त्वरित पुनरावृत्ति: कविता-सार सारणी

अंतरा विषय संदेश
प्रथम (टेक सहित) कठिनाइयों (पाहन) का सामना कायर न बनकर बाधाओं को ठोकर मारकर आगे बढ़ो
द्वितीय समझौते का जीवन व्यर्थ मानवता ने त्याग से सींचा है, कातर रुदन न करें
तृतीय दुष्ट की चुनौती प्रेम के बल पर जीतो, प्रतिहिंसा से कायरता अधिक अपावन है
चतुर्थ मानवता का महत्व शरीर नश्वर, मानवता अमोल — दुष्ट को आत्मसमर्पण मत करो

रचयिता: नरेन्द्र शर्मा | प्रधान रस/गुण: वीर रस, ओज गुण | भाषा: शुद्ध साहित्यिक खड़ी बोली

[Exam Tip] संदर्भ भाव स्पष्टीकरण हेतु सबसे अधिक पूछी जाने वाली पंक्तियाँ हैं — 'ले-देकर जीना क्या जीना…' तथा 'युद्धं देहि कहे जब पामर…' — इनकी व्याख्या अवश्य याद रखें।