरे महीने की गर्भवती महिला को बताती हैं कि प्लेसेंटा ठीक से बन गया है। प्लेसेंटा क्या है? दो ऐसी वस्तुओं के नाम लिखिए जो इससे होकर माँ से भ्रूण तक जाती हैं, और एक जो उल्टी दिशा में जाती है।
उत्तर।
- प्लेसेंटा गर्भाशय की भित्ति में धँसा एक तश्तरीनुमा ऊतक है; इसमें भ्रूण की ओर दीर्घरोम होते हैं, जो माँ की ओर रुधिर स्थानों से घिरे रहते हैं — 1 अंक
- माँ से भ्रूण: ग्लूकोज़ और ऑक्सीजन (0.5); भ्रूण से माँ: अपशिष्ट पदार्थ (0.5) — 1 अंक
अथवा
(B) सुनैना चार महीने से गर्भवती है। उसकी डॉक्टर उसे नियमित, संतुलित भोजन करने और भूखी न रहने की सलाह देती हैं, क्योंकि "शिशु को जो कुछ मिलता है, वह आपके भोजन से ही मिलता है"। बताइए कि सुनैना द्वारा खाया गया भोजन बढ़ते भ्रूण तक कैसे पहुँचता है। भ्रूण किसी और तरीके से अपना भोजन क्यों नहीं पा सकता?
उत्तर।
- उसका भोजन पचकर उसके रुधिर में अवशोषित होता है; प्लेसेंटा में उसका रुधिर भ्रूण के दीर्घरोमों के चारों ओर के स्थानों में बहता है, और ग्लूकोज़ तथा अन्य पोषक पदार्थ वहाँ से भ्रूण के रुधिर में पहुँच जाते हैं (दीर्घरोम इसके लिए बड़ा पृष्ठ देते हैं) — 1 अंक
- भ्रूण गर्भाशय के अंदर रहता है और स्वयं भोजन ग्रहण करने या पचाने का उसके पास कोई साधन नहीं है; वह प्लेसेंटा द्वारा पूरी तरह माँ के रुधिर पर निर्भर है, इसलिए माँ के कम खाने पर भ्रूण को वृद्धि के लिए आवश्यक पदार्थ कम मिलते हैं — 1 अंक
प्रश्न 13 (3 अंक)
ऋतिका ने बैंगनी फूलों वाले शुद्ध वंशक्रम मटर के पौधों का संकरण सफ़ेद फूलों वाले शुद्ध वंशक्रम पौधों से कराया। F1 के सभी पौधों में बैंगनी फूल थे। उसने F1 पौधों का स्वपरागण होने दिया और F2 पौधों के फूल गिने:
| फूल का रंग | F2 पौधों की संख्या |
|---|---|
| बैंगनी | 450 |
| सफ़ेद | 150 |
(a) कौन-सा लक्षण प्रभावी है? तालिका से F2 का अनुपात ज्ञात कीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- बैंगनी प्रभावी है — 0.5 अंक
- 450 : 150 = 3 : 1 — 0.5 अंक
(b) प्रभावी जीन के लिए V और अप्रभावी के लिए v का उपयोग करके दो F1 पौधों के बीच संकरण दिखाइए और F2 पौधों का जीनप्ररूप अनुपात लिखिए। (1 अंक)
उत्तर।
- Vv × Vv; प्रत्येक जनक से युग्मक V और v, जिन्हें चेकरबोर्ड में मिलाया गया हो — 0.5 अंक
- VV : Vv : vv = 1 : 2 : 1 — 0.5 अंक
(c) बैंगनी फूलों वाले 450 F2 पौधों में से लगभग कितने शुद्ध वंशक्रम (VV) वाले होने की अपेक्षा है? यदि सफ़ेद फूल वाले F2 पौधे का स्वपरागण कराया जाए, तो उसकी संतति के फूल किस रंग के होंगे? कारण दीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- बैंगनी पौधों का एक-तिहाई भाग VV है: लगभग 150 — 0.5 अंक
- सभी सफ़ेद, क्योंकि सफ़ेद पौधा vv है और केवल v ही आगे दे सकता है — 0.5 अंक
प्रश्न 14 (3 अंक)
हिसार के पास के एक गाँव के गेहूँ के खेत में यह खाद्य श्रृंखला है: गेहूँ → चूहा → साँप → गरुड़। आकृति में इसका ऊर्जा पिरामिड दिखाया गया है, जिसके स्तर नीचे से P, Q, R और S अंकित हैं।

(a) फसल के खेत को कृत्रिम पारितंत्र क्यों कहा जाता है? स्तर R पर कौन-सा जीव है, और यह कौन-सा पोषी स्तर है? (1 अंक)
उत्तर।
- इसे मनुष्य बनाता और सँभालता है (बुआई, सिंचाई, निराई), यह प्राकृतिक रूप से नहीं बना — 0.5 अंक
- R पर साँप है, जो तीसरा पोषी स्तर (द्वितीयक उपभोक्ता) है — 0.5 अंक
(b) खेत के गेहूँ के पौधों में भोजन के रूप में 60,000 kJ ऊर्जा संचित है। 10 प्रतिशत के नियम का उपयोग करके साँपों और गरुड़ों को उपलब्ध ऊर्जा ज्ञात कीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- साँप: 60,000 → 6,000 → 600 kJ — 0.5 अंक
- गरुड़: 60 kJ — 0.5 अंक
(c) करण कहता है, "जब खेत में कोई गरुड़ मरता है, तो अपघटक उसके शरीर को तोड़ देते हैं और उसमें संचित ऊर्जा वापस गेहूँ तक पहुँच जाती है। इस तरह इस खेत में ऊर्जा चक्कर लगाती रहती है।" क्या करण सही है? कारण दीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- नहीं (0.5); अपघटक केवल कच्चे पदार्थ (खनिज) मिट्टी में लौटाते हैं; ऊर्जा प्रत्येक स्तर पर खर्च हो जाती है या ऊष्मा के रूप में निकल जाती है और पौधों तक कभी वापस नहीं आती, जिन्हें सूर्य के प्रकाश से नई ऊर्जा ग्रहण करनी पड़ती है; अतः ऊर्जा का प्रवाह एकदिशिक है (0.5) — 1 अंक
प्रश्न 15 (4 अंक)
भोपाल के एक विद्यालय में तन्वी की कक्षा ने दो क्रियाकलाप किए। पहले में, अंकुरित होते सेम के कुछ बीजों को गीली रुई और काँच के एक पारदर्शी जार की भीतरी दीवार के बीच दबाकर रखा गया, ताकि वे दिखाई देते रहें, और जार को एक अंधेरी अलमारी में उसकी करवट लिटा दिया गया। तीन दिन बाद प्ररोह ऊपर की ओर और जड़ें नीचे की ओर मुड़ गई थीं। दूसरे में, सेम के नवोद्भिदों को गत्ते के एक बंद डिब्बे में रखा गया, जिसके एक ओर एक पतली झिरी थी और वह झिरी खिड़की की ओर थी। कुछ दिनों बाद सभी प्ररोह झिरी की ओर मुड़ गए थे। उनकी शिक्षिका ने समझाया कि प्ररोह के सिरे पर बनने वाला एक पादप हॉर्मोन इस मुड़ने के लिए उत्तरदायी है।
(a) दूसरे क्रियाकलाप में प्ररोहों द्वारा दिखाई गई गति का नाम और उत्तरदायी हॉर्मोन का नाम लिखिए। (1 अंक)
उत्तर।
- प्रकाशानुवर्तन (0.5); ऑक्सिन (0.5) — 1 अंक
(b) पहले क्रियाकलाप में कौन-सा भाग धनात्मक गुरुत्वानुवर्तन और कौन-सा ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्तन दिखाता है? (1 अंक)
उत्तर।
- जड़ धनात्मक गुरुत्वानुवर्तन दिखाती है (0.5); प्ररोह ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्तन दिखाता है (0.5) — 1 अंक
(c) समझाइए कि हॉर्मोन प्ररोहों को झिरी की ओर कैसे मोड़ता है। अब पहली झिरी बंद कर दी जाती है और डिब्बे की विपरीत दिशा में एक नई झिरी काटी जाती है, तथा डिब्बे को इस तरह घुमाया जाता है कि नई झिरी खिड़की की ओर हो। अगले कुछ दिनों में प्ररोहों का क्या होगा? (2 अंक)
उत्तर।
- एक ओर से आने वाले प्रकाश के कारण ऑक्सिन प्ररोह की छाया वाली ओर चला जाता है; वहाँ की कोशिकाएँ अधिक लंबी होती हैं, इसलिए प्ररोह प्रकाश की ओर मुड़ जाता है — 1 अंक
- प्ररोह धीरे-धीरे दूसरी ओर, नई झिरी की ओर मुड़ जाएँगे, क्योंकि अब ऑक्सिन दूसरी ओर (प्रकाश से दूर) जमा होता है; यह वृद्धि गति है, इसलिए इसमें कुछ दिन लगते हैं — 1 अंक
अथवा
(c) जड़ और प्ररोह गुरुत्व के प्रति विपरीत अनुक्रिया क्यों करते हैं? कक्षा ने पहले क्रियाकलाप का जार खिड़की के पास न रखकर अंधेरी अलमारी में क्यों रखा? (2 अंक)
उत्तर।
- प्ररोह गुरुत्व से दूर, प्रकाश और वायु की ओर ऊपर बढ़ता है; जड़ स्थिरता, जल और खनिजों के लिए मिट्टी में नीचे बढ़ती है, इसलिए दोनों अनुक्रियाएँ पौधे के लिए उपयोगी हैं — 1 अंक
- अंधेरे में एक ओर से कोई प्रकाश नहीं आता, इसलिए मुड़ना केवल गुरुत्व के प्रति अनुक्रिया हो सकती है, प्रकाश के प्रति नहीं — 1 अंक
प्रश्न 16 (5 अंक)
विकल्प (A) या (B) में से किसी एक का उत्तर दीजिए।
(A) मनुष्य का हृदय ऑक्सीजन-युक्त और ऑक्सीजन-रहित रुधिर को पूरी तरह अलग रखता है।
(i) मानव हृदय का व्यवस्थात्मक काट-दृश्य बनाइए और इनमें से किन्हीं चार को नामांकित कीजिए: दायाँ अलिंद, दायाँ निलय, बायाँ अलिंद, बायाँ निलय, महाधमनी। किस कक्ष की पेशीय भित्ति सबसे मोटी होती है, और क्यों? (3 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
हृदय में चार कक्ष होते हैं: ऊपर दो अलिंद और नीचे दो निलय, तथा दाईं और बाईं ओर के बीच एक भित्ति। बाएँ निलय की पेशीय भित्ति सबसे मोटी होती है। यह ऑक्सीजनित रुधिर को महाधमनी में और आगे शरीर के हर भाग तक पंप करता है, इसलिए इसे रुधिर को सबसे अधिक बल से धकेलना पड़ता है।
अंक योजना:
- चार कक्षों वाले हृदय का सही व्यवस्थात्मक आरेख — 1 अंक
- कोई चार भाग सही नामांकित, प्रत्येक 0.25 (आकृति में: 1 दायाँ अलिंद, 2 दायाँ निलय, 3 बायाँ अलिंद, 4 बायाँ निलय, 5 महाधमनी) — 1 अंक
- बायाँ निलय, क्योंकि उसे रुधिर को शरीर के सभी भागों तक पंप करना होता है — 1 अंक

(ii) दोहरे परिसंचरण से क्या तात्पर्य है? पक्षियों और स्तनधारियों के लिए ऑक्सीजनित और विऑक्सीजनित रुधिर का आपस में न मिलना क्यों महत्वपूर्ण है? (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
दोहरे परिसंचरण का अर्थ है कि प्रत्येक चक्कर में रुधिर हृदय से दो बार गुज़रता है। शरीर से आया विऑक्सीजनित रुधिर दाएँ अलिंद में आता है, दाएँ निलय में जाता है और फुफ्फुसों को पंप किया जाता है। ऑक्सीजनित रुधिर बाएँ अलिंद में लौटता है, बाएँ निलय में जाता है और शेष शरीर को पंप किया जाता है। क्योंकि दोनों प्रकार का रुधिर कभी नहीं मिलता, शरीर को ऑक्सीजन से पूरी तरह भरा रुधिर मिलता है। पक्षी और स्तनधारी नियततापी होते हैं: वे शरीर का ताप स्थिर रखने के लिए बहुत भोजन जलाते हैं, इसलिए उन्हें ऑक्सीजन की यह दक्ष आपूर्ति चाहिए।
अंक योजना:
- एक पूरे चक्र में रुधिर हृदय से दो बार गुज़रता है: दाईं ओर से फुफ्फुसों तक और वापस (फुफ्फुसीय), फिर बाईं ओर से शरीर तक और वापस (दैहिक) — 1 अंक
- दोनों प्रकार के रुधिर को अलग रखने से शरीर को ऑक्सीजन की अत्यंत दक्ष आपूर्ति होती है; पक्षियों और स्तनधारियों को इसकी आवश्यकता है क्योंकि वे अपने शरीर का ताप स्थिर रखने में बहुत ऊर्जा खर्च करते हैं — 1 अंक
अथवा
(B) हरप्रीत ने गमले में लगे गुलमेहंदी के पौधे के पत्तीदार प्ररोह को एक पारदर्शी पॉलीथीन की थैली से ढककर तने के आधार पर बाँध दिया, ताकि मिट्टी थैली के बाहर रहे। उसने गमले को धूप में रखा। कुछ घंटों बाद थैली की भीतरी सतह पर जल की बूँदें दिखाई दीं।
(i) उस प्रक्रम का नाम लिखिए जिससे बूँदें बनीं। उसने मिट्टी को थैली के बाहर क्यों रखा? समझाइए कि यह प्रक्रम किसी ऊँचे पेड़ की चोटी तक जल चढ़ाने में कैसे सहायता करता है, और पौधे के लिए इस प्रक्रम का एक अन्य उपयोग बताइए। (3 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
बूँदें वाष्पोत्सर्जन से बनीं, यानी पौधे के वायवीय भागों से, मुख्यतः पत्तियों के रंध्रों से, जलवाष्प की हानि। मिट्टी को थैली के बाहर रखा गया ताकि जल गीली मिट्टी से न आ सके; उसे पत्तियों से ही आना था। जब पत्तियों से जल वाष्पित होता है, तो पत्ती के जाइलम का जल उसकी जगह ले लेता है। इससे एक चूषण बनता है जो जड़ों से लेकर ऊपर तक जाइलम के अटूट जल-स्तंभ को खींचता है। दिन के समय यही वाष्पोत्सर्जन कर्षण ऊँचे पेड़ की चोटी तक जल पहुँचाने वाला मुख्य बल है। वाष्पोत्सर्जन पौधे को मिट्टी से जल और खनिज लेने में और अपना ताप कम रखने में भी सहायता करता है।
अंक योजना:
- वाष्पोत्सर्जन (0.5); मिट्टी बाहर रखी गई ताकि इकट्ठा हुआ जल केवल पत्तियों से आया हो, नम मिट्टी के वाष्पन से नहीं (0.5) — 1 अंक
- पत्तियों से रंध्रों द्वारा निकले जल की पूर्ति पत्ती के जाइलम के जल से होती है; इससे एक चूषण (वाष्पोत्सर्जन कर्षण) बनता है जो जड़ों से जाइलम के अटूट जल-स्तंभ को ऊपर खींचता है — 1 अंक
- कोई एक: यह जड़ों से पत्तियों तक जल और घुले हुए खनिजों के अवशोषण तथा ऊपर की ओर गति में सहायता करता है; यह ताप नियंत्रण में सहायता करता है — 1 अंक
(ii) फ्लोएम में भोजन के परिवहन (स्थानांतरण) और जाइलम में जल के परिवहन के बीच दो अंतर लिखिए। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
पहला, दिशा और पदार्थ अलग हैं। फ्लोएम पत्तियों में बने भोजन, जैसे सुक्रोज़ और ऐमीनो अम्ल, को जड़ों, फलों, बीजों और वृद्धि वाले भागों तक ले जाता है, इसलिए यह ऊपर और नीचे दोनों ओर चलता है। जाइलम जल और खनिजों को केवल जड़ों से ऊपर की ओर ले जाता है। दूसरा, स्थानांतरण में ऊर्जा लगती है: सुक्रोज़ ATP की ऊर्जा से फ्लोएम में भेजा जाता है, जिससे वहाँ दाब बढ़ता है और भोजन आगे धकेला जाता है। जाइलम में जल वाष्पोत्सर्जन कर्षण और मूल दाब जैसे भौतिक बलों से ऊपर चढ़ता है, और पौधे को इसके लिए ATP खर्च नहीं करना पड़ता।
अंक योजना:
- फ्लोएम सुक्रोज़ और ऐमीनो अम्ल जैसे भोजन को पत्तियों से अन्य भागों तक ऊपर और नीचे दोनों ओर ले जाता है; जाइलम जल और खनिजों को जड़ों से केवल ऊपर की ओर ले जाता है — 1 अंक
- स्थानांतरण में ATP की ऊर्जा लगती है (सुक्रोज़ सक्रिय रूप से फ्लोएम में भेजा जाता है); जाइलम में जल वाष्पोत्सर्जन कर्षण और मूल दाब जैसे भौतिक बलों से चलता है — 1 अंक
खण्ड ख – रसायन विज्ञान (25 अंक)
प्रश्न 25 (2 अंक)
निम्नलिखित के उत्तर दीजिए:
(a) कार्बन डाइऑक्साइड, , के अणु की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना बनाइए। (परमाणु संख्या: C = 6, O = 8) (1 अंक)
उत्तर।
- सही संरचना: कार्बन परमाणु और प्रत्येक ऑक्सीजन परमाणु के बीच इलेक्ट्रॉनों के दो साझा युग्म, और प्रत्येक ऑक्सीजन परमाणु पर दो एकाकी युग्म — 1 अंक

(b) शुष्क बर्फ़ (ठोस कार्बन डाइऑक्साइड) विद्युत का चालन नहीं करती, परंतु सोडा वाटर, जो दाब पर जल में घुली कार्बन डाइऑक्साइड है, थोड़ा चालन करता है। दोनों प्रेक्षणों की व्याख्या कीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- शुष्क बर्फ़ में परमाणु सहसंयोजी आबंधों (साझा इलेक्ट्रॉनों) से जुड़े हैं, इसलिए धारा ले जाने के लिए कोई आयन नहीं होते — 0.5 अंक
- जल में कार्बन डाइऑक्साइड कार्बोनिक अम्ल बनाती है, जो दुर्बल अम्ल है और कुछ हाइड्रोजन आयन देता है, इसलिए विलयन थोड़ा ही चालन करता है — 0.5 अंक
प्रश्न 26 (3 अंक)
विकल्प (A) या (B) में से किसी एक का उत्तर दीजिए।
(A) सोनल ने थोड़े-से परिशुद्ध एथेनॉल वाली परखनली में सोडियम का एक छोटा टुकड़ा डाला।
(i) अभिक्रिया का संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए और बनने वाले कार्बनिक उत्पाद का नाम बताइए। (1 अंक)
उत्तर।
- (0.5); सोडियम एथॉक्साइड (0.5) — 1 अंक
(ii) वह निकलने वाली गैस का परीक्षण कैसे कर सकती है? (1 अंक)
उत्तर।
- परखनली के मुँह के पास जलती हुई तीली लाने पर गैस 'पॉप' ध्वनि के साथ जलती है, जिससे पता चलता है कि यह हाइड्रोजन है — 1 अंक
(iii) एथेनॉल का उपयोग ईंधन के रूप में भी होता है। इसके पूर्ण दहन का संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए, और बताइए कि यह कैसी ज्वाला देता है। (1 अंक)
उत्तर।
- (0.5); स्वच्छ नीली ज्वाला (0.5) — 1 अंक
अथवा
(B) सोनल ने एक परखनली में 1 mL एथेनॉल और 1 mL ग्लेशियल एथेनॉइक अम्ल लिया, उसमें सांद्र सल्फ़्यूरिक अम्ल की कुछ बूँदें डालीं और परखनली को पाँच मिनट तक जल-ऊष्मक में गर्म किया। फिर उसने मिश्रण को जल से भरे एक बीकर में उँडेल दिया।
(i) सोनल ने क्या बनाया है? इसके बनने का समीकरण, कार्बनिक उत्पाद का नाम और उस यौगिक-वर्ग का नाम बताइए जिससे यह संबंधित है। (1 अंक)
उत्तर।
- (अम्ल की उपस्थिति में) (0.5); एथिल एथेनॉएट, एक एस्टर (0.5) — 1 अंक
(ii) मिश्रण को जल में उँडेलने के बाद सोनल कैसे जान सकती है कि उत्पाद बन गया है? सल्फ़्यूरिक अम्ल का क्या कार्य है? (1 अंक)
उत्तर।
- मीठी, फल जैसी गंध आती है (0.5); सल्फ़्यूरिक अम्ल उत्प्रेरक का कार्य करता है (0.5) — 1 अंक
(iii) उसकी सहेली कहती है, "यह तो बस उदासीनीकरण है, जैसे किसी अम्ल की सोडियम हाइड्रॉक्साइड से अभिक्रिया, क्योंकि एथेनॉल एक क्षारक है।" क्या सहेली सही है? कारण दीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- नहीं (0.5); एथेनॉल क्षारक नहीं है: यह हाइड्रॉक्साइड आयन नहीं देता और लाल लिटमस को नीला नहीं करता, और उत्पाद लवण नहीं बल्कि एस्टर है; यह एस्टरीकरण है, जिसके लिए अम्ल उत्प्रेरक चाहिए (0.5) — 1 अंक
प्रश्न 27 (3 अंक)
तान्या ने तीन परखनलियों में विलयनों के निम्नलिखित जोड़े मिलाए:
P: सिल्वर नाइट्रेट विलयन और सोडियम क्लोराइड विलयन
Q: कॉपर सल्फेट विलयन और सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन
R: पोटैशियम नाइट्रेट विलयन और सोडियम क्लोराइड विलयन
(a) परखनली P में अवक्षेप बनता है। संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए और अवक्षेप का रंग तथा नाम बताइए। (1 अंक)
उत्तर।
- (0.5); सिल्वर क्लोराइड का सफ़ेद अवक्षेप (0.5) — 1 अंक
(b) परखनली Q में भी अवक्षेप बनता है। संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए और अवक्षेप का रंग तथा नाम बताइए। (1 अंक)
उत्तर।
- (0.5); कॉपर(II) हाइड्रॉक्साइड का नीला अवक्षेप (0.5) — 1 अंक
(c) परखनली R का मिश्रण साफ़ रहता है। अवक्षेप क्यों नहीं बनता? P और Q में हुई अभिक्रिया का प्रकार बताइए। (1 अंक)
उत्तर।
- जो लवण बन सकते हैं, पोटैशियम क्लोराइड और सोडियम नाइट्रेट, दोनों जल में विलेय हैं, इसलिए कोई अविलेय उत्पाद अलग नहीं होता (0.5); P और Q द्विविस्थापन (अवक्षेपण) अभिक्रियाएँ हैं (0.5) — 1 अंक
प्रश्न 28 (4 अंक)
छुट्टियों में रूपा ने कोलकाता में अपने चाचा की बेकरी में हाथ बँटाया, जहाँ केक को मुलायम और स्पंजी बनाने के लिए बेकिंग सोडा का उपयोग होता है। घर पर उसकी माँ चिकने बर्तनों को ऐसे गर्म पानी से साफ़ करती हैं जिसमें धोने का सोडा घुला हो। उसी सप्ताह रूपा के भाई की कलाई की हड्डी टूट गई। अस्पताल के प्लास्टर कक्ष में कलाई पर एक पट्टी लपेटी गई, जिस पर पानी में मिलाया गया एक सफ़ेद चूर्ण लगा था, और यह कुछ ही मिनटों में कठोर होकर जम गया। यह सफ़ेद चूर्ण प्लास्टर ऑफ़ पेरिस, , है।
(a) केक को कौन-सी गैस फुलाती है? बेकिंग सोडा को गर्म करने पर यह गैस देने वाली अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण लिखिए। (1 अंक)
उत्तर।
- कार्बन डाइऑक्साइड — 0.5 अंक
- — 0.5 अंक
(b) धोने के सोडे के विलयन का pH 7 से अधिक होगा या कम? जिस अम्ल और क्षारक से धोने का सोडा बनता है, उसके आधार पर कारण दीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- 7 से अधिक (क्षारीय) — 0.5 अंक
- धोने का सोडा (सोडियम कार्बोनेट) प्रबल क्षारक, सोडियम हाइड्रॉक्साइड, और दुर्बल अम्ल, कार्बोनिक अम्ल, का लवण है — 0.5 अंक
(c) प्लास्टर ऑफ़ पेरिस के सूत्र में '' क्या दर्शाता है? प्लास्टर ऑफ़ पेरिस जिप्सम को लगभग 373 K पर सावधानी से गर्म करके बनाया जाता है। एक खेप गलती से कहीं अधिक प्रबलता से गर्म हो गई, और उससे मिला चूर्ण पानी में मिलाने पर बिल्कुल नहीं जमा। कारण बताइए, और अच्छे प्लास्टर ऑफ़ पेरिस के जमने का रासायनिक समीकरण लिखिए। (2 अंक)
उत्तर।
- यह क्रिस्टलन जल है: लवण की एक सूत्र इकाई में उपस्थित जल के अणुओं की निश्चित संख्या; यहाँ कैल्सियम सल्फेट की दो सूत्र इकाइयाँ जल का एक अणु साझा करती हैं — 1 अंक
- प्रबल तापन से क्रिस्टलन का सारा जल निकल गया और निर्जल कैल्सियम सल्फेट बचा, जो जल लेकर नहीं जमता (0.5); (0.5) — 1 अंक
अथवा
(c) रूपा के चाचा केवल बेकिंग सोडा के स्थान पर बेकिंग पाउडर का उपयोग करते हैं, जो बेकिंग सोडा और टार्टरिक अम्ल जैसे किसी मृदु खाद्य अम्ल का मिश्रण है। केवल बेकिंग सोडा उपयोग करने पर क्या गड़बड़ होगी? अम्ल इसे कैसे रोकता है? (2 अंक)
उत्तर।
- गर्म करने पर केवल बेकिंग सोडा से सोडियम कार्बोनेट बचा रह जाता है, जिससे केक का स्वाद कड़वा हो जाता है — 1 अंक
- अम्ल बेकिंग सोडा से अभिक्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड (जो केक को फिर भी फुलाती है) और अम्ल का सोडियम लवण बनाता है, इसलिए सोडियम कार्बोनेट नहीं बचता — 1 अंक
प्रश्न 29 (5 अंक)
विकल्प (A) या (B) में से किसी एक का उत्तर दीजिए।
(A) आयनिक यौगिक धातु से अधातु में इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से बनते हैं।
(i) सोडियम (परमाणु संख्या 11), क्लोरीन (17), मैग्नीशियम (12) और ऑक्सीजन (8) के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचनाओं का उपयोग करके इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण द्वारा सोडियम क्लोराइड और मैग्नीशियम ऑक्साइड का बनना दर्शाइए। (3 अंक)
उत्तर।
- Na 2, 8, 1; Cl 2, 8, 7; Mg 2, 8, 2; O 2, 6 — 1 अंक
- NaCl: सोडियम अपना एक बाहरी इलेक्ट्रॉन क्लोरीन को देता है, जिससे और आयन बनते हैं (0.5 + 0.5) — 1 अंक
- MgO: मैग्नीशियम अपने दो बाहरी इलेक्ट्रॉन ऑक्सीजन को देता है, जिससे और आयन बनते हैं (0.5 + 0.5) — 1 अंक

(ii) तालिका में चार पदार्थों W, X, Y और Z के गलनांक और क्वथनांक दिए गए हैं।
| पदार्थ | गलनांक (°C) | क्वथनांक (°C) |
|---|---|---|
| W | 801 | 1413 |
| X | −182 | −162 |
| Y | 2852 | 3600 |
| Z | −114 | 78 |
इनमें से कौन-से दो पदार्थ आयनिक यौगिक होने की संभावना है? कारण दीजिए। कमरे के ताप (25 °C) पर कौन-सा पदार्थ द्रव है? (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
W और Y के आयनिक यौगिक होने की संभावना है। इनके गलनांक और क्वथनांक बहुत ऊँचे हैं। आयनिक यौगिक में धन और ऋण आयन एक-दूसरे को प्रबलता से आकर्षित करते हैं, और इस आकर्षण को तोड़ने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा चाहिए, इसलिए आयनिक यौगिक ऊँचे ताप पर ही पिघलते और उबलते हैं। X और Z कम ताप पर पिघलते और उबलते हैं, जो सहसंयोजी यौगिकों की पहचान है। Z कमरे के ताप पर द्रव है: 25 °C इसके गलनांक −114 °C से ऊपर है, इसलिए यह ठोस नहीं रहता, पर इसके क्वथनांक 78 °C से नीचे है, इसलिए यह गैस नहीं बना। (X कमरे के ताप पर गैस है।)
अंक योजना:
- W और Y (0.5); इनके गलनांक और क्वथनांक बहुत ऊँचे हैं, क्योंकि विपरीत आवेशित आयनों के बीच के प्रबल आकर्षण बल को तोड़ने में बहुत ऊर्जा लगती है (0.5) — 1 अंक
- Z, क्योंकि 25 °C इसके गलनांक (−114 °C) और क्वथनांक (78 °C) के बीच है — 1 अंक
अथवा
(B) कविता की शिक्षिका ने उसे तीन धातुओं P, Q और R के बारे में ये प्रेक्षण दिए, और उससे यह तय करने को कहा कि प्रत्येक धातु उसके यौगिकों से कैसे प्राप्त की जा सकती है।
| परीक्षण | P | Q | R |
|---|---|---|---|
| एक छोटा टुकड़ा ठंडे जल में डाला जाता है | तीव्र अभिक्रिया; हाइड्रोजन निकलती है | कोई अभिक्रिया नहीं | कोई अभिक्रिया नहीं |
| एक छोटा टुकड़ा तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में डाला जाता है | नहीं किया गया (बहुत खतरनाक) | हाइड्रोजन के बुलबुले | कोई अभिक्रिया नहीं |
| इसके ऑक्साइड को कार्बन के साथ प्रबलता से गर्म किया जाता है | कोई परिवर्तन नहीं | धातु बनती है | धातु बनती है |
(i) तालिका के प्रमाणों का उपयोग करके P, Q और R को अभिक्रियाशीलता के घटते क्रम में लिखिए। इनमें से कौन-सी धातु प्रकृति में मुक्त अवस्था में भी पाई जा सकती है? P को उसके यौगिकों से कैसे प्राप्त करना चाहिए, और इसके लिए कार्बन का उपयोग क्यों नहीं किया जा सकता? (3 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
अभिक्रियाशीलता का क्रम P > Q > R है। P सबसे अधिक अभिक्रियाशील है, क्योंकि यह ठंडे जल से भी तीव्र अभिक्रिया करती है। Q जल से अभिक्रिया नहीं करती, पर तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से हाइड्रोजन देती है, इसलिए यह हाइड्रोजन से अधिक अभिक्रियाशील है। R किसी से भी अभिक्रिया नहीं करती, इसलिए यह सबसे कम अभिक्रियाशील है। R ही मुक्त अवस्था में पाई जा सकती है, क्योंकि इतनी कम अभिक्रियाशील धातु पर वायु, जल या अम्लों का मुश्किल से प्रभाव पड़ता है। P इतनी अभिक्रियाशील है कि कार्बन इसके ऑक्साइड से ऑक्सीजन नहीं हटा सकता, जैसा तालिका दिखाती है: P ऑक्सीजन को कार्बन से अधिक प्रबलता से पकड़े रखती है। इसलिए P को इसके गलित क्लोराइड के विद्युत अपघटन द्वारा प्राप्त करना होगा, और धातु कैथोड पर इकट्ठा होती है।
अंक योजना:
- P > Q > R (0.5); P ठंडे जल से भी अभिक्रिया करती है, Q जल से अभिक्रिया नहीं करती पर तनु अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित करती है, और R इनमें से कुछ नहीं करती (0.5) — 1 अंक
- R (0.5), क्योंकि यह सबसे कम अभिक्रियाशील है और वायु, जल या अम्लों से मुश्किल से प्रभावित होती है (0.5) — 1 अंक
- इसके गलित क्लोराइड के विद्युत अपघटन द्वारा (0.5); P कार्बन से अधिक अभिक्रियाशील है (यह ऑक्सीजन को अधिक प्रबलता से पकड़े रखती है), इसलिए कार्बन इसके ऑक्साइड से ऑक्सीजन नहीं हटा सकता, जैसा तालिका दिखाती है (0.5) — 1 अंक
(ii) अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुओं का उपयोग अपचायक के रूप में भी किया जा सकता है।
(I) कविता Q के ऑक्साइड को चूर्णित P के साथ गर्म करती है। क्या इस तरह उसे धातु Q मिल सकती है? कारण दीजिए।
(II) मैंगनीज़ डाइऑक्साइड को ऐलुमिनियम चूर्ण के साथ गर्म करके मैंगनीज़ प्राप्त किया जाता है। अभिक्रिया का संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए और अपचायक का नाम बताइए। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
(I) हाँ। P, Q से अधिक अभिक्रियाशील है, इसलिए दोनों को साथ गर्म करने पर P, Q के ऑक्साइड से ऑक्सीजन ले लेती है। P का ऑक्साइड बनता है और धातु Q मुक्त हो जाती है। यहाँ P अपचायक का कार्य करती है। (II) । ऐलुमिनियम, मैंगनीज़ से अधिक अभिक्रियाशील है, इसलिए यह मैंगनीज़ डाइऑक्साइड से ऑक्सीजन हटा देता है। ऐलुमिनियम उपचयित होकर ऐलुमिनियम ऑक्साइड बनता है, इसलिए यह अपचायक है, और मैंगनीज़ डाइऑक्साइड अपचयित होकर मैंगनीज़ बनता है।
अंक योजना:
- (I) हाँ (0.5); P, Q से अधिक अभिक्रियाशील है, इसलिए यह Q के ऑक्साइड से ऑक्सीजन ले लेती है और Q को मुक्त कर देती है (0.5) — 1 अंक
- (II) (0.5); ऐलुमिनियम अपचायक है (0.5) — 1 अंक
खण्ड ग – भौतिक विज्ञान (25 अंक)
प्रश्न 33 (2 अंक)
वायु के सापेक्ष जल का अपवर्तनांक और एक विशेष प्रकार के काँच का अपवर्तनांक है।
(a) जल के सापेक्ष इस काँच का अपवर्तनांक ज्ञात कीजिए। दोनों में से कौन प्रकाशतः सघन है? (1 अंक)
उत्तर।
- (0.5); काँच जल से प्रकाशतः सघन है (0.5) — 1 अंक
(b) जल में चल रही प्रकाश की एक किरण काँच की सतह पर इस प्रकार पड़ती है कि है। स्नेल के नियम का उपयोग करके काँच में ज्ञात कीजिए। किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है या उससे दूर? (1 अंक)
उत्तर।
- — 0.5 अंक
- क्योंकि sin r, sin i से छोटा है, अपवर्तन कोण छोटा है: किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है — 0.5 अंक
प्रश्न 34 (2 अंक)
विकल्प (A) या (B) में से किसी एक का उत्तर दीजिए।
(A) टॉर्च का एक बल्ब 4.5 V की बैटरी से जोड़ने पर 0.3 A धारा लेता है। मान लीजिए कि इसका प्रतिरोध नहीं बदलता।
(I) यदि इसे इसके बजाय 6 V की बैटरी से जोड़ा जाए, तो यह कितनी धारा लेगा? (1 अंक)
उत्तर।
- Ω — 0.5 अंक
- A — 0.5 अंक
(II) 6 V की बैटरी पर बल्ब अधिक चमकेगा या कम? दोनों स्थितियों में शक्ति की तुलना करके उत्तर की पुष्टि कीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- W; W — 0.5 अंक
- तंतु में अधिक शक्ति व्यय होती है, इसलिए यह अधिक चमकता है (और जल्दी फ़्यूज़ हो सकता है) — 0.5 अंक
अथवा
(B) तार P और Q दोनों ताँबे के बने हैं। तार Q की लंबाई तार P से दोगुनी है और उसका व्यास भी P का दोगुना है।
(I) Q के प्रतिरोध और P के प्रतिरोध का अनुपात ज्ञात कीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- और क्षेत्रफल व्यास के वर्ग पर निर्भर करता है, अतः — 1 अंक
(II) प्रत्येक तार के सिरों पर बारी-बारी से समान विभवांतर लगाया जाता है। कौन-सा तार अधिक धारा ले जाता है, और वह कितने गुनी अधिक है? (1 अंक)
उत्तर।
- तार Q (0.5); इसका प्रतिरोध आधा है, इसलिए यह दोगुनी धारा ले जाता है (0.5) — 1 अंक
प्रश्न 35 (3 अंक)
कक्षा 7 की छात्रा आयशा दूर की वस्तुएँ स्पष्ट देखती है, पर जब वह अपनी किताब को पढ़ने की सामान्य दूरी 25 cm पर रखती है, तो शब्द धुँधले दिखते हैं। नेत्र चिकित्सक बताते हैं कि उसे दूर-दृष्टि दोष है।
(a) इस दोष के दो संभावित कारण लिखिए। (1 अंक)
उत्तर।
- नेत्र लेंस की फोकस दूरी बहुत अधिक हो जाना (0.5); नेत्र गोलक का बहुत छोटा हो जाना (0.5) — 1 अंक
(b) किरण आरेख बनाकर दर्शाइए कि (i) सामान्य निकट-बिंदु N पर रखी किताब का प्रतिबिंब आयशा के नेत्र में कहाँ बनता है, और (ii) सही चश्मे का लेंस उसे स्पष्ट पढ़ने में कैसे सहायता करता है। (ii) में उसके नेत्र का निकट-बिंदु N′ अंकित कीजिए। (2 अंक)
उत्तर।
- (i) N से आने वाली किरणें दृष्टिपटल के पीछे मिलती हैं, इसलिए दृष्टिपटल पर प्रतिबिंब धुँधला होता है — 1 अंक
- (ii) नेत्र के आगे रखा उत्तल लेंस N से आने वाली किरणों को इस प्रकार मोड़ता है कि वे N′ से आती प्रतीत होती हैं; फिर नेत्र लेंस उन्हें दृष्टिपटल पर फोकसित करता है — 1 अंक

प्रश्न 36 (3 अंक)
निम्नलिखित के उत्तर दीजिए:
(a) विद्यालय की प्रयोगशाला में पानी से भरे बीकर में डूबी प्रतिरोध तार की एक कुंडली का उपयोग छोटे निमज्जन तापक के रूप में किया जाता है। समय समान रखते हुए उसी कुंडली से धारा दोगुनी करने पर आसिफ़ कहता है कि उत्पन्न ऊष्मा दोगुनी हो जाएगी। क्या वह सही है? पुष्टि कीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- नहीं: , अतः धारा दोगुनी करने पर ऊष्मा 2 गुनी नहीं, गुनी हो जाती है — 1 अंक
(b) फ़रहान विज्ञान मेले के लिए एक छोटा टोस्टर बना रहा है। वह इसकी तापन कुंडली ताँबे के तार से लपेटना चाहता है, "क्योंकि ताँबा विद्युत का बहुत अच्छा चालक है"। क्या यह अच्छा चुनाव है? दो कारण दीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- नहीं। ताँबे की प्रतिरोधकता बहुत कम है, इसलिए सामान्य आकार की कुंडली का प्रतिरोध इतना कम होगा कि पर्याप्त ऊष्मा उत्पन्न नहीं होगी (यह बहुत अधिक धारा लेगी); नाइक्रोम जैसी मिश्रातु की प्रतिरोधकता कहीं अधिक होती है — 0.5 अंक
- रक्त-तप्त ताँबा जल्दी उपचयित हो जाता है (जल जाता है), इसलिए कुंडली जल्दी टूट जाएगी; नाइक्रोम ऊँचे ताप पर आसानी से उपचयित नहीं होता — 0.5 अंक
(c) फिर फ़रहान सुझाव देता है कि घर की वायरिंग नाइक्रोम के तार से की जाए, "ताकि तार कभी न पिघलें"। इसमें क्या गड़बड़ होगी? इसके बजाय ताँबे के तार क्यों प्रयुक्त होते हैं? (1 अंक)
उत्तर।
- नाइक्रोम की उच्च प्रतिरोधकता के कारण तार स्वयं गर्म हो जाएँगे, जिससे ऊर्जा व्यर्थ होगी और आग का खतरा रहेगा, तथा उपकरणों तक कम विभवांतर पहुँचेगा (0.5); ताँबे की प्रतिरोधकता बहुत कम है, इसलिए संयोजी तार ठंडे रहते हैं और बहुत कम ऊर्जा व्यर्थ होती है (0.5) — 1 अंक
प्रश्न 37 (3 अंक)
मोहित ने भौतिकी प्रयोगशाला में एक बोर्ड पर दिखाया गया परिपथ बनाया। कुंजी K बंद है।

(a) कौन-सा एक प्रतिरोधक बैटरी की धारा बदले बिना तीनों का स्थान ले सकता है? 3 Ω प्रतिरोधक से कितनी धारा बहती है? (1 अंक)
उत्तर।
- , अतः Ω; कुल Ω, अर्थात् 6 Ω का एक प्रतिरोधक — 0.5 अंक
- A, और यह पूरी धारा 3 Ω प्रतिरोधक से बहती है — 0.5 अंक
(b) भाग XY के सिरों के बीच विभवांतर कितना है? बैटरी की धारा 4 Ω और 12 Ω प्रतिरोधकों में किस प्रकार बँटती है? (1 अंक)
उत्तर।
- V — 0.5 अंक
- 4 Ω से A और 12 Ω से A — 0.5 अंक
(c) मोहित कहता है, "12 Ω प्रतिरोधक हर सेकंड सबसे अधिक ऊष्मा उत्पन्न करेगा, क्योंकि उसका प्रतिरोध सबसे अधिक है।" क्या वह सही है? प्रत्येक प्रतिरोधक में शक्ति ज्ञात करके पुष्टि कीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- : 3 Ω: W; 4 Ω: W; 12 Ω: W — 0.5 अंक
- नहीं: पूरी धारा ले जाने वाला 3 Ω प्रतिरोधक सबसे अधिक ऊष्मा उत्पन्न करता है; 12 Ω प्रतिरोधक सबसे कम, क्योंकि उससे बहुत कम धारा बहती है — 0.5 अंक
प्रश्न 38 (4 अंक)
पंजाब का मंडी गोबिंदगढ़ अपनी स्टील री-रोलिंग मिलों के लिए जाना जाता है। वहाँ के एक कबाड़ यार्ड में एक क्रेन एक बड़े विद्युत चुंबक से लोहे का भारी कबाड़ उठाती है: नर्म लोहे के क्रोड पर लिपटी विद्युतरोधी ताँबे के मोटे तार की एक कुंडली। जब संचालिका धारा चालू करती है, तो चुंबक लोहे के कबाड़ का ढेर उठा लेता है; जब वह धारा बंद करती है, तो ढेर गिर जाता है। उसी ढेर में पड़े ऐलुमिनियम के डिब्बे और ताँबे के तार के टुकड़े पीछे छूट जाते हैं।
(a) क्रोड नर्म लोहे का क्यों बनाया जाता है, स्टील का क्यों नहीं? (1 अंक)
उत्तर।
- धारा बहने तक नर्म लोहा प्रबल चुंबक बन जाता है और धारा बंद होते ही लगभग तुरंत अपना चुंबकत्व खो देता है, इसलिए कबाड़ गिराया जा सकता है; स्टील चुंबकित बना रहता — 1 अंक
(b) ऐलुमिनियम के डिब्बे और ताँबे के तार क्यों नहीं उठते? (1 अंक)
उत्तर।
- ऐलुमिनियम और ताँबा चुंबकीय पदार्थ नहीं हैं, इसलिए चुंबक उन्हें आकर्षित नहीं करता — 1 अंक
(c) क्रेन से अधिक भारी बोझ उठाने के दो उपाय सुझाइए। कुंडली में धारा की दिशा उलटने पर विद्युत चुंबक के ध्रुवों का क्या होगा? क्या यह तब भी लोहे का कबाड़ उठाएगा? (2 अंक)
उत्तर।
- कोई दो: कुंडली में धारा बढ़ाना; कुंडली में फेरों की संख्या बढ़ाना; नर्म लोहे का बड़ा (मोटा) क्रोड लगाना (प्रत्येक 0.5) — 1 अंक
- ध्रुव आपस में बदल जाते हैं (0.5); यह फिर भी कबाड़ उठाता है, क्योंकि लोहा किसी भी ध्रुव की ओर आकर्षित होता है (0.5) — 1 अंक
अथवा
(c) विद्युत चुंबक के निचले फलक को नीचे से देखने पर संचालिका को कुंडली में धारा दक्षिणावर्त बहती दिखती है। दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम से ज्ञात कीजिए कि यह फलक उत्तरी ध्रुव है या दक्षिणी। कुंडली एक फेरे के बजाय अनेक फेरों की क्यों बनाई जाती है? (2 अंक)
उत्तर।
- कुंडली के अंदर क्षेत्र की दिशा ऊपर की ओर, देखने वाले से दूर है, इसलिए क्षेत्र रेखाएँ निचले फलक पर प्रवेश करती हैं: यह दक्षिणी ध्रुव है — 1 अंक
- प्रत्येक फेरे से उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र जुड़ते जाते हैं, इसलिए अनेक फेरों वाली कुंडली एक फेरे की तुलना में कहीं अधिक प्रबल क्षेत्र देती है — 1 अंक
प्रश्न 39 (5 अंक)
विकल्प (A) या (B) में से किसी एक का उत्तर दीजिए।
(A) भौतिकी प्रयोगशाला में स्वाति 15 cm फोकस दूरी वाले एक अवतल दर्पण के सामने 20 cm पर एक छोटी मोमबत्ती रखती है और एक पर्दे को तब तक खिसकाती है जब तक उसे ज्वाला का स्पष्ट प्रतिबिंब नहीं मिल जाता।
(i) पर्दा कहाँ रखना होगा? (1 अंक)
उत्तर।
- cm, cm; , अतः cm: दर्पण के सामने 60 cm पर — 1 अंक
(ii) आवर्धन निकालिए। प्रतिबिंब वास्तविक है या आभासी, सीधा है या उल्टा, बड़ा है या छोटा? (1 अंक)
उत्तर।
- — 0.5 अंक
- वास्तविक, उल्टा और तीन गुना बड़ा — 0.5 अंक
(iii) दैनिक जीवन में अवतल दर्पणों के दो उपयोग लिखिए। (1 अंक)
उत्तर।
- कोई दो: टॉर्च, वाहनों की हेडलाइट और सर्चलाइट में परावर्तक के रूप में; दाढ़ी बनाने या शृंगार के दर्पण के रूप में; दंत चिकित्सक के दर्पण के रूप में; सौर भट्टियों में सूर्य के प्रकाश को केंद्रित करने के लिए (प्रत्येक 0.5) — 1 अंक
(iv) ज्वाला के शीर्ष से आने वाली दो किरणों की सहायता से किरण आरेख बनाकर दर्शाइए कि दर्पण प्रतिबिंब कहाँ बनाता है। (2 अंक)
उत्तर।
- शीर्ष से आने वाली कोई दो मानक किरणें, सही परावर्तित (0.5 + 0.5): मुख्य अक्ष के समांतर किरण परावर्तन के बाद F से गुज़रती है; F से होकर आने वाली किरण अक्ष के समांतर परावर्तित होती है; C से होकर आने वाली किरण उसी पथ पर लौट आती है; ध्रुव पर पड़ने वाली किरण बराबर कोण पर परावर्तित होती है — 1 अंक
- किरणें C से आगे मिलकर वास्तविक, उल्टा और बड़ा प्रतिबिंब बनाती हैं — 1 अंक

अथवा
(B) 12 cm फोकस दूरी वाला एक उत्तल लेंस अपने सामने 36 cm पर रखी वस्तु का प्रतिबिंब बनाता है।
(i) प्रतिबिंब की स्थिति ज्ञात कीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- , अतः cm, लेंस के दूसरी ओर — 1 अंक
(ii) वस्तु की तुलना में प्रतिबिंब कितना बड़ा है? यह वास्तविक है या आभासी, और सीधा है या उल्टा? आवर्धन का उपयोग कीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- — 0.5 अंक
- वास्तविक, उल्टा और वस्तु का आधा — 0.5 अंक
(iii) लेंस की क्षमता की परिभाषा दीजिए और उसका SI मात्रक लिखिए। एक दूसरे उत्तल लेंस की क्षमता +5 D है। उसकी फोकस दूरी ज्ञात कीजिए, और बताइए कि दोनों में से कौन-सा लेंस प्रकाश को अधिक प्रबलता से अभिसरित करता है। (1 अंक)
उत्तर।
- क्षमता मीटर में व्यक्त फोकस दूरी का व्युत्क्रम है; इसका SI मात्रक डाइऑप्टर (D) है (0.5) — 0.5 अंक
- m cm; 12 cm वाले लेंस की फोकस दूरी कम है, इसलिए वह अधिक प्रबलता से अभिसरित करता है (0.5) — 0.5 अंक
(iv) वस्तु के शीर्ष से आने वाली दो किरणों की सहायता से किरण आरेख बनाकर दर्शाइए कि यह लेंस प्रतिबिंब कहाँ बनाता है। (2 अंक)
उत्तर।
- शीर्ष से आने वाली कोई दो मानक किरणें, सही अपवर्तित (0.5 + 0.5): मुख्य अक्ष के समांतर किरण F2 से गुज़रती है; प्रकाशिक केंद्र से जाने वाली किरण बिना मुड़े सीधी निकलती है; F1 से होकर आने वाली किरण अक्ष के समांतर निकलती है — 1 अंक
- किरणें F2 और 2F2 के बीच मिलकर वास्तविक, उल्टा और छोटा प्रतिबिंब बनाती हैं — 1 अंक
