पत्र लेखन क्या है?
पत्र लेखन विचारों, सूचनाओं अथवा भावनाओं को लिखित रूप में किसी व्यक्ति/संस्था तक पहुँचाने की विधि है। हिंदी में पत्र मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं — औपचारिक पत्र (Formal Letter) और अनौपचारिक पत्र (Informal Letter)। परीक्षा में यह निबंध का विकल्प है (3-4 अंक)।
औपचारिक पत्र का प्रारूप
औपचारिक पत्र प्रधानाचार्य, अधिकारी, संपादक आदि को लिखे जाते हैं। इसका प्रारूप इस प्रकार है:
- दिनांक (बाएँ या दाएँ ऊपर)
- सेवा में, — प्राप्तकर्ता का पदनाम व पता
- विषय: — पत्र का संक्षिप्त विषय एक पंक्ति में
- संबोधन: महोदय/महोदया,
- मुख्य विषय-वस्तु — 2-3 अनुच्छेदों में स्पष्ट व संक्षिप्त वर्णन
- समापन: धन्यवाद सहित / सधन्यवाद
- भवदीय/प्रार्थी — हस्ताक्षर व नाम
अनौपचारिक पत्र का प्रारूप
अनौपचारिक पत्र परिवारजनों, मित्रों, संबंधियों को लिखे जाते हैं। इसका प्रारूप इस प्रकार है:
- पता व दिनांक (ऊपर बाएँ)
- संबोधन: पूज्य/आदरणीय (बड़ों के लिए) / प्रिय (मित्रों/छोटों के लिए)
- अभिवादन: सादर चरण-स्पर्श / सप्रेम नमस्ते
- मुख्य विषय-वस्तु — आत्मीय, सहज भाषा में कुशल-क्षेम व मुख्य बात
- समापन: आपका आज्ञाकारी / तुम्हारा प्रिय
- हस्ताक्षर व नाम
परीक्षा में प्रायः पूछे जाने वाले पत्र-प्रकार
औपचारिक:
- प्रधानाचार्य को प्रार्थना-पत्र (अवकाश हेतु, शुल्क-माफी हेतु, प्रमाण-पत्र हेतु)
- संपादक को पत्र (सड़क की समस्या, प्रदूषण, बिजली-कटौती आदि की शिकायत)
- अधिकारी को शिकायती पत्र (सफाई, जल-आपूर्ति आदि विषयक)
अनौपचारिक:
- माता-पिता/भाई-बहन को पत्र (कुशल-क्षेम, परीक्षा परिणाम, त्योहार आदि विषयक)
- मित्र को पत्र (बधाई, सलाह, निमंत्रण आदि)
[Exam Tip] पत्र लेखन में प्रारूप (दिनांक, विषय, संबोधन, समापन) के अंकों की गणना अलग से होती है — प्रारूप की छोटी-सी चूक भी अंक कटौती का कारण बन सकती है, अतः प्रारूप को याद रखना अत्यंत आवश्यक है।