प्रश्न: वृक्ष न दिखने पर कवि उसकी यादों में कैसे खो गये?

उत्तर: जब कवि इस बार घर लौटे तो उन्होंने पाया कि वह पुराना, बूढ़ा वृक्ष — जो हमेशा घर के दरवाजे पर एक चौकीदार की तरह तैनात रहता था — अब वहाँ नहीं है। इस अनुपस्थिति ने कवि के मन में वृक्ष के साथ बिताए पलों की यादें ताज़ा कर दीं — उसका खुरदुरा तना, सूखी डाल, पत्तियाँ, और वह परिचित संवाद 'कौन?' — 'दोस्त!' सब कुछ कवि के मन में जीवंत हो उठा। वे उस वृक्ष को केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि एक आत्मीय मित्र और रक्षक के रूप में याद करते हैं, और उसकी अनुपस्थिति उन्हें गहरे शोक और स्मृतियों में डुबो देती है।

प्रश्न: वृक्ष की महत्ता पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: इस कविता में वृक्ष केवल एक प्राकृतिक वस्तु नहीं, बल्कि सुरक्षा, मित्रता और स्थायित्व का प्रतीक है। वह वर्षों तक धूप-बारिश, गर्मी-सर्दी में अडिग खड़ा रहकर घर की चौकीदारी करता है — यह उसकी सहनशीलता और निष्ठा को दर्शाता है। वृक्ष अपनी छाँव देकर राहत प्रदान करता है, ऑक्सीजन देकर जीवन का आधार बनता है, और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखता है। कवि के लिए यह वृक्ष एक आत्मीय साथी था, जिसकी अनुपस्थिति एक गहरे भावनात्मक शून्य को जन्म देती है — इस प्रकार कविता वृक्षों के पारिस्थितिक एवं भावनात्मक दोनों महत्व को उजागर करती है।

प्रश्न: पर्यावरण के संरक्षण के संबंध में कवि कुँवर नारायण के विचार लिखिए।

उत्तर: कवि कुँवर नारायण पर्यावरण-संरक्षण को अत्यंत गंभीरता से प्रस्तुत करते हैं। वे कहते हैं कि जिस प्रकार घर को लुटेरों से, शहर को नादिरों (आतंकियों) से, और देश को दुश्मनों से बचाना आवश्यक है, उसी प्रकार नदियों को नाला बनने से, हवा को धुआँ बनने से, भोजन को विष बनने से, और जंगल को मरुभूमि बनने से बचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कवि की सबसे गहरी चिंता यह है कि मनुष्य स्वयं अपनी संवेदनशीलता खोकर 'जंगल' (क्रूर व असभ्य) न बन जाए। इस प्रकार कवि पर्यावरण-संरक्षण को मानवीय मूल्यों की रक्षा से जोड़ते हैं — दोनों परस्पर संबद्ध हैं।

संदर्भ सहित भाव स्पष्ट कीजिए:

"अबकी घर लौटा तो देखा वह नहीं था- वही बूढ़ा चौकीदार वृक्ष जो हमेशा मिलता था घर के दरवाजे पर तैनात !"

संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ कुँवर नारायण द्वारा रचित कविता 'एक वृक्ष की हत्या' से ली गई हैं।

भाव स्पष्टीकरण: इन पंक्तियों में कवि अपनी गहरी वेदना व्यक्त करते हैं जब वे घर लौटने पर पाते हैं कि वह पुराना, परिचित वृक्ष — जो सदैव घर के दरवाजे पर एक चौकीदार की तरह तैनात रहता था — अब वहाँ नहीं है। यह वृक्ष कवि के लिए केवल एक पेड़ नहीं था, बल्कि वर्षों पुराना साथी और रक्षक था। उसकी अनुपस्थिति कवि के मन में गहरा खालीपन और स्मृतियों की बाढ़ ला देती है, जो आगे चलकर पर्यावरण-संरक्षण के व्यापक चिंतन में परिवर्तित हो जाती है।

अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न (एक-वाक्य/लघु उत्तर हेतु स्मरणीय तथ्य)

  1. कवि ने बूढ़ा चौकीदार वृक्ष को कहा है।
  2. वृक्ष का शरीर पुराने चमड़े जैसा (तना) बना है।
  3. सूखी डाल राइफिल-सी है।
  4. वृक्ष की पगड़ी फूल पत्तीदार है।
  5. देश को देश के दुश्मनों से बचाना है।
  6. हवा को धुँआ हो जाने से बचाना है।
  7. जंगल को मरुथल हो जाने से बचाना है।