समंजन क्षमता

नेत्र लेंस नरम, जेली जैसे पदार्थ का बना होता है, और उसे पकड़ने वाली पक्ष्माभी पेशियाँ उसकी वक्रता बदल सकती हैं। वक्रता बदलने से लेंस की फोकस दूरी बदल जाती है।

निकट और दूर वस्तुओं के लिए नेत्र लेंस की समंजन क्षमता

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:

English (in image) हिन्दी
Distant object दूर की वस्तु
Nearby object पास की वस्तु
Ciliary muscles relaxed पक्ष्माभी पेशियाँ शिथिल
Ciliary muscles contracted पक्ष्माभी पेशियाँ संकुचित
Thin lens (long f) पतला लेंस (अधिक f)
Thick lens (short f) मोटा लेंस (कम f)
Retina दृष्टिपटल
Near point 25 cm निकट बिंदु 25 cm
  • जब पक्ष्माभी पेशियाँ शिथिल होती हैं, तो लेंस पतला हो जाता है, उसकी फोकस दूरी बढ़ जाती है, और हम दूर की वस्तुएँ स्पष्ट देख पाते हैं।
  • जब पक्ष्माभी पेशियाँ संकुचित होती हैं, तो लेंस की वक्रता बढ़ जाती है, लेंस मोटा हो जाता है, उसकी फोकस दूरी घट जाती है, और हम पास की वस्तुएँ स्पष्ट देख पाते हैं।

नेत्र लेंस की इस प्रकार अपनी फोकस दूरी समायोजित करने की क्षमता को समंजन क्षमता कहते हैं।

स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी (निकट बिंदु)

नेत्र लेंस की फोकस दूरी को एक निश्चित न्यूनतम सीमा से कम नहीं किया जा सकता। यदि आप किसी छपे पृष्ठ को बहुत पास लाकर देखें, तो अक्षर धुंधले दिखते हैं और आँख पर तनाव महसूस होता है। किसी वस्तु को आराम से तथा स्पष्ट देखने के लिए उसे नेत्र से लगभग 25 cm दूर रखना पड़ता है।

वह न्यूनतम दूरी जिस पर वस्तुएँ बिना तनाव के सबसे स्पष्ट दिखें, स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी कहलाती है, जिसे नेत्र का निकट बिंदु भी कहते हैं। सामान्य दृष्टि वाले युवा व्यक्ति के लिए निकट बिंदु लगभग 25 cm होता है।

वह सबसे दूर का बिंदु जिस तक नेत्र वस्तुओं को स्पष्ट देख सकता है, दूर बिंदु कहलाता है। सामान्य नेत्र के लिए यह अनंत होता है।

मुख्य बिंदु: सामान्य नेत्र अपने निकट बिंदु (25 cm) से दूर बिंदु (अनंत) तक की सभी वस्तुएँ स्पष्ट देख सकता है।

मोतियाबिंद

कभी-कभी वृद्धावस्था में नेत्र लेंस दूधिया तथा धुंधला हो जाता है। इस स्थिति को मोतियाबिंद (कैटरैक्ट) कहते हैं। इससे आंशिक या पूर्ण दृष्टि हानि हो जाती है क्योंकि प्रकाश अब लेंस से स्पष्ट नहीं गुजर पाता।

मोतियाबिंद को चश्मे से ठीक नहीं किया जा सकता। परंतु मोतियाबिंद शल्यक्रिया (सर्जरी) द्वारा दृष्टि बहाल की जा सकती है, जिसमें धुंधले लेंस को कृत्रिम लेंस से बदल दिया जाता है।

[परीक्षा युक्ति] मोतियाबिंद (लेंस का धुंधला होना) को अपवर्तक दोषों (निकट-दृष्टि, दूर-दृष्टि, जरा-दूरदृष्टिता) से भ्रमित न करें, जो नेत्र द्वारा प्रतिबिंब गलत स्थान पर बनने के कारण होते हैं। मोतियाबिंद में सर्जरी चाहिए; अपवर्तक दोष लेंसों से ठीक होते हैं।

हल किए गए उदाहरण

उदाहरण 1: पास व दूर देखते समय फोकस दूरी

दूर की पहाड़ी से हाथ की पुस्तक की ओर दृष्टि बदलने पर नेत्र लेंस की फोकस दूरी कैसे बदलती है?

हल: दूर की पहाड़ी के लिए पक्ष्माभी पेशियाँ शिथिल होती हैं, लेंस पतला हो जाता है, और फोकस दूरी बड़ी होती है। पास की पुस्तक के लिए पेशियाँ संकुचित होती हैं, लेंस मोटा हो जाता है, और फोकस दूरी घट जाती है। यही स्वतः परिवर्तन समंजन क्षमता है।

उदाहरण 2: स्पष्ट दृष्टि का परास

सामान्य मानव नेत्र किन दो दूरियों के बीच वस्तुओं को स्पष्ट देख सकता है?

हल: सामान्य नेत्र अपने निकट बिंदु (लगभग 25 cm) से दूर बिंदु (अनंत) तक स्पष्ट देख सकता है। 25 cm से पास की वस्तुएँ स्पष्ट फोकस नहीं हो पातीं क्योंकि नेत्र लेंस फोकस दूरी को न्यूनतम सीमा से कम नहीं कर सकता।

उदाहरण 3: 5 cm पर क्यों नहीं पढ़ सकते?

सामान्य नेत्र मात्र 5 cm दूर रखी पुस्तक क्यों नहीं पढ़ सकता?

हल: 5 cm जैसी पास की वस्तु फोकस करने के लिए नेत्र लेंस को अपनी न्यूनतम संभव फोकस दूरी से भी कम फोकस दूरी चाहिए। पक्ष्माभी पेशियाँ लेंस को इतना नहीं दबा सकतीं, अतः प्रतिबिंब रेटिना पर नहीं बनता और अक्षर तनाव के साथ धुंधले दिखते हैं। सबसे पास की आरामदायक दूरी निकट बिंदु, लगभग 25 cm, है।