त्वरित पुनरावृत्ति: कविता-सार सारणी

अंश विषय संदेश
प्रथम बूढ़ा चौकीदार वृक्ष अब नहीं है वृक्ष का सजीव मानवीकरण — तना, डाल, पत्ती, जड़ का चौकीदार-रूप वर्णन
द्वितीय वृक्ष-कवि की आत्मीय मित्रता 'कौन?'-'दोस्त!' संवाद व ठंडी छाँव में विश्राम
तृतीय पर्यावरण व मानवता की रक्षा घर-शहर-देश से लेकर नदी-हवा-जंगल-मनुष्य तक की रक्षा का व्यापक आह्वान

रचयिता: कुँवर नारायण | प्रथम काव्य-संकलन: चक्रव्यूह (1956) | ज्ञानपीठ पुरस्कार: 2005 | प्रधान अलंकार: मानवीकरण | प्रधान रस: करुण रस

[Exam Tip] संदर्भ भाव स्पष्टीकरण हेतु सबसे अधिक पूछी जाने वाली पंक्तियाँ हैं — 'अबकी घर लौटा तो देखा वह नहीं था…' तथा 'दरअसल शुरू से ही था हमारे अंदेशों में…' — इनकी व्याख्या अवश्य याद रखें।