कवि परिचय: कुँवर नारायण

कुँवर नारायण जी का जन्म 19 सितंबर 1927 ई. में उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद में हुआ। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से 1951 ई. में अंग्रेजी में एम.ए. की उपाधि प्राप्त की। उनके साहित्य पर श्री नरेन्द्रदेव और आचार्य कृपलानी जी का प्रभाव दिखाई देता है।

उनका पहला काव्य संकलन 'चक्रव्यूह' 1956 ई. में प्रकाशित हुआ, जो हिन्दी साहित्य में मील का पत्थर माना जाता है।

प्रसिद्ध रचनाएँ (काव्य): परिवेश, अपने सामने, कोई दूसरा नहीं, आत्मजयी, वाजश्रवा के बहाने, तीसरा सप्तक, हम तुम, इन दिनों आदि। उनका कहानी संकलन 'आकारों के आस पास' 1971 ई. में प्रकाशित हुआ।

पुरस्कार एवं सम्मान: साहित्य अकादमी पुरस्कार, कबीर सम्मान, तथा 2005 ई. में समग्र साहित्य के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार। उनकी साहित्यिक सेवा के लिए भारत सरकार ने 2009 ई. में 'पद्मभूषण' की उपाधि से विभूषित किया।

[Exam Tip] कुँवर नारायण का पहला काव्य-संकलन 'चक्रव्यूह' (1956) और उनका ज्ञानपीठ पुरस्कार वर्ष (2005) परीक्षा में अक्सर पूछे जाते हैं।

कविता की पृष्ठभूमि एवं सारांश

प्रस्तुत कविता 'एक वृक्ष की हत्या' में कवि कुँवर नारायण ने वृक्षों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है। बचपन से ही कवि जिस वृक्ष को देखते थे, उसके न दिखने से वे उस वृक्ष की यादों में खो जाते हैं। कवि और उस वृक्ष के बीच एक विशेष रिश्ता बना हुआ था — कवि उस वृक्ष को एक दोस्त के रूप में देखते थे।

कविता में कवि घर लौटते हैं तो पाते हैं कि वह पुराना, बूढ़ा वृक्ष — जो हमेशा घर के दरवाजे पर एक चौकीदार की तरह तैनात रहता था — अब वहाँ नहीं है। कवि उस वृक्ष की शारीरिक बनावट का अत्यंत सजीव वर्णन करते हैं — जैसे वह एक वास्तविक चौकीदार हो, जो धूप-बारिश, गर्मी-सर्दी में सदैव चौकन्ना रहकर 'कौन?' पूछता था, और कवि 'दोस्त!' कहकर उत्तर देते हुए उसकी छाँव में बैठ जाते थे।

कविता के अंत में कवि बताते हैं कि शुरू से ही उनके मन में एक गहरा अंदेशा (चिंता) था — घर को लुटेरों से, शहर को नादिरों (आतंकियों) से, देश को दुश्मनों से बचाना है। इसी प्रकार नदियों को नाला बनने से, हवा को धुआँ बनने से, भोजन को विष बनने से, जंगल को मरुभूमि बनने से, और अंततः मनुष्य को स्वयं 'जंगल' (क्रूर, असंवेदनशील) बनने से बचाना है। इस प्रकार वृक्ष के कट जाने के व्यक्तिगत दुख से आरंभ होकर कविता पर्यावरण-संरक्षण और मानवीय संवेदनशीलता की रक्षा के व्यापक संदेश तक पहुँचती है।