आनुवंशिकता

आनुवंशिकता अध्याय बोर्ड प्रश्न पत्र में 5 से 7 अंक का होता है: 2026-27 के सैंपल पेपर और 2025 तथा फरवरी 2026 के प्रश्न पत्रों में 5 अंक, और मई 2026 के प्रश्न पत्र में 7 अंक।

प्रायः एक या दो 1 अंक के बहुविकल्पीय प्रश्न (मेंडल के अनुपात, युग्मकों और युग्मनज में गुणसूत्रों की संख्या) आते हैं, साथ में या तो मेंडल के किसी संकरण पर 4 अंक का केस आधारित प्रश्न या संकरण दर्शाने वाला 3 अंक का प्रश्न। पाठ्यक्रम में मेंडल के नियम और लिंग निर्धारण का संक्षिप्त परिचय है।

अंक प्रायः यहाँ कटते हैं:

  • जहाँ जीनोटाइप अनुपात (1 : 2 : 1) पूछा हो, वहाँ 3 : 1 लिख देना;
  • द्विसंकर F2 में गलत समूह चुनना, जैसे जहाँ दो समूह जोड़ने हों वहाँ केवल 3/16 लिखना;
  • संकरण दिखाते समय युग्मक न लिखना;
  • यह कहना कि संतान का लिंग माँ तय करती है।

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मुख्य शब्द

  • गुणसूत्रों में स्थित DNA (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) में लक्षणों की सूचना होती है। जीन DNA का वह भाग है जिसमें एक प्रोटीन की सूचना होती है।
  • शरीर कोशिकाओं में हर जीन की दो प्रतियाँ होती हैं; युग्मक में एक। प्रभावी लक्षण एक प्रति (T) से दिखता है; अप्रभावी केवल दो (tt) से।
  • जीनोटाइप = जीन (TT, Tt, tt)। फीनोटाइप = जो दिखता है (लंबा, बौना)। शुद्ध वंशक्रम = दोनों प्रतियाँ एक जैसी।
  • अलैंगिक जनन में कम विभिन्नता (केवल DNA प्रतिकृति की त्रुटियाँ); लैंगिक जनन में कहीं अधिक।
  • जीवन में सीखे गए कौशल वंशानुगत नहीं होते; केवल जनन कोशिकाओं के DNA में जो है वही आगे जाता है।

मेंडल के संकरण

संकरण F1 F2 फीनोटाइप F2 जीनोटाइप
TT × tt सभी Tt, लंबे 3 लंबे : 1 बौना 1 TT : 2 Tt : 1 tt
RRYY × rryy सभी RrYy, गोल पीले 9 : 3 : 3 : 1 16 खाने
  • द्विसंकर F2 (16 में से): दोनों प्रभावी 9, एक प्रभावी 3 + 3, दोनों अप्रभावी 1; दोनों लक्षणों के लिए शुद्ध 4।
  • F2 में नए संयोजन स्वतंत्र वंशागति दर्शाते हैं।

जीन से लक्षण: जीन → एंज़ाइम → वृद्धि हॉर्मोन की मात्रा → लंबाई।

गुणसूत्र और लिंग

  • युग्मक अर्धसूत्री विभाजन (न्यूनीकरण विभाजन) से बनते हैं: हर जोड़े का एक गुणसूत्र, यानी आधी संख्या। निषेचन से संख्या फिर पूरी होती है, इसलिए संख्या और DNA स्थिर रहते हैं।
  • मनुष्य की शरीर कोशिका: 22 जोड़े + XX (स्त्री) या XY (पुरुष)। अंड 22 + X; शुक्राणु 22 + X या 22 + Y।
  • X शुक्राणु + अंड → लड़की; Y शुक्राणु + अंड → लड़का; दोनों 50%। लिंग पिता का शुक्राणु तय करता है।
  • कुछ सरीसृपों में अंडों का ताप लिंग तय करता है; कुछ घोंघे लिंग बदल लेते हैं।

आरेख: युग्मकों और चेकरबोर्ड सहित F2 तक एकसंकर संकरण; लिंग निर्धारण का प्रवाह-चित्र।

सावधानियाँ

  • 3 : 1 फीनोटाइप है, 1 : 2 : 1 जीनोटाइप।
  • "प्रभावी" का अर्थ आम या अधिक मज़बूत नहीं है।
  • कोई मिश्रण नहीं: बैंगनी × सफ़ेद से पूरा बैंगनी F1।

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: हर प्रश्न पहले कॉपी पर हल कीजिए, फिर उत्तर पढ़िए। हर चरण के सामने लिखे अंक बताते हैं कि परीक्षक क्या देखता है। 1 अंक वाले बहुविकल्पीय और अभिकथन-कारण प्रश्न अंत की क्विज़ में हैं, साथ में ऐसे प्रश्न भी जो जाँचते हैं कि आपने अध्याय कितनी गहराई से समझा है; क्विज़ के हर उत्तर के साथ उसकी व्याख्या दी गई है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (2 और 3 अंक)

प्रश्न 1 (2 अंक)

गुणसूत्र क्या हैं? DNA का पूरा नाम लिखिए, और बताइए कि जीन और DNA का गुणसूत्रों से क्या संबंध है।

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

  1. गुणसूत्र कोशिका के केंद्रक में धागे जैसी संरचनाएँ हैं। ये DNA और प्रोटीन से बने होते हैं और जनकों से संतति तक जाने वाली सूचना रखते हैं।
  2. DNA (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) वह रसायन है जिसमें यह सूचना लिखी रहती है। जीन गुणसूत्र पर DNA का वह भाग है जिसमें एक प्रोटीन बनाने की सूचना होती है। इस प्रकार प्रत्येक गुणसूत्र DNA का एक लंबा अणु है जिस पर अनेक जीन होते हैं।

अंक योजना:

  1. गुणसूत्र केंद्रक में धागे जैसी संरचनाएँ हैं, जो DNA और प्रोटीन से बनी होती हैं; ये जनकों से संतति में जाने वाली सूचना रखती हैं — 1 अंक
  2. DNA (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) वह रसायन है जिसमें यह सूचना होती है; जीन गुणसूत्र पर DNA का वह भाग है जिसमें एक प्रोटीन की सूचना होती है, और प्रत्येक गुणसूत्र पर अनेक जीन होते हैं — 1 अंक

प्रश्न 2 (2 अंक)

किसी पौधे के जीनोटाइप और फीनोटाइप से क्या अभिप्राय है? शुद्ध वंशक्रम के लंबे और शुद्ध वंशक्रम के बौने मटर के पौधों के संकरण की F2 पीढ़ी में कितने प्रकार के फीनोटाइप और कितने प्रकार के जीनोटाइप दिखते हैं? उनके नाम लिखिए।

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

  1. जीनोटाइप किसी लक्षण के लिए पौधे में उपस्थित जीनों का जोड़ा है, जैसे Tt। फीनोटाइप यह है कि वह लक्षण पौधे में वास्तव में कैसा दिखता है, जैसे लंबा।
  2. F2 में 2 फीनोटाइप हैं: लंबा और बौना, 3 : 1 के अनुपात में। 3 जीनोटाइप हैं: TT, Tt और tt, 1 : 2 : 1 के अनुपात में। TT और Tt पौधे एक जैसे (लंबे) दिखते हैं, इसीलिए फीनोटाइप, जीनोटाइप से कम हैं।

अंक योजना:

  1. जीनोटाइप: किसी लक्षण के लिए पौधे में उपस्थित जीनों का जोड़ा (जैसे Tt); फीनोटाइप: पौधे में वह लक्षण कैसा दिखता है (जैसे लंबा) — 1 अंक
  2. 2 फीनोटाइप, लंबा और बौना (3 : 1); 3 जीनोटाइप, TT, Tt और tt (1 : 2 : 1) — 1 अंक

प्रश्न 3 (2 अंक)

रवि दस वर्षों से तबला बजा रहा है और बहुत अच्छा बजाता है। उसकी बेटी के बाल उसी की तरह घुँघराले हैं, पर वह तबला बिल्कुल नहीं बजा सकती। घुँघराले बाल उसे क्यों मिले, पर यह कौशल क्यों नहीं मिला?

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

  1. घुँघराले बाल जीनों से नियंत्रित होते हैं। रवि के जीन उसके शुक्राणु से होकर बेटी तक पहुँचे, इसलिए उसे पिता जैसे बाल मिले।
  2. तबला बजाना अभ्यास से सीखा गया कौशल है। अभ्यास से रवि के हाथ और मस्तिष्क बदलते हैं, पर उसकी जनन कोशिकाओं का DNA नहीं बदलता। केवल वही आगे जाता है जो जनन कोशिकाओं के DNA में है, इसलिए बेटी को तबला स्वयं सीखना होगा।

अंक योजना:

  1. बालों का प्रकार DNA के जीनों से नियंत्रित होता है, और ये जनन कोशिकाओं (शुक्राणु और अंड) से होकर संतान तक पहुँचते हैं — 1 अंक
  2. अभ्यास से सीखा गया कौशल जनन कोशिकाओं के DNA को नहीं बदलता, इसलिए वह वंशानुगत नहीं होता; बेटी को इसे स्वयं सीखना होगा — 1 अंक

प्रश्न 4 (2 अंक)

मनुष्य का अंड शुक्राणु से बहुत बड़ा होता है। फिर भी संतान को मिलने वाले लक्षणों में पिता और माता का योगदान बराबर होता है। स्पष्ट कीजिए।

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

  1. अंड इसलिए बड़ा होता है क्योंकि उसमें शुरुआती दिनों में भ्रूण के लिए भोजन का भंडार होता है। उसके बड़े आकार का अर्थ यह नहीं कि उसमें अधिक जीन हैं।
  2. अंड और शुक्राणु दोनों में 23 गुणसूत्र होते हैं, हर जोड़े में से एक। निषेचन पर ये मिलकर युग्मनज में 46 गुणसूत्र बनाते हैं, इसलिए संतान में हर जीन की एक प्रति माँ से और एक पिता से आती है।

अंक योजना:

  1. अंड इसलिए बड़ा है क्योंकि उसमें प्रारंभिक भ्रूण के लिए भोजन संचित रहता है, इसलिए नहीं कि उसमें अधिक जीन हैं — 1 अंक
  2. अंड और शुक्राणु दोनों में 23 गुणसूत्रों का एक-एक समुच्चय होता है, हर जोड़े में से एक, अतः संतान को हर जीन की एक प्रति प्रत्येक जनक से मिलती है — 1 अंक

प्रश्न 5 (2 अंक)

मेंडल ने अपने प्रयोग शुद्ध वंशक्रम वाले मटर के पौधों से शुरू किए, और हर पीढ़ी में प्रत्येक प्रकार के पौधों की संख्या गिनी। इन दोनों चरणों से उन्हें वंशागति के नियम ज्ञात करने में कैसे सहायता मिली?

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

  1. शुद्ध वंशक्रम वाले जनक: हर जनक में जीन की दोनों प्रतियाँ एक जैसी थीं, इसलिए मेंडल को ठीक-ठीक पता था कि कौन-सा जनक क्या दे सकता है। संतति में कोई नया प्रकार आए तो उसे जनकों के आधार पर समझाया जा सकता था।
  2. पौधों की गिनती: गिनती से निश्चित अनुपात दिखे, जैसे F2 में 3 लंबे : 1 बौना। इन्हीं अनुपातों से उन्हें पता चला कि लक्षण कारकों के जोड़ों से नियंत्रित होते हैं, जिनमें एक-एक कारक प्रत्येक जनक से आता है। केवल "कुछ लंबे, कुछ बौने" लिख देने से कोई नियम नहीं दिखता।

अंक योजना:

  1. शुद्ध वंशक्रम वाले जनक: उन्हें ठीक-ठीक पता था कि हर जनक में क्या है (दोनों प्रतियाँ एक जैसी), इसलिए हर परिणाम को जनकों तक जोड़ा जा सका — 1 अंक
  2. गिनती: संख्याओं से 3 : 1 और 9 : 3 : 3 : 1 जैसे निश्चित अनुपात दिखे, और इन्हीं अनुपातों से नियम सामने आए; केवल पौधों का वर्णन करने से ऐसा नहीं होता — 1 अंक

प्रश्न 6 (3 अंक)

मटर के पौधों में कक्षीय पुष्प (A), शीर्षस्थ पुष्प (a) पर प्रभावी हैं। कक्षीय पुष्पों वाले शुद्ध वंशक्रम के पौधे का संकरण शीर्षस्थ पुष्पों वाले शुद्ध वंशक्रम के पौधे से कराया जाता है, और F1 पौधों का स्वपरागण कराया जाता है। चेकरबोर्ड की सहायता से F2 पीढ़ी तक संकरण दर्शाइए। F2 पौधों का फीनोटाइप अनुपात और जीनोटाइप अनुपात लिखिए।

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

संकरण नीचे दिए गए चित्र में दिखाया गया है। इसमें P जनकों को, F1 और F2 पहली और दूसरी पीढ़ी को, और वृत्तों में लिखे अक्षर युग्मकों को दर्शाते हैं।

  1. जनक: AA (कक्षीय) × aa (शीर्षस्थ)। AA से केवल A युग्मक और aa से केवल a युग्मक बनते हैं।
  2. F1: सभी पौधे Aa हैं। A प्रभावी है, इसलिए F1 के सभी पौधों में कक्षीय पुष्प हैं।
  3. F2 (Aa × Aa): हर F1 पौधा A और a युग्मक बराबर संख्या में बनाता है। चेकरबोर्ड से AA, Aa, Aa और aa मिलते हैं।

फीनोटाइप अनुपात = 3 कक्षीय : 1 शीर्षस्थ। जीनोटाइप अनुपात = 1 AA : 2 Aa : 1 aa।

अंक योजना:

  1. जनक AA × aa से युग्मक A और a बनते हैं; F1 के सभी पौधे Aa हैं, कक्षीय पुष्पों वाले — 1 अंक
  2. F1 × F1 (Aa × Aa): प्रत्येक से युग्मक A और a; चेकरबोर्ड से AA, Aa, Aa, aa — 1 अंक
  3. फीनोटाइप अनुपात 3 कक्षीय : 1 शीर्षस्थ; जीनोटाइप अनुपात 1 AA : 2 Aa : 1 aa — 1 अंक

AA × aa का F2 तक संकरण, Aa × Aa का चेकरबोर्ड

प्रश्न 7 (3 अंक)

मटर के पौधों में बैंगनी फूल (V), सफ़ेद फूलों (v) पर प्रभावी हैं, और हरी फलियाँ (G), पीली फलियों (g) पर प्रभावी हैं। बैंगनी फूलों और हरी फलियों के लिए शुद्ध वंशक्रम वाले पौधे का संकरण सफ़ेद फूलों और पीली फलियों के लिए शुद्ध वंशक्रम वाले पौधे से कराया जाता है, और F1 पौधों का स्वपरागण कराया जाता है।

(a) F2 के कितने प्रतिशत पौधों में बैंगनी फूल और पीली फलियाँ होंगी?
(b) F2 के कितने प्रतिशत पौधे दोनों लक्षणों के लिए शुद्ध वंशक्रम देंगे?
(c) सफ़ेद फूलों वाले F2 पौधों में से कितने अंश में हरी फलियाँ होंगी?

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

जनक VVGG और vvgg हैं, इसलिए F1 का हर पौधा VvGg है। F1 के स्वपरागण पर दोनों लक्षण स्वतंत्र रूप से अलग होते हैं, और F2 के 16 बराबर भाग बनते हैं।

(a) बैंगनी के लिए कम से कम एक V चाहिए (4 में से 3 भाग) और पीली फलियों के लिए gg चाहिए (4 में से 1 भाग)। अतः भाग 3/4 × 1/4 = 3/16 = 18.75%।

(b) कोई पौधा दोनों लक्षणों के लिए शुद्ध वंशक्रम तभी देता है जब दोनों जीन शुद्ध हों: VVGG, VVgg, vvGG या vvgg। प्रत्येक 16 में से 1 भाग है, अतः कुल 4/16 = 25%।

(c) सफ़ेद फूल (vv) 16 में से 4 भाग हैं। इनमें से हरी फलियाँ (GG या Gg) 3 भाग हैं, ठीक किसी भी 3 : 1 विभाजन की तरह। अतः भाग 3/4 है।

अंक योजना:

  1. (a) जनक VVGG × vvgg, F1 VvGg; बैंगनी फूल और पीली फलियाँ (VVgg या Vvgg) = 16 में से 3 = 18.75% — 1 अंक
  2. (b) दोनों लक्षणों के लिए शुद्ध वंशक्रम: VVGG, VVgg, vvGG और vvgg, प्रत्येक 1, = 16 में से 4 = 25% — 1 अंक
  3. (c) सफ़ेद फूलों वाले पौधे 16 में से 4 हैं, और इनमें से 3 में हरी फलियाँ हैं, अतः भाग 3/4 है — 1 अंक

प्रश्न 8 (3 अंक)

एक ही किस्म के दो मटर के पौधे एक ही मिट्टी में पास-पास उगते हैं और उन्हें एक जैसा जल और सूर्य का प्रकाश मिलता है। एक पौधा लंबा हो जाता है, जबकि दूसरा बौना रह जाता है। स्पष्ट कीजिए कि केवल एक जीन में अंतर से ऐसा कैसे हो सकता है।

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

  1. जीन से प्रोटीन बनता है। जीन DNA का वह भाग है जिसमें एक प्रोटीन बनाने की सूचना होती है। मटर के पौधे की लंबाई एक वृद्धि हॉर्मोन पर निर्भर करती है, और यह हॉर्मोन एक एंज़ाइम की सहायता से बनता है, जो एक प्रोटीन है।
  2. जीन के भिन्न रूप, भिन्न एंज़ाइम। लंबे पौधे में जीन का वह रूप है जिससे दक्ष एंज़ाइम बनता है, इसलिए हॉर्मोन अधिक बनता है। बौने पौधे में जीन का बदला हुआ रूप है, इसलिए उसका एंज़ाइम ठीक से काम नहीं करता और हॉर्मोन कम बनता है।
  3. हॉर्मोन से लंबाई तय होती है। हॉर्मोन कम होने पर तना कम बढ़ता है और पौधा बौना रह जाता है। दोनों पौधों के लिए मिट्टी, जल और प्रकाश एक जैसे हैं, इसलिए अंतर जीन के कारण ही है।

अंक योजना:

  1. जीन DNA का वह भाग है जिसमें एक प्रोटीन बनाने की सूचना होती है, यहाँ एक एंज़ाइम की, जो पौधे का वृद्धि हॉर्मोन बनाने के लिए आवश्यक है — 1 अंक
  2. लंबे पौधे में जीन का वह रूप है जिससे दक्ष एंज़ाइम बनता है, अतः वृद्धि हॉर्मोन पर्याप्त बनता है; बौने पौधे में जीन का बदला हुआ रूप है जिससे कम दक्ष एंज़ाइम बनता है — 1 अंक
  3. कम हॉर्मोन से तने की वृद्धि कम होती है, इसलिए पौधा बौना रहता है; मिट्टी, जल और प्रकाश एक जैसे हैं, अतः अंतर जीन में ही है — 1 अंक

प्रश्न 9 (3 अंक)

कुत्ते की शरीर कोशिकाओं में 78 गुणसूत्र होते हैं।

(a) (I) कुत्ते के एक शुक्राणु में, (II) निषेचन से बने युग्मनज में और (III) एक पिल्ले की त्वचा कोशिका में कितने गुणसूत्र होंगे?
(b) उस कोशिका विभाजन का नाम लिखिए जिससे युग्मक बनते हैं।
(c) स्पष्ट कीजिए कि यह विभाजन कुत्तों की एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी तक गुणसूत्रों की संख्या 78 कैसे बनाए रखता है।

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

(a) (I) शुक्राणु को 39 जोड़ों में से हर जोड़े का एक गुणसूत्र मिलता है, इसलिए उसमें 39 होते हैं। (II) युग्मनज को 39 शुक्राणु से और 39 अंड से मिलते हैं: 78। (III) पिल्ले की त्वचा कोशिका युग्मनज से सामान्य विभाजन द्वारा बनती है, इसलिए उसमें भी 78 होते हैं।

(b) युग्मक अर्धसूत्री विभाजन (न्यूनीकरण विभाजन) से बनते हैं।

(c) अर्धसूत्री विभाजन में हर युग्मक हर जोड़े में से केवल एक गुणसूत्र लेता है, इसलिए उसमें आधी संख्या, 39, होती है। निषेचन पर 39 + 39 = 78, यानी जनकों के बराबर। यदि युग्मकों में पूरे 78 होते, तो पिल्लों में 156 होते और संख्या दोगुनी होती जाती।

अंक योजना:

  1. (a) शुक्राणु 39; युग्मनज 78; पिल्ले की त्वचा कोशिका 78 — 1 अंक
  2. (b) अर्धसूत्री विभाजन (न्यूनीकरण विभाजन) — 1 अंक
  3. (c) हर युग्मक को हर जोड़े में से एक गुणसूत्र (39) मिलता है; अंड और शुक्राणु मिलकर युग्मनज में 39 + 39 = 78 देते हैं, इसलिए संख्या हर पीढ़ी में दोगुनी नहीं होती — 1 अंक

प्रश्न 10 (3 अंक)

प्रवाह-चित्र की सहायता से समझाइए कि मनुष्य में संतान का लिंग कैसे निर्धारित होता है। एक स्त्री को उसका परिवार केवल बेटियों को जन्म देने के लिए दोषी ठहराता है। क्या यह उचित है? कारण दीजिए।

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

  1. मनुष्य की कोशिकाओं में 22 जोड़े सामान्य गुणसूत्रों के और एक जोड़ा लिंग गुणसूत्रों का होता है। स्त्री 44 + XX और पुरुष 44 + XY होता है।
  2. स्त्री केवल एक प्रकार का अंड, 22 + X, बनाती है। पुरुष दो प्रकार के शुक्राणु बराबर संख्या में बनाता है, 22 + X और 22 + Y।
  3. यदि X वाला शुक्राणु अंड को निषेचित करे, तो संतान 44 + XX, यानी लड़की होगी। यदि Y वाला शुक्राणु निषेचित करे, तो संतान 44 + XY, यानी लड़का होगा। अतः हर संतान के लड़का या लड़की होने की संभावना 50% है (प्रवाह-चित्र देखिए; P = जनक, F1 = संतान)।

माँ को दोष देना उचित नहीं है। वह सदैव X गुणसूत्र ही देती है, इसलिए लिंग वह तय नहीं कर सकती। लिंग इस पर निर्भर करता है कि पिता का कौन-सा शुक्राणु पहले अंड तक पहुँचता है, और यह संयोग की बात है।

अंक योजना:

  1. स्त्री (44 + XX) केवल एक प्रकार का अंड, 22 + X, बनाती है; पुरुष (44 + XY) दो प्रकार के शुक्राणु, 22 + X और 22 + Y, बराबर संख्या में बनाता है — 1 अंक
  2. प्रवाह-चित्र: अंड + X शुक्राणु से 44 + XX, लड़की; अंड + Y शुक्राणु से 44 + XY, लड़का; प्रत्येक की संभावना 50% — 1 अंक
  3. उचित नहीं: माँ सदैव X ही देती है; कौन-सा शुक्राणु अंड को निषेचित करेगा, यह संयोग पर निर्भर है, और शुक्राणु पिता से आता है — 1 अंक

मनुष्य में लिंग निर्धारण का प्रवाह-चित्र

दीर्घ उत्तरीय और केस आधारित प्रश्न

प्रश्न 11 (4 अंक)

1960 और 1970 के दशक में भारत में अनाज की पैदावार बहुत बढ़ाने वाली गेहूँ और धान की बौनी किस्मों में एक पादप वृद्धि हॉर्मोन से जुड़े जीन का बदला हुआ रूप होता है। ऐसे पौधे यह हॉर्मोन कम बनाते हैं, या उस पर कम प्रतिक्रिया करते हैं, इसलिए उनके तने छोटे और मज़बूत रहते हैं। छोटे पौधे अनाज की भारी फसल के भार से गिरते नहीं हैं। धान की ऐसी ही एक किस्म में बौनापन एक अप्रभावी लक्षण है। कटक के एक धान अनुसंधान केंद्र में एक वैज्ञानिक शुद्ध वंशक्रम वाले लंबे धान के पौधे (TT) का संकरण शुद्ध वंशक्रम वाले बौने पौधे (tt) से कराता है, और फिर F1 तथा F2 पीढ़ियाँ उगाता है।

(a) जीन क्या है? (1 अंक)

उत्तर।

  1. जीन गुणसूत्र पर DNA का वह भाग है जिसमें एक प्रोटीन बनाने की सूचना होती है — 1 अंक

(b) एक जीन में परिवर्तन से धान का पौधा छोटा कैसे रह सकता है? (1 अंक)

उत्तर।

  1. यह जीन वृद्धि हॉर्मोन के लिए आवश्यक एंज़ाइम बनाता है; बदले हुए जीन से कम दक्ष एंज़ाइम बनता है, इसलिए हॉर्मोन कम बनता है और तना कम बढ़ता है — 1 अंक

(c) F1 के पौधे कैसे दिखेंगे? F2 के कितने भाग पौधे बौने होंगे, और 1200 F2 पौधों में लगभग कितने बौने पौधे अपेक्षित हैं? (2 अंक)

उत्तर।

  1. F1: सभी लंबे (Tt), क्योंकि T प्रभावी है — 1 अंक
  2. F2 (Tt × Tt): 1 TT : 2 Tt : 1 tt, अतः 1/4 बौने; 14×1200=300\frac{1}{4} \times 1200 = 300 बौने पौधे — 1 अंक

अथवा

(c) वैज्ञानिक ऐसे बीज चाहता है जिनसे केवल बौने पौधे उगें। क्या उसे बौने F2 पौधे से बीज लेने चाहिए या लंबे F2 पौधे से, स्वपरागण कराकर? स्पष्ट कीजिए। (2 अंक)

उत्तर।

  1. बौने F2 पौधे से: वह tt है, इसलिए स्वपरागण पर उसकी सारी संतति tt और बौनी होगी — 1 अंक
  2. लंबा F2 पौधा TT या Tt हो सकता है; TT से केवल लंबे पौधे और Tt से लंबे व बौने दोनों मिलते हैं, इसलिए उसके बीज भरोसेमंद नहीं हैं — 1 अंक

प्रश्न 12 (4 अंक)

लुधियाना की कक्षा 10 की छात्रा हरप्रीत ने अपने विद्यालय के बगीचे में मेंडल के कार्य पर एक परियोजना की। उसने शीर्षस्थ पुष्पों वाले शुद्ध वंशक्रम के लंबे मटर के पौधों (TTaa) का संकरण कक्षीय पुष्पों वाले शुद्ध वंशक्रम के बौने मटर के पौधों (ttAA) से कराया। यहाँ लंबा (T), बौने (t) पर प्रभावी है, और कक्षीय पुष्प (A), शीर्षस्थ पुष्पों (a) पर प्रभावी हैं। फिर उसने F1 पौधों का स्वपरागण होने दिया और अपनी शिक्षिका की सहायता से F2 पीढ़ी के 960 पौधे उगाए।

(a) F1 के पौधे कैसे दिखेंगे? उनका जीनोटाइप लिखिए। (1 अंक)

उत्तर।

  1. कक्षीय पुष्पों वाले लंबे पौधे; जीनोटाइप TtAa — 1 अंक

(b) एक F1 पौधा कितने प्रकार के युग्मक बनाएगा? उन्हें लिखिए। (1 अंक)

उत्तर।

  1. चार प्रकार, बराबर संख्या में: TA, Ta, tA और ta — 1 अंक

(c) 960 F2 पौधों में से कितने पौधों में लक्षणों का ऐसा संयोजन होने की अपेक्षा है जो मूल शुद्ध वंशक्रम वाले जनकों (TTaa और ttAA) में से किसी में नहीं था? इन संयोजनों के नाम लिखिए और अपनी विधि दिखाइए। (2 अंक)

उत्तर।

  1. जनक लंबे-शीर्षस्थ और बौने-कक्षीय थे, इसलिए नए संयोजन हैं कक्षीय पुष्पों वाले लंबे और शीर्षस्थ पुष्पों वाले बौने पौधे — 1 अंक
  2. लंबे कक्षीय =916×960=540= \frac{9}{16} \times 960 = 540; बौने शीर्षस्थ =116×960=60= \frac{1}{16} \times 960 = 60; कुल 600 पौधे — 1 अंक

अथवा

(c) हरप्रीत ने पाया कि उसके F2 पौधों में लंबे : बौने लगभग 3 : 1 था, और कक्षीय : शीर्षस्थ भी लगभग 3 : 1 था। दिखाइए कि ये दोनों अनुपात मिलकर 9 : 3 : 3 : 1 अनुपात कैसे देते हैं, और बताइए कि इससे क्या पता चलता है। (2 अंक)

उत्तर।

  1. लंबे कक्षीय =34×34=916= \frac{3}{4} \times \frac{3}{4} = \frac{9}{16}; लंबे शीर्षस्थ और बौने कक्षीय प्रत्येक =34×14=316= \frac{3}{4} \times \frac{1}{4} = \frac{3}{16}; बौने शीर्षस्थ =14×14=116= \frac{1}{4} \times \frac{1}{4} = \frac{1}{16} — 1 अंक
  2. गुणा करना तभी सही है जब लंबाई और पुष्प की स्थिति एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से वंशानुगत हों; यही मेंडल का स्वतंत्र वंशागति का नियम है — 1 अंक

प्रश्न 13 (4 अंक)

महाराष्ट्र के गन्ना किसान अच्छी फसल से काटे गए तने के टुकड़े बोते हैं, और हर टुकड़ा एक नया पौधा बन जाता है। ऐसे खेत के पौधे लगभग बिल्कुल एक जैसे होते हैं। कोयंबटूर के एक गन्ना प्रजनन संस्थान में वैज्ञानिक इसके स्थान पर दो भिन्न किस्मों का संकरण कराते हैं और बीजों से पौध उगाते हैं। ये पौधे ऊँचाई, गन्ने की मोटाई और उसकी मिठास में एक-दूसरे से भिन्न होते हैं, और इनमें से सबसे अच्छे पौधे खेत में परीक्षण के लिए चुने जाते हैं।

(a) एक ही पौधे के तने के टुकड़ों से उगे पौधे लगभग एक जैसे क्यों होते हैं, पर बिल्कुल एक जैसे क्यों नहीं? (1 अंक)

उत्तर।

  1. इन्हें केवल एक जनक के DNA की प्रतिकृतियाँ मिलती हैं, इसलिए ये एक जैसे होते हैं; DNA की प्रतिकृति पूर्ण नहीं बनती, इसलिए थोड़े अंतर आ जाते हैं — 1 अंक

(b) संकरण से उगाई गई पौध एक-दूसरे से इतनी भिन्न क्यों होती है? (1 अंक)

उत्तर।

  1. दो भिन्न जनकों का DNA मिलता है, और हर युग्मक में जीनों का अलग मिश्रण होता है, इसलिए हर पौधे को नया संयोजन मिलता है — 1 अंक

(c) वैज्ञानिकों को एक ऐसा पौधा मिलता है जिसके गन्ने बहुत मीठे और मोटे हैं। वे इसके जैसे हज़ारों पौधे कैसे प्राप्त कर सकते हैं? इसके बीज बोने से यह काम क्यों नहीं होगा? (2 अंक)

उत्तर।

  1. इस पौधे के तने के टुकड़ों से उगाएँ: यह अलैंगिक जनन है, इसलिए हर नए पौधे को इसी पौधे के DNA की प्रतिकृति मिलती है — 1 अंक
  2. बीज लैंगिक जनन से बनते हैं, जिसमें इसके जीन दूसरे पौधे के जीनों से मिल जाते हैं, इसलिए पौधे भिन्न होंगे और बहुतों में अच्छे लक्षण नहीं रहेंगे — 1 अंक

अथवा

(c) चुने गए पौधों में से एक को अतिरिक्त उर्वरक दिया जाता है, और उसके गन्ने असामान्य रूप से मोटे हो जाते हैं। क्या इस पौधे के बीजों से उगे पौधों के गन्ने इस कारण मोटे होंगे? स्पष्ट कीजिए। (2 अंक)

उत्तर।

  1. नहीं; अतिरिक्त मोटाई उर्वरक से, यानी पौधे के परिवेश में परिवर्तन से आई, और इससे उसकी जनन कोशिकाओं का DNA नहीं बदलता — 1 अंक
  2. केवल जनन कोशिकाओं के DNA के जीनों से नियंत्रित लक्षण ही आगे जाते हैं, इसलिए संतति के गन्ने तभी मोटे होंगे जब उसे मोटे गन्ने के जीन मिलें — 1 अंक

प्रश्न 14 (4 अंक)

मेंडल ने अपने प्रयोग मटर के पौधे पर किए। यह आसानी से उगता है, एक मौसम में बहुत बीज देता है, और इसमें स्पष्ट विपरीत लक्षणों के कई जोड़े दिखते हैं। इसके फूलों में सामान्यतः स्वपरागण होता है, पर मेंडल हाथ से दो पौधों का संकरण भी करा सकते थे। एक प्रयोग में उन्होंने हरी फलियों वाले शुद्ध वंशक्रम के पौधों का संकरण पीली फलियों वाले शुद्ध वंशक्रम के पौधों से कराया। F1 के सभी पौधों में हरी फलियाँ थीं। F1 पौधों का स्वपरागण होने देने पर F2 पीढ़ी में हरी और पीली, दोनों प्रकार की फलियाँ दिखीं।

(a) मेंडल के लिए यह उपयोगी क्यों था कि मटर के फूलों में सामान्यतः स्वपरागण होता है? (1 अंक)

उत्तर।

  1. स्वपरागण से शुद्ध वंशक्रम पीढ़ी-दर-पीढ़ी शुद्ध बना रहता है, इसलिए उन्हें ठीक-ठीक पता था कि हर जनक में क्या है (और F1 पौधों का स्वपरागण भी आसान था) — 1 अंक

(b) हरे के लिए G और पीले के लिए g का प्रयोग करते हुए दोनों जनकों और F1 पौधों के जीनोटाइप लिखिए। (1 अंक)

उत्तर।

  1. जनक: GG (हरी फलियाँ) और gg (पीली फलियाँ); F1: Gg — 1 अंक

(c) स्पष्ट कीजिए कि पीली फलियाँ F1 में क्यों नहीं दिखीं, पर F2 में फिर क्यों दिखीं। (2 अंक)

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

  1. F1 पौधों को हरे जनक से G और पीले जनक से g मिला, इसलिए वे Gg हैं। फलियों को हरा बनाने के लिए एक G काफ़ी है, इसलिए g छिप जाता है, पर वह उपस्थित रहता है और बदलता नहीं।
  2. हर F1 पौधा G और g युग्मक बराबर संख्या में बनाता है। F2 में जब एक g युग्मक दूसरे g युग्मक से मिलता है, तो पौधा gg होता है और उसकी फलियाँ पीली होती हैं। ऐसा लगभग 4 में से 1 पौधे में होता है (1 GG : 2 Gg : 1 gg)।

अंक योजना:

  1. F1 पौधे Gg हैं; हरी फलियों के लिए एक G काफ़ी है, इसलिए g छिपा रहता है पर बदलता नहीं — 1 अंक
  2. F1 पौधे G और g युग्मक बराबर संख्या में बनाते हैं; जब दो g युग्मक मिलते हैं, तो पीली फलियों वाले gg पौधे बनते हैं, F2 में लगभग 4 में से 1 — 1 अंक

अथवा

(c) एक विद्यार्थी कहता है, "पीली फलियों का कारक F1 पौधों में नष्ट हो गया और F2 में नए सिरे से बना।" दो कारण दीजिए कि यह सही क्यों नहीं हो सकता। (2 अंक)

उत्तर।

  1. F1 पौधों को पीली फली वाले जनक से g मिला था; G केवल उसका प्रभाव छिपाता है, उसे नष्ट नहीं करता — 1 अंक
  2. पीली फलियाँ एक निश्चित अनुपात में, F2 में लगभग 4 में से 1, लौटती हैं, ठीक वैसे जैसे F1 पौधों के दो g युग्मकों के मिलने पर अपेक्षित है; नए सिरे से बनी चीज़ निश्चित अनुपात में नहीं आती — 1 अंक