लघु-उत्तरीय प्रश्न (आदर्श उत्तर)

प्रश्न 1: शामनाथ और उनकी धर्मपत्नी ने चीफ़ की दावत के लिए सुबह से क्या-क्या तैयारियाँ कीं?

उत्तर: शामनाथ और उनकी पत्नी ने पूरे दिन पसीना बहाकर दावत की तैयारी की। पत्नी ड्रेसिंग गाउन पहने बालों और मेकअप में व्यस्त रहीं, जबकि शामनाथ सिगरेट फूँकते हुए चीज़ों की फेहरिस्त लेकर कमरे-कमरे घूमते रहे। कुर्सियाँ, मेज, तिपाइयाँ, नैपकिन, फूल बरामदे में सजाए गए, ड्रिंक का इंतज़ाम बैठक में किया गया, और घर का 'फालतू सामान' अलमारियों के पीछे व पलंगों के नीचे छिपाया गया।

प्रश्न 2: शामनाथ और उनकी धर्मपत्नी माँ को लेकर क्यों चिंतित थे?

उत्तर: उन्हें डर था कि माँ की उपस्थिति दावत की शोभा बिगाड़ देगी और चीफ़ के सामने उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाएगी। उन्हें आशंका थी कि यदि माँ सो गईं और खर्राटे लेने लगीं, नंगे पाँव घूमीं, या मेहमानों से अटपटी बातें कर बैठीं, तो चीफ़ बुरा मान सकता है और 'सारा मज़ा जाता रहेगा'।

प्रश्न 3: चीफ़ की दावत के समय माँ की मनोदशा का वर्णन कीजिए।

उत्तर: दावत के दौरान माँ अत्यंत भयभीत और असहज थीं। बेटे के दफ्तर के बड़े साहब के आने की खबर से माँ का दिल धड़क रहा था — 'अमरीकी' अफसर से क्या बात करेंगी, यह सोचकर वे घबरा रही थीं। बेटे की हर हिदायत को वे चुपचाप स्वीकार करती रहीं, अपने आराम और सम्मान की परवाह किए बिना, केवल इसलिए कि बेटे का काम बिगड़ न जाए। पार्टी में जब उनकी नींद खुली अवस्था उजागर हुई, तो वे अत्यंत लज्जित व घबराई हुई थीं, परन्तु बाद में चीफ़ की सहृदयता से वातावरण सहज हो गया।

प्रश्न 4: बरामदे में पहुँचते ही शामनाथ क्यों ठिठक गए?

उत्तर: बरामदे में पहुँचते ही शामनाथ ने देखा कि माँ कुर्सी पर पाँव ऊपर चढ़ाए, सिर इधर-उधर झुलाते हुए गहरी नींद में सो रही थीं और ज़ोर-ज़ोर से खर्राटे ले रही थीं, उनके बाल बिखरे हुए थे। यह दृश्य देखकर शामनाथ को गहरा सदमा लगा — उन्हें डर था कि इससे चीफ़ और मेहमानों के सामने उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचेगी, इसलिए वे क्षणभर के लिए स्तब्ध होकर ठिठक गए।

प्रश्न 5: चीफ़ और माँ की पहली मुलाकात का वर्णन कीजिए।

उत्तर: माँ को सोते हुए देखकर कुछ देसी स्त्रियाँ हँस पड़ीं, परन्तु चीफ़ ने सहानुभूतिपूर्वक कहा — 'पूअर डियर!' घबराई हुई माँ ठीक से नमस्ते भी न कर सकीं और हाथ मिलाते समय भूल से बायाँ हाथ बढ़ा बैठीं, जिस पर फिर हँसी हुई। चीफ़ ने विनम्रतापूर्वक 'हाउ डू यू डू' कहकर माहौल को सहज बनाया और शामनाथ के बताने पर कि माँ गाँव की रहने वाली हैं, चीफ़ ने खुशी जताई और माँ से गाँव का गीत सुनाने का आग्रह किया।

प्रश्न 6: माँ को आलिंगन में भरकर शामनाथ ने क्या कहा?

उत्तर: आधी रात को झूमते हुए शामनाथ ने माँ को गले लगाकर कहा — 'ओ अम्मी! तुमने तो आज रंग ला दिया! साहब तुमसे इतना खुश हुआ कि क्या कहूँ? ओ अम्मी! ओ अम्मी!' यह उनकी सच्ची खुशी नहीं बल्कि साहब के खुश होने और अपनी संभावित तरक्की से उत्पन्न स्वार्थपूर्ण उल्लास था।

चरित्र-चित्रण (टिप्पणी)

1. चीफ़: चीफ़ शामनाथ के दफ्तर का अमरीकी बड़ा अधिकारी है। वह विनम्र, सहृदय और सरल स्वभाव का है। माँ की सोई हुई अवस्था देखकर वह उपहास नहीं करता, बल्कि सहानुभूति दिखाता है ('पूअर डियर')। वह दिखावटी दुकानी वस्तुओं के बजाय पंजाब की वास्तविक लोक-कला (फुलकारी) में रुचि रखता है, जो उसकी सहज एवं मानवीय सोच को दर्शाता है।

2. शामनाथ: शामनाथ एक स्वार्थी, दिखावा-प्रिय तथा महत्वाकांक्षी मध्यमवर्गीय व्यक्ति है, जो अपने अफसर को प्रसन्न करने और तरक्की पाने के लिए अपनी वृद्ध माँ तक को एक 'बोझ' और 'शर्मिंदगी' का कारण समझता है। वह माँ के प्रति कठोर, आदेशात्मक व्यवहार करता है, परन्तु जब माँ के कारण ही उसकी संभावित तरक्की की राह खुलती है, तो वह पल-भर में उसी माँ के प्रति दिखावटी प्रेम दिखाने लगता है — यह उसके चरित्र की खोखली स्वार्थपरता को उजागर करता है।

3. शामनाथ की माँ: माँ एक सरल, निश्छल, त्यागमयी तथा असीम सहनशील स्त्री हैं। वे बेटे की हर कठोर हिदायत को बिना शिकायत स्वीकार करती हैं, अपने आराम व सम्मान की परवाह नहीं करतीं। रातभर के अपमान के बाद भी, जब बेटे की भलाई की बात आती है, तो वे अपना सारा दुख भुलाकर उसकी सहायता के लिए तत्पर हो जाती हैं — यह उनकी माँ-सुलभ अगाध ममता का प्रतीक है।