विस्तृत हल: CBSE कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान सैंपल पेपर 2027 – सेट 5
प्रश्न पत्र के सभी लिखित प्रश्न (2, 3, 4 और 5 अंक) यहाँ क्रम से हल किए गए हैं, हर चरण के अंकों के साथ, ताकि आप अपनी उत्तर पुस्तिका परीक्षक की तरह जाँच सकें। जहाँ आंतरिक विकल्प (अथवा) है, वहाँ दोनों विकल्प हल किए गए हैं। 1 अंक वाले प्रश्नों के उत्तर व्याख्या सहित प्रश्न पत्र वाले पृष्ठ की क्विज़ में हैं।
खंड क - इतिहास (20 अंक)
प्रश्न 5 (2 अंक)
उत्तरी इटली में खाया जाने वाला गाढ़ा दलिया 'पोलेंटा' सदियों तक जौ या बाजरे से बनता था। सत्रहवीं सदी तक वहाँ के ज़्यादातर परिवार उसे मक्के से बनाने लगे थे। समझाइए कि यह बदलाव पंद्रहवीं सदी के अंत के बाद की दुनिया के बारे में कौन-सी दो बातें बताता है।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
पहला, मक्का अमेरिका से आया, जिसका यूरोप से लंबे समय तक संपर्क नहीं था; वह 1490 के दशक में अटलांटिक पार होने के बाद ही इटली पहुँचा। दूसरा, अमेरिका की फ़सलें दूर देशों का रोज़ का भोजन बदलने लगीं।
अंक योजना:
- अमेरिका से नए संबंध: मक्का अमेरिका की फ़सल है, जिसका यूरोप, एशिया और अफ़्रीका से बहुत लंबे समय तक नियमित संपर्क नहीं था; वह इटली तभी पहुँच सका जब 1490 के दशक में यूरोपीय जहाज़ों ने अटलांटिक पार किया — 1 अंक
- अमेरिका की फ़सलों ने दूर-दूर के रोज़मर्रा के जीवन को बदला: भोजन नए संबंधों के रास्ते आम घरों तक पहुँचा, जो लंबी दूरी के आदान-प्रदान का संकेत है (मान्य: आलू, टमाटर और मिर्च भी इसी तरह यूरोप और एशिया पहुँचे; कोई अन्य प्रासंगिक बिंदु) — 1 अंक
प्रश्न 6 (3 अंक)
1840 में काल्पनिक जर्मन राज्य काल्डनबर्ग की निम्नलिखित विशेषताएँ थीं:
(i) राजा सारे कानून स्वयं बनाता था। न कोई संविधान था और न कोई चुनी हुई सभा।
(ii) केवल कुलीन परिवारों के पुरुष ही सेना के अफ़सर या बड़े अधिकारी बन सकते थे।
(iii) हर समाचार-पत्र को राजा के सेंसर की अनुमति चाहिए थी, और राजनीतिक क्लबों पर रोक थी।
उस समय का एक उदारवादी इनमें से हर विशेषता की आलोचना किस तरह करता? समझाइए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
(i) उदारवादी जनता की सहमति से शासन चाहता था: अकेले राज करने वाले राजा की जगह संविधान और चुनी हुई संसद। (ii) वह कानून के समक्ष समानता चाहता था, इसलिए पद जन्म से कुलीनों के लिए न रखे जाएँ। (iii) वह प्रेस और संगठन की स्वतंत्रता चाहता था, इसलिए न सेंसर हो, न क्लबों पर रोक।
अंक योजना:
- (i) निरंकुश शासन: उदारवादी जनता की सहमति से चलने वाली सरकार के पक्ष में थे, इसलिए वे निरंकुश शासन का अंत, लिखित संविधान और चुनी हुई संसद के माध्यम से प्रतिनिधि सरकार की माँग करते — 1 अंक
- (ii) जन्म पर आधारित विशेषाधिकार: उदारवादी व्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के समक्ष सबकी समानता के पक्ष में थे, इसलिए पद जन्म के आधार पर कुलीनों के लिए आरक्षित नहीं होने चाहिए — 1 अंक
- (iii) सेंसरशिप: उदारवादी प्रेस की स्वतंत्रता और संगठन बनाने की स्वतंत्रता माँगते थे, इसलिए वे सेंसर और क्लबों पर रोक का विरोध करते (कोई अन्य प्रासंगिक बिंदु) — 1 अंक
अथवा
1790 के दशक के फ़्रांसीसी क्रांतिकारियों और उन्नीसवीं सदी के आरंभ के रूमानी कलाकारों और कवियों, दोनों ने राष्ट्र की भावना जगाने की कोशिश की, पर बहुत अलग-अलग ढंग से। दोनों की तुलना तीन बिंदुओं पर कीजिए: प्रयास का नेतृत्व किसने किया, उन्होंने कौन-से साधन अपनाए, और वे राष्ट्र का आधार किसे मानते थे।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
पहला, क्रांतिकारी सरकार ने राज्य के ज़रिए नेतृत्व किया; रूमानी कलाकार और कवि संस्कृति के ज़रिए काम करते थे। दूसरा, राज्य ने झंडे, गीतों, शपथों और एक भाषा का सहारा लिया; रूमानी लोगों ने लोकगीतों, कविताओं और संगीत से भावनाएँ जगाईं। तीसरा, एक के लिए राष्ट्र समान नागरिक थे, दूसरे के लिए साझी भाषा, संस्कृति और अतीत।
अंक योजना:
- नेतृत्व: फ़्रांस में क्रांतिकारी सरकार ने राज्य की शक्ति के सहारे यह किया; रूमानी लोग कलाकार, कवि, संगीतकार और विचारक थे, जिन्होंने सरकार के बजाय संस्कृति के ज़रिए काम किया — 1 अंक
- साधन: क्रांतिकारियों ने कानूनों और प्रतीकों, नए झंडे, गीतों और शपथों, केंद्रीकृत प्रशासन, एकसमान कानूनों और नाप-तौल, और साझी भाषा के रूप में फ़्रांसीसी का सहारा लिया; रूमानी लोगों ने लोकगीतों, कविताओं, लोककथाओं, संगीत और इतिहास का सहारा लिया, और केवल तर्क के बजाय भावनाओं और अंतर्ज्ञान को छुआ — 1 अंक
- राष्ट्र का आधार: क्रांतिकारियों के लिए राष्ट्र समान अधिकारों वाले नागरिकों का समूह था, जिनमें संप्रभुता निहित थी (ला पैट्री, ले सिटोयेन); रूमानी लोगों के लिए इसका आधार साझी भाषा, संस्कृति और अतीत था, जिसकी असली आत्मा आम लोगों में बसती थी (कोई अन्य प्रासंगिक बिंदु) — 1 अंक
प्रश्न 7 (5 अंक)
1919 से 1932 के बीच भारतीयों ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध शांतिपूर्ण विरोध के कई तरीके अपनाए। निम्नलिखित के उत्तर दीजिए।
(a) विदेशी सामान के बहिष्कार के अलावा विरोध के ऐसे तीन तरीके समझाइए, और हर एक का उदाहरण किसी अलग आंदोलन से दीजिए। (3 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
पहला, हड़ताल: 6 अप्रैल 1919 को रॉलट एक्ट के विरुद्ध दुकानें बंद रहीं और रेलवे वर्कशॉप में काम रुका। दूसरा, ब्रिटिश संस्थाओं से अलग होना: असहयोग आंदोलन में विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूल छोड़े, वकीलों ने वकालत छोड़ी और परिषद चुनावों का बहिष्कार हुआ। तीसरा, अन्यायपूर्ण कानून खुलेआम तोड़ना: सविनय अवज्ञा आंदोलन में लोगों ने नमक बनाया, वनवासियों ने वन कानून तोड़े और किसानों ने लगान नहीं दिया।
अंक योजना:
- हड़ताल: दुकानें और दफ़्तर बंद रहे और एक दिन काम रुका, जैसे 6 अप्रैल 1919 को रॉलट एक्ट के विरुद्ध, जब रेलवे वर्कशॉप के मज़दूरों ने भी हड़ताल की — 1 अंक
- ब्रिटिश संस्थाओं से अलग होना: असहयोग आंदोलन में विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूल-कॉलेज छोड़े, शिक्षकों ने इस्तीफ़े दिए, वकीलों ने वकालत छोड़ी और ज़्यादातर प्रांतों में परिषद चुनावों का बहिष्कार हुआ — 1 अंक
- अन्यायपूर्ण कानून खुलेआम तोड़ना: सविनय अवज्ञा आंदोलन में लोगों ने नमक कानून तोड़कर नमक बनाया, वनवासियों ने वन कानून तोड़े, और किसानों ने लगान और चौकीदारी कर देने से मना किया (मान्य: शराब और कपड़े की दुकानों पर धरना; उपाधियाँ लौटाना; अलग-अलग आंदोलनों के उदाहरणों सहित कोई भी तीन अलग तरीके) — 1 अंक
(b) औपनिवेशिक सरकार को ऐसे शांतिपूर्ण जन-विरोध से निपटना अक्सर हिंसक विद्रोह की तुलना में अधिक कठिन क्यों लगता था? दो कारण समझाइए। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
पहला, नमक कानून जैसे कानून तोड़ रहे शांतिपूर्ण लोगों पर बल प्रयोग से शासन का अन्याय सामने आया और आंदोलन को समर्थन मिला। दूसरा, एक साथ कानून तोड़ने वाली विशाल भीड़ को सरकार जेल नहीं भेज पाती थी और उसका काम बिगड़ता था।
अंक योजना:
- शांतिपूर्ण लोगों पर, जिनमें से बहुत-से नमक कानून जैसे उन कानूनों को तोड़ रहे थे जिन्हें ज़्यादातर भारतीय अन्यायपूर्ण मानते थे, बल प्रयोग से औपनिवेशिक शासन का अन्याय सामने आता था और आंदोलन को अधिक सहानुभूति और समर्थन मिलता था — 1 अंक
- जब बहुत बड़ी संख्या में लोग एक साथ कानून तोड़ते या सहयोग से मना करते, तो सरकार सबको जेल में नहीं डाल सकती थी, और उसके दफ़्तरों, अदालतों और राजस्व वसूली का काम बिगड़ जाता था (मान्य: सत्याग्रही बदला नहीं लेते थे, इसलिए सरकार के पास बहाना बनाने के लिए कोई हिंसा नहीं होती थी; कोई अन्य प्रासंगिक बिंदु) — 1 अंक
अथवा
तालिका प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत के एक कस्बे में चार वस्तुओं का एक काल्पनिक मूल्य सूचकांक देती है। आँकड़े इस प्रश्न के लिए गढ़े गए हैं।
| वस्तु (काल्पनिक मूल्य सूचकांक, 1913 = 100) | 1913 | 1918 |
|---|---|---|
| चावल | 100 | 170 |
| सूती कपड़ा | 100 | 290 |
| मिट्टी का तेल | 100 | 150 |
| नमक | 100 | 125 |
निम्नलिखित के उत्तर दीजिए।
(a) युद्ध नवंबर 1918 में खत्म हो गया, पर उसके असर खत्म नहीं हुए। बढ़ते दामों के अलावा, युद्ध और उसकी समाप्ति के ऐसे तीन असर समझाइए जिनसे 1919 तक भारतीयों में असंतोष के नए कारण पैदा हुए। (3 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
पहला, गाँवों से, प्रायः ज़बरदस्ती, सैनिक भर्ती हुए, जिससे ग्रामीण इलाके नाराज़ हुए। दूसरा, ऑटोमन तुर्की हारा और मुसलमानों को ख़लीफ़ा पर कठोर संधि का डर था, इसलिए मार्च 1919 में ख़िलाफ़त समिति बनी। तीसरा, युद्धकालीन सख़्ती ढीली करने के बजाय सरकार ने 1919 में रॉलट एक्ट पारित किया, जिससे बिना मुकदमे दो साल की कैद संभव हुई।
अंक योजना:
- गाँव: युद्ध के दौरान गाँवों से, प्रायः ज़बरदस्ती, सैनिक भर्ती करवाए गए, जिससे ग्रामीण इलाकों में व्यापक नाराज़गी फैली — 1 अंक
- मुसलमान: ऑटोमन तुर्की हार गया, और ऑटोमन सम्राट, जो इस्लामी दुनिया के आध्यात्मिक प्रमुख (ख़लीफ़ा) थे, पर कठोर शांति संधि थोपे जाने का डर था; मार्च 1919 में बंबई में ख़िलाफ़त समिति बनी — 1 अंक
- नागरिक अधिकार: युद्धकालीन सख़्ती ढीली करने के बजाय सरकार ने 1919 में रॉलट एक्ट पारित किया, जिससे राजनीतिक कार्यकर्ताओं को बिना मुकदमे दो साल तक कैद रखा जा सकता था (दामों के अलावा युद्ध का कोई अन्य प्रासंगिक असर मान्य) — 1 अंक
(b) केवल तालिका की सहायता से उत्तर दीजिए: (i) 1913 से 1918 के बीच किस वस्तु का दाम सबसे अधिक बढ़ा, और कितने प्रतिशत? (ii) एक परिवार 1913 में चावल पर हर महीने ₹5 खर्च करता था। 1918 में उतना ही चावल उसे कितने का पड़ता? (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
(i) सूती कपड़े का दाम सबसे अधिक बढ़ा: 100 से 290, यानी 190 प्रतिशत। (ii) चावल का दाम 1913 का 170 प्रतिशत हो गया, इसलिए ₹5 × 170 ÷ 100 = ₹8.50 प्रति माह।
अंक योजना:
- (i) सूती कपड़ा: इसका सूचकांक 100 से 290 हुआ, यानी 190 प्रतिशत की बढ़ोतरी — 1 अंक
- (ii) ₹5 × 170 ÷ 100 = ₹8.50 प्रति माह — 1 अंक
प्रश्न 8 (4 अंक)
नीचे दिया गया स्रोत पढ़िए और उसके बाद के प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
एलेन की शनिवार वाली किताब
1862 में एलेन प्राइस उन्नीस साल की थी। उसके पिता उत्तरी इंग्लैंड के एक व्यस्त मिल-कस्बे में एक पंसारी का हिसाब-किताब रखते थे, और वह एक दर्ज़ी की दुकान में हाथ बँटाती थी। नई किताबों का दाम उसकी हफ़्ते भर की कमाई से ज़्यादा था, पर बाज़ार के पास का एक पुस्तकालय साल भर के छोटे-से शुल्क पर उसे एक बार में दो किताबें उधार देता था। हर शनिवार की शाम वह एक उपन्यास घर लाती और अक्सर लालटेन की रोशनी में उसे माँ और छोटी बहन को पढ़कर सुनाती।
बाकी दिनों में तीनों मिलकर स्त्रियों के लिए लिखा गया एक सस्ता साप्ताहिक पत्र पढ़ती थीं। उसमें सिलाई के नमूने, खाना बनाने की विधियाँ, घर चलाने और अच्छे तौर-तरीकों की सलाह, और हफ़्ते-दर-हफ़्ते चलने वाली एक कहानी होती थी। माँ को विधियाँ पसंद थीं; एलेन को कहानी सबसे अच्छी लगती थी।
एलेन के कई प्रिय उपन्यास स्त्रियों ने लिखे थे। उनकी नायिकाएँ इस इंतज़ार में नहीं बैठी रहती थीं कि दूसरे उनके लिए फ़ैसले करें: वे खुद सोचती थीं और अपना रास्ता खुद चुनती थीं। एलेन उनकी कुछ बातें एक कॉपी में उतार लेती थी, और उसने चुपचाप अपनी एक कहानी लिखनी शुरू कर दी। (एलेन और उसका कस्बा काल्पनिक हैं।)
8.1 किताबें खरीद न पाने पर भी एलेन इतने उपन्यास कैसे पढ़ पाती थी? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
वह उन्हें बाज़ार के पास के पुस्तकालय से साल भर के छोटे-से शुल्क पर उधार लेती थी।
अंक योजना:
- वह बाज़ार के पास के पुस्तकालय से उधार लेती थी, जो साल भर का छोटा-सा शुल्क ही लेता था — 1 अंक
8.2 एलेन के परिवार का साप्ताहिक पत्र उन्नीसवीं सदी के यूरोप में छपी सामग्री के पाठकों के बारे में क्या बताता है? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
स्त्रियाँ पाठकों का एक महत्त्वपूर्ण वर्ग बन गई थीं, इसलिए प्रकाशक खास उनके लिए सस्ते पत्र निकालने लगे थे।
अंक योजना:
- स्त्रियाँ पाठकों का एक महत्त्वपूर्ण वर्ग बन गई थीं, इसलिए प्रकाशक खास उनके लिए सस्ते पत्र और पुस्तिकाएँ निकालने लगे थे (मान्य: अलग-अलग रुचि के पाठकों के लिए प्रकाशक सलाह के साथ धारावाहिक कहानियाँ भी छापते थे) — 1 अंक
8.3 'एलेन के लिए छपी सामग्री समय बिताने के साधन से कहीं बढ़कर थी।' स्रोत से दो तर्क देकर इस कथन की पुष्टि कीजिए। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
पहला, उपन्यासों से उसे नए विचार मिले: उनकी नायिकाएँ खुद सोचती थीं और अपना रास्ता खुद चुनती थीं, और वह उनकी बातें उतारती थी। दूसरा, ये उपन्यास स्त्रियों ने लिखे थे, इसलिए उसने भी अपनी कहानी लिखनी शुरू की और पाठिका से लेखिका बनने लगी।
अंक योजना:
- स्त्रियों के बारे में नए विचार: उपन्यासों ने उसे ऐसी नायिकाएँ दिखाईं जो खुद सोचती थीं और अपना रास्ता खुद चुनती थीं, और वह उनकी बातें अपनी कॉपी में उतारती थी (मान्य: साप्ताहिक पत्र से परिवार को कहानियों के साथ काम की सलाह भी मिलती थी) — 1 अंक
- पाठिका से लेखिका: यह देखकर कि उसके कई प्रिय उपन्यास स्त्रियों ने लिखे थे, उसने अपनी कहानी लिखनी शुरू की, जैसे उस सदी में स्त्रियाँ पाठिका के साथ लेखिका भी बनीं (मान्य: पढ़कर सुनाने से वह छपी सामग्री को माँ और बहन तक भी पहुँचाती थी; कोई अन्य प्रासंगिक बिंदु) — 1 अंक
प्रश्न 9 (2 अंक)
नीचे दिए गए संकेत पढ़िए। हर संकेत इस प्रश्न के लिए दिए गए भारत के रेखा-मानचित्र पर A या B से अंकित एक स्थान की ओर इशारा करता है। दोनों स्थानों को पहचानिए और उनके सही नाम लिखिए।

A बिहार का वह ज़िला जहाँ 1917 में, दक्षिण अफ़्रीका से लौटने के दो साल बाद, गांधीजी ने भारत की धरती पर अपना पहला सत्याग्रह शुरू किया। (1 अंक)
उत्तर।
- A: चंपारण (बिहार) — 1 अंक
B कोरोमंडल तट का सबसे बड़ा शहर, जहाँ दिसंबर 1927 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हुआ। (1 अंक)
उत्तर।
- B: मद्रास, अब चेन्नई (तमिलनाडु) — 1 अंक
खंड ख - भूगोल (20 अंक)
प्रश्न 16 (2 अंक)
एक काल्पनिक ज़िले में चार इकाइयाँ हैं: रेशम बुनाई की एक इकाई, मूँगफली पेरने वाली खाद्य तेल मिल, एक सीमेंट कारखाना और एक एल्यूमिनियम प्रगलन संयंत्र।
(a) इन इकाइयों को कृषि आधारित और खनिज आधारित उद्योगों में बाँटिए।
(b) एक वर्ष मानसून बुरी तरह विफल हो जाता है। किस वर्ग पर इसका असर सबसे पहले पड़ने की संभावना है? कारण दीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
(a) कृषि आधारित: रेशम इकाई, तेल मिल। खनिज आधारित: सीमेंट कारखाना, एल्यूमिनियम संयंत्र। (b) कृषि आधारित, क्योंकि मूँगफली और शहतूत की पत्तियाँ (रेशम कीट का भोजन) वर्षा पर निर्भर खेतों से आती हैं; खनिज खदानों से आते हैं।
अंक योजना:
- (a) कृषि आधारित: रेशम बुनाई की इकाई और खाद्य तेल मिल; खनिज आधारित: सीमेंट कारखाना और एल्यूमिनियम प्रगलन संयंत्र (अंक के लिए चारों सही) — 1 अंक
- (b) कृषि आधारित इकाइयाँ: उनका कच्चा माल उन खेतों से आता है जिनकी उपज वर्षा पर निर्भर है (मूँगफली, और शहतूत की पत्तियाँ जिन्हें रेशम के कीड़े खाते हैं), जबकि चूना-पत्थर और बॉक्साइट खदानों से निकलते हैं और एक मौसम की वर्षा पर निर्भर नहीं होते (मान्य: तर्क सहित यह टिप्पणी कि जल विद्युत की कमी से प्रगलन संयंत्र पर भी असर पड़ सकता है) — 1 अंक
प्रश्न 17 (5 अंक)
एक बहुउद्देशीय परियोजना कई उपयोगकर्ताओं को पानी देती है, और इससे अक्सर इस पर विवाद होता है कि पानी किसे मिले। निम्नलिखित के उत्तर दीजिए।
(a) बहुउद्देशीय परियोजनाओं के पानी या ज़मीन को लेकर पैदा हुए तीन प्रकार के टकराव समझाइए, और जहाँ हो सके उदाहरण दीजिए। (3 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
पहला, शहर और किसान टकराते हैं: साबरमती द्रोणी में सूखे के समय शहरों को पानी में प्राथमिकता मिलने पर किसानों ने विरोध किया। दूसरा, राज्य लागत और लाभ के बँटवारे पर झगड़ते हैं, जैसे कोयना को लेकर कृष्णा-गोदावरी विवाद। तीसरा, घाटी के लोग ज़मीन और आजीविका खोते हैं जबकि भू-स्वामी, उद्योग और शहर लाभ पाते हैं, जिससे नर्मदा बचाओ आंदोलन जैसे आंदोलन हुए।
अंक योजना:
- शहरों और किसानों के बीच: एक ही पानी से अलग-अलग उपयोगकर्ता अलग चीज़ें चाहते हैं; गुजरात की साबरमती द्रोणी में सूखे के समय शहरों के पानी को प्राथमिकता मिलने पर किसानों ने विरोध किया — 1 अंक
- राज्यों के बीच: परियोजना की लागत और लाभ के बँटवारे से अंतर्राज्यीय जल विवाद होते हैं, जैसे कोयना पर अधिक पानी मोड़ने की महाराष्ट्र की योजना को लेकर कृष्णा-गोदावरी विवाद — 1 अंक
- खोने वालों और पाने वालों के बीच: घाटी के लोग जलाशय के कारण अपनी ज़मीन और आजीविका खो देते हैं, अक्सर लाभ में उचित हिस्सा पाए बिना, जो ज़्यादातर भू-स्वामियों, उद्योगों और शहरों को मिलता है; इससे नर्मदा बचाओ आंदोलन जैसे आंदोलन हुए (मान्य: कमान क्षेत्रों में धनी भू-स्वामियों और भूमिहीन गरीबों के बीच बढ़ती खाई; कोई भी तीन प्रकार) — 1 अंक
(b) ऐसे टकराव कम करने के दो तरीके सुझाइए। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
पहला, परियोजना बनने से पहले राज्य और उपयोगकर्ता तय करें कि पानी, लागत और लाभ कैसे बँटेंगे, खासकर सूखे में। दूसरा, विस्थापित लोगों का ठीक से पुनर्वास हो, उन्हें लाभ में हिस्सा और फ़ैसलों में आवाज़ मिले।
अंक योजना:
- पहले से तय उचित बँटवारा: परियोजना बनने से पहले ही राज्य और अलग-अलग उपयोगकर्ता तय करें कि पानी, लागत और लाभ कैसे बाँटे जाएँगे, खासकर सूखे के वर्षों में (मान्य: बातचीत या न्यायाधिकरण से विवाद सुलझाना) — 1 अंक
- खोने वालों के साथ न्याय: विस्थापित लोगों का ठीक से पुनर्वास हो और उन्हें लाभ में हिस्सा मिले, और फ़ैसलों में स्थानीय लोगों की बात सुनी जाए (मान्य: स्थानीय वर्षा जल संग्रहण से एक नदी पर दबाव घटाना; छोटी परियोजनाएँ; कोई अन्य उचित तरीका) — 1 अंक
अथवा
तालिका भारत के एक अर्ध-शुष्क भाग के एक काल्पनिक गाँव के काल्पनिक आँकड़े देती है। इसका अध्ययन कीजिए और उसके बाद के प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
| महीने | वर्षा (मिमी) | गाँव द्वारा इस्तेमाल किया गया पानी (हज़ार घन मीटर) |
|---|---|---|
| जून-सितंबर | 560 | 30 |
| अक्टूबर-जनवरी | 30 | 45 |
| फ़रवरी-मई | 10 | 55 |
(a) तालिका के आधार पर इस गाँव की जल समस्या के बारे में तीन तथ्य समझाइए। (3 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
पहला, लगभग 93 प्रतिशत वर्षा, 600 में से 560 मिमी, जून-सितंबर में होती है। दूसरा, गाँव सबसे अधिक पानी, 55 हज़ार घन मीटर, फ़रवरी-मई में इस्तेमाल करता है, जब केवल 10 मिमी वर्षा होती है। तीसरा, अक्टूबर-मई में वह वर्षा के महीनों से तीन गुना से अधिक पानी इस्तेमाल करता है, इसलिए उसे मानसून का पानी जमा करना होगा।
अंक योजना:
- वर्षा लगभग एक साथ आती है: साल की 600 मिमी में से 560 मिमी, यानी लगभग 93 प्रतिशत, जून-सितंबर में होती है — 1 अंक
- ज़रूरत तब सबसे अधिक है जब वर्षा सबसे कम है: गाँव फ़रवरी-मई में सबसे अधिक, 55 हज़ार घन मीटर, पानी इस्तेमाल करता है, जब केवल 10 मिमी वर्षा होती है — 1 अंक
- इसलिए कमी केवल कुल वर्षा की नहीं, मौसम की है: अक्टूबर-मई में इस्तेमाल होने वाला पानी (100 हज़ार घन मीटर) वर्षा के महीनों के इस्तेमाल से तीन गुना से भी अधिक है, इसलिए यदि मानसून का पानी जमा न हो, तो गाँव को भूमिगत जल घटाना पड़ेगा या कमी झेलनी पड़ेगी (तालिका से कोई अन्य प्रासंगिक बिंदु) — 1 अंक
(b) फ़रवरी-मई के इस्तेमाल के लिए गाँव को वर्षा से कितना पानी जमा करना होगा? एक कारण दीजिए कि इस गाँव के लिए ढका हुआ या भूमिगत भंडार खुले तालाब से बेहतर क्यों होगा। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
55 हज़ार घन मीटर, यानी फ़रवरी-मई का इस्तेमाल। गरम सूखे महीनों में खुले तालाब का बहुत पानी भाप बनकर उड़ जाता है और वह गंदा होता है, जबकि ढका या भूमिगत भंडार पानी साफ़ रखता है।
अंक योजना:
- 55 हज़ार घन मीटर, यानी फ़रवरी-मई में गाँव द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला पानी, जब केवल 10 मिमी वर्षा होती है — 1 अंक
- अर्ध-शुष्क इलाके में सूखे महीने गरम होते हैं, इसलिए खुले तालाब का बहुत-सा पानी भाप बनकर उड़ जाता है और वह गंदा भी हो सकता है, जबकि ढका या भूमिगत भंडार पानी को बचाकर साफ़ रखता है (कोई अन्य प्रासंगिक बिंदु) — 1 अंक
प्रश्न 18 (4 अंक)
नीचे दिया गया स्रोत पढ़िए और उसके बाद के प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
घास सबसे पहले लौटी
रघु 1974 में एक युवा रक्षक के रूप में सीतापानी पहाड़ियों के वन विभाग में आया। इससे एक साल पहले देश ने अपने घटते बाघों को बचाने के लिए एक राष्ट्रीय योजना शुरू की थी। अपनी पहली सर्दी में उसे बाघ के पंजों के केवल दो निशान मिले। जंगल का बड़ा हिस्सा कट चुका था, दर्जन भर गाँवों के मवेशी नालों तक चरते थे, और हिरणों के रास्तों पर शिकारियों के फंदे बिछे रहते थे।
उसी साल जंगल का बीच का हिस्सा बंद कर दिया गया। वहाँ पेड़ काटने पर रोक लगी, मवेशियों को बाहर रखा गया और हर तरह का शिकार बंद हुआ। कुछ गाँव वाले नाराज़ थे, क्योंकि भीतर की घास पीढ़ियों से उनके मवेशियों का चारा थी।
रघु बताता है कि सबसे पहले घास लौटी, फिर चीतल और जंगली सूअर, और उसके बाद ही बाघ। आज रिज़र्व में लगभग तीस बाघ हैं। उसके बीच के हिस्से से निकलने वाले नाले पूरी सूखी ऋतु बहते रहते हैं, और किनारे के गाँव उन्हीं से पानी लेते हैं। (सीतापानी और रघु काल्पनिक हैं।)
18.1 1973 में शुरू हुई उस राष्ट्रीय योजना का नाम बताइए जिसका उल्लेख स्रोत में है। (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
बाघ परियोजना (प्रोजेक्ट टाइगर)।
अंक योजना:
- बाघ परियोजना (प्रोजेक्ट टाइगर) — 1 अंक
18.2 रघु बताता है कि सबसे पहले घास लौटी, फिर चीतल और जंगली सूअर, और उसके बाद ही बाघ। समझाइए कि लौटने का यह क्रम हमें कौन-सी दो बातें बताता है। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
पहला, जंगल का जीवन एक भोजन-शृंखला है: घास चीतल और सूअरों का भोजन है, जो बाघ के शिकार हैं, इसलिए हर कड़ी नीचे की कड़ी के बाद लौटी। दूसरा, शिकारी जीव को बचाने के लिए उसके शिकार और आवास को सँभलना होता है, इसलिए चराई, कटाई और फंदे भी बंद करने पड़े।
अंक योजना:
- जंगल के जीव भोजन-शृंखला में एक-दूसरे पर निर्भर हैं: घास चीतल और जंगली सूअरों का भोजन है, और ये बाघ के शिकार हैं, इसलिए हर कड़ी अपने नीचे की कड़ी सँभलने के बाद ही लौट सकी — 1 अंक
- किसी शिकारी जीव को केवल उसका शिकार रोककर नहीं बचाया जा सकता: उसके शिकार-जीवों और आवास को भी सँभलना होता है, इसीलिए चराई, कटाई और हिरणों के रास्तों पर बिछे फंदे बंद करने पड़े (कोई अन्य प्रासंगिक बिंदु) — 1 अंक
18.3 जंगल का बीच का हिस्सा बंद होने पर कुछ गाँव वाले नाराज़ क्यों थे? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
उनसे भीतर की वह घास छिन गई जिस पर उनके मवेशी पीढ़ियों से चरते थे।
अंक योजना:
- उनके मवेशियों को पीढ़ियों से चारा देने वाली भीतर की घास उनसे छिन गई, जिससे उनकी आजीविका पर असर पड़ा — 1 अंक
प्रश्न 19 (3 अंक)
इस प्रश्न के लिए दिए गए भारत के रेखा-मानचित्र पर निम्नलिखित में से किन्हीं तीन स्थानों को दर्शाइए। हर एक को उपयुक्त चिह्न से अंकित कीजिए और उसका नाम लिखिए।

(i) रामागुंडम ताप विद्युत संयंत्र (1 अंक)
उत्तर।
- रामागुंडम: उत्तरी तेलंगाना में गोदावरी के किनारे, सही स्थान पर चिह्न सहित दर्शाया और नाम लिखा — 1 अंक

(ii) कोयंबटूर - एक सूती वस्त्र केंद्र (1 अंक)
उत्तर।
- कोयंबटूर: पश्चिमी तमिलनाडु में, पालघाट दर्रे के पास, सही स्थान पर चिह्न सहित दर्शाया और नाम लिखा — 1 अंक

(iii) तुंगभद्रा बाँध (1 अंक)
उत्तर।
- तुंगभद्रा बाँध: कर्नाटक में होसपेटे के पास तुंगभद्रा नदी पर, सही स्थान पर चिह्न सहित दर्शाया और नाम लिखा — 1 अंक

(iv) नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (1 अंक)
उत्तर।
- नेताजी सुभाष चंद्र बोस हवाई अड्डा: कोलकाता, पश्चिम बंगाल में, सही स्थान पर चिह्न सहित दर्शाया और नाम लिखा — 1 अंक

खंड ग - राजनीति विज्ञान (20 अंक)
प्रश्न 24 (2 अंक)
काल्पनिक लोकतंत्र नेलोरा में नगर सरकार ने सभी रेहड़ी-पटरी वालों को मुख्य बाज़ार की सड़क से हटने का आदेश दिया। एक महीने के भीतर रेहड़ी वालों ने शांतिपूर्ण विरोध किया, अखबारों ने उनके नुकसान की खबरें छापीं और पार्षदों ने नगर परिषद में यह मुद्दा उठाया। तब आदेश बदलकर तय घंटों में बिक्री की छूट दी गई। लोकतंत्र की उन दो विशेषताओं को समझाइए जिनसे इस निर्णय को सुधारना संभव हुआ।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
पहला, लोग शांति से विरोध कर सकते हैं और प्रेस खुलकर लिख सकता है, इसलिए गलत निर्णय पर बहस होती है। दूसरा, शासक चुने हुए पार्षदों को जवाब देते हैं और फिर चुनाव लड़ते हैं, इसलिए सुनना पड़ता है।
अंक योजना:
- अभिव्यक्ति की आज़ादी और सार्वजनिक बहस: लोग शांतिपूर्वक विरोध कर सकते हैं और प्रेस खुलकर खबरें दे सकता है, इसलिए गलत निर्णय पर सार्वजनिक चर्चा होती है और वह छिपा नहीं रह सकता (मान्य: पारदर्शिता) — 1 अंक
- शासक निर्वाचित प्रतिनिधियों के प्रति जवाबदेह होते हैं और उन्हें फिर से मतदाताओं का सामना करना होता है, इसलिए उन्हें शिकायतें सुननी पड़ती हैं और गलत निर्णय बदलना पड़ सकता है (मान्य: लोग न्यायालय भी जा सकते हैं; कोई अन्य प्रासंगिक बिंदु) — 1 अंक
प्रश्न 25 (2 अंक)
काल्पनिक संघ सुमेरा में सरकारी अस्पताल प्रांत चलाते हैं। राष्ट्रीय संसद, जिसमें एक दल का साधारण बहुमत है, प्रांतों से पूछे बिना एक कानून पास करती है जो अस्पतालों को प्रांतों से ले लेता है। समझाइए कि भारत जैसे संघ में ऐसा बदलाव इस तरह क्यों नहीं किया जा सकता। दो कारण दीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
पहला, संविधान हर स्तर के विषय तय करता है, इसलिए एक स्तर दूसरे के विषय नहीं ले सकता। दूसरा, ऐसे बदलाव के लिए दोनों स्तरों की सहमति चाहिए: भारत में हर सदन का दो-तिहाई और आधे राज्यों की विधानसभाएँ।
अंक योजना:
- हर स्तर की शक्तियाँ संविधान में तय हैं: राज्यों के विषय, जैसे स्वास्थ्य, उनके अपने हैं, और एक स्तर दूसरे स्तर के विषय अपने आप नहीं ले सकता — 1 अंक
- शक्तियों के मूल बँटवारे को बदलने के लिए दोनों स्तरों की सहमति चाहिए: भारत में इसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत और कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं की स्वीकृति ज़रूरी है, और ऐसा न करने वाले कानून को न्यायालय रद्द कर सकते हैं (कोई अन्य प्रासंगिक बिंदु) — 1 अंक
प्रश्न 26 (3 अंक)
काल्पनिक देशों की तीन व्यवस्थाओं के बारे में पढ़िए। हर एक के बारे में बताइए कि वह सत्ता की साझेदारी का उदाहरण है या नहीं, और कारण दीजिए। जहाँ हो, सत्ता की साझेदारी के रूप का नाम बताइए।
(i) तेराल में हर प्रांत अपनी सरकार चुनता है, जो स्कूल और सड़कें चलाती है; राष्ट्रीय सरकार उसे मनमाने ढंग से भंग नहीं कर सकती।
(ii) अंबर नगर में महापौर को निर्वाचित पार्षद चुनते हैं, और उसका समर्थन खोने पर वे उसे हटा सकते हैं।
(iii) वारोस में सरकार ने तय किया है कि सभी बड़े सरकारी पद सबसे बड़े भाषायी समूह के सदस्यों को मिलेंगे, क्योंकि वह बहुमत में है।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
(i) हाँ, ऊर्ध्वाधर वितरण: प्रांतों की अपनी शक्तियाँ हैं जिन्हें राष्ट्रीय सरकार मनमाने ढंग से नहीं छीन सकती। (ii) हाँ, क्षैतिज वितरण: परिषद कार्यपालिका की प्रमुख, महापौर, पर अंकुश रखती है। (iii) नहीं: यह बहुसंख्यकवाद है; बहुमत सारे पद लेकर बाकियों को बाहर करता है, जैसे श्रीलंका में।
अंक योजना:
- (i) हाँ: सत्ता का ऊर्ध्वाधर वितरण, यानी अलग-अलग स्तरों की सरकारों के बीच; प्रांतों की अपनी शक्तियाँ हैं जिन्हें राष्ट्रीय सरकार मनमाने ढंग से नहीं छीन सकती — 1 अंक
- (ii) हाँ: नगर की सरकार के भीतर सत्ता का क्षैतिज वितरण; निर्वाचित परिषद अपनी कार्यपालिका की प्रमुख, महापौर, पर अंकुश रखती है, इसलिए सत्ता एक हाथ में नहीं रहती (नियंत्रण और संतुलन) — 1 अंक
- (iii) नहीं: यह बहुसंख्यकवाद है; बहुसंख्यक समूह सारे बड़े पद ले लेता है और बाकियों को बाहर कर देता है, जो सत्ता की साझेदारी का उलटा है, और इससे अविश्वास और टकराव पैदा हो सकता है, जैसा श्रीलंका में हुआ — 1 अंक
प्रश्न 27 (5 अंक)
तालिका भारत के एक काल्पनिक राज्य के चार निर्वाचित निकायों में महिलाओं की सीटों का हिस्सा दिखाती है। (आँकड़े काल्पनिक हैं।) तालिका का अध्ययन कीजिए और उसके बाद के प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
| निर्वाचित निकाय | 1990 में महिलाओं की सीटों का हिस्सा (%) | 2020 में महिलाओं की सीटों का हिस्सा (%) |
|---|---|---|
| ग्राम पंचायतें | 4 | 38 |
| नगरपालिकाएँ | 3 | 36 |
| राज्य विधानसभा | 4 | 9 |
| लोकसभा में राज्य की सीटें | 5 | 12 |
(a) तालिका से महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के बारे में निकलने वाले तीन निष्कर्ष समझाइए। (3 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
पहला, पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिलाओं का हिस्सा एक-तिहाई से अधिक हो गया, क्योंकि वहाँ कम से कम एक-तिहाई सीटें आरक्षित हैं। दूसरा, विधानसभा और लोकसभा में, जहाँ आरक्षण नहीं था, उनके पास केवल लगभग दसवाँ हिस्सा है, जो आबादी में उनके हिस्से से बहुत कम है। तीसरा, 1990 में पितृसत्ता के कारण हर जगह हिस्सा बहुत छोटा था; बड़ी बढ़त वहीं आई जहाँ कानून ने सीटें आरक्षित कीं।
अंक योजना:
- स्थानीय निकाय: महिलाओं का हिस्सा लगभग शून्य से बढ़कर एक-तिहाई से अधिक हो गया, क्योंकि 1992 के संशोधनों के बाद से पंचायतों और नगरपालिकाओं में कम से कम एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं (मान्य: कुछ महिलाएँ अनारक्षित सीटें भी जीतती हैं) — 1 अंक
- विधायिकाएँ: विधानसभा और लोकसभा में, जहाँ कोई सीट आरक्षित नहीं थी, महिलाओं के पास अब भी लगभग दसवाँ हिस्सा ही है, जो आबादी में उनके आधे हिस्से से बहुत कम है (मान्य: 2023 का एक कानून अगली जनगणना और परिसीमन के बाद इन सीटों में से एक-तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित करेगा) — 1 अंक
- बदलाव अपने आप नहीं, कानून से आया: 1990 में हर जगह महिलाओं का हिस्सा बहुत छोटा था, क्योंकि पितृसत्तात्मक सोच उन्हें सार्वजनिक जीवन से दूर रखती थी, और बड़ी बढ़त वहीं हुई जहाँ सीटें आरक्षित हुईं (मान्य: दल महिलाओं को कम टिकट देते हैं; कोई अन्य प्रासंगिक बिंदु) — 1 अंक
(b) सीटों के आरक्षण के अलावा ऐसे दो कदम सुझाइए जिनसे राज्य विधानसभा में महिलाओं का हिस्सा बढ़ सके। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
पहला, दल महिलाओं को कहीं अधिक टिकट दे सकते हैं, जैसे एक-तिहाई टिकट। दूसरा, घरेलू काम बँटे और अधिक लड़कियाँ पढ़ें तथा महिलाएँ वेतन वाला काम करें, तो अधिक महिलाओं के पास सार्वजनिक जीवन के लिए समय और आत्मविश्वास होगा।
अंक योजना:
- राजनीतिक दल महिला उम्मीदवारों को कहीं अधिक टिकट दे सकते हैं, जैसे अपने लगभग एक-तिहाई टिकट, जैसा कि दलों में सुधार के लिए सुझाया गया है — 1 अंक
- घरेलू काम अधिक बराबरी से बाँटे जाएँ, और लड़कियों की शिक्षा तथा महिलाओं का वेतन वाला काम बढ़ाया जाए, ताकि अधिक महिलाओं के पास सार्वजनिक जीवन के लिए समय, आत्मविश्वास और अनुभव हो (मान्य: पंचायतों में काम कर चुकी महिलाओं को ऊँचे पदों का चुनाव लड़ने में मदद दी जाए; कोई अन्य प्रासंगिक बिंदु) — 1 अंक
अथवा
एक काल्पनिक देश की तीन घटनाओं के बारे में पढ़िए।
(i) एक स्कूल की वाद-विवाद प्रतियोगिता में एक विद्यार्थी कहता है कि एक खास धर्म के अनुयायी 'स्वभाव से ही आलसी' होते हैं, और सभागार में बहुत-से लोग सहमति में सिर हिलाते हैं।
(ii) चुनाव से पहले एक नेता अपनी सभाएँ पूजा-स्थलों पर करता है और अपने धर्म के मतदाताओं से कहता है कि केवल उनके 'अपने' उम्मीदवार ही उन्हें 'दूसरों' से बचा सकते हैं।
(iii) एक अफ़वाह फैलने के बाद एक भीड़ दूसरे धर्म के लोगों की दुकानों पर हमला करके उन्हें जला देती है।
निम्नलिखित के उत्तर दीजिए।
(a) हर घटना सांप्रदायिकता का कौन-सा रूप दिखाती है, उसका नाम बताइए और उसे समझाइए। (3 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
(i) रोज़मर्रा की मान्यताएँ: दूसरे धर्म के बारे में पूर्वाग्रह और अपने धर्म को श्रेष्ठ मानना। (ii) धार्मिक आधार पर राजनीतिक गोलबंदी: पवित्र स्थलों, भावनात्मक अपील और डर से एक धर्म के अनुयायियों को राजनीति में एकजुट करना। (iii) सांप्रदायिक हिंसा: नफ़रत दूसरे धर्म के लोगों पर हमलों में बदल जाती है।
अंक योजना:
- (i) रोज़मर्रा की मान्यताओं में सांप्रदायिकता: दूसरे समुदाय के बारे में धार्मिक पूर्वाग्रह और रूढ़ छवियाँ, और यह मान्यता कि अपना धर्म दूसरों से श्रेष्ठ है — 1 अंक
- (ii) धार्मिक आधार पर राजनीतिक गोलबंदी: एक धर्म के अनुयायियों को राजनीति में एकजुट करने के लिए पवित्र स्थलों और प्रतीकों, भावनात्मक अपील और सीधे डर का इस्तेमाल — 1 अंक
- (iii) सांप्रदायिक हिंसा: समुदायों के बीच की नफ़रत दूसरे धर्म के लोगों पर हमलों, दंगों और तोड़फोड़ में बदल जाती है — 1 अंक
(b) समझाइए कि ऐसी राजनीति लोकतंत्र को किन दो तरीकों से नुकसान पहुँचाती है। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
पहला, यह लोगों को बराबर नागरिक नहीं, धार्मिक गुट का सदस्य मानती है, इसलिए एक समूह दबदबा बना सकता है और दूसरा असुरक्षित महसूस करता है। दूसरा, यह नफ़रत फैलाती है जो हिंसा बन सकती है, और रोज़गार और स्कूल जैसे मुद्दों को राजनीति से हटा देती है।
अंक योजना:
- यह लोगों को बराबर नागरिक नहीं, बल्कि एक धार्मिक गुट का सदस्य मानती है, इसलिए एक समुदाय दबदबा बनाने की कोशिश कर सकता है और दूसरा खुद को अलग-थलग और असुरक्षित महसूस करता है, जो सबके बराबर अधिकारों के विरुद्ध है — 1 अंक
- यह नफ़रत और डर फैलाती है जो हिंसा में बदल सकते हैं, देश को बाँटती है, और रोज़गार, स्कूल और स्वास्थ्य जैसे असली मुद्दों को राजनीति से बाहर कर देती है (कोई अन्य प्रासंगिक बिंदु) — 1 अंक
प्रश्न 28 (4 अंक)
नीचे दिया गया स्रोत पढ़िए और उसके बाद के प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
'अपनी आवाज़'
लीला रावत चालीस वर्षों से पहाड़ी राज्य मेघपुर से खबरें भेजती रही हैं। वे कहती हैं, 'जब मैंने शुरुआत की, तब यहाँ की लगभग सारी सीटें दो राष्ट्रीय दलों में बँटी थीं। उनके नेता मैदानों से आते थे और हमारे गाँवों में कम ही आते थे। लोगों को लगता था कि उनकी बोलियों, उनके जंगलों या उनकी अदरक और संतरों की कीमत की बात करने वाला कोई नहीं है।'
'फिर कुछ शिक्षकों और किसानों ने मेघपुर जन पार्टी बनाई। उसने स्थानीय भाषाओं में पढ़ाने वाले प्राथमिक स्कूलों और पहाड़ी फ़सलों के उचित दाम की माँग की। दस साल के भीतर वह राज्य सरकार चला रही थी, और अब उसके सदस्य संसद में भी पहाड़ी ज़िलों की समस्याएँ उठाते हैं। राष्ट्रीय दल भी बदले। वे पहाड़ों से उम्मीदवार चुनने लगे और अपने वादे हमारी भाषाओं में छापने लगे।'
'एक बात मुझे खटकती है। संस्थापक ने तीस साल तक दल का नेतृत्व किया। पिछले साल जब वे सेवानिवृत्त हुए, तो उनका बेटा दल का अध्यक्ष बन गया, और दल के सदस्यों से किसी ने पूछा तक नहीं।' (लीला रावत, मेघपुर और उसका दल काल्पनिक हैं।)
28.1 पहाड़ों के लोग मेघपुर जन पार्टी की ओर क्यों मुड़े? स्रोत से एक कारण दीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
राष्ट्रीय दल उनकी भाषाओं और फ़सलों के दाम की अनदेखी करते थे, जबकि नए दल ने स्थानीय भाषा के स्कूलों और उचित दाम की माँग की।
अंक योजना:
- उन्हें लगता था कि राष्ट्रीय दल उनकी भाषाओं, जंगलों या फ़सलों के दाम की बात नहीं करते, जबकि नए दल ने ये माँगें उठाईं, जैसे स्थानीय भाषाओं में स्कूल और पहाड़ी फ़सलों का उचित दाम — 1 अंक
28.2 ऐसे राज्य स्तरीय दलों का उदय भारत में लोकतंत्र के लिए किन दो तरीकों से अच्छा रहा है? समझाइए। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
पहला, वे उपेक्षित क्षेत्रीय ज़रूरतों और पहचानों को आवाज़ देते हैं, जो राज्य सरकार और संसद तक पहुँचती हैं। दूसरा, वे राष्ट्रीय दलों को भी स्थानीय उम्मीदवार चुनने जैसे कदमों पर मजबूर करते हैं, इसलिए मतदाताओं को सच्चा विकल्प मिलता है।
अंक योजना:
- अधिक लोगों का प्रतिनिधित्व: राज्य स्तरीय दल उन क्षेत्रीय ज़रूरतों और पहचानों को आवाज़ देते हैं जिनकी राष्ट्रीय दलों ने अनदेखी की थी, इसलिए ये राज्य सरकार और संसद तक पहुँचती हैं, और संसद अधिक विविध बनती है — 1 अंक
- अधिक प्रतिस्पर्धा और विकल्प: राष्ट्रीय दलों को क्षेत्रीय माँगों पर ध्यान देना पड़ता है, जैसे स्थानीय उम्मीदवार चुनना, इसलिए मतदाताओं को सच्चा विकल्प मिलता है (मान्य: राज्य स्तरीय दलों ने केंद्र की गठबंधन सरकारों में सत्ता में हिस्सा पाया है, जिससे संघवाद मज़बूत हुआ है; कोई अन्य प्रासंगिक बिंदु) — 1 अंक
28.3 स्रोत का अंतिम अनुच्छेद राजनीतिक दलों के सामने की कौन-सी चुनौती दिखाता है? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
वंशवादी उत्तराधिकार: सदस्यों से पूछे बिना सबसे ऊँचा पद संस्थापक के बेटे को मिल गया, इसलिए आम सदस्यों को आगे बढ़ने का उचित मौका नहीं मिलता।
अंक योजना:
- वंशवादी उत्तराधिकार: सबसे ऊँचा पद सदस्यों से पूछे बिना संस्थापक के बेटे को मिल गया, इसलिए आम सदस्यों को शीर्ष तक पहुँचने का उचित मौका नहीं मिलता (मान्य: आंतरिक लोकतंत्र की कमी) — 1 अंक
खंड घ - अर्थशास्त्र (20 अंक)
प्रश्न 35 (3 अंक)
एक काल्पनिक ज़िले का स्वास्थ्य विभाग हर नवजात शिशु को टीका लगाने और यह पक्का करने का अभियान शुरू करता है कि माताएँ स्वास्थ्य केंद्र में ही बच्चे को जन्म दें। पाँच साल बाद वह जानना चाहता है कि अभियान सफल हुआ या नहीं। निम्नलिखित के उत्तर दीजिए।
(i) विभाग को मुख्य रूप से विकास के किस सूचक को देखना चाहिए? एक कारण दीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
शिशु मृत्यु दर, क्योंकि यह हर 1,000 जीवित जन्मों पर एक वर्ष से कम आयु के शिशुओं की मौतें गिनती है।
अंक योजना:
- शिशु मृत्यु दर: यह बताती है कि हर 1,000 जीवित जन्मे बच्चों में से कितने एक वर्ष की आयु से पहले मर जाते हैं, और अभियान का उद्देश्य बच्चों को पहले वर्ष में जीवित रखना है — 1 अंक
(ii) समझाइए कि ज़िले की प्रति व्यक्ति आय या उसकी साक्षरता दर से यह क्यों नहीं पता चलेगा कि अभियान सफल हुआ या नहीं। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
प्रति व्यक्ति आय औसत आय है; यह फ़सलों के दाम या रोज़गार से बदलती है, शिशुओं के बचने से नहीं। साक्षरता दर 7 वर्ष से अधिक के पढ़े-लिखे लोगों को गिनती है; यह पढ़ाई दिखाती है, शिशु-स्वास्थ्य नहीं।
अंक योजना:
- प्रति व्यक्ति आय ज़िले के लोगों की औसत आय है; यह फ़सलों के दाम या रोज़गार के कारण घट-बढ़ सकती है, और इससे यह पता नहीं चलता कि कितने शिशु बचे — 1 अंक
- साक्षरता दर 7 वर्ष और उससे अधिक आयु के उन लोगों का अनुपात है जो पढ़-लिख सकते हैं; यह पढ़ाई से बदलती है, शिशुओं के स्वास्थ्य से नहीं, और आज बचाया गया शिशु इसमें कई वर्ष बाद ही गिना जाएगा (कोई अन्य प्रासंगिक बिंदु) — 1 अंक
प्रश्न 36 (3 अंक)
रामू एक कस्बे में फ़ुटपाथ पर जूतों की मरम्मत करता है और रोज़ थोड़ा-बहुत कमाता है। उसे अपनी एक छोटी दुकान लगाने के लिए ₹15,000 चाहिए। उधार की उन तीन शर्तों को समझाइए जिनके कारण उसे बैंक से यह ऋण मिलना कठिन हो सकता है।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
पहला, बैंक ज़मीन या मकान जैसा समर्थक ऋणाधार चाहता है, जो रामू के पास नहीं है। दूसरा, उसे पहचान और नियमित आय के प्रमाण चाहिए, पर रामू की कमाई रोज़ बदलती है और कहीं दर्ज नहीं है। तीसरा, बैंक तय तारीखों पर ब्याज सहित किस्तें चाहता है, जो घटती-बढ़ती कमाई में कठिन है।
अंक योजना:
- समर्थक ऋणाधार: बैंक ऋण चुकने तक ज़मीन या मकान जैसी कोई संपत्ति गारंटी के रूप में माँगता है; रामू के पास ऐसी कोई संपत्ति नहीं है, और समर्थक ऋणाधार का न होना गरीबों को बैंक ऋण न मिलने का एक मुख्य कारण है — 1 अंक
- आवश्यक कागज़ात: बैंक को पहचान, पते और नियमित आय के प्रमाण जैसे कागज़ चाहिए; रामू की छोटी कमाई रोज़ बदलती है और कहीं लिखी नहीं जाती — 1 अंक
- भुगतान का तरीका और ब्याज: बैंक तय तारीखों पर ब्याज सहित तय किस्तें चाहता है, और रामू की रोज़ की कमाई घटती-बढ़ती है, इसलिए उसे किस्तें छूटने का डर हो सकता है (मान्य: तब वह किसी जान-पहचान वाले साहूकार के पास जा सकता है जो बिना कागज़ के, पर ऊँची दर पर उधार देता है; कोई अन्य प्रासंगिक बिंदु) — 1 अंक
प्रश्न 37 (3 अंक)
तालिका भारत के कालीन बुनने वाले एक काल्पनिक समूह (क्लस्टर) के बारे में कुछ तथ्य देती है। (आँकड़े काल्पनिक हैं।)
| 1990 | 2020 | |
|---|---|---|
| विदेशी खरीदार ऑर्डर कैसे देते हैं | एक एजेंट साल में एक बार आता है | ई-मेल और वीडियो कॉल से, किसी भी समय |
| 1 किलो कालीन यूरोप भेजने का खर्च (₹, 2020 की कीमतों पर) | 300 | 90 |
| आयातित ऊनी धागे पर कर (%) | 60 | 10 |
| विदेश में बिकने वाले कालीनों का हिस्सा (%) | 10 | 45 |
पहले तीन बदलावों में से हर एक वैश्वीकरण के किस कारक को दिखाता है, उसका नाम बताइए, और समझाइए कि हर बदलाव से इस समूह को विदेश में अधिक कालीन बेचने में कैसे मदद मिल सकती है।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
पहला, ई-मेल और वीडियो कॉल सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी है: विदेशी खरीदार किसी भी समय ऑर्डर और दाम तय कर सकते हैं। दूसरा, ढुलाई का खर्च ₹300 से ₹90 प्रति किलो होना परिवहन प्रौद्योगिकी है: कालीन सस्ते में यूरोप पहुँचते हैं। तीसरा, धागे पर कर 60 से 10 प्रतिशत होना व्यापार का उदारीकरण है: अच्छा धागा सस्ता मिलता है।
अंक योजना:
- ऑर्डर: सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी; ई-मेल और वीडियो कॉल से विदेशी खरीदार किसी भी समय डिज़ाइन देख सकते हैं, ऑर्डर दे सकते हैं और दाम तय कर सकते हैं, उन्हें एजेंट के सालाना दौरे का इंतज़ार नहीं करना पड़ता — 1 अंक
- ढुलाई: परिवहन प्रौद्योगिकी; एक किलो यूरोप भेजने का खर्च ₹300 से घटकर ₹90 हो गया, इसलिए कालीन दूर के खरीदारों तक सस्ते में पहुँचते हैं और होड़ लायक दामों पर बिक सकते हैं — 1 अंक
- धागा: विदेशी व्यापार का उदारीकरण; आयातित ऊनी धागे पर कर 60 से घटकर 10 प्रतिशत रह गया, इसलिए बुनकर विदेश से अच्छा धागा सस्ते में खरीदकर कम लागत पर विदेशी खरीदारों की पसंद के कालीन बना सकते हैं (कोई अन्य प्रासंगिक बिंदु) — 1 अंक
प्रश्न 38 (5 अंक)
तालिका एक काल्पनिक ज़िले की उन इकाइयों का ब्योरा देती है जिनमें ज़िले के सभी श्रमिक काम करते हैं। (आँकड़े काल्पनिक हैं, केवल अभ्यास के लिए।) तालिका का अध्ययन कीजिए और उसके बाद के प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
| इकाई | स्वामी | सरकार के पास पंजीकृत | श्रमिक | श्रमिकों को सवेतन छुट्टी और भविष्य निधि | काम |
|---|---|---|---|---|---|
| P | राज्य सरकार | हाँ | 300 | हाँ | ज़िले के सरकारी स्कूल चलाती है |
| Q | एक निजी कंपनी | हाँ | 200 | हाँ | एक कारखाने में साइकिल के पुर्ज़े बनाती है |
| R | एक परिवार | नहीं | 20 | नहीं | सड़क किनारे खाने का ढाबा चलाता है |
| S | केंद्र सरकार | हाँ | 500 | हाँ | रेल के डिब्बे बनाती है |
| T | एक व्यापारी | नहीं | 80 | नहीं | बुनकरों के घरों में करघों पर साड़ियाँ बुनवाता है |
| U | किसान परिवार | नहीं | 1,400 | नहीं | अपने छोटे खेतों में सब्ज़ियाँ उगाते हैं |
(i) ज़िले के कितने प्रतिशत श्रमिक संगठित क्षेत्रक में काम करते हैं? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
P, Q और S संगठित हैं: 2,500 में से 300 + 200 + 500 = 1,000 श्रमिक, यानी 40 प्रतिशत।
अंक योजना:
- P, Q और S पंजीकृत हैं और श्रमिकों को सुविधाएँ देती हैं: 2,500 में से 300 + 200 + 500 = 1,000 श्रमिक, यानी 40 प्रतिशत — 1 अंक
(ii) यदि इकाई T सरकार के पास पंजीकरण कराकर रोज़गार से जुड़े उसके नियमों का पालन करने लगे, तो ज़िले के कितने प्रतिशत श्रमिक संगठित क्षेत्रक में होंगे? T के बुनकरों के लिए क्या बदलेगा? (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
2,500 में से 1,080, यानी लगभग 43 प्रतिशत श्रमिक संगठित होंगे। T के बुनकरों को नियमित शर्तें, तय घंटे, न्यूनतम मज़दूरी, सवेतन छुट्टी और भविष्य निधि मिलेगी, और उन्हें यों ही हटाया नहीं जा सकेगा।
अंक योजना:
- 2,500 में से 1,000 + 80 = 1,080 श्रमिक, यानी लगभग 43 प्रतिशत (43.2 प्रतिशत) — 1 अंक
- बुनकर न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम जैसे कानूनों के दायरे में आ जाएँगे, उन्हें काम की नियमित शर्तें, तय घंटे, सवेतन छुट्टी और भविष्य निधि मिलेगी, और ऑर्डर घटने पर उन्हें यों ही हटाया नहीं जा सकेगा (कोई अन्य प्रासंगिक बिंदु) — 1 अंक
(iii) एक योजनाकार कहता है कि R जैसी 200 और नौकरियों के बजाय Q जैसी 200 और नौकरियाँ पैदा करना अधिक ज़रूरी है। इस विचार के समर्थन में दो कारण दीजिए। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
पहला, नियमित आय से परिवार योजना बना, बचत कर, बच्चों को स्कूल में रख और बैंक से ऋण ले सकते हैं। दूसरा, ऐसी नौकरियों में कानूनी सुरक्षा, सवेतन छुट्टी और भविष्य निधि मिलती है, जबकि R जैसी नौकरियाँ कम वेतन वाली और अनियमित हैं।
अंक योजना:
- नियमित और सुरक्षित आय से परिवार योजना बना सकते हैं, बचत कर सकते हैं, बच्चों को स्कूल में रख सकते हैं और बैंकों से ऋण भी ले सकते हैं, न कि रोज़ कमाने-खाने पर जिएँ — 1 अंक
- ऐसी नौकरियों में कानून की सुरक्षा मिलती है, जैसे सवेतन छुट्टी, भविष्य निधि और सुरक्षित काम की परिस्थितियाँ, जबकि R जैसी नौकरियाँ कम वेतन वाली, अनियमित और असुरक्षित हैं (कोई अन्य प्रासंगिक बिंदु) — 1 अंक
अथवा
काल्पनिक ज़िले की ऊपर दी गई तालिका के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(i) कौन-सी इकाइयाँ सार्वजनिक क्षेत्रक में हैं, और वे मिलकर कितने श्रमिकों को काम देती हैं? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
P और S, जिनकी स्वामी सरकार है; वे मिलकर 300 + 500 = 800 श्रमिकों को काम देती हैं।
अंक योजना:
- P और S, जिनकी स्वामी सरकार है; वे मिलकर 300 + 500 = 800 श्रमिकों को काम देती हैं (अंक के लिए दोनों ज़रूरी) — 1 अंक
(ii) निजी स्वामित्व वाली इकाइयों के कितने प्रतिशत श्रमिक संगठित क्षेत्रक में काम करते हैं? इससे क्या पता चलता है? (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
निजी इकाइयों में 1,700 श्रमिक हैं, जिनमें केवल Q के 200 संगठित हैं: लगभग 12 प्रतिशत। इसलिए यहाँ निजी क्षेत्रक के ज़्यादातर श्रमिक असंगठित हैं, और 1,000 संगठित नौकरियों में से 800 सार्वजनिक इकाइयों में हैं।
अंक योजना:
- निजी इकाइयाँ Q, R, T और U कुल 200 + 20 + 80 + 1,400 = 1,700 श्रमिकों को काम देती हैं, जिनमें से केवल Q के 200 संगठित हैं: 200 ÷ 1,700 × 100 = लगभग 12 प्रतिशत — 1 अंक
- निजी इकाइयों के ज़्यादातर श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में हैं, और ज़िले की 1,000 संगठित नौकरियों में से 800 सार्वजनिक इकाइयों में हैं, इसलिए यहाँ सुरक्षित नौकरियाँ बड़े पैमाने पर सरकारी इकाइयों पर टिकी हैं (कोई अन्य प्रासंगिक बिंदु) — 1 अंक
(iii) आर्थिक गतिविधि का कौन-सा क्षेत्रक ज़िले के ज़्यादातर असंगठित श्रमिकों को काम देता है? असंगठित श्रमिकों में उसका हिस्सा निकालिए, और एक कारण दीजिए कि इस क्षेत्रक का काम ज़्यादातर असंगठित क्यों है। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
प्राथमिक क्षेत्रक: U के 1,400 खेतिहर श्रमिक 1,500 असंगठित श्रमिकों का लगभग 93 प्रतिशत हैं। छोटे पारिवारिक खेत पंजीकृत नहीं होते, इसलिए घंटों, मज़दूरी या छुट्टी के नियम लागू नहीं होते।
अंक योजना:
- प्राथमिक क्षेत्रक: U के 1,400 खेतिहर श्रमिक 1,500 असंगठित श्रमिकों में से 1,400, यानी लगभग 93 प्रतिशत हैं — 1 अंक
- यहाँ खेती छोटे पारिवारिक खेतों पर होती है जो सरकार के पास पंजीकृत नहीं हैं, इसलिए घंटों, मज़दूरी या छुट्टी के कोई नियम लागू नहीं होते, और काम और आय मौसम के साथ घटते-बढ़ते हैं (कोई अन्य प्रासंगिक बिंदु) — 1 अंक