बोर्ड परीक्षा के पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQs)
अंक-वार व्यवस्थित। पर्यावरण एक 5-अंक इकाई है - स्पष्ट परिभाषाओं, उदाहरणों व तर्क पर ध्यान दें; जहाँ कहा जाए नामांकित आरेख (आहार श्रृंखला, ऊर्जा पिरामिड) बनाएँ।
1-अंक प्रश्न
प्र1. आहार श्रृंखला के प्रथम पोषी स्तर पर स्थित जीवों का नाम लिखिए। (उत्तर: उत्पादक / हरे पौधे।)
प्र2. एक अजैव-निम्नीकरणीय पदार्थ का उदाहरण दीजिए। (उत्तर: प्लास्टिक / काँच / DDT।)
प्र3. अगले पोषी स्तर को कितनी प्रतिशत ऊर्जा स्थानांतरित होती है? (उत्तर: लगभग 10%।)
प्र4. कौन-सी गैस परत हमें UV विकिरण से बचाती है? (उत्तर: ओज़ोन (O₃) परत।)
प्र5. ओज़ोन क्षय के लिए उत्तरदायी रसायनों का नाम लिखिए। (उत्तर: क्लोरोफ्लोरोकार्बन, CFC।)
2-अंक प्रश्न
प्र6. पारितंत्र में अपघटकों की भूमिका क्या है? उत्तर: अपघटक (जीवाणु व कवक) मृत अवशेष व अपशिष्ट को सरल अकार्बनिक पदार्थों में तोड़ते हैं जो मृदा में लौटते हैं, उत्पादकों हेतु पोषकों का पुनर्चक्रण करते व पारितंत्र को स्वच्छ रखते हैं।
प्र7. आहार जाल आहार श्रृंखला से अधिक स्थिर क्यों है? उत्तर: आहार जाल में प्रत्येक जीव के पास वैकल्पिक भोजन स्रोत होते हैं। यदि एक जाति घटे, तो अन्य भिन्न पथ प्रयोग करते हैं, अतः पारितंत्र कम विक्षुब्ध होता - एकल आहार श्रृंखला से अधिक स्थिरता।
प्र8. अजैव-निम्नीकरणीय अपशिष्ट पर्यावरण को हानि पहुँचाने के दो प्रकार बताइए। उत्तर: (i) यह बना रहता व मृदा-जल प्रदूषित करता है व निगलने वाले जंतुओं को हानि/मार सकता है। (ii) अनिम्नीकरणीय रसायन आहार श्रृंखलाओं में प्रवेश कर जैव-आवर्धित होकर शीर्ष उपभोक्ताओं में हानिकारक स्तर तक पहुँचते हैं।
3-अंक प्रश्न
प्र9. पोषी स्तर क्या हैं? एक आहार श्रृंखला देकर उसके पोषी स्तर अंकित कीजिए। (NCERT) उत्तर: पोषी स्तर आहार श्रृंखला का प्रत्येक भोजन-सोपान है। घास → टिड्डा → मेंढक → साँप: घास = उत्पादक (T1), टिड्डा = प्राथमिक उपभोक्ता (T2), मेंढक = द्वितीयक (T3), साँप = तृतीयक (T4)।
प्र10. दस प्रतिशत नियम बताइए। आहार श्रृंखलाओं में केवल 3-4 सोपान क्यों होते हैं? उत्तर: एक पोषी स्तर की केवल लगभग 10% ऊर्जा अगले को जाती है; ~90% ऊष्मा में हानि होती है। हर सोपान के बाद इतनी कम ऊर्जा शेष रहने से 3-4 स्तरों के बाद एक और स्तर पोषित नहीं हो सकता।
प्र11. जैविक आवर्धन क्या है? इसका प्रभाव मनुष्यों में सबसे अधिक क्यों है? उत्तर: यह आहार श्रृंखला में ऊपर अनिम्नीकरणीय रसायनों की बढ़ती सांद्रता है। चूँकि मनुष्य प्रायः आहार श्रृंखलाओं के शीर्ष पर होते हैं, ये रसायन मानव शरीरों में अधिकतम सांद्रता तक संचित होते हैं।
5-अंक प्रश्न
प्र12. (क) पारितंत्र को परिभाषित कीजिए व इसके घटक बताइए। (ख) आरेख सहित आहार श्रृंखला में ऊर्जा प्रवाह समझाइए। (ग) दस प्रतिशत नियम बताइए। उत्तर: (क) पारितंत्र सभी परस्पर क्रिया करते जीव व अजैविक परिवेश है; घटक = जैविक (उत्पादक, उपभोक्ता, अपघटक) व अजैविक (तापमान, जल, मृदा आदि)। (ख) ऊर्जा सूर्य → उत्पादक → शाकाहारी → मांसाहारी → अपघटक बहती है (ऊर्जा पिरामिड बनाएँ); यह एकदिशीय है व प्रत्येक स्तर पर घटती है। (ग) दस प्रतिशत नियम: एक पोषी स्तर की केवल ~10% ऊर्जा अगले तक पहुँचती है।
प्र13. (क) ओज़ोन क्या है? (ख) यह कैसे बनता है व हमारी रक्षा कैसे करता है? (ग) इसका क्षय चिंता का विषय क्यों है व क्या किया गया है? (NCERT) उत्तर: (क) ओज़ोन (O₃) तीन ऑक्सीजन परमाणुओं का अणु है। (ख) वायुमंडल के ऊपर UV, O₂ को O परमाणुओं में विभाजित करती है जो O₂ से संयोग कर O₃ बनाते हैं; ओज़ोन परत हानिकारक UV अवशोषित करती है। (ग) CFC द्वारा क्षय अधिक UV को पृथ्वी तक आने देता है (त्वचा कैंसर आदि); 1987 UNEP समझौते ने CFC उत्पादन स्थिर किया व अब CFC-मुक्त उत्पाद अनिवार्य हैं।
प्र14. जैव- व अजैव-निम्नीकरणीय पदार्थों में उदाहरण सहित अंतर कीजिए, प्रत्येक से होने वाली समस्याएँ व मदद के दो उपाय बताइए। उत्तर: जैव-निम्नीकरणीय - सूक्ष्मजीवों द्वारा तोड़े जाते (छिलके, कागज़, कपड़ा, भोजन); अप्रबंधित होने पर दुर्गंध, रोग, जल प्रदूषण। अजैव-निम्नीकरणीय - नहीं तोड़े जाते (प्लास्टिक, काँच, धातु, DDT); बने रहते, प्रदूषित करते व जैव-आवर्धित होते हैं। मदद: अपशिष्ट पृथक व कंपोस्ट/पुनर्चक्रित करें; कम करें व पुनः उपयोग (कपड़े के थैले, एकल-उपयोग प्लास्टिक से बचें)।