त्वरित पुनरावृत्ति: कविता-सार सारणी

अंतरा प्रमुख बिम्ब संदेश
प्रथम मुस्काते फूल, तारों के दीप, नीलम से मेघ, अनन्त ऋतुराज स्थायित्व नहीं, नश्वरता ही सच्चा सौंदर्य है
द्वितीय सूने नयन, प्राणों की सेज वेदना व पीड़ा का अनुभव ही जीवन को गहराई देता है
तृतीय अमरों का लोक, मिटने का अधिकार अमरता का त्याग कर नश्वरता को अपनाना ही कवयित्री का जीवन-दर्शन है

काव्य-ग्रंथ: नीहार | रचयिता: महादेवी वर्मा | प्रधान रस: करुण रस (शांत रस सहित) | प्रधान अलंकार: आवृत्ति, रूपक, मानवीकरण, विरोधाभास

[Exam Tip] संदर्भ भाव स्पष्टीकरण हेतु सबसे अधिक पूछी जाने वाली पंक्तियाँ हैं — 'ऐसा तेरा लोक, वेदना, नहीं नहीं जिसमें अवसाद…' — इनकी शब्द-दर-शब्द व्याख्या अवश्य याद रखें।