जैव विविधता खोने का प्रभाव
वनों और वन्यजीवों की हानि केवल एक पर्यावरणीय समस्या नहीं है — यह एक सामाजिक और आर्थिक समस्या भी है। जब जैव विविधता घटती है:
- पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ जाता है — परस्पर निर्भर जीवन का जाल टूटने लगता है।
- जैव विविधता की हानि सांस्कृतिक विविधता की हानि से गहराई से जुड़ी है, क्योंकि अनेक समुदायों के जीवन के तरीके, मान्यताएँ और ज्ञान विशेष पौधों, जंतुओं और वनों से बँधे होते हैं।

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:
| English (in image) | हिन्दी |
|---|---|
| Himalayan Yew | हिमालयी यू (टैक्सस) |
| Taxol - anti-cancer drug | टैक्सॉल - कैंसर-रोधी औषधि |
| Over-exploited, trees dying | अति-दोहन, वृक्ष मर रहे |
| Asiatic Cheetah | एशियाई चीता |
| World's fastest land animal | विश्व का सबसे तेज़ स्थलीय प्राणी |
| Extinct in India, 1952 | भारत में विलुप्त, 1952 |
सबसे अधिक कौन भुगतता है?
पर्यावरणीय विनाश का प्रभाव समान रूप से नहीं बँटता:
- सबसे गरीब और वनों पर सर्वाधिक निर्भर समुदाय सबसे अधिक भुगतते हैं, क्योंकि वे भोजन, ईंधन, चारा, औषधि और आजीविका के लिए सीधे वनों पर निर्भर रहते हैं।
- महिलाएँ प्रायः सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। अधिकांश ग्रामीण समाजों में महिलाएँ ईंधन, चारा, पानी और अन्य वन उपज एकत्र करने के लिए ज़िम्मेदार होती हैं। जैसे-जैसे वन सिकुड़ते हैं, उन्हें अधिक मेहनत करनी पड़ती है और अधिक दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे उनका स्वास्थ्य प्रभावित होता है और अन्य कार्यों के लिए कम समय बचता है।
मुख्य बिंदु: जो लोग जैव विविधता की हानि में सबसे कम योगदान देते हैं — गरीब और महिलाएँ — प्रायः इसका सबसे भारी बोझ उठाते हैं।
केस अध्ययन 1 — संकट में हिमालयी यव
हिमालयी यव (Taxus wallichiana) हिमालय में पाया जाने वाला एक औषधीय पौधा है। इसकी छाल, पत्तियों, टहनियों और जड़ों से टैक्सोल (Taxol) नामक एक रासायनिक यौगिक निकाला जाता है — और यह विश्व की सबसे सफल कैंसर-रोधी औषधियों में से एक है।
इस भारी चिकित्सीय माँग के कारण यव का अति-दोहन हुआ है। हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश में हजारों पेड़ मरते हुए पाए गए हैं — यह इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि व्यावसायिक दबाव किस प्रकार एक मूल्यवान प्रजाति को भी विलुप्ति की ओर धकेल सकता है।
केस अध्ययन 2 — एशियाई चीता
एशियाई चीता (Acinonyx jubatus venaticus) विश्व का सबसे तेज़ दौड़ने वाला स्थलीय जंतु है, जो छोटी दूरी में 100 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति से दौड़ सकता है।
- भारत में चीते का खेल और शिकार-सहायता (कोर्सिंग) के लिए भारी शिकार किया गया (हिरणों का पीछा करने के लिए इसका उपयोग), और इसका आवास नष्ट कर दिया गया।
- परिणामस्वरूप, चीते को 1952 में भारत में विलुप्त घोषित कर दिया गया — यह इस बात का उल्लेखनीय उदाहरण है कि मानव गतिविधि कितनी तेज़ी से किसी प्रजाति को पूरे देश से समाप्त कर सकती है।
प्रश्न और उत्तर
प्र1. जैव विविधता की हानि सांस्कृतिक विविधता की हानि से कैसे जुड़ी है?
उत्तर: अनेक समुदायों की जीवनशैली, मान्यताएँ, त्योहार, औषधियाँ और पारंपरिक ज्ञान विशेष पौधों, जंतुओं और वनों के इर्द-गिर्द निर्मित होते हैं। जब ये प्रजातियाँ और वन नष्ट होते हैं, तो उनसे जुड़ी सांस्कृतिक प्रथाएँ और ज्ञान भी लुप्त हो जाते हैं। इस प्रकार जैव विविधता की हानि प्रायः सांस्कृतिक विविधता की हानि के साथ-साथ चलती है।
प्र2. वनों के ह्रास से गरीब और महिलाएँ सबसे अधिक क्यों भुगतते हैं?
उत्तर: गरीब भोजन, ईंधन, चारा, औषधि और आजीविका के लिए सीधे वनों पर निर्भर रहते हैं, इसलिए वनों की हानि उन्हें सबसे अधिक प्रभावित करती है। महिलाएँ, जो मुख्यतः ईंधन, चारा और पानी एकत्र करने के लिए ज़िम्मेदार होती हैं, को वन सिकुड़ने पर अधिक मेहनत करनी पड़ती है और अधिक दूरी तय करनी पड़ती है। इससे उनका स्वास्थ्य बिगड़ता है और अन्य कार्यों के लिए कम समय बचता है, जिससे वे सबसे अधिक प्रभावित होती हैं।
प्र3. हिमालयी यव पर एक टिप्पणी लिखिए और यह संकटग्रस्त क्यों है।
उत्तर: हिमालयी यव (Taxus wallichiana) हिमालय का एक औषधीय पौधा है। इसकी छाल, पत्तियों, टहनियों और जड़ों से निकाला जाने वाला टैक्सोल (Taxol) नामक रसायन एक अत्यंत सफल कैंसर-रोधी औषधि है। इस भारी चिकित्सीय माँग के कारण यव का अति-दोहन हुआ है, और हिमाचल प्रदेश तथा अरुणाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में पेड़ मरते हुए पाए गए हैं।
प्र4. भारत में एशियाई चीते के साथ क्या हुआ?
उत्तर: एशियाई चीता, जो विश्व का सबसे तेज़ दौड़ने वाला स्थलीय जंतु है, का भारत में खेल और शिकार-सहायता (कोर्सिंग) के लिए शिकार किया गया और इसका आवास नष्ट हो गया। निरंतर शिकार और आवास विनाश के परिणामस्वरूप इसे 1952 में भारत में विलुप्त घोषित कर दिया गया — यह मानव गतिविधि द्वारा किसी प्रजाति को पूरे देश से समाप्त कर देने का एक उदाहरण है।