प्रश्न पत्र एक नज़र में
कक्षा 10 विज्ञान (086) का बोर्ड प्रश्न पत्र 80 अंक और 3 घंटे का होता है, जिसमें 39 प्रश्न हैं और सभी अनिवार्य हैं। 100 में से बाकी 20 अंक आपके विद्यालय के आंतरिक मूल्यांकन से आते हैं।
प्रश्न पत्र तीन खंडों में है, हर विषय का एक खंड, और इनके उत्तर उत्तर-पुस्तिका के तीन अलग-अलग भागों में लिखे जाते हैं:
| प्रश्न का प्रकार | प्रति प्रश्न अंक | क: जीव विज्ञान | ख: रसायन विज्ञान | ग: भौतिक विज्ञान | कुल अंक |
|---|---|---|---|---|---|
| बहुविकल्पीय (MCQ) | 1 | प्र. 1-7 | प्र. 17-23 | प्र. 30-31 | 16 |
| अभिकथन-कारण | 1 | प्र. 8-9 | प्र. 24 | प्र. 32 | 4 |
| अति लघु-उत्तरीय | 2 | प्र. 10-12 | प्र. 25 | प्र. 33-34 | 12 |
| लघु-उत्तरीय | 3 | प्र. 13-14 | प्र. 26-27 | प्र. 35-37 | 21 |
| प्रकरण आधारित, उप-भाग 1 + 1 + 2 | 4 | प्र. 15 | प्र. 28 | प्र. 38 | 12 |
| दीर्घ-उत्तरीय | 5 | प्र. 16 | प्र. 29 | प्र. 39 | 15 |
| खंड का योग | 30 (16 प्रश्न) | 25 (13 प्रश्न) | 25 (10 प्रश्न) | 80 |
इस ढाँचे पर ध्यान दीजिए। 1 अंक के 20 प्रश्नों में से 9 जीव विज्ञान में हैं, जबकि भौतिक विज्ञान में केवल 2 बहुविकल्पीय और एक अभिकथन-कारण प्रश्न है, पर 3 अंक के तीन प्रश्न हैं, जिनमें कई आंकिक या आरेख वाले होते हैं। सैंपल पेपर और 2026 के दोनों बोर्ड प्रश्न पत्रों में हर प्रश्न संख्या पर प्रश्न का प्रकार और अंक एक जैसे हैं।
3 घंटे शुरू होने से पहले 15 मिनट प्रश्न पत्र पढ़ने के लिए मिलते हैं। 2025 और 2026 के बोर्ड प्रश्न पत्र सुबह 10:15 बजे बाँटे गए, 10:30 तक केवल पढ़ना था और लिखना 10:30 बजे शुरू हुआ।
प्रश्न पत्र तीन स्तरों पर बनता है: लगभग 50% (करीब 40 अंक) याद रखने और समझने के, 30% (करीब 24 अंक) लागू करने के, और 20% (करीब 16 अंक) विश्लेषण और मूल्यांकन के, जैसे "कौन सही है और क्यों", "प्रयोग बदल दिया जाए तो क्या होगा" या किसी ग्राफ़ को पढ़ना।
आंतरिक विकल्प
प्रश्न पत्र में समग्र विकल्प नहीं है, पर 9 प्रश्नों में आंतरिक विकल्प ('अथवा') है, हर खंड में तीन:
| खंड | 'अथवा' वाला छोटा प्रश्न | प्रकरण आधारित प्रश्न | दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न |
|---|---|---|---|
| क – जीव विज्ञान | 2 अंक का एक प्रश्न (प्र. 11 या 12) | प्र. 15 का 2 अंक वाला भाग | प्र. 16 |
| ख – रसायन विज्ञान | 3 अंक का एक प्रश्न (प्र. 26 या 27) | प्र. 28 का 2 अंक वाला भाग | प्र. 29 |
| ग – भौतिक विज्ञान | 2 अंक का एक प्रश्न (प्र. 33 या 34) | प्र. 38 का 2 अंक वाला भाग | प्र. 39 |
किस छोटे प्रश्न में 'अथवा' होगा, यह हर प्रश्न पत्र में बदलता है: सैंपल पेपर में यह प्र. 11, 26 और 34 में था। दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न में दो पूरे प्रश्नों में से एक चुनना होता है। प्रकरण आधारित प्रश्न में केवल 2 अंक वाले भाग में विकल्प होता है। बहुविकल्पीय और अभिकथन-कारण प्रश्नों में कोई विकल्प नहीं होता।
विकल्पों के नाम भी बदलते हैं। सैंपल पेपर और फरवरी 2026 के प्रश्न पत्र में दीर्घ-उत्तरीय विकल्प (A) और (B) के रूप में छपे हैं; दूसरे बोर्ड प्रश्न पत्रों में (a) और (b)। केस स्टडी का विकल्प सैंपल पेपर में C या D, फरवरी 2026 में (c) अथवा (c), और 2025 तथा मई 2026 में (c)(i) अथवा (c)(ii) के रूप में आया। अपने प्रश्न पत्र में जैसा छपा हो, विकल्प का नाम ठीक वैसा ही लिखिए।
'अथवा' वाला प्रश्न लगभग हमेशा उसी अध्याय से होता है, इसलिए विकल्प से आप आसान प्रश्न चुन सकते हैं, पर कोई अध्याय छोड़ नहीं सकते।
केवल एक विकल्प हल कीजिए। प्रश्न पत्र केवल एक ही माँगता है, और दोनों लिखे होने पर परीक्षकों को सामान्यतः केवल पहले प्रयास को जाँचने का निर्देश होता है। दोनों लिखने से केवल समय व्यर्थ जाता है।
सामान्य निर्देश, सरल शब्दों में
- 39 प्रश्न, सभी अनिवार्य। कोई प्रश्न खाली न छोड़िए। अधूरा उत्तर भी चरणों के अंक दिला सकता है।
- तीन खंड: क – जीव विज्ञान (30 अंक), ख – रसायन विज्ञान (25 अंक), ग – भौतिक विज्ञान (25 अंक)।
- प्रश्न पत्र में बहुविकल्पीय, अति लघु-उत्तरीय, लघु-उत्तरीय, दीर्घ-उत्तरीय और प्रकरण आधारित प्रश्न हैं, और हर प्रश्न के सामने उसके अंक छपे हैं।
- प्रकरण आधारित प्रश्न 4-4 अंक के हैं, जिनमें तीन उप-प्रश्न होते हैं।
- उत्तर-पुस्तिका को तीन खंडों में बाँटिए: जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान और भौतिक विज्ञान, और हर प्रश्न का उत्तर उसके अपने खंड में लिखिए। निर्देश साफ़ कहता है कि एक खंड के उत्तर दूसरे खंड में न मिलाइए। गलत खंड में लिखा उत्तर छूट सकता है।
- आंतरिक विकल्प: केवल एक ही विकल्प हल कीजिए।
- दृष्टिबाधित परीक्षार्थियों के लिए अलग प्रश्न पत्र दिया जाता है।
- प्रश्न संख्याएँ तीनों खंडों में 1 से 39 तक लगातार चलती हैं। हर संख्या ठीक वैसी ही लिखिए जैसी छपी है, और 'अथवा' वाले प्रश्न में यह भी लिखिए कि कौन-सा विकल्प किया, उसका नाम ठीक वैसा ही जैसा छपा है, जैसे 16 (B) या 16 (b), 28 (c)(ii)।
चरणबद्ध अंकन कैसे होता है
बहुविकल्पीय और अभिकथन-कारण प्रश्न 1-1 अंक के होते हैं और इनमें आंशिक अंक नहीं मिलते। बाकी हर प्रश्न बिंदुवार जाँचा जाता है: अंक योजना में हर मूल्य-बिंदु और उसके अंक लिखे होते हैं, प्रायः आधे और एक-एक अंक में। उत्तर में कुछ और गलत हो तब भी हर सही लिखे बिंदु के अंक मिलते हैं।
भौतिक विज्ञान का 3 अंक का एक प्रश्न, अंकों के एक सामान्य बँटवारे के साथ: 6 Ω और 3 Ω के दो प्रतिरोधक पार्श्वक्रम में जोड़े गए हैं, और यह संयोजन 4 Ω के प्रतिरोधक के साथ श्रेणीक्रम में 12 V की बैटरी से जुड़ा है। ज्ञात कीजिए (a) कुल प्रतिरोध, (b) बैटरी से ली गई धारा, और (c) 4 Ω के प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर।
| उत्तर का चरण | अंक |
|---|---|
| पार्श्वक्रम भाग: , अतः | ½ |
| कुल: | ½ |
| सूत्र: | ½ |
| ½ | |
| सूत्र: | ½ |
| ½ | |
| कुल | 3 |
वास्तविक अंक योजनाएँ कभी-कभी ½-½ अंक की जगह पूरे भाग के अंक एक साथ देती हैं: सैंपल पेपर के परिपथ वाले प्रश्न (प्र. 37) में भाग A के 2 अंक एक साथ दिए गए हैं। दोनों ही स्थितियों में अंक हल के चरणों से ही मिलते हैं।
- रिया हर चरण मात्रक सहित लिखती है और 8 V पाती है: 3 अंक।
- अमन 6 Ω और 3 Ω को सीधे जोड़ देता है (9 Ω), फिर अपने गलत कुल प्रतिरोध से बाकी सब सही करता है। प्रतिरोध वाले चरणों के अंक कटते हैं, पर कम से कम दोनों सूत्र वाले चरणों के अंक बचते हैं: 3 की जगह 1 या उससे थोड़े अधिक अंक।
- कबीर बिना हल के केवल "6 Ω, 2 A, 8 V" लिखता है: परीक्षक के पास सूत्रों और चरणों के अंक देने को कुछ नहीं है, और 3 में से ज़्यादातर अंक कटने का खतरा है।
सैद्धांतिक प्रश्न भी ऐसे ही जाँचे जाते हैं। A, B और C भागों वाले 3 अंक के "कारण दीजिए" प्रश्न में हर कारण का 1 अंक होता है। पाचन पर 2 अंक के उत्तर में माँगे गए दोनों बिंदुओं के अलग-अलग अंक हैं। 2026-27 के सैंपल पेपर की अंक योजना में तो श्वास लेने की क्रिया के चार बिंदुओं को ½-½ अंक दिया गया है। एक लंबे अनुच्छेद की तुलना में छोटे, अलग-अलग बिंदु जाँचने में आसान होते हैं।
आरेख पर अंक कैसे मिलते हैं
आरेखों पर सचमुच अंक होते हैं। सैंपल पेपर के भौतिक विज्ञान के दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न में केवल किरण आरेख के 5 में से 2 अंक हैं, और रसायन विज्ञान में एक इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना अकेले 1 अंक की है।
आरेख के अंक प्रायः तीन चीज़ों पर मिलते हैं:
- स्वयं चित्र: सही आकार और अनुपात (प्याले जैसे बोमन संपुट वाला वृक्काणु, सही स्थान पर बने प्रतिबिंब वाला लेंस)।
- माँगे गए नामांकन: हर नाम साफ़ और रूलर से खींची सीधी रेखा से सही भाग की ओर। बिना नामांकन का सुंदर चित्र भी बहुत कम अंक पाता है।
- दिशा: हर प्रकाश किरण पर, रुधिर या वायु के प्रवाह पर, और धारा व क्षेत्र रेखाओं पर तीर। तीर के बिना किरण आरेख अधूरा है।
आरेख पेंसिल से बनाइए, रेखाएँ साफ़ रखिए, छायांकन न कीजिए, और नाम चित्र के पास एक सीधे स्तंभ में लिखिए। किरण आरेख में मुख्य अक्ष दिखाइए, F, 2F या C अंकित कीजिए, अभिलंब को बिंदुकित रेखा से और आभासी किरणों को बिंदुकित रेखाओं से दिखाइए।
अभिकथन-कारण: विकल्पों का अर्थ
प्रश्न 8, 9, 24 और 32 में एक कथन अभिकथन (A) और दूसरा कारण (R) होता है। विकल्प हमेशा यही होते हैं (बोर्ड प्रश्न पत्र में ये (A)-(D) के रूप में छपते हैं):
- (a) A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- (b) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- (c) A सही है, पर R गलत है।
- (d) A गलत है, पर R सही है।
पहले A को अलग से जाँचिए, फिर R को अलग से। दोनों सही हों, तभी सोचिए कि क्या R ही A का कारण है। यही एक प्रश्न (a) और (b) में से सही विकल्प तय करता है। यह मानकर न चलिए कि दोनों कथन सही होंगे: सैंपल पेपर में चार में से दो उत्तर (d) थे, जहाँ अभिकथन गलत था।