कार्बन — एक विशेष तत्व
कार्बन हर जगह है — हमारे भोजन, ईंधन, कपड़ों, शरीर, यहाँ तक कि हमारी साँस में।
अपने आसपास देखें — आप जो भी देखते हैं उसमें अधिकांशतः कार्बन है!
कार्बन कितना विशेष?
पृथ्वी की पपड़ी में केवल 0.02% कार्बन (कार्बोनेट, हाइड्रोकार्बन, और CO₂ के रूप में)। वायुमंडल में केवल 0.03% कार्बन (CO₂ के रूप में)।
फिर भी — सब ज्ञात जीवन कार्बन-आधारित है!
क्यों? क्योंकि कार्बन इतने प्रकार के यौगिक बनाता है — लाखों।
अधिकांश अन्य तत्व केवल कुछ सौ यौगिक बनाते। कार्बन अकेला — 1 करोड़ से अधिक!
आवर्त सारणी में कार्बन की स्थिति
कार्बन (C):
- परमाणु क्रमांक: 6
- इलेक्ट्रॉनी विन्यास: 2, 4
- समूह: 14 (IVA)
- आवर्त: 2
बाह्य कोश में 4 इलेक्ट्रॉन।
क्यों कार्बन आयनिक बंध नहीं बनाता?
उत्तम गैस विन्यास (अष्टक) पाने के लिए, कार्बन के पास दो विकल्प:
विकल्प 1: 4 इलेक्ट्रॉन छोड़े → C⁴⁺ बने (हीलियम 'He' की तरह, 2 इलेक्ट्रॉन)। समस्या: 4 इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा चाहिए।
विकल्प 2: 4 इलेक्ट्रॉन ले → C⁴⁻ बने (नियॉन 'Ne' की तरह, 10 इलेक्ट्रॉन)। समस्या: केवल 6 प्रोटॉन वाला नाभिक 10 इलेक्ट्रॉनों को स्थिर रूप से नहीं रख सकता।
दोनों विकल्प — ऊर्जा-दृष्टि से अनुकूल नहीं।
समाधान — सहसंयोजी बंध
कार्बन अपने 4 इलेक्ट्रॉन साझा करता है अन्य परमाणुओं के साथ। इस प्रकार, दोनों परमाणु स्थिर अष्टक पाते हैं — बिना इलेक्ट्रॉन छोड़े या लिए।
यह साझा-इलेक्ट्रॉन-युग्म बंध = सहसंयोजी बंध (Covalent Bond)।
कार्बन क्यों अनोखा है?
कार्बन के 4 संयोजी इलेक्ट्रॉन का अर्थ है कि वह:
- 4 अन्य परमाणुओं के साथ साझा कर सकता है (एकल बंध)।
- एक परमाणु के साथ 2 युग्म साझा कर सकता है (द्विक बंध)।
- एक परमाणु के साथ 3 युग्म साझा कर सकता है (त्रिक बंध)।
यह बहुमुखीता तत्वों में अनूठी है।

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:
| English (in image) | हिन्दी |
|---|---|
| Shared pair of electrons | साझा इलेक्ट्रॉन युग्म |
| Single bond (H2) | एकल आबंध (H2) |
| Double bond (O2) | द्वि-आबंध (O2) |
| Triple bond (N2) | त्रि-आबंध (N2) |
| Methane (CH4) | मेथेन (CH4) |
| Covalent bond | सहसंयोजी आबंध |
सहसंयोजी बंध क्या है?
परिभाषा: दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों के साझाकरण से बना रासायनिक बंध — ताकि दोनों स्थिर उत्तम गैस विन्यास पा सकें।
सरल उदाहरण
1. हाइड्रोजन अणु ()
दो H परमाणु — प्रत्येक के पास 1 इलेक्ट्रॉन, स्थायित्व के लिए 1 और चाहिए (हीलियम जैसा)।
प्रत्येक अपना 1 इलेक्ट्रॉन साझा करता — अब दोनों के पास 2 इलेक्ट्रॉन (हीलियम विन्यास)।
लूइस डॉट संरचना: H : H या H — H
एक साझा युग्म = एकल बंध (एक रेखा)।
2. ऑक्सीजन अणु ()
दो O परमाणु — प्रत्येक के पास 6 संयोजी इलेक्ट्रॉन, अष्टक के लिए 2 और चाहिए।
प्रत्येक 2 इलेक्ट्रॉन साझा करता — कुल 4 साझा (2 युग्म)।
लूइस डॉट संरचना: O :: O या O = O
दो साझा युग्म = द्विक बंध (दो रेखाएँ)।
3. नाइट्रोजन अणु ()
दो N परमाणु — प्रत्येक के पास 5 संयोजी इलेक्ट्रॉन, अष्टक के लिए 3 और चाहिए।
प्रत्येक 3 इलेक्ट्रॉन साझा करता — कुल 6 साझा (3 युग्म)।
लूइस डॉट संरचना: N ::: N या N ≡ N
तीन साझा युग्म = त्रिक बंध (तीन रेखाएँ)।
कार्बन यौगिक — उदाहरण
मेथेन ()
कार्बन (4 संयोजी इलेक्ट्रॉन) + 4 हाइड्रोजन (प्रत्येक 1)।
प्रत्येक H, C के साथ 1 इलेक्ट्रॉन साझा करता। C के पास अंत में 8 इलेक्ट्रॉन (अष्टक)। प्रत्येक H के पास अंत में 2 इलेक्ट्रॉन (हीलियम विन्यास)।
संरचना:
H
|
H — C — H
|
H
सब 4 बंध = एकल बंध।
एथीन ()
दो C परमाणु + 4 H परमाणु। C-C बंध एक द्विक बंध (2 साझा युग्म)।
संरचना:
H H
\ /
C = C
/ \
H H
एथाइन / एसिटिलीन ()
दो C परमाणु + 2 H परमाणु। C-C बंध एक त्रिक बंध (3 साझा युग्म)।
संरचना: H — C ≡ C — H
बंध शक्ति का क्रम
त्रिक बंध > द्विक बंध > एकल बंध। (अधिक साझा युग्म = अधिक प्रबल बंध।)
परंतु: त्रिक > द्विक > एकल — छोटी बंध लंबाई।
सामान्य सहसंयोजी यौगिक
जल ()
O के पास 6 संयोजी इलेक्ट्रॉन; अष्टक के लिए 2 और चाहिए। प्रत्येक H, O के साथ 1 इलेक्ट्रॉन साझा करता।
संरचना: H — O — H
दो एकल बंध।
अमोनिया ()
N के पास 5 संयोजी इलेक्ट्रॉन; अष्टक के लिए 3 और चाहिए। तीन H परमाणु प्रत्येक 1 इलेक्ट्रॉन साझा करते।
संरचना:
H — N — H
|
H
तीन एकल बंध।
कार्बन डाइऑक्साइड ()
C, प्रत्येक O परमाणु के साथ 2 युग्म साझा करता (दोनों के साथ द्विक बंध)।
संरचना: O = C = O
दो द्विक बंध।
हाइड्रोजन क्लोराइड ()
H, Cl के साथ 1 इलेक्ट्रॉन साझा करता। Cl के पास पहले से 7 इलेक्ट्रॉन; अष्टक के लिए 1 और गाँठ बनाता।
संरचना: H — Cl
एकल बंध।
सहसंयोजी यौगिकों के लिए सामान्य नियम
सहसंयोजी यौगिक अधातुओं के बीच बनते।
उदाहरण:
- C—H, C—C, C—O, C—N, C—Cl बंध।
- H—H, O—O, N—N, F—F बंध।
- H₂O, CO₂, NH₃, HCl, आदि।
अष्टक नियम — व्यवहार में
अष्टक नियम: परमाणुओं की प्रवृत्ति होती है कि उनके बाह्य कोश में 8 इलेक्ट्रॉन हों (या हीलियम के पास के तत्वों के लिए 2)।
प्राप्त किया जाता है:
- आयनिक बंध (इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण) — धातु + अधातु के लिए।
- सहसंयोजी बंध (इलेक्ट्रॉनों का साझाकरण) — अधातु + अधातु के लिए।
सहसंयोजी यौगिकों के गुण
सहसंयोजी यौगिकों के गुण आयनिक यौगिकों से बहुत भिन्न होते।
1. भौतिक अवस्था
सहसंयोजी यौगिक तीनों अवस्थाओं में हो सकते हैं:
- गैस: O₂, N₂, CH₄, CO₂, NH₃, HCl
- द्रव: H₂O, एथेनॉल (C₂H₅OH), पेट्रोल
- ठोस: चीनी (C₁₂H₂₂O₁₁), नेफ्थलीन
2. गलनांक और क्वथनांक
सामान्यतः कम (आयनिक यौगिकों की तुलना में)।
उदाहरण:
- गलनांक: -182°C
- क्वथनांक: 100°C
- क्वथनांक: -33°C
- क्वथनांक: 78°C
कारण: कमज़ोर अंतर-आण्विक बल (van der Waals)।
आयनिक NaCl (801°C) की तुलना में — सहसंयोजी यौगिक बहुत मुलायम।
3. विद्युत-चालकता
सहसंयोजी यौगिक विद्युत के खराब चालक होते हैं।
क्यों?
- कोई मुक्त आयन नहीं।
- कोई मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं।
- बंध विशिष्ट परमाणुओं के बीच स्थानीकृत हैं।
अपवाद:
- अम्ल (HCl, H₂SO₄) — जल में आयनित होते → चालक।
- ग्रेफाइट — मुक्त इलेक्ट्रॉन → चालक।
4. विलेयता
सामान्यतः:
- अध्रुवीय विलायकों में विलेय (केरोसिन, बेन्ज़ीन)।
- जल में अविलेय (अधिकांश)।
अपवाद:
- ध्रुवीय सहसंयोजी (HCl, NH₃, चीनी) — जल में विलेय।
- आयनिक-जैसा व्यवहार (अम्ल) — जल में विलेय।
5. बंध शक्ति
अणु के भीतर बहुत प्रबल (अंतर-आण्विक नहीं — आण्विक भीतर)। परंतु अणुओं के बीच कमज़ोर (अंतर-आण्विक)।
यही कारण कि:
- सहसंयोजी यौगिकों को रासायनिक रूप से तोड़ना कठिन।
- परंतु पिघलाना या उबालना भौतिक रूप से आसान।
तुलना तालिका — आयनिक vs सहसंयोजी
| गुण | आयनिक | सहसंयोजी |
|---|---|---|
| बंध बनना | इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण | इलेक्ट्रॉन साझाकरण |
| तत्व | धातु + अधातु | अधातु + अधातु |
| भौतिक अवस्था | ठोस (अधिकांश) | ठोस/द्रव/गैस |
| गलनांक | उच्च | कम |
| क्वथनांक | उच्च | कम |
| जल में विलेयता | विलेय | अधिकांश अविलेय |
| केरोसिन में विलेयता | अविलेय | विलेय |
| चालकता (जल में) | हाँ | नहीं (अधिकांश) |
| उदाहरण | NaCl, MgO | H₂O, CO₂, CH₄ |
कार्बन की विशेष चतुष्संयोजकता
कार्बन का इलेक्ट्रॉनी विन्यास: 2, 4।
कार्बन को अष्टक पूरा करने के लिए 4 और इलेक्ट्रॉन चाहिए।
यह 4 इलेक्ट्रॉन साझा करके करता है अन्य परमाणुओं के साथ।
इसका अर्थ है कार्बन ठीक 4 सहसंयोजी बंध बनाता है।
चतुष्संयोजकता क्रिया में
कार्बन 4 बंध बनाता — ये हो सकते हैं:
1. चार एकल बंध: मेथेन (CH₄): 4 C-H एकल बंध। एथेन (C₂H₆): 1 C-C एकल + 6 C-H एकल बंध।
2. दो एकल + एक द्विक बंध: एथीन (C₂H₄): 1 C=C द्विक + 4 C-H एकल बंध।
3. एक एकल + एक त्रिक बंध: एथाइन (C₂H₂): 1 C≡C त्रिक + 2 C-H एकल बंध।
4. दो द्विक बंध: कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂): 2 C=O द्विक बंध।
यह लचीलापन ही कार्बन को इतना बहुमुखी बनाता।
बंध लंबाई और शक्ति
| बंध | लंबाई (pm) | शक्ति (kJ/mol) |
|---|---|---|
| C — C (एकल) | 154 | 348 |
| C = C (द्विक) | 134 | 614 |
| C ≡ C (त्रिक) | 120 | 839 |
| C — H | 109 | 413 |
| C — O | 143 | 358 |
| C = O | 122 | 745 |
अधिक बंध → छोटे और प्रबल।
क्यों कार्बन यौगिक विशेष?
चतुष्संयोजकता + स्वयं से बंध बनाने की क्षमता + छोटा आकार:
- C लंबी श्रृंखलाएँ बना सकता।
- C वलय बना सकता।
- C शाखाएँ बना सकता।
- C बहुगुण बंध रख सकता।
- C, H, O, N, S, हैलोजन से बंध बना सकता।
परिणाम: लाखों यौगिक।
यही कारण है कि जीवन — कार्बन-आधारित।
आगे क्या आ रहा
अगले अनुभागों में देखेंगे:
- कार्बन के अपररूप (हीरा, ग्रेफाइट, फुलरीन)।
- हाइड्रोकार्बन (CH यौगिक)।
- क्रियात्मक समूह।
- महत्वपूर्ण यौगिक — एथेनॉल, एथेनोइक अम्ल।
- साबुन और अपमार्जक।
सब — कार्बन की सहसंयोजी बंध क्षमता के कारण संभव।
🧠 स्मृति कैप्सूल (Memory Capsule)
बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले एक नज़र में।
1. कार्बन का विन्यास
C: परमाणु क्रमांक 6, विन्यास 2, 4। संयोजकता = 4 (चतुष्संयोजकता)।
2. क्यों सहसंयोजी और आयनिक नहीं?
4 इलेक्ट्रॉन छोड़ना → बहुत ऊर्जा चाहिए। 4 इलेक्ट्रॉन लेना → अस्थिर नाभिक। समाधान: 4 इलेक्ट्रॉन साझा → सहसंयोजी बंध।
3. सहसंयोजी बंध परिभाषा
दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों के साझाकरण से बना बंध — ताकि दोनों स्थिर अष्टक पा सकें।
4. सहसंयोजी बंधों के प्रकार
| प्रकार | साझा युग्म | उदाहरण |
|---|---|---|
| एकल | 1 | H-H, C-C, H-Cl |
| द्विक | 2 | O=O, C=C, C=O |
| त्रिक | 3 | N≡N, C≡C |
5. बंध लंबाई / शक्ति
त्रिक > द्विक > एकल (शक्ति) एकल > द्विक > त्रिक (लंबाई)
6. सहसंयोजी यौगिकों के गुण
- कम गलनांक/क्वथनांक।
- जल में अविलेय (अधिकांश)।
- कार्बनिक विलायकों में विलेय (केरोसिन)।
- विद्युत के खराब चालक।
- सब भौतिक अवस्थाएँ (गैस, द्रव, ठोस)।
7. सामान्य सहसंयोजी उदाहरण
- H₂, O₂, N₂ (द्विपरमाण्विक)
- H₂O, NH₃, CO₂ (छोटे अणु)
- CH₄, C₂H₆, C₂H₄, C₂H₂ (हाइड्रोकार्बन)
8. आयनिक vs सहसंयोजी — त्वरित स्मरण
| विशेषता | आयनिक | सहसंयोजी |
|---|---|---|
| बंध | स्थानांतरण | साझाकरण |
| गलनांक | उच्च | कम |
| जल में विलेयता | हाँ | नहीं |
| चालकता | हाँ (जल में) | नहीं |
9. कार्बन के 4 बंध — संभव संयोजन
- 4 एकल बंध (CH₄, C₂H₆)
- 2 एकल + 1 द्विक (CH₂=CH₂)
- 1 एकल + 1 त्रिक (HC≡CH)
- 2 द्विक बंध (CO₂)
10. बोर्ड के 'सुनहरे' प्रश्न
- कार्बन सहसंयोजी बंध क्यों बनाता है?
- सहसंयोजी यौगिकों के गुण।
- , , की लूइस डॉट संरचना।
- कार्बन की चतुष्संयोजकता।
- आयनिक और सहसंयोजी में अंतर।
अंतिम सूत्र: कार्बन 4 इलेक्ट्रॉन साझा करता → सहसंयोजी बंध → लाखों यौगिक → स्वयं जीवन।
हल किए गए उदाहरण
उदाहरण 1: NCERT — कार्बन क्यों सहसंयोजी बंध बनाता है
कार्बन मुख्यतः सहसंयोजी आबंधन से ही यौगिक क्यों बनाता है?
हल:
कार्बन का इलेक्ट्रॉनी विन्यास: 2, 4
कार्बन के पास 4 संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं। स्थिर अष्टक पाने के लिए, यह कर सकता:
विकल्प 1: 4 इलेक्ट्रॉन छोड़े → C⁴⁺
- बहुत अधिक ऊर्जा चाहिए (4 क्रमिक आयनीकरण)।
- बहुत अस्थिर।
विकल्प 2: 4 इलेक्ट्रॉन ले → C⁴⁻
- कार्बन नाभिक में केवल 6 प्रोटॉन।
- 10 इलेक्ट्रॉनों को स्थिर रूप से नहीं रख सकता।
- अति-अस्थिर आयन।
विकल्प 3: इलेक्ट्रॉन साझा करे (सहसंयोजी आबंधन)
- प्रत्येक C परमाणु अन्य परमाणुओं के साथ 4 इलेक्ट्रॉन साझा करे।
- दोनों परमाणु अष्टक प्राप्त करें।
- ऊर्जा-दृष्टि से महंगे स्थानांतरण की आवश्यकता नहीं।
- स्थिर।
अतः, कार्बन सहसंयोजी आबंधन को प्राथमिकता देता।
उदाहरण:
- : C, 4 H परमाणुओं के साथ 4 इलेक्ट्रॉन साझा करता।
- : C, 2 O परमाणुओं के साथ 4 इलेक्ट्रॉन साझा करता (द्विक बंध)।
- : 2 C परमाणु एक-दूसरे और H के साथ साझा करते।
[NCERT — मूलभूत प्रश्न]
उदाहरण 2: NCERT — लूइस डॉट संरचनाएँ
निम्न के लिए लूइस डॉट संरचनाएँ (इलेक्ट्रॉन-डॉट संरचनाएँ) बनाएँ: (a) (b) (c) (d) (e) (f)
हल:
(a) H₂
प्रत्येक H के पास 1 इलेक्ट्रॉन। 1 युग्म बनाने के लिए साझा करें।
H : H या H — H (एकल बंध)
(b) O₂
प्रत्येक O के पास 6 संयोजी इलेक्ट्रॉन। प्रत्येक को अष्टक के लिए 2 और चाहिए। 2 युग्म साझा करें।
: O :: O : या O = O (द्विक बंध)
(c) N₂
प्रत्येक N के पास 5 संयोजी इलेक्ट्रॉन। प्रत्येक को 3 और चाहिए। 3 युग्म साझा करें।
: N ::: N : या N ≡ N (त्रिक बंध)
(d) CH₄
C के पास 4 संयोजी इलेक्ट्रॉन। 4 H परमाणु प्रत्येक 1 इलेक्ट्रॉन साझा करते C के साथ।
संरचना:
H
|
H : C : H या H — C — H
| |
H H
4 एकल बंध।
(e) H₂O
O के पास 6 संयोजी इलेक्ट्रॉन। 2 H परमाणु प्रत्येक 1 साझा करते। O के पास 2 असाझा युग्म (4 असाझा इलेक्ट्रॉन)।
संरचना: H : O : H या H — O — H
(f) CO₂
C, प्रत्येक O के साथ 2 युग्म साझा करता।
संरचना: O :: C :: O या O = C = O
2 द्विक बंध।
[NCERT पाठ्यपुस्तक — हर साल]
उदाहरण 3: NCERT — सहसंयोजी यौगिकों के गुण
सहसंयोजी यौगिकों के मुख्य भौतिक गुण उदाहरणों के साथ सूचीबद्ध करें।
हल:
1. भौतिक अवस्था
सहसंयोजी यौगिक तीनों अवस्थाओं में मिलते:
- गैस: H₂, O₂, CO₂, NH₃, CH₄
- द्रव: H₂O, C₂H₅OH (एथेनॉल), पेट्रोल
- ठोस: चीनी, नेफ्थलीन, यूरिया
2. कम गलनांक और क्वथनांक
उदाहरण:
- CH₄: -182°C गलनांक
- H₂O: 0°C गलनांक, 100°C क्वथनांक
- C₂H₅OH: -114°C गलनांक, 78°C क्वथनांक
कारण: कमज़ोर अंतर-आण्विक बल (van der Waals)।
3. खराब विद्युत-चालकता
सामान्यतः अचालक।
कारण: कोई मुक्त आयन या इलेक्ट्रॉन नहीं।
अपवाद:
- HCl जल में (आयनित होता)
- ग्रेफाइट (विस्थानित इलेक्ट्रॉन)
4. विलेयता
अध्रुवीय विलायकों में विलेय (केरोसिन, बेन्ज़ीन)। जल में अविलेय (अधिकांश)।
अपवाद:
- HCl, NH₃, चीनी — जल में विलेय (ध्रुवीय)।
- HCl जल में → H⁺ + Cl⁻ (आयनिक-जैसा व्यवहार)।
5. बंध शक्ति
अणु के भीतर बंध — प्रबल। अणुओं के बीच बल — कमज़ोर।
तुलनात्मक उदाहरण
| यौगिक | अवस्था | M.P. (°C) | जल में विलेयता |
|---|---|---|---|
| H₂O | द्रव | 0 | — |
| CH₄ | गैस | -182 | नहीं |
| चीनी | ठोस | 186 | हाँ |
| HCl | गैस | -114 | हाँ (आयनित) |
| नेफ्थलीन | ठोस | 80 | नहीं |
[NCERT — हर साल]
उदाहरण 4: NCERT — आयनिक vs सहसंयोजी
आयनिक और सहसंयोजी यौगिकों में अंतर बताएँ — उदाहरणों के साथ।
हल:
तुलना तालिका
| गुण | आयनिक | सहसंयोजी |
|---|---|---|
| बंध बनना | इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण | इलेक्ट्रॉन साझाकरण |
| तत्व | धातु + अधातु | अधातु + अधातु |
| अवस्था | अधिकांश ठोस | ठोस/द्रव/गैस |
| गलनांक | उच्च (>800°C) | कम (सामान्यतः <200°C) |
| क्वथनांक | उच्च | कम |
| जल में विलेयता | विलेय | अधिकांश अविलेय |
| केरोसिन में | अविलेय | विलेय |
| चालकता (ठोस) | नहीं | नहीं |
| चालकता (जल में) | हाँ | नहीं (अधिकांश) |
| भंगुरता | भंगुर | परिवर्तनशील |
उदाहरण
आयनिक:
- NaCl (M.P. 801°C, जल में चालक)
- MgO (M.P. 2852°C)
- CaCl₂ (M.P. 772°C)
सहसंयोजी:
- H₂O (M.P. 0°C)
- CH₄ (M.P. -182°C)
- CO₂ (M.P. -78°C, उर्ध्वपातित)
- C₆H₁₂O₆ (ग्लूकोज़, M.P. 146°C)
अंतर का कारण
आयनिक:
- प्रबल विद्युत-स्थैतिक बल (cation-anion)।
- क्रिस्टल जाली — पूरी तरह तोड़नी चाहिए।
- अतः उच्च M.P., B.P.।
सहसंयोजी:
- प्रबल अंतर-आण्विक बंध।
- परंतु कमज़ोर अंतर-आण्विक बल।
- अतः कम M.P., B.P.।
मूल अंतर्दृष्टि: बंध का प्रकार गुणों को निर्धारित करता।
[NCERT — महत्वपूर्ण]
उदाहरण 5: NCERT — कार्बन की चतुष्संयोजकता
कार्बन की चतुष्संयोजकता की अवधारणा समझाएँ। उदाहरण दें।
हल:
परिभाषा
'चतुष्संयोजकता' = कार्बन का अन्य परमाणुओं के साथ 4 सहसंयोजी बंध बनाने का गुण।
लैटिन से: 'tetra' = 4, 'valens' = शक्ति/संयोजकता।
चतुष्संयोजकता का मूल
कार्बन: परमाणु क्रमांक 6, विन्यास 2, 4।
4 संयोजी इलेक्ट्रॉन → अष्टक के लिए 4 और चाहिए। 4 इलेक्ट्रॉन साझा करे → 4 बंध बनाए।
चतुष्संयोजकता के उदाहरण
1. मेथेन () — 4 एकल बंध
4 H परमाणु, प्रत्येक C के साथ एकल बंध।
H
|
H — C — H
|
H
4 C-H एकल बंध।
2. एथेन () — 7 एकल बंध
2 C परमाणु + 6 H परमाणु। 1 C-C एकल बंध + 6 C-H एकल बंध।
3. एथीन () — 1 द्विक + 4 एकल
प्रत्येक C, 4 बंध उपयोग करता:
- 1 C=C द्विक बंध (2 की गिनती)
- 2 C-H एकल बंध (प्रत्येक C, 2 H परमाणुओं से जुड़ा)
4. एथाइन () — 1 त्रिक + 2 एकल
प्रत्येक C, 4 बंध उपयोग करता:
- 1 C≡C त्रिक बंध (3 की गिनती)
- 1 C-H एकल बंध
5. कार्बन डाइऑक्साइड () — 2 द्विक बंध
1 C परमाणु + 2 O परमाणु। 2 C=O द्विक बंध (प्रत्येक 2 बंध की गिनती)। कुल: 4 बंध।
सत्यापन — बंध गिनना
प्रत्येक कार्बन के पास ठीक 4 बंध होने चाहिए:
| यौगिक | C-C | C-H | C-O | कुल |
|---|---|---|---|---|
| CH₄ | 0 | 4 | 0 | 4 ✓ |
| C₂H₆ | 1 | 3 (प्रति C) | 0 | 4 (प्रति C) ✓ |
| C₂H₄ | 2 (द्विक) | 2 (प्रति C) | 0 | 4 ✓ |
| C₂H₂ | 3 (त्रिक) | 1 (प्रति C) | 0 | 4 ✓ |
| CO₂ | 0 | 0 | 4 (2 द्विक) | 4 ✓ |
चतुष्संयोजकता का महत्व
यह अनूठी चतुष्संयोजकता कार्बन को इन क्षमताओं की अनुमति देती:
- लंबी श्रृंखलाएँ बनाना।
- शाखित श्रृंखलाएँ बनाना।
- वलय बनाना।
- द्विक, त्रिक बंध बनाना।
- कई अलग परमाणुओं से जुड़ना।
परिणाम: लाखों कार्बन यौगिक — सब जीवन सहित!
[NCERT — महत्वपूर्ण]
उदाहरण 6: एक रोचक — एकल, द्विक, त्रिक बंध
एकल, द्विक, त्रिक बंध क्या हैं? उदाहरण दें।
हल:
एकल बंध
दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों का एक युग्म साझा। एक रेखा (—) से दर्शाया।
उदाहरण:
- H — H ()
- H — Cl ()
- C — C (एथेन में)
- C — H (मेथेन में)
बंध शक्ति: ~348 kJ/mol (C-C के लिए)। बंध लंबाई: अधिक (C-C के लिए 154 pm)।
द्विक बंध
इलेक्ट्रॉनों के दो युग्म साझा। दो रेखाओं (=) से दर्शाया।
उदाहरण:
- O = O ()
- C = O (CO₂ में)
- C = C (एथीन में)
बंध शक्ति: ~614 kJ/mol (C=C के लिए)। बंध लंबाई: छोटी (C=C के लिए 134 pm)।
त्रिक बंध
इलेक्ट्रॉनों के तीन युग्म साझा। तीन रेखाओं (≡) से दर्शाया।
उदाहरण:
- N ≡ N ()
- C ≡ C (एथाइन / एसिटिलीन में)
- C ≡ N (साइनाइड में)
बंध शक्ति: ~839 kJ/mol (C≡C के लिए)। बंध लंबाई: सबसे छोटी (C≡C के लिए 120 pm)।
तुलना तालिका
| बंध | युग्म | लंबाई | शक्ति | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| एकल | 1 | 154 pm | 348 kJ/mol | C-C |
| द्विक | 2 | 134 pm | 614 kJ/mol | C=C |
| त्रिक | 3 | 120 pm | 839 kJ/mol | C≡C |
बहुगुण बंध क्यों?
अष्टक प्राप्त करने के लिए:
O₂ में: प्रत्येक O के पास 6 संयोजी इलेक्ट्रॉन। 2 युग्म साझा करने से प्रत्येक O को अष्टक मिलता है (8 इलेक्ट्रॉन)।
N₂ में: प्रत्येक N के पास 5 संयोजी इलेक्ट्रॉन। 3 युग्म साझा से प्रत्येक N को अष्टक।
एथीन में: प्रत्येक C के पास 4 संयोजी इलेक्ट्रॉन। 2 युग्म C-C के बीच और प्रत्येक 1 युग्म 2 H परमाणुओं के साथ — प्रत्येक C को अष्टक।
व्यावहारिक अंतर्दृष्टि
बहुगुण बंध (विशेषकर द्विक बंध) यौगिकों को अधिक क्रियाशील बनाते।
उदाहरण: एथीन () एथेन () से अधिक क्रियाशील।
द्विक/त्रिक बंध टूटकर अन्य परमाणु जोड़ सकते (योगात्मक अभिक्रिया)।
[बोर्ड: 5-अंक]
उदाहरण 7: NCERT — सहसंयोजी यौगिक खराब चालक क्यों?
सहसंयोजी यौगिक सामान्यतः विद्युत के खराब चालक क्यों होते हैं?
हल:
मूल सिद्धांत
विद्युत-चालन के लिए मुक्त आवेश-वाहक चाहिए (आयन या इलेक्ट्रॉन)।
सहसंयोजी यौगिक
सहसंयोजी बंधों में:
- इलेक्ट्रॉन विशिष्ट परमाणुओं के बीच साझा होते।
- ये बंधों में स्थानीकृत होते।
- कोई मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं।
- कोई मुक्त आयन नहीं (कोई इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण नहीं)।
अतः: कोई आवेश-वाहक नहीं → कोई चालन नहीं।
अचालक उदाहरण
- (मेथेन) — गैस, कोई चालन नहीं।
- (शुद्ध जल) — लगभग कोई चालन नहीं।
- जल में चीनी — अणु आयनित नहीं होते → कोई चालन नहीं।
- पेट्रोल, केरोसिन — अचालक।
महत्वपूर्ण अपवाद
1. अम्ल (जैसे HCl, H₂SO₄)
यद्यपि शुद्ध रूप में सहसंयोजी, जल में ये आयनित होते:
अब मुक्त आयन उपस्थित → विद्युत चालन।
यही कारण कि जलीय अम्ल चालक होते।
2. ग्रेफाइट
यद्यपि कार्बन (सहसंयोजी), ग्रेफाइट की विशेष संरचना:
- C परमाणुओं की परतें।
- प्रत्येक C, 3 अन्य C से बंधा।
- 4वाँ इलेक्ट्रॉन विस्थानित (मुक्त)।
- ये मुक्त इलेक्ट्रॉन → चालन।
अतः ग्रेफाइट सहसंयोजी ठोसों में एक अनूठा चालक।
ग्रेफाइट का उपयोग:
- इलेक्ट्रोडों में।
- पेंसिलों में।
- स्नेहक में।
तुलना
| पदार्थ | विद्युत-चालक? | कारण |
|---|---|---|
| NaCl (ठोस) | नहीं | आयन स्थिर |
| NaCl (जल में) | हाँ | आयन मुक्त |
| चीनी (जल में) | नहीं | अणु, आयन नहीं |
| HCl (जल में) | हाँ | आयनित |
| हीरा | नहीं | सब बंध स्थानीकृत |
| ग्रेफाइट | हाँ | मुक्त इलेक्ट्रॉन |
| H₂O (शुद्ध) | नहीं | लगभग कोई आयन नहीं |
सारांश
सहसंयोजी यौगिक:
- शुद्ध: खराब चालक।
- जल में: अभी भी खराब (जब तक आयनित न हों)।
- अम्ल और ग्रेफाइट उल्लेखनीय अपवाद।
[NCERT — 3-अंक]
उदाहरण 8: NCERT — सहसंयोजी बंधों की पहचान
निम्न में से कौन-से यौगिक सहसंयोजी हैं? , , , , , , , ,
हल:
नियम
आयनिक = धातु + अधातु। सहसंयोजी = अधातु + अधातु।
विश्लेषण
| यौगिक | तत्व | प्रकार |
|---|---|---|
| NaCl | Na (धातु) + Cl (अधातु) | आयनिक |
| H₂O | H + O (दोनों अधातु) | सहसंयोजी |
| MgO | Mg (धातु) + O (अधातु) | आयनिक |
| CO₂ | C + O (दोनों अधातु) | सहसंयोजी |
| CH₄ | C + H (दोनों अधातु) | सहसंयोजी |
| K₂S | K (धातु) + S (अधातु) | आयनिक |
| CCl₄ | C + Cl (दोनों अधातु) | सहसंयोजी |
| NH₃ | N + H (दोनों अधातु) | सहसंयोजी |
| CaCl₂ | Ca (धातु) + Cl (अधातु) | आयनिक |
सहसंयोजी यौगिक (5)
✓ H₂O, CO₂, CH₄, CCl₄, NH₃
आयनिक यौगिक (4)
✓ NaCl, MgO, K₂S, CaCl₂
गुणों से सत्यापन
सहसंयोजी यौगिक:
- कम गलनांक।
- जल में नहीं घुलते (अधिकांश)।
- विद्युत के अचालक।
आयनिक यौगिक:
- उच्च गलनांक।
- जल में विलेय।
- जल/पिघले में चालक।
व्यावहारिक परीक्षण
यदि अनिश्चित हों, तो जाँचें:
- गलनांक क्या है? (उच्च → आयनिक; कम → सहसंयोजी)
- क्या जल में विद्युत चालन? (हाँ → आयनिक; नहीं → सहसंयोजी)
- कमरे के ताप पर गैस/द्रव? (अक्सर → सहसंयोजी)
[NCERT — मूलभूत]
उदाहरण 9: NCERT — और की तुलना
और में आबंधन की तुलना करें।
हल:
H₂ अणु
परमाणु: 2 हाइड्रोजन परमाणु। प्रत्येक H के पास 1 इलेक्ट्रॉन।
बंध बनना: दोनों H परमाणु प्रत्येक 1 इलेक्ट्रॉन साझा करते — कुल 1 युग्म। अब प्रत्येक H के पास 2 इलेक्ट्रॉन (हीलियम विन्यास)।
संरचना: H — H
प्रकार: शुद्ध (अध्रुवीय) सहसंयोजी बंध।
दोनों परमाणु समान → इलेक्ट्रॉनों का समान साझाकरण → कोई आवेश-विभाजन नहीं।
HCl अणु
परमाणु: 1 हाइड्रोजन + 1 क्लोरीन। H के पास 1 इलेक्ट्रॉन; Cl के पास 7 संयोजी इलेक्ट्रॉन।
बंध बनना: H, Cl के साथ 1 इलेक्ट्रॉन साझा करता। Cl, H के साथ 1 इलेक्ट्रॉन साझा करता। कुल 1 युग्म साझा।
H के पास 2 इलेक्ट्रॉन (हीलियम विन्यास)। Cl के पास 8 इलेक्ट्रॉन (आर्गन विन्यास)।
संरचना: H — Cl
प्रकार: ध्रुवीय सहसंयोजी बंध।
Cl, H से अधिक विद्युत-ऋणी → इलेक्ट्रॉन Cl की ओर खिंचते। परिणाम: Cl पर थोड़ा ऋण आवेश (); H पर थोड़ा धन आवेश ()।
मुख्य अंतर
| गुण | H₂ | HCl |
|---|---|---|
| बंध प्रकार | शुद्ध सहसंयोजी | ध्रुवीय सहसंयोजी |
| साझाकरण | समान | असमान |
| आवेश-विभाजन | नहीं | हाँ () |
| द्विध्रुव | नहीं | हाँ |
| जल में | अविलेय | अति-विलेय (आयनित) |
| चालकता | नहीं | हाँ (जल में) |
क्यों HCl जल में अम्ल जैसा व्यवहार?
यद्यपि HCl शुद्ध रूप में सहसंयोजी, जल में:
जल की ध्रुवीयता HCl को आयनित करने में मदद करती।
मुक्त H⁺ (या H₃O⁺) → विलयन को अम्लीय बनाता। मुक्त Cl⁻ → आवेश संतुलित करता।
यह HCl को जल में आयनिक-जैसा व्यवहार देता।
अतः: HCl गैस — सहसंयोजी; HCl जल में — आयनिक की तरह।
मूल अंतर्दृष्टि: बंधों की ध्रुवीयता → अणुओं की ध्रुवीयता → जल में व्यवहार।
[बोर्ड: 3-5 अंक]
उदाहरण 10: एक समापन प्रश्न
(a) कार्बन सहसंयोजी आबंधन क्यों पसंद करता है? (b) मेथेन की इलेक्ट्रॉन-डॉट संरचना बनाएँ। (c) तुलना करें: और । (d) चतुष्संयोजकता को एक उदाहरण से समझाएँ।
हल:
(a) कार्बन सहसंयोजी क्यों पसंद करता
कार्बन विन्यास: 2, 4। 4 संयोजी इलेक्ट्रॉन।
तीन विकल्प:
- 4 इलेक्ट्रॉन छोड़े → C⁴⁺ (बहुत ऊर्जा चाहिए)।
- 4 इलेक्ट्रॉन ले → C⁴⁻ (छोटा नाभिक 10 इलेक्ट्रॉन स्थिरता से नहीं रख सकता)।
- 4 इलेक्ट्रॉन साझा करे → सहसंयोजी बंध → दोनों स्थिर।
अतः कार्बन सहसंयोजी आबंधन पसंद करता।
(b) मेथेन की इलेक्ट्रॉन-डॉट संरचना (CH₄)
C के पास 4 संयोजी इलेक्ट्रॉन (4 बिंदु)। प्रत्येक H के पास 1 इलेक्ट्रॉन (1 बिंदु)। प्रत्येक H, C के साथ 1 इलेक्ट्रॉन साझा करता।
H (1 बिंदु)
:
:
H : : C : : H
:
:
H (1 बिंदु)
या सरलीकृत:
H
|
H — C — H
|
H
4 एकल बंध; C के बाह्य कोश में 8 इलेक्ट्रॉन; प्रत्येक H के पास 2।
(c) तुलना: H₂O और CO₂
| गुण | H₂O | CO₂ |
|---|---|---|
| बंध | 2 एकल (O-H) | 2 द्विक (C=O) |
| संरचना | वक्र (V-आकार) | रैखिक |
| 25°C पर अवस्था | द्रव | गैस |
| ध्रुवीयता | ध्रुवीय | अध्रुवीय (कुल) |
| बंध ध्रुवीयता | O-H ध्रुवीय | C=O ध्रुवीय |
| जल में | सार्वत्रिक विलायक | थोड़ा विलेय |
H₂O वक्र है क्योंकि O पर एकल युग्म। CO₂ रैखिक है क्योंकि C पर कोई एकल युग्म नहीं।
(d) एक उदाहरण से चतुष्संयोजकता
चतुष्संयोजकता: कार्बन की 4 सहसंयोजी बंध बनाने की क्षमता।
उदाहरण: मेथेन ()
H
|
H — C — H
|
H
C के 4 H परमाणुओं के साथ 4 एकल बंध। प्रत्येक H, 1 इलेक्ट्रॉन देता; C, प्रति बंध 1 इलेक्ट्रॉन देता। कुल: 4 साझा युग्म।
प्रत्येक C-H बंध:
- 2 इलेक्ट्रॉन (प्रत्येक परमाणु से 1)।
- C के अंत में 8 इलेक्ट्रॉन (अष्टक)।
- H के अंत में 2 इलेक्ट्रॉन (हीलियम विन्यास)।
सब 4 बंध समान — मेथेन का आकार चतुष्फलकीय।
यह कार्बन की चतुष्संयोजकता का सरलतम उदाहरण।
[बोर्ड — 5-अंक मिश्र]
उदाहरण 11: संख्यात्मक — इलेक्ट्रॉन गिनना
में, गिनें कुल: (a) C के संयोजी इलेक्ट्रॉन। (b) H परमाणुओं के संयोजी इलेक्ट्रॉन। (c) कुल साझा इलेक्ट्रॉन। (d) कुल बंध बनाए।
हल:
CH₄ में परमाणु:
- 1 C परमाणु
- 4 H परमाणु
(a) C के संयोजी इलेक्ट्रॉन
C: विन्यास 2, 4। संयोजी इलेक्ट्रॉन = 4।
(b) H परमाणुओं के संयोजी इलेक्ट्रॉन
प्रत्येक H के पास 1 संयोजी इलेक्ट्रॉन। 4 H × 1 = 4 संयोजी इलेक्ट्रॉन।
(c) कुल साझा इलेक्ट्रॉन
प्रत्येक C-H बंध 2 इलेक्ट्रॉन साझा करता (1 C से, 1 H से)। 4 बंध × 2 इलेक्ट्रॉन = 8 साझा इलेक्ट्रॉन।
या: C, 4 देता; H परमाणु, 4 देते → कुल 8 साझा।
(d) कुल बंध बनाए
4 C-H एकल बंध। कुल बंध = 4।
सत्यापन
अष्टक नियम जाँच:
- C: 8 इलेक्ट्रॉन (4 बंध × 2 प्रत्येक) ✓
- प्रत्येक H: 2 इलेक्ट्रॉन (1 बंध × 2) ✓
सब परमाणु संतुष्ट।
बंध वितरण
H
|
H — C — H ← 4 एकल बंध
|
H
चतुष्फलकीय संरचना — 109.5° बंध कोण।
[बोर्ड: 3-अंक संख्यात्मक]
उदाहरण 12: NCERT — हीरा कठोर, ग्रेफाइट मुलायम क्यों
हीरा और ग्रेफाइट दोनों कार्बन के सहसंयोजी रूप हैं। समझाएँ क्यों हीरा सबसे कठोर पदार्थ है और ग्रेफाइट मुलायम।
हल:
हीरा — संरचना
प्रत्येक C परमाणु 4 अन्य C परमाणुओं से चतुष्फलकीय व्यवस्था में बंधा। सब 4 संयोजी इलेक्ट्रॉन सहसंयोजी बंधों में उपयोग। एक विशाल 3D जाल बनाता।
संरचना के कारण गुण:
- सब बंध समान और प्रबल।
- 3D दृढ़ जाल।
- कोई परत नहीं फिसलने को।
- सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ।
- उच्च गलनांक (~3500°C)।
- अचालक (कोई मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं)।
- उच्च घनत्व (3.5 g/cm³)।
ग्रेफाइट — संरचना
प्रत्येक C परमाणु केवल 3 अन्य C परमाणुओं से समतल (सपाट) षट्भुजीय व्यवस्था में बंधा। प्रति C परमाणु 1 इलेक्ट्रॉन विस्थानित (मुक्त)। षट्भुजीय परतों में बनता। परतें कमज़ोर van der Waals बलों से जुड़ी।
संरचना के कारण गुण:
- परतें एक-दूसरे पर फिसल सकतीं → मुलायम और चिकना।
- मुक्त इलेक्ट्रॉन → विद्युत का अच्छा चालक।
- कम घनत्व (2.2 g/cm³)।
- पेंसिलों में उपयोग (कागज़ पर फिसलता)।
- स्नेहक के रूप में उपयोग।
- इलेक्ट्रोडों में उपयोग (चालक)।
तुलना
| गुण | हीरा | ग्रेफाइट |
|---|---|---|
| C प्रति बंध | 4 | 3 |
| संरचना | 3D जाल | 2D परतें |
| मुक्त इलेक्ट्रॉन | नहीं | हाँ |
| कठोरता | सबसे कठोर | मुलायम |
| चालकता | नहीं | अच्छी |
| घनत्व | 3.5 g/cm³ | 2.2 g/cm³ |
| उपयोग | काटना, गहने | पेंसिल, इलेक्ट्रोड |
मूल अंतर्दृष्टि
एक ही तत्व (C), अलग संरचना → नाटकीय रूप से भिन्न गुण।
यह व्यवस्था के महत्व को दर्शाता गुणों के निर्धारण में।
दोनों 'अपररूप' हैं — एक ही तत्व के अलग-अलग रूप।
(अधिक अपररूपों के बारे में अनुभाग 2 में!)
[NCERT — महत्वपूर्ण]
उदाहरण 13: ध्रुवीय vs अध्रुवीय सहसंयोजी बंध
निम्न बंधों को ध्रुवीय या अध्रुवीय सहसंयोजी के रूप में वर्गीकृत करें: (a) H — H (b) C — H (c) O — H (d) C = O (e) N — H (f) Cl — Cl
हल:
सिद्धांत
ध्रुवीयता विद्युत-ऋणात्मकता अंतर पर निर्भर:
- शुद्ध सहसंयोजी (अध्रुवीय): समान परमाणु (कोई अंतर नहीं)।
- ध्रुवीय सहसंयोजी: अलग परमाणु (कुछ अंतर)।
विद्युत-ऋणात्मकता मान:
- H: 2.1
- C: 2.5
- N: 3.0
- O: 3.5
- Cl: 3.0
विश्लेषण
(a) H — H
समान परमाणु; अंतर = 0। ✗ अध्रुवीय।
(b) C — H
अंतर: 2.5 - 2.1 = 0.4 (छोटा)। ✗ लगभग अध्रुवीय (थोड़ा ध्रुवीय)।
(c) O — H
अंतर: 3.5 - 2.1 = 1.4 (महत्वपूर्ण)। ✓ ध्रुवीय सहसंयोजी। O पर थोड़ा δ⁻; H पर थोड़ा δ⁺।
(d) C = O
अंतर: 3.5 - 2.5 = 1.0। ✓ ध्रुवीय सहसंयोजी। O पर δ⁻; C पर δ⁺।
(e) N — H
अंतर: 3.0 - 2.1 = 0.9। ✓ ध्रुवीय सहसंयोजी। N पर δ⁻; H पर δ⁺।
(f) Cl — Cl
समान परमाणु; अंतर = 0। ✗ अध्रुवीय।
सारांश
| बंध | अंतर | प्रकार |
|---|---|---|
| H — H | 0 | अध्रुवीय |
| C — H | 0.4 | लगभग अध्रुवीय |
| O — H | 1.4 | ध्रुवीय |
| C = O | 1.0 | ध्रुवीय |
| N — H | 0.9 | ध्रुवीय |
| Cl — Cl | 0 | अध्रुवीय |
व्यावहारिक महत्व
ध्रुवीय बंध → ध्रुवीय अणु → जल में विलेयता। अध्रुवीय बंध → अध्रुवीय अणु → तेल में विलेयता।
उदाहरण:
- H₂O (ध्रुवीय) — NaCl, चीनी घुलाता।
- CCl₄ (अध्रुवीय) — नेफ्थलीन, तेल घुलाता।
- पेट्रोल (अध्रुवीय) — जल से नहीं मिलता।
'जैसा घुलनशील वैसे में' — मूल नियम।
[बोर्ड: 3-अंक]
उदाहरण 14: सारांश प्रश्न
(a) सहसंयोजी बंध परिभाषित करें। (b) कार्बन की संयोजकता 4 क्यों है? (c) (एथीन) की संरचना बनाएँ। (d) तुलना करें: NaCl vs CH₄ का गलनांक। (e) सहसंयोजी यौगिकों के 3 गुण बताएँ।
हल:
(a) सहसंयोजी बंध
दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉन युग्मों के पारस्परिक साझाकरण से बना रासायनिक बंध — ताकि दोनों स्थिर उत्तम गैस विन्यास (अष्टक) पा सकें।
उदाहरण: H-H, C-C, O-H, आदि।
(b) कार्बन की संयोजकता = 4
कारण: विन्यास 2, 4 → 4 संयोजी इलेक्ट्रॉन।
अष्टक पूरा करने के लिए (8 इलेक्ट्रॉन), C को 4 और चाहिए। 4 इलेक्ट्रॉन साझा करके → 4 सहसंयोजी बंध।
अतः संयोजकता = 4 (चतुष्संयोजकता)।
(c) एथीन () की संरचना
2 C परमाणु + 4 H परमाणु। 1 C=C द्विक बंध + 4 C-H एकल बंध।
H H
\ /
C = C
/ \
H H
बंध:
- प्रत्येक C: 1 द्विक बंध (2 की गिनती) + 2 एकल (H के साथ) = 4 बंध ✓
- प्रत्येक H: 1 एकल बंध ✓
कुल: 6 बंध (1 C=C + 4 C-H, द्विक 2 के रूप में गिना)।
(d) NaCl vs CH₄ गलनांक
| यौगिक | M.P. | कारण |
|---|---|---|
| NaCl | 801°C | प्रबल आयनिक बंध (विद्युत-स्थैतिक) |
| CH₄ | -182°C | कमज़ोर अंतर-आण्विक बल |
अंतर: ~983°C!
कारण:
- NaCl: आयन 3D क्रिस्टल जाली में मजबूती से जुड़े।
- CH₄: छोटे अध्रुवीय अणु, केवल van der Waals बल।
(e) सहसंयोजी यौगिकों के 3 गुण
1. कम गलनांक और क्वथनांक। उदाहरण: H₂O (B.P. 100°C), CH₄ (B.P. -161°C)।
2. जल में अविलेय (अधिकांश)। उदाहरण: तेल, पेट्रोल, नेफ्थलीन। अपवाद: HCl, चीनी (ध्रुवीय)।
3. विद्युत के खराब चालक। कारण: कोई मुक्त आयन/इलेक्ट्रॉन नहीं। अपवाद: अम्ल (जल में), ग्रेफाइट।
[बोर्ड: 5-अंक मिश्र]
उदाहरण 15: एक रोचक — एकल युग्म
एकल युग्म क्या? , , और में एकल युग्म पहचानें।
हल:
परिभाषा
'एकल युग्म' = संयोजी इलेक्ट्रॉनों का एक युग्म जो किसी बंध में साझा नहीं।
ये केवल एक परमाणु के होते — कोई बंध-साथी नहीं।
H₂O — 2 एकल युग्म
O के पास 6 संयोजी इलेक्ट्रॉन। 2, H परमाणुओं के साथ साझा (2 O-H बंधों में)। 4 एकल युग्म के रूप में बचते (2 युग्म)।
..
H — O — H
..
O के ऊपर और नीचे के दो बिंदु 2 एकल युग्म दर्शाते।
NH₃ — 1 एकल युग्म
N के पास 5 संयोजी इलेक्ट्रॉन। 3, H परमाणुओं के साथ साझा (3 N-H बंधों में)। 2 बचते 1 एकल युग्म के रूप में।
..
H — N — H
|
H
N पर दो बिंदु 1 एकल युग्म दर्शाते।
HCl — 3 एकल युग्म
Cl के पास 7 संयोजी इलेक्ट्रॉन। 1, H के साथ साझा (1 H-Cl बंध में)। 6 बचते 3 एकल युग्म के रूप में।
: :
H — Cl
: :
Cl के पास 3 एकल युग्म।
एकल युग्म क्यों मायने रखते
1. अणु आकार पर प्रभाव।
- : 2 एकल युग्म → V-आकार (वक्र)।
- : 1 एकल युग्म → पिरामिडल।
- : 0 एकल युग्म → चतुष्फलकीय।
2. अणुओं को ध्रुवीय बनाते।
- एकल युग्म असमानता बनाते → द्विध्रुव क्षण।
- अतः H₂O और NH₃ ध्रुवीय।
3. आगे के बंध की अनुमति।
- एकल युग्म 'समन्वय' या 'दात्र' बंध बना सकते।
- उदाहरण: (अमोनियम) — N का एकल युग्म H⁺ के साथ साझा।
सारांश
| अणु | एकल युग्म | आकार | ध्रुवीयता |
|---|---|---|---|
| H₂O | 2 | वक्र | ध्रुवीय |
| NH₃ | 1 | पिरामिडल | ध्रुवीय |
| CH₄ | 0 | चतुष्फलकीय | अध्रुवीय |
| HCl | 3 (Cl पर) | रैखिक | ध्रुवीय |
एकल युग्म — अदृश्य परंतु महत्वपूर्ण!
[बोर्ड: 3-अंक]
उदाहरण 16: एक अनुप्रयोग — बंध ऊर्जा और स्थायित्व
कौन-सा बंध सबसे स्थिर: C-C, C=C, या C≡C? क्यों?
हल:
तुलना तालिका
| बंध | साझा युग्म | लंबाई | ऊर्जा (kJ/mol) |
|---|---|---|---|
| C — C | 1 | 154 pm | 348 |
| C = C | 2 | 134 pm | 614 |
| C ≡ C | 3 | 120 pm | 839 |
सबसे स्थिर: C ≡ C (त्रिक बंध)
त्रिक बंध की बंध ऊर्जा सबसे अधिक (839 kJ/mol)। अतः तोड़ने के लिए सबसे अधिक ऊर्जा चाहिए। ऊर्जा की दृष्टि से सबसे स्थिर।
परंतु — सबसे क्रियाशील अलग प्रश्न
'स्थिर' (उच्च बंध ऊर्जा) ≠ 'अप्रतिक्रियाशील'।
त्रिक बंध कई तरीकों से अधिक क्रियाशील हैं:
- योगात्मक अभिक्रियाएँ कर सकते।
- आंशिक रूप से टूट सकते (3 → 2 → 1)।
- अधिक इलेक्ट्रॉन घनत्व → आक्रमण आसान।
एकल बंध कम क्रियाशील:
- सब इलेक्ट्रॉन बंधे हैं।
- तोड़ने को कोई बहुगुण बंध नहीं।
- योग के लिए स्थिर।
व्यापार-संबंध — स्थायित्व vs क्रियाशीलता
त्रिक बंध:
- उच्च ऊर्जा (स्थिर)।
- परंतु अधिक प्रतिक्रिया कर सकता (1 युग्म खोकर द्विक बने)।
एकल बंध:
- कम ऊर्जा (ऊर्जा की दृष्टि से कम स्थिर)।
- परंतु कम क्रियाशील (खोने को कोई अतिरिक्त युग्म नहीं)।
व्यावहारिक उदाहरण
एथाइन ():
- त्रिक बंध।
- आसानी से क्रिया H₂, Br₂ के साथ।
- ऑक्सीएसिटिलीन वेल्डिंग में उपयोग।
एथीन ():
- द्विक बंध।
- क्रिया H₂, Br₂ के साथ (ब्रोमीन जल को रंगहीन — एक परीक्षण)।
एथेन ():
- एकल बंध।
- कम क्रियाशील (केवल प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ)।
- स्थिर, ईंधन के रूप में उपयोग।
औद्योगिक अनुप्रयोग
भारी हाइड्रोकार्बनों का खंडन:
- लंबी एकल-बंध श्रृंखलाएँ टूटतीं।
- द्विक बंधों वाले छोटे अणु बनते।
- ये अधिक क्रियाशील — प्लास्टिक आदि बनाने में उपयोग।
बहुलकीकरण:
- कई एथीन अणु द्विक बंध से जुड़ते।
- पॉलीएथिलीन प्लास्टिक बनता।
निष्कर्ष
सबसे स्थिर: C ≡ C (सबसे उच्च बंध ऊर्जा)। सबसे क्रियाशील: C ≡ C (बहुगुण बंध)।
एक विरोधाभास: एक ही बंध स्थिर (ऊर्जा से) और क्रियाशील (रासायनिक रूप से) — दोनों हो सकता है!
[बोर्ड: 5-अंक]