जूट वस्त्र उद्योग
भारत विश्व में कच्चे जूट और जूट के सामान का सबसे बड़ा उत्पादक है और बांग्लादेश के बाद दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। अधिकांश जूट मिलें पश्चिम बंगाल में स्थित हैं, मुख्यतः एक संकरी पट्टी में हुगली नदी के किनारे। पहली जूट मिल कोलकाता के निकट (रिशरा में) 1855 में स्थापित की गई थी।
हुगली के किनारे स्थान-निर्धारण के कारक:
- पश्चिम बंगाल और असम के जूट उत्पादक क्षेत्रों की निकटता।
- सस्ता जल परिवहन, जिसे रेलमार्ग, सड़कमार्ग और जलमार्ग के जाल का सहारा मिलता है।
- कच्चे जूट के प्रसंस्करण के लिए प्रचुर जल।
- पश्चिम बंगाल तथा पड़ोसी बिहार, ओडिशा और उत्तर प्रदेश से सस्ता श्रम।
- कोलकाता निर्यात के लिए बैंकिंग, बीमा और पत्तन सुविधाएँ प्रदान करता है।

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:
| English (in image) | हिन्दी |
|---|---|
| Jute industry | जूट उद्योग |
| Concentrated along the Hugli river, West Bengal | हुगली नदी के किनारे केंद्रित, पश्चिम बंगाल |
| India = largest producer of raw jute | भारत = कच्चे जूट का सबसे बड़ा उत्पादक |
| Bangladesh = largest exporter of jute goods | बांग्लादेश = जूट वस्तुओं का सबसे बड़ा निर्यातक |
| Sugar industry | चीनी उद्योग |
| Seasonal & agro-based | मौसमी व कृषि-आधारित |
| India 2nd in sugar, 1st in gur & khandsari | चीनी में भारत दूसरा, गुड़ व खांडसारी में पहला |
| Shifting to south & west (higher sucrose, cooler climate, cooperatives) | दक्षिण व पश्चिम की ओर स्थानांतरण (अधिक सुक्रोज़, ठंडी जलवायु, सहकारी) |
जूट की चुनौतियाँ और उत्पाद
1947 के विभाजन के बाद, जूट मिलें भारत में ही रहीं, परन्तु लगभग तीन-चौथाई जूट उगाने वाला क्षेत्र बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) में चला गया।
इस उद्योग को कृत्रिम (सिंथेटिक) विकल्पों से तथा बांग्लादेश जैसे अन्य उत्पादकों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। इसे सहारा देने के लिए सरकार ने उत्पादकता और माँग बढ़ाने हेतु एक राष्ट्रीय जूट नीति (2005) बनाई।
जूट का उपयोग बोरे (गनी बैग), चटाई, रस्सी, धागा, कालीन और अन्य वस्तुएँ बनाने में होता है। चूँकि यह एक प्राकृतिक, जैव-निम्नीकरणीय, पर्यावरण-अनुकूल रेशा है, इसलिए जूट उत्पादों की माँग फिर से बढ़ रही है।
चीनी उद्योग
भारत चीनी उत्पादन में विश्व में दूसरे स्थान पर है, परन्तु गुड़ और खांडसारी के उत्पादन में पहले स्थान पर है।
- कच्चा माल (गन्ना) भारी (स्थूल) होता है, और इसकी सुक्रोज मात्रा ढुलाई के दौरान घट जाती है, इसलिए मिलें गन्ना उगाने वाले क्षेत्रों के निकट स्थित होती हैं।
- मुख्य राज्य: उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और अन्य — लगभग 60 प्रतिशत मिलें उत्तर प्रदेश और बिहार में हैं।
- यह उद्योग मौसमी है, जिसके कारण यह सहकारी क्षेत्र के लिए आदर्श रूप से उपयुक्त है।
हाल के वर्षों में मिलें दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों, विशेषकर महाराष्ट्र, की ओर स्थानांतरित होती रही हैं, क्योंकि वहाँ के गन्ने में सुक्रोज की मात्रा अधिक होती है, ठंडी जलवायु के कारण पेराई का मौसम लंबा होता है, और सहकारी संस्थाएँ अधिक सफल हैं।
परीक्षा सुझाव: जूट → पश्चिम बंगाल (हुगली); चीनी → गन्ने के निकट (उत्तर प्रदेश व बिहार 60%), अधिक सुक्रोज के लिए दक्षिण की ओर स्थानांतरण।
प्रश्न और उत्तर
प्रश्न 1. जूट उद्योग पश्चिम बंगाल में हुगली नदी के किनारे क्यों केंद्रित है?
उत्तर: जूट उद्योग हुगली के किनारे केंद्रित है क्योंकि यहाँ जूट उत्पादक क्षेत्रों की निकटता है, अच्छे रेल-सड़क-जलमार्ग जाल के साथ सस्ता जल परिवहन है, प्रसंस्करण के लिए प्रचुर जल है, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और उत्तर प्रदेश से सस्ता श्रम है, तथा निर्यात के लिए कोलकाता की बैंकिंग, बीमा और पत्तन सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
प्रश्न 2. विभाजन (1947) ने भारत के जूट उद्योग को कैसे प्रभावित किया?
उत्तर: 1947 के विभाजन के बाद, जूट मिलें भारत में ही रहीं, परन्तु लगभग तीन-चौथाई जूट उगाने वाला क्षेत्र बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) में चला गया। इससे भारतीय मिलों को कच्चे जूट की कमी हो गई और यह आज भी उद्योग के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
प्रश्न 3. चीनी उद्योग सहकारी क्षेत्र के लिए आदर्श रूप से उपयुक्त क्यों है, और मिलें गन्ने के खेतों के निकट क्यों स्थित होती हैं?
उत्तर: चीनी उद्योग मौसमी है (यह केवल पेराई के मौसम में चलता है), इसलिए गन्ना किसानों की एक सहकारी संस्था इसे कुशलता से चला सकती है और लाभ बाँट सकती है। मिलें गन्ने के खेतों के निकट स्थित होती हैं क्योंकि गन्ना भारी (स्थूल) होता है और इसकी सुक्रोज मात्रा लंबी ढुलाई के दौरान घट जाती है, इसलिए स्रोत के निकट प्रसंस्करण सस्ता पड़ता है।
प्रश्न 4. चीनी मिलें दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों की ओर क्यों स्थानांतरित हो रही हैं?
उत्तर: चीनी मिलें दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों, विशेषकर महाराष्ट्र, की ओर स्थानांतरित हो रही हैं क्योंकि वहाँ के गन्ने में सुक्रोज की मात्रा अधिक होती है, ठंडी जलवायु एक लंबा पेराई मौसम सुनिश्चित करती है, और इन राज्यों में सहकारी संस्थाएँ अधिक सफल हैं।