त्वरित पुनरावृत्ति: दोहा-सार सारणी

दोहा विषय मुख्य संदेश
1 कनक (धतूरा) बनाम कनक (सोना) सोने का मोह धतूरे से भी अधिक बुरी 'बौराहट' (मोह-भ्रम) उत्पन्न करता है
2 बाह्य आडंबर बनाम मन की शुद्धता जपमाला-तिलक व्यर्थ हैं यदि मन कच्चा (अशुद्ध) है; राम सच्चे मन से ही रीझते हैं
3 कृष्ण की मुरली का सौंदर्य अधरों की छुअन व नेत्रों की ज्योति से हरी बाँसुरी इंद्रधनुषी रंगों में चमक उठती है
4 सापेक्ष महानता जो नदी, कुआँ, तालाब प्यास बुझाए वही सच्चा 'सागर' है — महानता उपयोगिता से मापी जाती है
5 प्रेम की विरोधाभासी गति अनुरागी चित्त श्याम रंग में जितना डूबता है, उतना ही अधिक उज्ज्वल (निर्मल) होता जाता है
6 धन-वृद्धि व अहंकार सम्पत्ति बढ़ने पर मन का अहंकार भी बढ़ता है; घटने पर अहंकार मिटता नहीं, समूल मुरझा जाता है
7 सापेक्ष सौंदर्य रूप-कुरूप कुछ नहीं होता; मन की रुचि जितनी होती है, वस्तु उतनी ही सुंदर लगती है
8 जीवन का कटु सत्य पाप, राजा और रोग — ये तीनों निर्बल को सदैव दबाते हैं

[Exam Tip] दोहा 1 ('कनक कनक तैं सौगुनौ') और दोहा 6 ('बढ़त-बढ़त सम्पति-सलिलु') परीक्षा में सर्वाधिक पूछे जाने वाले दोहे हैं — इनमें प्रयुक्त यमक और विरोधाभास अलंकार अवश्य याद रखें। बिहारी की काव्य-शैली 'गागर में सागर' के लिए प्रसिद्ध है।