श्वेत प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण
जब श्वेत प्रकाश (जैसे सूर्य का प्रकाश) की पतली किरण काँच के प्रिज़्म से गुजरती है, तो यह सात रंगों की एक सुंदर पट्टी में विभाजित हो जाती है। श्वेत प्रकाश का अपने अवयवी रंगों में इस विभाजन को वर्ण-विक्षेपण कहते हैं।

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:
| English (in image) | हिन्दी |
|---|---|
| White light | श्वेत प्रकाश |
| Prism | प्रिज़्म |
| Spectrum (VIBGYOR) | वर्णक्रम (VIBGYOR) |
| Red bends least | लाल सबसे कम मुड़ता |
| Violet bends most | बैंगनी सबसे अधिक मुड़ता |
| Screen | पर्दा |
रंगों की इस पट्टी को वर्णक्रम (स्पेक्ट्रम) कहते हैं। रंगों का क्रम, सबसे कम विचलित से सबसे अधिक विचलित तक, VIBGYOR से याद रखा जाता है: Violet (बैंगनी), Indigo (जामुनी), Blue (नीला), Green (हरा), Yellow (पीला), Orange (नारंगी), Red (लाल)।
वर्ण-विक्षेपण क्यों होता है?
प्रिज़्म से गुजरते समय प्रकाश के भिन्न-भिन्न रंग भिन्न-भिन्न कोणों से मुड़ते हैं:
- लाल प्रकाश सबसे कम मुड़ता है (इसका तरंगदैर्घ्य सबसे बड़ा है)।
- बैंगनी प्रकाश सबसे अधिक मुड़ता है (इसका तरंगदैर्घ्य सबसे छोटा है)।
चूँकि प्रिज़्म से निकलने के बाद प्रत्येक रंग थोड़े भिन्न मार्ग पर चलता है, रंग अलग होकर स्पष्ट हो जाते हैं। इसीलिए हम स्पष्ट रंगों की एक पट्टी - वर्णक्रम - देखते हैं।
न्यूटन का प्रयोग: आइज़क न्यूटन ने सबसे पहले काँच के प्रिज़्म से सूर्य के प्रकाश का वर्णक्रम प्राप्त किया। जब उन्होंने दूसरे प्रिज़्म से रंगों को और विभाजित करने का प्रयास किया, तो कोई नया रंग नहीं मिला। फिर उन्होंने दूसरा समरूप प्रिज़्म उल्टा रखा। इससे सभी रंग पुनः संयोजित हो गए और दूसरी ओर से श्वेत प्रकाश निकला। इससे सिद्ध हुआ कि श्वेत प्रकाश (सूर्य का प्रकाश) सात रंगों से बना है।
इंद्रधनुष का बनना
इंद्रधनुष वर्षा के बाद आकाश में दिखाई देने वाला एक प्राकृतिक वर्णक्रम है। यह वायुमंडल में उपस्थित जल की छोटी बूँदों द्वारा सूर्य के प्रकाश के वर्ण-विक्षेपण से बनता है।

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:
| English (in image) | हिन्दी |
|---|---|
| Sunlight | सूर्य का प्रकाश |
| Water droplet | जल की बूँद |
| Refraction & dispersion | अपवर्तन व वर्ण-विक्षेपण |
| Internal reflection | आंतरिक परावर्तन |
| Observer | प्रेक्षक |
| Rainbow | इंद्रधनुष |
प्रत्येक छोटी जल बूँद एक छोटे प्रिज़्म की भाँति कार्य करती है। जब सूर्य का प्रकाश बूँद में प्रवेश करता है:
- बूँद में प्रवेश करते समय इसका अपवर्तन तथा वर्ण-विक्षेपण होता है,
- फिर बूँद की पिछली भीतरी सतह पर इसका आंतरिक परावर्तन होता है, तथा
- अंत में बूँद से बाहर निकलते समय इसका पुनः अपवर्तन होता है।
वर्ण-विक्षेपण तथा आंतरिक परावर्तन के कारण भिन्न-भिन्न बूँदों से भिन्न रंग प्रेक्षक की आँख तक पहुँचते हैं, जिससे रंगीन चाप बनता है। इंद्रधनुष सदैव सूर्य के विपरीत दिशा में बनता है (सूर्य प्रेक्षक के पीछे होता है)।
धूप वाले दिन आप झरने या फव्वारे से आकाश देखकर भी इंद्रधनुष देख सकते हैं, जब सूर्य आपके पीछे हो।
[परीक्षा युक्ति] इंद्रधनुष = जल बूँदों में अपवर्तन + आंतरिक परावर्तन + अपवर्तन, सूर्य के विपरीत दिखता है।
हल किए गए उदाहरण
उदाहरण 1: रंगों का क्रम
श्वेत प्रकाश के वर्णक्रम में रंगों का क्रम लिखिए तथा बताइए कौन सबसे अधिक व कौन सबसे कम मुड़ता है।
हल: वर्णक्रम, जिसे VIBGYOR से याद रखते हैं, है - बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल। बैंगनी सबसे अधिक तथा लाल सबसे कम मुड़ता है, क्योंकि बैंगनी का तरंगदैर्घ्य सबसे छोटा तथा लाल का सबसे बड़ा है।
उदाहरण 2: न्यूटन का दो-प्रिज़्म प्रयोग
पहले प्रिज़्म के बाद दूसरा उल्टा प्रिज़्म रखकर न्यूटन ने क्या निष्कर्ष निकाला?
हल: जब न्यूटन ने पहले प्रिज़्म के बाद दूसरा समरूप प्रिज़्म उल्टी स्थिति में रखा, तो अलग हुए रंग पुनः संयोजित होकर श्वेत प्रकाश के रूप में निकले। इससे सिद्ध हुआ कि श्वेत प्रकाश सात वर्णक्रमीय रंगों का मिश्रण है, और प्रिज़्म रंगों को विभाजित (विक्षेपित) करता है, बनाता नहीं।
उदाहरण 3: इंद्रधनुष के तीन चरण
इंद्रधनुष बनने के दौरान जल बूँद में होने वाली तीन प्रकाशीय प्रक्रियाएँ बताइए।
हल: प्रत्येक जल बूँद में सूर्य का प्रकाश गुजरता है: (1) बूँद में प्रवेश पर अपवर्तन व वर्ण-विक्षेपण, (2) पिछली सतह पर आंतरिक परावर्तन, तथा (3) बाहर निकलते समय पुनः अपवर्तन। ये मिलकर रंगों को अलग करके प्रेक्षक की आँख तक भेजते हैं।
उदाहरण 4: इंद्रधनुष की दिशा
इंद्रधनुष देखने के लिए प्रेक्षक को किस दिशा में देखना चाहिए, और क्यों?
हल: प्रेक्षक को सूर्य के विपरीत दिशा में देखना चाहिए (सूर्य पीछे हो)। तभी जल बूँदों से अपवर्तित, आंतरिक परावर्तित तथा विक्षेपित किरणें प्रेक्षक की आँख तक पहुँचकर रंगीन चाप बनाती हैं।