Class 10 (Hindi Medium) · इतिहास · Chapter 1
यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय
यह अध्याय बताता है कि उन्नीसवीं सदी के यूरोप में राष्ट्रवाद कैसे उभरा और उसने बहु-राष्ट्रीय राजवंशीय साम्राज्यों का स्थान राष्ट्र-राज्यों से ले लिया। यह फ़्रेडरिक सोरयू के 1848 के लोकतांत्रिक और सामाजिक गणराज्यों के संसार के स्वप्न से आरंभ होता है, फिर दिखाता है कि 1789 की फ़्रांसीसी क्रांति ने राष्ट्रवाद की पहली स्पष्ट अभिव्यक्ति कैसे दी और नेपोलियन ने 1804 की सिविल संहिता के माध्यम से इसके विचार विदेश तक कैसे पहुँचाए। यह राजवंशीय राज्यों की चिथड़ेदार बनावट, उदारवादी मध्यम वर्ग के उदय, तथा उदार राष्ट्रवाद, आर्थिक उदारवाद (ज़ॉलवेराइन) और वियना कांग्रेस (1815) के नए रूढ़िवाद का अर्थ समझाता है। यह 1830 से 1848 तक क्रांतियों के युग — जुलाई क्रांति, यूनानी स्वतंत्रता संग्राम, रोमांटिकवाद, और 1848 की उदारवादियों की क्रांति व फ्रैंकफर्ट संसद — का अनुसरण करता है, और फिर जर्मनी (बिस्मार्क) व इटली (कैवूर व गैरीबाल्डी) का एकीकरण, ब्रिटेन का विशिष्ट मार्ग, राष्ट्र के दृश्य रूपक (मारीआन व जर्मेनिया), तथा अंततः राष्ट्रवाद का साम्राज्यवाद की ओर मुड़ना और बाल्कन तनाव जो प्रथम विश्व युद्ध की ओर ले गए, को समेटता है। यह कक्षा 10 इतिहास (भारत और समकालीन विश्व II) बोर्ड पाठ्यक्रम का आधारभूत अध्याय है।
Topics in this chapter
- 1
सोरयू का स्वप्न और फ़्रांसीसी क्रांति
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- 2
नेपोलियन और नेपोलियन संहिता
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- 3
राष्ट्रवाद का निर्माण: कुलीन वर्ग और मध्यम वर्ग
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- 4
उदारवाद, रूढ़िवाद और क्रांतिकारी
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- 5
क्रांतियों का युग (1830–1848)
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- 6
भूख, कठिनाई और 1848 की उदारवादियों की क्रांति
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- 7
जर्मनी और इटली का एकीकरण
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- 8
ब्रिटेन, राष्ट्र की रूपकात्मक अभिव्यक्तियाँ और राष्ट्रवाद–साम्राज्यवाद
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- 9
प्रश्न और उत्तर
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- 10
बोर्ड के पिछले वर्षों के प्रश्न (Board PYQs)
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- 11
सारांश और त्वरित पुनरावृत्ति
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