त्वरित पुनरावृत्ति: शेर-सार सारणी

शेर प्रतीक/भाव संदेश
प्रथम (मतला) पीर पर्वत-सी, हिमालय-गंगा संचित पीड़ा से क्रांतिकारी परिवर्तन निकलना चाहिए
द्वितीय दीवार बनाम बुनियाद सतही नहीं, मूलभूत परिवर्तन आवश्यक है
तृतीय हाथ लहराती लाश निष्क्रिय, हताश जनता का सक्रिय जागरण
चतुर्थ हंगामा बनाम सूरत बदलना उद्देश्यपूर्ण, वास्तविक परिवर्तन ही लक्ष्य है
पंचम (मक्ता) आग क्रांति की चेतना कहीं भी जगे, पर जगनी अवश्य चाहिए

रचयिता: दुष्यन्त कुमार | संग्रह: साए में धूप | काव्य-विधा: गज़ल | प्रधान रस: वीर रस/विद्रोह-भावना

[Exam Tip] संदर्भ भाव स्पष्टीकरण हेतु सबसे अधिक पूछे जाने वाले शेर हैं — 'आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी…' तथा 'सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं…' — इनकी व्याख्या अवश्य याद रखें। यह पद्य भाग (आधुनिक कविता) का अंतिम पाठ है।