प्रश्न: 'कायर मत बन' कविता के द्वारा कवि हमें क्या संदेश देते हैं?
उत्तर: 'कायर मत बन' कविता के द्वारा कवि नरेन्द्र शर्मा हमें यह संदेश देते हैं कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ या बाधाएँ (पाहन/पत्थर) क्यों न आएँ, मनुष्य को कभी कायर नहीं बनना चाहिए। समझौता करके, दबकर जीना कोई सच्चा जीवन नहीं है। मानवता ने युगों तक त्याग और परिश्रम से मनुष्य को पोषित किया है, इसलिए उसे साहस के साथ आगे बढ़ना चाहिए। दुष्टों के सम्मुख कभी आत्मसमर्पण न करते हुए, अपना सर्वस्व मानवता की सेवा में अर्पित करना चाहिए — यही इस कविता का मूल संदेश है।
प्रश्न: नरेन्द्र शर्मा ने प्रतिहिंसा और कायरता के संबंध में क्या कहा है?
उत्तर: कवि नरेन्द्र शर्मा के अनुसार प्रतिहिंसा (बदले की भावना) भी एक प्रकार की दुर्बलता है, क्योंकि यह क्रोध और द्वेष से प्रेरित होती है। परन्तु कवि यह स्पष्ट करते हैं कि कायरता प्रतिहिंसा से भी अधिक अपावन (अपवित्र) है, क्योंकि कायरता मनुष्य के आत्म-सम्मान और मानवीय गरिमा को पूर्णतः नष्ट कर देती है। इसलिए कवि प्रेम (प्रीति) के बल पर विजय प्राप्त करने को सर्वोत्तम मार्ग मानते हैं, न कि प्रतिहिंसा या कायरता को।
प्रश्न: मानवता के प्रति कवि नरेन्द्र शर्मा के विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर: कवि नरेन्द्र शर्मा मानवता को सर्वोच्च मूल्य मानते हैं। उनके अनुसार मानवता ने युगों तक खून-पसीना बहाकर मनुष्य को सींचा और पोषित किया है। मनुष्य के शरीर की सुरक्षा का कोई विशेष मोल नहीं, परन्तु उसकी मानवता अमूल्य है — शरीर नश्वर है और मिट जाता है, परन्तु मानवीय आदर्श और मूल्य सदा बने रहते हैं। इसीलिए कवि मनुष्य से आह्वान करते हैं कि वह अपना सर्वस्व मानवता की सेवा में अर्पित करे, परन्तु दुष्ट के सामने कभी आत्मसमर्पण न करे।
संदर्भ सहित भाव स्पष्ट कीजिए:
"ले-देकर जीना क्या जीना ? कब तक गम के आँसू पीना ? मानवता ने सींचा तुझको बहा युगों तक खून-पसीना !"
संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि नरेन्द्र शर्मा द्वारा रचित कविता 'कायर मत बन' से ली गई हैं।
भाव स्पष्टीकरण: इन पंक्तियों में कवि व्यंग्यात्मक प्रश्न पूछते हैं कि समझौता करके, दबकर जीना कोई सच्चा जीवन नहीं है, और मनुष्य को कब तक दुख के आँसू पीते रहना चाहिए। कवि याद दिलाते हैं कि मानवता ने युगों-युगों तक त्याग, परिश्रम और खून-पसीना बहाकर मनुष्य को सींचा और सशक्त बनाया है। इसलिए मनुष्य को कायरतापूर्ण रुदन के बजाय साहस के साथ कुछ कर दिखाना चाहिए — यही इन पंक्तियों का मूल भाव है।
अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न (एक-वाक्य/लघु उत्तर हेतु स्मरणीय तथ्य)
- कवि नरेन्द्र शर्मा मनुष्य को कायर न बनने का संदेश देते हैं।
- पत्थर (पाहन) राह रोकते हैं।
- मानवता ने मनुष्य को सींचा है।
- कवि मनुष्य को प्रीति (प्रेम) के बल पर जीतने को कहते हैं।
- कवि के अनुसार प्रतिहिंसा भी दुर्बलता है।
- कवि ने कायरता को प्रतिहिंसा से भी अधिक अपावन कहा है।
- कवि मनुष्य को दुष्ट के सामने आत्मसमर्पण न करने के लिए कहते हैं।