उदारवादी राष्ट्रवाद किसका पक्षधर था?

उन्नीसवीं सदी के आरंभिक यूरोप में राष्ट्रीय एकता के विचार उदारवाद (liberalism) से गहराई से जुड़े हुए थे। यह शब्द लैटिन शब्द liber से आया है, जिसका अर्थ है स्वतंत्र। नए मध्यम वर्गों के लिए उदारवाद का अर्थ था:

  • व्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के समक्ष सबकी समानता;
  • राजनीतिक दृष्टि से, सहमति द्वारा शासन — निरंकुशता और पादरियों के विशेषाधिकारों का अंत, एक संविधान और संसद के माध्यम से प्रतिनिधिक सरकार;
  • निजी संपत्ति की अनुल्लंघनीयता

परंतु कानून के समक्ष समानता का अर्थ सर्वजनीन मताधिकार नहीं था। क्रांतिकारी फ्रांस में मताधिकार केवल संपत्तिधारक पुरुषों को ही दिया गया था; संपत्तिविहीन पुरुषों और सभी महिलाओं को इससे बाहर रखा गया। नेपोलियन संहिता ने तो महिलाओं को नाबालिग के दर्जे तक घटा दिया। पूरी सदी भर, महिलाओं और संपत्तिविहीन पुरुषों ने समान राजनीतिक अधिकारों की माँग करते हुए आंदोलन चलाए

आर्थिक उदारवाद और ज़ॉलवेराइन

आर्थिक क्षेत्र में, उदारवाद का अर्थ था बाज़ारों की स्वतंत्रता और वस्तुओं तथा पूँजी की आवाजाही पर लगे राज्य-थोपे प्रतिबंधों की समाप्ति

नेपोलियन के उपायों ने 39 जर्मन राज्यों का एक संघ बना दिया था, जिनमें से प्रत्येक की अपनी मुद्रा, तौल और माप थी। 1833 में हैम्बर्ग से नूरेम्बर्ग की यात्रा करने वाले एक व्यापारी को 11 सीमा-शुल्क अवरोधों से गुज़रना पड़ता था, और हर एक पर लगभग 5 प्रतिशत शुल्क देना होता था। माप की इकाई elle क्षेत्र-क्षेत्र में भिन्न होती थी।

1834 में, प्रशा (Prussia) की पहल पर एक सीमा-शुल्क संघ या ज़ॉलवेराइन (zollverein) बना, जिसमें अधिकांश जर्मन राज्य शामिल हुए। इसने शुल्क अवरोधों को समाप्त किया और मुद्राओं की संख्या तीस से अधिक से घटाकर दो कर दीरेलवे के जाल ने गतिशीलता को और बढ़ावा दिया, और आर्थिक राष्ट्रवाद की इस लहर ने व्यापक राष्ट्रवादी भावना को सुदृढ़ किया।

1815 के बाद का नया रूढ़िवाद और वियना कांग्रेस

1815 में नेपोलियन की पराजय के बाद, यूरोपीय सरकारें रूढ़िवाद (conservatism) से प्रेरित थीं — यह मान्यता कि पारंपरिक संस्थाओं (राजतंत्र, चर्च, सामाजिक पदानुक्रम, संपत्ति और परिवार) को संरक्षित रखा जाना चाहिए। रूढ़िवादी अतीत की पूर्ण वापसी नहीं चाहते थे; उन्हें एहसास था कि आधुनिकीकरण राजतंत्र को मज़बूत कर सकता है

1815 में, नेपोलियन को पराजित करने वाले ब्रिटेन, रूस, प्रशा और ऑस्ट्रिया के प्रतिनिधि वियना कांग्रेस (Congress of Vienna) में मिले, जिसकी मेज़बानी ऑस्ट्रिया के चांसलर ड्यूक मेटरनिख (Metternich) ने की। वियना संधि (1815) का उद्देश्य नेपोलियन-युग के परिवर्तनों को पलटना था: बूर्बों राजवंश पुनः स्थापित किया गया, फ्रांस ने अपने अधिग्रहीत क्षेत्र खो दिए, और कई बफर राज्य बनाए गए (उत्तर में बेल्जियम सहित नीदरलैंड का राज्य; जेनोआ को पीडमॉण्ट में मिलाया गया; प्रशा को नए पश्चिमी क्षेत्र दिए गए; ऑस्ट्रिया को उत्तरी इटली दिया गया)। ये शासन निरंकुश थे और इन्होंने सेंसरशिप थोपी।

क्रांतिकारी और मेत्सिनी

दमन के भय से, अनेक उदारवादी-राष्ट्रवादी भूमिगत हो गए। क्रांतिकारियों को प्रशिक्षित करने और उनके विचारों को फैलाने के लिए पूरे यूरोप में गुप्त संगठन उभर आए। क्रांतिकारी होने का अर्थ था 1815 के बाद स्थापित राजतंत्रीय स्वरूपों का विरोध करने की प्रतिबद्धता और स्वतंत्रता एवं मुक्ति के लिए संघर्ष करना, जिसमें राष्ट्र-राज्य एक आवश्यक लक्ष्य था।

ऐसे ही एक क्रांतिकारी थे इटली के ज्युसेपे मेत्सिनी (Giuseppe Mazzini), जिनका जन्म 1805 में जेनोआ में हुआ था और जो गुप्त संगठन कार्बोनारी के सदस्य थे। 1831 में निर्वासित किए जाने पर, उन्होंने दो भूमिगत संगठन स्थापित किए — मार्सेई में यंग इटली (Young Italy) और बर्न में यंग यूरोप (Young Europe) — जिनमें पोलैंड, फ्रांस, इटली और जर्मन राज्यों के समान विचारधारा वाले युवक शामिल थे। मेत्सिनी का मानना था कि ईश्वर ने राष्ट्रों को मानव जाति की स्वाभाविक इकाई बनाया है, इसलिए इटली को एक एकल एकीकृत गणराज्य के रूप में गढ़ा जाना चाहिए। मेटरनिख ने उन्हें 'हमारी सामाजिक व्यवस्था का सबसे खतरनाक शत्रु' बताया।

प्रश्न और उत्तर

Q1. राजनीतिक क्षेत्र में उदारवाद किसका पक्षधर था? उत्तर. राजनीतिक दृष्टि से, उदारवाद का अर्थ था निरंकुशता और पादरियों के विशेषाधिकारों का अंत, सहमति द्वारा शासन, एक संविधान और संसद के माध्यम से प्रतिनिधिक सरकार, कानून के समक्ष समानता, तथा निजी संपत्ति की अनुल्लंघनीयता

Q2. ज़ॉलवेराइन क्या था और इसका गठन कब हुआ? उत्तर. ज़ॉलवेराइन एक सीमा-शुल्क संघ था जिसका गठन 1834 में प्रशा की पहल पर हुआ और जिसमें अधिकांश जर्मन राज्य शामिल हुए। इसने शुल्क अवरोधों को समाप्त किया और मुद्राओं को तीस से अधिक से घटाकर दो कर दिया, जिससे जर्मन आर्थिक रूप से बँध गए।

प्रश्न और उत्तर (जारी)

Q3. 1815 के बाद रूढ़िवादियों का क्या मानना था? उत्तर. रूढ़िवादियों का मानना था कि पारंपरिक संस्थाओंराजतंत्र, चर्च, सामाजिक पदानुक्रम, संपत्ति और परिवार — को संरक्षित रखा जाना चाहिए। वे यह स्वीकार करते थे कि आधुनिकीकरण (आधुनिक सेना, कुशल नौकरशाही, कृषि-दासता का उन्मूलन) इन संस्थाओं को मज़बूत कर सकता है।

Q4. उदारवाद का अर्थ सर्वजनीन मताधिकार के अर्थ में लोकतंत्र क्यों नहीं था? उत्तर. क्योंकि मताधिकार केवल संपत्तिधारक पुरुषों तक सीमित था; संपत्तिविहीन पुरुषों और सभी महिलाओं को इससे बाहर रखा गया, और नेपोलियन संहिता ने महिलाओं को नाबालिग के दर्जे तक घटा दिया।

प्रश्न और उत्तर (जारी)

Q5. ज्युसेपे मेत्सिनी कौन थे और उनका क्या मानना था? उत्तर. ज्युसेपे मेत्सिनी इटली के एक क्रांतिकारी थे (जन्म जेनोआ, 1805) जिन्होंने गुप्त संगठन यंग इटली और यंग यूरोप की स्थापना की। उनका मानना था कि ईश्वर ने राष्ट्रों को मानव जाति की स्वाभाविक इकाई बनाया है, और इटली को एक एकल एकीकृत गणराज्य के रूप में गढ़ा जाना चाहिए। मेटरनिख ने उन्हें 'हमारी सामाजिक व्यवस्था का सबसे खतरनाक शत्रु' कहा।