विस्तृत हल: CBSE कक्षा 10 विज्ञान सैंपल पेपर 2027 – सेट 5
प्रश्न पत्र के सभी लिखित प्रश्न (2, 3, 4 और 5 अंक) यहाँ क्रम से हल किए गए हैं, हर चरण के अंकों के साथ, ताकि आप अपनी उत्तर पुस्तिका परीक्षक की तरह जाँच सकें। जहाँ आंतरिक विकल्प (अथवा) है, वहाँ दोनों विकल्प हल किए गए हैं। 1 अंक वाले प्रश्नों के उत्तर व्याख्या सहित प्रश्न पत्र वाले पृष्ठ की क्विज़ में हैं।
खण्ड क – जीव विज्ञान (30 अंक)
प्रश्न 10 (2 अंक)
सरसों के एक खेत में मधुमक्खियाँ एक पौधे के फूलों से दूसरे पौधों के फूलों तक पराग ले जाती हैं। मटर के फूल में फूल खुलने से पहले ही पराग उसी फूल के वर्तिकाग्र पर गिर जाते हैं। प्रत्येक स्थिति में परागण का प्रकार बताइए, और दोनों के बीच दो अंतर लिखिए।
उत्तर।
- सरसों: परपरागण (0.5); मटर: स्वपरागण (0.5) — 1 अंक
- स्वपरागण: पराग उसी फूल (या उसी पौधे के दूसरे फूल) के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं; परपरागण: पराग दूसरे पौधे के फूल तक पहुँचते हैं (यह भी मान्य: पराग का एक फूल से दूसरे फूल तक स्थानांतरण) (0.5) — 0.5 अंक
- स्वपरागण के लिए किसी बाहरी साधन की आवश्यकता नहीं; परपरागण के लिए कीट, वायु या जल जैसे साधन चाहिए (या: परपरागण से अधिक विभिन्नताएँ आती हैं) (0.5) — 0.5 अंक
प्रश्न 11 (2 अंक)
निम्नलिखित के उत्तर दीजिए:
(a) मूत्र वृक्कों के वृक्काणुओं में बनता है। वृक्काणु से लेकर शरीर से बाहर निकलने तक मूत्र के मार्ग का क्रम बताइए। (1 अंक)
उत्तर।
- वृक्काणु की संग्राहक वाहिनी → मूत्रवाहिनी — 0.5 अंक
- → मूत्राशय → मूत्रमार्ग, जिससे यह बाहर निकलता है — 0.5 अंक
(b) मूत्र लगातार बनता रहता है, फिर भी हम इसे कभी-कभी ही त्यागते हैं और प्रायः कुछ समय तक रोक सकते हैं। समझाइए कि ऐसा कैसे संभव है। (1 अंक)
उत्तर।
- मूत्र बाहर निकलने तक मूत्राशय में संचित रहता है — 0.5 अंक
- मूत्राशय पेशीय होता है और तंत्रिका नियंत्रण में रहता है, इसलिए हम प्रायः मूत्र त्यागने की इच्छा को नियंत्रित कर सकते हैं — 0.5 अंक
प्रश्न 12 (2 अंक)
विकल्प (A) या (B) में से किसी एक का उत्तर दीजिए।
(A) थायरॉक्सिन दिन-रात यह नियंत्रित करता है कि शरीर की हर कोशिका कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा का उपयोग कैसे करे। विद्युत आवेगों की ऐसी दो सीमाएँ बताइए जिनके कारण वे इस कार्य के लिए उपयुक्त नहीं हैं, और समझाइए कि हॉर्मोन इनमें से प्रत्येक को कैसे दूर करता है।
उत्तर।
- विद्युत आवेग केवल उन्हीं कोशिकाओं तक पहुँचते हैं जो तंत्रिका ऊतक से जुड़ी हों (0.5); हॉर्मोन रुधिर में मुक्त होकर शरीर की हर कोशिका तक पहुँचता है (0.5) — 1 अंक
- एक आवेग के बाद कोशिका को अगला आवेग भेजने से पहले फिर से तैयार होने में समय लगता है, इसलिए कोशिकाएँ लगातार आवेग नहीं भेज सकतीं (0.5); हॉर्मोन लंबे समय तक लगातार कार्य कर सकता है (0.5) — 1 अंक
अथवा
(B) किशोरावस्था के आरंभ में लड़के की आवाज़ फटने लगती है और लड़की के स्तन विकसित होने लगते हैं। लड़कों और लड़कियों में इन परिवर्तनों के लिए उत्तरदायी हॉर्मोन और उन्हें बनाने वाली ग्रंथि का नाम लिखिए।
उत्तर।
- लड़के: टेस्टोस्टेरॉन (0.5), जिसे वृषण बनाते हैं (0.5) — 1 अंक
- लड़कियाँ: एस्ट्रोजन (0.5), जिसे अंडाशय बनाते हैं (0.5) — 1 अंक
प्रश्न 13 (3 अंक)
गर्म तवे को छूते ही रिया पलक झपकते अपना हाथ पीछे खींच लेती है, जबकि उसके शरीर के बच्चे से किशोर बनने में वर्षों लगे हैं। पहला कार्य तंत्रिका तंत्र करता है और दूसरा हॉर्मोन।
(a) संदेश किस प्रकार जाता है, इस आधार पर दोनों प्रकार के समन्वय की तुलना कीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- तंत्रिका द्वारा: तंत्रिका तंतुओं से होकर विद्युत आवेगों के रूप में (हर सिनेप्स पर रसायन अंतराल पार करते हैं) — 0.5 अंक
- हॉर्मोन द्वारा: रुधिर द्वारा ले जाए जाने वाले रसायनों (हॉर्मोनों) के रूप में — 0.5 अंक
(b) अनुक्रिया कितनी जल्दी होती है और कितनी देर रहती है, इस आधार पर दोनों की तुलना कीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- तंत्रिका द्वारा: बहुत तीव्र, और प्रायः अल्पकालिक — 0.5 अंक
- हॉर्मोन द्वारा: धीमी, पर प्रभाव बहुत देर तक रहता है — 0.5 अंक
(c) किसी हॉर्मोन का बहुत अधिक या बहुत कम होना शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। मुक्त होने वाले हॉर्मोन की मात्रा सही कैसे रखी जाती है? एक उदाहरण देकर समझाइए। (1 अंक)
उत्तर।
- पुनर्भरण (फ़ीडबैक) क्रियाविधि द्वारा: हॉर्मोन के मुक्त होने का समय और मात्रा उस पदार्थ के स्तर से नियंत्रित होते हैं जिसे वह हॉर्मोन नियंत्रित करता है — 0.5 अंक
- उदाहरण: रुधिर में शर्करा बढ़ने पर अग्न्याशय इसे पहचानकर अधिक इंसुलिन मुक्त करता है; शर्करा का स्तर घटने पर इंसुलिन का स्राव कम हो जाता है — 0.5 अंक
प्रश्न 14 (3 अंक)
चेन्नई की एक आवासीय सोसाइटी के निवासियों ने अपना कचरा दो अलग-अलग डिब्बों में डालना शुरू किया है। एक निवासी को ये वस्तुएँ फेंकनी हैं: सब्ज़ियों के छिलके, प्लास्टिक की टूटी बाल्टी, उपयोग की हुई चायपत्ती, ऐलुमिनियम पन्नी का रैपर, पुराने अख़बार और एक पुरानी बैटरी।
(a) इन वस्तुओं को जैव निम्नीकरणीय और अजैव निम्नीकरणीय कचरे में बाँटिए। (1 अंक)
उत्तर।
- जैव निम्नीकरणीय: सब्ज़ियों के छिलके, उपयोग की हुई चायपत्ती, पुराने अख़बार — 0.5 अंक
- अजैव निम्नीकरणीय: प्लास्टिक की बाल्टी, ऐलुमिनियम पन्नी का रैपर, पुरानी बैटरी — 0.5 अंक
(b) यदि अजैव निम्नीकरणीय कचरे को यों ही फेंक दिया जाए, तो उसके दो हानिकारक प्रभाव लिखिए। (1 अंक)
उत्तर।
- अपघटक इसे नहीं तोड़ पाते, इसलिए यह बहुत लंबे समय तक पर्यावरण में बना रहता है (जैसे नालियाँ रोकता है, मिट्टी को ख़राब करता है) — 0.5 अंक
- यह पारितंत्र के सदस्यों को हानि पहुँचाता है, जैसे प्लास्टिक निगलने वाले पशु, या बैटरी के हानिकारक रसायनों का मिट्टी और जल में रिसना — 0.5 अंक
(c) एक निवासी सुझाव देता है कि छाँटने का झंझट बचाने के लिए सारा कचरा एक साथ पार्क के एक गड्ढे में दबा दिया जाए। क्या आप सहमत हैं? कारण दीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- नहीं (0.5): गड्ढे में केवल जैव निम्नीकरणीय कचरा ही अपघटित होगा; प्लास्टिक, पन्नी और बैटरी वर्षों तक मिट्टी में पड़े रहेंगे और हानिकारक पदार्थ मिट्टी तथा भूजल में रिस सकते हैं (0.5) — 1 अंक
प्रश्न 15 (4 अंक)
नागपुर की विज्ञान शिक्षिका श्रीमती देशपांडे ने यह समझाने के लिए एक मॉडल बनाया कि संतान का लिंग कैसे निर्धारित होता है। उन्होंने 'माँ' लिखी एक थैली में X लिखे 20 कार्ड रखे। 'पिता' लिखी दूसरी थैली में उन्होंने X लिखे 10 कार्ड और Y लिखे 10 कार्ड रखे। विद्यार्थियों के हर समूह ने बिना देखे हर थैली से एक-एक कार्ड निकाला, जोड़ी लिखी, और कार्ड वापस रख दिए। कार्डों की हर जोड़ी एक संतान के लिंग गुणसूत्रों को दर्शाती थी।
(a) एक कार्ड केवल लिंग गुणसूत्र को दर्शाता है। मनुष्य के एक अंड में कुल कितने गुणसूत्र होते हैं, और एक शुक्राणु में कितने? (1 अंक)
उत्तर।
- अंड: 23 गुणसूत्र (0.5); शुक्राणु: 23 गुणसूत्र (0.5) — 1 अंक
(b) 'पिता' वाली थैली में दो प्रकार के कार्ड क्यों हैं, जबकि 'माँ' वाली थैली में केवल एक प्रकार के? इससे यह क्या पता चलता है कि संतान का लिंग कौन तय करता है? (1 अंक)
उत्तर।
- स्त्री में XX होते हैं, अतः उसके सभी अंडों में X होता है; पुरुष में XY होते हैं, अतः उसके आधे शुक्राणुओं में X और आधों में Y होता है — 0.5 अंक
- अतः संतान का लिंग इस पर निर्भर करता है कि किस प्रकार का शुक्राणु अंड को निषेचित करता है, यानी पिता पर — 0.5 अंक
(c) रितिका के समूह ने 40 बार कार्ड निकाले और 17 XX जोड़ियाँ तथा 23 XY जोड़ियाँ पाईं। रितिका कहती है कि मॉडल असफल हो गया, क्योंकि दोनों ठीक 20-20 आनी चाहिए थीं। क्या वह सही है? यदि पूरी कक्षा अपने 400 बार के परिणाम मिला दे, तो आप क्या परिणाम अपेक्षित करेंगे? समझाइए। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
नहीं, रितिका सही नहीं है। माँ की थैली का हर कार्ड X है, और पिता की थैली के आधे कार्ड X तथा आधे Y हैं। अतः हर बार XX (लड़की) या XY (लड़का) आने की संभावना बराबर है, और अपेक्षित अनुपात 1 : 1 है। पर यह केवल संभावना है। केवल 40 बार में संख्याएँ आसानी से 17 और 23 आ सकती हैं, ठीक वैसे ही जैसे 40 बार सिक्का उछालने पर शायद ही कभी ठीक 20 बार चित आता है। यदि कक्षा 400 बार के परिणाम मिलाए, तो संख्याएँ 200 XX और 200 XY के बहुत निकट आनी चाहिए। इसीलिए परिवारों में भी लड़के और लड़कियाँ हमेशा बराबर संख्या में नहीं होते।
अंक योजना:
- अपेक्षित अनुपात XX : XY = 1 : 1, क्योंकि पिता की थैली से हर बार X कार्ड आने की 50 प्रतिशत और Y कार्ड आने की 50 प्रतिशत संभावना है — 1 अंक
- वह सही नहीं है: थोड़ी बार निकालने पर संयोग से संख्याएँ केवल लगभग बराबर आती हैं; 400 बार में परिणाम 200 : 200 के बहुत निकट आना चाहिए — 1 अंक
अथवा
(c) एक विद्यार्थी पूछती है, "यदि माता-पिता दोनों अपने सभी 46 गुणसूत्र संतान को दे दें, तो क्या होगा?" उसे उत्तर दीजिए, और समझाइए कि एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी तक गुणसूत्रों की संख्या समान कैसे बनी रहती है। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
यदि माता-पिता दोनों सभी 46 गुणसूत्र दे दें, तो संतान में 92, उसकी संतान में 184 गुणसूत्र होंगे, और इसी प्रकार हर पीढ़ी में DNA की मात्रा दोगुनी होती जाएगी। ऐसा नहीं होता, क्योंकि जनन कोशिकाओं (अंड और शुक्राणु) में गुणसूत्रों का केवल एक समुच्चय, यानी आधी संख्या, 23 होती है। जब शुक्राणु अंड से संलयित होता है, तो युग्मनज को फिर से 23 + 23 = 46 गुणसूत्र मिल जाते हैं। इस प्रकार गुणसूत्रों की संख्या, और DNA की मात्रा, एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी तक समान बनी रहती है।
अंक योजना:
- संतान में 92 गुणसूत्र होंगे, और हर पीढ़ी में यह संख्या (और DNA) दोगुनी होती जाएगी — 1 अंक
- युग्मकों (अंड और शुक्राणु) में गुणसूत्रों का केवल एक समुच्चय, यानी आधे गुणसूत्र (23) होते हैं; निषेचन में इनके संलयन से फिर 46 हो जाते हैं, इसलिए संख्या स्थिर रहती है — 1 अंक
प्रश्न 16 (5 अंक)
विकल्प (A) या (B) में से किसी एक का उत्तर दीजिए।
(A) लेह में कक्षा 10 का विद्यार्थी तेनज़िंग देखता है कि मैदानी इलाकों से आए पर्यटकों को पहाड़ों की विरल वायु में पहले कुछ दिन प्रायः साँस फूलने की शिकायत होती है।
(i) श्वासनली उपास्थि के वलयों से टिकी रहती है, और नासिका मार्ग में महीन बाल तथा श्लेष्मा होते हैं। प्रत्येक का कार्य क्या है? (1 अंक)
उत्तर।
- उपास्थि के वलय वायु मार्ग को पिचकने नहीं देते, जिससे वायु उसमें से हमेशा आ-जा सके — 0.5 अंक
- बाल और श्लेष्मा अंदर ली गई वायु को छानते हैं और धूल तथा रोगाणुओं को रोक लेते हैं — 0.5 अंक
(ii) जितना हो सके उतनी ज़ोर से श्वास बाहर छोड़ने पर भी कुछ वायु फुफ्फुसों में हमेशा बची रहती है। यह क्यों उपयोगी है? (1 अंक)
उत्तर।
- फुफ्फुसों में हमेशा यह अवशिष्ट वायु रहने से, दो साँसों के बीच भी, ऑक्सीजन के रुधिर में अवशोषित होने और कार्बन डाइऑक्साइड के मुक्त होने के लिए पर्याप्त समय मिलता है — 1 अंक
(iii) तेनज़िंग के शिक्षक कहते हैं कि विरल वायु में हर साँस के साथ कम ऑक्सीजन आती है, इसलिए हमारे रुधिर के एक लाल वर्णक को अपना कार्य भली-भाँति करना पड़ता है। इस वर्णक का नाम लिखिए और बताइए कि यह ऑक्सीजन के परिवहन में कैसे सहायता करता है। (1 अंक)
उत्तर।
- हीमोग्लोबिन, जो लाल रुधिर कणिकाओं में होता है (0.5); ऑक्सीजन के लिए इसकी बंधुता बहुत अधिक होती है, यह फुफ्फुसों में ऑक्सीजन ग्रहण करता है और ऊतकों में, जहाँ ऑक्सीजन कम होती है, उसे छोड़ देता है (0.5) — 1 अंक
(iv) मानव श्वसन तंत्र का चित्र बनाइए और इनमें से कोई चार भाग नामांकित कीजिए: श्वासनली, श्वसनी, फुफ्फुस, कूपिका कोश (कूपिकाएँ), डायाफ्राम। (2 अंक)
उत्तर।
- श्वसन तंत्र का सही चित्र — 1 अंक
- कोई चार भाग सही नामांकित, प्रत्येक 0.25 (आकृति में: 1 श्वासनली, 2 श्वसनी, 3 फुफ्फुस, 4 कूपिका कोश, 5 डायाफ्राम) — 1 अंक

अथवा
(B) साहिल ने अपने विद्यालय की प्रयोगशाला में सूक्ष्मदर्शी से तालाब के पानी की एक बूँद देखी और एक अमीबा को भोजन के एक छोटे कण की ओर बढ़ते हुए पाया।
(i) वर्णन कीजिए कि अमीबा भोजन के इस कण को कैसे ग्रहण करता है, पचाता है और उपयोग करता है। सड़ते हुए लट्ठे पर उगने वाला मशरूम और मानव आंत्र में रहने वाला फीताकृमि जिस प्रकार अपना भोजन प्राप्त करते हैं, वह इससे कैसे भिन्न है? (3 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
अमीबा अपनी कोशिका की सतह से अस्थायी, अँगुली जैसे प्रवर्ध निकालता है, जिन्हें पादाभ कहते हैं। ये भोजन के कण को घेर लेते हैं और उसके ऊपर जुड़ जाते हैं, जिससे कण एक खाद्य रिक्तिका में बंद हो जाता है। रिक्तिका के अंदर जटिल भोजन सरल पदार्थों में टूटता है। ये कोशिकाद्रव्य में विसरित होकर कोशिका के काम आते हैं। जो भाग पच नहीं पाता, उसे सतह पर लाकर बाहर निकाल दिया जाता है। मशरूम कण बिल्कुल ग्रहण नहीं करता: वह मृतजीवी है, जो लट्ठे जैसे मृत पदार्थ को अपने शरीर के बाहर तोड़कर फिर अवशोषित करता है। फीताकृमि परजीवी है: वह एक जीवित पोषी के अंदर रहकर उसकी आंत्र से भोजन अवशोषित करता है।
अंक योजना:
- अंतर्ग्रहण: कोशिका की सतह से निकले अँगुली जैसे प्रवर्ध (पादाभ) भोजन के कण को घेरकर उसके ऊपर जुड़ जाते हैं और खाद्य रिक्तिका बनाते हैं — 1 अंक
- खाद्य रिक्तिका के अंदर भोजन सरल पदार्थों में टूटता है, जो कोशिकाद्रव्य में विसरित होकर उपयोग में आते हैं; बिना पचा पदार्थ कोशिका की सतह पर बाहर निकाल दिया जाता है — 1 अंक
- मशरूम: मृतजीवी, जो मृत पदार्थ को अपने शरीर के बाहर तोड़कर अवशोषित करता है (0.5); फीताकृमि: परजीवी, जो अपने जीवित पोषी से भोजन अवशोषित करता है (0.5) — 1 अंक
(ii) भोजन का कण ग्रहण करते हुए अमीबा का चित्र बनाइए और इनमें से कोई चार भाग नामांकित कीजिए: पादाभ, भोजन का कण, खाद्य रिक्तिका, केंद्रक, कोशिका झिल्ली। (2 अंक)
उत्तर।
- भोजन के कण को घेरते पादाभ सहित सही चित्र — 1 अंक
- कोई चार भाग सही नामांकित, प्रत्येक 0.25 (आकृति में: 1 पादाभ, 2 भोजन का कण, 3 खाद्य रिक्तिका, 4 केंद्रक, 5 कोशिका झिल्ली) — 1 अंक

खण्ड ख – रसायन विज्ञान (25 अंक)
प्रश्न 25 (2 अंक)
निम्नलिखित के उत्तर दीजिए:
(a) मेथेन, , के एक अणु में आबंधन को उसकी इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना की सहायता से दर्शाइए। (कार्बन का परमाणु क्रमांक = 6) (1 अंक)
उत्तर।
- सही संरचना: केंद्र में कार्बन, जो चारों हाइड्रोजन परमाणुओं में से प्रत्येक के साथ इलेक्ट्रॉनों का एक युग्म साझा करता है — 1 अंक

(b) कार्बन इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करके सहसंयोजक आबंध बनाता है। एक कारण बताइए कि यह आयन क्यों नहीं बनाता, और एक कारण कि यह आयन क्यों नहीं बनाता। (1 अंक)
उत्तर।
- : चार इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होगी — 0.5 अंक
- : केवल छह प्रोटॉन वाला नाभिक दस इलेक्ट्रॉनों को नहीं थाम सकता — 0.5 अंक
प्रश्न 26 (3 अंक)
करण ने दो परखनलियों A और B को अपने गाँव के हैंडपंप के पानी से आधा भरा। उसने A में थोड़ा साबुन का विलयन और B में उतना ही अपमार्जक का विलयन डाला, और दोनों परखनलियों को एक जैसे हिलाया।
(a) किस परखनली में अच्छा झाग बनेगा? दूसरी परखनली में वह क्या देखेगा? (1 अंक)
उत्तर।
- B (अपमार्जक) में अच्छा झाग बनता है — 0.5 अंक
- A में बहुत कम झाग बनता है और सफ़ेद, दही जैसा अवक्षेप (स्कम) बनता है — 0.5 अंक
(b) A में बनने वाला स्कम क्या है? इस पानी में साबुन से कपड़े धोने वाले व्यक्ति के लिए यह परेशानी क्यों है, एक कारण दीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- कठोर जल के कैल्सियम और मैग्नीशियम लवणों की साबुन से अभिक्रिया द्वारा बना अविलेय पदार्थ — 0.5 अंक
- साबुन का बहुत-सा भाग स्कम बनाने में व्यर्थ हो जाता है, इसलिए अधिक साबुन लगता है (या: स्कम कपड़ों पर चिपक जाता है) — 0.5 अंक
(c) अब करण केवल साबुन के विलयन की सहायता से यह पता लगाना चाहता है कि तीन नमूनों (हैंडपंप का पानी, नल का पानी और आसुत जल) में से कौन-सा सबसे कठोर है। परीक्षण को निष्पक्ष बनाने के लिए उसे क्या योजना बनानी चाहिए, और सबसे कठोर नमूने की पहचान कैसे होगी? (1 अंक)
उत्तर।
- हर नमूने की समान मात्रा एक जैसी परखनलियों में लेकर साबुन का विलयन बूँद-बूँद डाले और हर परखनली को एक जैसे हिलाए — 0.5 अंक
- देर तक रहने वाला झाग बनने तक लगी बूँदें गिने; जिस नमूने में सबसे अधिक बूँदें लगें, वह सबसे कठोर है (यह भी मान्य: समान बूँदें डालकर झाग की ऊँचाई या स्कम की मात्रा की तुलना करना) — 0.5 अंक
प्रश्न 27 (3 अंक)
विकल्प (A) या (B) में से किसी एक का उत्तर दीजिए।
(A) तन्वी अपनी कॉपी में लिखती है: "कॉपर ग्लांस () से कॉपर प्राप्त करने के लिए पहले अयस्क का भर्जन करना होगा और फिर ऑक्साइड का कार्बन से अपचयन करना होगा, ठीक वैसे ही जैसे ज़िंक के लिए करते हैं।"
(i) तन्वी कहाँ गलत है? कारण दीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- कार्बन की आवश्यकता नहीं (0.5): कॉपर सक्रियता श्रेणी में नीचे है, इसलिए सल्फ़ाइड के कुछ भाग का भर्जन होने के बाद बना कॉपर(I) ऑक्साइड बचे हुए सल्फ़ाइड से अभिक्रिया करके कॉपर दे देता है (0.5) — 1 अंक
(ii) कॉपर ग्लांस से वास्तव में कॉपर प्राप्त होने के दोनों चरणों के संतुलित समीकरण लिखिए। (1 अंक)
उत्तर।
- — 0.5 अंक
- — 0.5 अंक
(iii) मर्करी भी सक्रियता श्रेणी में नीचे है। उस अंतिम चरण का संतुलित समीकरण लिखिए जिसमें मर्करी उसके ऑक्साइड से प्राप्त होती है, और बताइए कि इसके लिए क्या आवश्यक है। (1 अंक)
उत्तर।
- — 0.5 अंक
- केवल गर्म करना; किसी अपचायक की आवश्यकता नहीं — 0.5 अंक
अथवा
(B) बताइए कि निम्नलिखित में से प्रत्येक स्थिति में धातु प्राप्त होगी या नहीं। प्रत्येक का कारण दीजिए, और जिन स्थितियों में धातु प्राप्त होती है उनके संतुलित समीकरण लिखिए।
(I) मर्करी(II) ऑक्साइड को अकेले गर्म किया जाता है।
(II) ज़िंक ऑक्साइड को अकेले गर्म किया जाता है।
(III) आयरन(III) ऑक्साइड को ऐलुमिनियम चूर्ण के साथ गर्म किया जाता है।
(IV) ऐलुमिनियम ऑक्साइड को कार्बन के साथ गर्म किया जाता है।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
(I) हाँ। मर्करी सक्रियता श्रेणी में बहुत नीचे है, इसलिए उसका ऑक्साइड केवल गर्म करने से टूट जाता है: । (II) नहीं। ज़िंक श्रेणी के मध्य में है; ज़िंक ऑक्साइड गर्म करने से नहीं टूटता और उसका कार्बन जैसे अपचायक से अपचयन करना पड़ता है। (III) हाँ। ऐलुमिनियम आयरन से अधिक अभिक्रियाशील है, इसलिए वह ऑक्सीजन ले लेता है: । (IV) नहीं। ऐलुमिनियम कार्बन से अधिक अभिक्रियाशील है और अपनी ऑक्सीजन को अधिक दृढ़ता से पकड़े रहता है, इसलिए कार्बन ऐलुमिनियम ऑक्साइड का अपचयन नहीं कर सकता।
अंक योजना:
- (I) हाँ: मर्करी सक्रियता श्रेणी में इतनी नीचे है कि उसका ऑक्साइड केवल गर्म करने से टूट जाता है (0.5) — 0.5 अंक
- (II) नहीं: ज़िंक श्रेणी के मध्य में है; इसके ऑक्साइड के लिए कार्बन जैसे अपचायक की आवश्यकता होती है (0.5) — 0.5 अंक
- (III) हाँ: ऐलुमिनियम आयरन से अधिक अभिक्रियाशील है और आयरन(III) ऑक्साइड से ऑक्सीजन ले लेता है (0.5) — 0.5 अंक
- (IV) नहीं: ऐलुमिनियम कार्बन से अधिक अभिक्रियाशील है (ऑक्सीजन को अधिक दृढ़ता से पकड़ता है), इसलिए कार्बन ऐलुमिनियम ऑक्साइड का अपचयन नहीं कर सकता (0.5) — 0.5 अंक
- समीकरण: (0.5); (0.5) — 1 अंक
प्रश्न 28 (4 अंक)
गुरप्रीत पंजाब में लुधियाना के पास अपने परिवार के खेत में सब्ज़ियाँ उगाता है। मिट्टी की जाँच से पता चला कि एक खेत की मिट्टी का pH 5.5 है, जो उसकी बोई जाने वाली फ़सल के लिए बहुत कम है। कृषि अधिकारी ने उसे सलाह दी कि वह खेत में बुझे हुए चूने की नपी-तुली मात्रा फैलाकर मिट्टी में मिला दे। उसी सप्ताह गुरप्रीत के दादाजी ने भारी भोजन के बाद अम्लता की शिकायत की, और डॉक्टर ने उन्हें एक चम्मच मिल्क ऑफ़ मैग्नीशिया लेने को कहा।
(a) खेत की मिट्टी अम्लीय है या क्षारकीय? बुझा हुआ चूना कैसे सहायता करता है? (1 अंक)
उत्तर।
- अम्लीय, क्योंकि इसका pH 7 से कम है — 0.5 अंक
- बुझा हुआ चूना (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड) एक क्षारक है; यह अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करके मिट्टी का pH बढ़ाता है — 0.5 अंक
(b) मिल्क ऑफ़ मैग्नीशिया में उपस्थित रसायन का नाम लिखिए और समझाइए कि यह दादाजी की अम्लता से कैसे आराम दिलाता है। (1 अंक)
उत्तर।
- मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड — 0.5 अंक
- यह एक दुर्बल क्षारक है और आमाशय के अतिरिक्त हाइड्रोक्लोरिक अम्ल को उदासीन कर देता है — 0.5 अंक
(c) गुरप्रीत ने दो खेतों X और Y में, जिनकी मिट्टी का pH 5.5 था, चूना डाला। एक महीने बाद X का pH 6.8 और Y का 8.2 था। (I) अब कौन-सा खेत अधिकांश फ़सलों के लिए अधिक उपयुक्त है, और दूसरे में क्या गड़बड़ हुई? (II) बुझे हुए चूने की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल जैसे किसी अम्ल से होने वाली अभिक्रिया का संतुलित समीकरण लिखिए, और अभिक्रिया के प्रकार का नाम बताइए। (2 अंक)
उत्तर।
- (I) खेत X, जिसकी मिट्टी अब लगभग उदासीन है (0.5); Y में बहुत अधिक चूना डाल दिया गया, जिससे उसकी मिट्टी क्षारकीय हो गई (0.5) — 1 अंक
- (II) (0.5); उदासीनीकरण (0.5) — 1 अंक
अथवा
(c) गुरप्रीत के घर में खाने का सोडा, बुझा हुआ चूना और साधारण नमक है। (I) अम्लीय मिट्टी के उपचार के लिए इनमें से कौन-सा किसी काम का नहीं होगा? क्यों? (II) उस अभिक्रिया का संतुलित समीकरण लिखिए जिससे मिल्क ऑफ़ मैग्नीशिया आमाशय के अम्ल को उदासीन करता है। (2 अंक)
उत्तर।
- (I) साधारण नमक (0.5): यह प्रबल अम्ल और प्रबल क्षारक से बना उदासीन लवण है, इसलिए अम्ल को उदासीन नहीं कर सकता (0.5) — 1 अंक
- (II) — 1 अंक
प्रश्न 29 (5 अंक)
विकल्प (A) या (B) में से किसी एक का उत्तर दीजिए।
(A) अंजलि ने चीनी मिट्टी की एक प्याली में लगभग 1 g भूरा कॉपर चूर्ण तौलकर बर्नर पर गर्म किया। चूर्ण धीरे-धीरे काला हो गया और उसका द्रव्यमान बढ़ गया। फिर उसने गर्म काले चूर्ण पर तब तक हाइड्रोजन गैस प्रवाहित की जब तक वह फिर से भूरा नहीं हो गया, और पाया कि उसका द्रव्यमान फिर उतना ही हो गया जितना आरंभ में था।
(i) काले पदार्थ का नाम लिखिए और दोनों परिवर्तनों के संतुलित समीकरण लिखिए। समझाइए कि द्रव्यमान पहले बढ़ा और फिर घटा क्यों, और दूसरी अभिक्रिया में उपचायक और अपचायक की पहचान कीजिए। (3 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
वायु में गर्म करने पर कॉपर ऑक्सीजन से संयोग करता है और काला कॉपर(II) ऑक्साइड बनता है: । चूर्ण में ग्रहण की गई ऑक्सीजन का द्रव्यमान जुड़ जाता है, इसलिए उसका द्रव्यमान बढ़ता है। गर्म कॉपर(II) ऑक्साइड पर हाइड्रोजन प्रवाहित करने पर ऑक्साइड अपनी ऑक्सीजन खो देता है और फिर से भूरा कॉपर बन जाता है: । ऑक्सीजन हाइड्रोजन के साथ जलवाष्प बनकर निकल जाती है, इसलिए द्रव्यमान घटकर लिए गए कॉपर जितना रह जाता है। इस अभिक्रिया में हाइड्रोजन ऑक्सीजन ग्रहण करती है, अतः उसका उपचयन होता है और वह अपचायक है। कॉपर(II) ऑक्साइड ऑक्सीजन खोता है, अतः उसका अपचयन होता है और वह उपचायक है।
अंक योजना:
- कॉपर(II) ऑक्साइड; (0.5); द्रव्यमान इसलिए बढ़ा क्योंकि कॉपर ने वायु से ऑक्सीजन ग्रहण की (0.5) — 1 अंक
- (0.5); द्रव्यमान इसलिए घटा क्योंकि ऑक्सीजन हट गई और जलवाष्प के रूप में प्याली से निकल गई (0.5) — 1 अंक
- हाइड्रोजन अपचायक है, क्योंकि उसका उपचयन होता है (0.5); कॉपर(II) ऑक्साइड उपचायक है, क्योंकि उसका अपचयन होता है (0.5) — 1 अंक
(ii) अंजलि की सहेली कहती है, "गर्म करने पर द्रव्यमान बढ़ गया, इसलिए रासायनिक अभिक्रियाओं में द्रव्यमान संरक्षित नहीं रहता।" (I) क्या वह सही है? समझाइए। (II) संतुलित रासायनिक समीकरण किस नियम का पालन करता है? दिखाइए कि इस नियम का पालन करता है। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
वह सही नहीं है। प्याली खुली है, इसलिए कॉपर वायु से ऑक्सीजन लेता है। आरंभ में उस ऑक्सीजन को तौला नहीं गया था, इसीलिए द्रव्यमान बढ़ता हुआ लगता है। यदि कॉपर के द्रव्यमान में प्रयुक्त ऑक्सीजन का द्रव्यमान जोड़ दें, तो वह बने हुए कॉपर(II) ऑक्साइड के द्रव्यमान के बराबर होता है। संतुलित समीकरण द्रव्यमान संरक्षण के नियम का पालन करता है: किसी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो निर्माण होता है न विनाश, इसलिए हर तत्व के परमाणुओं की संख्या दोनों ओर समान होनी चाहिए। यहाँ बाईं ओर कॉपर के 2 और ऑक्सीजन के 2 परमाणु हैं, और दाईं ओर (2CuO) भी इतने ही हैं।
अंक योजना:
- (I) नहीं: बढ़ा हुआ द्रव्यमान वायु से ली गई ऑक्सीजन का है; कॉपर और प्रयुक्त ऑक्सीजन का द्रव्यमान मिलकर बने कॉपर(II) ऑक्साइड के द्रव्यमान के बराबर है — 1 अंक
- (II) द्रव्यमान संरक्षण का नियम: किसी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो निर्माण होता है न विनाश (0.5); दोनों ओर कॉपर के 2 और ऑक्सीजन के 2 परमाणु हैं (0.5) — 1 अंक
अथवा
(B)
(i) तीन विद्यार्थी कुछ दैनिक प्रक्रमों में होने वाले ऊर्जा परिवर्तनों पर चर्चा कर रहे हैं।
तारा: "जब सब्ज़ियों का कचरा कंपोस्ट में बदलता है, तो ऊष्मा निकलती है, इसलिए यह ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है।"
देव: "मोमबत्ती को माचिस से जलाना पड़ता है, इसलिए मोम का जलना ऊष्मा लेता है। यह ऊष्माशोषी अभिक्रिया है।"
अली: "श्वसन ऊष्माक्षेपी है, पर यह कोई रासायनिक अभिक्रिया है ही नहीं। यह तो बस साँस लेना और छोड़ना है।"
कौन सही है और कौन नहीं? प्रत्येक स्थिति में अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए। (3 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
तारा सही है। वनस्पति पदार्थ के कंपोस्ट में अपघटित होने पर ऊष्मा निकलती है, इसीलिए कंपोस्ट का ढेर अंदर से गर्म लगता है; यह ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है। देव सही नहीं है। माचिस तो केवल जलना आरंभ करने के लिए आवश्यक ऊष्मा देती है। मोम का जलना शुरू होने के बाद, जितनी ऊष्मा ली गई थी उससे कहीं अधिक ऊष्मा और प्रकाश निकलता है, अतः दहन ऊष्माक्षेपी है। अली भी सही नहीं है। साँस लेना केवल वायु को अंदर लेना और कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर छोड़ना है। श्वसन हमारी कोशिकाओं के अंदर ऑक्सीजन द्वारा ग्लूकोज़ का विखंडन है: + ऊर्जा। इसमें नए पदार्थ बनते हैं, अतः यह एक रासायनिक अभिक्रिया है, और ऊष्माक्षेपी भी।
अंक योजना:
- तारा सही है: वनस्पति पदार्थ के कंपोस्ट में अपघटन से ऊष्मा निकलती है, अतः यह ऊष्माक्षेपी है — 1 अंक
- देव सही नहीं है: ऊष्मा केवल जलना आरंभ करने के लिए चाहिए; एक बार आरंभ होने पर दहन बहुत-सी ऊष्मा और प्रकाश देता है, अतः यह ऊष्माक्षेपी है — 1 अंक
- अली सही नहीं है: साँस लेना केवल गैसों का विनिमय है; श्वसन कोशिकाओं में ग्लूकोज़ का उपचयन है, + ऊर्जा, जो एक रासायनिक अभिक्रिया है — 1 अंक
(ii) निम्नलिखित में से प्रत्येक में त्रुटि पहचानिए और उसे सही करके लिखिए।
(I) ; यह एक संयोजन अभिक्रिया है।
(II) ; यह एक द्विविस्थापन अभिक्रिया है।
(III) ; यह एक द्विविस्थापन अभिक्रिया है। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
(I) दाईं ओर क्लोरीन के दो परमाणु हैं पर बाईं ओर केवल एक, अतः समीकरण होगा। मैग्नीशियम अम्ल में हाइड्रोजन का स्थान लेता है, अतः यह विस्थापन अभिक्रिया है, संयोजन नहीं। (II) समीकरण संतुलित है, पर इसमें केवल एक तत्व (लेड) दूसरे तत्व (कॉपर) को उसके यौगिक से बाहर करता है, अतः यह विस्थापन अभिक्रिया है, द्विविस्थापन नहीं। (III) इसे द्विविस्थापन कहना सही है, क्योंकि दोनों यौगिक आयनों का आदान-प्रदान करते हैं और नीला कॉपर हाइड्रॉक्साइड अलग हो जाता है, पर सोडियम परमाणु संतुलित नहीं हैं: ।
अंक योजना:
- (I) संतुलित नहीं है, और प्रकार गलत है: एक विस्थापन अभिक्रिया है (0.5 + 0.5) — 1 अंक
- (II) समीकरण सही है, पर यह विस्थापन अभिक्रिया है: अधिक अभिक्रियाशील लेड कॉपर को विस्थापित करता है — 0.5 अंक
- (III) प्रकार सही है, पर समीकरण संतुलित नहीं है: — 0.5 अंक
खण्ड ग – भौतिक विज्ञान (25 अंक)
प्रश्न 33 (2 अंक)
कविता एक जलती हुई मोमबत्ती को अवतल दर्पण के वक्रता केंद्र C और मुख्य फोकस F के बीच रखती है।
(a) मोमबत्ती का प्रतिबिंब कैसे बनता है, यह दर्शाने के लिए किरण आरेख बनाइए। (1 अंक)
उत्तर।
- मुख्य अक्ष के समांतर किरण परावर्तन के बाद F से होकर, और F से होकर आने वाली किरण परावर्तन के बाद अक्ष के समांतर (0.25 + 0.25) — 0.5 अंक
- किरणें C से परे मिलकर वास्तविक, उल्टा, बड़ा प्रतिबिंब बनाती हैं — 0.5 अंक

(b) प्रतिबिंब की स्थिति, प्रकृति और साइज़ बताइए। यदि कविता मोमबत्ती को धीरे-धीरे F की ओर ले जाए, तो प्रतिबिंब कैसे बदलेगा? (1 अंक)
उत्तर।
- C से परे; वास्तविक, उल्टा और बड़ा — 0.5 अंक
- प्रतिबिंब दर्पण से और दूर जाता है तथा और बड़ा होता जाता है (मोमबत्ती के F पर पहुँचने पर यह अनंत पर बनता है) — 0.5 अंक
प्रश्न 34 (2 अंक)
विकल्प (A) या (B) में से किसी एक का उत्तर दीजिए।
(A) एक बिजली की केतली पर 1100 W, 220 V अंकित है। 220 V की आपूर्ति पर यह एक जग पानी को 4 मिनट में उबाल देती है।
(I) कार्य करते समय इसके द्वारा ली गई धारा और इसका प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- A (0.5); Ω (0.5) — 1 अंक
(II) यदि इसे 110 V की आपूर्ति पर चलाया जाए (इसका प्रतिरोध वही मानिए), तो यह कितनी शक्ति देगी, और उसी जग के पानी को उबालने में लगभग कितना समय लगेगा? (1 अंक)
उत्तर।
- W, अंकित शक्ति का एक-चौथाई (0.5); लगभग चार गुना समय, यानी लगभग 16 मिनट लगेंगे (0.5) — 1 अंक
अथवा
(B) कमरे के एक बिजली के हीटर में कुंडलित तापन अवयव और संयोजक डोरी श्रेणी में हैं, इसलिए दोनों से समान धारा बहती है। फिर भी दस मिनट बाद तापन अवयव लाल-तप्त हो जाता है जबकि डोरी मुश्किल से गर्म होती है।
(I) जूल के तापन नियम की सहायता से इसका कारण बताइए। (1 अंक)
उत्तर।
- उत्पन्न ऊष्मा ; समान धारा और समय के लिए यह प्रतिरोध के अनुक्रमानुपाती है: तापन अवयव का प्रतिरोध अधिक और डोरी का बहुत कम होता है — 1 अंक
(II) यदि डोरी के स्थान पर उसी पदार्थ का बहुत पतला तार लगा दिया जाए, तो क्या होगा? कारण दीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- पतले तार का प्रतिरोध अधिक होता है (0.5), इसलिए उसमें अधिक ऊष्मा उत्पन्न होगी; डोरी अधिक गर्म हो सकती है और उसका विद्युतरोधी आवरण पिघल सकता है (0.5) — 1 अंक
प्रश्न 35 (3 अंक)
घड़ीसाज़ आवर्धक लेंस के रूप में 12 cm फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस का उपयोग करता है। वह एक बहुत छोटे पेंच को लेंस से 8 cm दूर रखता है।
(a) प्रतिबिंब की स्थिति ज्ञात कीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- cm, cm; , अतः cm: प्रतिबिंब लेंस से 24 cm दूर, पेंच की ओर ही बनता है — 1 अंक
(b) पेंच का प्रतिबिंब उससे कितने गुना बड़ा है? प्रतिबिंब का वर्णन कीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- — 0.5 अंक
- आभासी, सीधा और 3 गुना बड़ा — 0.5 अंक
(c) पेंच को लेंस से 12 cm से कम दूरी पर ही क्यों रखना चाहिए? यदि वह उसे लेंस से 18 cm दूर रखे, तो क्या होगा? (1 अंक)
उत्तर।
- फोकस दूरी के भीतर रखी वस्तु ही ऐसा आभासी, सीधा, बड़ा प्रतिबिंब देती है जिसे लेंस से देखा जा सके (0.5); 18 cm पर (F और 2F के बीच) प्रतिबिंब वास्तविक और उल्टा होगा, जो लेंस के दूसरी ओर 36 cm पर बनेगा (0.5) — 1 अंक
प्रश्न 36 (3 अंक)
निम्नलिखित के उत्तर दीजिए:
(a) मोहित ने अपनी कॉपी में लिखा: "प्रतिरोधकता, , अतः इसका SI मात्रक Ω/m है।" त्रुटियाँ पहचानिए और सही संबंध तथा मात्रक लिखिए। (1 अंक)
उत्तर।
- संबंध है, अतः — 0.5 अंक
- मात्रक Ω m (Ω × m² ÷ m) है, Ω/m नहीं — 0.5 अंक
(b) सिल्वर की प्रतिरोधकता Ω m और कॉपर की Ω m है, अतः सिल्वर बेहतर चालक है। फिर हमारे घरों के तार सिल्वर के न होकर कॉपर के क्यों बनाए जाते हैं? (1 अंक)
उत्तर।
- इतनी अधिक मात्रा में उपयोग के लिए सिल्वर बहुत महँगा है — 0.5 अंक
- कॉपर की प्रतिरोधकता लगभग सिल्वर जितनी ही कम है, इसलिए यह ऊष्मा के रूप में बहुत कम ऊर्जा व्यर्थ करता है और बहुत सस्ता है — 0.5 अंक
(c) तार P और Q एक ही धातु के बने हैं। P की लंबाई 2 m और अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 1 mm² है; Q की लंबाई 3 m और अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 2 mm² है। किस तार का प्रतिरोध अधिक है? उनके प्रतिरोधों का अनुपात ज्ञात कीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- : P के लिए ; Q के लिए — 0.5 अंक
- P का प्रतिरोध अधिक है; — 0.5 अंक
प्रश्न 37 (3 अंक)
आकृति में एक परिपथ दिखाया गया है जिसमें कुंजी K बंद है।

(a) परिपथ का कुल प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- , अतः Ω (0.5); कुल Ω (0.5) — 1 अंक
(b) बैटरी कितनी धारा देती है, और XY के सिरों पर विभवांतर कितना है? (1 अंक)
उत्तर।
- A — 0.5 अंक
- V — 0.5 अंक
(c) कुणाल कहता है, "10 Ω के प्रतिरोधक से 15 Ω के प्रतिरोधक की तुलना में अधिक धारा बहती है, इसलिए 10 Ω के प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर भी अधिक है।" दोनों धाराएँ ज्ञात कीजिए और उसके कथन पर टिप्पणी कीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- A और A — 0.5 अंक
- उसके कथन का पहला भाग सही है, पर दोनों के सिरों पर विभवांतर समान (4.5 V) है, क्योंकि वे पार्श्व में हैं — 0.5 अंक
प्रश्न 38 (4 अंक)
इंदौर की एक विज्ञान प्रदर्शनी में आदित्य ने एक मॉडल दिखाया, जिसमें ऐलुमिनियम की एक हल्की छड़ R, ताँबे की दो क्षैतिज पटरियों P और Q पर आड़ी रखी है। पटरियाँ एक शक्तिशाली नाल चुंबक के ध्रुवों के बीच से गुज़रती हैं, जिसका उत्तर ध्रुव पटरियों के ऊपर और दक्षिण ध्रुव नीचे है, अतः ध्रुवों के बीच चुंबकीय क्षेत्र ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर है। आकृति ऊपर से देखने पर दृश्य दर्शाती है: गुणन चिह्न (×) पृष्ठ के अंदर जाता क्षेत्र दिखाते हैं, और तीर छड़ में धारा की दिशा दिखाता है। आदित्य के कुंजी K बंद करते ही छड़ पटरियों पर लुढ़कने लगती है।

(a) कुंजी बंद करने पर छड़ क्यों चलती है? ऐलुमिनियम चुंबक की ओर आकर्षित नहीं होता, फिर भी यह छड़ के लिए अच्छा चुनाव क्यों है? (1 अंक)
उत्तर।
- चुंबकीय क्षेत्र में रखे विद्युत धारावाही चालक पर बल लगता है — 0.5 अंक
- बल छड़ में बहने वाली धारा के कारण लगता है, छड़ के चुंबकीय होने के कारण नहीं; ऐलुमिनियम हल्का और अच्छा चालक है — 0.5 अंक
(b) फ्लेमिंग का वामहस्त नियम लिखिए और इसकी सहायता से आकृति में छड़ के चलने की दिशा ज्ञात कीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- बाएँ हाथ के अँगूठे, तर्जनी और मध्यमा को परस्पर लंबवत फैलाइए: तर्जनी क्षेत्र की दिशा में और मध्यमा धारा की दिशा में हो, तो अँगूठा बल (गति) की दिशा बताता है — 0.5 अंक
- क्षेत्र पृष्ठ के अंदर, धारा पृष्ठ में नीचे की ओर: छड़ दाईं ओर (बैटरी से दूर) चलती है — 0.5 अंक
(c) आदित्य चाहता है कि छड़ दूसरी ओर लुढ़के। इसके दो उपाय सुझाइए। यदि वह दोनों परिवर्तन एक साथ कर दे, तो क्या होगा? (2 अंक)
उत्तर।
- बैटरी के संयोजन आपस में बदलकर धारा की दिशा उलट दें (0.5); चुंबक को पलट दें ताकि दक्षिण ध्रुव ऊपर और उत्तर ध्रुव नीचे हो (0.5) — 1 अंक
- दोनों परिवर्तन एक साथ करने पर बल की दिशा पहले जैसी ही रहती है और छड़ पहले की ही ओर लुढ़कती है — 1 अंक
अथवा
(c) (I) छड़ पर लगने वाले बल को बढ़ाने के दो उपाय सुझाइए। (II) यदि चुंबक को इस प्रकार घुमा दिया जाए कि उसका क्षेत्र छड़ की लंबाई के अनुदिश हो, तो कुंजी बंद करने पर क्या होगा? क्यों? (2 अंक)
उत्तर।
- (I) कोई दो, प्रत्येक 0.5: छड़ में धारा बढ़ाना; अधिक शक्तिशाली चुंबक का उपयोग; लंबी छड़ का उपयोग, ताकि उसका अधिक भाग क्षेत्र में रहे — 1 अंक
- (II) छड़ नहीं चलेगी (0.5): जब धारा क्षेत्र के समांतर हो तो बल शून्य होता है, और जब धारा क्षेत्र के लंबवत हो तो बल अधिकतम होता है (0.5) — 1 अंक
प्रश्न 39 (5 अंक)
विकल्प (A) या (B) में से किसी एक का उत्तर दीजिए।
(A) कॉलेज की छात्रा मीरा दोपहर की तेज़ धूप में एक उपन्यास पढ़ रही है। फिर वह कम रोशनी वाले कमरे में जाती है।
(i) जब वह कम रोशनी वाले कमरे में जाती है, तो उसकी आँखों की परितारिका और पुतली क्या करती हैं? (1 अंक)
उत्तर।
- परितारिका पुतली के साइज़ को नियंत्रित करती है (0.5); पुतली बड़ी हो जाती है ताकि आँख में अधिक प्रकाश जाए (0.5) — 1 अंक
(ii) आँख में प्रवेश करने वाले प्रकाश का अधिकांश अपवर्तन आँख का कौन-सा भाग करता है? प्रतिबिंब किस भाग पर बनता है, और वह भाग क्या करता है? (1 अंक)
उत्तर।
- कॉर्निया (आँख की बाहरी सतह) (0.5); प्रतिबिंब दृष्टिपटल पर बनता है, जिसकी प्रकाश-सुग्राही कोशिकाएँ दृक् तंत्रिका द्वारा मस्तिष्क को विद्युत संकेत भेजती हैं (0.5) — 1 अंक
(iii) जब मीरा अपनी किताब को आँखों से 10 cm दूर ले आती है, तो अक्षर धुँधले दिखते हैं, जबकि उसकी दृष्टि सामान्य है। क्यों? (1 अंक)
उत्तर।
- सामान्य दृष्टि वाले युवा वयस्क के लिए स्पष्ट दर्शन की अल्पतम दूरी लगभग 25 cm है: पक्ष्माभी पेशियाँ अभिनेत्र लेंस को इतना मोटा नहीं कर पातीं (उसकी फोकस दूरी इससे कम नहीं हो सकती) कि इतनी पास की वस्तु दृष्टिपटल पर फोकस हो सके — 1 अंक
(iv) मानव नेत्र का चित्र बनाइए और इनमें से कोई चार भाग नामांकित कीजिए: कॉर्निया, परितारिका, पुतली, अभिनेत्र लेंस, दृष्टिपटल। (2 अंक)
उत्तर।
- मानव नेत्र का सही चित्र — 1 अंक
- कोई चार भाग सही नामांकित, प्रत्येक 0.25 (आकृति में: 1 कॉर्निया, 2 परितारिका, 3 पुतली, 4 अभिनेत्र लेंस, 5 दृष्टिपटल) — 1 अंक

अथवा
(B) ईशान अपने विद्यालय की प्रयोगशाला में प्रकाश के व्यवहार का अध्ययन कर रहा है।
(i) काँच के आयताकार स्लैब से गुज़रने वाली किरण आपतित किरण के समांतर निकलती है, पर काँच के त्रिभुजाकार प्रिज़्म से गुज़रने वाली किरण नहीं। क्यों? (1 अंक)
उत्तर।
- स्लैब के दोनों फलक समांतर होते हैं, इसलिए दूसरे फलक पर मुड़ना पहले फलक के मुड़ने के बराबर और विपरीत होता है (0.5); प्रिज़्म के फलक झुके होते हैं और किरण दोनों फलकों पर आधार की ओर मुड़ती है, इसलिए दोनों मुड़ाव जुड़ जाते हैं और किरण विचलित हो जाती है (0.5) — 1 अंक
(ii) प्रकीर्णित प्रकाश का वर्ण प्रकीर्णन करने वाले कणों के साइज़ पर कैसे निर्भर करता है? इसकी सहायता से समझाइए कि बादल सफ़ेद क्यों दिखते हैं। (1 अंक)
उत्तर।
- बहुत सूक्ष्म कण मुख्यतः नीले प्रकाश (कम तरंगदैर्ध्य) का प्रकीर्णन करते हैं, और बड़े कण अधिक तरंगदैर्ध्य वाले प्रकाश का भी (0.5); बादलों की जल-बूँदें इतनी बड़ी होती हैं कि सभी वर्णों का लगभग बराबर प्रकीर्णन करती हैं, इसलिए प्रकीर्णित प्रकाश सफ़ेद दिखता है (0.5) — 1 अंक
(iii) प्रिज़्म पर पड़ने वाला सूर्य के प्रकाश का एक पतला पुंज पर्दे पर वर्णों की एक पट्टी देता है, पर लेज़र पॉइंटर का लाल प्रकाश केवल लाल ही निकलता है। क्यों? (1 अंक)
उत्तर।
- सूर्य का प्रकाश वर्णों का मिश्रण है, जिन्हें प्रिज़्म अलग कर देता है क्योंकि हर वर्ण अलग-अलग मात्रा में मुड़ता है (0.5); लाल प्रकाश एक ही वर्ण है, इसलिए प्रिज़्म के पास विभाजित करने के लिए कुछ नहीं है (0.5) — 1 अंक
(iv) काँच के त्रिभुजाकार प्रिज़्म से होकर गुज़रने वाली प्रकाश की एक किरण का पथ खींचिए। आपतन कोण, अपवर्तन कोण, निर्गत कोण और विचलन कोण अंकित कीजिए। (2 अंक)
उत्तर।
- सही पथ: प्रवेश करते समय किरण अभिलंब की ओर और निकलते समय अभिलंब से दूर मुड़ती है, अतः वह प्रिज़्म के आधार की ओर मुड़ती है — 1 अंक
- चारों कोण सही अंकित, प्रत्येक 0.25 (आकृति में: i आपतन कोण, r अपवर्तन कोण, e निर्गत कोण, D विचलन कोण) — 1 अंक
