त्वरित पुनरावृत्ति: वाक्य शुद्धि एवं लिंग
इस निबंध के अभ्यास में लिंग-असंगति (जैसे 'शक्ति' स्त्रीलिंग को 'ऐसा' पुल्लिंग से जोड़ना) और कारक-त्रुटि पर विशेष ध्यान दिया गया है।
| शब्द | लिंग |
|---|---|
| शक्ति | स्त्रीलिंग |
| काम | पुल्लिंग |
| धर्म | पुल्लिंग |
| दृष्टि | स्त्रीलिंग |
| बात | स्त्रीलिंग |
| नौकरी | स्त्रीलिंग |
| मार्ग | पुल्लिंग |
| मिठाई | स्त्रीलिंग |
[Exam Tip] विशेषण सदैव संज्ञा के लिंग के अनुसार बदलता है — 'ऐसा/ऐसी', 'बड़ा/बड़ी', 'दिखावा रुचता/रुचती' जैसे युग्मों पर विशेष ध्यान दें।
त्वरित पुनरावृत्ति: उपसर्ग, प्रत्यय, वचन एवं विलोम
उपसर्ग के उदाहरण (इस पाठ के शब्दों से): चरित्र→दुश्चरित्र/सच्चरित्र, स्वार्थ→निःस्वार्थ, धर्म→अधर्म, मान→अपमान/सम्मान, सत्य→असत्य।
प्रत्यय पहचान: सत्यता = सत्य + ता; अस्थिरता = अस्थिर + ता; चंचलता = चंचल + ता; मनुष्यता = मनुष्य + ता; आवश्यकता = आवश्यक + ता; कायरता = कायर + ता — इन सभी में प्रत्यय 'ता' भाववाचक संज्ञा बनाता है।
वचन-परिवर्तन: नौकरी→नौकरियाँ, स्त्री→स्त्रियाँ, रीति→रीतियाँ, वस्तु→वस्तुएँ, आज्ञा→आज्ञाएँ।
विलोम शब्द: प्रारम्भ↔अंत, सत्य↔असत्य, धर्म↔अधर्म, उन्नति↔अवनति, सफल↔असफल, ऊँचा↔नीचा, अच्छा↔बुरा, आदर↔अनादर, निर्बल↔सबल, स्थिर↔अस्थिर।