एथेनॉल — सबसे महत्वपूर्ण एल्कोहल

एथेनॉल (C2H5OHC_2H_5OH) — सबसे महत्वपूर्ण कार्बनिक यौगिकों में से एक — पेय, ईंधन, विलायक, और कीटाणुनाशक के रूप में उपयोग।

भौतिक गुण

  • रंगहीन द्रव।
  • मीठी गंध।
  • क्वथनांक: 78°C (कम — आसानी से वाष्पीकरण)।
  • जल में अति-विलेय (किसी भी अनुपात में)।
  • वाष्पशील (आसानी से वाष्पीकरण)।
  • घनत्व: 0.789 g/mL।

एथेनॉल के स्रोत

1. किण्वन (Fermentation)

शर्करा + ख़मीर → एथेनॉल + CO₂ (मादक पेय)।

अभिक्रिया: C6H12O6ख़मीर2C2H5OH+2CO2C_6H_{12}O_6 \xrightarrow{\text{ख़मीर}} 2C_2H_5OH + 2CO_2

बनाने में उपयोग:

  • वाइन (अंगूर से)।
  • बीयर (जौ से)।
  • व्हिस्की, वोडका (अनाज से)।

प्रक्रिया 'किण्वन' कहलाती।

2. औद्योगिक विधि (एथीन से)

एथीन + जल → एथेनॉल (सल्फ्यूरिक अम्ल उत्प्रेरक के साथ)।

CH2=CH2+H2OH2SO4,300°CCH3CH2OHCH_2=CH_2 + H_2O \xrightarrow{H_2SO_4, 300°C} CH_3CH_2OH

औद्योगिक-ग्रेड एथेनॉल के लिए उपयोग।

एथेनॉल की रासायनिक अभिक्रियाएँ

1. दहन

C2H5OH+3O22CO2+3H2O+ऊष्माC_2H_5OH + 3O_2 \rightarrow 2CO_2 + 3H_2O + \text{ऊष्मा}

नीली ज्वाला, ऊष्मा छोड़ती। ईंधन योजक के रूप में उपयोग (E10, E20 पेट्रोल)।

2. सोडियम के साथ अभिक्रिया

एथेनॉल का -OH H थोड़ा अम्लीय।

2CH3CH2OH+2Na2CH3CH2ONa++H22CH_3CH_2OH + 2Na \rightarrow 2CH_3CH_2O^-Na^+ + H_2\uparrow

सोडियम एथॉक्साइड + हाइड्रोजन गैस। धीमी अभिक्रिया — छोटे बुलबुले। एल्कोहलों के लिए परीक्षण।

3. एथेनोइक अम्ल में ऑक्सीकरण

CH3CH2OHKMnO4CH3COOHCH_3CH_2OH \xrightarrow{KMnO_4} CH_3COOH

प्रबल ऑक्सीकारक एजेंट एथेनॉल को एसिटिक अम्ल में बदलते। सिरके के लिए औद्योगिक विधि।

4. एथीन में निर्जलीकरण

सान्द्र H2SO4H_2SO_4 के साथ 170°C पर:

CH3CH2OHसान्द्र H2SO4,170°CCH2=CH2+H2OCH_3CH_2OH \xrightarrow{\text{सान्द्र } H_2SO_4, 170°C} CH_2=CH_2 + H_2O

अम्ल जल हटाता → एथीन। औद्योगिक विधि का उल्टा!

एथेनॉल के उपयोग

1. मादक पेय। बीयर, वाइन, स्पिरिट — विश्वव्यापी औद्योगिक उत्पादन।

2. विलायक। कई कार्बनिक यौगिकों को घुलाता। प्रसाधन, इत्र, दवाओं में उपयोग।

3. कीटाणुनाशक। 70% एथेनॉल बैक्टीरिया मारता। हैंड सैनिटाइज़र, अस्पताल सफाई में उपयोग।

4. ईंधन। पेट्रोल के साथ मिश्रित (E10, E20)। ब्राज़ील गन्ने से बड़े पैमाने पर एथेनॉल बनाता। नवीकरणीय, पेट्रोल से स्वच्छ।

5. एंटीफ़्रीज़। कुछ अनुप्रयोगों में।

6. संश्लेषण। कई रसायनों के लिए शुरुआती सामग्री।

स्वास्थ्य और सामाजिक प्रभाव

यद्यपि एथेनॉल के कई उपयोग, इसे पीना गंभीर प्रभाव:

अल्पकालिक (नशा):

  • धीमी प्रतिक्रियाएँ।
  • अशक्त निर्णय।
  • तुतलाना।
  • समन्वय की हानि।

दीर्घकालिक (शराबखोरी):

  • यकृत क्षति।
  • हृदय रोग।
  • मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ।
  • सामाजिक समस्याएँ।

कई देश शराब खपत को विनियमित करते।

शुद्ध एथेनॉल या मेथेनॉल पीना घातक मेथेनॉल विशेष रूप से ख़तरनाक — अंधापन या मृत्यु।

मेथेनॉल पर एक नोट

मेथेनॉल (CH₃OH) पीने के लिए सुरक्षित नहीं — विषाक्त! अंधापन, यहाँ तक कि मृत्यु का कारण। 'लकड़ी का एल्कोहल' — लकड़ी के आसवन से उत्पादन से ऐतिहासिक नाम। औद्योगिक विलायक, ईंधन योजक के रूप में उपयोग।

साबुन मिसेल: जल में जलरागी सिरे और जलविरागी पूँछ

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:

English (in image) हिन्दी
Soap molecule साबुन अणु
Hydrophilic head (water-loving) जलरागी सिरा (जल-प्रेमी)
Hydrophobic tail (oil-loving) जलविरागी पूँछ (तेल-प्रेमी)
Oil / dirt droplet तेल / मैल की बूँद
Micelle मिसेल
Water जल

एथेनोइक अम्ल (एसिटिक अम्ल)

एथेनोइक अम्ल (CH3COOHCH_3COOH) — एथेनॉल के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण कार्बनिक यौगिक।

सामान्य नाम: एसिटिक अम्ल सिरके (वायु में 5-8% विलयन) में पाया जाता।

भौतिक गुण

  • रंगहीन द्रव।
  • चुभने वाली, तीखी गंध (सिरके की गंध)।
  • खट्टा स्वाद (भोजन में उपयोग)।
  • क्वथनांक: 118°C (एथेनॉल से अधिक H-बंधन के कारण)।
  • गलनांक: 16.6°C (ठंडे मौसम में जमता → 'हिमक एसिटिक अम्ल')।
  • जल में अति-विलेय।

'हिमक एसिटिक अम्ल' क्यों?

शुद्ध एथेनोइक अम्ल (कोई जल नहीं) 16.6°C पर जमता। ठंडी सर्दियों में, शुद्ध एसिटिक अम्ल बर्फ-जैसे क्रिस्टल बनाता। अतः 'हिमक' एसिटिक अम्ल कहलाता।

एसिटिक अम्ल के स्रोत

1. एथेनॉल से (औद्योगिक)

सबसे आम विधि।

CH3CH2OH+O2AcetobacterCH3COOH+H2OCH_3CH_2OH + O_2 \xrightarrow{\text{Acetobacter}} CH_3COOH + H_2O

सिरका बनाने में उपयोग — बैक्टीरिया एथेनॉल को ऑक्सीकृत करते।

2. एथाइन से

औद्योगिक रासायनिक विधि।

HCCH+H2OCH3CHOCH3COOHHC≡CH + H_2O \rightarrow CH_3CHO \rightarrow CH_3COOH

बहु-चरण।

3. मेथेनॉल से (आधुनिक)

CO और एक उत्प्रेरक के साथ।

CH3OH+COCH3COOHCH_3OH + CO \rightarrow CH_3COOH

सबसे आधुनिक औद्योगिक मार्ग — कुशल और सस्ता।

एसिटिक अम्ल की रासायनिक अभिक्रियाएँ

1. अम्लीय गुण

जल में H⁺ छोड़ता:

CH3COOHCH3COO+H+CH_3COOH \rightleftharpoons CH_3COO^- + H^+

pKa = 4.76 (कमज़ोर अम्लीय)। खट्टा स्वाद, नीले लिटमस को लाल करता।

2. क्षारकों के साथ — उदासीनीकरण

CH3COOH+NaOHCH3COONa+H2OCH_3COOH + NaOH \rightarrow CH_3COONa + H_2O सोडियम एसीटेट उत्पन्न।

3. धातुओं के साथ

2CH3COOH+Mg(CH3COO)2Mg+H22CH_3COOH + Mg \rightarrow (CH_3COO)_2Mg + H_2\uparrow

4. कार्बोनेट और बाइकार्बोनेट के साथ

CO₂ उत्पन्न — HCl की तरह।

CH3COOH+Na2CO32CH3COONa+H2O+CO2CH_3COOH + Na_2CO_3 \rightarrow 2CH_3COONa + H_2O + CO_2\uparrow CH3COOH+NaHCO3CH3COONa+H2O+CO2CH_3COOH + NaHCO_3 \rightarrow CH_3COONa + H_2O + CO_2

यही कारण कि सिरका + बेकिंग सोडा → फ़िज़ (CO₂ बुलबुले)!

5. एस्टरीकरण (महत्वपूर्ण!)

एसिटिक अम्ल + एल्कोहल → एस्टर + जल।

CH3COOH+C2H5OHसान्द्र H2SO4CH3COOC2H5+H2OCH_3COOH + C_2H_5OH \xrightarrow{\text{सान्द्र } H_2SO_4} CH_3COOC_2H_5 + H_2O

उत्पाद: एथिल एसीटेट (एस्टर) — मीठी गंध।

एस्टर सुगंधों के लिए ज़िम्मेदार:

  • केले की गंध।
  • सेब की गंध।
  • गुलाब इत्र।

एसिटिक अम्ल के उपयोग

1. सिरका। भोजन परिरक्षण, सलाद ड्रेसिंग, पकाना, अचार।

2. औद्योगिक। उत्पादन:

  • प्लास्टिक (PVA, सेलुलोज़ एसीटेट)।
  • दवाइयाँ (एस्पिरिन)।
  • विलायक।
  • रंजक।

3. प्रयोगशाला। बफ़र विलयन। अभिकर्मक।

भोजन में सिरका क्यों?

सिरका (5-8% एसिटिक अम्ल):

  • खट्टा स्वाद जोड़ता।
  • परिरक्षक के रूप में काम (बैक्टीरिया मारता)।
  • अचार, सॉस में उपयोग।
  • मांस को कोमल बनाने में मदद।

एक तुलना

गुण एथेनॉल एसिटिक अम्ल
गंध हल्की, मीठी चुभने वाली, तीखी
स्वाद (शुद्ध: स्वादहीन) खट्टा
अम्लीय? नहीं हाँ (कमज़ोर)
Na के साथ अभिक्रिया (धीमी) अभिक्रिया (तेज़)
NaOH के साथ नहीं अभिक्रिया (उदासीनीकरण)
Na₂CO₃ के साथ नहीं CO₂ निकलती

समान तत्व (C, H, O), परंतु क्रियात्मक समूहों के कारण बहुत भिन्न रसायन।

एथेनॉल और एथेनोइक अम्ल का एस्टरीकरण से एस्टर बनना

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:

English (in image) हिन्दी
Ethanol एथेनॉल
Ethanoic acid एथेनोइक अम्ल
Conc. sulphuric acid (catalyst) सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल (उत्प्रेरक)
Ester (sweet smell) एस्टर (मीठी गंध)
Warm water bath गर्म जल स्नान

साबुन — रसायन की सफाई शक्ति

साबुन लंबी श्रृंखला फैटी अम्लों के सोडियम लवण।

एक साबुन अणु के दो भाग — एक मूलभूत अंतर्दृष्टि!

साबुन अणु की संरचना

साबुन के दो विशिष्ट छोर:

1. हाइड्रोफिलिक सिर (जल-प्रिय):

  • -COO⁻Na⁺ छोर।
  • ध्रुवीय, आवेशित।
  • जल में विलेय।

2. हाइड्रोफोबिक पूँछ (जल-विमुख):

  • लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला (15-17 C परमाणु)।
  • अध्रुवीय।
  • तेलों/ग्रीस में विलेय।

एक साबुन अणु ऐसा दिखता:

  लंबी C श्रृंखला (हाइड्रोफोबिक) — COO⁻Na⁺ (हाइड्रोफिलिक)

उदाहरण: सोडियम स्टीयरेट: C₁₇H₃₅-COO⁻Na⁺ = श्रृंखला में 17 C + COO⁻Na⁺ छोर।

साबुन कैसे साफ करता — मिसेल

गंदगी अधिकतर तैलीय/चिकनी — जल में नहीं घुलती।

साबुन इसे मिसेल बनाकर हल करता:

चरण 1: साबुन अणु गंदगी की बूँद को घेरते

  • हाइड्रोफोबिक पूँछें तैलीय गंदगी में घुलतीं।
  • हाइड्रोफिलिक सिर बाहर की ओर (जल की ओर)।

चरण 2: मिसेल बनता

  • एक गोलाकार संरचना।
  • अंदर: तैलीय गंदगी।
  • बाहर: जल में हाइड्रोफिलिक सिर।

यह गंदगी को 'फँसाता'।

चरण 3: मिसेल जल में बिखरा

  • जल में कई मिसेल = गंदा जल।
  • आसानी से धोया जाए।
  • कपड़े/त्वचा साफ!

साबुन का विनिर्माण

साबुन साबुनीकरण से बनाया जाता — वसा की क्षार से अभिक्रिया।

साबुनीकरण अभिक्रिया:

वसा (या तेल)+NaOHसाबुन+ग्लिसरॉल\text{वसा (या तेल)} + NaOH \rightarrow \text{साबुन} + \text{ग्लिसरॉल}

एक सरलीकृत समीकरण: R-COOC₃H₅(OOCR)₂ (वसा)+3NaOH3R-COONa (साबुन)+C3H8O3(ग्लिसरॉल)\text{R-COOC₃H₅(OOCR)₂ (वसा)} + 3NaOH \rightarrow 3\text{R-COONa (साबुन)} + C_3H_8O_3 \text{(ग्लिसरॉल)}

वसा = ग्लिसरॉल और 3 फैटी अम्लों का एस्टर। NaOH इसे तोड़ता, ग्लिसरॉल को Na से बदलता।

साबुन विनिर्माण — चरण

1. वसा (जैसे, ताड़ का तेल) को NaOH विलयन के साथ गर्म। 2. अभिक्रिया साबुन (नमक के पानी में अविलेय) + ग्लिसरॉल (जल में) उत्पन्न। 3. साबुन को विलयन से अलग करने के लिए नमक डालें। 4. साबुन तैरता और एकत्र किया जाता। 5. सुगंध, रंग, बनावट योजक मिलाएँ। 6. बार या फ्लेक्स में ढालें।

ग्लिसरॉल — उपयोगी उप-उत्पाद

ग्लिसरॉल (C₃H₈O₃) — एक उपयोगी रसायन। उपयोग:

  • प्रसाधन (मॉइस्चराइज़र)।
  • भोजन (मीठा, परिरक्षक)।
  • दवाइयाँ।
  • विस्फोटक (नाइट्रोग्लिसरीन)।

कठोर जल समस्या

साबुन कठोर जल (Ca²⁺, Mg²⁺ आयनों वाला जल) में अच्छी तरह झाग नहीं देता।

कारण: साबुन + Ca²⁺ → अविलेय कैल्शियम साबुन (फटा)। यह 'मैल' साबुन बर्बाद करता और कपड़ों पर दाग लगाता।

अभिक्रिया: 2C17H35COONa++Ca2+(C17H35COO)2Ca+2Na+2C_{17}H_{35}COO^-Na^+ + Ca^{2+} \rightarrow (C_{17}H_{35}COO)_2Ca\downarrow + 2Na^+

इसे दूर करने:

  • जल को मृदु करें (Ca²⁺, Mg²⁺ हटाएँ)।
  • या अपमार्जक उपयोग करें (मैल नहीं बनाते)।

अपमार्जक (Detergents)

अपमार्जक फैटी अम्लों के बजाय सल्फोनिक अम्लों के सोडियम लवण।

साबुन से अंतर

दोनों की समान मूल संरचना:

  • हाइड्रोफोबिक पूँछ (लंबी C श्रृंखला)।
  • हाइड्रोफिलिक सिर।

परंतु सिर भिन्न:

  • साबुन: -COO⁻Na⁺ (कार्बोक्सिलेट)
  • अपमार्जक: -SO₃⁻Na⁺ (सल्फोनेट) या समान

अपमार्जक कठोर जल में बेहतर क्यों

सल्फोनेट समूह:

  • Ca²⁺/Mg²⁺ के साथ अविलेय लवण नहीं बनाता।
  • कठोर जल में अच्छी तरह झाग देता।
  • अधिक प्रभावी सफाई।

यही कारण कि संश्लेषित अपमार्जक उपयोग होते:

  • वॉशिंग पाउडर (सर्फ़, टाइड, आदि)।
  • डिश-वॉशिंग द्रव।
  • शैम्पू।
  • औद्योगिक क्लीनर।

एक सामान्य अपमार्जक

सोडियम डोडेसिल बेन्ज़ीन सल्फोनेट लंबी C श्रृंखला + SO₃⁻Na⁺।

आधुनिक अपमार्जक पर्यावरणीय प्रभाव कम करने के लिए जैव-निम्नीकरणीय।

तुलना — साबुन vs अपमार्जक

गुण साबुन अपमार्जक
स्रोत पशु वसा / वनस्पति तेल पेट्रोलियम-आधारित या वसा
सिर समूह -COO⁻Na⁺ -SO₃⁻Na⁺
कठोर जल में मैल बनाता, खराब झाग अच्छी तरह झाग
जैव-निम्नीकरणीय हाँ (अधिकांश) कुछ हैं; कुछ नहीं
उपयोग स्नान बार वॉशिंग पाउडर, डिशवॉशिंग

अपमार्जक कभी-कभी जल को प्रदूषित क्यों करते

पुराने अपमार्जक:

  • शाखित श्रृंखला (अति-स्थिर)।
  • जैव-निम्नीकरण के लिए प्रतिरोधी।
  • नदियों, झीलों में फोम पैदा करते।
  • जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को बाधित।

आधुनिक अपमार्जक:

  • सीधी श्रृंखला (जैव-निम्नीकरणीय)।
  • स्वाभाविक रूप से टूटते।
  • कम पर्यावरणीय प्रभाव।

साबुन/अपमार्जक कैसे साफ करता (विस्तृत)

चरण-दर-चरण प्रक्रिया:

1. कपड़े को गीला करें: अकेला जल तैलीय गंदगी नहीं घुलाता।

2. साबुन लगाएँ: साबुन अणु तैलीय गंदगी कणों को घेरते। पूँछें तेल में, सिर जल में।

3. यांत्रिक क्रिया (रगड़ना): कपड़े से गंदगी ढीली होती। साबुन अणु गंदगी की बूँदों के चारों ओर लपेटते।

4. मिसेल बनते: गंदगी अब जल में निलंबित (मिसेल के रूप में)। कपड़े से जुड़ी नहीं।

5. कुल्ला: जल मिसेल (गंदगी सहित) ले जाता। कपड़ा साफ हो जाता!

एक व्यावहारिक प्रदर्शन

घर पर आज़माएँ: गंदे हाथ (तेल या ग्रीस के साथ)।

बिना साबुन:

  • अकेला जल तेल नहीं हटाएगा।
  • हाथ चिकने रहते।

साबुन के साथ:

  • साबुन तेल की बूँदों को घेरता।
  • मिसेल बनाता।
  • जल उन्हें धो देता।
  • हाथ साफ।

यह मिसेल का जादू — तेल को कुछ ऐसा बनाना जो जल ले जा सके।

एस्टर — मीठी गंध

एस्टर कार्बोक्सिलिक अम्ल + एल्कोहल की अभिक्रिया से बनते।

उनकी मीठी फलदार गंध होती — स्वाद, इत्र में उपयोग।

एस्टरीकरण अभिक्रिया

सामान्य अभिक्रिया: कार्बोक्सिलिक अम्ल+एल्कोहलएस्टर+H2O\text{कार्बोक्सिलिक अम्ल} + \text{एल्कोहल} \rightleftharpoons \text{एस्टर} + H_2O

विशेष रूप से: CH3COOH+C2H5OHसान्द्र H2SO4CH3COOC2H5+H2OCH_3COOH + C_2H_5OH \xrightarrow{\text{सान्द्र } H_2SO_4} CH_3COOC_2H_5 + H_2O

एसिटिक अम्ल + एथेनॉल → एथिल एथेनोएट (एथिल एसीटेट)।

स्थितियाँ

उत्प्रेरक: सान्द्र H2SO4H_2SO_4 ऊष्मा: हल्का गर्म। अभिक्रिया प्रतिवर्ती।

सामान्य एस्टर और उनकी गंध

एस्टर गंध
मेथिल ब्यूटिरेट सेब
एथिल एसीटेट नाशपाती/केला
एथिल ब्यूटिरेट अनानास
पेन्टिल एसीटेट केला
ओक्टिल एसीटेट संतरा

साबुनीकरण — एस्टरीकरण का उल्टा

एस्टरों को वापस एल्कोहल + अम्ल में हाइड्रोलाइज किया जा सकता:

CH3COOC2H5+H2ONaOH (क्षारक)CH3COONa+C2H5OHCH_3COOC_2H_5 + H_2O \xrightarrow{\text{NaOH (क्षारक)}} CH_3COONa + C_2H_5OH

यह साबुनीकरण — साबुन बनाने में उपयोग।

एस्टर कहाँ पाए जाते

1. फलों की गंध। अधिकांश फलों की गंध एस्टर।

2. इत्र। प्राकृतिक और संश्लेषित दोनों। गुलाब, चमेली, लैवेंडर — एस्टर उपस्थित।

3. स्वाद योजक। कैंडी, पेय में कृत्रिम फल स्वाद।

4. विलायक। एथिल एसीटेट — सामान्य विलायक। नेल पॉलिश रिमूवर में उपयोग।

5. दवाइयाँ। कई दवाएँ एस्टर। एस्पिरिन (एसिटिलसैलिसिलिक अम्ल) एक एस्टर।

6. पॉलिएस्टर कपड़े। पॉलिएस्टर = एस्टरों का बहुलक। कपड़ों, प्लास्टिक, बोतलों में उपयोग।

एस्टरों के लिए एक प्रयोगशाला परीक्षण

यौगिक की गंध लें — मीठी फलदार गंध एस्टर सुझाती।

सारांश — एक सुंदर चक्र

कार्बन यौगिकों का चक्र:

एल्केन → एल्कीन/एल्काइन (क्रैकिंग)
एल्कीन + H₂O → एल्कोहल
एल्कोहल → ऐल्डिहाइड → अम्ल (ऑक्सीकरण)
अम्ल + एल्कोहल → एस्टर + जल (एस्टरीकरण)
एस्टर + NaOH → साबुन + एल्कोहल (साबुनीकरण)

प्रत्येक रूपांतरण:

  • क्रियात्मक समूह बदलता।
  • गुण बदलता।
  • औद्योगिक महत्व रखता।

यह जीवन और उद्योग का कार्बनिक रसायन

🧠 स्मृति कैप्सूल (Memory Capsule)

बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले एक नज़र में।

1. एथेनॉल (C2H5OHC_2H_5OH)

  • रंगहीन द्रव, मीठी गंध, B.P. 78°C।
  • जल में विलेय।
  • बनाने: किण्वन, एथीन + जल।

2. एथेनॉल की अभिक्रियाएँ

1. दहन: C2H5OH+3O22CO2+3H2OC_2H_5OH + 3O_2 \rightarrow 2CO_2 + 3H_2O 2. Na के साथ: 2C2H5OH+2Na2C2H5ONa++H22C_2H_5OH + 2Na \rightarrow 2C_2H_5O^-Na^+ + H_2 3. अम्ल में ऑक्सीकरण: CH3CH2OHKMnO4CH3COOHCH_3CH_2OH \xrightarrow{KMnO_4} CH_3COOH 4. निर्जलीकरण: C2H5OHH2SO4,170°CC2H4+H2OC_2H_5OH \xrightarrow{H_2SO_4, 170°C} C_2H_4 + H_2O

3. एसिटिक अम्ल (CH₃COOH)

  • रंगहीन द्रव, चुभने वाली गंध, B.P. 118°C।
  • खट्टा स्वाद — सिरका (5-8%)।
  • 'हिमक एसिटिक अम्ल' = शुद्ध (16.6°C पर जमता)।

4. एसिटिक अम्ल की अभिक्रियाएँ

1. क्षारक के साथ: CH3COOH+NaOHCH3COONa+H2OCH_3COOH + NaOH \rightarrow CH_3COONa + H_2O 2. कार्बोनेट के साथ: CH3COOH+Na2CO3CH3COONa+H2O+CO2CH_3COOH + Na_2CO_3 \rightarrow CH_3COONa + H_2O + CO_2 3. बाइकार्बोनेट के साथ: CH3COOH+NaHCO3CH3COONa+H2O+CO2CH_3COOH + NaHCO_3 \rightarrow CH_3COONa + H_2O + CO_2 4. एस्टरीकरण: CH3COOH+C2H5OHH2SO4CH3COOC2H5+H2OCH_3COOH + C_2H_5OH \xrightarrow{H_2SO_4} CH_3COOC_2H_5 + H_2O

5. साबुन

लंबी श्रृंखला फैटी अम्ल का सोडियम लवण। सामान्य सूत्र: C17H35COONa+C_{17}H_{35}COO^-Na^+

दो भाग:

  • हाइड्रोफोबिक पूँछ (लंबी C श्रृंखला)।
  • हाइड्रोफिलिक सिर (-COO⁻Na⁺)।

6. साबुनीकरण

वसा + NaOH → साबुन + ग्लिसरॉल

एस्टरीकरण का उल्टा।

7. मिसेल निर्माण

साबुन अणु तैलीय गंदगी को घेरते:

  • पूँछें अंदर (तेल में)।
  • सिर बाहर (जल में)। = मिसेल।

यह गंदगी को जल में ले जाता।

8. अपमार्जक vs साबुन

गुण साबुन अपमार्जक
सिर -COO⁻Na⁺ -SO₃⁻Na⁺
कठोर जल मैल बनाता अच्छी तरह झाग
जैव-निम्नीकरणीय हाँ आधुनिक: हाँ
उदाहरण स्नान बार वॉशिंग पाउडर

9. एस्टरीकरण और साबुनीकरण

एस्टरीकरण: अम्ल + एल्कोहल → एस्टर + जल। साबुनीकरण: एस्टर + NaOH → लवण + एल्कोहल।

एस्टर मीठी फलदार गंध।

10. बोर्ड के 'सुनहरे' प्रश्न

  1. उदाहरण के साथ एस्टरीकरण अभिक्रिया।
  2. साबुन की सफाई क्रिया (मिसेल)।
  3. साबुन कठोर जल में झाग क्यों नहीं देता?
  4. एसिटिक अम्ल का परीक्षण।
  5. साबुन और अपमार्जक में अंतर।

अंतिम सूत्र: एथेनॉल + अम्ल = एस्टर (गंध)। एथेनॉल + Na = H₂। अम्ल + क्षारक = लवण + जल। वसा + NaOH = साबुन। साबुन मिसेल बनाकर साफ करता।

हल किए गए उदाहरण

उदाहरण 1: NCERT — एथेनॉल की अभिक्रियाएँ

एथेनॉल की निम्न के साथ अभिक्रियाएँ लिखें: (a) सोडियम (b) एसिटिक अम्ल (एस्टरीकरण) (c) KMnO₄ द्वारा ऑक्सीकरण (d) निर्जलीकरण

हल:

(a) एथेनॉल + सोडियम

2CH3CH2OH+2Na2CH3CH2ONa++H22CH_3CH_2OH + 2Na \rightarrow 2CH_3CH_2O^-Na^+ + H_2\uparrow

उत्पाद: सोडियम एथॉक्साइड + हाइड्रोजन गैस।

प्रेक्षण:

  • H₂ गैस के बुलबुले।
  • सोडियम धीरे-धीरे घुलता।
  • परीक्षण: 'पॉप' परीक्षण से H₂ की पुष्टि।

(b) एस्टरीकरण (एथेनॉल + एसिटिक अम्ल)

CH3COOH+C2H5OHसान्द्र H2SO4CH3COOC2H5+H2OCH_3COOH + C_2H_5OH \xrightarrow{\text{सान्द्र } H_2SO_4} CH_3COOC_2H_5 + H_2O

उत्पाद: एथिल एथेनोएट (एथिल एसीटेट) — मीठी गंध।

स्थितियाँ:

  • उत्प्रेरक: सान्द्र H₂SO₄।
  • हल्का ऊष्मा।

(c) एथेनॉल का ऑक्सीकरण

CH3CH2OHKMnO4CH3COOHCH_3CH_2OH \xrightarrow{KMnO_4} CH_3COOH

अम्लीय या क्षारीय KMnO₄ + ऊष्मा।

प्रेक्षण:

  • बैंगनी KMnO₄ रंगहीन हो जाता।
  • एथेनॉल एसिटिक अम्ल में ऑक्सीकृत।

(d) एथेनॉल का निर्जलीकरण

CH3CH2OHसान्द्र H2SO4,170°CCH2=CH2+H2OCH_3CH_2OH \xrightarrow{\text{सान्द्र } H_2SO_4, 170°C} CH_2=CH_2 + H_2O

उत्पाद: एथीन + जल।

स्थितियाँ:

  • सान्द्र H₂SO₄।
  • उच्च तापमान (170°C)।

ये अभिक्रियाएँ क्यों मायने रखतीं

Na के साथ: एल्कोहलों के लिए परीक्षण। एस्टरीकरण: एस्टर बनाता (इत्र, स्वाद)। ऑक्सीकरण: औद्योगिक सिरका उत्पादन। निर्जलीकरण: औद्योगिक एथीन उत्पादन।

सब चार एथेनॉल के -OH समूह का उपयोग करते। भिन्न स्थितियाँ भिन्न उत्पाद देती।

[NCERT — महत्वपूर्ण]

उदाहरण 2: NCERT — एसिटिक अम्ल की अभिक्रियाएँ

एसिटिक अम्ल की निम्न के साथ अभिक्रियाएँ लिखें: (a) सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) (b) सोडियम कार्बोनेट (Na₂CO₃) (c) सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO₃) (d) एथेनॉल

हल:

(a) एसिटिक अम्ल + सोडियम हाइड्रॉक्साइड (उदासीनीकरण)

CH3COOH+NaOHCH3COONa+H2OCH_3COOH + NaOH \rightarrow CH_3COONa + H_2O

उत्पाद: सोडियम एसीटेट + जल।

प्रकार: उदासीनीकरण अभिक्रिया। अम्ल + क्षारक → लवण + जल।

(b) एसिटिक अम्ल + सोडियम कार्बोनेट

2CH3COOH+Na2CO32CH3COONa+H2O+CO22CH_3COOH + Na_2CO_3 \rightarrow 2CH_3COONa + H_2O + CO_2\uparrow

उत्पाद: सोडियम एसीटेट + जल + कार्बन डाइऑक्साइड।

प्रेक्षण:

  • फुफकार (बुलबुले)।
  • CO₂ गैस निकलती।
  • अम्ल + कार्बोनेट → लवण + जल + CO₂।

(c) एसिटिक अम्ल + सोडियम बाइकार्बोनेट

CH3COOH+NaHCO3CH3COONa+H2O+CO2CH_3COOH + NaHCO_3 \rightarrow CH_3COONa + H_2O + CO_2\uparrow

उत्पाद: सोडियम एसीटेट + जल + कार्बन डाइऑक्साइड।

प्रेक्षण:

  • फुफकार।
  • CO₂ गैस।
  • यही कारण कि सिरका + बेकिंग सोडा फ़िज़ देते!

(d) एसिटिक अम्ल + एथेनॉल (एस्टरीकरण)

CH3COOH+C2H5OHसान्द्र H2SO4CH3COOC2H5+H2OCH_3COOH + C_2H_5OH \xrightarrow{\text{सान्द्र } H_2SO_4} CH_3COOC_2H_5 + H_2O

उत्पाद: एथिल एथेनोएट (एस्टर) + जल।

प्रकार: एस्टरीकरण। स्थितियाँ: सान्द्र H₂SO₄ + ऊष्मा।

एथिल एथेनोएट की मीठी फलदार गंध।

अन्य यौगिकों से अंतर करने के लिए परीक्षण

एसिटिक अम्ल को एथेनॉल से अलग किया जा सकता:

परीक्षण 1: लिटमस पेपर।

  • एसिटिक अम्ल: नीले लिटमस को लाल करता।
  • एथेनॉल: कोई परिवर्तन नहीं।

परीक्षण 2: Na₂CO₃ या NaHCO₃ के साथ।

  • एसिटिक अम्ल: फुफकार (CO₂)।
  • एथेनॉल: कोई परिवर्तन नहीं।

परीक्षण 3: गंध।

  • एसिटिक अम्ल: चुभने वाली (सिरके की गंध)।
  • एथेनॉल: मीठी (एल्कोहलीय गंध)।

एसिटिक अम्ल अम्ल जैसा क्यों कार्य करता

-COOH समूह:

  • जल में H⁺ छोड़ता।
  • विलयन को खट्टा बनाता।
  • क्षारकों, धातुओं से अभिक्रिया।

[NCERT — महत्वपूर्ण]

उदाहरण 3: NCERT — साबुन की सफाई क्रिया

आरेखों के साथ साबुन की सफाई क्रिया समझाएँ। साबुन कठोर जल में अच्छी तरह क्यों नहीं काम करता?

हल:

साबुन की संरचना

एक साबुन अणु के दो भाग:

  • हाइड्रोफिलिक सिर (-COO⁻Na⁺): ध्रुवीय, जल-प्रिय।
  • हाइड्रोफोबिक पूँछ (लंबी C श्रृंखला): अध्रुवीय, तेल-प्रिय।
  लंबी C श्रृंखला — COO⁻Na⁺
  (हाइड्रोफोबिक)   (हाइड्रोफिलिक)

उदाहरण: C17H35COONa+C_{17}H_{35}COO^-Na^+ (सोडियम स्टीयरेट)।

सफाई प्रक्रिया — चरण दर चरण

चरण 1: जल में साबुन अणु

साबुन घुलता; अणु जल में बिखरे।

चरण 2: गंदगी से मुठभेड़

गंदगी अधिकतर तैलीय/चिकनी — हाइड्रोफोबिक। साबुन अणु गंदगी कण के पास आते।

चरण 3: पूँछें गंदगी में जुड़तीं

हाइड्रोफोबिक पूँछें तैलीय गंदगी में घुलतीं। हाइड्रोफिलिक सिर बाहर की ओर (जल की ओर)।

चरण 4: मिसेल बनता

कई साबुन अणु गंदगी को घेरते। एक गोलाकार संरचना मिसेल बनातीं।

          ⌒⌒⌒
         (    )
        ( गंदगी )    ← तैलीय गंदगी अंदर
         (    )
          ⌒⌒⌒
         |||||      ← हाइड्रोफोबिक पूँछें
     ▲▲▲▲▲▲▲     ← हाइड्रोफिलिक सिर (-COO⁻Na⁺)
  ज  ल           ← बाहर जल में

चरण 5: यांत्रिक क्रिया (धोना)

रगड़ने से गंदगी कण कपड़े/त्वचा से ढीले होते। साबुन+गंदगी मिसेल जल में बिखरते।

चरण 6: जल से कुल्ला

जल (अब कई मिसेलों के साथ) धोया जाता। गंदगी जल के साथ चली जाती। सतह साफ हो जाती!

मिसेल का जादू

मिसेल इतने प्रभावी क्यों?

1. तैलीय गंदगी फँसाते: जिसे अकेला जल नहीं घुला सकता। 2. जल में निलंबित: आवेशित कणों के रूप में। 3. जल के साथ चलते: आसानी से कुल्ला हो जाते।

साबुन के बिना, जल और तेल नहीं मिलते। साबुन के साथ, वे मिसेल बनाते → धोने योग्य!

कठोर जल समस्या

'कठोर जल' = जल जिसमें घुले Ca2+Ca^{2+} और Mg2+Mg^{2+} आयन। भारत के कई क्षेत्रों में पाया जाता।

साबुन इन आयनों से अभिक्रिया करता:

2C17H35COONa++Ca2+(C17H35COO)2Ca+2Na+2C_{17}H_{35}COO^-Na^+ + Ca^{2+} \rightarrow (C_{17}H_{35}COO)_2Ca\downarrow + 2Na^+

कैल्शियम साबुन अविलेय — चिपचिपी सफ़ेद मैल बनाता:

  • कपड़ों पर (सफ़ेद अवशेष)।
  • सिंक, बाथटब पर।
  • हाथों पर।

कठोर जल में साबुन झाग क्यों नहीं देता

तीन समस्याएँ:

1. साबुन बर्बाद: साबुन गंदगी पर काम करने से पहले Ca²⁺/Mg²⁺ से क्रिया करता। 2. मैल: अविलेय कैल्शियम साबुन दाग और रोकता। 3. कम झाग: झाग कम होती।

परिणाम: अधिक साबुन चाहिए; कम प्रभावी सफाई।

समाधान

1. जल को पहले मृदु करें। Ca²⁺/Mg²⁺ हटाने के लिए आयन-विनिमय या रसायन उपयोग करें।

2. अपमार्जक उपयोग करें। अपमार्जकों के -SO₃⁻Na⁺ सिर। यह Ca²⁺/Mg²⁺ के साथ मैल नहीं बनाता। कठोर जल में झाग देता! यही कारण कि आधुनिक वॉशिंग पाउडर में संश्लेषित अपमार्जक व्यापक रूप से उपयोग।

अपमार्जक श्रेष्ठ क्यों

आधुनिक अपमार्जक (सर्फ़, टाइड):

  • कठोर जल में झाग।
  • कपड़ों के लिए अधिक प्रभावी।
  • उत्पादन में सस्ते।

सारांश

साबुन तैलीय गंदगी के चारों ओर मिसेल बनाकर साफ करता — गंदगी फँस जाती और धो दी जाती।

कठोर जल में, साबुन अविलेय Ca/Mg लवण (मैल) बनाने के कारण प्रभावशीलता खोता।

अपमार्जक यह हल करते — वे आधुनिक विकल्प हैं जो कठोर जल में काम करते।

[NCERT — हर साल, महत्वपूर्ण]

उदाहरण 4: एक समापन प्रश्न

(a) एस्टरीकरण परिभाषित करें। (b) एथेनॉल + एसिटिक अम्ल की अभिक्रिया लिखें। (c) साबुनीकरण क्या? (d) सिरका बेकिंग सोडा के साथ क्यों फ़िज़ देता?

हल:

(a) एस्टरीकरण

'एस्टरीकरण' = एक रासायनिक अभिक्रिया जहाँ अम्ल + एल्कोहल अभिक्रिया करके एस्टर + जल बनाते।

सामान्य अभिक्रिया: कार्बोक्सिलिक अम्ल+एल्कोहलएस्टर+H2O\text{कार्बोक्सिलिक अम्ल} + \text{एल्कोहल} \rightleftharpoons \text{एस्टर} + H_2O

स्थितियाँ:

  • उत्प्रेरक: सान्द्र H2SO4H_2SO_4
  • ऊष्मा: हल्का गर्म।
  • अभिक्रिया प्रतिवर्ती

एस्टरों की सामान्यतः मीठी, फलदार गंध — इत्र और स्वादों में उपयोग।

(b) एथेनॉल + एसिटिक अम्ल अभिक्रिया

यह विशिष्ट एस्टरीकरण:

CH3COOH+C2H5OHसान्द्र H2SO4CH3COOC2H5+H2OCH_3COOH + C_2H_5OH \xrightarrow{\text{सान्द्र } H_2SO_4} CH_3COOC_2H_5 + H_2O

एसिटिक अम्ल + एथेनॉल → एथिल एथेनोएट (एथिल एसीटेट) + जल।

एथिल एसीटेट के गुण:

  • रंगहीन द्रव।
  • सुखद फलदार गंध (केला/नाशपाती)।
  • विलायक के रूप में उपयोग (नेल पॉलिश रिमूवर)।

(c) साबुनीकरण

'साबुनीकरण' = एस्टरीकरण का उल्टा — एस्टर + क्षार → लवण + एल्कोहल।

सामान्य अभिक्रिया: एस्टर+NaOHसोडियम लवण+एल्कोहल\text{एस्टर} + NaOH \rightarrow \text{सोडियम लवण} + \text{एल्कोहल}

विशेष रूप से (साबुन बनाने के लिए): वसा (या तेल)+3NaOH3साबुन (R-COONa)+ग्लिसरॉल\text{वसा (या तेल)} + 3NaOH \rightarrow 3\text{साबुन (R-COONa)} + \text{ग्लिसरॉल}

जहाँ R = लंबी C श्रृंखला।

यह साबुन व्यावसायिक रूप से बनाने में उपयोग होने वाली अभिक्रिया!

साबुनीकरण क्यों मायने रखता

1. साबुन विनिर्माण। वसा और तेलों से साबुन बनाने का औद्योगिक प्रक्रिया।

2. ग्लिसरॉल उप-उत्पाद। प्रसाधन, भोजन, दवाइयों में उपयोगी।

(d) सिरका बेकिंग सोडा के साथ क्यों फ़िज़ देता?

सिरका = एसिटिक अम्ल (CH₃COOH)। बेकिंग सोडा = सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO₃)।

अभिक्रिया: CH3COOH+NaHCO3CH3COONa+H2O+CO2CH_3COOH + NaHCO_3 \rightarrow CH_3COONa + H_2O + CO_2\uparrow

उत्पाद: सोडियम एसीटेट + जल + कार्बन डाइऑक्साइड।

फ़िज़ CO₂ गैस के बुलबुलों से!

यह क्यों होता

सब कार्बोक्सिलिक अम्ल (एसिटिक अम्ल जैसे) कार्बोनेटों और बाइकार्बोनेटों से अभिक्रिया करते:

अम्ल + (बाइ)कार्बोनेट → लवण + जल + CO₂↑

ठीक: HCl + NaHCO₃ → NaCl + H₂O + CO₂

एसिटिक अम्ल समान व्यवहार करता — पुष्टि करता यह अम्ल है।

व्यावहारिक प्रदर्शन

1. अम्ल के लिए प्रयोगशाला परीक्षण:

अज्ञात विलयन में NaHCO₃ डालें। यदि फ़िज़ (CO₂) → अम्लीय।

2. ज्वालामुखी प्रयोग (बच्चों का विज्ञान):

सिरका + बेकिंग सोडा → CO₂ बुलबुलों के साथ 'विस्फोट'। मज़ेदार विज्ञान प्रदर्शन।

3. सफाई:

सिरका केतली में चूने के जमाव हटाता। चूना = CaCO₃ (चूना-पत्थर)। एसिटिक अम्ल + CaCO₃ → कैल्शियम एसीटेट + H₂O + CO₂। चूना टूटता → साफ हो जाता।

एक चिंतन

सिरका कमज़ोर अम्ल, परंतु अन्य अम्लों जैसा कार्य करता:

  • खट्टा स्वाद।
  • क्षारकों और कार्बोनेटों से अभिक्रिया।
  • जल में H⁺ छोड़ता।

यह दिखाता एसिटिक अम्ल (CH₃COOH) वास्तव में अम्ल — इसका क्रियात्मक समूह -COOH इसके रसायन को परिभाषित करता।

[बोर्ड: 5-अंक मिश्र]