कृषि
कृषि अध्याय से 2026-27 के सैंपल पेपर में 5 अंक आए, जहाँ भूगोल का 5 अंक वाला प्रश्न (चाय या कॉफ़ी; चावल या गेहूँ) इसी से था, और 2026 के दोनों बोर्ड प्रश्न-पत्रों में 3-3 अंक। इससे संकेतों से फ़सल पहचानने या कर्तन दहन प्रणाली के नामों को राज्यों से सुमेलित करने वाले बहुविकल्पीय प्रश्न, कृषि के प्रकारों पर 2 या 3 अंक का प्रश्न, और मानचित्र पर अग्रणी फ़सल वाला राज्य (2025 में जूट, मई 2026 में चाय) भी पूछे जाते हैं।
सबसे ज़्यादा अंक इन गलतियों से कटते हैं: रबी, खरीफ़ और ज़ायद की फ़सलों को आपस में मिला देना, किसी फ़सल के लिए गलत वर्षा या तापमान लिखना, कोई फ़सल कहाँ वाणिज्यिक है और कहाँ जीविका, यह बताए बिना उत्तर लिखना, और मानचित्र पर फ़सल वाले राज्य को गलत जगह दिखाना।
5 मिनट में दोहराएँ
कृषि के प्रकार
| प्रकार | याद रखें |
|---|---|
| प्रारंभिक जीविका निर्वाह (कर्तन दहन प्रणाली) | जंगल के छोटे टुकड़े; कुदाल, दाओ, खुदाई की छड़ी; पारिवारिक श्रम; मानसून और प्राकृतिक उर्वरता पर निर्भर; उर्वरता घटने पर टुकड़ा छोड़ना |
| गहन जीविका | घनी आबादी में छोटे खेत; जैव-रासायनिक आगतों और सिंचाई की ऊँची मात्रा; बहुत श्रम |
| वाणिज्यिक | HYV बीज, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक, पीड़कनाशक; चावल पंजाब-हरियाणा में वाणिज्यिक, ओडिशा में जीविका फ़सल |
| रोपण (वाणिज्यिक कृषि का एक प्रकार) | बड़े क्षेत्र पर एक फ़सल; पूँजी और प्रवासी श्रमिक; उपज उद्योग को; चाय (असम, उत्तरी बंगाल), कॉफ़ी (कर्नाटक), रबड़, गन्ना, केला |
कर्तन दहन प्रणाली के नाम: झूमिंग (असम, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड), पामलू (मणिपुर), दीपा (बस्तर), बेवर/दहिया (मध्य प्रदेश), पोडु/पेंडा (आंध्र प्रदेश), पामा डाबी/कोमान/बरीगाँ (ओडिशा), कुरुवा (झारखंड), कुमारी (पश्चिमी घाट), वालरे/वाल्ट्रे (दक्षिण-पूर्वी राजस्थान), खिल (हिमालय क्षेत्र)।
ऋतुएँ: रबी, बुवाई अक्टूबर-दिसंबर, कटाई अप्रैल-जून (गेहूँ, जौ, मटर, चना, सरसों; पश्चिमी शीतोष्ण चक्रवातों की शीतकालीन वर्षा सहायक)। खरीफ़, मानसून के साथ बुवाई, कटाई सितंबर-अक्टूबर (धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, तुर, मूँग, उड़द, कपास, जूट, मूँगफली, सोयाबीन)। ज़ायद, गर्मियों की छोटी अवधि (तरबूज़, खरबूज़ा, खीरा, सब्ज़ियाँ, चारा)। असम, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में धान की तीन फ़सलें: ऑस, अमन, बोरो।
याद रखने वाले अंक: चावल 25°C से ऊपर और 100 सेमी से अधिक (उत्तर और पूर्वोत्तर के मैदान, तटीय क्षेत्र, डेल्टा); गेहूँ 50-75 सेमी; मक्का और गन्ना 21°C से 27°C (गन्ना 75-100 सेमी); रबड़ 200 सेमी से अधिक और 25°C से ऊपर; कपास 210 पाला-रहित दिन, 6-8 महीने।
अग्रणी राज्य: गन्ना - उत्तर प्रदेश; चाय - असम; कॉफ़ी - कर्नाटक; रबड़ - केरल; जूट - पश्चिम बंगाल; कपास - गुजरात और महाराष्ट्र।
सुधार: भूमि सुधार (पहली पंचवर्षीय योजना), हरित और श्वेत क्रांति, फ़सल बीमा, ग्रामीण बैंक, KCC, PAIS, न्यूनतम सहायता मूल्य। भूदान-ग्रामदान: विनोबा भावे, पोचमपल्ली।
ध्यान दें
- गन्ना लगभग एक वर्ष लेता है, इसलिए किसी एक ऋतु का नहीं है।
- अरहर वह दाल है जो नाइट्रोजन स्थिर नहीं करती।
- तीसरी सबसे महत्त्वपूर्ण खाद्य फ़सल ज्वार है, बाजरा नहीं।
- तिल उत्तर में खरीफ़ की, पर दक्षिण में रबी की फ़सल है।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: हर प्रश्न पहले कॉपी पर हल कीजिए, फिर उत्तर पढ़िए। हर चरण के सामने लिखे अंक बताते हैं कि परीक्षक क्या देखता है। 1 अंक वाले बहुविकल्पीय और अभिकथन-कारण प्रश्न अंत की क्विज़ में हैं, साथ में ऐसे प्रश्न भी जो जाँचते हैं कि आपने अध्याय कितनी गहराई से समझा है; क्विज़ के हर उत्तर के साथ उसकी व्याख्या दी गई है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (2 और 3 अंक)
प्रश्न 1 (2 अंक)
नीचे दिए गए भारत के रेखा-मानचित्र पर दो राज्य A और B छायांकित हैं। निम्नलिखित जानकारी की सहायता से इन्हें पहचानिए और इनके सही नाम लिखिए।
A. चाय में देश का अग्रणी राज्य; इसके बहुत-से चाय बागान ब्रह्मपुत्र घाटी में हैं।
B. पश्चिम का वह राज्य जो 2019-20 में मूँगफली का सबसे बड़ा उत्पादक था और कपास उगाने वाला प्रमुख राज्य भी है।

उत्तर।
आदर्श उत्तर:
A. असम, पूर्वोत्तर में।
B. गुजरात, पश्चिमी तट पर।
अंक योजना:
- A: असम — 1 अंक
- B: गुजरात — 1 अंक
प्रश्न 2 (2 अंक)
भारत के अधिकांश भागों में मक्का खरीफ़ की फ़सल है, पर बिहार जैसे कुछ राज्यों में यह रबी में भी उगाया जाता है। मक्का के लिए आवश्यक तापमान और मृदा बताइए, और एक कारण दीजिए कि किसान इसे क्यों महत्त्व देते हैं।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- मक्का को 21°C से 27°C तापमान चाहिए और यह पुरानी जलोढ़ मृदा में अच्छा उगता है।
- किसान इसे इसलिए महत्त्व देते हैं क्योंकि इससे परिवार को भोजन और पशुओं को चारा, दोनों मिलते हैं।
अंक योजना:
- 21°C से 27°C तापमान (0.5) और पुरानी जलोढ़ मृदा (0.5)। — 1 अंक
- यह भोजन के साथ-साथ पशुओं के चारे के रूप में भी काम आता है। (यह भी स्वीकार्य: HYV बीज, उर्वरक और सिंचाई जैसे आधुनिक आगतों से इसकी उपज अधिक होती है।) — 1 अंक
प्रश्न 3 (3 अंक)
पंजाब और हरियाणा में चावल को वाणिज्यिक फ़सल कहा जाता है, पर ओडिशा में जीविका फ़सल। इसका कारण स्पष्ट कीजिए और वाणिज्यिक कृषि की एक विशेषता बताइए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- पंजाब और हरियाणा में चावल मुख्यतः बेचने के लिए उगता है, इसलिए वहाँ वाणिज्यिक फ़सल है।
- ओडिशा में अधिकांश चावल किसान का परिवार खाता है, इसलिए वहाँ यह जीविका फ़सल है। व्यापारीकरण प्रदेश के अनुसार बदलता है।
- वाणिज्यिक कृषि में HYV बीज, रासायनिक उर्वरक और पीड़कनाशक लगते हैं।
अंक योजना:
- पंजाब और हरियाणा में चावल मुख्य रूप से बाज़ार में बेचने के लिए उगाया जाता है, किसान के अपने परिवार के लिए नहीं। — 1 अंक
- ओडिशा में अधिकांश चावल किसान का अपना परिवार खाता है, इसलिए वहाँ यह जीविका फ़सल है; किसी फ़सल के व्यापारीकरण का स्तर प्रदेश के अनुसार बदलता है। — 1 अंक
- विशेषता: अधिक उपज के लिए HYV बीजों, रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और पीड़कनाशकों जैसे आधुनिक आगतों का भारी उपयोग। (यह भी स्वीकार्य: बड़े खेत, मशीनों का उपयोग, अतिरिक्त उपज बाज़ार में बेचना।) — 1 अंक
प्रश्न 4 (3 अंक)
तीन खेतों के बारे में दी गई तालिका पढ़िए (उदाहरण काल्पनिक हैं)।
| खेत | खेत पर क्या होता है |
|---|---|
| P | नागालैंड में एक परिवार पहाड़ी ढलान पर जंगल का एक टुकड़ा साफ़ करता है, खुदाई की छड़ी से बीज बोता है और कुछ वर्ष बाद नए टुकड़े पर चला जाता है। |
| Q | पश्चिम बंगाल के घनी आबादी वाले एक ज़िले में तीन भाई अब उस खेत का एक-एक तिहाई जोतते हैं जिसे कभी उनके पिता जोतते थे। हर भाई मुख्यतः अपने परिवार के भोजन के लिए फ़सल उगाता है। |
| R | एक कंपनी 300 हेक्टेयर पर केवल चाय उगाती है, मज़दूर रखकर काम करवाती है और पत्तियों को बागान में बने अपने कारखाने में संसाधित करती है। |
हर खेत पर कृषि का प्रकार बताइए और तालिका से वह एक विशेषता दीजिए जो इसे दिखाती है।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- P: प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि (झूमिंग)। उर्वरता घटने पर परिवार नया टुकड़ा साफ़ करता है।
- Q: गहन जीविका कृषि। घनी आबादी में ज़मीन वारिसों में बँटती है, खेत छोटे होते हैं और परिवार का पेट भरते हैं।
- R: रोपण कृषि। बड़े बागान पर मज़दूरों से एक ही फ़सल उगाकर वहीं संसाधित की जाती है।
अंक योजना:
- P: प्रारंभिक जीविका निर्वाह (कर्तन दहन प्रणाली, झूमिंग) कृषि; टुकड़ा साफ़ करके साधारण औज़ारों से बोया जाता है और उर्वरता घटने पर छोड़ दिया जाता है। — 1 अंक
- Q: गहन जीविका कृषि; घनी आबादी वाले क्षेत्र में ज़मीन वारिसों में बँटती है, इसलिए खेत छोटे होते जाते हैं और परिवार की अपनी ज़रूरत के लिए जोते जाते हैं। — 1 अंक
- R: रोपण कृषि; बड़े क्षेत्र पर एक ही फ़सल, मज़दूरी पर रखे श्रमिक, और उद्योग व बाज़ार के लिए बागान पर ही संसाधन। — 1 अंक
प्रश्न 5 (3 अंक)
एक सहकारी समिति जानना चाहती है कि कोई ज़िला चीनी मिल चला पाएगा या नहीं। गन्ने के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं का वर्णन कीजिए, और चीनी के अलावा इससे बनने वाले दो उत्पादों के नाम बताइए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- गन्ने को 21°C से 27°C तापमान वाली उष्ण और आर्द्र जलवायु चाहिए।
- इसे साल में 75-100 सेमी वर्षा चाहिए; कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई ज़रूरी है। यह कई मृदाओं में उगता है, पर इसमें हाथ का श्रम बहुत लगता है।
- चीनी के अलावा इससे गुड़ और खांडसारी बनते हैं।
अंक योजना:
- यह उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय फ़सल है, जिसे 21°C से 27°C तापमान वाली उष्ण और आर्द्र जलवायु चाहिए। — 1 अंक
- इसे 75-100 सेमी वार्षिक वर्षा चाहिए, और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई; यह कई तरह की मृदाओं में उग जाता है, पर बुवाई से कटाई तक हाथ का श्रम चाहिए। — 1 अंक
- कोई दो उत्पाद: गुड़, खांडसारी, शीरा। — 1 अंक
प्रश्न 6 (2 अंक)
कपास को लगभग 210 पाला-रहित दिन चाहिए और यह 6 से 8 महीने में तैयार होती है। स्पष्ट कीजिए कि यह हिमाचल प्रदेश की ऊँची पहाड़ियों में क्यों नहीं उगाई जाती, पर दक्कन के पठार पर अच्छी होती है।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- ऊँची पहाड़ियों में सर्दी में पाला पड़ता है, इसलिए कपास को लंबा पाला-रहित समय नहीं मिलता।
- दक्कन के शुष्क काली मृदा वाले भागों में ऊँचा तापमान, खिली धूप और हल्की वर्षा या सिंचाई मिलती है।
अंक योजना:
- ऊँची पहाड़ियों में सर्दियाँ ठंडी होती हैं और पाला पड़ता है, इसलिए वहाँ कपास को पर्याप्त लंबा पाला-रहित समय नहीं मिलता। — 1 अंक
- दक्कन के काली मृदा वाले क्षेत्र के शुष्क भागों में ऊँचा तापमान, खिली धूप और हल्की वर्षा या सिंचाई मिलती है, जो कपास को चाहिए। — 1 अंक
प्रश्न 7 (2 अंक)
किसान अक्सर मूँग, उड़द और मसूर जैसी दालों को दूसरी फ़सलों के साथ हेर-फेर (फ़सल चक्र) में उगाते हैं। इसके दो कारण बताइए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- दालें फलीदार हैं। अरहर को छोड़कर सभी हवा से नाइट्रोजन स्थिर करती हैं, जिससे मृदा फिर उपजाऊ होती है।
- इन्हें कम नमी चाहिए, इसलिए ये बिना अधिक पानी के दूसरी फ़सलों के बीच उग जाती हैं।
अंक योजना:
- दालें फलीदार फ़सलें हैं; अरहर को छोड़कर ये सभी हवा से नाइट्रोजन लेकर मृदा में स्थिर करती हैं और अगली फ़सल के लिए मृदा की उर्वरता लौटाती हैं। — 1 अंक
- इन्हें कम नमी चाहिए और ये शुष्क परिस्थितियों में भी बची रहती हैं, इसलिए ये बिना अधिक पानी के दूसरी फ़सलों के बीच आसानी से उगाई जा सकती हैं। (यह भी स्वीकार्य: उसी खेत से एक अतिरिक्त फ़सल और आय मिलती है।) — 1 अंक
प्रश्न 8 (2 अंक)
भारत के गेहूँ उगाने वाले दो प्रमुख क्षेत्रों के नाम बताइए, और गेहूँ के लिए आवश्यक दो जलवायवी दशाएँ लिखिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- दो क्षेत्र हैं: उत्तर-पश्चिम में गंगा-सतलुज का मैदान और दक्कन का काली मृदा वाला प्रदेश।
- गेहूँ को ठंडी बढ़वार ऋतु, दाना पकते समय खिली धूप और समान रूप से बँटी 50-75 सेमी वर्षा चाहिए।
अंक योजना:
- क्षेत्र: उत्तर-पश्चिम में गंगा-सतलुज का मैदान (0.5) और दक्कन का काली मृदा वाला प्रदेश (0.5)। — 1 अंक
- कोई दो: ठंडी बढ़वार ऋतु; दाना पकते समय खिली धूप; बढ़वार ऋतु में समान रूप से बँटी 50-75 सेमी वर्षा (प्रत्येक 0.5)। — 1 अंक
दीर्घ उत्तरीय और स्रोत आधारित प्रश्न
प्रश्न 9 (5 अंक)
हरि तटीय ओडिशा में 1.2 हेक्टेयर पर खेती करता है। पिछले तीन वर्षों में उसे ये समस्याएँ झेलनी पड़ीं:
(i) कटाई से ठीक पहले एक चक्रवात ने उसका धान नष्ट कर दिया।
(ii) बीज और उर्वरक के लिए उसने साहूकार से बहुत ऊँची ब्याज दर पर पैसा उधार लिया।
(iii) अच्छी फ़सल के बाद व्यापारियों ने इतना कम दाम दिया कि लागत भी नहीं निकली।
(iv) उसकी ज़मीन चार छोटे, बिखरे टुकड़ों में है, जिससे समय और पानी बर्बाद होता है।
(v) उसने बहुत जल्दी बुवाई कर दी, क्योंकि उसे पता ही नहीं था कि वर्षा कब आएगी।
हर समस्या के लिए एक प्रौद्योगिकीय या संस्थागत सुधार बताइए जो उसकी मदद करे, और स्पष्ट कीजिए कि कैसे।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- चक्रवात से नुकसान: फ़सल बीमा चक्रवात, बाढ़, सूखे, आग या बीमारी से नष्ट फ़सल की भरपाई करेगा।
- साहूकार का कर्ज़: किसान क्रेडिट कार्ड, ग्रामीण बैंक या सहकारी बैंक उसे कम ब्याज पर ऋण देंगे।
- कम दाम: सरकार का घोषित न्यूनतम सहायता मूल्य व्यापारियों और बिचौलियों को उसका शोषण नहीं करने देगा।
- बिखरे खेत: जोतों की चकबंदी उसके चारों टुकड़ों को एक कर देगी, जिससे समय और पानी बचेगा।
- वर्षा का पता न होना: रेडियो और टीवी पर मौसम की जानकारी बताएगी कि बुवाई कब करें।
अंक योजना:
- (i) फ़सल बीमा: यह सूखा, बाढ़, चक्रवात, आग और बीमारी से नष्ट फ़सल की भरपाई करता है। — 1 अंक
- (ii) किसान क्रेडिट कार्ड, ग्रामीण बैंक या सहकारी समितियाँ और बैंक: ये कम ब्याज दर पर ऋण देते हैं। — 1 अंक
- (iii) न्यूनतम सहायता मूल्य, साथ में लाभकारी और खरीद मूल्य: सरकार का घोषित मूल्य उसे सट्टेबाज़ों और बिचौलियों से बचाता है। — 1 अंक
- (iv) जोतों की चकबंदी (एक भूमि सुधार): बिखरे टुकड़े एक जगह जोड़े जाते हैं, जिससे खेती आसान और सस्ती होती है। — 1 अंक
- (v) रेडियो और टेलीविज़न पर मौसम की जानकारी और कृषि कार्यक्रम: इनसे उसे पता चलता है कि वर्षा कब होगी। (हर समस्या के लिए कोई भी दूसरा उचित सुधार स्वीकार्य।) — 1 अंक
अथवा
ज्वार, बाजरा और रागी भारत के महत्त्वपूर्ण मोटे अनाज हैं। हर एक के लिए आवश्यक दशाओं का वर्णन कीजिए और हर एक के प्रमुख उत्पादक राज्य बताइए। भोजन में रागी को महत्त्व क्यों दिया जाता है?
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- ज्वार क्षेत्रफल और उत्पादन में तीसरी सबसे महत्त्वपूर्ण खाद्य फ़सल है। यह वर्षा-आधारित है, नम क्षेत्रों में उगती है और इसे शायद ही सिंचाई चाहिए।
- ज्वार में महाराष्ट्र आगे है, फिर कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश।
- बाजरा बलुई और उथली काली मृदा में अच्छा उगता है। राजस्थान सबसे बड़ा उत्पादक है, फिर उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात।
- रागी शुष्क प्रदेशों की फ़सल है और लाल, काली, बलुई व दोमट मृदा में उगती है। कर्नाटक सबसे बड़ा उत्पादक है, फिर तमिलनाडु।
- रागी को इसलिए महत्त्व देते हैं क्योंकि इसमें लोहा, कैल्शियम और भूसी भरपूर होते हैं।
अंक योजना:
- ज्वार: क्षेत्रफल और उत्पादन के हिसाब से तीसरी सबसे महत्त्वपूर्ण खाद्य फ़सल; वर्षा-आधारित, अधिकतर नम क्षेत्रों में उगाई जाती है और इसे सिंचाई की शायद ही ज़रूरत होती है। — 1 अंक
- ज्वार के राज्य: महाराष्ट्र (सबसे बड़ा), कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश। — 1 अंक
- बाजरा: बलुई और उथली काली मृदा में अच्छा उगता है; राज्य: राजस्थान (सबसे बड़ा), उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और हरियाणा। — 1 अंक
- रागी: शुष्क प्रदेशों की फ़सल, जो लाल, काली, बलुई, दोमट और उथली काली मृदा में उगती है; राज्य: कर्नाटक (सबसे बड़ा), तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश। — 1 अंक
- रागी में लोहा, कैल्शियम, अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व और भूसी भरपूर होते हैं, इसलिए यह बहुत पौष्टिक है। — 1 अंक
प्रश्न 10 (5 अंक)
भारत में रोपण कृषि की पाँच विशेषताएँ स्पष्ट कीजिए। जहाँ हो सके, चाय का उदाहरण दीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- एक फ़सल, बड़ा क्षेत्र: बागान में बड़े क्षेत्र पर एक ही फ़सल उगती है, जैसे असम और उत्तरी बंगाल में चाय या कर्नाटक में कॉफ़ी।
- पूँजी और श्रम: इसमें बहुत पैसा और बहुत-से मज़दूर लगते हैं, अक्सर प्रवासी। चाय की पत्ती तोड़ने में बहुत हाथ लगते हैं।
- उद्योग से जुड़ाव: पूरी फ़सल किसी उद्योग का कच्चा माल है। चाय की ताज़गी के लिए उसे बागान में ही संसाधित करते हैं।
- बाज़ार के लिए: उपज बेची जाती है, इसलिए बागानों, कारखानों और बाज़ारों को अच्छी सड़कें, रेल और संचार जोड़ते हैं।
- खास क्षेत्र: चाय बागान असम, दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और दक्षिण की पहाड़ियों में हैं; बहुत-से अंग्रेज़ों ने शुरू किए थे और अब भारतीयों के हैं।
अंक योजना:
- यह वाणिज्यिक कृषि का एक प्रकार है जिसमें बड़े क्षेत्र पर एक ही फ़सल उगाई जाती है, जैसे असम और उत्तरी बंगाल में चाय, कर्नाटक में कॉफ़ी; रबड़, गन्ना और केला दूसरी रोपण फ़सलें हैं। — 1 अंक
- इसमें पूँजी-प्रधान आगत और बड़ी संख्या में श्रमिक, अक्सर प्रवासी, लगते हैं; चाय की खेती श्रम-प्रधान है। — 1 अंक
- यह कृषि और उद्योग के बीच की कड़ी है: सारी उपज उद्योगों में कच्चे माल के रूप में जाती है; चाय की ताज़गी बनाए रखने के लिए उसे बागान के भीतर ही संसाधित किया जाता है। — 1 अंक
- उत्पादन मुख्यतः बाज़ार के लिए होता है, इसलिए बागानों, संसाधन उद्योगों और बाज़ारों को जोड़ने वाला परिवहन और संचार का विकसित जाल चाहिए। — 1 अंक
- बागान कुछ खास क्षेत्रों में हैं: चाय असम, पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग व जलपाईगुड़ी ज़िलों, तमिलनाडु और केरल में; कॉफ़ी कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में। चाय अंग्रेज़ लाए थे, और अब बहुत-से बागान भारतीयों के हैं। — 1 अंक
अथवा
एक कृषि अधिकारी के पास तीन ज़िलों के ये आँकड़े हैं। आँकड़े काल्पनिक हैं।
| ज़िला | भूमि | वार्षिक वर्षा | तापमान | मृदा |
|---|---|---|---|---|
| X | पूर्वी तट के पास समतल डेल्टा मैदान | 190 सेमी, अधिकतर मानसून में | 25°C से 32°C, आर्द्र | उपजाऊ जलोढ़ |
| Y | पूर्वोत्तर की पहाड़ी ढलानें | 250 सेमी, पूरे वर्ष बँटी हुई | गर्म, पाला नहीं | गहरी, सुअपवाहित, ह्यूमस से भरपूर |
| Z | कर्नाटक में पश्चिमी घाट की ढलानें | 180 सेमी, मुख्यतः मानसून के महीनों में | मध्यम | सुअपवाहित |
चावल, चाय और कॉफ़ी में से हर ज़िले के लिए सबसे अच्छी फ़सल सुझाइए और कारण दीजिए। X के लिए चुनी गई फ़सल भारत में मुख्यतः किस तरह के क्षेत्रों में उगाई जाती है, बताइए, और चाय व कॉफ़ी की ज़रूरतों में एक अंतर लिखिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- X - चावल: यहाँ गर्म और आर्द्र मौसम और 100 सेमी से अधिक वर्षा है, और समतल जलोढ़ डेल्टा खेतों में पानी रोक सकता है।
- चावल मुख्यतः उत्तर और पूर्वोत्तर के मैदानों, तटीय क्षेत्रों और डेल्टाओं में उगता है।
- Y - चाय: यहाँ गर्मी है, पाला नहीं पड़ता, पूरे वर्ष बौछारें होती हैं, और मृदा गहरी, सुअपवाहित व ह्यूमस वाली है।
- Z - कॉफ़ी: अरेबिका कॉफ़ी दक्षिण की पहाड़ियों के मध्यम तापमान और सुअपवाहित ढलानों के अनुकूल है।
- चाय को पूरे वर्ष बँटी वर्षा चाहिए, पर कॉफ़ी मुख्यतः मानसून की वर्षा से काम चला लेती है।
अंक योजना:
- X: चावल, क्योंकि इसे 25°C से ऊपर तापमान, अधिक आर्द्रता और 100 सेमी से अधिक वर्षा चाहिए, और समतल जलोढ़ डेल्टा खेतों में पानी रोक सकता है। — 1 अंक
- चावल मुख्यतः उत्तर और पूर्वोत्तर के मैदानों, तटीय क्षेत्रों और डेल्टा प्रदेशों में उगाया जाता है (और नहरों व नलकूपों की मदद से पंजाब और हरियाणा में)। — 1 अंक
- Y: चाय, क्योंकि इसे गर्म, नम, पाला-रहित जलवायु, पूरे वर्ष बँटी बार-बार की बौछारें और ह्यूमस से भरपूर गहरी, उपजाऊ, सुअपवाहित मृदा चाहिए। — 1 अंक
- Z: कॉफ़ी, क्योंकि अरेबिका कॉफ़ी दक्षिण की पहाड़ियों (कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के नीलगिरी क्षेत्र) के मध्यम तापमान और सुअपवाहित ढलानों के अनुकूल है। — 1 अंक
- अंतर: चाय को पूरे वर्ष बँटी वर्षा चाहिए, जबकि कॉफ़ी मुख्यतः एक ऋतु में होने वाली वर्षा से काम चला लेती है। (यह भी स्वीकार्य: चाय में अधिक श्रम लगता है; चाय अधिक क्षेत्रों में उगती है, कॉफ़ी दक्षिण की पहाड़ियों तक सीमित है।) — 1 अंक
प्रश्न 11 (4 अंक)
नीचे दिए गए स्रोत को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
ज़मीन का दान
आज़ादी के बाद के वर्षों में कई राज्य ऐसे कानून बनाने की तैयारी में थे जिनसे यह तय होता कि एक परिवार अधिक से अधिक कितनी ज़मीन रख सकता है, फिर भी गाँवों के बहुत-से लोगों के पास ज़रा भी ज़मीन नहीं थी। कुछ भूस्वामी मानते थे कि इन कानूनों से उनकी अतिरिक्त ज़मीन वैसे भी चली जाएगी। ऐसे में गाँव-गाँव पैदल घूमने वाले गांधीवादी विनोबा भावे ने एक अलग रास्ता आज़माया।
अप्रैल 1951 में तेलंगाना क्षेत्र के पोचमपल्ली में भूमिहीन ग्रामीणों ने उनसे खेती के लिए ज़मीन माँगी, और वहीं के एक भूस्वामी ने उसी समय अपनी ज़मीन का एक हिस्सा देने की पेशकश की। इसी भेंट से भूदान, यानी भूमि का दान, शुरू हुआ। विनोबा जैसे-जैसे पूरे भारत में पैदल आगे बढ़े, यह अपील फैलती गई। कई गाँवों के मालिक कुछ ज़मींदार इससे भी आगे बढ़े और पूरे-पूरे गाँव भूमिहीनों में बाँटने के लिए सौंप दिए; इसे ग्रामदान कहा गया। दान देने वालों के कारण अलग थे: कोई विश्वास से, कोई बाँटने की अपील से, तो कोई सीलिंग कानूनों की चिंता से। ज़मीन ज़ोर-ज़बरदस्ती से नहीं, समझाने-बुझाने से बँटी, इसलिए इस आंदोलन को 'रक्तहीन क्रांति' कहा जाने लगा।
(a) इस आंदोलन का नेतृत्व किसने किया, और यह किस गाँव से शुरू हुआ? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
इसका नेतृत्व विनोबा भावे ने किया, और यह तेलंगाना के पोचमपल्ली से शुरू हुआ।
अंक योजना:
- विनोबा भावे (0.5); तेलंगाना का पोचमपल्ली (0.5)। (पुरानी पुस्तकों के अनुसार आंध्र प्रदेश का पोचमपल्ली भी स्वीकार्य।) — 1 अंक
(b) स्रोत के अनुसार कुछ भूस्वामियों ने ज़मीन क्यों दान की? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
कुछ को डर था कि सीलिंग के कानून वैसे भी उनकी अतिरिक्त ज़मीन ले लेंगे।
अंक योजना:
- उन्हें डर था कि भूमि की अधिकतम सीमा के कानून वैसे भी उनकी अतिरिक्त ज़मीन ले लेंगे। (यह भी स्वीकार्य: भूमिहीनों के प्रति दया से।) — 1 अंक
(c) इस आंदोलन को 'रक्तहीन क्रांति' क्यों कहा गया? दो कारण दीजिए। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- इससे ज़मीन के मालिक बदले: ज़मीन बड़े मालिकों से भूमिहीन परिवारों के पास गई, जो एक क्रांति है।
- यह स्वेच्छा से दिए गए दान से हुआ, बिना हिंसा या ज़ोर-ज़बरदस्ती के, इसलिए खून नहीं बहा।
अंक योजना:
- इससे बड़ा बदलाव आया, यानी धनी लोगों से भूमिहीनों को ज़मीन मिली, इसलिए यह 'क्रांति' थी। — 1 अंक
- ज़मीन समझाने-बुझाने से स्वेच्छा से दान की गई, बिना हिंसा, ज़ोर-ज़बरदस्ती या अदालतों में लंबी लड़ाई के, इसलिए यह 'रक्तहीन' थी। — 1 अंक
प्रश्न 12 (4 अंक)
नीचे दिए गए स्रोत को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
बाढ़ के मैदानों का रेशा
'सुनहरा रेशा' कहलाने वाला जूट बरसात के मौसम में निचले गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा के निचले खेतों में ऊँचा और हरा उगता है। हर वर्ष नदियाँ इन निचली ज़मीनों पर फैलती हैं और गाद की नई परत छोड़ जाती हैं, इसलिए किसान की अधिक मेहनत के बिना भी मृदा उपजाऊ बनी रहती है। गर्मी के महीनों की ऊँची तपिश से पौधे तेज़ी से बढ़ते हैं।
भारत का सबसे बड़ा हिस्सा जूट पश्चिम बंगाल में उगता है, और बिहार, असम, ओडिशा व मेघालय में भी यह महत्त्वपूर्ण फ़सल है। डंठलों से रेशा निकालकर मिलों में भेजा जाता है, जहाँ उससे बोरे, चटाइयाँ, रस्सियाँ, धागा, कालीन और तरह-तरह की दस्तकारी की चीज़ें बनती हैं। इसलिए जूट उगाने वाला किसान अपनी रोज़ी कमाने के साथ-साथ एक उद्योग को कच्चा माल भी देता है।
(a) डेल्टा की मृदा की कौन-सी विशेषता जूट के अनुकूल है? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
यह बाढ़ के मैदान की उपजाऊ मृदा है, जिस पर हर वर्ष गाद की नई परत आ जाती है।
अंक योजना:
- यह बाढ़ के मैदान की उपजाऊ मृदा है, जो हर वर्ष बाढ़ से (नई गाद से) नई हो जाती है। — 1 अंक
(b) पश्चिम बंगाल के अलावा किन्हीं दो राज्यों के नाम बताइए जहाँ जूट उगाया जाता है। (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
बिहार और असम।
अंक योजना:
- कोई दो: बिहार, असम, ओडिशा, मेघालय (प्रत्येक 0.5)। — 1 अंक
(c) राजस्थान के शुष्क, बलुई पश्चिमी भाग का एक किसान जूट उगाना चाहता है। दो कारण दीजिए कि वह शायद सफल क्यों नहीं होगा। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- जूट को ऐसी उपजाऊ बाढ़-मैदानी मृदा चाहिए जिसे बाढ़ हर वर्ष नया करे; वहाँ की शुष्क बलुई मृदा कभी नई नहीं होती।
- जूट पानी से भरपूर, गर्म और नम निचली ज़मीनों में उगता है, पर पश्चिमी राजस्थान में वर्षा बहुत कम होती है।
अंक योजना:
- जूट को हर वर्ष नई होने वाली, सुअपवाहित, उपजाऊ बाढ़-मैदानी मृदा चाहिए; पश्चिमी राजस्थान की शुष्क बलुई मृदा बाढ़ से नई नहीं होती और जूट के लिए कमज़ोर है। — 1 अंक
- जूट पानी से भरपूर, गर्म और नम बाढ़ के मैदानों में उगता है; पश्चिमी राजस्थान में वर्षा बहुत कम है और ऐसी फ़सल के लिए पानी नहीं है। — 1 अंक