राष्ट्रों से बने विश्व की एक कल्पना

1848 में फ़्रांसीसी कलाकार फ़्रेडरिक सोरयू (Frédéric Sorrieu) ने चार चित्रों (प्रिंट्स) की एक शृंखला तैयार की, जिसमें उन्होंने 'लोकतांत्रिक और सामाजिक गणराज्यों' से बने विश्व के अपने स्वप्न को साकार किया। पहले चित्र में यूरोप और अमेरिका के लोग — हर आयु और वर्ग के स्त्री-पुरुष — एक लंबी पंक्ति में चलते हुए स्वतंत्रता की मूर्ति (Statue of Liberty) को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं, जो एक हाथ में प्रबोधन की मशाल (torch of Enlightenment) और दूसरे हाथ में मानव अधिकारों का घोषणा-पत्र (Charter of the Rights of Man) थामे हुए है। ज़मीन पर निरंकुश (एकतंत्रीय) संस्थाओं के टूटे हुए प्रतीक पड़े हुए हैं।

सोरयू की इस आदर्श (यूटोपियन) कल्पना में विश्व के लोग अलग-अलग राष्ट्रों के रूप में समूहबद्ध हैं, जिन्हें उनके झंडों और पोशाकों से पहचाना जा सकता है। जुलूस का नेतृत्व संयुक्त राज्य अमेरिका और स्विट्ज़रलैंड कर रहे हैं, जो पहले ही राष्ट्र-राज्य बन चुके थे; क्रांतिकारी तिरंगे के साथ फ़्रांस अभी-अभी मूर्ति तक पहुँचा है, और उसके पीछे काले, लाल और सुनहरे झंडे को थामे जर्मनी के लोग हैं — यद्यपि जर्मनी तब तक एक एकीकृत राष्ट्र नहीं बना था

समयरेखा: यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय (1789-1871)

राष्ट्र-राज्य क्या है?

उन्नीसवीं शताब्दी के दौरान राष्ट्रवाद (nationalism) एक ऐसी शक्ति के रूप में उभरा जिसने यूरोप के राजनीतिक और मानसिक जगत में व्यापक परिवर्तन ला दिए। इसका अंतिम परिणाम यह हुआ कि बहुराष्ट्रीय राजवंशीय साम्राज्यों के स्थान पर राष्ट्र-राज्य आ गया।

आधुनिक राज्य वह होता है जिसमें एक केंद्रीकृत सत्ता किसी स्पष्ट रूप से परिभाषित भूभाग पर संप्रभु नियंत्रण रखती है। परंतु राष्ट्र-राज्य वह है जिसमें उसके अधिकांश नागरिक — केवल शासक ही नहीं — एक साझा पहचान और साझा इतिहास की भावना विकसित कर लेते हैं। यह साझापन अनादि काल से नहीं था; इसे संघर्षों के माध्यम से तथा नेताओं और आम लोगों के कार्यों से गढ़ा गया था।

1882 में सॉरबोन (Sorbonne) में दिए एक व्याख्यान में फ़्रांसीसी दार्शनिक अर्नस्त रेनाँ (Ernst Renan) ने तर्क दिया कि राष्ट्र केवल समान भाषा, नस्ल या धर्म से नहीं बनता, बल्कि यह एक विशाल एकजुटता (large-scale solidarity) है — 'इसका अस्तित्व एक दैनिक जनमत-संग्रह (plebiscite) है'।

फ़्रांसीसी क्रांति और राष्ट्र की अवधारणा

राष्ट्रवाद की पहली स्पष्ट अभिव्यक्ति 1789 की फ़्रांसीसी क्रांति के साथ हुई। फ़्रांस पहले से ही एक निरंकुश राजा के अधीन एक पूर्ण विकसित भूभागीय राज्य था, परंतु क्रांति ने संप्रभुता को राजतंत्र से हटाकर फ़्रांसीसी नागरिकों के एक समूह को सौंप दिया। इसने घोषणा की कि अब से जनता ही राष्ट्र का निर्माण करेगी और उसकी नियति तय करेगी।

क्रांतिकारियों ने सामूहिक पहचान की भावना पैदा करने के लिए कई कदम उठाए:

  • ला पात्री (la patrie – पितृभूमि) और ल सितोयें (le citoyen – नागरिक) के विचार, जो एक संविधान के तहत समान अधिकारों वाले एकजुट समुदाय पर बल देते थे।
  • राजसी ध्वज के स्थान पर एक नया तिरंगा झंडा अपनाया गया।
  • एस्टेट्स जनरल (Estates General) का नाम बदलकर नेशनल असेंबली (राष्ट्रीय सभा) कर दिया गया।
  • राष्ट्र के नाम पर नए गीत, शपथें और शहीद
  • एकसमान कानूनों वाला एक केंद्रीकृत प्रशासन, आंतरिक चुंगी करों की समाप्ति, और नाप-तौल की एकसमान प्रणाली
  • फ़्रांसीसी (जैसा पेरिस में बोली जाती थी) आम भाषा बन गई।

राष्ट्रवाद को विदेश ले जाना

क्रांतिकारियों ने घोषणा की कि यूरोप के लोगों को निरंकुशता से मुक्त कराना फ़्रांसीसी राष्ट्र का ध्येय और नियति है — अन्य लोगों को राष्ट्र बनने में सहायता करना।

जब फ़्रांस की घटनाओं की खबर दूसरे शहरों तक पहुँची, तो छात्रों और शिक्षित मध्यवर्ग के लोगों ने जैकोबिन क्लब (Jacobin clubs) स्थापित किए। उनकी गतिविधियों ने उन फ़्रांसीसी सेनाओं के लिए मार्ग तैयार किया जो 1790 के दशक में हॉलैंड, बेल्जियम, स्विट्ज़रलैंड और अधिकांश इटली में बढ़ीं। क्रांतिकारी युद्धों के छिड़ने के साथ फ़्रांसीसी सेनाओं ने राष्ट्रवाद के विचार को विदेश ले जाना शुरू कर दिया।

प्रश्न और उत्तर

Q1. फ़्रेडरिक सोरयू कौन थे और उनके 1848 के चित्रों में क्या दर्शाया गया था? उत्तर. फ़्रेडरिक सोरयू एक फ़्रांसीसी कलाकार थे जिन्होंने 1848 में चार चित्रों की एक शृंखला तैयार की, जिसमें लोकतांत्रिक और सामाजिक गणराज्यों से बने विश्व की कल्पना की गई थी। विश्व के लोग, अपने झंडों के साथ अलग-अलग राष्ट्रों के रूप में समूहबद्ध होकर, स्वतंत्रता की मूर्ति को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जबकि निरंकुशता के टूटे हुए प्रतीक ज़मीन पर पड़े हैं।

Q2. राष्ट्रवाद की पहली स्पष्ट अभिव्यक्ति कब हुई? उत्तर. 1789 की फ़्रांसीसी क्रांति के साथ, जिसने संप्रभुता को राजतंत्र से हटाकर फ़्रांसीसी नागरिकों के एक समूह को सौंप दिया।

प्रश्न और उत्तर (जारी)

Q3. फ़्रांसीसी क्रांतिकारियों ने सामूहिक पहचान की भावना पैदा करने के लिए कौन-से कदम उठाए? उत्तर. उन्होंने ला पात्री और ल सितोयें के विचारों को बढ़ावा दिया, एक तिरंगा झंडा अपनाया, एस्टेट्स जनरल का नाम बदलकर नेशनल असेंबली कर दिया, गीत रचे और शहीदों को स्मरण किया, एकसमान कानूनों, नाप-तौल वाला एक केंद्रीकृत प्रशासन स्थापित किया, आंतरिक चुंगी समाप्त की, और फ़्रांसीसी को आम भाषा बना दिया।

Q4. अर्नस्त रेनाँ के अनुसार, राष्ट्र किससे बनता है? उत्तर. रेनाँ ने तर्क दिया कि राष्ट्र समान भाषा, नस्ल या धर्म से नहीं बनता, बल्कि यह एक साझा अतीत और साझा इच्छा पर आधारित विशाल एकजुटता है — 'इसका अस्तित्व एक दैनिक जनमत-संग्रह है'।