मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार
मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार अध्याय 2026-27 के प्रतिदर्श प्रश्न पत्र तथा 2025 और 2026 के बोर्ड प्रश्न पत्रों में 1 से 8 अंक का रहा; प्रकाश वाले अध्याय के साथ मिलकर यह हमेशा 12 अंक पूरे करता है। नेत्र के भागों या किसी दृष्टि दोष पर एक बहुविकल्पीय प्रश्न (जरा-दूरदृष्टिता 2025 और 2026 दोनों में आई), 3 अंक का प्रश्न जिसमें प्रायः आरेख चाहिए (इंद्रधनुष, निकट-दृष्टि दोष और उसका संशोधन, टिंडल प्रभाव), और कभी-कभी 5 अंक का प्रश्न (प्रतिदर्श प्रश्न पत्र) या प्रिज़्म पर केस अध्ययन का भाग (2026 दूसरी बोर्ड परीक्षा) आता है।
अंक प्रायः यहाँ कटते हैं:
- दृष्टि दोष के आरेख में दूर बिंदु या निकट बिंदु अंकित न करना, या गलत लेंस बनाना;
- यह लिखना कि समंजन में अभिनेत्र लेंस खिसकता है, या लेंस और दृष्टिपटल की दूरी बदलती है;
- दीर्घ-दृष्टि दोष (छोटा नेत्र गोलक) और जरा-दूरदृष्टिता (कमज़ोर पक्ष्माभी पेशियाँ) के कारणों में गड़बड़ी;
- नीले आकाश या इंद्रधनुष को केवल परावर्तन से समझाना।
5 मिनट में दोहराएँ
नेत्र के भाग: कॉर्निया (अधिकांश अपवर्तन), परितारिका (पुतली का आकार नियंत्रित), पुतली (प्रकाश अंदर जाने देती है), अभिनेत्र लेंस (सूक्ष्म फोकसन), पक्ष्माभी पेशियाँ (लेंस की वक्रता बदलती हैं), दृष्टिपटल (प्रकाश-सुग्राही परदा), दृक् तंत्रिका (संकेत मस्तिष्क तक)। दृष्टिपटल पर प्रतिबिंब वास्तविक और उलटा; मस्तिष्क उसे सीधा दिखाता है।
समंजन: दूर की वस्तु → पक्ष्माभी पेशियाँ शिथिल, लेंस पतला, फोकस दूरी अधिक; पास की वस्तु → पेशियाँ सिकुड़ती हैं, लेंस मोटा, फोकस दूरी कम। लेंस और दृष्टिपटल की दूरी कभी नहीं बदलती। सामान्य नेत्र: निकट बिंदु 25 cm (सुस्पष्ट दर्शन की अल्पतम दूरी), दूर बिंदु अनंत।
| दोष | नहीं दिखता | प्रतिबिंब बनता है | कारण | संशोधन |
|---|---|---|---|---|
| निकट-दृष्टि दोष | दूर की वस्तुएँ | दृष्टिपटल के सामने | लंबा नेत्र गोलक या अधिक वक्र लेंस | अवतल लेंस, (दूर बिंदु) |
| दीर्घ-दृष्टि दोष | पास की वस्तुएँ | दृष्टिपटल के पीछे | छोटा नेत्र गोलक या अधिक फोकस दूरी | उत्तल लेंस (25 cm की वस्तु का प्रतिबिंब निकट बिंदु पर) |
| जरा-दूरदृष्टिता | आयु के साथ पास की वस्तुएँ | दृष्टिपटल के पीछे | कमज़ोर पक्ष्माभी पेशियाँ, कठोर लेंस | उत्तल या द्विफोकसी लेंस |
मोतियाबिंद: धुंधला अभिनेत्र लेंस, शल्य चिकित्सा से हटाया जाता है।
प्रिज़्म: दोनों फलकों पर प्रकाश आधार की ओर मुड़ता है; i, e और विचलन कोण D अंकित कीजिए। वर्ण-विक्षेपण: श्वेत प्रकाश → VIBGYOR (बैंजानीहपीनाला); लाल सबसे कम, बैंगनी सबसे अधिक विचलित। उलटा रखा दूसरा प्रिज़्म रंगों को फिर श्वेत प्रकाश बना देता है।
इंद्रधनुष: बूँदें सूर्य के प्रकाश का अपवर्तन और वर्ण-विक्षेपण करती हैं, भीतर परावर्तन करती हैं और फिर अपवर्तन; सूर्य पीठ की ओर हो तब दिखता है।
वायुमंडलीय अपवर्तन: बदलते घनत्व वाली वायु-परतें प्रकाश मोड़ती हैं: तारे टिमटिमाते हैं (बिंदु स्रोत), ग्रह नहीं (विस्तारित), क्षितिज के पास तारे ऊँचे दिखते हैं, सूर्योदय लगभग 2 मिनट पहले और सूर्यास्त 2 मिनट बाद, क्षितिज पर चपटा सूर्य, गर्म वायु के पार हिलती वस्तुएँ।
प्रकीर्णन: टिंडल प्रभाव (धुएँ, धुंध, कोलॉइड में दिखता किरण-पुंज)। बहुत सूक्ष्म कण नीले को सबसे अधिक प्रकीर्णित करते हैं; बड़े कण सभी रंगों को (श्वेत बादल)। नीला आकाश; अंतरिक्ष में काला आकाश; लाल खतरे के संकेत (सबसे कम प्रकीर्णन)।
आम गलतियाँ: काँच का स्लैब स्पेक्ट्रम नहीं देता; फोकस करते समय अभिनेत्र लेंस खिसकता नहीं है।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: हर प्रश्न पहले कॉपी पर हल कीजिए, फिर उत्तर पढ़िए। हर चरण के सामने लिखे अंक बताते हैं कि परीक्षक क्या देखता है। 1 अंक वाले बहुविकल्पीय और अभिकथन-कारण प्रश्न अंत की क्विज़ में हैं, साथ में ऐसे प्रश्न भी जो जाँचते हैं कि आपने अध्याय कितनी गहराई से समझा है; क्विज़ के हर उत्तर के साथ उसकी व्याख्या दी गई है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (2 और 3 अंक)
प्रश्न 1 (3 अंक)
(a) धुंध भरी रात में कार की हेडलाइट के किरण-पुंज हवा में चमकीले पथ के रूप में दिखते हैं। इस परिघटना का नाम बताइए और इसका कारण लिखिए।
(b) अगरबत्ती से उठता धुआँ गहरी पृष्ठभूमि पर नीला-सा दिखता है, पर उबलती केतली की भाप श्वेत दिखती है। कारण समझाइए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
(a) यह टिंडल प्रभाव है। धुंध में जल की सूक्ष्म बूँदें होती हैं। वे हेडलाइट के किरण-पुंज के कुछ भाग को बगल की ओर प्रकीर्णित कर देती हैं, इसमें से कुछ हमारी आँखों तक पहुँचता है, और इसलिए हमें किरण-पुंज का पथ दिखता है।
(b) प्रकीर्णित प्रकाश का रंग कणों के आकार पर निर्भर करता है। अगरबत्ती के धुएँ में बहुत सूक्ष्म कण होते हैं, जो मुख्यतः कम तरंगदैर्घ्य वाले प्रकाश को प्रकीर्णित करते हैं, इसलिए धुआँ नीला-सा दिखता है। भाप जल की कहीं बड़ी बूँदों से बनी होती है, जो सभी रंगों को लगभग बराबर प्रकीर्णित करती हैं, इसलिए प्रकीर्णित प्रकाश श्वेत होता है।
अंक योजना:
- टिंडल प्रभाव — 0.5 अंक
- धुंध की सूक्ष्म जल-बूँदें प्रकाश के कुछ भाग को बगल की ओर हमारी आँखों तक प्रकीर्णित करती हैं, इसलिए किरण-पुंज का पथ दिखता है — 0.5 अंक
- अगरबत्ती के धुएँ में बहुत सूक्ष्म कण होते हैं, जो मुख्यतः कम तरंगदैर्घ्य वाले (नीले) प्रकाश को प्रकीर्णित करते हैं — 1 अंक
- भाप की जल-बूँदें कहीं बड़ी होती हैं और सभी रंगों को लगभग बराबर प्रकीर्णित करती हैं, इसलिए प्रकीर्णित प्रकाश श्वेत दिखता है — 1 अंक
प्रश्न 2 (3 अंक)
चित्र में दिखाया गया है कि किसी वस्तु का प्रकाश दो दोषपूर्ण नेत्रों, X और Y, में प्रतिबिंब कैसे बनाता है। नेत्र X के लिए वस्तु बहुत दूर है; नेत्र Y के लिए, जो एक 12 वर्ष के बच्चे का है, वस्तु नेत्र से 25 cm दूर N पर है।
(a) प्रत्येक नेत्र का दोष और उसे ठीक करने वाले लेंस का प्रकार बताइए।
(b) किरण आरेख बनाकर दिखाइए कि संशोधक लेंस नेत्र X को दूर की वस्तु स्पष्ट देखने में कैसे सहायता करता है।

उत्तर।
आदर्श उत्तर:
(a)
- नेत्र X में दूर की वस्तु का समांतर प्रकाश दृष्टिपटल के सामने फोकस होता है। यह निकट-दृष्टि दोष है, जो अवतल लेंस से ठीक होता है।
- नेत्र Y में 25 cm पर रखी वस्तु का प्रकाश दृष्टिपटल के पीछे फोकस होता। यह दीर्घ-दृष्टि दोष है, जो उत्तल लेंस से ठीक होता है।
(b) किरण आरेख चित्र में दिखाया गया है। अवतल लेंस L समांतर किरणों को ऐसे फैलाता है कि वे नेत्र X के दूर बिंदु F से आती प्रतीत हों। नेत्र अपने दूर बिंदु से आने वाले प्रकाश को फोकस कर सकता है, इसलिए किरणें अब दृष्टिपटल पर मिलती हैं।
अंक योजना:
- X: दूर की वस्तु का प्रकाश दृष्टिपटल के सामने मिलता है: निकट-दृष्टि दोष; अवतल लेंस — 1 अंक
- Y: पास की वस्तु का प्रकाश दृष्टिपटल के पीछे मिलता: दीर्घ-दृष्टि दोष; उत्तल लेंस — 1 अंक
- आरेख: नेत्र X के सामने अवतल लेंस; समांतर किरणें दूर बिंदु F से आती प्रतीत होती हैं और दृष्टिपटल पर फोकस होती हैं — 1 अंक

प्रश्न 3 (2 अंक)
दृष्टिपटल पर बना प्रतिबिंब वास्तविक और उलटा होता है।
(a) इस प्रतिबिंब की सूचना मस्तिष्क तक कैसे पहुँचती है?
(b) फिर भी हमें वस्तुएँ सीधी क्यों दिखती हैं?
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
(a) दृष्टिपटल में बहुत अधिक संख्या में प्रकाश-सुग्राही कोशिकाएँ होती हैं। प्रकाश पड़ने पर ये सक्रिय होकर विद्युत संकेत बनाती हैं। दृक् तंत्रिकाएँ इन संकेतों को मस्तिष्क तक ले जाती हैं।
(b) नेत्र केवल प्रतिबिंब बनाता है; देखने का काम मस्तिष्क करता है। मस्तिष्क मिले संकेतों को समझकर हमें चीज़ें वैसी ही, सीधी, दिखाता है जैसी वे वास्तव में हैं।
अंक योजना:
- दृष्टिपटल की प्रकाश-सुग्राही कोशिकाएँ प्रकाश पड़ने पर सक्रिय होकर विद्युत संकेत बनाती हैं, जिन्हें दृक् तंत्रिका मस्तिष्क तक ले जाती है — 1 अंक
- देखने का काम मस्तिष्क करता है: वह संकेतों को ऐसे समझता है कि हमें चीज़ें सीधी दिखें — 1 अंक
प्रश्न 4 (3 अंक)
(a) प्रकाश की एक किरण 30° कोण वाले काँच के प्रिज़्म के एक फलक पर अभिलंबवत (अभिलंब के अनुदिश) पड़ती है। प्रिज़्म के भीतर और दूसरे फलक से बाहर उसका पथ बनाइए।
(b) पहले फलक पर किरण क्यों नहीं मुड़ती?
(c) यदि प्रिज़्म अधिक अपवर्तनांक वाले काँच का बना हो, तो विचलन कोण में क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
(a) पथ चित्र में दिखाया गया है (A प्रिज़्म कोण है)। किरण सीधी काँच में जाती है। दूसरे फलक पर वह प्रिज़्म कोण, 30°, के बराबर कोण पर पड़ती है, और वायु में निकलते समय अभिलंब से दूर, आधार की ओर, मुड़ती है। निर्गत कोण e और विचलन कोण D चित्र में अंकित हैं।
(b) किरण अभिलंब के अनुदिश पड़ती है, इसलिए उसका आपतन कोण शून्य है और अपवर्तन कोण भी शून्य है। काँच में वह धीमी हो जाती है, पर दिशा नहीं बदलती।
(c) विचलन कोण बढ़ जाएगा। अधिक अपवर्तनांक वाला काँच दूसरे फलक पर किरण को अधिक मोड़ता है।
अंक योजना:
- पहले फलक पर किरण बिना मुड़े काँच में जाती है — 0.5 अंक
- दूसरे फलक पर वह अभिलंब से दूर, प्रिज़्म के आधार की ओर, मुड़ती है — 1 अंक
- दूसरे फलक पर अभिलंब और किरण पर तीर बने — 0.5 अंक
- आपतन कोण शून्य है, इसलिए अपवर्तन कोण भी शून्य है; किरण केवल धीमी होती है — 0.5 अंक
- विचलन कोण बढ़ जाएगा — 0.5 अंक

प्रश्न 5 (3 अंक)
प्रकाश के वर्ण-विक्षेपण और प्रकाश के प्रकीर्णन में दो अंतर लिखिए, और प्रत्येक का प्रकृति से एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- क्या होता है: वर्ण-विक्षेपण में श्वेत प्रकाश अपने सात रंगों (स्पेक्ट्रम) में बँट जाता है। प्रकीर्णन में सूक्ष्म कणों से टकराकर प्रकाश अनेक दिशाओं में चला जाता है।
- कारण: वर्ण-विक्षेपण अपवर्तन के समय होता है, क्योंकि अलग-अलग रंगों का प्रकाश अलग-अलग कोणों पर मुड़ता है। प्रकीर्णन प्रकाश के मार्ग में आए वायु के अणु, धूल, धुआँ या जल की सूक्ष्म बूँदों जैसे कणों के कारण होता है, और कौन-सा रंग कितना प्रकीर्णित होगा यह कणों के आकार पर निर्भर करता है।
उदाहरण: इंद्रधनुष वर्षा की बूँदों द्वारा वर्ण-विक्षेपण से बनता है। आकाश का नीला रंग, या धुंध भरे जंगल में दिखती सूर्य की किरणें, प्रकीर्णन के कारण हैं।
अंक योजना:
- क्या होता है: वर्ण-विक्षेपण में श्वेत प्रकाश सात रंगों में बँट जाता है; प्रकीर्णन में कण प्रकाश को अनेक दिशाओं में भेज देते हैं — 1 अंक
- कारण: वर्ण-विक्षेपण अपवर्तन में होता है क्योंकि अलग-अलग रंग अलग-अलग मुड़ते हैं; प्रकीर्णन तब होता है जब प्रकाश वायु के अणुओं, धूल या जल की बूँदों जैसे सूक्ष्म कणों से टकराता है — 1 अंक
- उदाहरण: इंद्रधनुष (वर्ण-विक्षेपण); नीला आकाश या धुंध भरे जंगल में दिखती सूर्य की किरणें (प्रकीर्णन) (प्रत्येक 0.5) — 1 अंक
प्रश्न 6 (2 अंक)
श्वेत प्रकाश का एक किरण-पुंज आधार नीचे की ओर रखे काँच के प्रिज़्म से गुज़रता है। परदे पर स्पेक्ट्रम में लाल सबसे ऊपर और बैंगनी सबसे नीचे है।
(a) बैंगनी सबसे नीचे क्यों है?
(b) प्रिज़्म को उलटकर, आधार ऊपर की ओर रखने पर रंगों का क्रम क्या होगा?
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
(a) प्रिज़्म प्रकाश को अपने आधार की ओर मोड़ता है, जो यहाँ नीचे की ओर है। बैंगनी प्रकाश सबसे अधिक और लाल सबसे कम मुड़ता है, इसलिए बैंगनी स्पेक्ट्रम में सबसे नीचे और लाल सबसे ऊपर आता है।
(b) आधार ऊपर होने पर हर रंग ऊपर की ओर मुड़ेगा। बैंगनी अब भी सबसे अधिक मुड़ेगा, इसलिए अब बैंगनी सबसे ऊपर और लाल सबसे नीचे होगा।
अंक योजना:
- प्रिज़्म प्रकाश को अपने आधार की ओर मोड़ता है; बैंगनी सबसे अधिक और लाल सबसे कम मुड़ता है, इसलिए बैंगनी सबसे नीचे आता है — 1 अंक
- क्रम उलट जाएगा: बैंगनी सबसे ऊपर और लाल सबसे नीचे — 1 अंक
प्रश्न 7 (2 अंक)
परिभाषा लिखिए:
(a) नेत्र की समंजन क्षमता;
(b) सामान्य नेत्र का निकट बिंदु और दूर बिंदु, किसी युवा वयस्क के लिए उनके मान सहित।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
(a) समंजन क्षमता: अभिनेत्र लेंस की अपनी फोकस दूरी बदलने की क्षमता, जिससे वह पास और दूर, दोनों की वस्तुओं को दृष्टिपटल पर फोकस कर सके।
(b) निकट बिंदु: नेत्र से वह सबसे पास का बिंदु जहाँ रखी वस्तु बिना ज़ोर लगाए स्पष्ट दिखती है। सामान्य दृष्टि वाले युवा वयस्क के लिए यह लगभग 25 cm है (सुस्पष्ट दर्शन की अल्पतम दूरी)।
दूर बिंदु: वह सबसे दूर का बिंदु जहाँ तक नेत्र वस्तुएँ स्पष्ट देख सकता है। सामान्य नेत्र के लिए यह अनंत पर होता है।
अंक योजना:
- अभिनेत्र लेंस की अपनी फोकस दूरी बदलने की क्षमता, जिससे पास और दूर की दोनों वस्तुएँ दृष्टिपटल पर फोकस हों — 1 अंक
- निकट बिंदु: वह सबसे पास का बिंदु जहाँ वस्तु बिना ज़ोर लगाए स्पष्ट दिखे, लगभग 25 cm — 0.5 अंक
- दूर बिंदु: वह सबसे दूर का बिंदु जहाँ तक नेत्र वस्तुएँ स्पष्ट देख सके, सामान्य नेत्र के लिए अनंत — 0.5 अंक
प्रश्न 8 (2 अंक)
तारा श्वेत प्रकाश के एक पतले किरण-पुंज को काँच के प्रिज़्म से गुज़ारकर परदे पर स्पेक्ट्रम प्राप्त करती है। फिर वह प्रिज़्म से पहले किरण-पुंज के मार्ग में नीले काँच का एक फ़िल्टर रख देती है, जिससे प्रिज़्म पर केवल नीला प्रकाश पड़े।
(a) अब उसे परदे पर क्या दिखेगा? क्यों?
(b) क्या नीला धब्बा परदे पर उसी स्थान पर पड़ेगा जहाँ पहले वाले स्पेक्ट्रम की नीली पट्टी थी? कारण दीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
(a) उसे रंगों की पट्टी नहीं, केवल नीला धब्बा दिखेगा। नीला प्रकाश एक ही रंग है, इसलिए प्रिज़्म उसे मोड़ता है पर और नहीं बाँट सकता।
(b) हाँ। प्रिज़्म किसी रंग को कितना मोड़ेगा, यह केवल उस रंग और काँच पर निर्भर करता है। नीला प्रकाश अकेला पड़े या श्वेत प्रकाश के भाग के रूप में, वह उतना ही मुड़ता है, इसलिए धब्बा वहीं पड़ता है जहाँ नीली पट्टी थी।
अंक योजना:
- केवल नीला धब्बा, स्पेक्ट्रम नहीं: नीला प्रकाश एक ही रंग है, जिसे प्रिज़्म मोड़ता तो है पर और रंगों में नहीं बाँट सकता — 1 अंक
- हाँ: प्रिज़्म नीले प्रकाश को उतना ही मोड़ता है, चाहे वह अकेला आए या श्वेत प्रकाश में मिला हो — 1 अंक
प्रश्न 9 (2 अंक)
दीर्घ-दृष्टि दोष वाला एक व्यक्ति 25 cm पर रखी किताब पढ़ने के लिए उत्तल लेंस का चश्मा लगाता है। चश्मे का लेंस किताब का प्रतिबिंब कहाँ बनाता है, और इससे क्या लाभ होता है?
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
किताब उत्तल लेंस और उसके फोकस के बीच है, इसलिए लेंस किताब का आभासी, सीधा प्रतिबिंब अधिक दूर, व्यक्ति के नेत्र के निकट बिंदु पर, बनाता है।
दोषपूर्ण नेत्र अपने निकट बिंदु से पास की किसी वस्तु को फोकस नहीं कर सकता, पर निकट बिंदु पर रखी वस्तु को कर सकता है। इसलिए वह यह प्रतिबिंब स्पष्ट देखता है।
अंक योजना:
- उत्तल लेंस किताब का आभासी, सीधा प्रतिबिंब व्यक्ति के नेत्र के निकट बिंदु (25 cm से अधिक दूर) पर बनाता है — 1 अंक
- नेत्र अपने निकट बिंदु पर रखी वस्तु को दृष्टिपटल पर फोकस कर सकता है, इसलिए वह इस प्रतिबिंब को स्पष्ट देखता है — 1 अंक
प्रश्न 10 (2 अंक)
नेत्र जाँच के समय डॉक्टर सीमा की आँखों में ऐसी दवा डालते हैं जिससे कुछ घंटों तक उसकी पुतलियाँ पूरी खुली रहती हैं।
(a) इसके बाद उसे तेज़ धूप में असुविधा क्यों होती है?
(b) सामान्यतः नेत्र का कौन-सा भाग ऐसा होने से रोकता है, और कैसे?
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
(a) दवा के कारण पुतलियाँ पूरी खुली रहती हैं। तेज़ धूप में पुतलियाँ छोटी नहीं हो पातीं, इसलिए आँखों में बहुत अधिक प्रकाश चला जाता है, और यह चौंध असुविधाजनक लगती है।
(b) सामान्यतः परितारिका ऐसा होने से रोकती है। यह पुतली का आकार नियंत्रित करती है: तेज़ प्रकाश में पुतली को छोटा और धुंधले प्रकाश में बड़ा कर देती है, जिससे नेत्र में उचित मात्रा में प्रकाश जाए।
अंक योजना:
- पुतलियाँ छोटी नहीं हो पातीं, इसलिए तेज़ प्रकाश में आँखों में बहुत अधिक प्रकाश चला जाता है — 1 अंक
- परितारिका: तेज़ प्रकाश में यह पुतली को छोटा और धुंधले प्रकाश में बड़ा करके नेत्र में जाने वाले प्रकाश को नियंत्रित करती है — 1 अंक
दीर्घ उत्तरीय और केस आधारित प्रश्न
प्रश्न 11 (5 अंक)
विकल्प (A) या (B) में से किसी एक का उत्तर दीजिए।
(A) एक धूप भरी दोपहर मीनल सूर्य की ओर पीठ करके खड़ी है और बगीचे के पाइप से पानी की महीन फुहार छोड़ती है। उसे फुहार में एक छोटा इंद्रधनुष दिखता है।
(i) पानी की बूँदें सूक्ष्म प्रिज़्मों की तरह काम क्यों करती हैं? (1 अंक)
उत्तर।
- बूँद में प्रवेश करते समय सूर्य का प्रकाश अपवर्तित होता है और उसके अलग-अलग रंग अलग-अलग कोणों पर मुड़ते हैं, इसलिए बूँद प्रिज़्म की तरह श्वेत प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण करती है — 1 अंक
(ii) एक बूँद इंद्रधनुष के रंग कैसे बनाती है, यह नामांकित आरेख बनाकर दिखाइए, और बूँद में सूर्य के प्रकाश के साथ होने वाली तीन घटनाएँ समझाइए। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
आरेख चित्र में दिखाया गया है (S सूर्य का प्रकाश, R लाल प्रकाश, V बैंगनी प्रकाश)।
P पर सूर्य का प्रकाश बूँद में प्रवेश करते समय अपवर्तित होता है, और हर रंग अलग मात्रा में मुड़ने से रंगों में बँट जाता है (वर्ण-विक्षेपण)।
Q पर रंग बूँद की पिछली सतह से भीतर की ओर परावर्तित होते हैं (आंतरिक परावर्तन)।
T पर वायु में निकलते समय वे फिर अपवर्तित होकर मीनल की ओर जाते हैं। अलग-अलग ऊँचाई की बूँदों से अलग-अलग रंग उसकी आँख तक आते हैं, इसलिए उसे रंग एक पट्टी के रूप में दिखते हैं।
अंक योजना:
- आरेख: बूँद में प्रवेश करता सूर्य का प्रकाश, रंगों में बँटता, पिछली सतह से परावर्तित होकर निकलता; लाल और बैंगनी नामांकित, तीर सहित — 1 अंक
- प्रवेश पर वर्ण-विक्षेपण सहित अपवर्तन; पिछली सतह पर आंतरिक परावर्तन; निकलते समय फिर अपवर्तन — 1 अंक

(iii) इंद्रधनुष बनने और काँच के प्रिज़्म द्वारा स्पेक्ट्रम बनने में एक समानता और एक अंतर लिखिए। (2 अंक)
उत्तर।
- समानता: दोनों में श्वेत प्रकाश अपवर्तन के समय वर्ण-विक्षेपण से अपने रंगों में बँटता है — 1 अंक
- अंतर: बूँद में प्रकाश भीतर परावर्तित भी होता है और जिस ओर से आया उसी ओर लौटता है; प्रिज़्म में वह आर-पार निकल जाता है (यह भी स्वीकार्य: बूँद गोलाकार और पानी की होती है) — 1 अंक
अथवा
(B) किरण दूर की पहाड़ियाँ स्पष्ट देख लेती है, पर आँखों से 25 cm पर रखी किताब के अक्षर धुंधले दिखते हैं। उसका निकट बिंदु 40 cm पाया जाता है।
(i) उसके दृष्टि दोष का नाम बताइए और इसके दो संभावित कारण लिखिए। (1 अंक)
उत्तर।
- दीर्घ-दृष्टि दोष — 0.5 अंक
- कारण: अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी बहुत अधिक है; नेत्र गोलक बहुत छोटा हो गया है (दोनों आवश्यक) — 0.5 अंक
(ii) किरण आरेख बनाकर दिखाइए कि (I) 25 cm (N) पर रखी किताब का प्रतिबिंब उसके नेत्र में कहाँ बनता है, और (II) उचित लेंस उसे पढ़ने में कैसे सहायता करता है। उसका निकट बिंदु N′ अंकित कीजिए। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
आरेख चित्र में दिखाए गए हैं।
(I) बिना चश्मे के N पर रखी किताब का प्रकाश दृष्टिपटल के पीछे फोकस होता है, इसलिए अक्षर धुंधले दिखते हैं।
(II) उत्तल लेंस L, N से आती किरणों को कम फैलने देता है, मानो वे 40 cm पर स्थित उसके निकट बिंदु N′ से आ रही हों। उसका नेत्र N′ से आने वाले प्रकाश को फोकस कर सकता है, इसलिए किरणें अब दृष्टिपटल पर मिलती हैं।
अंक योजना:
- (I) N से आती किरणें दृष्टिपटल के पीछे मिलती हैं — 1 अंक
- (II) नेत्र के सामने उत्तल लेंस; N से आती किरणें N′ से आती प्रतीत होती हैं और दृष्टिपटल पर मिलती हैं; तीर और नामांकन — 1 अंक

(iii) 25 cm पर पढ़ने के लिए उसे जिस चश्मे की ज़रूरत है, उसके लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिए। (2 अंक)
उत्तर।
- cm, cm: — 1 अंक
- cm m; D (उत्तल लेंस) — 1 अंक
प्रश्न 12 (4 अंक)
राहुल की नेत्र-चिकित्सक पिछले वर्षों में उसे दिए गए चश्मों का रिकॉर्ड रखती हैं।
| राहुल की आयु (वर्ष) | चश्मे के लेंस की क्षमता |
|---|---|
| 10 | −0.8 D |
| 12 | −1.25 D |
| 14 | −2.0 D |
राहुल हमेशा बिना चश्मे के अपनी किताबें स्पष्ट पढ़ लेता है।
(a) राहुल के दृष्टि दोष का नाम बताइए। यह ठीक हो रहा है या बढ़ रहा है? तालिका से कैसे पता चलता है? (1 अंक)
उत्तर।
- निकट-दृष्टि दोष — 0.5 अंक
- बढ़ रहा है: क्षमता अधिक ऋणात्मक होती जा रही है, अर्थात हर बार अधिक प्रबल अपसारी लेंस चाहिए — 0.5 अंक
(b) 10 से 14 वर्ष की आयु के बीच उसका दूर बिंदु कितना खिसका? (1 अंक)
उत्तर।
- लेंस की फोकस दूरी = −(दूर बिंदु): 10 वर्ष पर m, दूर बिंदु 1.25 m; 14 वर्ष पर m, दूर बिंदु 0.5 m — 0.5 अंक
- यह उसकी आँखों की ओर 0.75 m पास खिसका — 0.5 अंक
(c) 14 वर्ष की आयु में राहुल अपने चचेरे भाई का −1.0 D क्षमता का चश्मा लगा लेता है। इससे वह कितनी दूरी तक स्पष्ट देख पाएगा? (2 अंक)
उत्तर।
- cm; लेंस को प्रतिबिंब उसके दूर बिंदु, cm, पर बनाना है: — 1 अंक
- cm: वह केवल 1 m तक स्पष्ट देख पाएगा — 1 अंक
अथवा
(c) 14 वर्ष की आयु में राहुल का निकट बिंदु 10 cm है। अपना −2.0 D का चश्मा लगाकर वह किताब को कम से कम कितनी दूरी पर स्पष्ट पढ़ सकता है? (2 अंक)
उत्तर।
- cm; लेंस को किताब का प्रतिबिंब उसके निकट बिंदु, cm, पर बनाना है: — 1 अंक
- cm: सबसे कम पढ़ने की दूरी 12.5 cm है — 1 अंक
प्रश्न 13 (4 अंक)
नेत्र कुछ-कुछ स्वतः फोकस करने वाले कैमरे जैसा काम करता है, पर एक बड़े अंतर के साथ। कैमरे में फोकस करने के लिए लेंस को आगे या पीछे खिसकाया जाता है। नेत्र में अभिनेत्र लेंस और दृष्टिपटल के बीच की दूरी स्थिर रहती है, इसे 2.5 cm मान लीजिए (एक सरल मॉडल)। अलग-अलग दूरी की वस्तुओं को फोकस करने के लिए पक्ष्माभी पेशियाँ अभिनेत्र लेंस की वक्रता, और इसलिए उसकी फोकस दूरी, बदलती हैं। (अभिनेत्र लेंस को एक पतला लेंस मानिए।)
(a) सामान्य दृष्टि वाला एक वयस्क जब किसी दूर के तारे को देखता है तो उसके अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी कितनी होती है? कारण दीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- 2.5 cm — 0.5 अंक
- दूर के तारे का प्रकाश समांतर होता है और फोकस पर मिलता है; स्पष्ट प्रतिबिंब के लिए फोकस लेंस से 2.5 cm पीछे, दृष्टिपटल पर, होना चाहिए — 0.5 अंक
(b) जब वह 25 cm दूर रखी किताब पढ़ता है, तब उसके अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- cm, cm; — 0.5 अंक
- cm cm — 0.5 अंक
(c) आयु बढ़ने पर इस व्यक्ति का निकट बिंदु खिसककर 50 cm हो जाता है। अब उसके अभिनेत्र लेंस की न्यूनतम फोकस दूरी कितनी हो सकती है? यह क्यों बदली है? (2 अंक)
उत्तर।
- , इसलिए cm cm — 1 अंक
- पक्ष्माभी पेशियाँ कमज़ोर हो जाती हैं और अभिनेत्र लेंस का लचीलापन घट जाता है, इसलिए उसे पहले जितना मोटा (अधिक वक्रित) नहीं किया जा सकता; उसकी समंजन क्षमता घट गई है — 1 अंक
अथवा
(c) जब व्यक्ति दूर के तारे को देखता है और जब 25 cm पर किताब पढ़ता है, तब अभिनेत्र लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिए। क्षमता कितनी बदलती है? किताब के लिए पक्ष्माभी पेशियाँ सिकुड़ती हैं या शिथिल होती हैं? (2 अंक)
उत्तर।
- तारा: D; किताब: D; क्षमता 4 D बढ़ती है — 1 अंक
- वे सिकुड़ती हैं: लेंस मोटा (अधिक वक्रित) हो जाता है, इसलिए उसकी क्षमता बढ़ती है और फोकस दूरी घटती है — 1 अंक
प्रश्न 14 (5 अंक)
विकल्प (A) या (B) में से किसी एक का उत्तर दीजिए।
(A) किसी पर्वतीय स्थान पर एक साफ़ रात में तेनज़िंग देखता है कि तारे टिमटिमा रहे हैं। अगली सुबह वह पहाड़ियों के ऊपर सूर्योदय देखता है।
(i) वायुमंडलीय अपवर्तन क्या है? वायु प्रकाश को मोड़ती ही क्यों है? (1 अंक)
उत्तर।
- पृथ्वी के वायुमंडल द्वारा प्रकाश का अपवर्तन — 0.5 अंक
- भिन्न ताप और घनत्व वाली वायु की परतों के अपवर्तनांक भिन्न होते हैं, इसलिए उनसे गुज़रते हुए प्रकाश मुड़ता है — 0.5 अंक
(ii) नामांकित आरेख बनाकर दिखाइए कि क्षितिज के पास दिखने वाला तारा अपनी वास्तविक स्थिति से कुछ ऊँचा क्यों दिखता है। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
आरेख चित्र में दिखाया गया है (S वास्तविक तारा, S′ आभासी स्थिति, O प्रेक्षक, A वायुमंडल, E पृथ्वी)। पृथ्वी की ओर वायु सघन होती जाती है, इसलिए नीचे आते हुए तारे का प्रकाश बार-बार अभिलंब की ओर मुड़ता है। प्रेक्षक की आँख प्रकाश को उसी दिशा में पीछे मानती है जिसमें वह अंत में पहुँचता है, इसलिए तारा S′ पर, S से कुछ ऊँचा, दिखता है।
अंक योजना:
- अधिकाधिक सघन वायु-परतों में प्रवेश करता तारे का प्रकाश धीरे-धीरे अभिलंब की ओर मुड़ता है (प्रेक्षक तक वक्र पथ) — 1 अंक
- प्रेक्षक तारे को किरण की अंतिम दिशा में देखता है, इसलिए आभासी स्थिति S′ वास्तविक स्थिति S से ऊँची है; नामांकन और तीर — 1 अंक

(iii) उगते समय सूर्य की चकती थोड़ी चपटी (अंडाकार) क्यों दिखती है? (1 अंक)
उत्तर।
- निचले किनारे का प्रकाश क्षितिज के पास अधिक (सघन) वायु से गुज़रता है और ऊपरी किनारे के प्रकाश से अधिक ऊपर उठता है, इसलिए चकती ऊपर-नीचे से दबी हुई दिखती है — 1 अंक
(iv) क्या चंद्रमा पर खड़े अंतरिक्ष यात्री को तारे टिमटिमाते दिखेंगे? कारण दीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- नहीं; चंद्रमा पर वायुमंडल नहीं है, इसलिए तारे के प्रकाश का मुड़ना बदलने वाली वायु की परतें नहीं हैं — 1 अंक
अथवा
(B) काँच के प्रिज़्म द्वारा अपवर्तन और वर्ण-विक्षेपण
(i) एक ही रंग के प्रकाश की एक किरण काँच के त्रिभुजाकार प्रिज़्म के एक फलक पर तिरछी पड़ती है। प्रिज़्म से होकर उसका पथ बनाइए और आपतन कोण i, अपवर्तन कोण r, निर्गत कोण e तथा विचलन कोण D अंकित कीजिए। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
आरेख चित्र में दिखाया गया है (A प्रिज़्म कोण है)। काँच में जाते समय किरण अभिलंब की ओर और निकलते समय अभिलंब से दूर मुड़ती है, और दोनों बार आधार की ओर घूमती है। i आपतित किरण और पहले फलक के अभिलंब के बीच, r भीतर की किरण और उसी अभिलंब के बीच, e निर्गत किरण और दूसरे फलक के अभिलंब के बीच, और D आगे बढ़ाई गई आपतित किरण तथा पीछे बढ़ाई गई निर्गत किरण के बीच है।
अंक योजना:
- सही पथ: पहले फलक पर अभिलंब की ओर और दूसरे पर अभिलंब से दूर, किरण आधार की ओर मुड़ती हुई; अभिलंब बने — 1 अंक
- i, r, e किरणों और अभिलंबों के बीच, और D आगे बढ़ाई गई आपतित किरण तथा पीछे बढ़ाई गई निर्गत किरण के बीच अंकित (चारों के लिए 1 अंक) — 1 अंक

(ii) परदे को प्रिज़्म से दूर ले जाने पर रंगों की पट्टी चौड़ी क्यों हो जाती है? (1 अंक)
उत्तर।
- प्रिज़्म से निकलने के बाद हर रंग थोड़ी अलग दिशा में चलता है, इसलिए जितनी दूर वे जाते हैं उतना अधिक फैलते जाते हैं — 1 अंक
(iii) बहुत पतली काँच की पट्टियों से एक खोखला प्रिज़्म बनाया गया है। क्या यह स्पेक्ट्रम बनाएगा (a) जब यह खाली (वायु से भरा) हो, और (b) जब इसमें जल भरा हो? कारण दीजिए। (2 अंक)
उत्तर।
- खाली: स्पेक्ट्रम नहीं; हर पतली दीवार समांतर फलकों वाले पतले स्लैब जैसी है, और भीतर की वायु बाहर जैसी ही है, इसलिए प्रकाश लगभग न मुड़ता है न बँटता है — 1 अंक
- जल भरने पर: हाँ; जल सघन माध्यम का प्रिज़्म बनाता है, और अलग-अलग रंगों को अलग-अलग मात्रा में मोड़ता है — 1 अंक