मुद्रा और साख
मुद्रा और साख को 2026-27 के प्रतिदर्श प्रश्न-पत्र में 5 अंक, फ़रवरी 2026 में 4 और मई 2026 में 5 अंक मिले। लगभग हर प्रश्न-पत्र में इससे एक-दो बहुविकल्पीय प्रश्न आते हैं (विनिमय का माध्यम, रुपया क्यों स्वीकार होता है, उधार की शर्तें, किसान के लिए सही ऋण स्रोत, गरीबों के लिए बैंक ऋण क्यों कठिन है)। इससे 3 अंक का प्रश्न भी आता है (प्रतिदर्श प्रश्न-पत्र में स्वयं सहायता समूह और बैंकों का जोखिम, फ़रवरी 2026 में भारतीय रिज़र्व बैंक की भूमिका), और दो बार अर्थशास्त्र का केस आधारित प्रश्न भी (मई 2026 में माँग जमा और चेक, 2025 में सहकारी समितियाँ)।
सबसे ज़्यादा अंक इन गलतियों से कटते हैं: चेक को ही मुद्रा लिख देना, समर्थक ऋणाधार और ब्याज को मिला देना, यह लिखना कि भारतीय रिज़र्व बैंक साहूकारों पर नज़र रखता है, और स्वयं सहायता समूह की विशेषताएँ गिनाकर यह न बताना कि बैंक उन पर भरोसा क्यों करता है।
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मुद्रा
- वस्तु विनिमय प्रणाली में आवश्यकताओं का दोहरा संयोग चाहिए: दोनों को वही चाहिए जो दूसरे के पास है।
- मुद्रा विनिमय का माध्यम है: किसी को भी बेचो, किसी से भी खरीदो।
- करेंसी इसलिए स्वीकार होती है कि सरकार उसे अधिकृत करती है। केंद्रीय सरकार की ओर से भारतीय रिज़र्व बैंक नोट जारी करता है; और कोई नहीं। भारत में भुगतान में रुपया लेने से कोई मना नहीं कर सकता।
- माँग जमा: बैंक खाते का धन, माँगने पर निकलता है; चेक उसे दूसरे खाते में भेजता है।
बैंक: जमा का छोटा हिस्सा (लगभग 15%) नकद रखते हैं, बाकी ज़्यादातर उधार देते हैं। ऋण पर ब्याज घटा जमा पर ब्याज = बैंक की मुख्य आय।
साख (ऋण): अभी धन, वस्तु या सेवा, बाद में भुगतान का वादा। इससे आय बढ़ सकती है (कार्यशील पूँजी) या ऋण-जाल बन सकता है (फ़सल खराब, पुराना चुकाने को नया ऋण)। ऋण फ़ायदा देगा या फँसाएगा, यह जोखिम पर और नुकसान होने पर मिलने वाले सहारे पर निर्भर है।
उधार की शर्तें: ब्याज दर, समर्थक ऋणाधार, कागज़ात, भुगतान का तरीका। समर्थक ऋणाधार = संपत्ति (ज़मीन, इमारत, वाहन, पशु, बैंक जमा), जिसे ऋण न चुकने पर ऋणदाता बेच सकता है।
| औपचारिक क्षेत्रक | अनौपचारिक क्षेत्रक |
|---|---|
| बैंक, सहकारी समितियाँ | साहूकार, व्यापारी, मालिक, संबंधी, मित्र |
| भारतीय रिज़र्व बैंक की निगरानी | कोई निगरानी नहीं |
| कम ब्याज; समर्थक ऋणाधार और कागज़ात | ऊँचा ब्याज; गलत तरीके संभव |
भारतीय रिज़र्व बैंक नकद शेष जाँचता है, ऋणों की जानकारी लेता है और छोटे किसानों व उद्योगों तक ऋण पहुँचवाता है। अमीर परिवार ज़्यादातर औपचारिक ऋण लेते हैं; गरीब अनौपचारिक पर निर्भर हैं। औपचारिक ऋण गरीबों तक पहुँचना चाहिए: यह सस्ता है और ऋण-जाल का खतरा घटाता है।
स्वयं सहायता समूह: एक इलाके के 15-20 सदस्य, ज़्यादातर महिलाएँ; नियमित बचत, सदस्यों को ऋण; एक-दो साल बाद समूह के नाम बिना समर्थक ऋणाधार के बैंक ऋण; चुकाने की ज़िम्मेदारी समूह की।
ग्रामीण बैंक (बांग्लादेश, 1970 का दशक; मुहम्मद यूनुस, नोबेल शांति पुरस्कार 2006): गरीब महिलाओं को ऋण, जो लौटाती हैं।
ध्यान दें
- चेक मुद्रा नहीं; मुद्रा माँग जमा है।
- समर्थक ऋणाधार संपत्ति है, ब्याज नहीं।
- भारतीय रिज़र्व बैंक साहूकारों की निगरानी नहीं करता।
- 3% मासिक = 36% सालाना।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: हर प्रश्न पहले कॉपी पर हल कीजिए, फिर उत्तर पढ़िए। हर चरण के सामने लिखे अंक बताते हैं कि परीक्षक क्या देखता है। 1 अंक वाले बहुविकल्पीय और अभिकथन-कारण प्रश्न अंत की क्विज़ में हैं, साथ में ऐसे प्रश्न भी जो जाँचते हैं कि आपने अध्याय कितनी गहराई से समझा है; क्विज़ के हर उत्तर के साथ उसकी व्याख्या दी गई है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (2 और 3 अंक)
प्रश्न 1 (2 अंक)
वस्तु विनिमय प्रणाली और मुद्रा द्वारा विनिमय में किन्हीं दो आधारों पर अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- वस्तु विनिमय में दोनों पक्षों को वही चाहिए जो दूसरे के पास है (आवश्यकताओं का दोहरा संयोग); मुद्रा यह शर्त हटाती है।
- वस्तु विनिमय में कोई चीज़ सबको स्वीकार नहीं; मुद्रा सबको स्वीकार है, यानी विनिमय का माध्यम।
अंक योजना:
- वस्तु विनिमय: वस्तुओं का सीधे वस्तुओं से लेन-देन होता है, इसलिए दोनों पक्षों को वही चाहिए जो दूसरे के पास है (आवश्यकताओं का दोहरा संयोग)। मुद्रा: व्यक्ति किसी को भी मुद्रा के बदले बेचता है और किसी से भी खरीदता है, इसलिए दोहरे संयोग की ज़रूरत नहीं। — 1 अंक
- वस्तु विनिमय में सबके द्वारा स्वीकार की जाने वाली कोई साझी चीज़ नहीं होती, इसलिए साथी ढूँढने में समय लगता है; मुद्रा सबको स्वीकार है और विनिमय का माध्यम बनती है। (यह भी स्वीकार करें: वस्तु विनिमय में अलग-अलग वस्तुओं के मूल्य की तुलना कठिन है।) — 1 अंक
प्रश्न 2 (3 अंक)
भारत में एक निजी कंपनी रुपये जैसी ही अच्छी छपाई वाले ₹500 के अपने कागज़ी 'नोट' छापने लगती है और दुकानदारों से उन्हें लेने को कहती है। क्या ये नोट रुपये की तरह मुद्रा का काम करेंगे? अपने उत्तर के तीन कारण दीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
नहीं।
- रुपया सरकार द्वारा अधिकृत है; कंपनी के नोटों के पीछे ऐसा कोई अधिकार नहीं।
- केंद्रीय सरकार की ओर से केवल भारतीय रिज़र्व बैंक नोट जारी कर सकता है।
- कानूनन भारत में रुपया लेने से कोई मना नहीं कर सकता, पर कंपनी के नोट कोई भी ठुकरा सकता है, इसलिए उन पर भरोसा नहीं होगा।
अंक योजना:
- नहीं। रुपया विनिमय के माध्यम के रूप में इसलिए स्वीकार होता है कि देश की सरकार ने उसे अधिकृत किया है; कंपनी के नोटों के पीछे ऐसा कोई अधिकार नहीं है। — 1 अंक
- भारत में केंद्रीय सरकार की ओर से केवल भारतीय रिज़र्व बैंक करेंसी नोट जारी करता है; किसी और व्यक्ति या संस्था को करेंसी जारी करने की अनुमति नहीं है। — 1 अंक
- कानून रुपये को भुगतान का ऐसा साधन बनाता है जिसे भारत में लेने से मना नहीं किया जा सकता; कंपनी के नोट लेने को कोई बाध्य नहीं, इसलिए लोग भरोसा नहीं कर सकते कि दूसरे उन्हें लेंगे। (यह भी स्वीकार करें: अच्छा कागज़ या छपाई नोट को मूल्य नहीं देते; स्वीकृति देती है।) — 1 अंक
प्रश्न 3 (2 अंक)
रमेश नया कुआँ खुदवाने के लिए बैंक से ऋण लेते समय अपना ट्रैक्टर गिरवी रखता है। स्पष्ट कीजिए कि इस ऋण में ट्रैक्टर की क्या भूमिका है, और ऋण न चुकाने पर क्या हो सकता है।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- ट्रैक्टर समर्थक ऋणाधार है: रमेश की अपनी संपत्ति, जो ऋण चुकने तक गारंटी के रूप में बैंक के पास गिरवी है। वह उसे चलाता रहता है।
- ऋण न चुकाने पर बैंक ट्रैक्टर बेचकर अपना धन वसूल सकता है।
अंक योजना:
- ट्रैक्टर समर्थक ऋणाधार है: रमेश की अपनी संपत्ति, जिसे वह ऋण चुकने तक गारंटी के रूप में बैंक के पास गिरवी रखता है। इस बीच वह उसका उपयोग करता रहता है। — 1 अंक
- ऋण न चुकाने पर बैंक को अपना ऋण वसूलने के लिए ट्रैक्टर बेचने का अधिकार होता है। — 1 अंक
प्रश्न 4 (2 अंक)
राघव कहता है, 'साख का अर्थ बस बैंक से नकद उधार लेना है।' दो उदाहरण देते हुए उसकी बात सुधारिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- साख यानी अभी धन, वस्तु या सेवा लेकर बाद में भुगतान का वादा।
- किराने वाला महीने भर का सामान देकर वेतन के दिन पैसे लेता है; लकड़ी का व्यापारी बढ़ई को लकड़ी देता है, भुगतान फ़र्नीचर बिकने पर।
अंक योजना:
- साख (ऋण) एक सहमति है जिसमें ऋणदाता अभी धन, वस्तुएँ या सेवाएँ देता है और बदले में बाद में भुगतान का वादा लेता है; यह नकद ही हो, या बैंक से ही मिले, ऐसा ज़रूरी नहीं। — 1 अंक
- कोई दो उदाहरण, जिनमें कम से कम एक बैंक का नकद ऋण न हो: किराने वाला एक परिवार को महीने भर सामान देता है और वेतन के दिन पैसे लेता है; लकड़ी का व्यापारी बढ़ई को लकड़ी देता है, जिसका भुगतान फ़र्नीचर बिकने के बाद होगा; कोई संबंधी शादी के लिए पैसे उधार देता है। — 1 अंक
प्रश्न 5 (2 अंक)
साख के औपचारिक और अनौपचारिक स्रोतों में किन्हीं दो आधारों पर अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- औपचारिक ऋणदाता बैंक और सहकारी समितियाँ हैं; अनौपचारिक ऋणदाता साहूकार, व्यापारी, मालिक, संबंधी और मित्र हैं।
- औपचारिक ऋणदाताओं पर भारतीय रिज़र्व बैंक की निगरानी है; अनौपचारिक पर किसी की नहीं, इसलिए वे मनमाना ब्याज ले सकते हैं।
अंक योजना:
- कौन उधार देता है: औपचारिक क्षेत्रक के स्रोत बैंक और सहकारी समितियाँ हैं; अनौपचारिक क्षेत्रक के स्रोत साहूकार, व्यापारी, मालिक, संबंधी और मित्र हैं। — 1 अंक
- निगरानी: औपचारिक क्षेत्रक के ऋणदाताओं पर भारतीय रिज़र्व बैंक नज़र रखता है; अनौपचारिक ऋणदाताओं पर कोई संस्था नज़र नहीं रखती, इसलिए वे मनमाना ब्याज ले सकते हैं और वसूली के लिए गलत तरीके अपना सकते हैं। (यह भी स्वीकार करें: औपचारिक ऋण प्रायः सस्ता होता है; औपचारिक ऋणदाता समर्थक ऋणाधार और कागज़ात माँगते हैं।) — 1 अंक
प्रश्न 6 (2 अंक)
लोग अपना अतिरिक्त नकद घर में रखने के बजाय बैंक में जमा क्यों करना पसंद करते हैं? दो कारण दीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- बैंक में धन सुरक्षित रहता है; घर में वह चोरी हो सकता है या खो सकता है।
- बैंक जमा पर ब्याज देता है, और ज़रूरत पड़ने पर धन कभी भी निकाला जा सकता है।
अंक योजना:
- सुरक्षा: धन चोरी या खोने के खतरे वाले घर के बजाय बैंक में सुरक्षित रहता है। — 1 अंक
- ब्याज: बैंक जमा पर ब्याज देता है। (यह भी स्वीकार करें: ज़रूरत होने पर धन कभी भी निकाला जा सकता है, और उससे चेक द्वारा भुगतान हो सकता है।) — 1 अंक
प्रश्न 7 (3 अंक)
किसानों की सहकारी समिति से उधार लेना गाँव के साहूकार से उधार लेने से कैसे अलग है? तीन बिंदुओं में समझाइए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- सहकारी समिति सदस्यों की होती है, जो बचत इकट्ठी करते हैं; साहूकार मुनाफ़े के लिए अपना धन उधार देता है।
- समिति औपचारिक ऋणदाता है और उचित ब्याज लेती है; साहूकार पर निगरानी नहीं, वह प्रायः बहुत ऊँचा ब्याज लेता है।
- समिति को लौटाया धन फिर सदस्यों को उधार मिलता है; साहूकार का ब्याज केवल उसकी कमाई बढ़ाता है।
अंक योजना:
- धन किसका है: सहकारी समिति उसके सदस्यों की होती है, जो अपनी बचत इकट्ठी करते हैं; साहूकार मुनाफ़ा कमाने के लिए अपना धन उधार देता है। — 1 अंक
- लागत और नियंत्रण: सहकारी समिति औपचारिक क्षेत्रक का स्रोत है और उचित ब्याज पर उधार देती है; साहूकार पर किसी की निगरानी नहीं होती, वह प्रायः बहुत ऊँचा ब्याज लेता है और वसूली के लिए गलत तरीके अपना सकता है। — 1 अंक
- वापसी का उपयोग: सदस्य जब ऋण लौटाते हैं, तो धन साझे कोष में लौटकर सदस्यों को अगले दौर के ऋण में काम आता है; साहूकार को दिया ब्याज केवल उसकी अपनी कमाई बढ़ाता है। (यह भी स्वीकार करें: सहकारी समिति सदस्यों की कई ज़रूरतों, जैसे औज़ार, खेती या मकान, के लिए ऋण देती है।) — 1 अंक
प्रश्न 8 (3 अंक)
एक काल्पनिक देश की एक सामाजिक कार्यकर्ता बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक की तर्ज़ पर गाँव की गरीब महिलाओं के लिए बैंक शुरू करना चाहती है। ग्रामीण बैंक के अनुभव से उसे मिलने वाली तीन सीखें समझाइए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- गरीब महिलाएँ ऋण लौटाती हैं: ग्रामीण बैंक की ज़्यादातर ग्राहक सबसे गरीब परिवारों की महिलाएँ हैं।
- ऋण मिलने पर ऐसी महिलाएँ तरह-तरह के छोटे कमाई वाले काम शुरू करके चलाती हैं।
- शर्तें गरीबों के अनुकूल और ब्याज उचित हो; तब बहुत-से छोटे ऋण लेने वाले मिलकर विकास में बड़ा योगदान दे सकते हैं।
अंक योजना:
- गरीब महिलाएँ भरोसेमंद ऋण लेने वाली हो सकती हैं: ग्रामीण बैंक से ऋण लेने वाली, जो लगभग सभी सबसे गरीब परिवारों की महिलाएँ हैं, अपने ऋण लौटाती रही हैं। — 1 अंक
- ऋण मिलने पर गरीब महिलाएँ तरह-तरह के छोटे कमाई वाले काम शुरू करके चला सकती हैं, जिससे परिवार की आय बढ़ती है। — 1 अंक
- ऋण गरीबों तक उचित और न्यायपूर्ण शर्तों पर पहुँचना चाहिए; तब बहुत-से छोटे ऋण लेने वाले मिलकर विकास में बड़ा योगदान दे सकते हैं। (यह भी स्वीकार करें: छोटी शुरुआत बड़ी बन सकती है, जैसे ग्रामीण बैंक 1970 के दशक की एक छोटी परियोजना से बढ़ा।) — 1 अंक
दीर्घ उत्तरीय और स्रोत आधारित प्रश्न
प्रश्न 9 (5 अंक)
नीचे दी गई तालिका का अध्ययन कीजिए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
ज्योति काल्पनिक कस्बे केसरगंज में फूल बेचती है। उसे एक ठेला और फूलों का बड़ा भंडार खरीदने के लिए एक साल के लिए ₹30,000 चाहिए। उसके पास न ज़मीन है न घर, पर उसके पास सोने की एक जोड़ी बालियाँ हैं और कस्बे की ऋण सहकारी समिति में उसकी ₹5,000 की बचत है। तालिका में उसे मिले प्रस्ताव दिए गए हैं। (काल्पनिक)
| ऋणदाता | ब्याज | माँगा गया समर्थक ऋणाधार | माँगे गए कागज़ात | भुगतान |
|---|---|---|---|---|
| P. साहूकार | 3% मासिक | उसकी सोने की बालियाँ | कोई नहीं | साल के अंत में ब्याज सहित पूरी रकम एक साथ |
| Q. व्यावसायिक बैंक | 11% सालाना | ज़मीन या घर के कागज़ात | पहचान और आय का प्रमाण | 12 मासिक किस्तें |
| R. ऋण सहकारी समिति (वह सदस्य है) | 10% सालाना | समिति में उसकी बचत; सदस्य को उसकी बचत के दोगुने तक ऋण | सदस्यता का रिकॉर्ड | 12 मासिक किस्तें |
| S. फूलों का थोक व्यापारी | कोई ब्याज नहीं | कोई नहीं | कोई नहीं | ऋण चुकने तक उसे अपने सारे फूल उसी व्यापारी को, उसके तय किए दाम पर, बेचने होंगे |
(a) तालिका के कौन-से दो ऋणदाता भारतीय रिज़र्व बैंक की निगरानी में नहीं आते? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
P और S, यानी साहूकार और थोक व्यापारी, क्योंकि ये अनौपचारिक ऋणदाता हैं।
अंक योजना:
- P (साहूकार) और S (थोक व्यापारी): ये अनौपचारिक ऋणदाता हैं, और इन पर किसी संस्था की निगरानी नहीं होती। — 1 अंक
(b) ₹30,000 पर एक साल में ज्योति P और Q को कितना ब्याज देगी, हिसाब लगाइए (पूरे साल के लिए पूरे ₹30,000 पर ब्याज गिनिए)। इस अंतर का उसके लिए क्या अर्थ होगा? (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- P: 3% × 12 = 36% सालाना, यानी ₹10,800। Q: ₹30,000 का 11% = ₹3,300। P ₹7,500 ज़्यादा महँगा है।
- P से लेने पर उसकी कमाई का कहीं ज़्यादा हिस्सा ऋण चुकाने में जाएगा, और परिवार व धंधे के लिए कम बचेगा।
अंक योजना:
- P: 3% मासिक × 12 = 36% सालाना, यानी ₹30,000 का 36% = ₹10,800। Q: ₹30,000 का 11% = ₹3,300। P ₹7,500 ज़्यादा महँगा है। — 1 अंक
- P से लेने पर उसकी कमाई का बहुत बड़ा हिस्सा ऋण चुकाने में जाएगा, और परिवार तथा धंधे के लिए कम बचेगा। — 1 अंक
(c) S कोई ब्याज नहीं माँगता। दो कारण दीजिए कि फिर भी S का ऋण ज्योति को बहुत महँगा क्यों पड़ सकता है। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- उसे सारे फूल S के दाम पर बेचने होंगे, जो शायद बाज़ार भाव से कम हो; आय का यह नुकसान छिपा हुआ ब्याज है।
- ऋण चुकने तक वह दूसरों को ज़्यादा दाम पर नहीं बेच सकती और S से बँधी रहती है, इसलिए मोल-भाव नहीं कर सकती।
अंक योजना:
- उसे सारे फूल S के तय किए दाम पर बेचने होंगे, जो बाज़ार भाव से कम होने की संभावना है; इससे होने वाला आय का नुकसान छिपे हुए ब्याज जैसा है। — 1 अंक
- वह ऋण चुकने तक दूसरे खरीदारों को बेहतर दाम पर नहीं बेच सकती और S से बँधी रहती है, इसलिए मोल-भाव की उसकी ताकत खत्म हो जाती है। (यह भी स्वीकार करें: वह जितनी देर से चुकाएगी, उतने लंबे समय तक उसके दाम पर बेचेगी।) — 1 अंक
अथवा
उसी तालिका का अध्ययन कीजिए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(a) ज्योति को R से अधिक से अधिक कितना ऋण मिल सकता है? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
2 × ₹5,000 = ₹10,000।
अंक योजना:
- ₹10,000, क्योंकि R सदस्य को उसकी बचत के दोगुने तक ऋण देती है (2 × ₹5,000)। — 1 अंक
(b) Q, P से बहुत कम ब्याज लेता है। समझाइए कि फिर भी ज्योति Q से उधार क्यों नहीं ले सकती, और यह स्थिति उसके जैसे लोगों को P और S जैसे ऋणदाताओं की ओर क्यों धकेलती है। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- Q समर्थक ऋणाधार के रूप में ज़मीन या घर के कागज़ात और आय का प्रमाण माँगता है; ज्योति के पास दोनों नहीं हैं।
- इसलिए ऐसे गरीब लोग सस्ते बैंक ऋण से वंचित रहकर अनौपचारिक ऋणदाताओं के पास जाते हैं, जो कम समर्थक ऋणाधार पर महँगा ऋण देते हैं।
अंक योजना:
- Q समर्थक ऋणाधार के रूप में ज़मीन या घर के कागज़ात और आय का प्रमाण माँगता है; ज्योति के पास न ज़मीन है न घर, और शायद आय के कागज़ात भी नहीं, इसलिए बैंक उसे ऋण नहीं देगा। — 1 अंक
- समर्थक ऋणाधार और कागज़ात न होने से गरीब लोग सस्ते बैंक ऋण से बाहर रह जाते हैं, इसलिए वे ऐसे अनौपचारिक ऋणदाताओं से उधार लेते हैं जो कम समर्थक ऋणाधार माँगते हैं पर कहीं ज़्यादा वसूलते हैं। — 1 अंक
(c) R की सीमा के बाद भी ज्योति को ₹20,000 और चाहिए। बाकी ज़रूरी रकम के लिए उसे सस्ता ऋण मिलने के दो उपाय सुझाइए। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- दूसरे फेरी वालों के साथ स्वयं सहायता समूह से जुड़े; नियमित बचत के बाद समूह को बिना समर्थक ऋणाधार के बैंक ऋण मिल सकता है।
- समिति में ज़्यादा बचत करके अपनी सीमा बढ़ाए, या बैंकों से छोटे फेरी वालों को ज़्यादा ऋण देने की माँग करे।
अंक योजना:
- वह दूसरे फेरी वालों के साथ स्वयं सहायता समूह से जुड़ सकती है या उसे बना सकती है: एक-दो साल की नियमित बचत के बाद समूह को बिना समर्थक ऋणाधार के बैंक ऋण मिल सकता है, जिससे वह सदस्यों को उचित दर पर उधार देता है। — 1 अंक
- वह सहकारी समिति में बचत बढ़ाकर अपनी उधार सीमा बढ़ा सकती है और बची छोटी रकम बाद में ले सकती है; या बैंकों और सहकारी समितियों से उसके जैसे छोटे फेरी वालों को ज़्यादा ऋण देने की माँग की जा सकती है। (औपचारिक ऋण का कोई भी समझदारी भरा उपाय स्वीकार करें।) — 1 अंक
प्रश्न 10 (5 अंक)
दो मित्र ऋण पर बहस कर रहे हैं। आशा कहती है, 'परिवार को कभी उधार नहीं लेना चाहिए; ऋण केवल मुसीबत लाते हैं।' दीपक कहता है, 'ऋण हमेशा मदद करता है, क्योंकि उससे आप ज़्यादा कर पाते हैं।' एक काल्पनिक कस्बे के दो छोटे कारोबारियों के ऋणों (काल्पनिक) का अध्ययन कीजिए और यह दिखाने के लिए कि दोनों मित्र गलत हैं, पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
| शबाना (दर्ज़ी) | भानु (खाने का ठेला लगाने वाला) | |
|---|---|---|
| ऋण और उसका उपयोग | दूसरी सिलाई मशीन के लिए ₹24,000 | नए ठेले और गैस चूल्हे के लिए ₹24,000 |
| ऋणदाता | सहकारी समिति | साहूकार |
| ब्याज | 12% सालाना | 5% मासिक |
| भुगतान | 12 बराबर मासिक किस्तें | 6 महीने बाद ब्याज सहित पूरी रकम एक साथ |
| अच्छे / खराब महीने में कमाई | ₹9,000 / ₹6,000 | ₹12,000 / ₹3,000 |
(a) शबाना की मासिक किस्त निकालिए (पूरे ₹24,000 पर साल भर का 12% ब्याज गिनिए), और समझाइए कि उसका ऋण उसकी मदद क्यों करेगा। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- ब्याज ₹2,880, कुल ₹26,880, इसलिए ₹26,880 ÷ 12 = ₹2,240 मासिक।
- खराब महीने में भी वह ₹6,000 कमाती है, और नई मशीन से ज़्यादा काम मिलता है, इसलिए ऋण उसकी आय बढ़ाता है।
अंक योजना:
- ब्याज = ₹24,000 का 12% = ₹2,880; कुल ₹26,880; मासिक किस्त = ₹26,880 ÷ 12 = ₹2,240। — 1 अंक
- ₹2,240 उसके खराब महीने की कमाई ₹6,000 में भी आराम से निकल जाता है, और दूसरी मशीन से वह ज़्यादा काम ले पाती है, इसलिए उसकी आय बढ़ती है और वह बिना दबाव के चुका सकती है। — 1 अंक
(b) भानु के पहले तीन महीने अच्छे और अगले तीन खराब जाते हैं। छठे महीने के अंत में उस पर जितना बकाया है, उसकी तुलना छह महीनों की उसकी कमाई से कीजिए। फिर तालिका के आँकड़ों से बताइए कि उसके ऋण की कौन-सी शर्त, ब्याज दर या एक साथ पूरी रकम चुकाना, उसे चुकाना ज़्यादा कठिन बनाती है। (3 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- बकाया ₹24,000 + ₹7,200 = ₹31,200 और कमाई 3 × ₹12,000 + 3 × ₹3,000 = ₹45,000, यानी लगभग 70% इसी ऋण में जाता है।
- एक साथ चुकाना ज़्यादा भारी है: पूरे ₹31,200 तीन ₹3,000 वाले महीनों के ठीक बाद देने हैं, इसलिए अच्छे महीनों की लगभग सारी कमाई बचानी होगी। (दर भी भारी है: छह महीने में ₹7,200, शबाना के सालाना ₹2,880 का ढाई गुना।)
अंक योजना:
- बकाया ₹24,000 + ₹7,200 (5% × 6 महीने = 30%) = ₹31,200; कमाई 3 × ₹12,000 + 3 × ₹3,000 = ₹45,000। छह महीने की कमाई का लगभग 70% इसी एक ऋण में चला जाता है, घर चलाने को बहुत कम बचता है। — 1 अंक
- एक साथ चुकाने की शर्त ज़्यादा नुकसान करती है: पूरे ₹31,200 केवल ₹3,000 वाले तीन महीनों के ठीक बाद देने हैं, इसलिए परिवार का पेट भरते हुए भी उसे अच्छे महीनों के ₹36,000 में से लगभग सब बचाकर रखना होगा। (अगर विद्यार्थी ब्याज दर चुने और आँकड़ों से समझाए, तो भी पूरे अंक दें: 5% मासिक यानी 60% सालाना, और छह महीने का ₹7,200 ब्याज शबाना के पूरे साल के ₹2,880 का ढाई गुना है।) — 2 अंक
अथवा
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(a) मुद्रा के दो रूपों, करेंसी और माँग जमा, में किन्हीं दो बिंदुओं पर अंतर स्पष्ट कीजिए। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- करेंसी हाथ में रहने वाले नोट-सिक्के हैं (नोट भारतीय रिज़र्व बैंक जारी करता है); माँग जमा बैंक खाते का धन है, जो माँगने पर निकलता है।
- करेंसी सीधे हाथ बदलती है और मना नहीं की जा सकती; जमा चेक से एक खाते से दूसरे में जाती है।
अंक योजना:
- करेंसी वे नोट और सिक्के हैं जो लोगों के हाथ में रहते हैं; भारत में केंद्रीय सरकार की ओर से भारतीय रिज़र्व बैंक नोट जारी करता है। माँग जमा बैंक खातों में रखा वह धन है जिसे माँगने पर निकाला जा सकता है। — 1 अंक
- करेंसी नोट सौंपकर इस्तेमाल होती है, और कानून के अनुसार उसे लेने से मना नहीं किया जा सकता; माँग जमा चेक से इस्तेमाल होती है, और धन बिना नकद के एक खाते से दूसरे में जाता है। (यह भी स्वीकार करें: जमा पर ब्याज मिलता है, घर में रखे नकद पर नहीं।) — 1 अंक
(b) तालिका एक काल्पनिक गाँव की किसान कुसुम की फ़सल का नकद हिसाब (काल्पनिक आँकड़े, ₹ में) दिखाती है। उसके पास ₹5,000 की बचत है और वह जून में ₹25,000 उधार लेती है; उसे ₹28,000 (ऋण और ब्याज) लौटाने हैं।
| महीना | जून | जुलाई | अगस्त | सितंबर | अक्टूबर | नवंबर |
|---|---|---|---|---|---|---|
| फ़सल पर खर्च | 18,000 | 6,000 | 4,000 | 2,000 | 0 | 0 |
| फ़सल से कमाई | 0 | 0 | 0 | 0 | 0 | 45,000 |
कुसुम किस महीने ऋण लौटा सकती है, और उससे पहले क्यों नहीं? अगर उसकी फ़सल का दाम एक-चौथाई गिर जाए, तो उसके पास कितना बचेगा? (3 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- नवंबर: जून से सितंबर तक वह ₹30,000 खर्च करती है और फ़सल बिकने तक कुछ नहीं कमाती।
- सामान्यतः वह ₹45,000 में से ₹28,000 लौटाकर ₹17,000 रखती है।
- एक-चौथाई कम दाम पर उसे ₹33,750 मिलते हैं और केवल ₹5,750 बचते हैं, लगभग उसकी बचत जितने; अगली फ़सल तक गुज़ारे या अगली बुआई के लिए कुछ नहीं।
अंक योजना:
- नवंबर: जून से सितंबर तक वह ₹30,000 खर्च करती है और फ़सल बिकने तक कुछ नहीं कमाती, इसलिए उससे पहले लौटाने को उसके पास कुछ नहीं है। — 1 अंक
- सामान्य दाम पर वह ₹45,000 में से ₹28,000 लौटाकर ₹17,000 रखती है। — 1 अंक
- दाम एक-चौथाई गिरने पर उसे ₹33,750 मिलते हैं; ₹28,000 लौटाने के बाद केवल ₹5,750 बचते हैं, लगभग उसकी पुरानी बचत जितने, और अगली फ़सल तक गुज़ारे या अगली बुआई के लिए कुछ नहीं बचता। — 1 अंक
प्रश्न 11 (4 अंक)
नीचे दिए गए स्रोत को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
पीपलगाँव से एक चिट्ठी
प्रिय रेखा दीदी,
आपने हमारे समूह के बारे में पूछा था। हम एक ही मोहल्ले की सत्रह महिलाएँ हैं। दो साल पहले हमने हर महीने ₹100-₹100 बचाना शुरू किया, और हमारी कोषाध्यक्ष यह पैसा समूह के नाम के बैंक खाते में रखती है। इसी बचत से हमने एक-दूसरे को स्कूल की फ़ीस या बीमार भैंस जैसे कामों के लिए छोटे ऋण देने शुरू किए, वह भी साहूकार के उस ब्याज से बहुत कम पर जो वह हमारी माँओं से लेता था, और किसी को अपनी बालियाँ गिरवी नहीं रखनी पड़ीं।
अपनी मासिक बैठक में हम सब मिलकर तय करती हैं कि ऋण किसे, किस काम के लिए मिलेगा और कैसे लौटाया जाएगा। पिछले मार्च बैंक ने हमारे समूह को ₹2 लाख दिए। हम में से सात ने बकरियाँ खरीदीं, बिंदु ने सिलाई मशीन ली, और मैंने साप्ताहिक हाट के लिए अचार बनाना शुरू किया है। पिछले महीने राधा किस्त में पीछे रह गई, तो हम तीन उसके घर गईं कि देखें कैसे उसकी मदद करें ताकि वह फिर बराबरी पर आ जाए।
बैठकें अब लड़कियों की पढ़ाई और नए स्वास्थ्य केंद्र पर बात करने की जगह भी बन गई हैं। अप्रैल में मैं पहली बार ग्राम सभा में बोली!
आपकी बहन,
ललिता
(यह चिट्ठी इसी प्रश्न के लिए लिखी गई है; गाँव और लोग काल्पनिक हैं।)
(a) समूह ने अपने सदस्यों को पहले ऋण किस धन से दिए? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
सदस्यों की अपनी मासिक बचत से, जो समूह के खाते में इकट्ठी होती थी।
अंक योजना:
- सदस्यों की अपनी बचत से, जो हर महीने समूह के बैंक खाते में इकट्ठी होती थी। — 1 अंक
(b) राधा के किस्त में पीछे रह जाने पर तीन सदस्य उससे मिलने क्यों गईं? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
बैंक ऋण चुकाने की ज़िम्मेदारी पूरे समूह की है, इसलिए सदस्य पीछे रह जाने वाली पर ध्यान देती हैं।
अंक योजना:
- बैंक ऋण समूह के नाम पर है, इसलिए उसे चुकाने की ज़िम्मेदारी पूरे समूह की है; इसलिए सदस्य पीछे रह जाने वाली पर ध्यान देती हैं। (यह भी स्वीकार करें: इसी कारण बैंक बिना समर्थक ऋणाधार के समूह पर भरोसा कर पाता है।) — 1 अंक
(c) ऋण देने के अलावा समूह ने अपने सदस्यों की दो तरह से क्या मदद की है, समझाइए। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- सदस्यों ने बकरियाँ, सिलाई और अचार जैसे अपने कमाई के काम शुरू किए, जिससे उनकी अपनी आय है।
- बैठकों में पढ़ाई और स्वास्थ्य पर बात होती है, और ललिता जैसी महिलाएँ अब ग्राम सभा में बोलती हैं।
अंक योजना:
- स्वरोज़गार: बैंक ऋण से सदस्यों ने अपना कमाई का काम (बकरियाँ, सिलाई, अचार) शुरू किया, जिससे अब उनकी अपनी आय है। — 1 अंक
- दूसरे मुद्दों का मंच और आत्मविश्वास: बैठकों में लड़कियों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर बात होती है, और ललिता जैसी सदस्य अब ग्राम सभा में सबके सामने बोलती हैं। (यह भी स्वीकार करें: मुश्किल में सदस्य एक-दूसरे का साथ देती हैं, जैसे राधा के मामले में।) — 1 अंक
प्रश्न 12 (4 अंक)
नीचे दिए गए स्रोत को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
ग्राम पंचायत बैठक का कार्यवृत्त, तिलकपुर
विषय 3: गाँव के लिए बैंक शाखा
वार्ड सदस्य सुशीला देवी ने बताया कि ज़्यादातर परिवार दो साहूकारों से उधार लेते हैं, जो 4 प्रतिशत मासिक ब्याज लेते हैं। उन्होंने कहा, "वे किसी भी समय उधार दे देते हैं और कोई कागज़ नहीं माँगते, पर पिछले साल तीन परिवारों को पुराने ऋण चुकाने के लिए अपनी ज़मीन बेचनी पड़ी।"
सरपंच ने बताया कि ज़िला सहकारी बैंक शाखा खोलने को तैयार है, अगर कम से कम 300 गाँववाले खाते खोलें। उन्होंने सदस्यों को याद दिलाया कि शाखा को भारतीय रिज़र्व बैंक के नियम मानने होंगे, जिनमें नकद रखने और छोटे ऋण लेने वालों को ऋण देने के नियम भी हैं।
सेवानिवृत्त शिक्षक श्री इक़बाल ने चेताया कि केवल शाखा खुलने से उन परिवारों की मदद नहीं होगी जिनके पास ज़मीन के कागज़ नहीं हैं, और सुझाव दिया कि महिलाएँ पहले बचत समूह बनाएँ।
निर्णय: पंचायत नए खातों के लिए नाम इकट्ठे करेगी और ज़िला सहकारी बैंक को पत्र लिखेगी।
(यह कार्यवृत्त इसी प्रश्न के लिए लिखा गया है; गाँव और लोग काल्पनिक हैं।)
(a) कार्यवृत्त के अनुसार नई शाखा को किसके नियम मानने होंगे? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
भारतीय रिज़र्व बैंक के नियम, जैसे नकद रखने और छोटे ऋण लेने वालों को ऋण देने के नियम।
अंक योजना:
- भारतीय रिज़र्व बैंक के, जिनमें नकद रखने और छोटे ऋण लेने वालों को ऋण देने के नियम शामिल हैं। — 1 अंक
(b) तिलकपुर के साहूकार सालाना कितनी ब्याज दर लेते हैं? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
4% मासिक × 12 = 48% सालाना।
अंक योजना:
- 4 प्रतिशत मासिक × 12 = 48 प्रतिशत सालाना। — 1 अंक
(c) दो कारण समझाइए कि पंचायत का गरीब परिवारों तक पहुँचने वाले औपचारिक ऋणदाता के लिए ज़ोर देना सही क्यों है। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- औपचारिक ऋण 48% सालाना से बहुत सस्ता है, इसलिए परिवारों की ज़्यादा आय भोजन, पढ़ाई और अपने काम के लिए बचती है।
- सस्ते ऋण से गरीब परिवार फ़सल या छोटे काम में पैसा लगाकर ज़्यादा कमाते हैं, जिससे गाँव का विकास होता है।
अंक योजना:
- औपचारिक ऋण 48 प्रतिशत सालाना से बहुत सस्ता होता है, इसलिए परिवारों की कमाई का ज़्यादा हिस्सा भोजन, पढ़ाई और उनके अपने काम के लिए बचता है। — 1 अंक
- सस्ता ऋण मिलने पर गरीब परिवार अपनी फ़सल या छोटे काम में पैसा लगाकर ज़्यादा कमा सकते हैं, जिससे गाँव और देश का विकास भी होता है। (यह भी स्वीकार करें: औपचारिक ऋणदाता वसूली के लिए गलत तरीके नहीं अपना सकते।) — 1 अंक