यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय
यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय अध्याय से 2026-27 के प्रतिदर्श प्रश्न-पत्र और 2025 तथा 2026 के बोर्ड प्रश्न-पत्रों में 4 से 6 अंक आए। फ़रवरी 2026 (जर्मनी या इटली का एकीकरण) और 2025 (नेपोलियन की नागरिक संहिता या उदारवाद) में इतिहास का 5 अंक वाला प्रश्न इसी अध्याय से था; प्रतिदर्श प्रश्न-पत्र (नारी रूपक या यूनान का स्वतंत्रता संग्राम) और मई 2026 (पोलिश भाषा) में 3 अंक का प्रश्न आया; और कालक्रम तथा डाक टिकट के चित्र जैसे बहुविकल्पीय प्रश्न भी आए।
सबसे ज़्यादा अंक इन गलतियों से कटते हैं: 1815, 1830, 1848 और 1871 की तिथियाँ आपस में मिला देना, उदारवादियों को लोकतंत्रवादी मान लेना, 'कैसे' या 'क्यों' पूछे जाने पर जर्मनी या इटली की पूरी कहानी लिख देना, और लंबे उत्तरों में बिस्मार्क, कावूर, गैरीबॉल्डी या मेत्सिनी जैसे नाम न लिखना।
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याद रखने योग्य तिथियाँ
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1789 | फ़्रांसीसी क्रांति: la patrie, le citoyen, तिरंगा, नेशनल असेंबली |
| 1804 | नागरिक संहिता: जन्म पर आधारित विशेषाधिकार खत्म, कानून के सामने बराबरी, संपत्ति का अधिकार |
| 1815 | वियना संधि (मेज़बान: मेटरनिख): बूर्बों वंश की वापसी, रूढ़िवाद |
| 1821-1832 | यूनान का स्वतंत्रता संग्राम; कुस्तुनतुनिया की संधि (1832) |
| 1830 | फ़्रांस में जुलाई क्रांति; बेल्जियम नीदरलैंड्स से अलग |
| 1834 | ज़ॉलवेराइन, प्रशा के नेतृत्व में शुल्क संघ |
| 1848 | पेरिस में विद्रोह; फ्रैंकफ़र्ट संसद (831 सदस्य) |
| 1859-1861 | ऑस्ट्रिया की हार (1859); दक्षिण में गैरीबॉल्डी (1860); विक्टर इमैनुएल द्वितीय इटली का राजा (1861) |
| 1871 | वर्साय में विलियम प्रथम जर्मनी का सम्राट घोषित |
मुख्य उदाहरण
- नेपोलियन का शासन: एक जैसे कानून, मानक नाप-तौल, साझी मुद्रा, गिल्ड की पाबंदियाँ खत्म; फिर ऊँचे कर, सेंसरशिप, ज़बरदस्ती सेना में भर्ती।
- पोलैंड: बँटवारा; स्कूलों में रूसी थोपी गई; चर्च ने पोलिश को ज़िंदा रखा, इसलिए भाषा विरोध का साधन बनी।
- यूनान: ऑटोमन शासन; 1821 से युद्ध; 1824 में बायरन की मृत्यु; 1832 में स्वतंत्र।
- ब्रिटेन: 1688 से संसद की सत्ता; 1707 में स्कॉटलैंड से एकीकरण (पहाड़ी इलाकों में गेलिक पर रोक); 1801 में आयरलैंड ज़बरदस्ती जोड़ा गया; यूनियन जैक, राष्ट्रगान, अंग्रेज़ी।
- 1871 के बाद बाल्कन: स्लाव जातियाँ, ऑटोमन पतन, बड़ी शक्तियों की होड़, फिर पहला विश्वयुद्ध।
व्यक्ति: मेत्सिनी (यंग इटली, यंग यूरोप), मेटरनिख, बिस्मार्क, कावूर, गैरीबॉल्डी, ग्रिम बंधु, हर्डर, कुर्पिंस्की, सॉरयू, रेनन।
शब्द: राष्ट्र-राज्य, निरंकुश (absolutist), कल्पनादर्श (यूटोपियन), जनमत संग्रह, उदारवाद (liber = आज़ाद), रूढ़िवाद, रूमानीवाद, रूपक (मारियान: लाल टोपी, तिरंगा, कॉकेड; जर्मेनिया: बलूत की पत्तियों का मुकुट)।
ध्यान दें
- उदारवादी लोकतंत्रवादी नहीं थे: महिलाओं और संपत्तिहीन पुरुषों को वोट नहीं।
- जर्मनी का एकीकरण प्रशा की सेना ने ऊपर से किया, फ्रैंकफ़र्ट संसद ने नहीं।
- इटली: मेत्सिनी (गुप्त संगठन), कावूर (कूटनीति), गैरीबॉल्डी (स्वयंसेवक) की भूमिकाएँ अलग थीं।
- ज़ॉलवेराइन (1834) और वियना संधि (1815) अलग हैं।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: हर प्रश्न पहले कॉपी पर हल कीजिए, फिर उत्तर पढ़िए। हर चरण के सामने लिखे अंक बताते हैं कि परीक्षक क्या देखता है। 1 अंक वाले बहुविकल्पीय और अभिकथन-कारण प्रश्न अंत की क्विज़ में हैं, साथ में ऐसे प्रश्न भी जो जाँचते हैं कि आपने अध्याय कितनी गहराई से समझा है; क्विज़ के हर उत्तर के साथ उसकी व्याख्या दी गई है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (2 और 3 अंक)
प्रश्न 1 (2 अंक)
'उन्नीसवीं सदी के आरंभ में यूरोप के उदारवादियों के लिए कानून के सामने बराबरी का अर्थ सबके लिए बराबर राजनीतिक अधिकार नहीं था।' इस कथन के पक्ष में दो तर्क दीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- उदारवादियों ने वोट देने और चुनाव लड़ने का अधिकार केवल संपत्ति वाले पुरुषों को दिया।
- संपत्तिहीन पुरुषों और सभी महिलाओं को कोई राजनीतिक अधिकार नहीं मिला।
अंक योजना:
- वोट देने और चुने जाने का अधिकार केवल संपत्ति वाले पुरुषों को दिया गया। — 1 अंक
- संपत्तिहीन पुरुषों और सभी महिलाओं को राजनीतिक अधिकारों से बाहर रखा गया। (यह भी स्वीकार्य: राजनीतिक अधिकार नागरिक होने से नहीं, संपत्ति से जुड़े थे; या, नेपोलियन की संहिता ने मताधिकार सीमित किया और महिलाओं को पिता और पति के अधीन नाबालिग जैसा दर्जा दिया।) — 1 अंक
प्रश्न 2 (3 अंक)
स्पष्ट कीजिए कि उन्नीसवीं सदी के यूरोप में राष्ट्रीय एकता के मुख्य समर्थक कुलीन वर्ग के बजाय नए मध्यवर्ग क्यों बने।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- कुलीन वर्ग छोटा था। उसके सदस्य फ़्रेंच बोलते थे और दूसरे इलाकों के कुलीनों में शादियाँ करते थे, इसलिए उन्हें एक राष्ट्र की चाह नहीं थी।
- औद्योगीकरण से उद्योगपतियों, व्यापारियों और पेशेवरों का नया मध्यवर्ग बना।
- ये शिक्षित उदारवादी कुलीनों के विशेषाधिकारों का अंत और व्यापार के लिए एक राष्ट्रीय बाज़ार चाहते थे, इसलिए राष्ट्रीय एकता के पक्ष में थे।
अंक योजना:
- कुलीन वर्ग एक छोटा वर्ग था, जिसकी जीवन-शैली अलग-अलग इलाकों में एक जैसी थी; वे फ़्रेंच बोलते थे और दूसरे इलाकों के कुलीन परिवारों में शादियाँ करते थे, इसलिए उन्हें एक राष्ट्र की ज़रूरत नहीं लगती थी। — 1 अंक
- औद्योगीकरण से उद्योगपतियों, व्यापारियों और पेशेवर लोगों का नया मध्यवर्ग बना। — 1 अंक
- इन शिक्षित, उदारवादी समूहों में कुलीनों के विशेषाधिकार खत्म करने के साथ राष्ट्रीय एकता का विचार लोकप्रिय हुआ; एक राष्ट्रीय बाज़ार उनके व्यापार के लिए भी फ़ायदेमंद था। (कोई भी भाग स्वीकार्य।) — 1 अंक
प्रश्न 3 (2 अंक)
मेटरनिख ने एक बार कहा था, 'जब फ़्रांस छींकता है, तो बाकी यूरोप को सर्दी-ज़ुकाम हो जाता है।' इसका क्या अर्थ था? 1830 की एक घटना से अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
उनका मतलब था कि फ़्रांस की क्रांति जल्दी ही यूरोप में दूसरी जगह विद्रोह भड़का देती है। 1830 में पेरिस की जुलाई क्रांति से ब्रसेल्स में विद्रोह भड़का और बेल्जियम नीदरलैंड्स के यूनाइटेड किंगडम से अलग हो गया।
अंक योजना:
- अर्थ: फ़्रांस में हुई क्रांति जल्दी ही यूरोप के दूसरे हिस्सों में विद्रोह भड़का देती थी। — 1 अंक
- उदाहरण: 1830 की जुलाई क्रांति, जिसमें बूर्बों राजा को हटाया गया, से ब्रसेल्स में विद्रोह भड़का और बेल्जियम नीदरलैंड्स के यूनाइटेड किंगडम से अलग हो गया। — 1 अंक
प्रश्न 4 (3 अंक)
1815 के बाद यूरोप पर हावी रूढ़िवादियों ने क्रांति के दौर के हर बदलाव को नहीं ठुकराया। स्पष्ट कीजिए कि वे क्या बचाए रखना चाहते थे, क्या स्वीकार करने को तैयार थे और क्यों।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- वे परंपरागत संस्थाएँ बचाए रखना चाहते थे: राजतंत्र, चर्च, सामाजिक ऊँच-नीच, संपत्ति और परिवार।
- उन्होंने आधुनिक सेना, कुशल नौकरशाही, बढ़ती अर्थव्यवस्था और सामंतवाद तथा भूदासत्व की समाप्ति को स्वीकार किया।
- उन्होंने ये बदलाव इसलिए माने क्योंकि उन्हें लगता था कि इनसे राजाओं की ताकत घटेगी नहीं, बल्कि बढ़ेगी।
अंक योजना:
- बचाए रखना: राज्य और समाज की परंपरागत संस्थाएँ, जैसे राजतंत्र, चर्च, सामाजिक ऊँच-नीच, संपत्ति और परिवार। — 1 अंक
- स्वीकार करना: आधुनिक सेना, कुशल नौकरशाही, गतिशील अर्थव्यवस्था और सामंतवाद तथा भूदासत्व की समाप्ति जैसे आधुनिकीकरण के कदम। — 1 अंक
- क्यों: उनका मानना था कि ये बदलाव यूरोप के निरंकुश राजतंत्रों को और मज़बूत बनाएँगे। — 1 अंक
प्रश्न 5 (2 अंक)
ग्रिम बंधुओं का लोककथाओं और जर्मन भाषा पर किया गया काम फ़्रांसीसी शासन के खिलाफ़ संघर्ष का हिस्सा कैसे बना? दो बिंदु लिखिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- ग्रिम बंधु मानते थे कि आम लोगों से जुटाई लोककथाएँ सच्ची जर्मन भावना दिखाती हैं।
- वे फ़्रांसीसी शासन को जर्मन संस्कृति के लिए खतरा मानते थे, इसलिए लोककथाओं और जर्मन शब्दकोश से उन्होंने जर्मन राष्ट्रीय पहचान गढ़ी।
अंक योजना:
- उनका मानना था कि आम लोगों से इकट्ठी की गई लोककथाएँ शुद्ध और सच्ची जर्मन भावना को व्यक्त करती हैं। — 1 अंक
- वे फ़्रांसीसी प्रभुत्व को जर्मन संस्कृति के लिए खतरा मानते थे; लोककथाएँ इकट्ठी करना और जर्मन शब्दकोश तैयार करना उसका विरोध करने और जर्मन राष्ट्रीय पहचान गढ़ने का तरीका था। — 1 अंक
प्रश्न 6 (3 अंक)
कल्पना कीजिए कि 1800 के दशक के आरंभ में फ़्रांसीसी शासन के अधीन किसी जर्मन शहर में एक कपड़ा व्यापारी है। नेपोलियन के शासन में हुए ऐसे तीन बदलाव स्पष्ट कीजिए जिनसे उसका व्यापार आसान हो जाता।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- हर जगह एक जैसे कानून लागू हुए, और नागरिक संहिता ने उसकी संपत्ति की रक्षा की।
- मानक नाप-तौल और साझा मुद्रा से वह दूसरे इलाकों में बिना उलझन के खरीद-बिक्री कर सकता था।
- गिल्ड की पाबंदियाँ हटीं और परिवहन सुधरा, इसलिए वह ज़्यादा खुलकर व्यापार कर सकता था।
अंक योजना:
- कोई तीन, 1-1 अंक: हर जगह एक जैसे कानून, जिनमें नागरिक संहिता ने कानून के सामने बराबरी और संपत्ति के अधिकार की सुरक्षा दी; मानक नाप-तौल; साझा राष्ट्रीय मुद्रा, जिससे सामान और पैसा एक इलाके से दूसरे में आसानी से जा सके; शहरों में गिल्ड की पाबंदियाँ हटीं; परिवहन और संचार में सुधार; सरल प्रशासनिक इकाइयाँ। — 3 अंक
प्रश्न 7 (2 अंक)
उन्नीसवीं सदी के मध्य तक इतालवी राष्ट्र का विचार ज़्यादातर आम इतालवी लोगों तक नहीं पहुँचा था। इसके दो कारण बताइए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- इतालवी भाषा का कोई एक साझा रूप नहीं था; वह कई क्षेत्रीय रूपों में बोली जाती थी।
- ज़्यादातर किसान अनपढ़ और राष्ट्रवाद से अनजान थे। दक्षिण के कुछ किसान 'ला तालिया' को विक्टर इमैनुएल की पत्नी समझते थे।
अंक योजना:
- इतालवी भाषा का कोई एक साझा रूप नहीं था; उसके कई क्षेत्रीय और स्थानीय रूप थे। — 1 अंक
- ज़्यादातर किसान पढ़-लिख नहीं सकते थे और राष्ट्रवादी विचारों से अनजान थे; दक्षिण में गैरीबॉल्डी का साथ देने वाले किसान 'ला तालिया' को विक्टर इमैनुएल की पत्नी समझते थे। (यह भी स्वीकार्य: इटली सात राज्यों में बँटा था और केवल सार्डिनिया-पीडमॉण्ट पर एक इतालवी राजघराने का शासन था।) — 1 अंक
प्रश्न 8 (3 अंक)
हैब्सबर्ग साम्राज्य के भीतर एक राष्ट्र की भावना बनाना कठिन क्यों था? तीन कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- साम्राज्य बहुत अलग-अलग इलाकों से बना था: ऐल्प्स के इलाके, बोहेमिया, और इतालवी भाषी लोम्बार्डी तथा वेनेशिया।
- लोग कई भाषाएँ बोलते थे। हंगरी में आधी आबादी मैग्यार बोलती थी; गैलिशिया के कुलीन पोलिश बोलते थे।
- स्लोवाक, स्लोवेन और क्रोएट जैसे कई किसान समुदाय इसके अधीन थे। उन्हें केवल सम्राट के प्रति निष्ठा जोड़ती थी।
अंक योजना:
- साम्राज्य अलग-अलग इलाकों का जोड़ था: टिरॉल, ऑस्ट्रिया और सुडेटनलैंड जैसे ऐल्प्स के इलाके, बोहेमिया, और इतालवी भाषी लोम्बार्डी तथा वेनेशिया। — 1 अंक
- यहाँ के लोग कई भाषाएँ बोलते थे: हंगरी में आधी आबादी मैग्यार बोलती थी और बाकी दूसरी बोलियाँ; गैलिशिया का कुलीन वर्ग पोलिश बोलता था। — 1 अंक
- इसमें बोहेमियाई, स्लोवाक, स्लोवेन और क्रोएट जैसे कई अधीन किसान समुदाय भी थे, जिनकी कोई साझा संस्कृति नहीं थी; सम्राट के प्रति निष्ठा ही उन्हें जोड़ती थी। — 1 अंक
प्रश्न 9 (2 अंक)
यूरोप में पनपे राष्ट्र-राज्य के विचार ने यूरोपीय शक्तियों के उपनिवेशों में रहने वाले लोगों को कैसे प्रभावित किया? दो बिंदु लिखिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- उपनिवेशों के लोग साम्राज्यवादी शासन का विरोध करने लगे और अपने स्वतंत्र राष्ट्र-राज्य बनाने के लिए लड़े।
- उनकी एकता साम्राज्यवाद के खिलाफ़ संघर्ष से बनी, और हर समाज ने अपना अलग राष्ट्रवाद गढ़ा।
अंक योजना:
- उपनिवेशों के लोग साम्राज्यवादी शासन का विरोध करने लगे; उनके साम्राज्यवाद-विरोधी आंदोलन राष्ट्रवादी थे, क्योंकि वे स्वतंत्र राष्ट्र-राज्य बनाने के लिए लड़ रहे थे। — 1 अंक
- उनकी राष्ट्रीय एकता की भावना साम्राज्यवाद के खिलाफ़ संघर्ष से बनी, और हर समाज ने यूरोप की नकल करने के बजाय अपना खास राष्ट्रवाद विकसित किया। — 1 अंक
प्रश्न 10 (3 अंक)
उन्नीसवीं सदी के फ़्रांस में पढ़ना न जानने वाला गाँव का आदमी भी हफ़्ते में कई बार राष्ट्र के विचार से रूबरू होता था। स्पष्ट कीजिए कि मारियान जैसे नारी रूपकों से यह कैसे संभव हुआ, और कलाकारों ने राष्ट्र को एक महिला के रूप में क्यों दिखाया।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- राष्ट्र दिखता नहीं, इसलिए कलाकारों ने उसे एक महिला के रूप में दिखाया; वह कोई असली महिला नहीं थी।
- मारियान लाल टोपी पहनती थी और तिरंगा तथा कॉकेड लिए थी, जो स्वतंत्रता और गणतंत्र के चिह्न थे।
- उसकी मूर्तियाँ चौकों में लगीं और उसकी छवि सिक्कों और डाक टिकटों पर थी, इसलिए सब उसे अक्सर देखते थे।
अंक योजना:
- राष्ट्र दिखाई नहीं देता, इसलिए कलाकारों ने उसे एक महिला के रूप में दिखाया जिसकी लोग कल्पना कर सकें; वह कोई असली महिला नहीं थी। — 1 अंक
- मारियान के साथ स्वतंत्रता और गणतंत्र के चिह्न थे: लाल टोपी, तिरंगा और कॉकेड। — 1 अंक
- उसकी मूर्तियाँ सार्वजनिक चौकों में लगीं और उसकी छवि सिक्कों और डाक टिकटों पर छपी, इसलिए लोग रोज़ उसे देखते थे और उन्हें राष्ट्रीय एकता की याद आती थी। — 1 अंक
प्रश्न 11 (3 अंक)
रूसी शासन के खिलाफ़ 1831 का पोलिश विद्रोह कुचले जाने के बाद जो पादरी रूसी भाषा में उपदेश देने से इनकार करते थे, उन्हें जेल भेजा गया या साइबेरिया निर्वासित किया गया। स्पष्ट कीजिए कि चर्च में इस्तेमाल होने वाली भाषा राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा क्यों बन गई थी।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- पोलैंड बड़ी शक्तियों में बँट चुका था और उसका अपना राज्य नहीं था, इसलिए उसकी भाषा ने राष्ट्र को जीवित रखा।
- रूसियों ने पोलिश को स्कूलों से निकाल दिया और हर जगह रूसी थोप दी।
- चर्च अपनी सभाओं और शिक्षा में पोलिश का इस्तेमाल करता रहा, इसलिए पोलिश बोलना रूसी शासन का विरोध बन गया।
अंक योजना:
- अठारहवीं सदी के अंत में बड़ी शक्तियों ने पोलैंड को बाँट लिया था और उसका अपना राज्य नहीं था; राष्ट्रीय भावना संगीत और भाषा के सहारे बची रही। — 1 अंक
- रूसी कब्ज़े के बाद पोलिश भाषा को स्कूलों से निकाल दिया गया और हर जगह रूसी थोपी गई, ताकि पोलिश पहचान मिट जाए। — 1 अंक
- पादरी चर्च की सभाओं और धार्मिक शिक्षा में पोलिश का इस्तेमाल करते रहे, इसलिए पोलिश बोलना रूसी शासन के खिलाफ़ संघर्ष का चिह्न बन गया, और शासकों ने इसके लिए पादरियों को सज़ा दी। — 1 अंक
दीर्घ उत्तरीय और स्रोत आधारित प्रश्न
प्रश्न 12 (5 अंक)
जर्मनी और इटली के एकीकरण की तुलना इन पाँच बिंदुओं पर कीजिए: (a) किस राज्य ने नेतृत्व किया, (b) मुख्य नेता, (c) अपनाए गए तरीके, (d) आम लोगों की भूमिका, (e) नए राज्य की घोषणा कब हुई।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
| बिंदु | जर्मनी | इटली |
|---|---|---|
| (a) नेतृत्व करने वाला राज्य | प्रशा | सार्डिनिया-पीडमॉण्ट |
| (b) नेता | प्रमुख मंत्री बिस्मार्क; राजा विलियम प्रथम | राजा विक्टर इमैनुएल द्वितीय; कावूर; गैरीबॉल्डी |
| (c) तरीके | सेना और नौकरशाही; सात साल में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क और फ़्रांस से तीन युद्ध | फ़्रांस से गठबंधन; 1859 में ऑस्ट्रिया की हार; 1860 में गैरीबॉल्डी का दक्षिण-अभियान |
| (d) आम लोग | भूमिका कम: एकता ऊपर से आई | मेत्सिनी के विद्रोह (1831, 1848) असफल; बाद में गैरीबॉल्डी के स्वयंसेवकों और दक्षिण के किसानों ने स्पेनी शासकों को भगाया |
| (e) घोषणा | वर्साय, जनवरी 1871: विलियम प्रथम जर्मनी का सम्राट | 1861: विक्टर इमैनुएल द्वितीय संयुक्त इटली का राजा |
अंक योजना:
- (a) जर्मनी: प्रशा। इटली: सार्डिनिया-पीडमॉण्ट। (तालिका के बजाय बिंदुओं में लिखा उत्तर भी पूरे अंक पाएगा।) — 1 अंक
- (b) जर्मनी: प्रमुख मंत्री ऑटो वॉन बिस्मार्क और राजा विलियम प्रथम। इटली: राजा विक्टर इमैनुएल द्वितीय, प्रमुख मंत्री कावूर और गैरीबॉल्डी। — 1 अंक
- (c) जर्मनी: प्रशा की सेना और नौकरशाही; सात साल में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क और फ़्रांस से तीन युद्ध। इटली: कावूर का फ़्रांस से गठबंधन, 1859 में ऑस्ट्रिया की हार और 1860 में गैरीबॉल्डी का दक्षिण की ओर कूच। — 1 अंक
- (d) जर्मनी: एकीकरण ऊपर से हुआ, लोगों की भूमिका बहुत कम थी। इटली: 1831 और 1848 में मेत्सिनी के विद्रोह असफल रहे थे; बाद में गैरीबॉल्डी के हथियारबंद स्वयंसेवकों और दक्षिण के किसानों ने स्पेनी बूर्बों शासकों को भगाने में मदद की। — 1 अंक
- (e) जर्मनी: जनवरी 1871 में वर्साय में विलियम प्रथम जर्मनी का सम्राट घोषित हुआ। इटली: 1861 में विक्टर इमैनुएल द्वितीय संयुक्त इटली का राजा घोषित हुआ। — 1 अंक
अथवा
स्पष्ट कीजिए कि यूनान का स्वतंत्रता संग्राम (1821-1832) उन्नीसवीं सदी के आरंभ के यूरोप में संस्कृति और राष्ट्रवाद के विकास के गहरे संबंध को कैसे दिखाता है।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- यूनान पंद्रहवीं सदी से ऑटोमन शासन में था। क्रांतिकारी राष्ट्रवाद से 1821 में उसका स्वतंत्रता संग्राम शुरू हुआ।
- निर्वासन में रह रहे यूनानियों और प्राचीन यूनानी संस्कृति के प्रशंसक कई पश्चिमी यूरोपीय लोगों ने राष्ट्रवादियों की मदद की।
- कवियों और कलाकारों ने यूनान को यूरोपीय सभ्यता का पालना कहा और एक मुस्लिम साम्राज्य के खिलाफ़ उसके संघर्ष के लिए समर्थन जुटाया।
- लॉर्ड बायरन ने धन जुटाया, लड़ने गए और 1824 में बुखार से उनकी मृत्यु हुई।
- कुस्तुनतुनिया की संधि (1832) से यूनान स्वतंत्र हुआ। कविता, कला और साझे अतीत ने एक स्थानीय विद्रोह को पूरे यूरोप का मुद्दा बना दिया था।
अंक योजना:
- यूनान पंद्रहवीं सदी से ऑटोमन साम्राज्य का हिस्सा था; क्रांतिकारी राष्ट्रवाद के फैलने से 1821 में उसका स्वतंत्रता संग्राम शुरू हुआ। — 1 अंक
- यूनानी राष्ट्रवादियों को निर्वासन में रह रहे यूनानियों और प्राचीन यूनानी संस्कृति के प्रशंसक कई पश्चिमी यूरोपीय लोगों से मदद मिली। — 1 अंक
- कवियों और कलाकारों ने यूनान को यूरोपीय सभ्यता का पालना बताकर सराहा और एक मुस्लिम साम्राज्य के खिलाफ़ उसके संघर्ष के लिए जनमत तैयार किया। — 1 अंक
- अंग्रेज़ कवि लॉर्ड बायरन ने धन जुटाया और युद्ध लड़ने गए, जहाँ 1824 में बुखार से उनकी मृत्यु हो गई। — 1 अंक
- कुस्तुनतुनिया की संधि (1832) ने यूनान को स्वतंत्र राष्ट्र माना; इस युद्ध ने दिखाया कि कविता, कला और साझा सांस्कृतिक अतीत एक स्थानीय विद्रोह को पूरे यूरोप का मुद्दा बना सकते हैं। — 1 अंक
प्रश्न 13 (5 अंक)
1848 में यूरोप दो अलग तरह के विद्रोहों से हिल गया: पेरिस में गरीबों का विद्रोह और जर्मन राज्यों में उदारवादी मध्यवर्ग की क्रांति। स्पष्ट कीजिए कि हर समूह क्या चाहता था और उसके प्रयास का क्या नतीजा निकला।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- पेरिस में भोजन की कमी और बेरोज़गारी से लोग सड़कों पर उतरे। बैरिकेड खड़े हुए और लुई फ़िलिप भाग गया।
- गणतंत्र घोषित हुआ। 21 वर्ष से ऊपर के सभी पुरुषों को वोट मिला, काम के अधिकार का वादा हुआ और राष्ट्रीय कार्यशालाएँ खुलीं।
- जर्मन राज्यों, इटली और पोलैंड में उदारवादी मध्यवर्ग संविधान, संसद, प्रेस और संगठन की आज़ादी वाला राष्ट्र-राज्य चाहता था।
- मई 1848 में 831 निर्वाचित सदस्य फ्रैंकफ़र्ट संसद में मिले और जर्मन राष्ट्र का संविधान बनाया।
- यह असफल रहा। प्रशा के राजा ने ताज ठुकराया, कुलीनों और सेना ने विरोध किया, मज़दूरों ने समर्थन वापस लिया और सैनिकों ने सभा भंग कर दी।
अंक योजना:
- पेरिस: भोजन की कमी और व्यापक बेरोज़गारी से लोग सड़कों पर आ गए; बैरिकेड खड़े हुए और लुई फ़िलिप को भागना पड़ा। — 1 अंक
- गणतंत्र घोषित हुआ; 21 वर्ष से ऊपर के सभी वयस्क पुरुषों को वोट मिला; काम के अधिकार का वादा हुआ और राष्ट्रीय कार्यशालाएँ खुलीं। — 1 अंक
- उदारवादी मध्यवर्ग (जर्मनी, इटली, पोलैंड और ऑस्ट्रो-हंगरी साम्राज्य में) ने संविधान की माँग को राष्ट्रीय एकता से जोड़ा: संसदीय सिद्धांतों पर बना राष्ट्र-राज्य, प्रेस की आज़ादी और संगठन बनाने की आज़ादी। — 1 अंक
- जर्मन राज्यों में 831 निर्वाचित प्रतिनिधि मई 1848 में सेंट पॉल चर्च में फ्रैंकफ़र्ट संसद के रूप में मिले और संसद के प्रति जवाबदेह राजतंत्र वाले जर्मन राष्ट्र का संविधान बनाया। — 1 अंक
- यह असफल रहा: फ़्रेडरिक विल्हेम चतुर्थ ने ताज ठुकराया, कुलीन वर्ग और सेना ने सभा का विरोध किया, मज़दूरों और कारीगरों की माँगें न मानने से मध्यवर्गीय सदस्यों ने उनका समर्थन खो दिया, और सैनिकों ने सभा भंग कर दी। — 1 अंक
अथवा
यूनियन जैक पुराने जनों के क्रॉस-चिह्नों को एक झंडे में जोड़ता है। स्पष्ट कीजिए कि 1688 से 1801 के बीच ब्रिटिश राष्ट्र के निर्माण पर इंग्लैंड का दबदबा कैसे बना, और स्कॉटलैंड तथा आयरलैंड के लोगों के लिए इसका क्या अर्थ था।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- 1700 से पहले कोई ब्रिटिश राष्ट्र नहीं था। अंग्रेज़, वेल्श, स्कॉट और आयरिश लोगों की अपनी संस्कृतियाँ थीं।
- इंग्लैंड अमीर और ताकतवर बना। 1688 के बाद उसकी संसद के हाथ में सत्ता आई और उसने इंग्लैंड को केंद्र में रखकर राष्ट्र-राज्य बनाया।
- ऐक्ट ऑफ़ यूनियन (1707) से स्कॉटलैंड इंग्लैंड से जुड़ा, और स्कॉटलैंड की संस्कृति और संस्थाएँ दबा दी गईं।
- पहाड़ी इलाकों के स्कॉट लोगों को गेलिक बोलने और राष्ट्रीय पोशाक पहनने से रोका गया, और बहुतों को उनकी ज़मीन से खदेड़ा गया।
- आयरलैंड में अंग्रेज़ों ने प्रोटेस्टेंटों का साथ दिया। 1798 का विद्रोह असफल होने के बाद 1801 में आयरलैंड को ज़बरदस्ती यूनियन में मिलाया गया। अंग्रेज़ी भाषा, यूनियन जैक और राष्ट्रगान ब्रिटेन के प्रतीक बने।
अंक योजना:
- अठारहवीं सदी से पहले कोई ब्रिटिश राष्ट्र नहीं था; अंग्रेज़, वेल्श, स्कॉट और आयरिश लोगों की अपनी-अपनी संस्कृति और राजनीति थी। — 1 अंक
- अंग्रेज़ राष्ट्र की दौलत और ताकत बढ़ी; 1688 में राजतंत्र से सत्ता छीनने वाली उसकी संसद इंग्लैंड को केंद्र में रखकर राष्ट्र-राज्य बनाने का साधन बनी। — 1 अंक
- ऐक्ट ऑफ़ यूनियन (1707) से इंग्लैंड और स्कॉटलैंड मिलकर यूनाइटेड किंगडम ऑफ़ ग्रेट ब्रिटेन बने; इंग्लैंड का दबदबा रहा और स्कॉटलैंड की अपनी संस्कृति और संस्थाएँ दबा दी गईं। — 1 अंक
- स्कॉटलैंड के पहाड़ी इलाकों के लोगों को गेलिक भाषा बोलने और अपनी राष्ट्रीय पोशाक पहनने से रोका गया, और बहुत-से लोगों को उनकी ज़मीन से खदेड़ दिया गया। — 1 अंक
- आयरलैंड कैथलिकों और प्रोटेस्टेंटों में बँटा था, और अंग्रेज़ों ने प्रोटेस्टेंटों का दबदबा बनाने में साथ दिया; 1798 में वुल्फ़ टोन का विद्रोह असफल होने के बाद 1801 में उसे ज़बरदस्ती यूनाइटेड किंगडम में मिला लिया गया। अंग्रेज़ी भाषा, यूनियन जैक और राष्ट्रगान के ज़रिए एक नई ब्रिटिश संस्कृति फैलाई गई। — 1 अंक
प्रश्न 14 (4 अंक)
नीचे दिए गए स्रोत को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
राष्ट्र किससे बनता है?
1882 में फ़्रांसीसी विचारक अर्न्स्ट रेनन ने पेरिस के सॉरबोन विश्वविद्यालय में एक ऐसे प्रश्न पर भाषण दिया, जो उस समय बहुत-से यूरोपीय पूछ रहे थे: राष्ट्र क्या है? उन्होंने अपने समय के आम उत्तरों को किनारे रख दिया। उनके अनुसार कोई राष्ट्र केवल इसलिए नहीं बनता कि लोग एक भाषा बोलते हैं, एक नस्ल के हैं या एक धर्म मानते हैं; ज़मीन की बनावट भी राष्ट्र नहीं बनाती।
रेनन के लिए राष्ट्र प्रयासों, त्याग और निष्ठा के लंबे साझा अतीत से बनता है। जो लोग मिलकर किए गए बड़े कामों और साथ झेले गए कठिन समय को याद रखते हैं और एक जैसे नायकों का सम्मान करते हैं, वे एक-दूसरे से जुड़ाव महसूस करते हैं। उतना ही ज़रूरी है वर्तमान: साथ रहते रहने की इच्छा। उन्होंने राष्ट्र के जीवन की तुलना ऐसे मतदान से की जिसे लोग हर दिन नए सिरे से करते हैं, यानी रोज़ का जनमत संग्रह। उन्होंने यह भी कहा कि किसी राष्ट्र का किसी दूसरे देश को उसकी इच्छा के विरुद्ध अपने कब्ज़े में रखने में कोई सच्चा हित नहीं होता। वे राष्ट्रों को ज़रूरी मानते थे, क्योंकि एक ही कानून और एक ही शासक वाली दुनिया में स्वतंत्रता के लिए कोई जगह नहीं बचती।
(a) रेनन के अनुसार कौन-सी विशेषताएँ अपने-आप में राष्ट्र नहीं बनातीं? कोई दो बताइए। (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
साझी भाषा और साझा धर्म अपने-आप में राष्ट्र नहीं बनाते।
अंक योजना:
- कोई दो: साझी भाषा; नस्ल; धर्म; भू-भाग (ज़मीन की बनावट)। (0.5 + 0.5) — 1 अंक
(b) रेनन ने राष्ट्र के जीवन की तुलना 'रोज़ के जनमत संग्रह' से क्यों की? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
जनमत संग्रह लोगों का सीधा मतदान है। राष्ट्र तभी तक टिकता है जब तक उसके लोग हर दिन साथ रहना चुनते रहते हैं।
अंक योजना:
- जनमत संग्रह लोगों का सीधा मतदान है; राष्ट्र तभी तक जीवित रहता है जब तक उसके लोग अपनी इच्छा से साथ रहने के लिए सहमत रहते हैं। — 1 अंक
(c) स्पष्ट कीजिए कि लोगों की इच्छा पर टिका रेनन का राष्ट्र का विचार उन्नीसवीं सदी के उदारवादी राष्ट्रवादियों के अनुकूल क्यों था। दो बिंदु दीजिए। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- उदारवादी निरंकुश शासन नहीं, लोगों की सहमति से चलने वाली सरकार चाहते थे। लोगों की इच्छा पर बना राष्ट्र इससे मेल खाता है।
- उदारवादी व्यक्ति की आज़ादी को महत्व देते थे, और रेनन राष्ट्रों को स्वतंत्रता की गारंटी मानते थे।
अंक योजना:
- उदारवादी सहमति से चलने वाली सरकार के पक्षधर थे; लोगों की इच्छा पर टिका राष्ट्र इसी विचार से मेल खाता है और निरंकुश शासक या जन्म के आधार पर शासन को नकारता है। — 1 अंक
- उदारवादी व्यक्ति की आज़ादी को महत्व देते थे; रेनन राष्ट्रों को स्वतंत्रता की गारंटी मानते थे और किसी जनसमूह को उसकी इच्छा के विरुद्ध अधीन रखने के खिलाफ़ थे। — 1 अंक
अथवा
(c) 1871 में जर्मनी ने फ़्रांस से अल्सास छीन लिया। वहाँ बहुत-से लोग जर्मन की एक बोली बोलते थे, फिर भी उनमें से बड़ी संख्या फ़्रांस के साथ रहना चाहती थी। स्रोत के आधार पर दो बिंदुओं में बताइए कि रेनन इस कब्ज़े को किस नज़र से देखते। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- रेनन के लिए भाषा राष्ट्र तय नहीं करती, इसलिए जर्मन बोली से अल्सास जर्मन नहीं बन जाता।
- राष्ट्र लोगों की इच्छा पर टिका है। लोगों की मर्ज़ी के खिलाफ़ अल्सास को रखना उनकी नज़र में गलत होता।
अंक योजना:
- भाषा से राष्ट्र नहीं बनता, इसलिए जर्मन बोली बोलने से अल्सास के लोग जर्मन राष्ट्र का हिस्सा नहीं बन जाते। — 1 अंक
- राष्ट्र लोगों की साथ रहने की इच्छा पर टिका है, और किसी राष्ट्र का किसी इलाके को उसकी इच्छा के विरुद्ध रखने में सच्चा हित नहीं होता; इसलिए लोगों की सहमति के बिना किया गया कब्ज़ा उनकी नज़र में गलत होता। — 1 अंक
प्रश्न 15 (4 अंक)
नीचे दिए गए स्रोत को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
संग्रहालय का परिचय-पट: 1848 का एक सपना
फ़्रेड्रिक सॉरयू (फ़्रांसीसी), 'जनतांत्रिक और सामाजिक गणराज्यों' की दुनिया पर चार चित्रों में से पहला, 1848
पहले भीड़ को देखिए, मूर्ति को नहीं। कई देशों के स्त्री-पुरुष साथ चल रहे हैं, हर समूह अपने झंडे के पीछे है, पर उनके आगे कोई राजा, पादरी या सेनापति नहीं है। चित्रकार यही कहना चाहता है: उसके सपनों के भविष्य में राष्ट्र अपने लोगों से बनेंगे। कुछ समूह स्वतंत्रता की आकृति से आगे निकल चुके हैं, जबकि कुछ अभी बहुत पीछे हैं, मानो हर राष्ट्र को अपने समय पर पहुँचना है। उसके पैरों के पास राजाओं के टूटे हुए चिह्न पड़े हैं।
सॉरयू ने ये चित्र उस साल बनाए जब पेरिस, बर्लिन, वियना और मिलान में विद्रोह भड़के थे। कुछ ही महीनों में इनमें से ज़्यादातर विद्रोह कुचल दिए गए। यह चित्र किसी घटना का ब्योरा नहीं, एक आशा है।
(a) परिचय-पट के अनुसार जुलूस के आगे कौन नहीं है, और इससे क्या पता चलता है कि सॉरयू के विचार में राष्ट्र कैसे बनेंगे? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
भीड़ के आगे कोई राजा, पादरी या सेनापति नहीं है। सॉरयू मानता था कि राष्ट्र अपने लोगों से बनेंगे।
अंक योजना:
- आगे कोई राजा, पादरी या सेनापति नहीं है (0.5); राष्ट्र अपने लोगों से बनेंगे (0.5)। — 1 अंक
(b) परिचय-पट यह क्यों कहता है कि चित्र 'किसी घटना का ब्योरा नहीं, एक आशा है'? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
1848 के ज़्यादातर विद्रोह कुछ ही महीनों में कुचल दिए गए, इसलिए दिखाए गए स्वतंत्र राष्ट्र अभी बने नहीं थे।
अंक योजना:
- 1848 के ज़्यादातर विद्रोह कुछ ही महीनों में कुचल दिए गए, इसलिए चित्र में दिखाए गए स्वतंत्र राष्ट्र अभी बने नहीं थे। — 1 अंक
(c) चित्र में कई राष्ट्र शांति से साथ चलते दिखते हैं। स्पष्ट कीजिए कि 1871 के बाद यूरोप का राष्ट्रवाद किन दो तरीकों से इससे अलग निकला। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- राष्ट्रवादी समूह एक-दूसरे के दुश्मन बन गए। बाल्कन में हर राज्य पड़ोसियों की कीमत पर ज़मीन चाहता था।
- बड़ी शक्तियों ने इन राष्ट्रीय आकांक्षाओं का इस्तेमाल अपने साम्राज्यों के लिए किया, और उनकी होड़ का अंत 1914 के पहले विश्वयुद्ध में हुआ।
अंक योजना:
- राष्ट्रवादी समूह एक-दूसरे के प्रति असहिष्णु और युद्ध के लिए तैयार हो गए; बाल्कन में हर नया राज्य पड़ोसियों की कीमत पर ज़मीन चाहता था। — 1 अंक
- बड़ी शक्तियों ने अधीन लोगों की राष्ट्रीय आकांक्षाओं का इस्तेमाल अपने साम्राज्यवादी लक्ष्यों के लिए किया, और उनकी होड़ से कई युद्ध हुए और अंत में 1914 में पहला विश्वयुद्ध हुआ। — 1 अंक
अथवा
(c) 1848 में कोई रूढ़िवादी सरकार इस चित्र पर रोक क्यों लगाना चाहती? दो कारण सुझाइए। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- इसमें राजाओं के चिह्न टूटे हैं और लोगों के आगे कोई शासक नहीं है, इसलिए यह राजतंत्र पर चोट करता है।
- यह विचार फैलाता है कि राष्ट्र अपने लोगों के हैं, जिससे और विद्रोह भड़क सकते थे।
अंक योजना:
- इसमें राजाओं के चिह्न टूटे पड़े हैं और लोगों के आगे कोई शासक नहीं है, इसलिए यह राजतंत्र पर ही चोट करता है। — 1 अंक
- यह उदारवादी विचार फैलाता है कि राष्ट्र अपने लोगों के हैं, जिससे और विद्रोह भड़क सकते थे। (यह भी स्वीकार्य: यह स्वतंत्रता का गुणगान करता है, जिसे रूढ़िवादी सेंसरशिप दबाना चाहती थी।) — 1 अंक