त्वरित पुनरावृत्ति: कारक चिह्न

ब्लूप्रिंट में 'रिक्त स्थान की पूर्ति' के अंतर्गत सही कारक चिह्न (ने, को, से, का/की/के, में, पर) भरना पूछा जाता है। इस पाठ के वाक्यों पर आधारित अभ्यास नीचे दिया गया है।

कारक चिह्न प्रयोग का उदाहरण (पाठ से)
कर्ता ने भिक्षुक ने भोला की ओर देखा
कर्म/संप्रदान को जो खर्च करता है, उसी को देते हैं
करण/अपादान से इन व्यापारों से उसे घृणा होती थी
संबंध का/की/के तुम्हारे बेटों की तो कमाई है
अधिकरण में/पर चैत का महीना था

[Exam Tip] वाक्य में क्रिया और संज्ञा के बीच के संबंध को पहचानकर ही सही कारक चुनें — रटने की बजाय अर्थ समझें।

त्वरित पुनरावृत्ति: वाक्य शुद्धि, काल, लिंग, वचन

वाक्य शुद्धि के सामान्य नियम: (1) कर्ता के साथ सही कारक चिह्न लगाएँ (जैसे भूतकाल की सकर्मक क्रिया में 'ने')। (2) कर्ता और क्रिया में लिंग-वचन का मेल बिठाएँ।

काल के तीन मुख्य प्रकार: वर्तमान (करता है), भूत (किया), भविष्यत् (करेगा) — काल-परिवर्तन में केवल क्रिया रूप बदलता है, वाक्य का शेष ढाँचा वही रहता है।

लिंग-परिवर्तन: कई हिन्दी शब्द पुल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाते समय प्रत्यय बदलते हैं (जैसे -ई, -इन, -आ→ई)। उदाहरण: भिखारी→भिखारिन, विद्वान→विदुषी, साधु→साध्वी।

वचन-परिवर्तन: एकवचन से बहुवचन बनाने के सामान्य नियम — आ-कारांत पुल्लिंग शब्दों का अंत्य 'आ' 'ए' में बदलता है (लड़का→लड़के); ई/इया-कारांत स्त्रीलिंग शब्दों में 'एँ' जुड़ता है (रोटी→रोटियाँ, बात→बातें)।

इस पाठ के विलोम शब्द

शब्द विलोम
मुरझाना खिलना
जीवन मृत्यु
सुख दुख
आशा निराशा
भलाई बुराई
सुंदर असुंदर / कुरूप
मुश्किल आसान / सरल

[Exam Tip] विलोम शब्द और लिंग-परिवर्तन दोनों में वर्तनी (spelling) की शुद्धता पर विशेष ध्यान दें — परीक्षक इसी पर अंक काटते हैं।