हमारा पर्यावरण
हमारा पर्यावरण अध्याय बोर्ड प्रश्न पत्र में 5 अंक का होता है (फरवरी 2026 में 4)। अपनी इकाई का यही एक अध्याय अब पाठ्यक्रम में बचा है।
ये अंक प्रायः खाद्य श्रृंखला, 10 प्रतिशत नियम, जैव-आवर्धन या ओज़ोन पर एक या दो बहुविकल्पीय प्रश्नों और एक अभिकथन-कारण प्रश्न से, तथा ऊर्जा प्रवाह, खाद्य श्रृंखला या कचरे पर 2 या 3 अंक के एक प्रश्न से आते हैं। इस अध्याय से अब तक 5 अंक का या केस आधारित प्रश्न नहीं आया है, इसलिए यहाँ के केस आधारित प्रश्न इन्हीं विचारों का लंबे प्रारूप में अभ्यास कराते हैं।
अंक प्रायः यहाँ कटते हैं:
- 10 प्रतिशत नियम गलत चरण पर लगाना, या पौधों द्वारा ग्रहण किए गए 1% के स्थान पर सीधे सूर्य के प्रकाश पर लगाना;
- खाद्य श्रृंखला के तीर खाने वाले से खाए जाने वाले की ओर बनाना;
- यह लिखना कि पोषक तत्वों की तरह ऊर्जा का भी पुनःचक्रण होता है;
- पीड़कनाशी का सबसे अधिक स्तर शीर्ष उपभोक्ताओं के स्थान पर उत्पादकों में बताना।
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पारितंत्र
- जैव (सजीव) घटक: उत्पादक, उपभोक्ता, अपघटक। अजैव (निर्जीव): सूर्य का प्रकाश, ताप, जल, वायु, मिट्टी के खनिज।
- प्राकृतिक: वन, तालाब, झील, घास का मैदान। कृत्रिम (मनुष्य द्वारा बनाए और सँभाले गए): बगीचा, फसल का खेत, जलजीवशाला।
- अपघटक (जीवाणु, कवक) मृत अवशेषों और अपशिष्टों को तोड़कर पोषक तत्व मिट्टी को लौटाते हैं।
खाद्य श्रृंखला और ऊर्जा
| स्तर | कौन | उदाहरण |
|---|---|---|
| 1 | उत्पादक | घास |
| 2 | शाकाहारी, प्राथमिक उपभोक्ता | टिड्डा |
| 3 | छोटे मांसाहारी, द्वितीयक उपभोक्ता | मेंढक |
| 4 | बड़े मांसाहारी, तृतीयक उपभोक्ता | साँप |
- तीर खाए जाने वाले से खाने वाले की ओर बनते हैं। खाद्य जाल आपस में जुड़ी अनेक खाद्य श्रृंखलाओं से बनता है।
- पौधे अपनी पत्तियों पर पड़ने वाले सूर्य के प्रकाश का लगभग 1% ग्रहण करते हैं।
- 10 प्रतिशत नियम: एक स्तर की लगभग 10% ऊर्जा अगले स्तर तक पहुँचती है; बाकी जैव प्रक्रमों में खर्च होकर ऊष्मा के रूप में निकल जाती है। उत्पादक 10,000 J → 1000 J → 100 J → 10 J।
- ऊर्जा का प्रवाह एकदिशिक है; पोषक तत्वों का पुनःचक्रण होता है। इसीलिए खाद्य श्रृंखला में केवल 3 या 4 स्तर होते हैं।
जैव-आवर्धन: पीड़कनाशी जैसे अजैव निम्नीकरणीय रसायन न अपघटित होते हैं न बाहर निकलते हैं, इसलिए हर स्तर पर इनकी सांद्रता बढ़ती है। शीर्ष उपभोक्ताओं में, जो प्रायः मनुष्य होते हैं, सबसे अधिक होती है।
ओज़ोन
- ऊपर बनती है: (पराबैंगनी), फिर ।
- ऊपर पराबैंगनी विकिरण को अवशोषित करती है; भूमि के स्तर पर घातक विष है।
- 1980 के दशक से CFC (प्रशीतक, अग्निशामक) के कारण पतली हुई। पराबैंगनी विकिरण से त्वचा का कैंसर हो सकता है। UNEP, 1987: CFC का उत्पादन 1986 के स्तर पर सीमित।
कचरा
- जैव निम्नीकरणीय: अपघटक तोड़ देते हैं (छिलके, कागज़, सूती कपड़ा)। अजैव निम्नीकरणीय: नहीं टूटते (पॉलिथीन, काँच, DDT), क्योंकि अपघटकों के पास इनके लिए एंज़ाइम नहीं हैं।
- गीला और सूखा कचरा अलग रखें; जैव निम्नीकरणीय भाग से कंपोस्ट बनाएँ; बाकी का पुनः उपयोग और पुनःचक्रण करें। बड़े पैमाने पर कुल्हड़ बनाने में उपजाऊ ऊपरी मिट्टी खप जाती।
सावधानियाँ
- 10% अगले स्तर तक जाती है; 90% नहीं।
- पीड़कनाशी सबसे ऊपर सबसे अधिक होता है, पौधों में नहीं।
- ऊर्जा का पुनःचक्रण नहीं होता।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: हर प्रश्न पहले कॉपी पर हल कीजिए, फिर उत्तर पढ़िए। हर चरण के सामने लिखे अंक बताते हैं कि परीक्षक क्या देखता है। 1 अंक वाले बहुविकल्पीय और अभिकथन-कारण प्रश्न अंत की क्विज़ में हैं, साथ में ऐसे प्रश्न भी जो जाँचते हैं कि आपने अध्याय कितनी गहराई से समझा है; क्विज़ के हर उत्तर के साथ उसकी व्याख्या दी गई है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (2 और 3 अंक)
प्रश्न 1 (2 अंक)
जीवाणु और कवक सब्ज़ियों के छिलकों को अपघटित कर सकते हैं, परंतु पॉलिथीन की थैली को नहीं। क्यों? पॉलिथीन जैसे पदार्थों को फेंक दिए जाने पर क्या होता है?
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- जीवाणु और कवक एंज़ाइमों की सहायता से पदार्थों को तोड़ते हैं, और हर एंज़ाइम केवल कुछ विशेष पदार्थों पर कार्य करता है। उनके पास सब्ज़ियों के छिलकों जैसे प्राकृतिक पदार्थों के लिए एंज़ाइम हैं, इसलिए छिलके जैव निम्नीकरणीय हैं। उनके पास पॉलिथीन पर कार्य करने वाले एंज़ाइम नहीं हैं, इसलिए पॉलिथीन अजैव निम्नीकरणीय है।
- पॉलिथीन को फेंकने पर यह पर्यावरण में बहुत लंबे समय तक बनी रहती है। यह नालियाँ बंद कर सकती है, मिट्टी को खराब कर सकती है, और भोजन के कचरे के साथ इसे निगलने वाले गाय जैसे जंतुओं को हानि पहुँचा सकती है।
अंक योजना:
- अपघटक एंज़ाइमों की सहायता से पदार्थों को तोड़ते हैं, और हर एंज़ाइम केवल विशेष पदार्थों पर कार्य करता है; उनके पास छिलकों जैसे प्राकृतिक पदार्थों के लिए एंज़ाइम हैं, पर पॉलिथीन के लिए नहीं, इसलिए पॉलिथीन अजैव निम्नीकरणीय है — 1 अंक
- ऐसे पदार्थ पर्यावरण में बहुत लंबे समय तक बने रहते हैं; ये नालियाँ बंद कर सकते हैं, मिट्टी खराब कर सकते हैं और इन्हें निगलने वाले जंतुओं को हानि पहुँचा सकते हैं — 1 अंक
प्रश्न 2 (2 अंक)
जैव-आवर्धन क्या है? खाद्य श्रृंखला के सबसे ऊपरी पोषी स्तर के जीवों में इसका स्तर सबसे अधिक क्यों होता है?
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- जैव-आवर्धन खाद्य श्रृंखला के हर अगले पोषी स्तर पर पीड़कनाशियों जैसे हानिकारक रसायनों की सांद्रता का बढ़ना है।
- ये रसायन अजैव निम्नीकरणीय होते हैं। ये न पचते हैं न बाहर निकलते हैं, इसलिए शरीर में रह जाते हैं। हर जंतु अपने से निचले स्तर के अनेक जीवों को खाता है और उनमें उपस्थित सारा रसायन इकट्ठा कर लेता है। इस तरह इसकी मात्रा बढ़ती जाती है, और श्रृंखला के सबसे ऊपर वाले जीवों में सबसे अधिक होती है।
अंक योजना:
- जैव-आवर्धन: खाद्य श्रृंखला के हर अगले पोषी स्तर पर हानिकारक अजैव निम्नीकरणीय रसायनों, जैसे पीड़कनाशियों, की सांद्रता का बढ़ना — 1 अंक
- ये रसायन न अपघटित होते हैं न बाहर निकलते हैं, इसलिए शरीर में जमा होते जाते हैं; हर जीव अपने से निचले स्तर के अनेक जीवों को खाता है, इसलिए सबसे ऊपरी स्तर में सबसे अधिक जमा होते हैं — 1 अंक
प्रश्न 3 (2 अंक)
कबीर का दावा है कि किसी बहुत बड़े वन में एक खाद्य श्रृंखला में आठ पोषी स्तर हो सकते हैं। क्या आप सहमत हैं? 10 प्रतिशत नियम की सहायता से कारण दीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
नहीं, मैं सहमत नहीं हूँ।
- एक पोषी स्तर की केवल लगभग 10% ऊर्जा अगले स्तर तक पहुँचती है। बाकी ऊर्जा जीव अपने जैव प्रक्रमों में खर्च कर देते हैं और वह ऊष्मा के रूप में निकल जाती है।
- पहले स्तर से आठवें स्तर तक 7 चरण हैं, इसलिए उत्पादकों की ऊर्जा का केवल भाग आठवें स्तर तक पहुँचता। यह किसी भी समष्टि को जीवित रखने के लिए बहुत ही कम है।
अंक योजना:
- नहीं; एक पोषी स्तर की केवल लगभग 10% ऊर्जा अगले स्तर तक जाती है, बाकी जैव प्रक्रमों में खर्च हो जाती है — 1 अंक
- आठवें स्तर तक उत्पादकों की ऊर्जा का केवल भाग (0.00001%) बचता, जो किसी भी समष्टि के लिए बहुत कम है; इसलिए खाद्य श्रृंखलाओं में प्रायः केवल 3 या 4 स्तर होते हैं — 1 अंक
प्रश्न 4 (2 अंक)
हर वर्ष वन के पेड़ बहुत बड़ी संख्या में पत्तियाँ गिराते हैं, फिर भी वन की भूमि मीटरों ऊँची मृत पत्तियों के नीचे नहीं दबती। क्यों? यदि यह प्रक्रम रुक जाए तो वन के पौधों का क्या होगा?
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- अपघटक, मुख्यतः जीवाणु और कवक, मृत पत्तियों को सरल पदार्थों में तोड़ देते हैं। ये पदार्थ मिट्टी में मिल जाते हैं, इसलिए पत्तियों का ढेर नहीं लगता।
- यदि अपघटक काम करना बंद कर दें, तो मृत पत्तियाँ और शरीर ढेर होते जाएँगे। उनमें उपस्थित पोषक तत्व उन्हीं में बंद रह जाएँगे और मिट्टी में वापस नहीं जाएँगे। जल्दी ही मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी हो जाएगी, और वन के पौधे ठीक से नहीं बढ़ पाएँगे।
अंक योजना:
- जीवाणु और कवक जैसे अपघटक मृत पत्तियों को सरल पदार्थों में तोड़ देते हैं, जो मिट्टी में मिल जाते हैं — 1 अंक
- अपघटकों के बिना मृत पदार्थ ढेर होता जाता और उसमें बंद पोषक तत्व मिट्टी में वापस नहीं आते; मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी हो जाती और पौधे ठीक से नहीं बढ़ पाते — 1 अंक
प्रश्न 5 (2 अंक)
पोषी स्तर क्या है? किसी तालाब में पाई जा सकने वाली चार पोषी स्तरों की एक खाद्य श्रृंखला लिखिए, और हर जीव का पोषी स्तर अंकित कीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- पोषी स्तर खाद्य श्रृंखला का वह प्रत्येक चरण या स्तर है जिस पर ऊर्जा का स्थानांतरण होता है। उत्पादक पहला पोषी स्तर बनाते हैं, शाकाहारी दूसरा, और इसी प्रकार आगे।
- तालाब की एक खाद्य श्रृंखला:
शैवाल → टैडपोल → जलीय भृंग → अंधा बगुला
शैवाल पहले स्तर (उत्पादक) पर, टैडपोल दूसरे (प्राथमिक उपभोक्ता), जलीय भृंग तीसरे (द्वितीयक उपभोक्ता) और अंधा बगुला चौथे स्तर (तृतीयक उपभोक्ता) पर है।
अंक योजना:
- पोषी स्तर खाद्य श्रृंखला का वह प्रत्येक चरण है जिस पर ऊर्जा का स्थानांतरण होता है, जैसे उत्पादक या शाकाहारी — 1 अंक
- उदाहरण: शैवाल (पहला, उत्पादक) → टैडपोल (दूसरा, प्राथमिक उपभोक्ता) → जलीय भृंग (तीसरा, द्वितीयक उपभोक्ता) → अंधा बगुला (चौथा, तृतीयक उपभोक्ता) — 1 अंक
प्रश्न 6 (2 अंक)
खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल में अंतर स्पष्ट कीजिए। खाद्य जाल का हिस्सा बना कोई जंतु, अपने किसी एक भोज्य जीव के कम हो जाने पर भी प्रायः जीवित क्यों रह पाता है?
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- खाद्य श्रृंखला जीवों की एक अकेली कड़ी है जिसमें हर जीव अपने से पहले वाले को खाता है, जैसे घास → हिरण → बाघ। खाद्य जाल आपस में जुड़ी अनेक खाद्य श्रृंखलाएँ हैं, क्योंकि अधिकतर जीव एक से अधिक प्रकार का भोजन खाते हैं और एक से अधिक प्रकार के जंतु उन्हें खाते हैं।
- खाद्य जाल में जंतु के पास भोजन का एक से अधिक स्रोत होता है। यदि एक प्रकार कम हो जाए, तो वह बाकी प्रकार अधिक खा सकता है, इसलिए प्रायः जीवित रह पाता है। एक अकेली खाद्य श्रृंखला में उसके पास खाने को और कुछ न होता।
अंक योजना:
- खाद्य श्रृंखला जीवों की एक अकेली कड़ी है, जिसमें हर जीव अपने से पहले वाले को खाता है; खाद्य जाल आपस में जुड़ी अनेक खाद्य श्रृंखलाएँ हैं, क्योंकि अधिकतर जीव एक से अधिक प्रकार के जीवों को खाते हैं और उनके भोजन भी बनते हैं — 1 अंक
- खाद्य जाल में जंतु के पास दूसरे प्रकार का भोजन भी होता है, इसलिए एक प्रकार कम होने पर वह दूसरे प्रकार अधिक खा सकता है — 1 अंक
प्रश्न 7 (3 अंक)
आरेख में जैसलमेर के पास थार मरुस्थल के छह प्रकार के जीवों में कौन किसे खाता है, यह दिखाया गया है: P - घास और झाड़ियाँ, Q - भृंग, R - जर्बिल (मरुस्थली चूहे), S - छिपकलियाँ, T - साँप, U - मरु लोमड़ियाँ। हर जीव से उस जंतु की ओर तीर बनाया गया है जो उसे खाता है।
(a) इस जाल में कितनी खाद्य श्रृंखलाएँ हैं? जीवों के नामों का प्रयोग करते हुए चार पोषी स्तरों वाली एक श्रृंखला लिखिए।
(b) कौन-से जंतु एक से अधिक पोषी स्तरों पर हैं? प्रत्येक के स्तरों के नाम लिखिए।
(c) एक लंबा सूखा अधिकतर भृंगों को मार देता है। किस जंतु को सबसे अधिक हानि होगी? साँपों और लोमड़ियों को कम हानि क्यों होगी?

उत्तर।
आदर्श उत्तर:
(a) चार खाद्य श्रृंखलाएँ हैं: P → Q → S → T, P → Q → S → U, P → R → T और P → R → U। चार स्तरों वाली एक श्रृंखला है घास → भृंग → छिपकलियाँ → साँप।
(b) साँप (T) जर्बिल खाते समय तीसरे स्तर पर और छिपकलियाँ खाते समय चौथे स्तर पर हैं। लोमड़ियाँ (U) भी ऐसी ही हैं: जर्बिल के द्वारा तीसरे स्तर पर, छिपकलियों के द्वारा चौथे स्तर पर।
(c) छिपकलियों (S) को सबसे अधिक हानि होगी, क्योंकि इस जाल में भृंग ही उनका एकमात्र भोजन हैं। साँप और लोमड़ियाँ छिपकलियों के साथ जर्बिल भी खाते हैं, इसलिए छिपकलियाँ कम होने पर वे जर्बिल खा सकते हैं।
अंक योजना:
- (a) चार खाद्य श्रृंखलाएँ: P→Q→S→T, P→Q→S→U, P→R→T, P→R→U; उदाहरण: घास → भृंग → छिपकलियाँ → साँप — 1 अंक
- (b) साँप (T): तीसरा और चौथा पोषी स्तर; लोमड़ियाँ (U): तीसरा और चौथा पोषी स्तर — 1 अंक
- (c) छिपकलियाँ (S), क्योंकि भृंग ही उनका एकमात्र भोजन हैं; साँप और लोमड़ियाँ जर्बिल भी खाते हैं, इसलिए वे अधिक जर्बिल खा सकते हैं — 1 अंक
प्रश्न 8 (3 अंक)
तन्वी ने गाँव के एक तालाब पर इन्हें देखा और लिखा: जल, मछलियाँ, सूर्य का प्रकाश, शैवाल, कीचड़ में जीवाणु, मिट्टी में खनिज, मेंढक और जल का ताप।
(a) इन्हें जैव और अजैव घटकों में बाँटिए।
(b) सूची में से एक उत्पादक और एक अपघटक का नाम लिखिए।
(c) इस तालाब पारितंत्र में ऊर्जा कैसे प्रवेश करती है, और इसके पोषक तत्वों का बार-बार उपयोग कैसे होता है?
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
(a) जैव (सजीव): मछलियाँ, शैवाल, जीवाणु और मेंढक। अजैव (निर्जीव): जल, सूर्य का प्रकाश, मिट्टी के खनिज और ताप।
(b) उत्पादक: शैवाल। अपघटक: कीचड़ के जीवाणु।
(c) ऊर्जा शैवाल के द्वारा प्रवेश करती है, जो सूर्य का प्रकाश ग्रहण करके भोजन बनाते हैं। यह भोजन की ऊर्जा शैवाल खाने वाले जंतुओं तक, और आगे मछलियों और मेंढकों तक जाती है। पौधों और जंतुओं के मरने पर जीवाणु उनके अवशेषों को सरल पदार्थों में तोड़ देते हैं। ये पोषक तत्व जल और कीचड़ में लौट जाते हैं, और शैवाल इनका फिर से उपयोग करते हैं।
अंक योजना:
- (a) जैव: मछलियाँ, शैवाल, जीवाणु, मेंढक; अजैव: जल, सूर्य का प्रकाश, मिट्टी के खनिज, ताप — 1 अंक
- (b) उत्पादक: शैवाल; अपघटक: कीचड़ के जीवाणु — 1 अंक
- (c) शैवाल सूर्य के प्रकाश को ग्रहण करके भोजन के रूप में संचित करते हैं, जो मछलियों और मेंढकों तक जाता है; जीवाणु मृत पदार्थ को अपघटित करके पोषक तत्व जल और कीचड़ में लौटाते हैं, जिनका शैवाल फिर उपयोग करते हैं — 1 अंक
प्रश्न 9 (3 अंक)
किसी खाद्य श्रृंखला के उत्पादक 30,000 J सौर ऊर्जा ग्रहण करते हैं। एक नामांकित आरेख बनाकर दिखाइए कि यह ऊर्जा चार पोषी स्तरों से होकर कैसे प्रवाहित होती है, और हर स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा लिखिए। हर अगले स्तर पर ऊर्जा कम क्यों होती जाती है?
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
आरेख नीचे दिया गया है। इसमें 1 = उत्पादक (हरे पौधे), 2 = शाकाहारी (प्राथमिक उपभोक्ता), 3 = छोटे मांसाहारी (द्वितीयक उपभोक्ता) और 4 = बड़े मांसाहारी (तृतीयक उपभोक्ता) हैं। तीर ऊर्जा के प्रवाह की दिशा दिखाता है।
10 प्रतिशत नियम से:
- स्तर 1: 30,000 J
- स्तर 2: 30,000 J का 10% = 3000 J
- स्तर 3: 3000 J का 10% = 300 J
- स्तर 4: 300 J का 10% = 30 J
ऊर्जा कम क्यों होती है: हर स्तर पर जीव अपने भोजन की अधिकतर ऊर्जा चलने-फिरने और श्वसन जैसे अपने जैव प्रक्रमों में खर्च करते हैं, और वह ऊष्मा के रूप में निकल जाती है। भोजन के कुछ भाग खाए या पचाए भी नहीं जाते। इसलिए केवल लगभग 10% उनके शरीर में संचित होकर आगे जाती है।
अंक योजना:
- चार स्तरों वाला आरेख, सही क्रम में, उत्पादक आधार पर और प्रवाह की दिशा दिखाई गई — 1 अंक
- 10 प्रतिशत नियम से ऊर्जा: स्तर 1 से 4 पर 30,000 J, 3000 J, 300 J और 30 J — 1 अंक
- केवल लगभग 10% आगे जाती है; बाकी जीव अपने जैव प्रक्रमों में खर्च करते हैं और वह ऊष्मा के रूप में निकल जाती है, और कुछ भाग खाए ही नहीं जाते — 1 अंक

प्रश्न 10 (3 अंक)
मीनाक्षी ने अपने विद्यालय के बगीचे में दो गड्ढे खोदे: गड्ढा P नम मिट्टी में और गड्ढा Q सूखी रेत में। हर गड्ढे में उसने केले का एक छिलका, मुट्ठी भर गिरी हुई पत्तियाँ, काँच की एक टूटी चूड़ी और एक प्लास्टिक की स्ट्रॉ दबाई। एक महीने बाद उसने इन्हें खोदकर निकाला।
(a) कौन-सी वस्तुएँ उसे दोनों गड्ढों में बिना बदले मिलेंगी? ऐसे पदार्थ क्या कहलाते हैं?
(b) गड्ढे P का केले का छिलका गड्ढे Q के छिलके से कहीं अधिक सड़ गया था। कारण दीजिए।
(c) जो वस्तुएँ नहीं बदलीं, उनसे निपटने का गाड़ने से बेहतर उपाय सुझाइए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
(a) काँच की चूड़ी और प्लास्टिक की स्ट्रॉ दोनों गड्ढों में बिना बदले मिलेंगी। ऐसे पदार्थ अजैव निम्नीकरणीय कहलाते हैं।
(b) केले के छिलके को जीवाणु और कवक जैसे अपघटक तोड़ते हैं, और इन्हें काम करने के लिए नमी चाहिए। गड्ढे P की नम मिट्टी में ये सक्रिय थे, इसलिए छिलका जल्दी सड़ गया। गड्ढे Q की सूखी रेत में ये मुश्किल से काम कर पाए।
(c) टूटा काँच अलग रखकर पुनःचक्रण के लिए भेजना चाहिए। प्लास्टिक की स्ट्रॉ से बचना ही सबसे अच्छा है; इस्तेमाल हो चुकी स्ट्रॉ दूसरे प्लास्टिक के साथ पुनःचक्रण के लिए जानी चाहिए। गाड़ने से ये केवल वर्षों तक मिट्टी में छिपी रहती हैं।
अंक योजना:
- (a) काँच की चूड़ी और प्लास्टिक की स्ट्रॉ; ये अजैव निम्नीकरणीय हैं — 1 अंक
- (b) जीवाणु और कवक जैसे अपघटकों को काम करने के लिए नमी चाहिए; नम मिट्टी में ये सक्रिय रहते हैं, इसलिए P का छिलका जल्दी अपघटित हुआ — 1 अंक
- (c) काँच को पुनःचक्रण के लिए भेजें; प्लास्टिक की स्ट्रॉ से बचें, या उसे दूसरे प्लास्टिक के साथ पुनःचक्रण के लिए भेजें — 1 अंक
दीर्घ उत्तरीय और केस आधारित प्रश्न
प्रश्न 11 (4 अंक)
तंजावुर के पास एक गाँव के धान के खेतों में टिड्डे धान के पौधे खाते हैं, मेंढक टिड्डों को खाते हैं, और साँप मेंढकों को खाते हैं। एक वर्ष खेतों से बहुत-से मेंढक पकड़कर बेच दिए गए। अगले मौसम तक टिड्डे इतने बढ़ गए कि किसानों ने अपनी फसल पर बार-बार पीड़कनाशी छिड़का। बाद में जाँच से पता चला कि उस क्षेत्र के साँपों में यह पीड़कनाशी धान के पौधों की तुलना में कहीं अधिक स्तर पर था।
(a) अनुच्छेद के जीवों को खाद्य श्रृंखला के रूप में लिखिए। मेंढक किस पोषी स्तर पर हैं? (1 अंक)
उत्तर।
- धान के पौधे → टिड्डे → मेंढक → साँप; मेंढक तीसरे पोषी स्तर (द्वितीयक उपभोक्ता) पर है — 1 अंक
(b) मेंढकों के पकड़े जाने के बाद टिड्डे क्यों बढ़ गए? (1 अंक)
उत्तर।
- मेंढक टिड्डों को खाते थे; मेंढक कम होने से कम टिड्डे खाए गए, इसलिए उनकी संख्या बढ़ गई — 1 अंक
(c) पीड़कनाशी साँपों में धान के पौधों की तुलना में कहीं अधिक स्तर पर क्यों मिला? इसे क्या कहते हैं? (2 अंक)
उत्तर।
- पीड़कनाशी अजैव निम्नीकरणीय है; यह न अपघटित होता है न बाहर निकलता है, इसलिए हर पोषी स्तर पर जमा होता जाता है, और सबसे ऊपर वाले साँपों में सबसे अधिक होता है — 1 अंक
- इसे जैव-आवर्धन कहते हैं — 1 अंक
अथवा
(c) सुझाइए कि किसान बहुत कम पीड़कनाशी छिड़ककर भी टिड्डों को कैसे नियंत्रण में रख सकते हैं। स्पष्ट कीजिए कि इससे धान की फसल और साँप, दोनों को कैसे लाभ होगा। (2 अंक)
उत्तर।
- मेंढकों को पकड़ना बंद करें (उनकी रक्षा करें), ताकि मेंढक टिड्डों को खाते रहें — 1 अंक
- टिड्डे कम होने से धान को कम हानि होगी; साँपों को खाने के लिए अधिक मेंढक मिलेंगे, और कम छिड़काव से उनके शरीर में कम पीड़कनाशी जाएगा — 1 अंक
प्रश्न 12 (4 अंक)
लगभग चालीस वर्ष पहले अंटार्कटिका के ऊपर की वायु की माप करने वाले वैज्ञानिकों ने पाया कि वहाँ ओज़ोन परत बहुत पतली हो गई थी। इस क्षति का कारण क्लोरोफ्लुओरोकार्बन (CFC) निकले, ऐसी गैसें जो पुराने रेफ़्रिजरेटरों और अग्निशामकों से रिसकर धीरे-धीरे आकाश में ऊपर पहुँच गई थीं। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के अंतर्गत मिलकर देशों ने 1987 में CFC का उत्पादन और न बढ़ाने पर सहमति दी। आज भारत में बिकने वाले रेफ़्रिजरेटरों पर 'CFC-मुक्त' लिखा होता है।
(a) वायुमंडल के ऊपरी स्तर पर ओज़ोन कैसे बनती है? दोनों चरण लिखिए। (1 अंक)
उत्तर।
- पराबैंगनी विकिरण ऑक्सीजन के अणुओं को परमाणुओं में तोड़ता है: — 0.5 अंक
- हर परमाणु ऑक्सीजन के एक अणु से जुड़कर ओज़ोन बनाता है: — 0.5 अंक
(b) ओज़ोन वायुमंडल में ऊपर उपयोगी है, पर भूमि के स्तर पर हानिकारक। स्पष्ट कीजिए। (1 अंक)
उत्तर।
- ऊपर यह सूर्य के अधिकतर हानिकारक पराबैंगनी विकिरण को अवशोषित करके पृथ्वी के जीवन की रक्षा करती है — 0.5 अंक
- भूमि के स्तर पर साँस के साथ लेने पर यह घातक विष है — 0.5 अंक
(c) स्पष्ट कीजिए कि CFC का उत्पादन सीमित करने का समझौता मनुष्यों के स्वास्थ्य की रक्षा में कैसे सहायक है। (2 अंक)
उत्तर।
- वायु में कम CFC होने से कम ओज़ोन टूटती है, इसलिए ओज़ोन परत अधिकतर पराबैंगनी विकिरण को अवशोषित करती रह सकती है — 1 अंक
- पृथ्वी तक कम पराबैंगनी विकिरण पहुँचता है, इसलिए मनुष्यों में त्वचा के कैंसर जैसे रोगों का खतरा कम होता है — 1 अंक
अथवा
(c) ओज़ोन परत सबसे पहले अंटार्कटिका के ऊपर पतली हुई, जहाँ बहुत कम लोग रहते हैं। भारत के परिवारों को भी इसकी चिंता क्यों करनी चाहिए? एक परिवार सहायता के लिए क्या कर सकता है, एक उपाय बताइए। (2 अंक)
उत्तर।
- ओज़ोन परत पूरी पृथ्वी की रक्षा करती है; कहीं भी छोड़े गए CFC उस तक पहुँचते हैं, और पतली परत से अधिक पराबैंगनी विकिरण सब तक पहुँचता है, जिससे त्वचा के कैंसर का खतरा बढ़ता है — 1 अंक
- कोई एक: CFC-मुक्त रेफ़्रिजरेटर और एयर कंडीशनर खरीदें; पुराने उपकरणों को तोड़कर फेंकने के स्थान पर ठीक से निपटान के लिए दें — 1 अंक
प्रश्न 13 (4 अंक)
इंदौर के एक विद्यालय की कैंटीन में पहले नाश्ता प्लास्टिक की प्लेटों में दिया जाता था, जिन्हें एक बार प्रयोग करके फेंक दिया जाता था। विद्यालय के इको-क्लब ने कैंटीन को सूखे साल के पत्तों से बनी प्लेटों (पत्तल) का उपयोग करने के लिए राज़ी किया। अब प्रयोग की गई पत्तलें विद्यालय के बगीचे के कंपोस्ट गड्ढे में जाती हैं, जबकि पैकेट वाले नाश्ते के प्लास्टिक रैपर एक अलग डिब्बे में इकट्ठे करके पुनःचक्रण के लिए भेजे जाते हैं।
(a) पत्तलें कंपोस्ट गड्ढे में क्यों डाली जा सकती हैं, जबकि प्लास्टिक की प्लेटें नहीं? (1 अंक)
उत्तर।
- पत्तलें जैव निम्नीकरणीय हैं और अपघटकों द्वारा अपघटित हो जाती हैं; प्लास्टिक अजैव निम्नीकरणीय है और अपघटित नहीं होता — 1 अंक
(b) यदि प्लास्टिक की प्लेटें खुले कूड़े के ढेर में फेंक दी जाएँ, तो उनसे होने वाली एक हानि बताइए। (1 अंक)
उत्तर।
- कोई एक: ये वर्षों तक बनी रहती हैं और ढेर लगता है; नालियाँ बंद करती हैं; इन्हें खाने वाले जंतुओं को हानि होती है; मिट्टी को खराब करती हैं — 1 अंक
(c) पत्तलों से कंपोस्ट बनाने से विद्यालय के बगीचे को क्या लाभ होता है? प्लास्टिक रैपरों को पत्तलों से अलग क्यों रखना चाहिए? (2 अंक)
उत्तर।
- अपघटक पत्तलों को कंपोस्ट में बदल देते हैं, जो मिट्टी को पोषक तत्व लौटाती है और बगीचे के पौधों के लिए खाद का काम करती है — 1 अंक
- रैपर अपघटित नहीं होते और कंपोस्ट को खराब कर देते; साफ़ और अलग रखने पर उनका पुनःचक्रण हो सकता है — 1 अंक
अथवा
(c) विद्यार्थियों की आदतों में ऐसे दो बदलाव सुझाइए जिनसे विद्यालय में बनने वाला अजैव निम्नीकरणीय कचरा कम हो। बताइए कि हर बदलाव कैसे सहायता करता है। (2 अंक)
उत्तर।
- कोई एक बदलाव और उसका लाभ, जैसे प्लास्टिक पैकेट वाले नाश्ते और बोतलबंद पानी खरीदने के स्थान पर स्टील का टिफ़िन और पानी की बोतल लाना, जिससे कम रैपर और बोतलें फेंकी जाएँ — 1 अंक
- दूसरा बदलाव और उसका लाभ, जैसे पॉलिथीन की थैलियों के स्थान पर कपड़े के थैले, या प्लास्टिक की स्ट्रॉ और चम्मच न लेना, जिससे ये वस्तुएँ कूड़े के ढेर तक न पहुँचें — 1 अंक
प्रश्न 14 (4 अंक)
जोधपुर के पास बाजरे के एक खेत पर एक मौसम में 50,00,000 kJ सूर्य का प्रकाश पड़ता है। बाजरे के पौधे इस ऊर्जा का लगभग 1% ग्रहण करके भोजन के रूप में संचित करते हैं। अनाज का एक भाग किसान का परिवार खाता है, और एक भाग बकरियों को खिलाया जाता है, जिनका मांस भी परिवार खाता है।
(a) इस मौसम में बाजरे के पौधे भोजन के रूप में कितनी ऊर्जा संचित करते हैं? (1 अंक)
उत्तर।
- 50,00,000 kJ का 1% = 50,000 kJ — 1 अंक
(b) बकरियाँ किस पोषी स्तर पर हैं, और बकरी का मांस खाते समय परिवार किस स्तर पर है? (1 अंक)
उत्तर।
- बकरियाँ: दूसरा पोषी स्तर (प्राथमिक उपभोक्ता); बकरी का मांस खाता परिवार: तीसरा पोषी स्तर (द्वितीयक उपभोक्ता) — 1 अंक
(c) 10,000 kJ ऊर्जा वाला अनाज या तो परिवार सीधे खा सकता है, या उसे बकरियों को खिलाकर परिवार उनका मांस खा सकता है। हर स्थिति में इस ऊर्जा का लगभग कितना भाग भोजन के रूप में परिवार तक पहुँचता है? उसी खेत से किस तरीके से अधिक लोगों का पेट भर सकता है? (2 अंक)
उत्तर।
- सीधे: अनाज की पूरी 10,000 kJ ऊर्जा भोजन के रूप में परिवार तक पहुँचती है; बकरियों के द्वारा: केवल लगभग 10%, 1000 kJ, बकरियों के शरीर में संचित होकर मांस के रूप में परिवार तक पहुँचती है (यदि परिवार पर भी 10 प्रतिशत नियम लगाकर 1000 kJ और 100 kJ लिखा हो और दस गुने का अंतर दिखाया हो, तो वह भी स्वीकार्य है) — 1 अंक
- अनाज सीधे खाने से लगभग 10 गुना अधिक ऊर्जा मिलती है, इसलिए अधिक लोगों का पेट भर सकता है; खाद्य श्रृंखला के हर अतिरिक्त चरण में लगभग 90% ऊर्जा निकल जाती है — 1 अंक
अथवा
(c) किसी वन में बाघों की तुलना में हिरण कहीं अधिक होते हैं। खाद्य श्रृंखला घास → हिरण → बाघ में ऊर्जा के प्रवाह के आधार पर इसे स्पष्ट कीजिए। (2 अंक)
उत्तर।
- हिरणों की ऊर्जा का केवल लगभग 10% बाघों तक पहुँचता है; बाकी हिरणों के जैव प्रक्रमों में खर्च होकर ऊष्मा के रूप में निकल जाता है — 1 अंक
- इसलिए बाघों के स्तर पर बहुत कम ऊर्जा उपलब्ध होती है, जिससे हिरणों की तुलना में बहुत कम बाघ जीवित रह सकते हैं — 1 अंक