जैव प्रक्रम
जैव प्रक्रम जीव विज्ञान खंड का सबसे बड़ा अध्याय है। 2026-27 के प्रतिदर्श प्रश्न पत्र और 2025 व 2026 के बोर्ड प्रश्न पत्रों में इससे 7 से 11 अंक आए। इसमें दो से चार बहुविकल्पीय प्रश्न, प्रायः एक अभिकथन-कारण प्रश्न, और पोषण, श्वसन, परिवहन या उत्सर्जन पर 2 या 3 अंक का एक प्रश्न आता है। इनमें से दो प्रश्न पत्रों में 5 अंक का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न भी इसी अध्याय से था, जिसमें हृदय, रंध्र या वृक्काणु जैसा चित्र था।
सबसे अधिक अंक इन जगहों पर कटते हैं: माँगे गए नामांकन या तीर के बिना बनाए गए चित्र; श्वसन का कौन-सा चरण कहाँ होता है (कोशिकाद्रव्य या माइटोकॉन्ड्रिया), इसमें गड़बड़ी; "धमनियाँ रुधिर को हृदय से दूर ले जाती हैं" के स्थान पर "धमनियाँ ऑक्सीजन-युक्त रुधिर ले जाती हैं" लिख देना; और वृक्क में निस्यंदन तथा वरणात्मक पुनरवशोषण को आपस में मिला देना।
5 मिनट में दोहराएँ
पोषण
- विषमपोषी: मृतजीवी (ब्रेड फफूँद बाहर पचाकर अवशोषित करती है), परजीवी (अमरबेल, फीताकृमि), अमीबा (खाद्य रिक्तिका), पैरामीशियम (पक्ष्माभ)।
- प्रकाश-संश्लेषण: (1) पर्णहरित द्वारा प्रकाश का अवशोषण; (2) प्रकाश → रासायनिक ऊर्जा, जल का विघटन; (3) कार्बन डाइऑक्साइड का कार्बोहाइड्रेट में अपचयन। अतिरिक्त भोजन मंड के रूप में (हम ग्लाइकोजन के रूप में)।
- (सूर्य का प्रकाश, पर्णहरित)
- द्वार कोशिकाएँ फूलें → रंध्र खुले; सिकुड़ें → बंद। मरुस्थलीय पौधे रात में रंध्र खोलकर कार्बन डाइऑक्साइड संचित करते हैं और दिन में उसका उपयोग करते हैं।
- पत्ती की गैसें: दिन में ऑक्सीजन बाहर, कार्बन डाइऑक्साइड अंदर; रात में केवल श्वसन, इसलिए ऑक्सीजन अंदर, कार्बन डाइऑक्साइड बाहर।
| भाग | क्या होता है |
|---|---|
| मुख | लार एमिलेस: मंड → शर्करा |
| आमाशय | HCl (पेप्सिन के लिए अम्लीय माध्यम), पेप्सिन (प्रोटीन), श्लेष्मा (आंतरिक स्तर की रक्षा) |
| क्षुद्रांत्र | पित्त रस (क्षारीय माध्यम, वसा का इमल्सीकरण), ट्रिप्सिन (प्रोटीन), लाइपेज़ (वसा), आंत्र रस → ग्लूकोज़, अमीनो अम्ल, वसा अम्ल + ग्लिसरॉल; दीर्घरोम अवशोषण करते हैं |
| बृहदांत्र | जल का अवशोषण |
श्वसन: ग्लूकोज़ → पाइरुवेट + ऊर्जा (कोशिकाद्रव्य), फिर: यीस्ट, ऑक्सीजन नहीं → इथेनॉल + कार्बन डाइऑक्साइड; पेशी, ऑक्सीजन की कमी → लैक्टिक अम्ल (ऐंठन); ऑक्सीजन के साथ, माइटोकॉन्ड्रिया में → कार्बन डाइऑक्साइड + जल + सबसे अधिक ऊर्जा। यह ऊर्जा ATP के रूप में संचित होती है, जो कोशिका की ऊर्जा मुद्रा है।
साँस लेना: पसलियाँ ऊपर, डायाफ्राम चपटा, वक्ष गुहा बड़ी। कूपिकाएँ: बड़ी, पतली सतह। हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन ले जाता है; कार्बन डाइऑक्साइड अधिकतर घुलकर जाती है। जलीय जंतु तेज़ श्वास लेते हैं: जल में वायु से बहुत कम ऑक्सीजन होती है।
परिवहन: शरीर → दायाँ अलिंद → दायाँ निलय → फेफड़े → बायाँ अलिंद → बायाँ निलय → शरीर (दोहरा परिसंचरण)। हृदय: मछली 2 कक्ष, उभयचर और अनेक सरीसृप 3, पक्षी और स्तनधारी 4 (उनकी अधिक ऊर्जा आवश्यकता के लिए पूर्ण पृथक्करण)। धमनियाँ: हृदय से दूर, मोटी लचीली भित्ति। शिराएँ: हृदय की ओर, वाल्व। केशिकाएँ: एक कोशिका मोटी। प्लेटलेट्स थक्का बनाते हैं; लसीका वसा ले जाती है। जाइलम: जल ऊपर (रात में मूल दाब, दिन में वाष्पोत्सर्जन खिंचाव)। फ्लोएम: भोजन ऊपर-नीचे, ATP का उपयोग।
उत्सर्जन: वृक्क → मूत्रवाहिनी → मूत्राशय → मूत्रमार्ग। केशिका गुच्छ से निस्यंदन बोमन संपुट में; नलिका ग्लूकोज़, अमीनो अम्ल, लवण और जल का पुनरवशोषण करती है। पौधे: वाष्पोत्सर्जन, पत्तियों का गिरना, रिक्तिकाएँ, पुराने जाइलम में गोंद।
चित्र: रंध्र, आहार नाल, श्वसन तंत्र, हृदय, वृक्काणु, उत्सर्जन तंत्र।
सावधानियाँ: फुफ्फुस धमनी ऑक्सीजन-रहित रुधिर ले जाती है; यीस्ट इथेनॉल बनाता है, लैक्टिक अम्ल नहीं; पित्त रस में कोई एंज़ाइम नहीं होता।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: हर प्रश्न पहले कॉपी पर हल कीजिए, फिर उत्तर पढ़िए। हर चरण के सामने लिखे अंक बताते हैं कि परीक्षक क्या देखता है। 1 अंक वाले बहुविकल्पीय और अभिकथन-कारण प्रश्न अंत की क्विज़ में हैं, साथ में ऐसे प्रश्न भी जो जाँचते हैं कि आपने अध्याय कितनी गहराई से समझा है; क्विज़ के हर उत्तर के साथ उसकी व्याख्या दी गई है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (2 और 3 अंक)
प्रश्न 1 (2 अंक)
निम्नलिखित के उत्तर दीजिए:
(a) पौधे जिस कार्बोहाइड्रेट का तुरंत उपयोग नहीं करते, उसे किस रूप में संचित करते हैं? हमारा शरीर अपनी कुछ ऊर्जा किस रूप में संचित करता है? (1 अंक)
उत्तर।
- पौधे इसे मंड (स्टार्च) के रूप में संचित करते हैं — 0.5 अंक
- हमारा शरीर कुछ ऊर्जा ग्लाइकोजन के रूप में संचित करता है — 0.5 अंक
(b) शरीर द्वारा उपयोग किए जाने से पहले हमारे भोजन का छोटे और सरल अणुओं में टूटना क्यों आवश्यक है? (1 अंक)
उत्तर।
- मंड, प्रोटीन और वसा बड़े और जटिल अणु हैं; ये आँत की भित्ति से होकर रुधिर में नहीं जा सकते — 0.5 अंक
- एंज़ाइम इन्हें छोटे घुलनशील अणुओं (ग्लूकोज़, अमीनो अम्ल, वसा अम्ल और ग्लिसरॉल) में तोड़ते हैं, जो अवशोषित होकर कोशिकाओं तक पहुँचते हैं — 0.5 अंक
प्रश्न 2 (3 अंक)
तन्वी ने तीन परखनलियों में 3-3 mL मंड का विलयन लिया। A में उसने 1 mL ताज़ी लार, B में 1 mL ऐसी लार जिसे दो मिनट उबालकर ठंडा किया गया था, और C में 1 mL जल मिलाया। उसने तीनों परखनलियों को लगभग 37 °C के जल वाले बीकर में 20 मिनट रखा, फिर हर परखनली में आयोडीन विलयन की दो बूँदें डालीं।
(a) कौन-सी परखनलियाँ नीली-काली हो जाएँगी? कारण दीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- B और C नीली-काली होंगी, क्योंकि उनका मंड पचा नहीं है — 0.5 अंक
- A में नीला-काला रंग बहुत कम या नहीं आएगा, क्योंकि ताज़ी लार के लार एमिलेस ने मंड को शर्करा में तोड़ दिया है — 0.5 अंक
(b) परखनली B का परिणाम परखनली C जैसा क्यों है? (1 अंक)
उत्तर।
- उबालने से लार एमिलेस एंज़ाइम नष्ट हो गया, इसलिए उबली लार जल की तरह मंड को नहीं पचा सकी — 1 अंक
(c) उसने परखनलियों को लगभग 37 °C पर क्यों रखा? (1 अंक)
उत्तर।
- 37 °C हमारे शरीर का ताप है, जिस पर लार एमिलेस हमारे मुख में कार्य करता है — 1 अंक
प्रश्न 3 (3 अंक)
खुले रंध्र छिद्र का नामांकित चित्र बनाइए। द्वार कोशिकाओं, रंध्र छिद्र और हरितलवकों को नामांकित कीजिए। पत्ती के रंध्रों से गैसों का आदान-प्रदान दिन और रात में कैसे भिन्न होता है?
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
चित्र में दोनों द्वार कोशिकाओं के बीच छिद्र दिखाया गया है। संकेत: A द्वार कोशिका, B रंध्र छिद्र, C हरितलवक, D केंद्रक, E बाह्यत्वचा कोशिका।
- दिन में: पत्ती श्वसन और प्रकाश-संश्लेषण दोनों करती है। प्रकाश-संश्लेषण में श्वसन से बनी कार्बन डाइऑक्साइड खप जाती है और वायु से और कार्बन डाइऑक्साइड ली जाती है। बाहर निकलने वाली मुख्य गैस ऑक्सीजन होती है।
- रात में: प्रकाश नहीं होता, इसलिए प्रकाश-संश्लेषण नहीं होता। पत्ती केवल श्वसन करती है, इसलिए ऑक्सीजन लेती है और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ती है।
अंक योजना:
- सही चित्र: दो सेम के आकार की द्वार कोशिकाओं के बीच खुला छिद्र, और उनके चारों ओर बाह्यत्वचा कोशिकाएँ — 1 अंक
- द्वार कोशिकाएँ, रंध्र छिद्र और हरितलवक सही नामांकित (चित्र में: A द्वार कोशिका, B रंध्र छिद्र, C हरितलवक; D केंद्रक और E बाह्यत्वचा कोशिका है) — 1 अंक
- दिन: श्वसन में बनी कार्बन डाइऑक्साइड प्रकाश-संश्लेषण में खप जाती है, इसलिए ऑक्सीजन बाहर निकलती है और कार्बन डाइऑक्साइड अंदर जाती है — 0.5 अंक
- रात: प्रकाश-संश्लेषण नहीं होता, पत्ती केवल श्वसन करती है; वह ऑक्सीजन लेती है और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ती है — 0.5 अंक

प्रश्न 4 (2 अंक)
अरुण कहता है, "थार मरुस्थल का नागफनी (कैक्टस) भोजन नहीं बना सकता, क्योंकि वह पूरे गर्म दिन अपने रंध्र बंद रखता है।" बीना कहती है कि बना सकता है। कौन सही है? समझाइए कि नागफनी यह कैसे करता है, और दिन में अपने रंध्र बंद क्यों रखता है।
उत्तर।
- बीना सही है: नागफनी रात में रंध्र खोलकर कार्बन डाइऑक्साइड लेता है और उसे एक मध्यवर्ती पदार्थ के रूप में संचित कर लेता है — 1 अंक
- दिन में वह इसी संचित कार्बन डाइऑक्साइड और सूर्य के प्रकाश से भोजन बनाता है; गर्म, शुष्क दिन में रंध्र बंद रखने से वाष्पोत्सर्जन में जाने वाला जल बचता है — 1 अंक
प्रश्न 5 (2 अंक)
निम्नलिखित के उत्तर दीजिए:
(a) फेफड़ों की रचना ऐसी कैसे है कि गैसों के आदान-प्रदान के लिए बहुत बड़ा क्षेत्रफल मिल सके? (1 अंक)
उत्तर।
- फेफड़ों के अंदर वायु मार्ग छोटी और छोटी नलिकाओं में बँटता जाता है, जो गुब्बारे जैसी कूपिकाओं में समाप्त होती हैं — 0.5 अंक
- कूपिकाएँ लाखों की संख्या में होती हैं, और मिलकर बहुत बड़ी सतह बनाती हैं (फैलाने पर लगभग 80 वर्ग मीटर) — 0.5 अंक
(b) कूपिकाओं की भित्ति का बहुत पतला होना और उसमें रुधिर केशिकाओं का घना जाल होना क्यों उपयोगी है? (1 अंक)
उत्तर।
- गैसों को बहुत कम दूरी पार करनी पड़ती है, इसलिए ऑक्सीजन कूपिकाओं की वायु से रुधिर में जल्दी पहुँच जाती है — 0.5 अंक
- कार्बन डाइऑक्साइड रुधिर से कूपिकाओं में आकर बाहर निकल जाती है, और बहता रुधिर ऑक्सीजन को लगातार आगे ले जाता रहता है — 0.5 अंक
प्रश्न 6 (3 अंक)
प्रवाह आरेख द्वारा दिखाइए कि ग्लूकोज़ का विखंडन (i) यीस्ट में, (ii) ऑक्सीजन की कमी होने पर हमारी पेशी कोशिकाओं में, और (iii) ऑक्सीजन की उपस्थिति में कैसे होता है। प्रत्येक चरण कोशिका के किस भाग में होता है, बताइए। किस मार्ग में सबसे अधिक ऊर्जा मुक्त होती है?
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
चरण 1 (कोशिकाद्रव्य में, तीनों में समान): ग्लूकोज़ (6-कार्बन) → पाइरुवेट (3-कार्बन) + ऊर्जा
चरण 2, तीन अलग मार्ग:
- यीस्ट में, ऑक्सीजन के बिना (कोशिकाद्रव्य में): पाइरुवेट → इथेनॉल + कार्बन डाइऑक्साइड + ऊर्जा। इसे किण्वन कहते हैं।
- पेशी कोशिकाओं में, ऑक्सीजन की कमी होने पर (कोशिकाद्रव्य में): पाइरुवेट → लैक्टिक अम्ल + ऊर्जा
- ऑक्सीजन की उपस्थिति में (माइटोकॉन्ड्रिया में): पाइरुवेट → कार्बन डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा
तीसरे मार्ग, यानी वायवीय श्वसन, में बाकी दोनों की तुलना में बहुत अधिक ऊर्जा मुक्त होती है।
अंक योजना:
- पहला चरण, तीनों में समान: ग्लूकोज़ (6-कार्बन) → पाइरुवेट (3-कार्बन) + ऊर्जा, कोशिकाद्रव्य में — 1 अंक
- यीस्ट, ऑक्सीजन नहीं: पाइरुवेट → इथेनॉल + कार्बन डाइऑक्साइड + ऊर्जा; पेशी, ऑक्सीजन की कमी: पाइरुवेट → लैक्टिक अम्ल + ऊर्जा (दोनों कोशिकाद्रव्य में) — 1 अंक
- ऑक्सीजन की उपस्थिति में: पाइरुवेट → कार्बन डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा, माइटोकॉन्ड्रिया में; इस वायवीय मार्ग में सबसे अधिक ऊर्जा मुक्त होती है — 1 अंक
प्रश्न 7 (3 अंक)
राहुल ने अपनी कॉपी में लिखा: "धमनियाँ ऑक्सीजन-युक्त रुधिर ले जाती हैं और शिराएँ ऑक्सीजन-रहित रुधिर।"
(a) एक ऐसी रुधिर वाहिका का नाम लिखिए जिससे पता चले कि यह बात सदा सही नहीं है। धमनी और शिरा को पहचानने का सही आधार क्या है? (1 अंक)
उत्तर।
- फुफ्फुस धमनी ऑक्सीजन-रहित रुधिर को हृदय से फेफड़ों तक ले जाती है (या: फुफ्फुस शिरा ऑक्सीजन-युक्त रुधिर को फेफड़ों से हृदय तक लाती है) — 0.5 अंक
- धमनियाँ रुधिर को हृदय से दूर ले जाती हैं; शिराएँ रुधिर को वापस हृदय तक लाती हैं — 0.5 अंक
(b) संरचना के आधार पर धमनियों और शिराओं में दो अंतर कारण सहित लिखिए। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- भित्ति: धमनियों की भित्ति मोटी और लचीली होती है। हृदय से रुधिर अधिक दाब पर निकलता है, इसलिए भित्ति का मज़बूत और खिंचने वाला होना ज़रूरी है। शिराओं की भित्ति पतली होती है, क्योंकि उन तक पहुँचते-पहुँचते रुधिर का दाब कम हो जाता है।
- वाल्व: शिराओं में वाल्व होते हैं, धमनियों में नहीं। शिराओं में दाब कम होता है, इसलिए रुधिर को उलटा बहने से रोकने के लिए वाल्व चाहिए; वे रुधिर को केवल हृदय की ओर जाने देते हैं।
अंक योजना:
- धमनियों की भित्ति मोटी और लचीली होती है, क्योंकि हृदय से रुधिर अधिक दाब पर निकलता है — 1 अंक
- शिराओं की भित्ति पतली होती है और उनमें वाल्व होते हैं, क्योंकि उनमें रुधिर अधिक दाब पर नहीं होता; वाल्व रुधिर को केवल हृदय की ओर बहने देते हैं — 1 अंक
प्रश्न 8 (2 अंक)
क्या होगा
(a) यदि किसी व्यक्ति के रुधिर में प्लेटलेट्स सामान्य से बहुत कम हों? (1 अंक)
उत्तर।
- प्लेटलेट्स चोट के स्थान पर रुधिर का थक्का बनाकर रिसाव बंद करते हैं; इनके कम होने पर कटे स्थान से रुधिर बहना जल्दी नहीं रुकेगा — 0.5 अंक
- बहुत-सा रुधिर बह जाएगा; रक्तचाप गिर जाएगा, इसलिए अंगों तक कम रुधिर पहुँचेगा — 0.5 अंक
(b) यदि किसी व्यक्ति के रुधिर में हीमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य से बहुत कम हो जाए? (1 अंक)
उत्तर।
- लाल रुधिर कणिकाओं का हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन को फेफड़ों से ऊतकों तक ले जाता है — 0.5 अंक
- हीमोग्लोबिन कम होने पर कोशिकाओं तक कम ऑक्सीजन पहुँचेगी, श्वसन में कम ऊर्जा मुक्त होगी, और व्यक्ति थका हुआ और हाँफता हुआ महसूस करेगा — 0.5 अंक
प्रश्न 9 (3 अंक)
कारण बताइए:
(a) रुधिर केशिकाओं की भित्ति केवल एक कोशिका मोटी होती है। (1 अंक)
उत्तर।
- रुधिर और शरीर की कोशिकाओं के बीच पदार्थों का आदान-प्रदान केशिका की भित्ति से होकर होता है; एक कोशिका मोटी भित्ति से यह आदान-प्रदान जल्दी होता है — 1 अंक
(b) हमारे रुधिर में अधिकांश कार्बन डाइऑक्साइड प्लाज़्मा में घुलकर जाती है, जबकि ऑक्सीजन हीमोग्लोबिन द्वारा ले जाई जाती है। (1 अंक)
उत्तर।
- कार्बन डाइऑक्साइड जल में ऑक्सीजन से अधिक घुलनशील है, इसलिए वह प्लाज़्मा में घुल जाती है; ऑक्सीजन पर्याप्त नहीं घुलती, इसलिए उसे हीमोग्लोबिन ले जाता है, जिसकी ऑक्सीजन के प्रति बंधुता बहुत अधिक होती है — 1 अंक
(c) आमाशय से क्षुद्रांत्र में आने वाले भोजन को क्षारीय बनाना पड़ता है। (1 अंक)
उत्तर।
- आमाशय से आने वाला भोजन अम्लीय होता है, परंतु अग्न्याशयिक एंज़ाइम केवल क्षारीय माध्यम में कार्य करते हैं; यकृत से आने वाला पित्त रस उसे क्षारीय बनाता है — 1 अंक
प्रश्न 10 (3 अंक)
मानव उत्सर्जन तंत्र का नामांकित चित्र बनाइए। इनमें से किन्हीं चार को नामांकित कीजिए: वृक्क, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय, मूत्रमार्ग, वृक्क धमनी, वृक्क शिरा। मूत्रवाहिनियों और मूत्राशय का क्या कार्य है?
उत्तर।
- सही चित्र: दो वृक्क, जो मूत्रवाहिनियों द्वारा मूत्राशय से जुड़े हैं, और उसके नीचे मूत्रमार्ग — 1 अंक
- कोई चार भाग सही नामांकित, प्रत्येक 0.25 (चित्र में: A वृक्क, B वृक्क धमनी, C वृक्क शिरा, D मूत्रवाहिनी, E मूत्राशय, F मूत्रमार्ग, G महाधमनी, H महाशिरा) — 1 अंक
- मूत्रवाहिनियाँ वृक्कों में बने मूत्र को मूत्राशय तक ले जाती हैं — 0.5 अंक
- मूत्राशय मूत्र को तब तक संचित रखता है जब तक वह मूत्रमार्ग से बाहर न निकाला जाए; यह पेशीय है और तंत्रिका नियंत्रण में रहता है — 0.5 अंक

प्रश्न 11 (2 अंक)
पौधों में उत्सर्जन के लिए कोई विशेष अंग नहीं होते। वे (a) अतिरिक्त जल और प्रकाश-संश्लेषण में बनी ऑक्सीजन, (b) अन्य अपशिष्ट पदार्थों से कैसे छुटकारा पाते हैं? (b) के लिए दो तरीके लिखिए।
उत्तर।
- (a) अतिरिक्त जल वाष्पोत्सर्जन द्वारा निकलता है और ऑक्सीजन विसरित होकर बाहर जाती है, दोनों पत्तियों के रंध्रों से — 1 अंक
- (b) कोई दो: अपशिष्ट कोशिका की रिक्तिकाओं में संचित होते हैं; उन पत्तियों में संचित होते हैं जो बाद में गिर जाती हैं; रेज़िन और गोंद के रूप में, मुख्यतः पुराने जाइलम में, संचित होते हैं; पौधे के आसपास की मिट्टी में छोड़ दिए जाते हैं — 1 अंक
दीर्घ उत्तरीय और केस आधारित प्रश्न
प्रश्न 12 (5 अंक)
विकल्प (A) या (B) में से किसी एक का उत्तर दीजिए।
(A) मानव में पाचन
(i) मानव आहार नाल का चित्र बनाइए और इनमें से किन्हीं छह को नामांकित कीजिए: ग्रसिका, आमाशय, यकृत, पित्ताशय, अग्न्याशय, क्षुद्रांत्र, बृहदांत्र, गुदा। (3 अंक)
उत्तर।
- सही चित्र: ग्रसिका से आमाशय, फिर कुंडलित क्षुद्रांत्र और बृहदांत्र, जो गुदा पर समाप्त होती है; यकृत, पित्ताशय और अग्न्याशय सही स्थान पर — 1.5 अंक
- कोई छह भाग सही नामांकित, प्रत्येक 0.25 (चित्र में: A ग्रसिका, B आमाशय, C यकृत, D पित्ताशय, E अग्न्याशय, F क्षुद्रांत्र, G बृहदांत्र, H गुदा) — 1.5 अंक

(ii) अग्न्याशयिक रस में उपस्थित दो एंज़ाइमों के नाम लिखिए और बताइए कि प्रत्येक किस पर कार्य करता है। आंत्र रस के एंज़ाइम अंत में प्रोटीन, जटिल कार्बोहाइड्रेट और वसा को किसमें बदल देते हैं? (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
अग्न्याशयिक रस में ट्रिप्सिन होता है, जो प्रोटीन का पाचन करता है, और लाइपेज़, जो पित्त रस द्वारा इमल्सीकृत वसा को तोड़ता है।
क्षुद्रांत्र की भित्ति की ग्रंथियाँ आंत्र रस स्रावित करती हैं। इसके एंज़ाइम पाचन पूरा करते हैं: प्रोटीन अमीनो अम्ल में, जटिल कार्बोहाइड्रेट ग्लूकोज़ में, और वसा, वसा अम्ल तथा ग्लिसरॉल में बदल जाते हैं। फिर ये छोटे अणु दीर्घरोमों द्वारा अवशोषित होते हैं।
अंक योजना:
- ट्रिप्सिन प्रोटीन का पाचन करता है — 0.5 अंक
- लाइपेज़ इमल्सीकृत वसा को तोड़ता है — 0.5 अंक
- प्रोटीन → अमीनो अम्ल; जटिल कार्बोहाइड्रेट → ग्लूकोज़; वसा → वसा अम्ल और ग्लिसरॉल — 1 अंक
अथवा
(B) स्वपोषी पोषण
(i) प्रकाश-संश्लेषण क्या है? प्रकाश-संश्लेषण के समय होने वाली तीन मुख्य घटनाएँ लिखिए, और इसका संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए। (3 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
प्रकाश-संश्लेषण वह प्रक्रम है जिसमें हरे पौधे पर्णहरित द्वारा अवशोषित सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा से कार्बन डाइऑक्साइड और जल से कार्बोहाइड्रेट बनाते हैं। इसमें ऑक्सीजन बाहर निकलती है।
इसकी तीन घटनाएँ हैं:
- पर्णहरित द्वारा प्रकाश ऊर्जा का अवशोषण।
- प्रकाश ऊर्जा का रासायनिक ऊर्जा में बदलना, और जल के अणुओं का हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में टूटना।
- कार्बन डाइऑक्साइड का कार्बोहाइड्रेट में अपचयन।
(सूर्य का प्रकाश, पर्णहरित)
अंक योजना:
- प्रकाश-संश्लेषण: हरे पौधे पर्णहरित द्वारा अवशोषित सूर्य के प्रकाश की सहायता से कार्बन डाइऑक्साइड और जल से कार्बोहाइड्रेट बनाते हैं — 0.5 अंक
- घटनाएँ: (1) पर्णहरित द्वारा प्रकाश ऊर्जा का अवशोषण; (2) प्रकाश ऊर्जा का रासायनिक ऊर्जा में रूपांतरण तथा जल का हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विघटन; (3) कार्बन डाइऑक्साइड का कार्बोहाइड्रेट में अपचयन; प्रत्येक 0.5 — 1.5 अंक
- , सूर्य के प्रकाश और पर्णहरित की उपस्थिति में — 1 अंक
(ii) प्रकाश-संश्लेषण एक रेडॉक्स (उपचयन-अपचयन) प्रक्रम है। इसका कौन-सा अभिकारक अपचयित होता है और कौन-सा उपचयित? प्रत्येक का कारण दीजिए। (2 अंक)
उत्तर।
- कार्बन डाइऑक्साइड अपचयित होती है: ग्लूकोज़ बनते समय यह हाइड्रोजन ग्रहण करती है (और ऑक्सीजन खोती है) — 1 अंक
- जल उपचयित होता है: टूटते समय यह हाइड्रोजन खोता है, और इसकी ऑक्सीजन गैस के रूप में मुक्त हो जाती है — 1 अंक
प्रश्न 13 (5 अंक)
विकल्प (A) या (B) में से किसी एक का उत्तर दीजिए।
(A) मानव हृदय
(i) मानव हृदय का व्यवस्थात्मक काट (सेक्शन) चित्र बनाइए। इनमें से किन्हीं छह को नामांकित कीजिए: दायाँ अलिंद, दायाँ निलय, बायाँ अलिंद, बायाँ निलय, महाधमनी, फुफ्फुस धमनी, फुफ्फुस शिरा, महाशिरा। तीरों द्वारा रुधिर प्रवाह की दिशा दिखाइए। (3 अंक)
उत्तर।
- सही चित्र: चार कक्ष, दाएँ और बाएँ भाग के बीच भित्ति, अलिंदों और निलयों के बीच वाल्व, निलयों की भित्ति अलिंदों से मोटी और बाएँ निलय की भित्ति सबसे मोटी — 1 अंक
- कोई छह भाग सही नामांकित, प्रत्येक 0.25 (चित्र में: A दायाँ अलिंद, B दायाँ निलय, C बायाँ अलिंद, D बायाँ निलय, E महाधमनी, F फुफ्फुस धमनी, G फुफ्फुस शिराएँ, H महाशिरा) — 1.5 अंक
- तीर, जो दिखाएँ कि रुधिर अलिंदों से निलयों में और फिर धमनियों से बाहर जाता है — 0.5 अंक

(ii) रुधिर की एक बूँद दाएँ निलय से बाहर पंप की जाती है। शरीर में पंप किए जाने तक यह जिन वाहिकाओं, अंग और कक्षों से होकर जाती है, उनके नाम क्रम से लिखिए। रास्ते में इसे उलटा बहने से क्या रोकता है? (2 अंक)
उत्तर।
- दायाँ निलय → फुफ्फुस धमनी → फेफड़े (ऑक्सीजन लेता है, कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है) → फुफ्फुस शिरा → बायाँ अलिंद → बायाँ निलय → महाधमनी → शरीर — 1 अंक
- वाल्व: अलिंदों या निलयों के संकुचित होने पर ये बंद हो जाते हैं, जिससे रुधिर उलटा नहीं बह पाता — 1 अंक
अथवा
(B) श्वास क्रिया
(i) नासाद्वार से कूपिकाओं तक वायु का मार्ग लिखिए। साँस अंदर लेते समय और बाहर छोड़ते समय पसलियों, डायाफ्राम और वक्ष गुहा में क्या होता है? (3 अंक)
उत्तर।
- नासाद्वार (बारीक बाल और श्लेष्मा वायु को छानते हैं) → कंठ (ग्रसनी) → श्वासनली (उपास्थि के वलय इसे खुला रखते हैं) → श्वसनी → श्वसनिकाएँ → कूपिकाएँ — 1 अंक
- साँस लेना: पसलियाँ ऊपर उठती हैं और डायाफ्राम चपटा होता है; वक्ष गुहा बड़ी हो जाती है और वायु फेफड़ों में खिंच आती है — 1 अंक
- साँस छोड़ना: पसलियाँ नीचे आती हैं और डायाफ्राम फिर ऊपर की ओर उठता है; वक्ष गुहा छोटी हो जाती है और वायु बाहर निकल जाती है — 1 अंक
(ii) मछली ऑक्सीजन कैसे ग्रहण करती है, और उसे स्थलीय जंतु से बहुत तेज़ी से श्वास क्यों लेना पड़ता है? (2 अंक)
उत्तर।
- यह मुख से जल लेकर उसे क्लोमों (गिल्स) के ऊपर से धकेलती है, जहाँ रुधिर जल में घुली ऑक्सीजन ले लेता है — 1 अंक
- उतने ही आयतन की वायु की तुलना में जल में बहुत कम ऑक्सीजन घुली होती है, इसलिए पर्याप्त ऑक्सीजन पाने के लिए इसे बहुत तेज़ी से श्वास लेना पड़ता है — 1 अंक
प्रश्न 14 (5 अंक)
विकल्प (A) या (B) में से किसी एक का उत्तर दीजिए।
(A) मानव में उत्सर्जन
(i) वृक्काणु (नेफ्रॉन) का नामांकित चित्र बनाइए और ये भाग नामांकित कीजिए: बोमन संपुट, केशिका गुच्छ (ग्लोमेरुलस), नलिका, संग्राहक वाहिनी, वृक्क धमनी की शाखा, वृक्क शिरा की शाखा। (3 अंक)
उत्तर।
- सही चित्र: प्याले के आकार का बोमन संपुट जिसमें केशिका गुच्छ है, एक लंबी कुंडलित नलिका जो संग्राहक वाहिनी में खुलती है, और रुधिर वाहिकाएँ — 1.5 अंक
- छह भाग सही नामांकित, प्रत्येक 0.25 (चित्र में: A बोमन संपुट, B केशिका गुच्छ, C नलिका, D संग्राहक वाहिनी, E वृक्क धमनी की शाखा, F वृक्क शिरा की शाखा) — 1.5 अंक

(ii) बोमन संपुट में एकत्र होने वाला द्रव और संग्राहक वाहिनी से निकलने वाला मूत्र एक जैसे नहीं होते। दो ऐसे पदार्थों के नाम लिखिए जो पहले द्रव में होते हैं पर सामान्यतः मूत्र में नहीं होते, और बताइए कि उनका क्या होता है। मूत्र में इस द्रव से बहुत कम जल क्यों होता है? (2 अंक)
उत्तर।
- ग्लूकोज़ और अमीनो अम्ल; जब द्रव नलिका में आगे बढ़ता है तो इनका चारों ओर की केशिकाओं के रुधिर में वरणात्मक पुनरवशोषण हो जाता है — 1 अंक
- नलिका में अधिकांश जल का भी पुनरवशोषण हो जाता है, इसलिए थोड़ी मात्रा में गाढ़ा मूत्र ही बचता है — 1 अंक
अथवा
(B) रुधिर और लसीका
(i) रुधिर में एक तरल भाग होता है जिसमें कोशिकाएँ तैरती रहती हैं। प्लाज़्मा, लाल रुधिर कणिकाओं और प्लेटलेट्स का एक-एक कार्य लिखिए। (3 अंक)
उत्तर।
- प्लाज़्मा भोजन, कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजनी अपशिष्ट को घुले हुए रूप में ले जाता है — 1 अंक
- लाल रुधिर कणिकाओं में हीमोग्लोबिन होता है, जो ऑक्सीजन को फेफड़ों से ऊतकों तक ले जाता है — 1 अंक
- प्लेटलेट्स कटे स्थान पर रुधिर का थक्का बनाकर रिसाव बंद करते हैं, जिससे रुधिर व्यर्थ नहीं बहता — 1 अंक
(ii) लसीका क्या है और यह कैसे बनती है? इसके दो कार्य लिखिए। (2 अंक)
उत्तर।
- केशिकाओं की भित्ति के छिद्रों से कुछ प्लाज़्मा, प्रोटीन और रुधिर कोशिकाएँ कोशिकाओं के बीच के स्थानों में निकल आती हैं; यह ऊतक द्रव ही लसीका है, जो प्लाज़्मा जैसा रंगहीन द्रव है और इसमें प्रोटीन कम होता है — 1 अंक
- यह आँत से पची और अवशोषित वसा को ले जाती है, और कोशिकाओं के बीच के अतिरिक्त द्रव को वापस रुधिर में पहुँचाती है — 1 अंक
प्रश्न 15 (4 अंक)
प्रिया की माँ ने देखा कि थोड़े यीस्ट वाला भटूरे का आटा गर्मियों में लगभग एक घंटे में फूल जाता है, पर सर्दियों में बहुत अधिक समय लेता है। इसे समझने के लिए प्रिया ने चार परखनलियाँ तैयार कीं। हर परखनली एक ऐसे कॉर्क से बंद थी जिसमें मुड़ी हुई काँच की नली लगी थी, और नली का दूसरा सिरा ताज़ा बने चूने के पानी में डूबा था। उसने नोट किया कि चूने का पानी कितनी देर में दूधिया हुआ।
| परखनली | सामग्री | ताप | चूने का पानी दूधिया हुआ |
|---|---|---|---|
| 1 | यीस्ट + शर्करा का विलयन | 35 °C | 6 मिनट बाद |
| 2 | यीस्ट + शर्करा का विलयन | 10 °C | 28 मिनट बाद |
| 3 | यीस्ट + केवल जल | 35 °C | 1 घंटे में कोई परिवर्तन नहीं |
| 4 | उबालकर ठंडा किया यीस्ट + शर्करा का विलयन | 35 °C | 1 घंटे में कोई परिवर्तन नहीं |
(a) किस गैस ने चूने के पानी को दूधिया किया? परखनली 1 में यीस्ट द्वारा बनने वाले दूसरे उत्पाद का नाम लिखिए। (1 अंक)
उत्तर।
- कार्बन डाइऑक्साइड — 0.5 अंक
- इथेनॉल (ऐल्कोहॉल) — 0.5 अंक
(b) परखनली 3 में कोई परिवर्तन क्यों नहीं हुआ? (1 अंक)
उत्तर।
- यीस्ट के पास तोड़ने के लिए शर्करा नहीं थी; भोजन के बिना श्वसन नहीं हुआ, इसलिए कार्बन डाइऑक्साइड नहीं बनी — 1 अंक
(c) परखनली 1 और 4 मिलकर क्या दिखाती हैं? परखनली 1 और 2 की तुलना से प्रिया की माँ को अपने आटे के बारे में क्या पता चलता है? (2 अंक)
उत्तर।
- परखनली 4 में उबालने से यीस्ट मर गया; केवल जीवित यीस्ट कोशिकाएँ ही श्वसन करके कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ती हैं — 1 अंक
- गर्म होने पर यीस्ट बहुत तेज़ी से श्वसन करता है; गर्मियों में यह जल्दी कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है, और गैस के बुलबुले आटे को जल्दी फुला देते हैं — 1 अंक
अथवा
(c) प्रिया का भाई कहता है, "यह गैस बनाने के लिए यीस्ट परखनली की वायु से ऑक्सीजन ले रहा होगा।" क्या वह सही है? कारण दीजिए और यीस्ट में होने वाले प्रक्रम का नाम लिखिए। (2 अंक)
उत्तर।
- नहीं; यीस्ट ऑक्सीजन के बिना भी शर्करा को इथेनॉल और कार्बन डाइऑक्साइड में तोड़ सकता है, इसलिए यह गैस वायु की ऑक्सीजन पर निर्भर नहीं है — 1 अंक
- यह प्रक्रम अवायवीय श्वसन (किण्वन) है — 1 अंक
प्रश्न 16 (4 अंक)
जोधपुर की छात्रा काव्या ने एक ही प्रकार और आकार के तीन गमले वाले पौधे P, Q और R लिए, और चौथा गमला S लिया जिसमें केवल मिट्टी थी। उसने चारों गमलों को बराबर पानी दिया और हर गमले की मिट्टी को पॉलिथीन की शीट से ढक दिया, जिसे तने के चारों ओर (S में किनारे के चारों ओर) बाँध दिया। उसने पौधे R की सारी पत्तियाँ तोड़ दीं। उसने P, R और S को तेज़ धूप में और Q को छाया में रखा, और हर गमले को सुबह 8 बजे तथा फिर दोपहर 2 बजे तौला।
| गमला | P | Q | R | S |
|---|---|---|---|---|
| सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक द्रव्यमान में कमी (g) | 46 | 17 | 4 | 1 |
(a) उसने मिट्टी को पॉलिथीन से क्यों ढका, और गमला S क्यों रखा? (1 अंक)
उत्तर।
- ताकि मिट्टी से वाष्पित होने वाला जल न गिना जाए; केवल पौधे द्वारा खोया गया जल मापा जाए — 0.5 अंक
- S नियंत्रण है: इससे पता चलता है कि बिना पौधे वाला ढका गमला लगभग कोई जल नहीं खोता — 0.5 अंक
(b) P में अधिकांश कमी किस प्रक्रम के कारण हुई? कौन-सा परिणाम दिखाता है कि यह कमी मुख्य रूप से पत्तियों से होती है? (1 अंक)
उत्तर।
- वाष्पोत्सर्जन — 0.5 अंक
- बिना पत्तियों वाले R ने उसी धूप में केवल 4 g खोया, जबकि P ने 46 g — 0.5 अंक
(c) P ने Q से बहुत अधिक जल क्यों खोया? जल की इस कमी से पौधे को होने वाला एक लाभ लिखिए। (2 अंक)
उत्तर।
- तेज़ धूप में रंध्र खुले रहते हैं और पत्तियाँ अधिक गर्म होती हैं, इसलिए छाया की तुलना में पत्तियों से जल बहुत तेज़ी से वाष्पित होता है — 1 अंक
- कोई एक: इससे वह खिंचाव बनता है जो जल और घुले हुए खनिजों को जड़ों से पत्तियों तक ऊपर लाता है; यह पौधे को ठंडा रखने में मदद करता है — 1 अंक
अथवा
(c) P और R के परिणामों से, P की पत्तियों द्वारा प्रति घंटे खोया गया जल ग्राम में ज्ञात कीजिए। उन छिद्रों के नाम लिखिए जिनसे यह जल निकलता है, और उन कोशिकाओं के भी जो उन्हें खोलती और बंद करती हैं। (2 अंक)
उत्तर।
- पत्तियों के कारण कमी g, 6 घंटे में; अतः g प्रति घंटा — 1 अंक
- जल रंध्रों से निकलता है, जिन्हें द्वार कोशिकाएँ खोलती और बंद करती हैं — 1 अंक