विनिर्माण उद्योग

विनिर्माण उद्योग अध्याय से 2026-27 के सैंपल पेपर में 4 अंक, फ़रवरी 2026 में 1 और मई 2026 में 6 अंक आए, जब भूगोल का 5 अंक वाला प्रश्न (विनिर्माण का महत्त्व, या कृषि और उद्योग का संबंध) इसी से था। सैंपल पेपर में बुनाई पर तर्क वाला बहुविकल्पीय प्रश्न और बेंगलुरु के IT उद्योग पर अभिकथन-कारण प्रश्न था, और हाल के हर प्रश्न-पत्र में मानचित्र पर कोई लोहा-इस्पात संयंत्र, सूती वस्त्र केंद्र या सॉफ़्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क पूछा गया।

सबसे ज़्यादा अंक इन गलतियों से कटते हैं: उद्योगों के वर्गीकरण के आधार मिला देना, किसी उद्योग के गलत कच्चे माल या अवस्थिति कारक लिखना, प्रदूषण के उत्तरों में समस्या बताकर नियंत्रण का उपाय न लिखना, और मानचित्र पर मिलते-जुलते नाम (दुर्ग और दुर्गापुर, सलाल और सलेम)।

5 मिनट में दोहराएँ

विनिर्माण क्यों ज़रूरी है: जीडीपी में हिस्सा केवल लगभग 17% (उत्पादकता बढ़ाने के लिए NMCC); कृषि का आधुनिकीकरण; खेती के बाहर रोज़गार; बेरोज़गारी और गरीबी दूर करने में मदद; क्षेत्रीय असमानता घटाना (जनजातीय और पिछड़े इलाकों में उद्योग); निर्यात से विदेशी मुद्रा। कृषि और उद्योग साथ-साथ चलते हैं।

अवस्थिति: कच्चा माल, श्रम, पूँजी, शक्ति, बाज़ार। उद्योग के पीछे नगरीकरण आता है; बड़े शहरों में समूहन बचत। 1947 से पहले: पत्तन-नगर (मुंबई, कोलकाता, चेन्नई)।

आधार वर्ग (उदाहरण)
कच्चा माल कृषि आधारित (वस्त्र, चीनी, खाद्य तेल); खनिज आधारित (लोहा-इस्पात, सीमेंट, एल्युमिनियम)
मुख्य भूमिका आधारभूत या मूल (लोहा-इस्पात, ताँबा और एल्युमिनियम प्रगलन); उपभोक्ता (चीनी, टूथपेस्ट, पंखे)
पूँजी लघु (निवेश ₹1 करोड़ के भीतर); बृहत
स्वामित्व सार्वजनिक (BHEL, SAIL); निजी (TISCO, बजाज ऑटो, डाबर); संयुक्त (ऑयल इंडिया लि.); सहकारी (महाराष्ट्र का चीनी, केरल का कॉयर)
भार भारी (लोहा-इस्पात); हल्का (बिजली का सामान)

उद्योग एक नज़र में

  • सूती वस्त्र: पहली मिल मुंबई 1854; शुरू में महाराष्ट्र-गुजरात; कताई केंद्रित, बुनाई विकेंद्रित; समस्याएँ: अनियमित बिजली, पुरानी मशीनें, कम श्रम उत्पादकता, कृत्रिम रेशे।
  • जूट: रिशरा 1855; हुगली पेटी; राष्ट्रीय जूट नीति 2005; जूट पैकिंग अनिवार्य।
  • चीनी: मौसमी, इसलिए सहकारी क्षेत्रक के अनुकूल; चीनी में दूसरा, गुड़ और खांडसारी में पहला स्थान।
  • लोहा-इस्पात: लौह अयस्क, कोकिंग कोयला, चूना पत्थर लगभग 4 : 2 : 1; मैंगनीज़ से इस्पात कठोर; एकीकृत संयंत्र (सारे चरण एक जगह) बनाम मिनी संयंत्र (बिजली की भट्टी, कबाड़, स्पंज आयरन); छोटा नागपुर पठार; समस्याएँ: महँगा कोकिंग कोयला, कम श्रम उत्पादकता, अनियमित ऊर्जा, कमज़ोर आधारभूत ढाँचा।
  • एल्युमिनियम: बिजली + सस्ता बॉक्साइट। रसायन: अकार्बनिक फैले हुए; कार्बनिक शोधनशालाओं के पास। उर्वरक: पोटाश पूरा आयात। सीमेंट: चूना पत्थर, सिलिका, जिप्सम; चेन्नई 1904; खाड़ी बाज़ार के लिए गुजरात; 1989 में नियंत्रण हटा। IT: बेंगलुरु; STP; BPO।

प्रदूषण: वायु, जल (तापीय सहित), भूमि, ध्वनि। नियंत्रण: पानी का पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण, वर्षा जल संग्रहण, अपशिष्ट जल उपचार (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक), अवक्षेपक और फ़िल्टर, साइलेंसर।

ध्यान दें

  • लोहा-इस्पात आधारभूत (भूमिका) भी है और भारी (भार) भी।
  • ऑयल इंडिया लि. संयुक्त क्षेत्रक है, सार्वजनिक नहीं।
  • दुर्गापुर (इस्पात, पश्चिम बंगाल) और दुर्ग (लौह अयस्क, छत्तीसगढ़) अलग हैं।

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: हर प्रश्न पहले कॉपी पर हल कीजिए, फिर उत्तर पढ़िए। हर चरण के सामने लिखे अंक बताते हैं कि परीक्षक क्या देखता है। 1 अंक वाले बहुविकल्पीय और अभिकथन-कारण प्रश्न अंत की क्विज़ में हैं, साथ में ऐसे प्रश्न भी जो जाँचते हैं कि आपने अध्याय कितनी गहराई से समझा है; क्विज़ के हर उत्तर के साथ उसकी व्याख्या दी गई है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (2 और 3 अंक)

प्रश्न 1 (3 अंक)

नीचे दिए गए भारत के रेखा-मानचित्र पर निम्नलिखित को उपयुक्त चिह्नों से दर्शाइए और उनके नाम लिखिए।

(a) आपकी मानचित्र सूची में पश्चिम बंगाल का लोहा-इस्पात संयंत्र।
(b) आपकी मानचित्र सूची में मध्य प्रदेश का सूती वस्त्र केंद्र।
(c) आपकी मानचित्र सूची में गुजरात का सॉफ़्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क।

भारत का खाली रेखा-मानचित्र

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

(a) दुर्गापुर, पश्चिम बंगाल की दामोदर घाटी में, कोलकाता के उत्तर-पश्चिम में।

(b) इंदौर, पश्चिमी मध्य प्रदेश में मालवा पठार पर।

(c) गांधीनगर, गुजरात की राजधानी, अहमदाबाद के ठीक उत्तर में।

उत्तर-मानचित्र में तीनों स्थान वर्गों से a, b और c के रूप में दिखाए गए हैं।

अंक योजना:

  1. (a) दुर्गापुर, पश्चिम बंगाल की दामोदर घाटी में, सही जगह अंकित और नाम लिखा — 1 अंक
  2. (b) इंदौर, पश्चिमी मध्य प्रदेश में, सही जगह अंकित और नाम लिखा — 1 अंक
  3. (c) गांधीनगर, गुजरात में अहमदाबाद के पास, सही जगह अंकित और नाम लिखा — 1 अंक

उत्तर-मानचित्र, जिस पर स्थान a, b और c वर्गों से अंकित हैं

प्रश्न 2 (2 अंक)

नीचे दिए गए भारत के रेखा-मानचित्र पर दो स्थान A और B अंकित हैं। निम्नलिखित जानकारी की सहायता से इन्हें पहचानिए और इनके सही नाम लिखिए।

A. आपकी मानचित्र सूची का, उत्तर प्रदेश में दिल्ली से सटा सॉफ़्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क।
B. आपकी मानचित्र सूची का, तेलंगाना का सॉफ़्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क।

भारत का रेखा-मानचित्र, जिस पर दो स्थान A और B अंकित हैं

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

A. नोएडा, उत्तर प्रदेश में, दिल्ली से सटा।

B. हैदराबाद, तेलंगाना में, दक्कन के पठार पर।

अंक योजना:

  1. A: नोएडा (उत्तर प्रदेश) — 1 अंक
  2. B: हैदराबाद (तेलंगाना) — 1 अंक

प्रश्न 3 (2 अंक)

एल्युमिनियम प्रगलन संयंत्र कहाँ लगेगा, यह तय करने वाले दो मुख्य कारक बताइए, और ऐसे संयंत्रों वाले दो राज्यों के नाम लिखिए।

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

  1. प्रगलन संयंत्र को बिजली की नियमित आपूर्ति और बॉक्साइट की पक्की, सस्ती आपूर्ति चाहिए।
  2. ऐसे संयंत्र ओडिशा और छत्तीसगढ़ में हैं।

अंक योजना:

  1. बिजली की नियमित आपूर्ति (0.5) और न्यूनतम लागत पर कच्चे माल (बॉक्साइट) का पक्का स्रोत (0.5)। — 1 अंक
  2. कोई दो: ओडिशा, पश्चिम बंगाल, केरल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तमिलनाडु (प्रत्येक 0.5)। — 1 अंक

प्रश्न 4 (3 अंक)

अपने शुरुआती वर्षों में सूती वस्त्र उद्योग महाराष्ट्र और गुजरात की कपास पेटी में केंद्रित था। कोई तीन कारण स्पष्ट कीजिए।

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

  1. पास की काली मृदा वाले क्षेत्र में कच्ची कपास उगती थी।
  2. बड़ा बाज़ार था, और कपड़ा भेजने के लिए मुंबई जैसे पत्तनों सहित अच्छा परिवहन था।
  3. भरपूर मज़दूर मिलते थे, और नम जलवायु कताई-बुनाई के अनुकूल थी।

अंक योजना:

  1. काली मृदा वाली कपास पेटी में कच्ची कपास पास में ही मिलती थी। — 1 अंक
  2. बड़ा बाज़ार और अच्छा परिवहन, जिसमें व्यापार के लिए (मुंबई जैसे) पत्तनों की सुविधा भी थी, उपलब्ध था। — 1 अंक
  3. भरपूर श्रमिक, और नम जलवायु जो कपास की कताई-बुनाई के अनुकूल है। (कच्ची कपास, बाज़ार, परिवहन और पत्तन, श्रम, नम जलवायु में से कोई तीन।) — 1 अंक

प्रश्न 5 (3 अंक)

भारत के सूती वस्त्र उद्योग की तीन समस्याएँ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

  1. बिजली की आपूर्ति अनियमित है, इसलिए मशीनें अक्सर बंद पड़ी रहती हैं।
  2. बुनाई और प्रसंस्करण की मशीनें पुरानी हैं और उन्हें बदलने की ज़रूरत है।
  3. प्रति मज़दूर उत्पादन कम है, और कृत्रिम रेशों से सूती कपड़े को कड़ी होड़ मिलती है।

अंक योजना:

  1. बिजली की आपूर्ति अनियमित है, जिससे मशीनें रुकती हैं और उत्पादन घटता है। — 1 अंक
  2. मशीनें, खासकर बुनाई और प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) में, पुरानी हैं और उन्हें आधुनिक बनाने की ज़रूरत है। — 1 अंक
  3. प्रति श्रमिक उत्पादन कम है, और कृत्रिम रेशा उद्योग से कड़ी होड़ है। (कोई तीन।) — 1 अंक

प्रश्न 6 (3 अंक)

भारत इस्पात का एक महत्त्वपूर्ण उत्पादक देश है, फिर भी यह उद्योग अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुँच पाया है। तीन कारण स्पष्ट कीजिए।

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

  1. कोकिंग कोयला महँगा है और कम मिलता है।
  2. मज़दूरों की उत्पादकता कम है, और ऊर्जा की आपूर्ति अनियमित है।
  3. परिवहन जैसा आधारभूत ढाँचा कमज़ोर है, जिससे लागत बढ़ती है।

अंक योजना:

  1. कोकिंग कोयले की ऊँची लागत और सीमित उपलब्धता। — 1 अंक
  2. श्रमिकों की कम उत्पादकता, और ऊर्जा की अनियमित आपूर्ति। — 1 अंक
  3. कमज़ोर आधारभूत ढाँचा (परिवहन और दूसरी सुविधाएँ)। (यह भी स्वीकार्य: अनुसंधान और विकास पर बहुत कम खर्च।) — 1 अंक

प्रश्न 7 (3 अंक)

सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक उद्योग ने भारत की अर्थव्यवस्था की किस तरह मदद की है? तीन बिंदु स्पष्ट कीजिए।

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

  1. इसने बड़ी संख्या में नौकरियाँ पैदा की हैं।
  2. तेज़ी से बढ़ते BPO क्षेत्र ने इसे विदेशी मुद्रा कमाने का बड़ा साधन बना दिया है।
  3. इससे बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे नए केंद्र बढ़े हैं, और रोज़गार व विकास फैला है।

अंक योजना:

  1. इसने रोज़गार पर बड़ा असर डाला है और बहुत-सी नौकरियाँ पैदा की हैं। — 1 अंक
  2. तेज़ी से बढ़ते बिज़नेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) क्षेत्र के कारण यह विदेशी मुद्रा कमाने का बड़ा साधन बन गया है। — 1 अंक
  3. इससे बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, चेन्नई और नोएडा जैसे नए केंद्र बढ़े हैं, जिससे विकास और रोज़गार अधिक शहरों तक पहुँचे हैं, और सॉफ़्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क इनकी मदद करते हैं। — 1 अंक

प्रश्न 8 (3 अंक)

जमशेदपुर, बोकारो और दुर्गापुर, सभी छोटा नागपुर पठार पर या उसके पास हैं। तीन कारण स्पष्ट कीजिए कि इस क्षेत्र में लोहा-इस्पात उद्योग सबसे अधिक केंद्रित क्यों हैं।

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

  1. यहाँ उच्च कोटि का लौह अयस्क और कोयला पास-पास हैं, इसलिए भारी कच्चा माल दूर नहीं ढोना पड़ता।
  2. लौह अयस्क सस्ता है, और सस्ते श्रमिक भरपूर मिलते हैं।
  3. देश में इस्पात का बाज़ार बड़ा है और बढ़ रहा है।

अंक योजना:

  1. उच्च कोटि का कच्चा माल पास ही है, जैसे ओडिशा-झारखंड पेटी का लौह अयस्क और दामोदर घाटी का कोयला, इसलिए ढुलाई का खर्च कम है। — 1 अंक
  2. लौह अयस्क कम लागत पर मिलता है, और सस्ते श्रमिक भी मिलते हैं। — 1 अंक
  3. देश के भीतर इस्पात के बाज़ार में बढ़ने की बहुत संभावना है। (कम लागत का लौह अयस्क, पास में उच्च कोटि का कच्चा माल, सस्ता श्रम, घरेलू बाज़ार में बढ़त की संभावना में से कोई तीन।) — 1 अंक

प्रश्न 9 (2 अंक)

एकीकृत इस्पात संयंत्र और छोटे (मिनी) इस्पात संयंत्र में दो बिंदुओं पर अंतर बताइए।

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

  1. एकीकृत संयंत्र बड़ा है और कच्चे माल से बेले इस्पात तक हर काम एक जगह करता है; मिनी संयंत्र छोटा है।
  2. मिनी संयंत्र बिजली की भट्टियों में कबाड़ और स्पंज आयरन से मृदु व मिश्र इस्पात बनाता है।

अंक योजना:

  1. आकार और प्रक्रिया: एकीकृत संयंत्र बड़ा होता है और कच्चा माल जुटाने से लेकर इस्पात बनाने, बेलने और आकार देने तक सब कुछ एक ही परिसर में करता है; मिनी संयंत्र छोटा होता है। — 1 अंक
  2. आगत और उत्पाद: मिनी संयंत्र इस्पात के कबाड़ और स्पंज आयरन के साथ बिजली की भट्टियाँ (और सिल्लियों के लिए री-रोलर) उपयोग करता है और तय विशिष्टताओं का मृदु और मिश्र इस्पात बनाता है। — 1 अंक

प्रश्न 10 (2 अंक)

लगभग दो दशकों तक भारत के सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण का हिस्सा लगभग 17 प्रतिशत पर रुका रहा। यह आँकड़ा क्या बताता है, और इसे सुधारने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाया है?

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

  1. हिस्सा कम है: कुछ पूर्वी एशियाई देशों में जीडीपी का 25 से 35 प्रतिशत विनिर्माण से आता है।
  2. उत्पादकता बढ़ाने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता परिषद (NMCC) बनाई।

अंक योजना:

  1. यह कम है: कुछ पूर्वी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में सकल घरेलू उत्पाद का 25 से 35 प्रतिशत विनिर्माण से आता है, इसलिए भारत के विनिर्माण को तेज़ी से बढ़ना चाहिए। — 1 अंक
  2. सरकार ने सही नीतियों और उद्योगों के नए प्रयासों से उत्पादकता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता परिषद (NMCC) बनाई। — 1 अंक

प्रश्न 11 (2 अंक)

भारत में कताई महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु में केंद्रित है, पर बुनाई बहुत बड़ी संख्या में छोटी इकाइयों में फैली है। इस व्यवस्था का एक लाभ और एक समस्या बताइए।

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

  1. लाभ: छोटी इकाइयाँ बुनाई के पारंपरिक कौशल और डिज़ाइन जीवित रखती हैं और घर पर काम देती हैं।
  2. समस्या: वे देश में कते बढ़िया धागे का कम उपयोग कर पाती हैं, इसलिए कपड़ा घटिया बनता है।

अंक योजना:

  1. लाभ: हथकरघों और पावरलूमों पर फैली बुनाई सूती, रेशमी, ज़री और कढ़ाई के पारंपरिक कौशल और डिज़ाइनों को जीवित रखती है और बुनकरों को घरों में काम देती है। — 1 अंक
  2. समस्या: छोटी बुनाई इकाइयाँ भारत में कते उच्च गुणवत्ता वाले धागे का अधिक उपयोग नहीं कर पातीं, इसलिए कपड़ा अक्सर कम गुणवत्ता का होता है; कताई वाले धागा निर्यात करते हैं जबकि वस्त्र बनाने वाले कपड़ा आयात करते हैं। — 1 अंक

दीर्घ उत्तरीय और स्रोत आधारित प्रश्न

प्रश्न 12 (5 अंक)

उद्योगों को कई तरह से वर्गीकृत किया जा सकता है। उद्योगों का वर्गीकरण (i) कच्चे माल के स्रोत, (ii) मुख्य भूमिका, (iii) पूँजी निवेश, (iv) स्वामित्व और (v) कच्चे माल व तैयार माल के भार और आयतन के आधार पर, उदाहरण सहित, कीजिए।

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

  1. कच्चा माल: कृषि आधारित, जैसे सूती वस्त्र और चीनी; खनिज आधारित, जैसे लोहा-इस्पात और सीमेंट।
  2. मुख्य भूमिका: आधारभूत उद्योग, जैसे लोहा-इस्पात, दूसरे उद्योगों को माल देते हैं; उपभोक्ता उद्योग, जैसे टूथपेस्ट और पंखे, लोगों के लिए सामान बनाते हैं।
  3. पूँजी: लघु उद्योगों में निवेश ₹1 करोड़ के भीतर है; बृहत उद्योगों में इससे अधिक।
  4. स्वामित्व: सार्वजनिक (SAIL), निजी (बजाज ऑटो), संयुक्त (ऑयल इंडिया लिमिटेड) और सहकारी (महाराष्ट्र की चीनी मिलें)।
  5. भार और आयतन: भारी उद्योग, जैसे लोहा-इस्पात; हल्के उद्योग, जैसे बिजली का सामान।

अंक योजना:

  1. (i) कच्चा माल: कृषि आधारित (सूती, ऊनी, जूट, रेशमी वस्त्र, रबड़, चीनी, चाय, कॉफ़ी, खाद्य तेल) और खनिज आधारित (लोहा-इस्पात, सीमेंट, एल्युमिनियम, मशीन औज़ार, पेट्रो-रसायन)। — 1 अंक
  2. (ii) मुख्य भूमिका: आधारभूत या मूल उद्योग, जिनके उत्पाद दूसरी वस्तुओं के कच्चे माल हैं (लोहा-इस्पात, ताँबा और एल्युमिनियम प्रगलन), और उपभोक्ता उद्योग (चीनी, टूथपेस्ट, कागज़, सिलाई मशीनें, पंखे)। — 1 अंक
  3. (iii) पूँजी: लघु उद्योग, जिनमें परिसंपत्तियों पर निवेश तय सीमा (अभी ₹1 करोड़) के भीतर है, और उससे अधिक निवेश वाले बृहत उद्योग। — 1 अंक
  4. (iv) स्वामित्व: सार्वजनिक (BHEL, SAIL), निजी (TISCO, बजाज ऑटो, डाबर), संयुक्त (ऑयल इंडिया लिमिटेड) और सहकारी (महाराष्ट्र का चीनी, केरल का कॉयर उद्योग)। — 1 अंक
  5. (v) भार और आयतन: लोहा-इस्पात जैसे भारी उद्योग, और बिजली के सामान जैसे हल्के उद्योग। — 1 अंक

अथवा

कोई उद्योग कहाँ लगेगा, यह किन कारकों से तय होता है? उद्योग और शहरों के संबंध सहित पाँच बिंदु स्पष्ट कीजिए।

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

  1. कच्चा माल: कारखाना वहाँ ठीक है जहाँ कच्चा माल पास हो या सस्ते में आ सके।
  2. श्रम, पूँजी और शक्ति: इसे मज़दूर, पैसा और ऊर्जा चाहिए।
  3. बाज़ार: माल खरीदारों तक आसानी से पहुँचे। सभी कारक एक जगह कम ही मिलते हैं, इसलिए कारखाना वहाँ लगता है जहाँ ये सबसे सस्ते पड़ें।
  4. शहर: उद्योग शुरू होते ही उसके चारों ओर शहर बढ़ता है, और शहर बाज़ार, बैंक, बीमा, परिवहन और सलाहकार देते हैं।
  5. समूहन बचत: इन लाभों को बाँटने के लिए बहुत-से उद्योग बड़े शहरों में और आसपास जुट जाते हैं।

अंक योजना:

  1. कच्चा माल: उद्योग वहाँ लगते हैं जहाँ कच्चा माल उपलब्ध हो या कम लागत पर लाया जा सके। — 1 अंक
  2. श्रम, पूँजी और शक्ति: मज़दूर, निवेश के लिए पैसा और ऊर्जा चाहिए। — 1 अंक
  3. बाज़ार: माल आसानी से खरीदारों तक पहुँचना चाहिए; सभी कारक शायद ही एक जगह मिलते हैं, इसलिए उद्योग वहाँ लगता है जहाँ ये सबसे कम लागत पर जुटाए जा सकें। — 1 अंक
  4. उद्योग और शहर साथ बढ़ते हैं: उद्योग शुरू होते ही नगरीकरण आता है, और शहर बाज़ार तथा बैंकिंग, बीमा, परिवहन, श्रम और वित्तीय सलाह जैसी सेवाएँ देते हैं। — 1 अंक
  5. समूहन बचत: इन साझा लाभों का उपयोग करने के लिए बहुत-से उद्योग बड़े शहरों में और उनके आसपास जुट जाते हैं। (यह भी स्वीकार्य: आज़ादी से पहले विदेशी व्यापार के कारण उद्योग मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे पत्तनों पर बढ़े।) — 1 अंक

प्रश्न 13 (5 अंक)

भारत के रसायन उद्योग और उर्वरक उद्योग का वर्णन कीजिए, और बताइए कि हर एक किस तरह के उत्पाद बनाता है और वे कहाँ स्थित हैं।

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

  1. रसायन उद्योग में बड़ी और छोटी इकाइयाँ हैं, और यह अकार्बनिक व कार्बनिक, दोनों रसायनों में तेज़ी से बढ़ा है।
  2. अकार्बनिक: सल्फ़्यूरिक अम्ल, नाइट्रिक अम्ल, क्षार, सोडा ऐश और कास्टिक सोडा; ये संयंत्र देश भर में फैले हैं।
  3. कार्बनिक: कृत्रिम रेशों, रबड़, प्लास्टिक, रंगों और दवाओं के लिए पेट्रो-रसायन; ये संयंत्र तेल शोधनशालाओं के पास हैं। यह उद्योग अपना सबसे बड़ा खरीदार खुद है।
  4. उर्वरक: यूरिया जैसे नाइट्रोजनी उर्वरक, फ़ॉस्फ़ेट, DAP और NPK मिश्रण बनते हैं; पोटाश पूरा आयात होता है।
  5. हरित क्रांति के बाद यह उद्योग फैला; गुजरात, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पंजाब और केरल लगभग आधा बनाते हैं।

अंक योजना:

  1. रसायन उद्योग में बड़ी और छोटी, दोनों तरह की इकाइयाँ हैं, और यह अकार्बनिक व कार्बनिक, दोनों क्षेत्रों में तेज़ी से बढ़ा है। — 1 अंक
  2. अकार्बनिक रसायनों में सल्फ़्यूरिक अम्ल (उर्वरक, कृत्रिम रेशे, प्लास्टिक, पेंट, रंग के लिए), नाइट्रिक अम्ल, क्षार, सोडा ऐश (काँच, साबुन, डिटर्जेंट, कागज़ के लिए) और कास्टिक सोडा आते हैं; इनकी इकाइयाँ देश भर में फैली हैं। — 1 अंक
  3. कार्बनिक रसायनों में पेट्रो-रसायन आते हैं, जिनसे कृत्रिम रेशे, कृत्रिम रबड़, प्लास्टिक, रंग, दवाइयाँ बनती हैं; ये संयंत्र तेल शोधनशालाओं या पेट्रो-रसायन संयंत्रों के पास हैं। यह उद्योग अपना सबसे बड़ा उपभोक्ता खुद है। — 1 अंक
  4. उर्वरक उद्योग नाइट्रोजनी उर्वरक (मुख्यतः यूरिया), फ़ॉस्फ़ेटी उर्वरक, अमोनियम फ़ॉस्फ़ेट (DAP) और N, P, K वाले मिश्रित उर्वरक बनाता है; पोटाश पूरी तरह आयात होता है। — 1 अंक
  5. हरित क्रांति के बाद उर्वरक उद्योग कई भागों में फैला; गुजरात, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पंजाब और केरल लगभग आधा उत्पादन करते हैं। — 1 अंक

अथवा

महाराष्ट्र के एक ज़िले में कपास खूब उगती है, पर कोई कारखाना नहीं है। अब वहाँ एक सूती वस्त्र मिल और पंप व खेती की मशीनें बनाने वाला एक कारखाना खुलता है। स्पष्ट कीजिए कि ज़िले की खेती और ये उद्योग पाँच तरह से एक-दूसरे को कैसे सहारा देंगे।

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

  1. कपास का बाज़ार: मिल किसानों की कपास खरीदती है, इसलिए उन्हें पास में खरीदार और बेहतर दाम मिलते हैं।
  2. खेती के आगत: कारखाना पंप और मशीनें बेचता है, और उद्योग उर्वरक व पाइप देते हैं, जिससे उपज बढ़ती है।
  3. आधुनिक खेती: मशीनों से खेती का काम तेज़ और कुशल होता है।
  4. रोज़गार: खेती के फ़ालतू मज़दूरों को मिल और कारखाने में काम मिलता है, इसलिए परिवार केवल खेती की आय पर नहीं जीते।
  5. कपास से जुड़ा काम: ओटाई, बुनाई, रंगाई, पैकिंग और परिवहन बढ़ते हैं, और बढ़ी आय से खेती व कारखानों के सामान की माँग बढ़ती है।

अंक योजना:

  1. मिल कच्ची कपास के लिए किसानों पर निर्भर है, इसलिए किसानों को पास में पक्का बाज़ार और बेहतर दाम मिलते हैं। — 1 अंक
  2. कारखाना सिंचाई पंप, मशीनें और औज़ार बेचता है (और उद्योग उर्वरक, पीड़कनाशक और PVC पाइप देते हैं), जिनसे खेती की उत्पादकता बढ़ती है। — 1 अंक
  3. उद्योग कृषि के आधुनिकीकरण में मदद करता है, जिससे खेती का काम तेज़ और कुशल होता है। — 1 अंक
  4. खेती से फ़ालतू मज़दूरों को मिल और कारखाने (द्वितीयक क्षेत्रक) में काम मिलता है, इसलिए परिवार केवल खेती की आय पर कम निर्भर रहते हैं। — 1 अंक
  5. मिल कपास से जुड़े और काम पैदा करती है: ओटाई, कताई, बुनाई, रंगाई, पैकिंग और परिवहन, और बढ़ी आय से खेती और कारखानों, दोनों के सामान की माँग बढ़ती है। (कोई भी पाँच उचित बिंदु।) — 1 अंक

प्रश्न 14 (4 अंक)

नीचे दिए गए स्रोत को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

रंग बदलती नदी

एक छोटे वस्त्र-नगर में, जिसे हम रंगपुर कहेंगे, नदी हर हफ़्ते अलग रंग की बहती थी, यह इस पर निर्भर करता था कि छपाई इकाइयाँ कौन-सा रंग इस्तेमाल कर रही हैं। इकाइयाँ अपना गंदा पानी सीधे नदी में छोड़ देती थीं, जिसमें रंग, डिटर्जेंट, अम्ल और लवण होते थे। मछलियाँ गायब हो गईं, और नीचे की ओर के किसानों को अपने कुओं के पानी में रसायनों का स्वाद मिलने लगा।

हालात तब बदलने लगे जब इकाइयों ने मिलकर एक साझा उपचार संयंत्र बनाया। गंदा पानी पहले छलनियों और तलछटी टंकियों से गुज़रता है, जहाँ यांत्रिक तरीकों से ठोस पदार्थ अलग किए जाते हैं। फिर यह ऐसी टंकियों में जाता है जिनमें जीवाणु बहुत-सी गंदगी को तोड़ देते हैं। आखिरी चरण में जैविक, रासायनिक और भौतिक प्रक्रियाओं का मेल इसे इतना साफ़ कर देता है कि यह कारखानों में फिर से काम आ सके। कुछ इकाइयों ने अपनी छतों से वर्षा जल इकट्ठा करना भी शुरू कर दिया है, ताकि उन्हें नदी से कम पानी लेना पड़े। (रंगपुर एक काल्पनिक नगर है।)

(a) छपाई इकाइयों द्वारा नदी में छोड़े गए किन्हीं दो प्रदूषकों के नाम लिखिए। (1 अंक)

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

रंग और अम्ल।

अंक योजना:

  1. कोई दो: रंग, डिटर्जेंट, अम्ल, लवण (प्रत्येक 0.5)। — 1 अंक

(b) अपशिष्ट जल उपचार के किस चरण को 'छलनियाँ और तलछटी टंकियाँ' कहकर बताया गया है? इसमें क्या होता है? (1 अंक)

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

यह प्राथमिक उपचार है, जिसमें छानने और तलछटीकरण जैसे यांत्रिक तरीकों से ठोस पदार्थ अलग किए जाते हैं।

अंक योजना:

  1. प्राथमिक उपचार (0.5): छानने, पीसने, ऊर्णन (फ़्लॉक्यूलेशन) और तलछटीकरण जैसे यांत्रिक तरीकों से ठोस पदार्थ अलग किए जाते हैं (0.5)। — 1 अंक

(c) अपशिष्ट जल के उपचार के अलावा, दो ऐसे तरीके सुझाइए जिनसे उद्योग मीठे पानी का प्रदूषण कम कर सकते हैं। (2 अंक)

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

  1. एक ही पानी को दो या अधिक चरणों में फिर से उपयोग और पुनर्चक्रित करें, ताकि कम मीठा पानी लगे।
  2. कारखाने की ज़रूरत का कुछ भाग वर्षा जल संग्रहण से पूरा करें।

अंक योजना:

  1. पानी को दो या अधिक चरणों में बार-बार उपयोग और पुनर्चक्रित करके प्रसंस्करण में कम पानी लगाना। — 1 अंक
  2. पानी की ज़रूरत पूरी करने के लिए वर्षा जल संग्रहण। (यह भी स्वीकार्य: गर्म पानी छोड़ने से पहले ठंडा करना; उद्योगों द्वारा भूजल के अधिक दोहन पर कानूनी रोक।) — 1 अंक

प्रश्न 15 (4 अंक)

नीचे दिए गए स्रोत को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

गर्मियों में सो जाने वाली मिल

नवंबर से अप्रैल तक पश्चिमी महाराष्ट्र की एक सहकारी चीनी मिल के दरवाज़े दिन-रात खुले रहते हैं। आसपास के खेतों से गन्ना लेकर ट्रैक्टरों और बैलगाड़ियों की कतारें लगती हैं, क्योंकि कटने के बाद देर तक पड़ा गन्ना चीनी खो देता है और कम दाम पाता है। गन्ना उगाने वाले किसान सहकारी समिति के सदस्य हैं, इसलिए वे उसके मुनाफ़े और मुश्किलों, दोनों में भागीदार हैं।

मई आते-आते कतारें गायब हो जाती हैं। पेराई के लिए ताज़ा गन्ना नहीं होता, और अधिकांश मज़दूर अगली ऋतु तक अपने खेतों पर लौट जाते हैं। कुछ मशीनें पुरानी हैं और बहुत-सा रस बर्बाद करती हैं, और भीड़ के दिनों में मिल दूर के गाँवों से गन्ना हमेशा समय पर नहीं उठा पाती। एक चीज़ का उपयोग उसने अच्छी तरह सीख लिया है, खोई (बगास), यानी रस निकालने के बाद बचे कुचले डंठल; अब वह इन्हें अपने बॉयलरों में जलाकर अपनी बिजली बनाती है। (यहाँ बताई गई मिल काल्पनिक है।)

(a) कटने के बाद गन्ने को जल्दी मिल तक क्यों पहुँचना चाहिए? (1 अंक)

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

देर तक पड़े रहने या लंबी ढुलाई से गन्ने का सुक्रोज़ घटता है, इसलिए कम चीनी बनती है।

अंक योजना:

  1. देर तक पड़े रहने या लंबी ढुलाई से इसमें सुक्रोज़ (चीनी) की मात्रा घट जाती है, इसलिए इससे कम चीनी बनती है। — 1 अंक

(b) चीनी उद्योग सहकारी क्षेत्रक के लिए उपयुक्त क्यों है? (1 अंक)

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

यह मौसमी है, केवल कटाई के समय चलता है, इसलिए उत्पादक मिलकर इसे चला सकते हैं और लाभ व जोखिम बाँट सकते हैं।

अंक योजना:

  1. यह मौसमी है, केवल गन्ने की कटाई के समय चलता है, इसलिए गन्ना उगाने वाले खुद मिलकर इसे चला सकते हैं और लाभ व जोखिम बाँट सकते हैं। — 1 अंक

(c) इस मिल में दिखने वाली चीनी उद्योग की दो चुनौतियाँ पहचानिए, और बताइए कि मिल ने एक और चुनौती का सामना कैसे किया है। (2 अंक)

उत्तर।

आदर्श उत्तर:

  1. मिल साल के कुछ ही महीने चलती है, और उसकी पुरानी मशीनें रस बर्बाद करती हैं।
  2. वह खोई को अपने बॉयलरों में जलाकर अपनी बिजली बनाती है, जिससे खोई के अच्छे उपयोग की ज़रूरत पूरी होती है।

अंक योजना:

  1. दिखने वाली कोई दो चुनौतियाँ: मौसमी स्वरूप; उत्पादन के पुराने और अकुशल तरीके; गन्ने को मिल तक पहुँचाने में देरी (प्रत्येक 0.5)। — 1 अंक
  2. खोई (बगास) का पूरा उपयोग करने की ज़रूरत: मिल खोई को अपने बॉयलरों में जलाकर अपनी बिजली बनाती है। — 1 अंक