राजनीतिक दल
राजनीतिक दल राजनीति विज्ञान का सबसे ज़्यादा अंकों वाला अध्याय है: 2026-27 के प्रतिदर्श प्रश्न-पत्र में 5 अंक, फ़रवरी 2026 में 6 और मई 2026 में 4 अंक। हाल के हर प्रश्न-पत्र में इससे एक बहुविकल्पीय प्रश्न आया (आंतरिक लोकतंत्र, राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय दल, शपथपत्र का आदेश, दल के घटक), प्रतिदर्श प्रश्न-पत्र में केस आधारित प्रश्न, फ़रवरी 2026 में 5 अंक का प्रश्न और मई 2026 तथा 2025 में 3 अंक का प्रश्न। बहुदलीय व्यवस्था चार में से तीन प्रश्न-पत्रों में पूछी गई।
सबसे ज़्यादा अंक इन गलतियों से कटते हैं: दल की मान्यता की दोनों शर्तों में से केवल एक लिखना, किसी दल को एक ही राज्य में ज़्यादा सीटों के कारण 'राष्ट्रीय' मान लेना, लागू हो चुके कदमों और केवल सुझाए गए सुधारों को आपस में मिला देना, और प्रश्न की स्थिति से जोड़े बिना दलों के कार्य गिना देना।
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दल क्या है
- साझी नीतियों पर चुनाव लड़ने और सत्ता पाने के लिए बना समूह; समाज के एक हिस्से के साथ खड़ा होने से इसमें पक्षपात होता है। घटक: नेता, सक्रिय सदस्य, अनुयायी।
कार्य: चुनाव लड़ना; नीतियाँ रखना; कानून बनाना (सदस्य दल की राय पर चलते हैं); सरकार बनाना और चलाना; विपक्ष की भूमिका; जनमत बनाना; लोगों को सरकार और कल्याण योजनाओं से जोड़ना।
ज़रूरत क्यों: बड़े प्रतिनिधि लोकतंत्र को विचार जुटाने, ज़िम्मेदार सरकार बनाने और उसका साथ देने या उस पर अंकुश रखने का तरीका चाहिए।
दलीय व्यवस्था
| एकदलीय | दो-दलीय | बहुदलीय |
|---|---|---|
| चीन: केवल एक दल शासन कर सकता है | सत्ता दो मुख्य दलों में बदलती है; अमेरिका, ब्रिटेन | दो से ज़्यादा दलों के पास अकेले या गठबंधन में असली मौका; भारत |
- दलीय व्यवस्था समाज के विभाजनों, इतिहास और चुनाव प्रणाली से बनती है; इसे चुना नहीं जा सकता। भारत बहुदलीय है, क्योंकि उसकी सामाजिक और क्षेत्रीय विविधता दो या तीन दलों में नहीं समा सकती।
- बहुदलीय: अस्थिर हो सकती है, पर कई हितों को आवाज़ देती है। गठबंधन/मोर्चा: दल मिलकर चुनाव लड़ते और जीतते हैं।
मान्यता: हर दल पंजीकरण कराता है; मान्यता प्राप्त दलों को आरक्षित चुनाव चिह्न मिलता है।
| राज्य स्तरीय दल | राष्ट्रीय दल |
|---|---|
| विधानसभा चुनाव में कम से कम 6% वोट और कम से कम 2 सीटें | लोकसभा या चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में कम से कम 6% वोट और लोकसभा में कम से कम 4 सीटें |
राज्य स्तरीय दलों का दृष्टिकोण क्षेत्रीय होना ज़रूरी नहीं, और वे केंद्र के गठबंधनों में साझेदार बने हैं।
चुनौतियाँ: आंतरिक लोकतंत्र का अभाव; वंशवादी उत्तराधिकार; धन और बाहुबल; सार्थक विकल्प का अभाव।
सुधार: लागू: दलबदल-विरोधी कानून, शपथपत्र (जाँच नहीं), संगठनात्मक चुनावों पर आयोग का आदेश (अक्सर औपचारिकता)। सुझाव: दलों के आंतरिक कामकाज पर कानून, एक-तिहाई टिकट महिलाओं को, चुनाव खर्च सरकार उठाए।
ध्यान दें
- मान्यता के लिए वोट और सीटें, दोनों शर्तें ज़रूरी हैं।
- एक राज्य में ज़्यादा सीटें होने से कोई दल राष्ट्रीय नहीं बनता।
- दो-दलीय का अर्थ यह नहीं कि दूसरे दलों पर रोक है।
- सरकारी चुनाव खर्च और महिलाओं को एक-तिहाई टिकट केवल सुझाव हैं।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: हर प्रश्न पहले कॉपी पर हल कीजिए, फिर उत्तर पढ़िए। हर चरण के सामने लिखे अंक बताते हैं कि परीक्षक क्या देखता है। 1 अंक वाले बहुविकल्पीय और अभिकथन-कारण प्रश्न अंत की क्विज़ में हैं, साथ में ऐसे प्रश्न भी जो जाँचते हैं कि आपने अध्याय कितनी गहराई से समझा है; क्विज़ के हर उत्तर के साथ उसकी व्याख्या दी गई है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (2 और 3 अंक)
प्रश्न 1 (2 अंक)
अपनी पाठ्यपुस्तक में दी गई मान्यता की शर्तों के आधार पर राष्ट्रीय दल और राज्य स्तरीय दल में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- राज्य स्तरीय दल: विधानसभा चुनाव में कम से कम 6% वोट और 2 सीटें।
- राष्ट्रीय दल: लोकसभा या चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में कम से कम 6% वोट और लोकसभा की कम से कम 4 सीटें।
अंक योजना:
- राज्य स्तरीय दल: किसी राज्य की विधानसभा के चुनाव में कुल वोटों का कम से कम 6 प्रतिशत पाता है और कम से कम 2 सीटें जीतता है। — 1 अंक
- राष्ट्रीय दल: लोकसभा चुनाव या चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में कुल वोटों का कम से कम 6 प्रतिशत पाता है और लोकसभा में कम से कम 4 सीटें जीतता है। — 1 अंक
प्रश्न 2 (3 अंक)
काल्पनिक ज़िले रामगढ़ में बाढ़ आती है। राहत धीमी है और बहुत-से परिवारों तक कोई मदद नहीं पहुँची। तीन तरीके बताइए जिनसे सत्ता में या विपक्ष में बैठे राजनीतिक दल इस स्थिति में काम कर सकते हैं, और हर तरीके से दलों का कौन-सा कार्य दिखता है, यह भी लिखिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- विपक्ष: हारे हुए दलों के विधायक विधानसभा में धीमी राहत का मुद्दा उठाकर सरकार की आलोचना करते हैं।
- जनमत बनाना: दल के कार्यकर्ता सभाएँ और प्रदर्शन करते हैं ताकि मुद्दे पर ध्यान जाए।
- सरकार तक पहुँच: स्थानीय कार्यकर्ता परिवारों को फ़ॉर्म भरने और मुआवज़े के लिए अधिकारियों तक पहुँचने में मदद करते हैं।
अंक योजना:
- विपक्ष: हारे हुए दलों के विधायक विधानसभा में धीमी राहत का मुद्दा उठाते हैं और सरकार की विफलता की आलोचना करते हैं। — 1 अंक
- जनमत बनाना: दल के कार्यकर्ता सभाएँ करते हैं, समस्या को उभारते हैं और राहत की माँग पर आंदोलन भी छेड़ सकते हैं। — 1 अंक
- सरकारी तंत्र तक पहुँच: स्थानीय कार्यकर्ता परिवारों को फ़ॉर्म भरने और राहत तथा मुआवज़े के लिए अधिकारियों तक पहुँचने में मदद करते हैं। (यह भी स्वीकार्य: सत्ताधारी दल की सरकार राहत तेज़ करती है, क्योंकि दल सरकार बनाते और चलाते हैं; नेताओं को लोगों की सुननी पड़ती है, वरना अगले चुनाव में हार का डर है।) — 1 अंक
प्रश्न 3 (2 अंक)
दो-दलीय व्यवस्था और बहुदलीय व्यवस्था में अंतर स्पष्ट कीजिए, और दोनों का एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- दो-दलीय: सत्ता दो मुख्य दलों में बदलती है, दूसरे दल कुछ ही सीटें जीतते हैं; जैसे अमेरिका, ब्रिटेन।
- बहुदलीय: दो से ज़्यादा दलों के पास अकेले या गठबंधन में सत्ता का मौका होता है; जैसे भारत।
अंक योजना:
- दो-दलीय व्यवस्था: सत्ता आम तौर पर दो मुख्य दलों के बीच बदलती है; दूसरे दल कुछ सीटें जीत सकते हैं, पर बहुमत का गंभीर मौका इन्हीं दो के पास होता है; जैसे अमेरिका या ब्रिटेन। — 1 अंक
- बहुदलीय व्यवस्था: कई दल होड़ करते हैं, और दो से ज़्यादा दलों के पास अकेले या गठबंधन में सत्ता पाने का ठीक-ठाक मौका होता है; जैसे भारत। — 1 अंक
प्रश्न 4 (3 अंक)
अमेरिका से आई विनिमय छात्रा आयशा का तर्क है कि अगर भारत में भी उसके देश की तरह केवल दो मुख्य दल होते, तो भारत ज़्यादा स्थिर रहता। एक बिंदु बताइए जिस पर वह सही है और दो जिन पर वह गलत है।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- सही: दो दल हों तो आम तौर पर एक अकेले बहुमत पा लेता है, इसलिए सरकार कई साझेदारों पर नहीं टिकती।
- गलत: भारत धर्म, भाषा, जाति और क्षेत्र में इतना विविध है कि दो दल सबकी बात नहीं कह सकते।
- गलत: दलीय व्यवस्था चुनी नहीं जाती; यह देश के विभाजनों और इतिहास से बनती है।
अंक योजना:
- सही: दो मुख्य दल हों तो आम तौर पर एक दल अकेले बहुमत पा लेता है, इसलिए सरकार कई साझेदारों पर नहीं टिकती; बहुदलीय व्यवस्था उलझी हुई और अस्थिर लग सकती है। — 1 अंक
- गलत: भारत में धर्मों, भाषाओं, जातियों और क्षेत्रों की सामाजिक और भौगोलिक विविधता इतनी बड़ी है कि दो दल सबकी बात नहीं कह सकते; बहुत-से समूह और क्षेत्र अपनी आवाज़ खो देंगे। — 1 अंक
- गलत: दलीय व्यवस्था यूँ ही चुनी नहीं जा सकती; यह लंबे समय में समाज के विभाजनों, इतिहास और चुनाव प्रणाली से बनती है। (यह भी स्वीकार्य: स्थिरता ही एकमात्र मूल्य नहीं; कई हितों का प्रतिनिधित्व भी ज़रूरी है।) — 1 अंक
प्रश्न 5 (2 अंक)
बड़े समाजों में प्रतिनिधि लोकतंत्र के बढ़ने के साथ राजनीतिक दल ज़रूरी क्यों हो गए? दो कारण दीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- किसी को सरकार का साथ देना या उस पर लगाम रखनी होती है, और नीतियों पर पक्ष-विपक्ष रखना होता है।
- बड़े देश में लोगों की राय सरकार तक पहुँचानी और सदस्यों को जोड़कर सरकार बनानी होती है।
अंक योजना:
- किसी को सरकार का साथ देना या उस पर लगाम रखनी होती है, और उसकी नीतियों के पक्ष या विपक्ष में संगठित ढंग से बोलना होता है; यह काम दल करते हैं। — 1 अंक
- बड़े देश में करोड़ों लोगों की राय इकट्ठी करके सरकार तक पहुँचानी होती है, और कोई भी सरकार बनने से पहले सैकड़ों निर्वाचित सदस्यों को गुटों में जोड़ना होता है। — 1 अंक
प्रश्न 6 (3 अंक)
काल्पनिक जन सेवा पार्टी में मीरा देवी दल की अध्यक्ष हैं; हरीश हर बैठक में आते हैं, चंदा इकट्ठा करते हैं और घर-घर प्रचार करते हैं; और सलीम हर चुनाव में इस दल को वोट देते हैं, पर इसके काम में और कोई भाग नहीं लेते। यहाँ दिखने वाले राजनीतिक दल के तीन घटकों के नाम लिखिए और हर घटक की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- नेता: मीरा देवी दल का नेतृत्व करती हैं और मुख्य निर्णय लेती हैं।
- सक्रिय सदस्य: हरीश लोगों के बीच दल का काम करते हैं: बैठकें, चंदा और प्रचार।
- अनुयायी: सलीम वोट देकर दल का समर्थन करते हैं, पर और कोई काम नहीं करते।
अंक योजना:
- नेता (मीरा देवी): ये दल का नेतृत्व करते हैं और उसके मुख्य निर्णय लेते हैं। — 1 अंक
- सक्रिय सदस्य (हरीश): ये लोगों के बीच दल का काम करते हैं, जैसे संगठन चलाना, चंदा जुटाना और प्रचार करना। — 1 अंक
- अनुयायी (सलीम): ये दल का समर्थन करते हैं, मुख्य रूप से उसे वोट देकर। — 1 अंक
प्रश्न 7 (3 अंक)
मान लीजिए काल्पनिक राज्य निर्वाचनपुर में एक नया कानून राजनीतिक दलों पर रोक लगा देता है, और उसकी विधानसभा के सभी 150 सदस्य निर्दलीय चुने जाते हैं। तीन ऐसी समस्याएँ स्पष्ट कीजिए जिनका राज्य को सामना करना पड़ सकता है।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- कम से कम 76 सदस्यों को एक-एक करके मनाना होगा, इसलिए सरकार कभी भी गिर सकती है।
- मतदाता सदस्यों को केवल स्थानीय काम पर परखेंगे; पूरे राज्य का जवाब कोई नहीं देगा।
- सरकार से सवाल करने या पूरे राज्य के मुद्दे उठाने वाला कोई संगठित विपक्ष नहीं होगा।
अंक योजना:
- सरकार बनाना रोज़ का मोलभाव बन जाएगा: कम से कम 76 सदस्यों को एक-एक करके मनाना होगा, और सरकार कभी भी गिर सकती है। — 1 अंक
- मतदाता हर सदस्य को केवल उसके क्षेत्र के काम पर परख सकेंगे; पूरे राज्य की योजना किसी के पास नहीं होगी, और राज्य ठीक से न चले तो जवाब किसी से नहीं माँगा जा सकेगा। — 1 अंक
- सरकार से सवाल करने वाला कोई संगठित विपक्ष नहीं होगा, और न लोगों की राय जुटाकर पूरे राज्य के मुद्दों पर अभियान चलाने वाली कोई संस्था। (यह भी स्वीकार्य: हर कानून के लिए हर बार नया बहुमत जुटाना पड़ेगा।) — 1 अंक
प्रश्न 8 (2 अंक)
भारत में हर दल को चुनाव आयोग के पास पंजीकरण कराना होता है, पर केवल कुछ दल 'मान्यता प्राप्त' होते हैं। अंतर स्पष्ट कीजिए और बताइए कि मान्यता से दल को क्या मिलता है।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- हर दल पंजीकरण कराता है, पर मान्यता केवल पर्याप्त वोट और सीटें पाने वाले दलों को मिलती है।
- मान्यता प्राप्त दल को अपने अधिकृत प्रत्याशियों के लिए खास चिह्न और कुछ दूसरी सुविधाएँ मिलती हैं।
अंक योजना:
- पंजीकरण हर दल के लिए ज़रूरी है; मान्यता केवल उन बड़े और पुराने दलों को मिलती है जो आयोग के तय किए वोटों और सीटों का हिस्सा पाते हैं। — 1 अंक
- मान्यता प्राप्त दल को एक खास चुनाव चिह्न मिलता है जिसका उपयोग केवल उसके अधिकृत प्रत्याशी कर सकते हैं, और कुछ दूसरी खास सुविधाएँ भी। — 1 अंक
प्रश्न 9 (2 अंक)
राजनीतिक दल को 'पक्षपाती' क्यों कहा जाता है? क्या यह हमेशा कमज़ोरी है? दो बिंदु दीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- दल समाज के एक हिस्से और उसकी नीतियों के साथ खड़ा होता है, इसलिए मुद्दों पर पक्ष लेता है।
- हमेशा नहीं: इससे मतदाताओं को साफ़ विकल्प मिलते हैं; कमज़ोरी तब है जब दल हर दूसरी राय अनदेखी करे।
अंक योजना:
- दल समाज का एक हिस्सा होता है और कुछ वर्गों तथा नीतियों के साथ खड़ा होता है, इसलिए वह मुद्दों पर एक पक्ष लेता है; पक्ष लेने की यही प्रवृत्ति, अक्सर संतुलित नज़रिए के बिना, पक्षपात है। — 1 अंक
- हमेशा नहीं: पक्ष लेना समाज के असली विभाजनों को दिखाता है और मतदाताओं को साफ़ विकल्प देता है; यह कमज़ोरी तब बनता है जब दल कोई दूसरा नज़रिया देख ही न पाए। (कोई भी तर्कपूर्ण मत स्वीकार्य।) — 1 अंक
प्रश्न 10 (3 अंक)
राजनीतिक दल किन तीन तरीकों से सरकार बनाते और चलाते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- बहुमत जीतने वाला दल या गठबंधन सरकार बनाता है।
- बड़े नीतिगत निर्णय राजनीतिक कार्यपालिका लेती है, जो दलों से आती है और सत्ताधारी दल के कार्यक्रम पर चलती है।
- दल नेताओं को चुनकर प्रशिक्षित करते हैं और फिर उन्हें मंत्री बनाते हैं ताकि सरकार उनके ढंग से चले।
अंक योजना:
- विधायिका में बहुमत जीतने वाला दल या गठबंधन सरकार बनाता है। — 1 अंक
- बड़े नीतिगत निर्णय राजनीतिक कार्यपालिका लेती है, जो दलों से ही आती है, और सरकार सत्ताधारी दल के कार्यक्रम पर चलती है। — 1 अंक
- दल नेताओं को चुनते हैं, उन्हें प्रशिक्षित करते हैं और फिर उन्हें मंत्री बनाते हैं ताकि सरकार उनके ढंग से चले। — 1 अंक
दीर्घ उत्तरीय और स्रोत आधारित प्रश्न
प्रश्न 11 (5 अंक)
काल्पनिक राज्य नवपुर में युवाओं का एक समूह एक नया राजनीतिक दल बना रहा है। वे उन समस्याओं से बचना चाहते हैं जिनकी शिकायत मतदाता दलों के बारे में सबसे ज़्यादा करते हैं। पाँच तरीके सुझाइए जिनसे वे अपना दल चला सकते हैं, और हर तरीके को दलों के सामने की किसी चुनौती से जोड़िए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- आंतरिक लोकतंत्र: सदस्यों का रजिस्टर, नियमित बैठकें और आंतरिक चुनाव हों, और असहमत सदस्यों की बात सुनी जाए।
- वंशवादी उत्तराधिकार: शीर्ष पद खुले चुनाव से भरे जाएँ, ताकि नेतृत्व एक परिवार में न रहे।
- धन और बाहुबल: आपराधिक मामलों वालों को टिकट न मिले, केवल अमीरी देखकर प्रत्याशी न चुने जाएँ, और हिसाब खुला रहे।
- सार्थक विकल्प: दूसरे दलों से सचमुच अलग, साफ़ नीतियाँ हों, ताकि मतदाताओं को असली विकल्प मिले।
- विवादों का न्यायपूर्ण निपटारा: दल के भीतर स्वतंत्र प्राधिकारी हो, ताकि नेता आलोचकों को मनमाने ढंग से बाहर न कर सकें।
अंक योजना:
- आंतरिक लोकतंत्र का अभाव: सदस्यों का रजिस्टर रखें, नियमित बैठकें और आंतरिक चुनाव कराएँ, और असहमत सदस्यों की बात सुनी जाए। — 1 अंक
- वंशवादी उत्तराधिकार: शीर्ष पद खुले और पारदर्शी चुनाव से भरें, ताकि नेतृत्व एक ही परिवार में न घूमता रहे। — 1 अंक
- धन और बाहुबल: आपराधिक मामलों वाले लोगों को टिकट न दें और केवल अमीर होने के कारण प्रत्याशी न चुनें; दल का हिसाब-किताब खुला रखें। — 1 अंक
- सार्थक विकल्प का अभाव: दूसरे दलों से सचमुच अलग, साफ़ नीतियाँ रखें, ताकि मतदाताओं को असली विकल्प मिले। — 1 अंक
- आंतरिक लोकतंत्र का अभाव (विवाद): विवाद सुलझाने के लिए दल के भीतर एक स्वतंत्र प्राधिकारी रखें, ताकि नेता आलोचकों को मनमाने ढंग से बाहर न कर सकें। (किसी चुनौती से जुड़ा कोई भी दूसरा उचित उपाय स्वीकार्य।) — 1 अंक
अथवा
पहले से बने कानूनों के अलावा, राजनीतिक दलों में सुधार के लिए एक आदेश जारी हुआ है और कई सुझाव दिए गए हैं। चुनाव आयोग के आदेश और उसकी सीमा को, तथा दलों में सुधार के चार सुझावों या दूसरे तरीकों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- चुनाव आयोग का आदेश: दल संगठनात्मक चुनाव कराते और आयकर रिटर्न भरते हैं, पर यह अक्सर औपचारिकता है।
- आंतरिक कामकाज पर कानून (सुझाव): सदस्यों का रजिस्टर, दल के संविधान का पालन, विवादों के लिए स्वतंत्र प्राधिकारी और शीर्ष पदों के खुले चुनाव।
- महिलाएँ (सुझाव): लगभग एक-तिहाई टिकट और निर्णय लेने वाली संस्थाओं के पद महिलाओं को।
- चुनाव खर्च सरकार उठाए (सुझाव): सामान के रूप में या मिले वोटों के आधार पर नकद।
- दबाव और भागीदारी: नागरिक और मीडिया याचिकाओं और प्रदर्शनों से दबाव डालें, और सुधार चाहने वाले दलों में शामिल हों।
अंक योजना:
- चुनाव आयोग का आदेश: दलों को संगठनात्मक चुनाव कराने और आयकर रिटर्न दाखिल करने होते हैं; वे ऐसा करते हैं, पर कई बार केवल औपचारिकता में। — 1 अंक
- सुझाव: दलों के आंतरिक कामकाज को नियमित करने वाला कानून, जिससे वे सदस्यों का रजिस्टर रखें, अपने संविधान का पालन करें, विवाद सुलझाने के लिए स्वतंत्र प्राधिकारी रखें और सबसे ऊँचे पदों के लिए खुले चुनाव कराएँ। — 1 अंक
- सुझाव: दल लगभग एक-तिहाई टिकट महिलाओं को दें, और दल की निर्णय लेने वाली संस्थाओं में भी महिलाओं का उतना ही हिस्सा हो। — 1 अंक
- सुझाव: चुनाव का खर्च सरकार उठाए, यानी सरकार दलों को चुनाव खर्च के लिए पैसा या पेट्रोल, कागज़ और टेलीफ़ोन जैसी चीज़ें दे (पैसा पिछले चुनाव में मिले वोटों के आधार पर दिया जा सकता है)। — 1 अंक
- दूसरे तरीके: नागरिक, दबाव समूह, आंदोलन और मीडिया याचिकाओं, प्रचार और आंदोलनों से दलों पर दबाव डाल सकते हैं, और सुधार चाहने वाले लोग दलों में शामिल होकर उन्हें भीतर से बदल सकते हैं। — 1 अंक
प्रश्न 12 (5 अंक)
नीचे दिए गए एक लोकसभा चुनाव के काल्पनिक नतीजों को देखिए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए। पाठ्यपुस्तक में दी गई राष्ट्रीय दल की शर्त का उपयोग कीजिए: लोकसभा या चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में कम से कम 6% वोट और लोकसभा में कम से कम 4 सीटें। (सभी आँकड़े काल्पनिक हैं; कुल 543 सीटें, बहुमत के लिए 272 ज़रूरी।)
| दल | जीती गई लोकसभा सीटें | कितने राज्यों में कम से कम 6% वोट मिले |
|---|---|---|
| P | 180 | 14 |
| Q | 95 | 9 |
| R | 38 | 1 |
| S | 3 | 6 |
| T | 22 | 2 |
| अन्य दल और निर्दलीय | 205 | – |
(a) P, Q, R और S में से कौन-से दल राष्ट्रीय दल की शर्त पूरी करते हैं? स्पष्ट कीजिए कि R और S यह शर्त क्यों पूरी नहीं करते। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- P और Q: दोनों ने चार या ज़्यादा राज्यों में कम से कम 6% वोट और कम से कम 4 सीटें पाईं।
- R: 38 सीटें, पर 6% केवल एक राज्य में; S: छह राज्यों में 6%, पर केवल 3 सीटें।
अंक योजना:
- P और Q: दोनों को चार या ज़्यादा राज्यों में कम से कम 6 प्रतिशत वोट मिले और दोनों ने लोकसभा की कम से कम 4 सीटें जीतीं। — 1 अंक
- R ने 38 सीटें जीतीं, पर 6 प्रतिशत की सीमा केवल एक राज्य में पार की (चार में नहीं); S ने छह राज्यों में 6 प्रतिशत पार किया, पर केवल 3 सीटें जीतीं (4 से कम)। — 1 अंक
(b) किसी दल को बहुमत नहीं मिला। स्पष्ट कीजिए कि यह नतीजा नई सरकार और R तथा T जैसे दलों की भूमिका को किन तीन तरीकों से प्रभावित कर सकता है। (3 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- P के पास ज़रूरी 272 में से केवल 180 सीटें हैं, इसलिए उसे सरकार बनाने के लिए दूसरे दलों से गठबंधन करना होगा।
- एक-दो राज्यों में मज़बूत R और T जैसे दल गठबंधन के साझेदार बनकर केंद्र की सत्ता में हिस्सा पाएँगे।
- साझेदारों को साझा कार्यक्रम पर सहमत होना होगा, इसलिए नीतियाँ आपसी लेन-देन से बनेंगी।
अंक योजना:
- सबसे बड़े दल P के पास ज़रूरी 272 में से केवल 180 सीटें हैं, इसलिए उसे सरकार बनाने के लिए दूसरे दलों से गठबंधन करना पड़ेगा। — 1 अंक
- एक-दो राज्यों में मज़बूत R और T जैसे दल गठबंधन के साझेदार बनेंगे और उन्हें राष्ट्रीय स्तर की सत्ता में हिस्सा मिलेगा। — 1 अंक
- साझेदारों को एक साझा कार्यक्रम पर सहमत होना पड़ेगा, इसलिए सरकार की नीतियाँ P और R तथा T जैसे दलों के बीच लेन-देन से बनेंगी। (यह भी स्वीकार्य: सरकार कम स्थिर हो सकती है; राज्यों की चिंताएँ केंद्र में सुनी जाएँगी।) — 1 अंक
अथवा
उसी काल्पनिक नतीजों वाली तालिका को देखकर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(a) इस नतीजे की तुलना चीन जैसी एकदलीय व्यवस्था से कीजिए। दो तरीके स्पष्ट कीजिए जिनसे इस देश के मतदाताओं के पास ज़्यादा ताकत है। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- यहाँ मतदाता कई दलों में से चुन सकते हैं; चीन में केवल एक दल शासन कर सकता है।
- वे सरकार को वोट से हटा सकते हैं, और विपक्षी दल उससे सवाल कर सकते हैं।
अंक योजना:
- मतदाता अलग-अलग नीतियों वाले कई दलों में से चुन सकते हैं; एकदलीय व्यवस्था में केवल एक दल शासन कर सकता है और सत्ता के लिए खुली होड़ नहीं होती। — 1 अंक
- नाराज़ होने पर मतदाता सत्ताधारी दल को हटा सकते हैं और कोई दूसरा दल या गठबंधन सत्ता में आ सकता है; बीच के समय में विपक्षी दल सरकार से सवाल कर सकते हैं। — 1 अंक
(b) दल R ने अपनी सभी 38 सीटें एक ही राज्य में जीतीं, और एक अख़बार उसे 'क्षेत्रीय दल' कहता है। राज्य स्तरीय दलों के बारे में तीन ऐसे बिंदु स्पष्ट कीजिए जो दिखाते हैं कि यह नाम भ्रम पैदा कर सकता है। (3 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- 'राज्य स्तरीय दल' केवल मान्यता का स्तर बताता है, विचार नहीं।
- ऐसे दल का दृष्टिकोण क्षेत्रीय होना ज़रूरी नहीं; कुछ अखिल भारतीय दल हैं जो कुछ ही राज्यों में सफल हैं।
- कुछ की कई राज्यों में इकाइयाँ हैं, कुछ अपनी राज्य पहचान पर ज़ोर देते हैं; हर दल को उसके दृष्टिकोण से परखें।
अंक योजना:
- 'राज्य स्तरीय दल' केवल यह बताता है कि किसी राज्य में वोटों और सीटों के आधार पर दल को किस स्तर की मान्यता मिली है; यह उसके विचारों के बारे में कुछ नहीं बताता। — 1 अंक
- ऐसे दलों की विचारधारा या दृष्टिकोण क्षेत्रीय होना ज़रूरी नहीं; कुछ अखिल भारतीय दल हैं जो संयोग से कुछ ही राज्यों में सफल हैं। — 1 अंक
- कुछ का संगठन राष्ट्रीय स्तर का है और कई राज्यों में उनकी इकाइयाँ हैं, जबकि कुछ अपनी राज्य पहचान को लेकर बहुत सजग हैं; इसलिए हर दल को उसके अपने दृष्टिकोण से परखना चाहिए। — 1 अंक
प्रश्न 13 (4 अंक)
नीचे दिए गए स्रोत को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
जन मोर्चा के दफ़्तर में चुनाव का दिन
काल्पनिक राज्य सूरजगढ़ के एक दल, जन मोर्चा, की राज्य इकाई ने घोषणा की कि वह मार्च में नया राज्य अध्यक्ष चुनेगी। सूचना में कहा गया कि यह चुनाव इसलिए हो रहा है क्योंकि दल को अपने संगठनात्मक चुनावों की जानकारी देनी होती है।
जब सदस्य दल के दफ़्तर पहुँचे, तो बोर्ड पर केवल एक नामांकन लगा था: दल प्रमुख का सुझाया नाम। मतदाताओं की कोई सूची नहीं लगाई गई थी, और कोई नहीं बता सका कि दल के असल में कितने सदस्य हैं। सदस्यों की सूची बनने तक चुनाव टालने की माँग करने वाले तीन ज़िला कार्यकर्ताओं को उसी शाम निलंबित कर दिया गया।
तब से कुछ युवा सदस्यों ने दल प्रमुख के नाम एक पत्र पर हस्ताक्षर जुटाए हैं और अपनी बात एक स्थानीय अख़बार तक पहुँचाई है। उनमें से एक, फ़रीदा, कहती है कि वह दल नहीं छोड़ेगी। वह दल के अगले आंतरिक चुनाव में खुद खड़ी होना चाहती है।
(a) स्रोत से एक ऐसा संकेत दीजिए जिससे पता चले कि यह चुनाव असली मुकाबला नहीं था। (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
बोर्ड पर केवल एक नाम था, जो दल प्रमुख ने सुझाया था।
अंक योजना:
- कोई एक: बोर्ड पर केवल एक नामांकन था; मतदाताओं की कोई सूची नहीं लगाई गई; किसी को नहीं पता था कि दल के कितने सदस्य हैं। — 1 अंक
(b) तीन कार्यकर्ताओं का निलंबन राजनीतिक दलों की किस चुनौती को दिखाता है? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
आंतरिक लोकतंत्र का अभाव: नेता से सवाल करने वाले सदस्यों को बाहर कर दिया जाता है।
अंक योजना:
- आंतरिक लोकतंत्र का अभाव: ताकत शीर्ष नेता के हाथ में है, और असहमत सदस्यों का दल में टिकना कठिन है। — 1 अंक
(c) आंतरिक लोकतंत्र का ऐसा अभाव दल के आम सदस्यों को किन दो तरीकों से नुकसान पहुँचाता है? स्पष्ट कीजिए। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- सदस्यों को कम जानकारी मिलती है और निर्णयों में उनकी कोई भूमिका नहीं रहती।
- काम से ज़्यादा नेता की वफ़ादारी चलती है, इसलिए आलोचक बाहर होते हैं और आम कार्यकर्ता मुश्किल से आगे बढ़ते हैं।
अंक योजना:
- सदस्यों की सूची, बैठकें या खुले चुनाव न होने से सदस्यों को कम जानकारी मिलती है और दल के निर्णयों पर असर डालने का कोई ज़रिया नहीं रहता। — 1 अंक
- काम या विचारों से ज़्यादा नेता के प्रति वफ़ादारी चलती है, इसलिए आलोचक बाहर कर दिए जाते हैं और आम कार्यकर्ता मुश्किल से ऊपर पहुँच पाते हैं। — 1 अंक
प्रश्न 14 (4 अंक)
नीचे दिए गए स्रोत को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
एक विधायक की डायरी से
ये काल्पनिक राज्य सीतापुर में पहली बार विधायक बनी रेखा की डायरी के पन्ने हैं।
मंगलवार। आज कृषि उपज विधेयक सदन में आया। मुझे उसकी एक धारा पर शंका थी, और हमारी ओर के दो और सदस्यों को भी। पर दल ने अपनी राय तय कर ली थी, और हम सबने विधेयक के पक्ष में वोट दिया। मैं अपने क्षेत्र के उन किसानों के बारे में सोचती रही जो वह धारा बदलवाना चाहते थे।
बुधवार। विधानसभा देखने आए विद्यार्थियों के एक समूह से मिली। एक लड़की ने पूछा कि जब लोगों की लाखों अलग-अलग राय हैं, तो दल गिने-चुने ही क्यों हैं। मैंने उसे बताया कि हर दल बड़े सवालों पर मिलती-जुलती सोच वाले लोगों को एक साथ लाता है, ताकि मतदाताओं को हज़ार छोटे विकल्पों के बजाय कुछ साफ़ विकल्प मिलें। हमारी सरकार की नीतियाँ उसी कार्यक्रम पर चलती हैं जो हमारे दल ने मतदाताओं के सामने रखा था।
गुरुवार। एक पत्रकार ने मुझसे पूछा कि क्या विधायक केवल 'रबर की मुहर' हैं। मैं अब भी अपने जवाब के बारे में सोच रही हूँ।
(a) शंका होने के बावजूद रेखा ने विधेयक के पक्ष में वोट क्यों दिया? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
क्योंकि ज़्यादातर विधायकों की तरह वह भी एक दल की सदस्य है और उसके नेतृत्व की तय की हुई राय पर चलती है।
अंक योजना:
- विधायिका के ज़्यादातर सदस्य किसी दल के होते हैं और अपनी निजी राय चाहे जो हो, दल के नेतृत्व के निर्देश पर चलते हैं। — 1 अंक
(b) रेखा विद्यार्थियों के समूह को राजनीतिक दलों का कौन-सा कार्य समझाती है? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
नीतियाँ और कार्यक्रम सामने रखना, ताकि अनगिनत राय कुछ साफ़ विकल्पों में बदल जाएँ।
अंक योजना:
- दल अलग-अलग नीतियाँ और कार्यक्रम सामने रखते हैं, जिससे बहुत-सी मिलती-जुलती राय कुछ बुनियादी पक्षों में सिमट जाती है और मतदाता उनमें से चुनते हैं। — 1 अंक
(c) क्या यह लोकतंत्र के लिए अच्छा है कि विधायक आम तौर पर वैसे ही वोट देते हैं जैसा उनका दल तय करता है? एक तर्क पक्ष में और एक विपक्ष में दीजिए। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- पक्ष में: मतदाताओं ने दल का कार्यक्रम चुना था, इसलिए साथ वोट देने से वादे पूरे होते हैं और ज़िम्मेदारी साफ़ रहती है।
- विपक्ष में: रेखा की अपनी राय और उसके किसानों की इच्छा अनदेखी हुई, और असहमति जताना कठिन हो जाता है।
अंक योजना:
- पक्ष में: मतदाताओं ने दल का कार्यक्रम चुना था, इसलिए साथ वोट देने से वादे पूरे होते हैं, सरकार स्थिर रहती है और साफ़ रहता है कि निर्णयों की ज़िम्मेदारी किसकी है। — 1 अंक
- विपक्ष में: विधायक की अपनी समझ और उसके क्षेत्र के लोगों की इच्छा अनदेखी हो सकती है, और दल के भीतर असहमति जताना कठिन हो जाता है। — 1 अंक