त्वरित पुनरावृत्ति: कविता-सार सारणी
| अंतरा | विषय | संदेश |
|---|---|---|
| प्रथम | गहनों व रंगीन कपड़ों की अस्वीकृति | भौतिक साज-सज्जा बचपन की स्वाभाविक स्वतंत्रता में बाधक है |
| द्वितीय | सुंदरता किसके लिए? | बाहरी सुंदरता केवल देखने वालों के लिए है, स्वयं के लिए बंधन है |
| तृतीय | बचपन-मातृत्व ही सच्चे गहने | माँ-बेटी का स्नेह-बंधन ही सबसे बड़ा आभूषण है |
मूल कवि: कुवेंपु | अनुवादक: डॉ. एम. विमला | मूल कविता: ओडवेगळु (कन्नड़) | संकलन: नन्नमने | प्रधान रस: वात्सल्य रस
[Exam Tip] संदर्भ भाव स्पष्टीकरण हेतु सबसे अधिक पूछी जाने वाली पंक्तियाँ हैं — 'ताकि दिखाई दो सुंदर…देता है आनंद; मगर मुझे बनता है बड़ा बंधन!' — इनकी व्याख्या अवश्य याद रखें। मूल कवि (कुवेंपु) और अनुवादक (डॉ. एम. विमला) के नाम भ्रमित न करें।