हल किए गए उदाहरण

हल किए गए वैचारिक प्रश्नों का संग्रह। मुख्य विचार याद रखें:

  • पारितंत्र = जैविक + अजैविक घटक। उत्पादक (स्वपोषी) → उपभोक्ता (परपोषी) → अपघटक (पुनर्चक्रक)।
  • आहार श्रृंखला = सीधा क्रम; आहार जाल = परस्पर जुड़ी श्रृंखलाएँ। पोषी स्तर: उत्पादक(1) → प्राथमिक(2) → द्वितीयक(3) → तृतीयक(4)।
  • दस प्रतिशत नियम: ~10% ऊर्जा अगले स्तर को जाती है; प्रवाह एकदिशीय
  • जैव-आवर्धन: अनिम्नीकरणीय रसायन श्रृंखला में ऊपर बढ़ते हैं (मनुष्य में अधिकतम)।
  • ओज़ोन (O₃) UV से बचाता है; CFC इसका क्षय करते हैं। अपशिष्ट = जैव-/अजैव-निम्नीकरणीय

उदाहरण 1: पोषी स्तर (NCERT) पोषी स्तर क्या हैं? स्तरों सहित एक आहार श्रृंखला उदाहरण दीजिए। हल: प्रत्येक भोजन-सोपान पोषी स्तर है। घास → टिड्डा → मेंढक → साँप: घास = उत्पादक (1), टिड्डा = प्राथमिक उपभोक्ता (2), मेंढक = द्वितीयक (3), साँप = तृतीयक (4)।

उदाहरण 2: अपघटकों की भूमिका (NCERT) पारितंत्र में अपघटकों की भूमिका क्या है? हल: वे मृत अवशेष व अपशिष्ट को सरल अकार्बनिक पदार्थों में तोड़ते हैं जो उत्पादकों के पुनः उपयोग हेतु मृदा में लौटते हैं - पोषकों का पुनर्चक्रण व पारितंत्र की सफ़ाई।

उदाहरण 3: दस प्रतिशत नियम दस प्रतिशत नियम बताइए व यदि उत्पादकों में 10000 J हो तो प्रत्येक स्तर पर ऊर्जा ज्ञात कीजिए। हल: केवल ~10% अगले स्तर को जाती है। उत्पादक 10000 J → प्राथमिक 1000 J → द्वितीयक 100 J → तृतीयक 10 J।

उदाहरण 4: जैविक आवर्धन (NCERT) जैविक आवर्धन क्या है? क्या यह सभी पोषी स्तरों पर समान है? हल: यह आहार श्रृंखला में ऊपर की ओर अनिम्नीकरणीय रसायनों की सांद्रता में क्रमिक वृद्धि है। यह समान नहीं - यह प्रत्येक ऊँचे स्तर पर बढ़ती है, शीर्ष (मनुष्य) पर सबसे अधिक।

उदाहरण 5: ओज़ोन व उसका प्रभाव (NCERT) ओज़ोन क्या है व यह पारितंत्र को कैसे प्रभावित करता है? हल: ओज़ोन (O₃) वायुमंडल के ऊपर सूर्य के हानिकारक UV विकिरण को अवशोषित करता है, सजीवों की रक्षा करता है। इसका क्षय अधिक UV को आने देता है, जिससे त्वचा कैंसर व पारितंत्र हानि होती है।

उदाहरण 6: जैव- बनाम अजैव-निम्नीकरणीय (NCERT) कुछ पदार्थ जैव- व कुछ अजैव-निम्नीकरणीय क्यों? हल: अपघटक एंज़ाइम विशिष्ट होते हैं; सूक्ष्मजीवों के पास प्राकृतिक पदार्थों के एंज़ाइम होते हैं पर प्लास्टिक जैसे मानव-निर्मित पदार्थों के नहीं, जो अजैव-निम्नीकरणीय रहते हैं।

उदाहरण 7: केवल जैव-निम्नीकरणीय समूह (NCERT अभ्यास प्र.1) किस समूह में केवल जैव-निम्नीकरणीय वस्तुएँ हैं - (क) घास, फूल, चमड़ा; (ख) घास, लकड़ी, प्लास्टिक; (ग) फल-छिलके, केक, नींबू-रस; (घ) केक, लकड़ी, घास? हल: (ग) व (घ) पूर्णतः जैव-निम्नीकरणीय हैं। प्लास्टिक/चमड़े वाले विकल्पों में अजैव-निम्नीकरणीय वस्तुएँ हैं।

उदाहरण 8: कौन आहार श्रृंखला है (NCERT अभ्यास प्र.2) कौन आहार श्रृंखला बनाता है - (क) घास, गेहूँ, आम; (ख) घास, बकरी, मनुष्य; (ग) बकरी, गाय, हाथी; (घ) घास, मछली, बकरी? हल: (ख) घास → बकरी → मनुष्य। (क) व (ग) में जीव एक-दूसरे को नहीं खाते; (घ) वैध भोजन-क्रम नहीं है।

उदाहरण 9: पर्यावरण-हितैषी अभ्यास (NCERT अभ्यास प्र.3) कौन पर्यावरण-हितैषी हैं - (क) कपड़े के थैले, (ख) अनावश्यक बत्ती/पंखे बंद करना, (ग) वाहन के बजाय पैदल जाना, (घ) उपर्युक्त सभी? हल: (घ) उपर्युक्त सभी। प्रत्येक अपशिष्ट घटाता या ऊर्जा बचाता है।

उदाहरण 10: एक पोषी स्तर मारना (NCERT अभ्यास प्र.4) यदि हम एक पोषी स्तर के सभी जीव मार दें तो क्या होगा? हल: आहार श्रृंखला/जाल विक्षुब्ध हो जाता है: नीचे का स्तर (उसका भोजन) बढ़ जाता है, व ऊपर का स्तर भोजन के अभाव में भूखा मरता है। पूरे पारितंत्र का संतुलन बिगड़ता है।

उदाहरण 11: भिन्न पोषी स्तर हटाना (NCERT अभ्यास प्र.5) क्या पोषी स्तर हटाने का प्रभाव सभी स्तरों के लिए समान है? क्या कोई स्तर बिना हानि हटाया जा सकता है? हल: प्रभाव भिन्न होता है। उत्पादक हटाना सबसे हानिकारक (पूरा पारितंत्र ढह जाता)। कोई पोषी स्तर बिना पारितंत्र विक्षुब्ध किए नहीं हटाया जा सकता, क्योंकि सभी स्तर परस्पर निर्भर हैं।

उदाहरण 12: अजैव-निम्नीकरणीय अपशिष्ट से समस्याएँ (NCERT अभ्यास प्र.7) हम जो अजैव-निम्नीकरणीय अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं उससे क्या समस्याएँ होती हैं? हल: वे बने रहते व संचित होते हैं, मृदा व जल प्रदूषित करते, निगलने वाले जंतुओं को हानि पहुँचाते, नालियाँ अवरुद्ध करते, व आहार श्रृंखलाओं में प्रवेश कर जैव-आवर्धित होकर हानिकारक स्तर तक पहुँचते हैं।

उदाहरण 13: सारा अपशिष्ट जैव-निम्नीकरणीय (NCERT अभ्यास प्र.8) यदि हमारा सारा अपशिष्ट जैव-निम्नीकरणीय हो, तो क्या कोई प्रभाव न होगा? हल: नहीं - फिर भी प्रभाव होगा। बड़ी मात्रा में सड़ता जैव-निम्नीकरणीय अपशिष्ट दुर्गंध, मक्खियाँ, रोग उत्पन्न करता व जल प्रदूषित (घुलित ऑक्सीजन घटाकर) कर सकता है। अतः इसका प्रबंधन आवश्यक है।

उदाहरण 14: ओज़ोन क्षति - चिंता व कदम (NCERT अभ्यास प्र.9) ओज़ोन-परत क्षति चिंता का विषय क्यों है व इसे सीमित करने के क्या कदम हैं? हल: ओज़ोन हानिकारक UV अवशोषित करता है; इसकी क्षति अधिक UV को आने देती है, जिससे त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद व पारितंत्र हानि होती है। कदम: CFC उत्पादन स्थिर करने का 1987 UNEP/मॉन्ट्रियल समझौताCFC-मुक्त उत्पाद बनाना।

उदाहरण 15: ओज़ोन बनने की अभिक्रियाएँ ऊपरी वायुमंडल में ओज़ोन बनने की अभिक्रियाएँ लिखिए। हल: O2UVO+OO_2 \xrightarrow{UV} O + O ; O+O2O3O + O_2 \rightarrow O_3। UV, O₂ को परमाणुओं में विभाजित करती है, जो O₂ से संयोग कर ओज़ोन बनाते हैं।

उदाहरण 16: उत्पादक आधार के रूप में हर पारितंत्र के लिए उत्पादक आवश्यक क्यों हैं? हल: उत्पादक सौर ऊर्जा ग्रहण कर उसे भोजन (रासायनिक ऊर्जा) में बदलते हैं, सभी उपभोक्ताओं व अपघटकों को उपलब्ध कराते हैं। उत्पादकों के बिना कोई ऊर्जा-निवेश न होता व पारितंत्र कार्य न कर सकता।

उदाहरण 17: जलजीवशाला की सफ़ाई जलजीवशाला को नियमित साफ़ करना पड़ता है पर तालाब को नहीं, क्यों? हल: तालाब एक प्राकृतिक, संतुलित पारितंत्र है जिसमें अपघटक अपशिष्ट पुनर्चक्रित करते हैं। जलजीवशाला कृत्रिम है व इसमें अपघटकों/जीवों का पूर्ण समूह नहीं, अतः अपशिष्ट संचित होता व इसे साफ़ करना पड़ता है।

उदाहरण 18: स्वपोषी बनाम परपोषी स्वपोषी व परपोषी में उदाहरण सहित अंतर कीजिए। हल: स्वपोषी अपना भोजन स्वयं बनाते हैं (हरे पौधे, कुछ जीवाणु) - उत्पादक। परपोषी भोजन के लिए अन्य पर निर्भर हैं (सभी जंतु) - उपभोक्ता व अपघटक।

उदाहरण 19: ऊर्जा पिरामिड ऊर्जा पिरामिड सदा सीधा (ऊपर सँकरा) क्यों होता है? हल: क्योंकि ऊर्जा प्रत्येक ऊँचे पोषी स्तर पर घटती है (केवल ~10% ऊपर जाती है), उपलब्ध ऊर्जा उत्पादक आधार पर सबसे अधिक व शीर्ष पर सबसे कम होती है - अतः पिरामिड सदा ऊपर सँकरा होता है।

उदाहरण 20: ऊर्जा प्रवाह की दिशा पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह चक्रीय है या एकदिशीय? समझाइए। हल: यह एकदिशीय है - ऊर्जा सूर्य → उत्पादक → उपभोक्ता → अपघटक बहती है व वापस नहीं लौटती। (पोषक, इसके विपरीत, अपघटकों द्वारा चक्रित होते हैं।)

उदाहरण 21: उपभोक्ताओं का वर्गीकरण वर्गीकृत कीजिए: टिड्डा, मेंढक, मनुष्य, फीताकृमि, शेर। हल: टिड्डा - शाकाहारी (प्राथमिक उपभोक्ता); मेंढक - मांसाहारी (द्वितीयक उपभोक्ता); मनुष्य - सर्वाहारी; फीताकृमि - परजीवी; शेर - मांसाहारी।

उदाहरण 22: आहार जाल स्थिरता जटिल आहार जाल वाला पारितंत्र अधिक स्थिर क्यों होता है? हल: जटिल आहार जाल जीवों को वैकल्पिक भोजन स्रोत देता है। यदि एक जाति घटे, तो अन्य भिन्न पथ प्रयोग कर सकते हैं, अतः पारितंत्र विक्षोभ का प्रतिरोध करता व अधिक स्थिर होता है।

उदाहरण 23: कीटनाशक व धोना भोजन से कीटनाशक अवशेष धोकर सदा क्यों नहीं हटाए जा सकते? हल: क्योंकि कीटनाशक ऊतकों के भीतर अवशोषित (केवल सतह पर नहीं) व अनिम्नीकरणीय होते हैं, सतह धोने से भोजन के भीतर संचित अवशेष नहीं हट सकते।

उदाहरण 24: ज़मीनी स्तर ओज़ोन क्या ओज़ोन सदा लाभदायक है? समझाइए। हल: नहीं। वायुमंडल के ऊपर ओज़ोन रक्षक है (UV अवशोषित करता)। ज़मीनी स्तर पर ओज़ोन हानिकारक प्रदूषक (विष) है। अतः ओज़ोन केवल ऊपरी वायुमंडल में लाभदायक है।

उदाहरण 25: पोषक चक्रण बनाम ऊर्जा प्रवाह पारितंत्र में पोषक प्रवाह ऊर्जा प्रवाह से कैसे भिन्न है? हल: पोषक चक्रित होते हैं (अपघटकों द्वारा उत्पादकों को वापस पुनर्चक्रित), जबकि ऊर्जा एकदिशीय बहती है व प्रत्येक स्तर पर ऊष्मा के रूप में हानि होकर कभी पुनः उपयोग नहीं होती।

उदाहरण 26: प्रति स्तर जीवों की संख्या किस पोषी स्तर पर जीवों की संख्या सामान्यतः सबसे अधिक होती है? हल: सबसे निचले पोषी स्तर - उत्पादकों पर। संख्या सामान्यतः ऊँचे पोषी स्तरों की ओर घटती जाती है।

उदाहरण 27: CFC विकल्प CFC क्यों बदले जाने चाहिए, व किससे? हल: CFC ओज़ोन परत का क्षय करते हैं, अतः उन्हें CFC-मुक्त (ओज़ोन-हितैषी) प्रशीतकों से बदलना चाहिए। अब CFC-मुक्त रेफ्रिजरेटर बनाना अनिवार्य है।

उदाहरण 28: अपशिष्ट पृथक्करण का लाभ जैव- व अजैव-निम्नीकरणीय अपशिष्ट अलग-अलग क्यों एकत्र करने चाहिए? हल: अलग संग्रह से जैव-निम्नीकरणीय अपशिष्ट की कंपोस्ट/पुनर्चक्रण खाद में व अजैव-निम्नीकरणीय अपशिष्ट का पुनर्चक्रण या सुरक्षित निपटान हो सकता है, जिससे प्रदूषण घटता व उपचार कुशल होता है।

उदाहरण 29: तीन पारितंत्रों की आहार श्रृंखलाएँ वन, घास-स्थल व तालाब के लिए एक-एक आहार श्रृंखला दीजिए। हल: वन: पौधे → हिरण → बाघ। घास-स्थल: घास → टिड्डा → मेंढक → साँप → बाज़। तालाब: शैवाल → छोटी मछली → बड़ी मछली।

उदाहरण 30: मनुष्य कीटनाशक क्यों सीमित करें जैव-आवर्धन को मानव स्वास्थ्य से जोड़िए। हल: चूँकि मनुष्य आहार श्रृंखलाओं के शीर्ष पर हैं, अनिम्नीकरणीय कीटनाशक जैव-आवर्धित होकर मानव शरीर में उच्चतम सांद्रता तक पहुँचते हैं, जिससे स्वास्थ्य जोखिम होता है। अतः कीटनाशक उपयोग सीमित व सुरक्षित विकल्प प्रयोग करने चाहिए।

उदाहरण 31: डिस्पोज़ेबल कप डिस्पोज़ेबल प्लास्टिक कप की तुलना में डिस्पोज़ेबल कागज़ कप का एक लाभ क्या है? हल: कागज़ कप जैव-निम्नीकरणीय हैं (सूक्ष्मजीवों द्वारा तोड़े जाते), जबकि प्लास्टिक कप अजैव-निम्नीकरणीय हैं व प्रदूषण के रूप में बने रहते हैं। अतः कागज़ कप कम दीर्घकालिक पर्यावरणीय हानि करते हैं।

उदाहरण 32: परस्पर निर्भरता एक पंक्ति में दर्शाइए कि पारितंत्र के सभी घटक परस्पर निर्भर क्यों हैं। हल: उत्पादक उपभोक्ताओं को पोषित करते; उपभोक्ता व उत्पादक मरकर अपघटकों द्वारा तोड़े जाते; अपघटक पोषकों को मृदा में उत्पादकों हेतु लौटाते हैं - अतः प्रत्येक समूह अन्य पर (व अजैविक कारकों पर) निर्भर है।