अध्याय सारांश

यह भाग सम्पूर्ण अध्याय 2 — वन एवं वन्य जीव संसाधन का संक्षिप्त पुनरावलोकन है। इसका उपयोग बोर्ड परीक्षा से पहले अंतिम समय की पुनरावृत्ति के लिए करें।

जैव विविधता में भारत विश्व के सबसे समृद्ध देशों में से एक है — यह सभी जीवित जीवों की विविधता है, जो एक पारिस्थितिकी तंत्र में परस्पर निर्भर हैं, जिसमें वन प्राथमिक उत्पादक हैं। परंतु लगभग 10% वन्य वनस्पति और 20% स्तनधारी मुख्यतः मानवीय असंवेदनशीलता के कारण संकटग्रस्त हैं।

प्रजातियाँ और कारण — एक नज़र में

प्रजातियों की श्रेणी अर्थ / उदाहरण
सामान्य जनसंख्या सुरक्षित स्तर पर (मवेशी, साल, चीड़)
संकटग्रस्त विलुप्ति के संकट में (काला हिरण, भारतीय गैंडा)
सुभेद्य घटती हुई, संकटग्रस्त हो सकती है (एशियाई हाथी)
दुर्लभ छोटी जनसंख्या (मरु लोमड़ी, धनेश)
स्थानिक केवल एक क्षेत्र में पाई जाती है (अंडमान टील)
विलुप्त अब नहीं पाई जाती (एशियाई चीता)

ह्रास के कारण: औपनिवेशिक वानिकी, कृषि विस्तार (26,000+ वर्ग किमी, 1951-80), समृद्ध रोपण, बड़ी परियोजनाएँ (नर्मदा सागर ~40,000 हेक्टेयर), खनन (बक्सा), स्थानांतरी कृषि, और असमान 'कुछ लोगों का लोभ' युक्त उपयोग।

संरक्षण ढाँचा

  • वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 — आवासों की रक्षा, अखिल भारतीय संरक्षित-प्रजाति सूची, शिकार पर प्रतिबंध, व्यापार पर प्रतिबंध।
  • प्रोजेक्ट टाइगर, 1973 — बाघ ~55,000 से घटकर 1,827; अभयारण्यों में कॉर्बेट, सुंदरवन, बांधवगढ़, सरिस्का, मानस, पेरियार शामिल हैं।
  • प्रजाति परियोजनाएँ: एक-सींग वाला गैंडा, कश्मीरी बारहसिंगा (हंगुल), मगरमच्छ, एशियाई शेर; हाल ही में हाथी, काला हिरण, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, हिम तेंदुआ। 1991: पौधे जोड़े गए (6 प्रजातियाँ)।
  • केस अध्ययन: हिमालयन यव (टैक्सोल, कैंसर-रोधी; अति-दोहित) · एशियाई चीता (भारत में विलुप्त, 1952)।

वन और सामुदायिक संरक्षण

  • वनों के प्रकार: आरक्षित (>आधे; सर्वाधिक मूल्यवान) · रक्षित (~एक-तिहाई; आगे के ह्रास से) · अवर्गीकृत (अन्य, पूर्वोत्तर राज्यों और गुजरात में समुदाय-प्रबंधित)। आरक्षित + रक्षित = स्थायी वन संपदा; मध्य प्रदेश सबसे बड़ा (~75%)।
  • समुदाय और संरक्षण: सरिस्का (खनन-विरोधी), अलवर भैरोदेव डाकव 'सोंचुरी', चिपको आंदोलन, बिश्नोई (काला हिरण), पवित्र उपवन (महुआ, कदंब, इमली, आम, पीपल, बरगद), बीज बचाओ आंदोलन / नवदान्य
  • संयुक्त वन प्रबंधन (JFM): 1988 (ओडिशा) से; ग्राम संस्थाएँ गैर-इमारती उपज और इमारती लकड़ी में हिस्से के लिए क्षरित वन की रक्षा करती हैं। संरक्षण जन-केंद्रित, पर्यावरण-हितैषी और आर्थिक रूप से लाभकारी होना चाहिए।

त्वरित पुनरावृत्ति — अवश्य जानने योग्य तथ्य

  • वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम — 1972; प्रोजेक्ट टाइगर — 1973; JFM पहला प्रस्ताव — ओडिशा, 1988; संरक्षित सूची में पौधे जोड़े गए — 1991।
  • बाघ: ~55,000 → 1,827। भारत + नेपाल = विश्व के लगभग दो-तिहाई बाघ।
  • आरक्षित > आधे; रक्षित ~ एक-तिहाई; मध्य प्रदेश स्थायी वन ~75%।
  • टैक्सोल → हिमालयन यव → कैंसर-रोधी। एशियाई चीता → भारत में विलुप्त, 1952।

त्वरित पुनरावृत्ति — प्रायः भ्रमित करने वाले बिंदु

  • संकटग्रस्त = विलुप्ति के संकट में; विलुप्त = पहले ही समाप्त; स्थानिक = केवल एक क्षेत्र में पाई जाती है।
  • आरक्षित वन = सर्वाधिक मूल्यवान; रक्षित वन = आगे के ह्रास से सुरक्षित; अवर्गीकृत = अन्य (सरकारी/निजी/सामुदायिक)।
  • चिपको = वनोन्मूलन का विरोध; बिश्नोई = जंतुओं की रक्षा; पवित्र उपवन = मान्यता द्वारा संरक्षित कुँवारे वन; JFM = क्षरित वनों पर सामुदायिक भागीदारी।