एक-वाक्य/वाक्यांश में उत्तर (1 अंक)

ब्लूप्रिंट में इस पाठ से प्रायः एक-वाक्य उत्तरीय प्रश्न (MCQ/VSA प्रकार) पूछे जाते हैं। ये सीधे पाठ की घटनाओं पर आधारित हैं — उत्तर संक्षिप्त और सटीक होना चाहिए।

  1. सीधे-सादे किसान धन आते ही किस ओर झुकते हैं? उत्तर: धर्म और कीर्ति की ओर।

  2. कानूनगो इलाके में आते तो किसके चौपाल में ठहरते थे? उत्तर: सुजान महतो के चौपाल में।

  3. सुजान ने गाँव में क्या बनवाया? उत्तर: एक पक्का कुआँ।

  4. सुजान की पत्नी का नाम क्या है? उत्तर: बुलाकी।

  5. सुजान के बड़े बेटे का नाम लिखिए। उत्तर: भोला।

  6. सुजान के छोटे बेटे का नाम क्या है? उत्तर: शंकर।

  7. कौन द्वार पर आकर चिल्लाने लगा? उत्तर: एक भिखमंगा (भिक्षुक)।

  8. बुढ़ापे में आदमी की क्या मारी जाती है? उत्तर: बुद्धि।

  9. घर में किसका राज होता है? उत्तर: जो कमाता है, उसी का।

  10. कटिया का ढेर देखकर कौन दंग रह गयी? उत्तर: बुलाकी।

  11. सुजान की गोद में सिर रखे किन्हें अकथनीय सुख मिल रहा था? उत्तर: बैलों को।

  12. भिक्षुक के गाँव का नाम लिखिए। उत्तर: अमोला।

लघु-उत्तरीय प्रश्न (2/3 अंक)

प्रश्न 1: सुजान महतो की संपत्ति बढ़ी तो वह क्या करने लगा?

उत्तर: संपत्ति बढ़ने पर सुजान धर्म-कर्म की ओर झुक गया। उसने साधु-संतों का आदर-सत्कार करना शुरू किया, द्वार पर धूनी जलने लगी, भजन-भाव होने लगा, और उसने पत्नी सहित गया जाकर तीर्थ-यात्रा भी की, जिसके बाद यज्ञ व ब्रह्मभोज का बड़ा आयोजन किया। इसी कारण वह गाँव में 'सुजान भगत' कहलाने लगा।

प्रश्न 2: घर में सुजान भगत का अनादर कैसे हुआ?

उत्तर: जब एक भिखारी द्वार पर भीख माँगने आया और सुजान उसे अनाज देने लगा, तो बड़े बेटे भोला ने उसके हाथ से छबड़ी छीन ली और कठोर स्वर में डाँटा — 'सेंत का माल नहीं है, जो लुटाने चले हो।' इस तरह अपने ही घर में, अपने ही कमाए धन पर दान देने के अधिकार से भी सुजान को वंचित कर दिया गया — यही उसका सबसे बड़ा अनादर था।

प्रश्न 3: सुजान भगत पेड़ के नीचे बैठकर क्या सोचता है?

उत्तर: सुजान सोचता है कि वह न तो अपाहिज है, न ही उसके हाथ-पाँव थके हैं — वह अब भी घर के लिए काम करता है। फिर भी उसका इतना अनादर हुआ। उसे याद आता है कि यह पूरा घर उसी के परिश्रम का फल है, फिर भी अब उस पर उसका कोई अधिकार नहीं रहा — अब वह 'द्वार का कुत्ता' मात्र बनकर रह गया है। वह ऐसे जीवन को धिक्कार समझता है।

प्रश्न 4: सुजान भगत को सबसे अधिक क्रोध बुलाकी पर क्यों आता है?

उत्तर: सुजान को सबसे अधिक क्रोध बुलाकी पर इसलिए आता है क्योंकि वह घटना के समय चुपचाप देखती रही और भोला ने उसके हाथ से अनाज छीन लिया, फिर भी उसके मुँह से इतना भी न निकला कि 'ले जाते हैं तो ले जाने दो।' सुजान को लगता है कि वर्षों की मेहनत से बनाई गृहस्थी में उसकी पत्नी भी अब बेटों का ही पक्ष लेती है और उसे भुला बैठी है।

प्रश्न 5: चैत के महीने में खलिहानों में सतयुग के राज का वर्णन कीजिए।

उत्तर: चैत का महीना आते ही खलिहानों में जगह-जगह अनाज के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए थे। यही वह समय होता है जब किसानों को थोड़ी देर के लिए अपना जीवन सफल प्रतीत होता है और गर्व से उनका हृदय उछलने लगता है। सुजान भगत टोकरे में अनाज भर-भरकर देते थे और दोनों बेटे उसे घर में रख आते थे — इसी समृद्धि को लेखक ने 'सतयुग का राज' कहा है।

प्रश्न 6: सुजान भगत भिक्षुक को कैसे संतुष्ट करता है?

उत्तर: सुजान भगत उसी भिक्षुक को, जो आठ महीने पहले निराश होकर लौटा था, इस बार भरपूर अनाज देते हैं। भिक्षुक संकोचवश थोड़ा ही अनाज लेता है, पर भगत बार-बार आग्रह करके उसकी चादर में अधिक अनाज भरवाते हैं। जब गठरी भारी होने के कारण भिक्षुक स्वयं नहीं उठा पाता, तो सुजान स्वयं गठरी सिर पर रखकर उसे उसके गाँव (अमोला) तक पहुँचा आते हैं।

प्रश्न 7: सुजान भगत अपना खोया हुआ अधिकार फिर कैसे प्राप्त करता है?

उत्तर: अनादर से आहत सुजान उसी रात उठकर बैलों का चारा काटने लगता है और अगली सुबह अकेले पूरा खेत जोत डालता है। वह लगातार अथक परिश्रम करता रहता है, जिसके फलस्वरूप उस वर्ष उसकी खेती में असाधारण उपज होती है — बखारी में अनाज रखने की जगह नहीं बचती। इसी भरपूर फसल और उससे उपजी उदारता (भिक्षुक को भरपूर दान देकर) के माध्यम से वह बेटे भोला के सामने ही अपना खोया हुआ अधिकार पुनः सिद्ध कर देता है।

दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न (4/5 अंक)

प्रश्न 1: 'सुजान भगत' कहानी का सार अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर: सुजान महतो की खेती में वर्षों से अच्छी उपज होने से उसके पास पर्याप्त धन जमा हो गया। धन आते ही वह धर्म-कर्म की ओर झुक गया — साधु-सेवा, तीर्थ-यात्रा और यज्ञ-ब्रह्मभोज करके गाँव में 'सुजान भगत' कहलाने लगा। भगत बनने के बाद उसके आचार-विचार तो ऊँचे हो गए, पर धीरे-धीरे घर के व्यावहारिक निर्णयों से वह अलग होता गया — बेटे भोला और शंकर तथा पत्नी बुलाकी उसे केवल पूजनीय व्यक्ति मानने लगे, अधिकारयुक्त स्वामी नहीं। एक दिन जब सुजान एक भिखारी को अनाज देने लगा, तो भोला ने उसके हाथ से छबड़ी छीनकर उसे डाँट दिया। इस गहरे अनादर से आहत सुजान ने उसी रात से अथक परिश्रम शुरू कर दिया — रातभर चारा काटा, अकेले पूरा खेत जोता। परिणामस्वरूप उस वर्ष भरपूर फसल हुई। जब वही भिखारी फिर आया, तो सुजान भगत ने उसे भरपूर अनाज दिया और स्वयं गठरी उठाकर उसके गाँव तक पहुँचाया — बेटे भोला के सामने ही उसने अपना खोया हुआ अधिकार पुनः प्राप्त कर लिया।

प्रश्न 2: सुजान भगत के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: सुजान भगत मूलतः एक परिश्रमी किसान है, जो वृद्धावस्था में भी अथक श्रम करके यह सिद्ध करता है कि उसकी कार्यक्षमता कम नहीं हुई। वह धार्मिक प्रवृत्ति का है — धन आते ही पूजा-अर्चना, सत्य-निष्ठा और साधु-सेवा को अपने जीवन का नियम बना लेता है। साथ ही वह अत्यंत स्वाभिमानी भी है — घर में अनादर होते ही वह झगड़े का नहीं, बल्कि परिश्रम से अपना सम्मान पुनः अर्जित करने का मार्ग चुनता है। कहानी के अंत में भिखारी के प्रति उसकी असीम उदारता उसके करुणामय और उदार स्वभाव को भी उजागर करती है। इस प्रकार सुजान भगत परिश्रम, स्वाभिमान, धार्मिकता और उदारता के अनोखे मेल का प्रतीक है।

प्रश्न 3: 'मानव-जीवन में लाग बड़े महत्व की वस्तु है' — इस कथन के आलोक में कहानी का संदेश स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: लेखक प्रेमचंद इस कहानी के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि मनुष्य के जीवन में 'लाग' अर्थात् लगन, उत्साह और दृढ़ संकल्प का विशेष महत्व है। जिस प्रकार धार तेज़ होने पर कुंद तलवार भी कठोर वस्तु काट सकती है, उसी प्रकार जिस व्यक्ति में लगन है, वह वृद्ध होकर भी युवा के समान सक्षम रहता है — और जिसमें लगन नहीं, वह युवा होकर भी मृतक-तुल्य है। सुजान भगत में यही लाग थी, जिसने अपमान से आहत होने पर भी उसे असाधारण परिश्रम करने की शक्ति दी और अंततः उसे उसका खोया हुआ सम्मान और अधिकार पुनः दिलाया। यह कथन कहानी के केंद्रीय संदेश को भी दोहराता है — कठिन परिश्रम ही मान-मर्यादा का सच्चा आधार है।

निम्नलिखित वाक्य किसने किससे कहे? (1 अंक प्रत्येक)

1. 'धरम के काम में मीन-मेष निकालना अच्छा नहीं।' उत्तर: यह सुजान ने बुलाकी से कहा (जब बुलाकी ने गया-यात्रा को अगले वर्ष तक टालने का सुझाव दिया)।

2. 'दिन भर एक न एक खुचड़ निकालते रहते हैं।' उत्तर: यह भोला ने बुलाकी से कहा (सुजान की शिकायत करते हुए)।

3. 'आधी रोटी खाओ, भगवान का भजन करो और पड़े रहो।' उत्तर: यह बुलाकी ने सुजान से कहा (उसे मनाते हुए, व्यंग्यपूर्वक)।

4. 'क्रोधी तो सदा के हैं। अब किसी की सुनेंगे थोड़े ही।' उत्तर: यह बुलाकी ने भोला से कहा (सुजान के हल लेकर अकेले खेत जाने पर)।

5. 'बाबा, इतना मुझसे उठ न सकेगा।' उत्तर: यह भिक्षुक ने सुजान भगत से कहा (जब गठरी में भरा अनाज बहुत भारी हो गया)।

संदर्भ स्पष्टीकरण कीजिए (2/3 अंक प्रत्येक)

1. 'भगवान की इच्छा होगी, तो फिर रूपये हो जायेंगे। उनके यहाँ किस बात की कमी है?' संदर्भ एवं स्पष्टीकरण: सुजान ने यह बात बुलाकी से कही, जब वह गया-यात्रा में धन खर्च होने पर हाथ खाली होने की चिंता व्यक्त कर रही थी। यह सुजान की ईश्वर के प्रति गहरी आस्था और धार्मिक कार्यों में धन व्यय से न घबराने की मनोवृत्ति को दर्शाता है।

2. 'अभी ऐसे बूढ़े नहीं हो गए कि कोई काम ही न कर सकें।' संदर्भ एवं स्पष्टीकरण: यह भोला ने बुलाकी से कहा, जब वह सुजान के भगत बनने के बाद खेती-बाड़ी के काम से दूर रहने की शिकायत कर रहा था। यह पंक्ति बेटे की सुजान के प्रति उपेक्षा और उसे बोझ समझने की मनोवृत्ति को उजागर करती है।

3. 'आदमी को चाहिए कि जैसा समय देखे वैसा काम करे।' संदर्भ एवं स्पष्टीकरण: बुलाकी सुजान को समझाते हुए यह कहती है कि अब बेटे कमाते हैं, इसलिए घर का नाम का मालिक बने रहकर भी उन्हीं की इच्छा अनुसार चलना चाहिए। यह व्यावहारिक जीवन-दर्शन को दर्शाता है, यद्यपि सुजान इसे अपने आत्मसम्मान पर आघात मानता है।

4. 'अब तक जिस घर में राज्य किया, उसी घर में पराधीन बनकर वह नहीं रह सकता।' संदर्भ एवं स्पष्टीकरण: यह लेखक की टिप्पणी है, जो अनादर की घटना के बाद सुजान के मन में उठे विचारों का वर्णन करती है। यह कहानी का महत्वपूर्ण मोड़ है, जो सुजान के आत्मसम्मान और अधिकार पुनः प्राप्त करने के दृढ़ संकल्प को स्पष्ट करता है।

5. 'अच्छा, तुम्हारे सामने यह ढेर है। इसमें से जितना अनाज उठाकर ले जा सको, ले जाओ।' संदर्भ एवं स्पष्टीकरण: सुजान भगत ने भरपूर फसल पाने के बाद उस भिक्षुक से यह कहा, जिसे आठ महीने पहले खाली हाथ लौटना पड़ा था। यह सुजान की पुनःप्राप्त उदारता और आत्मविश्वास को दर्शाता है — अब वह अपने घर में बिना किसी रोक-टोक के दान देने में सक्षम है।