अध्याय सारांश
यह खंड संपूर्ण अध्याय 3 — जल संसाधन का संक्षिप्त पुनरावलोकन है। बोर्ड परीक्षा से पहले अंतिम समय की पुनरावृत्ति के लिए इसका उपयोग करें।
जल एक नवीकरणीय संसाधन है, जो जलीय चक्र के माध्यम से नवीनीकृत होता है, फिर भी इसका केवल एक छोटा भाग उपयोग योग्य मीठा जल है। प्रचुरता के बावजूद, 2025 तक लगभग दो अरब लोग निरपेक्ष जल की कमी का सामना कर सकते हैं — जो मुख्यतः अति-दोहन, अत्यधिक उपयोग और असमान पहुँच के कारण होती है, केवल कम वर्षा के कारण नहीं।
कारण और गुणवत्ता — एक नज़र में
- कमी के कारण: बढ़ती जनसंख्या (अधिक घरेलू उपयोग + अधिक भोजन); सिंचित कृषि (सबसे बड़ा उपभोक्ता, कुओं/नलकूपों के माध्यम से भूजल का अति-दोहन); औद्योगीकरण (भारी उपयोग + ऊर्जा); नगरीकरण (शहरी कॉलोनियाँ भूजल का दोहन करती हैं)।
- गुणवत्ता और पहुँच: जहाँ जल प्रचुर है वहाँ भी, प्रदूषण (घरेलू, औद्योगिक, कृषि) और असमान पहुँच कमी उत्पन्न करते हैं — इसलिए संरक्षण हर जगह आवश्यक है।
बहुउद्देशीय परियोजनाएँ — एक नज़र में
- बाँध = बहते जल के आर-पार अवरोध जो एक जलाशय बनाता है (स्पिलवे/वियर; लकड़ी/तटबंध/चिनाई; निम्न/मध्यम/उच्च)।
- बहुउद्देशीय परियोजना एकीकृत करती है: सिंचाई, जलविद्युत, जल आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण, नौवहन, मत्स्य प्रजनन, मनोरंजन। नेहरू: 'आधुनिक भारत के मंदिर'।
- उदाहरण: भाखड़ा-नांगल (सतलुज-ब्यास; विद्युत + सिंचाई); हीराकुड (महानदी; संरक्षण + बाढ़ नियंत्रण); सरदार सरोवर (नर्मदा)।
- समस्याएँ: अवसादन, अधिक पथरीले तल, नदी खंडन, बाँध-प्रेरित बाढ़, गाद की हानि, प्रेरित भूकंप, जल-जनित रोग, विस्थापन। नर्मदा बचाओ आंदोलन; कृष्णा-गोदावरी अंतर-राज्यीय विवाद (कोयना मोड़)।
वर्षा जल संग्रहण — एक नज़र में
- पारंपरिक: गुल/कुल (पश्चिमी हिमालय); बाढ़ जल चैनल (बंगाल); खादीन (जैसलमेर); जोहड़ (राजस्थान); टाँकों में पालर पानी (सबसे शुद्ध प्राकृतिक जल) संग्रहित करते हुए छत संग्रहण; वर्षा की पहली फुहार एकत्र नहीं की जाती।
- आधुनिक: तमिलनाडु — छत संग्रहण को अनिवार्य बनाने वाला पहला राज्य; शिलांग (घरेलू आवश्यकताओं का 15-25%); गेंडाथूर, कर्नाटक ('वर्षा जल में समृद्ध'); बाँस की टपक सिंचाई, मेघालय (200 वर्ष पुरानी; गुरुत्वाकर्षण द्वारा झरने; 18-20 लीटर → 20-80 बूँद/मिनट)।
- पश्चिमी राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर के कारण गिरावट।
त्वरित पुनरावृत्ति — अवश्य जानने योग्य तथ्य
- जल जलीय चक्र द्वारा नवीनीकृत; 2025 तक ~2 अरब निरपेक्ष कमी में।
- सिंचित कृषि = जल का सबसे बड़ा उपभोक्ता।
- नेहरू: बाँध = 'आधुनिक भारत के मंदिर'। भाखड़ा-नांगल (सतलुज-ब्यास), हीराकुड (महानदी), सरदार सरोवर (नर्मदा)।
- तमिलनाडु = अनिवार्य छत संग्रहण वाला पहला राज्य। बाँस की टपक सिंचाई = मेघालय। टाँके / पालर पानी = राजस्थान।
त्वरित पुनरावृत्ति — प्रायः भ्रमित करने वाले बिंदु
- मात्रा कमी (कम वर्षा/अति-उपयोग) बनाम गुणवत्ता कमी (प्रदूषण) बनाम पहुँच कमी (असमान बँटवारा)।
- बाँधों का लाभ बनाम समस्या: सिंचाई/विद्युत/बाढ़-नियंत्रण लाभ हैं; विस्थापन/अवसादन/बाँध-प्रेरित बाढ़ समस्याएँ हैं।
- गुल/कुल = पश्चिमी हिमालय; खादीन = जैसलमेर; जोहड़ = राजस्थान; टाँके = राजस्थान (पेयजल); बाँस की टपक = मेघालय।
- नर्मदा बचाओ आंदोलन = विस्थापन; कृष्णा-गोदावरी विवाद = अंतर-राज्यीय जल बँटवारा।