धातु एवं अधातु

धातु एवं अधातु अध्याय 2026-27 के प्रतिदर्श प्रश्न पत्र तथा 2025 और 2026 के बोर्ड प्रश्न पत्रों में 5 से 10 अंक का रहा। अभिक्रियाशीलता, गुणों, मिश्रातुओं या संक्षारण पर एक-दो बहुविकल्पीय प्रश्न, 3 अंक का एक "कारण दीजिए" या धातु-निष्कर्षण वाला प्रश्न, और कभी-कभी रसायन का केस आधारित प्रश्न (प्रतिदर्श पत्र की तरह धातुओं पर कोई प्रयोग) या 5 अंक का प्रश्न (मई 2026) आता है।

अंक प्रायः यहाँ कटते हैं:

  • निष्कर्षण के समीकरण असंतुलित छोड़ देना (भर्जन, अपचयन, थर्मिट जैसी अभिक्रियाएँ);
  • निस्तापन (कार्बोनेट अयस्क, सीमित वायु) और भर्जन (सल्फ़ाइड अयस्क, वायु की अधिकता) को आपस में मिला देना;
  • इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण के चित्र में साझेदारी दिखा देना, या आयनों पर आवेश न लिखना;
  • केवल "लोहे पर जल से जंग लगती है" लिखना, यह न बताना कि वायु और जल दोनों आवश्यक हैं।

5 मिनट में दोहराएँ

भौतिक गुण: धातुएँ चमकीली, आघातवर्ध्य, तन्य, ध्वानिक और सुचालक होती हैं (Ag, Cu सबसे अच्छे; Pb, Hg कम)। अपवाद: Na, K नरम हैं; Hg द्रव है; Ga, Cs हथेली पर पिघल जाते हैं; आयोडीन चमकीली है; ग्रेफ़ाइट सुचालक है।

धातुओं की अभिक्रियाएँ (Δ = ऊष्मा)

  • ऑक्सीजन: 2Mg+O2→Δ2MgO\mathrm{2Mg + O_2 \xrightarrow{\Delta} 2MgO}; 4Al+3O2→Δ2Al2O3\mathrm{4Al + 3O_2 \xrightarrow{\Delta} 2Al_2O_3}; Cu पर काली CuO की परत। धातु ऑक्साइड क्षारकीय हैं, और जल में घुलने वाले ऑक्साइड क्षार बनाते हैं; Al2O3\mathrm{Al_2O_3} और ZnO उभयधर्मी हैं। अधातुओं के ऑक्साइड अम्लीय हैं।
  • जल: K, Na > Ca > Mg (गर्म जल) > Al, Zn, Fe (केवल भाप: 3Fe+4H2O→Fe3O4+4H2\mathrm{3Fe + 4H_2O \rightarrow Fe_3O_4 + 4H_2}) > Pb, Cu, Ag, Au (कोई अभिक्रिया नहीं)।
  • तनु HCl → लवण + H2\mathrm{H_2}। नाइट्रिक अम्ल से H2\mathrm{H_2} नहीं निकलती, केवल Mg और Mn बहुत तनु अम्ल से देते हैं।
  • सक्रियता श्रेणी (अभिक्रियाशीलता श्रेणी): K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > [H] > Cu > Hg > Ag > Au। ऊपर वाली धातु नीचे की धातुओं को उनके लवणों से विस्थापित करती है।

आयनिक यौगिक: Na (2,8,1) → Na+\mathrm{Na^+}; Cl (2,8,7) → Cl−\mathrm{Cl^-}। उच्च गलनांक; केवल गलित या विलयन में विद्युत चालन।

निष्कर्षण

  • नीचे (Hg, Cu): 2HgS+3O2→Δ2HgO+2SO2\mathrm{2HgS + 3O_2 \xrightarrow{\Delta} 2HgO + 2SO_2}, फिर 2HgO→Δ2Hg+O2\mathrm{2HgO \xrightarrow{\Delta} 2Hg + O_2}। कॉपर स्व-अपचयन से: 2Cu2O+Cu2S→Δ6Cu+SO2\mathrm{2Cu_2O + Cu_2S \xrightarrow{\Delta} 6Cu + SO_2}।
  • बीच (Zn, Fe, Pb): भर्जन 2ZnS+3O2→Δ2ZnO+2SO2\mathrm{2ZnS + 3O_2 \xrightarrow{\Delta} 2ZnO + 2SO_2}; निस्तापन ZnCO3→ΔZnO+CO2\mathrm{ZnCO_3 \xrightarrow{\Delta} ZnO + CO_2}; अपचयन ZnO+C→ΔZn+CO\mathrm{ZnO + C \xrightarrow{\Delta} Zn + CO}; थर्मिट Fe2O3+2Al→2Fe+Al2O3\mathrm{Fe_2O_3 + 2Al \rightarrow 2Fe + Al_2O_3} + ऊष्मा।
  • ऊपर (K, Na, Ca, Mg, Al): गलित यौगिक का विद्युत अपघटन। गलित NaCl: कैथोड Na++e−→Na\mathrm{Na^+ + e^- \rightarrow Na}, ऐनोड 2Cl−→Cl2+2e−\mathrm{2Cl^- \rightarrow Cl_2 + 2e^-}।
  • परिष्करण: ऐनोड = अशुद्ध धातु, कैथोड = शुद्ध धातु की पतली पट्टी, वैद्युत अपघट्य = उसी धातु के लवण का अम्लीकृत विलयन; अशुद्धियाँ ऐनोड पंक बनकर नीचे बैठती हैं।

संक्षारण: Ag काली (Ag2S\mathrm{Ag_2S}), Cu हरी (क्षारकीय कॉपर कार्बोनेट); लोहे पर जंग केवल वायु और जल दोनों से। बचाव: पेंट, तेल, यशदलेपन, एनोडीकरण, मिश्रातु बनाना।

मिश्रातु: स्टील (Fe + C), स्टेनलेस स्टील (Fe + Ni + Cr), पीतल (Cu + Zn), कांसा (Cu + Sn), सोल्डर (Pb + Sn, निम्न गलनांक), अमलगम (Hg के साथ)।

सावधानियाँ: निस्तापन (सीमित वायु) ≠ भर्जन (वायु की अधिकता); Mg + गर्म जल → Mg(OH)2\mathrm{Mg(OH)_2}; आयनिक ठोस विद्युत चालन नहीं करते।

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: हर प्रश्न पहले कॉपी पर हल कीजिए, फिर उत्तर पढ़िए। हर चरण के सामने लिखे अंक बताते हैं कि परीक्षक क्या देखता है। 1 अंक वाले बहुविकल्पीय और अभिकथन-कारण प्रश्न अंत की क्विज़ में हैं, साथ में ऐसे प्रश्न भी जो जाँचते हैं कि आपने अध्याय कितनी गहराई से समझा है; क्विज़ के हर उत्तर के साथ उसकी व्याख्या दी गई है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (2 और 3 अंक)

प्रश्न 1 (3 अंक)

(a) इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण द्वारा कैल्सियम और क्लोरीन परमाणुओं से कैल्सियम क्लोराइड का बनना दर्शाइए। (परमाणु क्रमांक: Ca = 20, Cl = 17)

(b) बनने वाले आयनों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास किस उत्कृष्ट गैस के समान है? कैल्सियम क्लोराइड का गलनांक उच्च क्यों होता है?

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

(a) कैल्सियम (2, 8, 8, 2) के बाहरी कोश में दो इलेक्ट्रॉन हैं। क्लोरीन (2, 8, 7) को अष्टक पूरा करने के लिए एक इलेक्ट्रॉन चाहिए। इसलिए कैल्सियम परमाणु दो क्लोरीन परमाणुओं में से प्रत्येक को एक इलेक्ट्रॉन देता है, जैसा चित्र में दिखाया गया है। कैल्सियम Ca2+\mathrm{Ca^{2+}} बन जाता है और हर क्लोरीन Cl−\mathrm{Cl^-}, जिससे CaCl2\mathrm{CaCl_2} बनता है।

(b) Ca2+\mathrm{Ca^{2+}} और Cl−\mathrm{Cl^-}, दोनों का विन्यास 2, 8, 8 है, जो आर्गन का है। कैल्सियम क्लोराइड का गलनांक उच्च है, क्योंकि इसके धनात्मक और ऋणात्मक आयन एक-दूसरे को प्रबलता से आकर्षित करते हैं, और इस आकर्षण को तोड़ने में बहुत ऊष्मा ऊर्जा लगती है।

अंक योजना:

  1. विन्यास: Ca 2, 8, 8, 2; Cl 2, 8, 7 — 0.5 अंक
  2. चित्र: Ca परमाणु दो Cl परमाणुओं में से प्रत्येक को एक इलेक्ट्रॉन देता है (तीर जो स्थानांतरण दिखाएँ, साझेदारी नहीं) — 1 अंक
  3. आवेश सहित आयन: Ca2+\mathrm{Ca^{2+}} और दो Cl−\mathrm{Cl^-}; सूत्र CaCl2\mathrm{CaCl_2} — 0.5 अंक
  4. दोनों आयनों का विन्यास 2, 8, 8 है, जो आर्गन का है — 0.5 अंक
  5. विपरीत आवेश वाले आयनों के बीच प्रबल आकर्षण बल को तोड़ने में बहुत ऊर्जा लगती है — 0.5 अंक

एक Ca परमाणु से दो Cl परमाणुओं को इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण

प्रश्न 2 (3 अंक)

रिया ने थोड़ा सल्फ़र चूर्ण एक दहन चम्मच में जलाकर उसे एक गैस जार में उतारा। अलग से उसने मैग्नीशियम रिबन जलाकर सफ़ेद राख एकत्र की। उसने गैस जार और राख, दोनों में थोड़ा जल डालकर हिलाया, और प्रत्येक को लाल और नीले लिटमस पत्र से जाँचा।

(a) प्रत्येक स्थिति में उसे क्या दिखेगा, और इससे ऑक्साइड के बारे में क्या पता चलता है?

(b) दोनों ऑक्साइडों की जल से अभिक्रिया के संतुलित समीकरण लिखिए।

(c) फिर वह कॉपर की एक पन्नी को तब तक गर्म करती है जब तक उस पर काले कॉपर(II) ऑक्साइड की परत न चढ़ जाए, परत को खुरचकर जल के साथ हिलाती है। कॉपर(II) ऑक्साइड क्षारकीय ऑक्साइड है, फिर भी लाल लिटमस नीला नहीं होता। क्यों? वह कैसे दिखा सकती है कि यह क्षारकीय है?

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

(a) सल्फ़र वाले जार में नीला लिटमस लाल हो जाता है, अतः सल्फ़र डाइऑक्साइड एक अम्लीय ऑक्साइड है, जैसे अन्य अधातुओं के ऑक्साइड होते हैं। मैग्नीशियम की राख से लाल लिटमस नीला हो जाता है, अतः मैग्नीशियम ऑक्साइड एक क्षारकीय ऑक्साइड है, जैसे अन्य धातुओं के ऑक्साइड होते हैं।

(b) SO2+H2O→H2SO3\mathrm{SO_2 + H_2O \rightarrow H_2SO_3} (सल्फ़्यूरस अम्ल)

MgO+H2O→Mg(OH)2\mathrm{MgO + H_2O \rightarrow Mg(OH)_2} (मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड)

(c) कॉपर(II) ऑक्साइड जल में नहीं घुलता, इसलिए कोई क्षार नहीं बनता और लिटमस नहीं बदलता। केवल जल में घुलने वाले धातु ऑक्साइड ही क्षार देते हैं। इसे क्षारकीय दिखाने के लिए रिया तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल डाल सकती है: काला चूर्ण घुलकर अभिक्रिया करता है और लवण तथा जल बनाता है, CuO+2HCl→CuCl2+H2O\mathrm{CuO + 2HCl \rightarrow CuCl_2 + H_2O}, और विलयन नीला-हरा हो जाता है।

अंक योजना:

  1. सल्फ़र: नीला लिटमस लाल हो जाता है, अतः सल्फ़र डाइऑक्साइड अम्लीय ऑक्साइड है — 0.5 अंक
  2. मैग्नीशियम: लाल लिटमस नीला हो जाता है, अतः मैग्नीशियम ऑक्साइड क्षारकीय ऑक्साइड है — 0.5 अंक
  3. SO2+H2O→H2SO3\mathrm{SO_2 + H_2O \rightarrow H_2SO_3} — 0.5 अंक
  4. MgO+H2O→Mg(OH)2\mathrm{MgO + H_2O \rightarrow Mg(OH)_2} — 0.5 अंक
  5. कॉपर(II) ऑक्साइड जल में नहीं घुलता, इसलिए लिटमस बदलने वाला कोई क्षार नहीं बनता — 0.5 अंक
  6. तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल डालें: यह घुलकर अभिक्रिया करता है और क्षारक की तरह लवण और जल देता है (कॉपर(II) क्लोराइड का नीला-हरा विलयन) — 0.5 अंक

प्रश्न 3 (3 अंक)

कारण दीजिए:

(a) सोडियम को जल में डालने पर निकलने वाली हाइड्रोजन आग पकड़ लेती है, पर कैल्सियम डालने पर नहीं।

(b) सोडियम क्लोराइड जैसे आयनिक यौगिक जल में घुल जाते हैं, परंतु केरोसिन या पेट्रोल में नहीं।

(c) अधातु कार्बन के एक रूप, ग्रेफ़ाइट, से शुष्क सेलों और विद्युत अपघटन टंकियों के इलेक्ट्रोड बनाए जाते हैं।

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

(a) सोडियम बहुत अभिक्रियाशील है। जल के साथ इसकी अभिक्रिया इतनी तीव्र होती है और इतनी ऊष्मा निकलती है कि बनने वाली हाइड्रोजन तुरंत आग पकड़ लेती है। कैल्सियम कम अभिक्रियाशील है, इसलिए इसकी अभिक्रिया धीमी होती है और निकलने वाली ऊष्मा हाइड्रोजन में आग लगाने के लिए पर्याप्त नहीं होती।

(b) आयनिक यौगिक आयनों से बने होते हैं। जल इन आयनों को एक-दूसरे से अलग करके घेर लेता है, इसलिए यौगिक घुल जाता है। केरोसिन और पेट्रोल आयनों को अलग नहीं कर पाते, इसलिए आयनिक यौगिक उनमें नहीं घुलते।

(c) अधिकतर अधातुएँ विद्युत का चालन नहीं करतीं, पर ग्रेफ़ाइट इसका अपवाद है: यह सुचालक है। इसलिए ग्रेफ़ाइट के इलेक्ट्रोड से धारा बह सकती है, और ग्रेफ़ाइट सेल के पदार्थों से आसानी से अभिक्रिया नहीं करता।

अंक योजना:

  1. सोडियम इतनी तीव्र अभिक्रिया करता है कि बहुत ऊष्मा निकलती है, जो हाइड्रोजन में आग लगाने के लिए पर्याप्त है; कैल्सियम कम तीव्रता से अभिक्रिया करता है और ऊष्मा पर्याप्त नहीं होती — 1 अंक
  2. जल आयनों को अलग करके घेर लेता है, इसलिए आयनिक यौगिक उसमें घुल जाते हैं; केरोसिन और पेट्रोल आयनों को अलग नहीं कर पाते, इसलिए उनमें नहीं घुलते (यह भी स्वीकार्य: आयनिक यौगिक जल में घुलनशील पर केरोसिन जैसे कार्बनिक विलायकों में अघुलनशील हैं) — 1 अंक
  3. ग्रेफ़ाइट अधातुओं में एक अपवाद है: यह विद्युत का सुचालक है, इसलिए इससे धारा प्रवाहित हो सकती है (यह वैद्युत अपघट्य से आसानी से अभिक्रिया भी नहीं करता) — 1 अंक

प्रश्न 4 (3 अंक)

ज़िंक प्रकृति में ज़िंक ब्लेंड (ZnS\mathrm{ZnS}) और कैलामाइन (ZnCO3\mathrm{ZnCO_3}) के रूप में मिलता है।

(a) प्रत्येक अयस्क को ज़िंक ऑक्साइड में बदलने वाले प्रक्रम का नाम लिखिए, और प्रत्येक का संतुलित समीकरण लिखिए।

(b) ज़िंक ऑक्साइड से ज़िंक धातु देने वाले चरण का समीकरण लिखिए।

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

(a) ज़िंक ब्लेंड सल्फ़ाइड अयस्क है, इसलिए इसका भर्जन किया जाता है: वायु की अधिकता में तेज़ गर्म करना।

2ZnS(s)+3O2(g)→Δ2ZnO(s)+2SO2(g)\mathrm{2ZnS(s) + 3O_2(g) \xrightarrow{\Delta} 2ZnO(s) + 2SO_2(g)}

कैलामाइन कार्बोनेट अयस्क है, इसलिए इसका निस्तापन किया जाता है: सीमित वायु में तेज़ गर्म करना।

ZnCO3(s)→ΔZnO(s)+CO2(g)\mathrm{ZnCO_3(s) \xrightarrow{\Delta} ZnO(s) + CO_2(g)}

(b) फिर ज़िंक ऑक्साइड को कार्बन के साथ गर्म करके अपचयित किया जाता है:

ZnO(s)+C(s)→ΔZn(s)+CO(g)\mathrm{ZnO(s) + C(s) \xrightarrow{\Delta} Zn(s) + CO(g)}

अंक योजना:

  1. ज़िंक ब्लेंड: भर्जन (वायु की अधिकता में तेज़ गर्म करना), 2ZnS(s)+3O2(g)→Δ2ZnO(s)+2SO2(g)\mathrm{2ZnS(s) + 3O_2(g) \xrightarrow{\Delta} 2ZnO(s) + 2SO_2(g)} — 1 अंक
  2. कैलामाइन: निस्तापन (सीमित वायु में तेज़ गर्म करना), ZnCO3(s)→ΔZnO(s)+CO2(g)\mathrm{ZnCO_3(s) \xrightarrow{\Delta} ZnO(s) + CO_2(g)} — 1 अंक
  3. कार्बन द्वारा अपचयन: ZnO(s)+C(s)→ΔZn(s)+CO(g)\mathrm{ZnO(s) + C(s) \xrightarrow{\Delta} Zn(s) + CO(g)} (ऐलुमिनियम या किसी अन्य उपयुक्त अपचायक द्वारा अपचयन भी स्वीकार्य) — 1 अंक

प्रश्न 5 (3 अंक)

स्टेनलेस स्टील बनाने के लिए क्रोमियम, क्रोमियम(III) ऑक्साइड को ऐलुमिनियम चूर्ण के साथ गर्म करके प्राप्त किया जा सकता है। इसमें पिघला हुआ क्रोमियम बनता है, और बहुत ऊष्मा निकलती है।

(a) इस अभिक्रिया का संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।

(b) कौन-सा पदार्थ उपचयित होता है और कौन-सा अपचयित? प्रत्येक का कारण दीजिए।

(c) इस अभिक्रिया से सक्रियता श्रेणी में ऐलुमिनियम और क्रोमियम के स्थानों के बारे में क्या पता चलता है? धातु पिघली अवस्था में क्यों मिलती है?

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

(a) Cr2O3(s)+2Al(s)→Δ2Cr(l)+Al2O3(s)\mathrm{Cr_2O_3(s) + 2Al(s) \xrightarrow{\Delta} 2Cr(l) + Al_2O_3(s)}, और बहुत ऊष्मा निकलती है।

(b) ऐलुमिनियम उपचयित होता है, क्योंकि यह ऑक्सीजन ग्रहण करके ऐलुमिनियम ऑक्साइड बनता है। क्रोमियम(III) ऑक्साइड अपचयित होता है, क्योंकि यह ऑक्सीजन खोकर क्रोमियम बनता है।

(c) कोई धातु दूसरी धातु के ऑक्साइड से ऑक्सीजन तभी ले सकती है जब वह अधिक अभिक्रियाशील हो, इसलिए ऐलुमिनियम सक्रियता श्रेणी में क्रोमियम से ऊपर है। अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी है, और निकलने वाली ऊष्मा इतनी अधिक होती है कि बनने वाला क्रोमियम पिघल जाता है।

अंक योजना:

  1. Cr2O3(s)+2Al(s)→Δ2Cr(l)+Al2O3(s)\mathrm{Cr_2O_3(s) + 2Al(s) \xrightarrow{\Delta} 2Cr(l) + Al_2O_3(s)} (+ ऊष्मा) — 1 अंक
  2. ऐलुमिनियम उपचयित होता है, क्योंकि यह ऑक्सीजन ग्रहण करके ऐलुमिनियम ऑक्साइड बनाता है — 0.5 अंक
  3. क्रोमियम(III) ऑक्साइड अपचयित होता है, क्योंकि यह ऑक्सीजन खोकर क्रोमियम बनाता है — 0.5 अंक
  4. ऐलुमिनियम, क्रोमियम से ऊपर है (अधिक अभिक्रियाशील), इसलिए यह क्रोमियम ऑक्साइड से ऑक्सीजन ले सकता है — 0.5 अंक
  5. अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी है; निकलने वाली ऊष्मा बनी धातु को पिघलाने के लिए पर्याप्त है — 0.5 अंक

प्रश्न 6 (2 अंक)

दिव्या ने समान आकार और बनावट वाले सिल्वर, कॉपर और स्टेनलेस स्टील के तीन चम्मच गर्म चाय के एक ही कप में रखे। दो मिनट बाद उसने हर हत्थे के ऊपरी सिरे का ताप मापा।

चम्मच सिल्वर कॉपर स्टेनलेस स्टील
ताप (°C) 55 52 34

(a) तीनों धातुओं को ऊष्मा चालन की क्षमता के क्रम में लिखिए। दिव्या ने समान आकार और बनावट वाले चम्मच क्यों लिए?

(b) खाना पकाने के बर्तन ऐलुमिनियम या स्टील के बनते हैं, पर उनके हत्थे प्लास्टिक या लकड़ी के। क्यों?

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

(a) सिल्वर > कॉपर > स्टेनलेस स्टील। जो हत्था सबसे अधिक गर्म हुआ, उसने ऊष्मा सबसे तेज़ी से ऊपर पहुँचाई। चम्मच समान आकार और बनावट के इसलिए लिए गए कि अंतर केवल धातु का रहे; वरना मोटा या छोटा चम्मच परिणाम बदल सकता था।

(b) बर्तन के मुख्य भाग को आँच की ऊष्मा जल्दी भोजन तक पहुँचानी होती है, इसलिए ऊष्मा की सुचालक धातु का उपयोग होता है। हत्था पकड़ने लायक ठंडा रहना चाहिए, इसलिए वह प्लास्टिक या लकड़ी जैसे कुचालक का बनाया जाता है।

अंक योजना:

  1. सिल्वर > कॉपर > स्टेनलेस स्टील (हत्था जितना गर्म, चालक उतना अच्छा) — 0.5 अंक
  2. समान आकार और बनावट ताकि केवल धातु अलग हो और तुलना उचित रहे — 0.5 अंक
  3. बर्तन को आँच की ऊष्मा जल्दी भोजन तक पहुँचानी होती है, इसलिए धातु (सुचालक) प्रयोग होती है; हत्था पकड़ने लायक ठंडा रहना चाहिए, इसलिए प्लास्टिक या लकड़ी जैसा कुचालक प्रयोग होता है — 1 अंक

प्रश्न 7 (3 अंक)

तीन विद्यार्थी लोहे के एक गेट में जंग लगने के बारे में बात कर रहे हैं।

अमन: "लोहे में जंग केवल जल के कारण लगती है। वायु का इससे कोई संबंध नहीं है।"
बेला: "लोहे में जंग तभी लगती है जब वायु और जल, दोनों उसके संपर्क में हों। जंग जलयोजित आयरन(III) ऑक्साइड है।"
चिराग: "पेंट की परत जंग इसलिए रोकती है क्योंकि पेंट लोहे से अभिक्रिया करके उसे ऐसी धातु में बदल देता है जिसमें जंग नहीं लग सकती।"

(a) कौन सही है? बाकी दोनों कथनों की गलती बताइए।

(b) गेट पर पेंट किया गया है, पर उसके कब्ज़ों पर नहीं, क्योंकि उन्हें घूमना होता है। कब्ज़ों को कैसे बचाना चाहिए, और उनके लिए पेंट उपयुक्त क्यों नहीं है?

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

(a) बेला सही है। लोहे में जंग तभी लगती है जब वह वायु (ऑक्सीजन) और जल, दोनों के संपर्क में हो।

  • अमन गलत है, क्योंकि वायु की ऑक्सीजन भी आवश्यक है। जिस जल में वायु न हो, उसमें रखे लोहे पर जंग नहीं लगती।
  • चिराग गलत है, क्योंकि पेंट लोहे को बदलता नहीं। यह केवल सतह को ढक देता है, जिससे वायु और जल लोहे तक नहीं पहुँच पाते। जहाँ पेंट उखड़ जाए, वहाँ जंग लगने लगती है।

(b) कब्ज़ों पर नियमित रूप से तेल या ग्रीज़ लगाना चाहिए। घूमने वाले भाग पर पेंट गेट के खुलने-बंद होने से चटककर घिस जाएगा। तेल या ग्रीज़ की परत लोहे को वायु और जल से बचाती है और कब्ज़े को आसानी से घूमने भी देती है।

अंक योजना:

  1. बेला सही है — 0.5 अंक
  2. अमन गलत है: वायु की ऑक्सीजन भी आवश्यक है; जिस जल से वायु निकाल दी गई हो, उसमें लोहे पर जंग नहीं लगती — 0.5 अंक
  3. चिराग गलत है: पेंट लोहे से अभिक्रिया नहीं करता; यह केवल सतह को ढककर वायु और जल को दूर रखता है — 1 अंक
  4. कब्ज़ों पर नियमित रूप से तेल या ग्रीज़ लगाएँ; घूमने वाले भाग पर पेंट चटककर घिस जाएगा, जबकि तेल या ग्रीज़ की परत वायु और जल को दूर रखती है और कब्ज़े को घूमने भी देती है — 1 अंक

प्रश्न 8 (2 अंक)

उदयपुर के पास की एक खान से निकाले गए अयस्क में एक भारी धातु-यौगिक के साथ बहुत-सी हल्की रेत और मिट्टी मिली है।

(a) इस रेत और मिट्टी को क्या कहते हैं, और धातु निकालने से पहले इसे हटाना क्यों आवश्यक है?

(b) इसे हटाने का एक सरल तरीका सुझाइए, और बताइए कि आपका तरीका दोनों पदार्थों के किस अंतर पर आधारित है।

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

(a) अयस्क में मिली अनचाही रेत और मिट्टी को गैंग कहते हैं। इसे पहले हटाना पड़ता है, क्योंकि इतने अतिरिक्त पदार्थ को गर्म करने और अपचयित करने में ईंधन और रसायन व्यर्थ होंगे, और धातु अशुद्ध रह जाएगी।

(b) पिसे हुए अयस्क को जल की धारा में धोया जा सकता है। हल्की रेत और मिट्टी बह जाती है, जबकि धातु-यौगिक के भारी कण नीचे बैठ जाते हैं। यह तरीका इसलिए काम करता है क्योंकि अयस्क और गैंग के घनत्व में अंतर है।

अंक योजना:

  1. गैंग — 0.5 अंक
  2. इसे पहले हटाना आवश्यक है, वरना इतना अधिक अनचाहा पदार्थ ईंधन और रसायन व्यर्थ करेगा और धातु को अशुद्ध बनाएगा (यह भी स्वीकार्य: अयस्क का समृद्धीकरण करने के लिए) — 0.5 अंक
  3. पिसे अयस्क को जल की धारा में धोएँ: हल्की रेत और मिट्टी बह जाती है और भारी अयस्क के कण नीचे बैठ जाते हैं (गुण के अंतर पर आधारित कोई भी उचित तरीका स्वीकार्य) — 0.5 अंक
  4. अयस्क और गैंग के घनत्व (भारीपन) का अंतर — 0.5 अंक

प्रश्न 9 (2 अंक)

अरुण ने परखनली A में ज़िंक के दानों और परखनली B में मैग्नीशियम रिबन के बराबर द्रव्यमान में तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की बराबर मात्रा डाली।

(a) परखनली B की अभिक्रिया का संतुलित रासायनिक समीकरण, अवस्था-संकेतों सहित, लिखिए।

(b) किस परखनली में बुलबुले अधिक तेज़ी से बनेंगे, और क्यों? अरुण गैस का परीक्षण कैसे कर सकता है?

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

(a) Mg(s)+2HCl(aq)→MgCl2(aq)+H2(g)\mathrm{Mg(s) + 2HCl(aq) \rightarrow MgCl_2(aq) + H_2(g)}

(b) परखनली B में बुलबुले तेज़ी से बनेंगे। मैग्नीशियम सक्रियता श्रेणी में ज़िंक से ऊपर है, इसलिए यह अम्ल से अधिक तेज़ी से अभिक्रिया करता है। गैस के परीक्षण के लिए अरुण जलती हुई माचिस की तीली नली के मुँह के पास ला सकता है: गैस 'पॉप' की ध्वनि के साथ जलती है, जिससे पता चलता है कि यह हाइड्रोजन है।

अंक योजना:

  1. Mg(s)+2HCl(aq)→MgCl2(aq)+H2(g)\mathrm{Mg(s) + 2HCl(aq) \rightarrow MgCl_2(aq) + H_2(g)} — 1 अंक
  2. B में तेज़, क्योंकि मैग्नीशियम, ज़िंक से अधिक अभिक्रियाशील है (सक्रियता श्रेणी में ऊपर) — 0.5 अंक
  3. जलती हुई तीली नली के मुँह के पास लाएँ; गैस 'पॉप' की ध्वनि के साथ जलती है, जिससे पता चलता है कि यह हाइड्रोजन है — 0.5 अंक

प्रश्न 10 (3 अंक)

नीरज ने चार धातुओं P, Q, R और S का अध्ययन करके ये बातें लिखीं:

  1. Q ठंडे जल से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन देती है।
  2. P ठंडे जल से अभिक्रिया नहीं करती, पर तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से हाइड्रोजन देती है। S के किसी लवण के विलयन में रखी P की पट्टी पर S की परत चढ़ जाती है।
  3. S तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से धीरे-धीरे हाइड्रोजन देती है।
  4. R तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से हाइड्रोजन नहीं देती, पर सिल्वर नाइट्रेट विलयन में रखी R की पट्टी पर सिल्वर की परत चढ़ जाती है।

(a) P, Q, R और S को अभिक्रियाशीलता के घटते क्रम में लिखिए।

(b) सक्रियता श्रेणी में इनमें से कौन-सी धातुएँ हाइड्रोजन से ऊपर हैं?

(c) इन चारों में से कौन-सी कॉपर हो सकती है? S के एक लवण का विलयन रखना है। अन्य धातुओं में से किससे पात्र बनाया जा सकता है? कारण दीजिए।

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

(a) Q ठंडे जल से भी अभिक्रिया करती है, इसलिए यह सबसे अधिक अभिक्रियाशील है। P, S को विस्थापित करती है, इसलिए P, S से ऊपर है। S अम्ल से अब भी हाइड्रोजन देती है, जबकि R नहीं देती, इसलिए S, R से ऊपर है। क्रम है Q > P > S > R।

(b) Q, P और S तनु अम्ल से हाइड्रोजन देती हैं, इसलिए तीनों हाइड्रोजन से ऊपर हैं। R हाइड्रोजन से नीचे है।

(c) R हाइड्रोजन से नीचे पर सिल्वर से ऊपर है, जो कॉपर पर ठीक बैठता है। S के विलयन का पात्र उससे अभिक्रिया नहीं करना चाहिए, इसलिए वह R का होना चाहिए, जो S से कम अभिक्रियाशील है और उसे विस्थापित नहीं कर सकती।

अंक योजना:

  1. Q > P > S > R — 1 अंक
  2. Q, P और S (तीनों तनु अम्ल से हाइड्रोजन देती हैं) — 1 अंक
  3. R कॉपर हो सकती है (हाइड्रोजन से नीचे, सिल्वर से ऊपर) — 0.5 अंक
  4. R, क्योंकि यह S से कम अभिक्रियाशील है और S को उसके लवण के विलयन से विस्थापित नहीं कर सकती — 0.5 अंक

दीर्घ उत्तरीय और केस आधारित प्रश्न

प्रश्न 11 (5 अंक)

विकल्प (A) या (B) में से किसी एक का उत्तर दीजिए।

(A) कॉपर का परिष्करण

(i) कॉपर के विद्युत अपघटनी परिष्करण में प्रयुक्त व्यवस्था का नामांकित चित्र बनाइए। ऐनोड, कैथोड, वैद्युत अपघट्य और ऐनोड पंक को नामांकित कीजिए। (3 अंक)

उत्तर।

  1. सही व्यवस्था: टंकी के वैद्युत अपघट्य में डूबे दो इलेक्ट्रोड, बैटरी से जुड़े, मोटा ऐनोड धन टर्मिनल से और पतला कैथोड ऋण टर्मिनल से — 1 अंक
  2. चार नामांकन, प्रत्येक 0.5 (चित्र में: A ऐनोड, अशुद्ध कॉपर का मोटा टुकड़ा; B कैथोड, शुद्ध कॉपर की पतली पट्टी; C वैद्युत अपघट्य, अम्लीकृत कॉपर सल्फ़ेट विलयन; D ऐनोड पंक) — 2 अंक

दो इलेक्ट्रोड और बैटरी सहित विद्युत अपघटनी टंकी, अक्षर A से D

(ii) धारा प्रवाहित करने पर ऐनोड और कैथोड पर क्या होता है? अशुद्धियाँ कहाँ जाती हैं? (2 अंक)

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

ऐनोड पर अशुद्ध कॉपर घुलकर कॉपर आयनों के रूप में वैद्युत अपघट्य में चला जाता है: Cu→Cu2++2e−\mathrm{Cu \rightarrow Cu^{2+} + 2e^-}। कैथोड पर वैद्युत अपघट्य से उतनी ही मात्रा में शुद्ध कॉपर जम जाता है: Cu2++2e−→Cu\mathrm{Cu^{2+} + 2e^- \rightarrow Cu}। इस तरह ऐनोड पतला और कैथोड मोटा होता जाता है।

विलेय अशुद्धियाँ विलयन में चली जाती हैं। अविलेय अशुद्धियाँ ऐनोड के नीचे तली में ऐनोड पंक के रूप में बैठ जाती हैं।

अंक योजना:

  1. ऐनोड: अशुद्ध कॉपर, कॉपर आयनों के रूप में वैद्युत अपघट्य में घुल जाता है, Cu→Cu2++2e−\mathrm{Cu \rightarrow Cu^{2+} + 2e^-} — 0.5 अंक
  2. कैथोड: वैद्युत अपघट्य से उतनी ही मात्रा में शुद्ध कॉपर जमता है, Cu2++2e−→Cu\mathrm{Cu^{2+} + 2e^- \rightarrow Cu} — 0.5 अंक
  3. विलेय अशुद्धियाँ विलयन में चली जाती हैं — 0.5 अंक
  4. अविलेय अशुद्धियाँ ऐनोड के नीचे तली में ऐनोड पंक के रूप में बैठ जाती हैं — 0.5 अंक

अथवा

(B) सक्रियता श्रेणी में नीचे की धातुएँ

(i) मर्करी, सिनेबार (HgS\mathrm{HgS}) से गर्म करने के दो चरणों में प्राप्त की जाती है। प्रत्येक चरण का संतुलित समीकरण उसकी परिस्थिति सहित लिखिए, और पहले चरण का नाम बताइए। दूसरे चरण में कार्बन जैसे अपचायक की आवश्यकता क्यों नहीं होती? (3 अंक)

उत्तर।

  1. भर्जन: 2HgS(s)+3O2(g)→Δ2HgO(s)+2SO2(g)\mathrm{2HgS(s) + 3O_2(g) \xrightarrow{\Delta} 2HgO(s) + 2SO_2(g)} (वायु में तेज़ गर्म करना) — 1 अंक
  2. 2HgO(s)→Δ2Hg(l)+O2(g)\mathrm{2HgO(s) \xrightarrow{\Delta} 2Hg(l) + O_2(g)} (और गर्म करने पर) — 1 अंक
  3. मर्करी सक्रियता श्रेणी में बहुत नीचे है, इसलिए इसका ऑक्साइड केवल गर्म करने से ही धातु में टूट जाता है — 1 अंक

(ii) कॉपर ग्लांस से कॉपर प्राप्त करने का यह प्रवाह-चित्र पूरा कीजिए, और A तथा B के नाम लिखिए:

Cu2S→ACu2O\mathrm{Cu_2S \xrightarrow{A} Cu_2O}, फिर Cu2O+B→Cu+SO2\mathrm{Cu_2O + B \rightarrow Cu + SO_2}

दूसरे चरण को स्व-अपचयन क्यों कहते हैं? (2 अंक)

उत्तर।

  1. A: वायु में तेज़ गर्म करना (भर्जन), 2Cu2S(s)+3O2(g)→Δ2Cu2O(s)+2SO2(g)\mathrm{2Cu_2S(s) + 3O_2(g) \xrightarrow{\Delta} 2Cu_2O(s) + 2SO_2(g)} — 0.5 अंक
  2. B: कॉपर(I) सल्फ़ाइड, स्वयं अयस्क; 2Cu2O(s)+Cu2S(s)→Δ6Cu(s)+SO2(g)\mathrm{2Cu_2O(s) + Cu_2S(s) \xrightarrow{\Delta} 6Cu(s) + SO_2(g)} — 1 अंक
  3. कोई बाहरी अपचायक प्रयोग नहीं होता: अयस्क का अपना सल्फ़ाइड ही ऑक्साइड को अपचयित करता है — 0.5 अंक

प्रश्न 12 (5 अंक)

विकल्प (A) या (B) में से किसी एक का उत्तर दीजिए।

(A) निष्कर्षण की विधि का चुनाव

(i) एक कारख़ाने को तीन धातुएँ निकालनी हैं: सोडियम, आयरन और सिल्वर।

(I) इनमें से कौन-सी प्रकृति में मुक्त अवस्था में मिल सकती है? क्यों?

(II) आयरन उसके ऑक्साइड को कार्बन के साथ गर्म करके प्राप्त किया जाता है। सोडियम के लिए यही विधि क्यों नहीं अपनाई जा सकती? उसके स्थान पर सोडियम कैसे प्राप्त किया जाता है?

(III) (II) में बताई गई विधि में धातु किस इलेक्ट्रोड पर एकत्र होती है, और वहीं क्यों? (3 अंक)

उत्तर।

  1. सिल्वर, क्योंकि यह सक्रियता श्रेणी में बहुत नीचे है और वायु या जल से लगभग अभिक्रिया नहीं करती — 1 अंक
  2. सोडियम ऑक्सीजन को कार्बन से अधिक प्रबलता से पकड़े रहता है, इसलिए कार्बन इसके ऑक्साइड को अपचयित नहीं कर सकता; इसे गलित सोडियम क्लोराइड के विद्युत अपघटन (विद्युत अपघटनी अपचयन) से प्राप्त किया जाता है — 1 अंक
  3. कैथोड पर: धनात्मक धातु आयन ऋणात्मक इलेक्ट्रोड की ओर खिंचते हैं और वहाँ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं, Na++e−→Na\mathrm{Na^+ + e^- \rightarrow Na} (ऐनोड पर क्लोरीन गैस, 2Cl−→Cl2+2e−\mathrm{2Cl^- \rightarrow Cl_2 + 2e^-}) — 1 अंक

(ii) प्रत्येक समीकरण की त्रुटि बताइए और उसे सही रूप में लिखिए।

(I) Na+H2O→Na2O+H2\mathrm{Na + H_2O \rightarrow Na_2O + H_2} (ठंडे जल में सोडियम)

(II) Cu+H2SO4→CuSO4+H2\mathrm{Cu + H_2SO_4 \rightarrow CuSO_4 + H_2} (तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल में कॉपर) (2 अंक)

उत्तर।

  1. (I) उत्पाद सोडियम हाइड्रॉक्साइड होना चाहिए, ऑक्साइड नहीं (यह भी स्वीकार्य: समीकरण संतुलित नहीं है): 2Na(s)+2H2O(l)→2NaOH(aq)+H2(g)\mathrm{2Na(s) + 2H_2O(l) \rightarrow 2NaOH(aq) + H_2(g)} — 1 अंक
  2. (II) कोई अभिक्रिया नहीं होती: कॉपर सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन से नीचे है और तनु अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित नहीं कर सकता — 1 अंक

अथवा

(B) मिश्रातु

(i) बताइए कि प्रत्येक कथन सही है या गलत, और गलत कथनों को सुधारिए।

(I) मिश्रातु दो धातुओं का एक यौगिक है जिसका सूत्र निश्चित होता है।
(II) पीतल, कॉपर और ज़िंक की मिश्रातु है, और कांसा, कॉपर और टिन की मिश्रातु है।
(III) शुद्ध लोहा कठोर और मज़बूत होता है; इसमें थोड़ा कार्बन मिलाने से यह नरम हो जाता है। (3 अंक)

उत्तर।

  1. (I) गलत: मिश्रातु किसी धातु का अन्य धातुओं या किसी अधातु के साथ समांगी मिश्रण है; इसका कोई निश्चित सूत्र नहीं होता — 1 अंक
  2. (II) सही — 1 अंक
  3. (III) गलत: शुद्ध लोहा नरम होता है और गर्म होने पर आसानी से खिंच जाता है; थोड़ा कार्बन (लगभग 0.05%) मिलाने पर यह कठोर और मज़बूत (स्टील) हो जाता है — 1 अंक

(ii) बिजली मिस्त्री तारों को सोल्डर से जोड़ते हैं। सोल्डर में कौन-सी धातुएँ हैं, और सोल्डर का कौन-सा गुण उसे इसके लिए उपयुक्त बनाता है? अमलगम क्या है? (2 अंक)

उत्तर।

  1. लेड और टिन — 0.5 अंक
  2. इसका गलनांक निम्न है, इसलिए यह आसानी से पिघलकर तारों को बिना पिघलाए जोड़ देता है — 1 अंक
  3. ऐसी मिश्रातु जिसमें एक धातु मर्करी हो — 0.5 अंक

प्रश्न 13 (4 अंक)

सना ने चित्र में दिखाया गया परिपथ बनाया। K एक स्विच है और B एक बल्ब है। कार्बन की छड़ें X और Y जाँचे जा रहे पदार्थ में डुबोई जाती हैं, और हर बार साफ़ की जाती हैं। उसने इन्हें जाँचा:

  1. पोटैशियम आयोडाइड के सूखे क्रिस्टल
  2. आसुत जल में घुला पोटैशियम आयोडाइड
  3. आसुत जल में घुली चीनी
  4. क्रूसिबल में पिघलाया गया पोटैशियम आयोडाइड (उसकी शिक्षिका द्वारा, तेज़ लौ से)

स्विच, बल्ब और बीकर में डूबी दो छड़ों वाला परिपथ

(a) चारों में से किन परीक्षणों में बल्ब जलेगा? (1 अंक)

उत्तर।

  1. परीक्षण 2 और 4 (पोटैशियम आयोडाइड का विलयन और पिघला पोटैशियम आयोडाइड), प्रत्येक 0.5 — 1 अंक

(b) सना ने हर परीक्षण से पहले छड़ें क्यों साफ़ कीं? ऐसा न करने पर क्या गड़बड़ हो सकती थी? (1 अंक)

उत्तर।

  1. पिछले पदार्थ (जैसे पोटैशियम आयोडाइड विलयन) के अंश छड़ों पर रह जाते और ऐसे परीक्षण में भी बल्ब जला सकते थे जहाँ उसे नहीं जलना चाहिए, जिससे गलत परिणाम मिलता — 1 अंक

(c) उसकी सहेली कहती है, "पोटैशियम आयोडाइड के विलयन से बल्ब केवल इसलिए जलता है क्योंकि जल विद्युत का सुचालक है।" सना इसी व्यवस्था से इस दावे की जाँच कैसे कर सकती है? उसे क्या परिणाम मिलना चाहिए, और इससे क्या पता चलता है? (2 अंक)

उत्तर।

  1. उन्हीं छड़ों और परिपथ से केवल आसुत जल जाँचे (यह भी स्वीकार्य: परीक्षण 3 का उल्लेख, जहाँ चीनी घुले आसुत जल से बल्ब नहीं जला) — 1 अंक
  2. बल्ब नहीं जलता; अतः परीक्षण 2 में धारा पोटैशियम आयोडाइड के आयन ले जाते हैं, जो विलयन में गति के लिए स्वतंत्र हैं, जल नहीं — 1 अंक

अथवा

(c) परीक्षण 4 में पिघले पोटैशियम आयोडाइड में कुछ समय तक धारा प्रवाहित की जाती है। कैथोड और ऐनोड पर क्या बनता है? प्रत्येक इलेक्ट्रोड पर होने वाले परिवर्तन का समीकरण लिखिए। (2 अंक)

उत्तर।

  1. कैथोड: पोटैशियम धातु, K++e−→K\mathrm{K^+ + e^- \rightarrow K} — 1 अंक
  2. ऐनोड: आयोडीन, 2I−→I2+2e−\mathrm{2I^- \rightarrow I_2 + 2e^-} — 1 अंक

प्रश्न 14 (4 अंक)

समुद्र तट पर बसे शहर पुरी के एक विद्यालय के विद्यार्थियों ने 50 g द्रव्यमान की पाँच एक जैसी लोहे की पट्टियाँ एक वर्ष के लिए विद्यालय की छत पर या एक अलमारी में रखीं। अंत में उन्होंने पट्टियों को फिर से तौला।

पट्टी उपचार कहाँ रखी द्रव्यमान में वृद्धि (g)
A कोई नहीं छत 4.8
B पेंट की हुई छत 0.4
C ज़िंक की परत चढ़ी छत 0.1
D शुरू में एक बार तेल लगाया छत 2.9
E कोई नहीं घर के अंदर बंद सूखी अलमारी 0.2

(a) पट्टी A पर बहुत जंग लगी। इसका द्रव्यमान घटने के स्थान पर बढ़ा क्यों? (1 अंक)

उत्तर।

  1. जंग तब बनती है जब लोहा वायु की ऑक्सीजन और जल से संयोग करता है (जलयोजित आयरन(III) ऑक्साइड); जुड़ी हुई ऑक्सीजन और जल से द्रव्यमान बढ़ता है — 1 अंक

(b) तीनों परतों के लिए कौन-सी पट्टी नियंत्रण (कंट्रोल) का काम कर रही थी, और उसकी आवश्यकता क्यों थी? (1 अंक)

उत्तर।

  1. पट्टी A (B, C और D की तरह छत पर रखा बिना परत वाला लोहा); इसके बिना विद्यार्थी नहीं बता पाते कि हर परत ने जंग को कितना घटाया — 1 अंक

(c) (i) पट्टी A के द्रव्यमान में प्रतिशत वृद्धि ज्ञात कीजिए।

(ii) विद्यालय अपनी खिड़कियों की लोहे की ग्रिलों को बचाना चाहता है। तालिका में से आप कौन-सा उपचार चुनेंगे? आँकड़ों से कारण दीजिए। (2 अंक)

उत्तर।

  1. (4.8 ÷ 50) × 100 = 9.6% — 1 अंक
  2. ज़िंक की परत (यशदलेपन): द्रव्यमान में सबसे कम वृद्धि, 0.1 g (पेंट भी स्वीकार्य: 0.4 g, और ग्रिल पर दोबारा करना आसान) — 1 अंक

अथवा

(c) पट्टियों A और E की तुलना कीजिए, जो दोनों बिना परत वाला लोहा थीं। इनसे जंग लगने की आवश्यक परिस्थितियों के बारे में क्या पता चलता है? एक और पट्टी सुझाइए जिसे जोड़कर विद्यार्थी दिखा सकें कि वायु भी आवश्यक है। (2 अंक)

उत्तर।

  1. नमी से दूर रखी E पर लगभग जंग नहीं लगी जबकि A पर बहुत लगी: जंग लगने के लिए जल (नमी) आवश्यक है — 1 अंक
  2. उबले (वायु-रहित) जल में डूबी, ऊपर तेल की परत वाली बिना परत की पट्टी; इस पर लगभग जंग नहीं लगनी चाहिए (जल रखते हुए वायु हटाने का कोई भी उचित तरीका स्वीकार्य) — 1 अंक

प्रश्न 15 (4 अंक)

कक्षा में एक प्रदर्शन के दौरान शिक्षिका ने चार धातुओं को वायु में गर्म किया और विद्यार्थियों ने देखी गई बातें लिखीं।

धातु क्या दिखा
सोडियम (छोटा टुकड़ा) तुरंत आग पकड़ी और सुनहरी-पीली लौ के साथ जला
मैग्नीशियम रिबन चमकदार सफ़ेद लौ के साथ जला, सफ़ेद राख बची
लौ में छिड़का गया ऐलुमिनियम चूर्ण चमकीली चिनगारियों के साथ जला, सफ़ेद चूर्ण बचा
कॉपर की पन्नी नहीं जली; इस पर काली परत चढ़ गई

(a) मैग्नीशियम और कॉपर के साथ जो हुआ, उसके संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए। (1 अंक)

उत्तर।

  1. 2Mg(s)+O2(g)→Δ2MgO(s)\mathrm{2Mg(s) + O_2(g) \xrightarrow{\Delta} 2MgO(s)} — 0.5 अंक
  2. 2Cu(s)+O2(g)→Δ2CuO(s)\mathrm{2Cu(s) + O_2(g) \xrightarrow{\Delta} 2CuO(s)} (काला कॉपर(II) ऑक्साइड) — 0.5 अंक

(b) प्रेक्षणों के आधार पर सोडियम, मैग्नीशियम और कॉपर को ऑक्सीजन के साथ अभिक्रियाशीलता के घटते क्रम में लिखिए। सोडियम को केरोसिन में क्यों रखा जाता है? (1 अंक)

उत्तर।

  1. सोडियम > मैग्नीशियम > कॉपर — 0.5 अंक
  2. यह ऑक्सीजन (और नमी) से इतनी तीव्र अभिक्रिया करता है कि खुले में आग पकड़ सकता है; केरोसिन वायु को दूर रखता है — 0.5 अंक

(c) मैग्नीशियम की सफ़ेद राख को जल के साथ हिलाने पर वह लाल लिटमस को नीला कर देती है। ऐलुमिनियम से बना सफ़ेद चूर्ण लिटमस नहीं बदलता, फिर भी ऐलुमिनियम ऑक्साइड को उभयधर्मी कहते हैं। स्पष्ट कीजिए कि लिटमस क्यों नहीं बदलता, उभयधर्मी का क्या अर्थ है, और इसे दर्शाने वाले समीकरण लिखिए। (2 अंक)

उत्तर।

  1. ऐलुमिनियम ऑक्साइड जल में नहीं घुलता, इसलिए लिटमस बदलने वाला क्षार नहीं बनता — 0.5 अंक
  2. उभयधर्मी: यह अम्ल और क्षारक, दोनों से अभिक्रिया करके लवण और जल देता है — 0.5 अंक
  3. Al2O3(s)+6HCl(aq)→2AlCl3(aq)+3H2O(l)\mathrm{Al_2O_3(s) + 6HCl(aq) \rightarrow 2AlCl_3(aq) + 3H_2O(l)} — 0.5 अंक
  4. Al2O3(s)+2NaOH(aq)→2NaAlO2(aq)+H2O(l)\mathrm{Al_2O_3(s) + 2NaOH(aq) \rightarrow 2NaAlO_2(aq) + H_2O(l)} (सोडियम ऐलुमिनेट) — 0.5 अंक

अथवा

(c) मैग्नीशियम और ऐलुमिनियम काफ़ी अभिक्रियाशील धातुएँ हैं, फिर भी वायु में छोड़ा गया मैग्नीशियम रिबन या ऐलुमिनियम की चादर न आग पकड़ती है न गलकर नष्ट होती है। क्यों? ऐलुमिनियम की खिड़कियों के फ़्रेम के लिए इस सुरक्षा को और मज़बूत कैसे किया जाता है? (2 अंक)

उत्तर।

  1. इनकी सतह पर एक पतली ऑक्साइड परत बन जाती है जो वायु से आगे की अभिक्रिया रोक देती है — 1 अंक
  2. एनोडीकरण द्वारा: ऐलुमिनियम को तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल में ऐनोड बनाया जाता है, और ऑक्साइड परत मोटी हो जाती है — 1 अंक