लघु-उत्तरीय प्रश्न (आदर्श उत्तर)
प्रश्न 1: गोपिकाएँ अपने आपको क्यों भाग्यशालिनी समझती हैं?
उत्तर: गोपिकाएँ स्वयं को भाग्यशालिनी इसलिए समझती हैं क्योंकि उनकी आँखों ने साक्षात् श्याम (श्रीकृष्ण) को देख लिया है। कृष्ण-दर्शन से उन्हें ऐसा आनंद प्राप्त होता है जैसे भ्रमर फूल की सुगंध पाकर आनंदित होता है, या जैसे दर्पण में प्रतिबिंब देखने में गहरी रुचि लगती है। सूरदास कहते हैं कि हरि से मिलन होते ही उनके शरीर से विरह की समस्त व्यथा दूर हो गई — यही उनके सौभाग्य का कारण है।
प्रश्न 2: श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन कीजिए।
उत्तर: यमुना तट पर खड़े श्रीकृष्ण के सिर पर मोर-पंखों का मुकुट है, कानों में मकर के आकार के कुंडल हैं, शरीर पर पीले वस्त्र धारण किए हुए हैं और चंदन का लेप लगा है। उनके कमल-समान नेत्र अत्यंत मनोहर हैं। उनके दर्शन मात्र से गोपिकाओं के नेत्र तृप्त हो जाते हैं और हृदय की तपन शांत हो जाती है — वे प्रेम में इतनी मग्न हो जाती हैं कि मुख से वाणी तक नहीं निकाल पातीं।
प्रश्न 3: सूरदास ने माखन-चोरी प्रसंग का किस प्रकार वर्णन किया है?
उत्तर: सूरदास ने बाल-कृष्ण की माखन-चोरी लीला को अत्यंत सजीव संवाद-शैली में प्रस्तुत किया है। एक गोपी कृष्ण को माखन चुराते हुए रंगे हाथों पकड़ लेती है और शिकायत करती है कि उसने रात-दिन उसे बहुत सताया है तथा उसका सारा माखन-दही खा लिया है। पकड़े जाने पर नटखट कृष्ण चतुराई से सफाई देते हैं कि उन्होंने स्वयं कुछ नहीं खाया, बल्कि उनके सखाओं ने सब खा लिया। अंततः कृष्ण की मासूम मुस्कान देखकर गोपी का क्रोध पिघल जाता है और वह उन्हें हृदय से लगा लेती है। सूरदास इस मनमोहक बाल-लीला पर स्वयं को न्योछावर मानते हैं — यह प्रसंग वात्सल्य और माधुर्य भाव का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत करता है।
संदर्भ भाव स्पष्टीकरण:
"ऊधौ हम आजु भईं बड़-भागी। जिन अँखियन तुम स्याम बिलोके, ते अँखियाँ हम लागीं। जैसे सुमन बास लै आवत, पवन मधुप अनुरागी। अति आनंद होत है तैसें, अंग-अंग सुख रागी।" — यह पद सूरदास द्वारा रचित है, जिसमें गोपिकाएँ उद्धव को संबोधित करते हुए अपने सौभाग्य का वर्णन करती हैं। उनका कहना है कि जिन आँखों ने श्रीकृष्ण को देखा है, वे आँखें अत्यंत भाग्यशाली हैं। जैसे पवन फूल की सुगंध लेकर आता है और भ्रमर उस पर मुग्ध हो जाता है, वैसे ही कृष्ण-दर्शन से उनके अंग-अंग में अपार आनंद व्याप्त हो जाता है। यह पंक्ति गोपी-कृष्ण के अनन्य, सहज प्रेम-भाव की सुंदर अभिव्यक्ति है।