संसाधन एवं विकास
संसाधन एवं विकास अध्याय से 2026-27 के प्रतिदर्श प्रश्न-पत्र और फ़रवरी 2026 में 2 अंक, और मई 2026 में 3 अंक आए। आमतौर पर इससे एक या दो बहुविकल्पीय प्रश्न (संसाधनों के प्रकार, संसाधन नियोजन, मृदा, भू-उपयोग) और कभी-कभी एक लघु उत्तरीय प्रश्न आता है: मई 2026 में नवीकरणीय और अनवीकरणीय संसाधनों पर 3 अंक का और 2025 में संसाधनों के अंधाधुंध उपयोग की समस्याओं पर 2 अंक का प्रश्न। मृदाएँ मानचित्र सूची में भी हैं, "पहचानिए" वाले प्रश्न के रूप में।
सबसे ज़्यादा अंक इन गलतियों से कटते हैं: मृदाओं को आपस में मिला देना (लैटेराइट को लाल और पीली से, मरुस्थली को काली से), परती भूमि की श्रेणियों में उलझना, भूमि के अनुरूप न होने वाली संरक्षण विधि चुनना, और जहाँ प्रश्न किसी क्षेत्र या राज्य का नाम माँगे, वहाँ सामान्य बातें लिख देना।
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संसाधन
- संसाधन वह है जो प्रौद्योगिकी से सुलभ, आर्थिक रूप से संभव और सांस्कृतिक रूप से मान्य हो; यह प्रकृति का निःशुल्क उपहार नहीं।
- प्रकार: जैव/अजैव; नवीकरणीय/अनवीकरणीय; व्यक्तिगत, सामुदायिक, राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय; संभावी, विकसित, भंडार, संचित कोष।
- भंडार: उपयोगी, पर इसके उपयोग की तकनीक नहीं। संचित कोष: भंडार का वह भाग जिसे आज की तकनीक से उपयोग किया जा सकता है, भविष्य के लिए रखा।
- अंधाधुंध उपयोग से: कुछ लोगों के लालच के लिए ह्रास, कुछ हाथों में संचय, और पारिस्थितिक संकट।
पड़ाव: क्लब ऑफ रोम 1968; शूमाकर, स्मॉल इज़ ब्यूटीफुल 1974; ब्रुन्डटलैंड रिपोर्ट, हमारा साझा भविष्य 1987 (सतत पोषणीय विकास); रियो पृथ्वी सम्मेलन 1992 (एजेंडा 21: सतत पोषणीय विकास; हर स्थानीय सरकार अपना स्थानीय एजेंडा 21 बनाए)।
संसाधन नियोजन: 1. सर्वेक्षण, मानचित्रण और सूची; 2. प्रौद्योगिकी, कौशल और संस्थाओं वाला नियोजन ढाँचा; 3. राष्ट्रीय योजनाओं से मेल।
भूमि: मैदान 43%, पर्वत 30%, पठार 27%। वर्तमान परती ≤ 1 वर्ष; अन्य परती 1-5 वर्ष; कृषि योग्य बंजर > 5 वर्ष। सकल कृषित क्षेत्र = शुद्ध बोया गया क्षेत्र + एक से अधिक बार बोया गया क्षेत्र। वांछित वन क्षेत्र: 33% (1952 की नीति)।
निम्नीकरण: खनन (झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, ओडिशा); अति पशुचारण (गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र); अति सिंचाई (पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश)।
| मृदा | कहाँ | मुख्य बातें |
|---|---|---|
| जलोढ़ | उत्तरी मैदान; पूर्वी तट के डेल्टा | पोटाश, चूना; बांगर पुराना, खादर नया |
| काली (रेगर) | महाराष्ट्र, सौराष्ट्र, मालवा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ | लावा चट्टान; नमी रोकती है; कपास |
| लाल और पीली | दक्कन का पूर्वी और दक्षिणी भाग; ओडिशा, छत्तीसगढ़ | आग्नेय चट्टान, कम वर्षा; लोहे से लाल रंग |
| लैटेराइट | दक्षिणी राज्य, पश्चिमी घाट, ओडिशा, पूर्वोत्तर | भारी वर्षा, निक्षालन; अम्लीय; चाय, कॉफ़ी, काजू |
| मरुस्थली | पश्चिमी राजस्थान | लाल से भूरी, रेतीली, लवणीय; नीचे कंकड़ |
| वन | पहाड़ और पर्वत | ऊँचाई पर अम्लीय, वेदिकाओं पर उपजाऊ |
अपरदन और संरक्षण: अवनालिकाएँ → उत्खात भूमि (चंबल में खड्ड); परत अपरदन और पवन अपरदन। समोच्च जुताई, सीढ़ीदार खेती, पट्टी कृषि, रक्षक मेखला।
ध्यान दें
- लाल और पीली मृदा: कम वर्षा; लैटेराइट: भारी वर्षा।
- तीन वर्ष बिना बोई भूमि "अन्य परती" है, कृषि योग्य बंजर नहीं।
- सीढ़ीदार खेती पहाड़ी ढलानों के लिए; रक्षक मेखला हवादार रेतीले मैदानों के लिए।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: हर प्रश्न पहले कॉपी पर हल कीजिए, फिर उत्तर पढ़िए। हर चरण के सामने लिखे अंक बताते हैं कि परीक्षक क्या देखता है। 1 अंक वाले बहुविकल्पीय और अभिकथन-कारण प्रश्न अंत की क्विज़ में हैं, साथ में ऐसे प्रश्न भी जो जाँचते हैं कि आपने अध्याय कितनी गहराई से समझा है; क्विज़ के हर उत्तर के साथ उसकी व्याख्या दी गई है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (2 और 3 अंक)
प्रश्न 1 (3 अंक)
नीचे दिए गए भारत के रेखा-मानचित्र पर तीन क्षेत्र A, B और C अंकित हैं। हर क्षेत्र में पाई जाने वाली मुख्य मृदा पहचानिए और उसका नाम लिखिए।

उत्तर।
आदर्श उत्तर:
A. मरुस्थली मृदा, राजस्थान के शुष्क पश्चिमी भाग में।
B. काली मृदा (रेगर), महाराष्ट्र के लावा पठार पर।
C. लैटेराइट मृदा, उत्तरी केरल की पहाड़ियों में।
अंक योजना:
- A: मरुस्थली मृदा (पश्चिमी राजस्थान) — 1 अंक
- B: काली मृदा, जिसे रेगर भी कहते हैं (महाराष्ट्र का दक्कन पठार) — 1 अंक
- C: लैटेराइट मृदा (केरल) — 1 अंक
प्रश्न 2 (2 अंक)
नीचे दिए गए भारत के रेखा-मानचित्र पर दो क्षेत्र A और B अंकित हैं। हर क्षेत्र में पाई जाने वाली मुख्य मृदा पहचानिए और उसका नाम लिखिए।

उत्तर।
आदर्श उत्तर:
A. वन मृदा, हिमाचल प्रदेश की पर्वतीय घाटियों में।
B. जलोढ़ मृदा, आंध्र प्रदेश के तट पर गोदावरी डेल्टा में।
अंक योजना:
- A: वन मृदा, पर्वतीय मृदा भी मान्य (हिमाचल प्रदेश का हिमालयी भाग) — 1 अंक
- B: जलोढ़ मृदा (गोदावरी डेल्टा, आंध्र प्रदेश) — 1 अंक
प्रश्न 3 (2 अंक)
नदी किनारे के एक ज़िले में कुछ ठेकेदार दिन-रात नदी तल से रेत निकालकर दूर के शहरों में बेचते हैं। नदी के किनारे धँस रहे हैं, और गाँव वालों को इस धंधे से कुछ नहीं मिलता। यह संसाधनों के अंधाधुंध उपयोग की कौन-सी दो समस्याएँ दिखाता है?
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- कुछ लोगों के लालच में रेत इतनी तेज़ी से निकल रही है कि नदी भरपाई नहीं कर पाती।
- मुनाफ़ा कुछ ही हाथों में है: ठेकेदार अमीर, गाँव वाले गरीब।
अंक योजना:
- कुछ लोगों के लालच के लिए संसाधन का ह्रास: नदी जितनी रेत वापस ला सकती है, उससे कहीं तेज़ी से रेत निकाली जा रही है और किनारे नष्ट हो रहे हैं। — 1 अंक
- संसाधनों का कुछ ही हाथों में इकट्ठा होना: ठेकेदार अमीर होते जाते हैं और गाँव वालों को कुछ नहीं मिलता, जिससे समाज अमीर और गरीब में बँटता है। (पर्यावरण की हानि और भूमि निम्नीकरण भी मान्य।) — 1 अंक
प्रश्न 4 (3 अंक)
रेखा कहती है, 'तांबा नवीकरणीय संसाधन है, क्योंकि पुराने तांबे के तार पिघलाकर फिर से काम में लिए जा सकते हैं।' क्या वह सही है? नवीकरणीय और अनवीकरणीय संसाधनों का अंतर स्पष्ट कीजिए और बताइए कि पुनर्चक्रण इसमें कहाँ आता है।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- नवीकरणीय संसाधन प्राकृतिक प्रक्रियाओं से फिर बनते हैं, जैसे सौर ऊर्जा, जल, वन।
- अनवीकरणीय संसाधन, जैसे खनिज और जीवाश्म ईंधन, लाखों वर्षों में बनते हैं, इसलिए खत्म होकर दोबारा नहीं मिलते।
- रेखा गलत है। तांबा अनवीकरणीय है। पुनर्चक्रण से निकाली जा चुकी धातु ही दोबारा काम आती है; जीवाश्म ईंधन का तो पुनर्चक्रण भी नहीं होता।
अंक योजना:
- नवीकरणीय संसाधन भौतिक, रासायनिक या यांत्रिक प्रक्रियाओं से फिर से बन सकते हैं या उत्पन्न हो सकते हैं, जैसे सौर और पवन ऊर्जा, जल, वन और वन्य जीव। — 1 अंक
- अनवीकरणीय संसाधन बनने में लाखों वर्ष लगते हैं, जैसे खनिज और जीवाश्म ईंधन; एक बार खत्म होने पर हमारे जीवनकाल में इनकी भरपाई नहीं हो सकती। — 1 अंक
- रेखा गलत है: तांबा एक अनवीकरणीय खनिज है। पुनर्चक्रण से वही धातु दोबारा काम आती है, नई नहीं बनती; धातु जैसे कुछ अनवीकरणीय संसाधनों का पुनर्चक्रण हो सकता है, पर जीवाश्म ईंधन का नहीं, वे जलकर खत्म हो जाते हैं। — 1 अंक
प्रश्न 5 (3 अंक)
एक नियोजन दल एक ऐसे पहाड़ी ज़िले के लिए संसाधन योजना बना रहा है जहाँ नदियाँ और वन भरपूर हैं, पर सड़कें बहुत कम हैं। संसाधन नियोजन के तीन चरण समझाइए जिनका दल को पालन करना चाहिए, और हर चरण के लिए इस ज़िले से एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- ज़िले की नदियों, वनों और भूमि का सर्वेक्षण, मानचित्रण और मापन करके उनकी सूची बनाना।
- सही प्रौद्योगिकी, कौशल और संस्थाओं वाला नियोजन ढाँचा बनाना, जैसे छोटे जलविद्युत संयंत्र, प्रशिक्षित स्थानीय कामगार और सड़कें।
- इस योजना को राष्ट्रीय विकास योजनाओं से मिलाना, जैसे देश की ऊर्जा योजनाओं से।
अंक योजना:
- संसाधनों की पहचान करना और सर्वेक्षण, मानचित्रण और मापन से उनकी तालिका बनाना, जैसे ज़िले की नदियों, वनों और भूमि का सर्वेक्षण करके उनकी मात्रा दर्ज करना। — 1 अंक
- इनके उपयोग के लिए सही प्रौद्योगिकी, कौशल और संस्थाओं वाला नियोजन ढाँचा बनाना, जैसे छोटे जलविद्युत संयंत्र, प्रशिक्षित स्थानीय कामगार और संसाधनों तक पहुँचने के लिए सड़कें। — 1 अंक
- ज़िले की संसाधन योजना को राष्ट्रीय विकास योजनाओं से जोड़ना, जैसे उसकी जलविद्युत और वन योजनाओं को देश की ऊर्जा और वन नीतियों से मिलाना। — 1 अंक
प्रश्न 6 (2 अंक)
गांधीजी ने कहा था, 'हमारे पास हर व्यक्ति की आवश्यकता पूर्ति के लिए बहुत कुछ है, लेकिन किसी के लालच की संतुष्टि के लिए नहीं।' उनका क्या अर्थ था, और संसाधनों के ह्रास के लिए उन्होंने किसे दोषी माना?
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- संसाधन सबकी बुनियादी ज़रूरतें पूरी कर सकते हैं, पर लालची लोगों की अनंत इच्छाएँ कभी नहीं, इसलिए इनका सावधानी से उपयोग करना चाहिए।
- उन्होंने लालची, स्वार्थी लोगों और आधुनिक प्रौद्योगिकी की शोषणकारी प्रकृति को दोषी माना।
अंक योजना:
- अर्थ: पृथ्वी के संसाधन सब लोगों की बुनियादी ज़रूरतें पूरी कर सकते हैं, पर लालची लोगों की अनंत इच्छाएँ नहीं, इसलिए इनका सोच-समझकर उपयोग होना चाहिए। — 1 अंक
- उन्होंने वैश्विक स्तर पर संसाधनों के ह्रास के लिए लालची और स्वार्थी व्यक्तियों तथा आधुनिक प्रौद्योगिकी की शोषणकारी प्रकृति को दोषी माना। — 1 अंक
प्रश्न 7 (3 अंक)
जलोढ़ मैदान भारत के सबसे घने बसे भागों में हैं। जलोढ़ मृदा की दो विशेषताएँ समझाइए जिनसे ऐसा है, और बांगर तथा खादर में अंतर बताइए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- यह पूरे उत्तरी मैदान और पूर्वी डेल्टाओं में फैली है, खेती के लिए बहुत बड़ी समतल भूमि।
- इसमें पोटाश, फ़ॉस्फ़ोरिक अम्ल और चूना भरपूर है, इसलिए गन्ना, धान और गेहूँ अच्छे उगते हैं और गहन खेती होती है।
- बांगर पुराना जलोढ़ है, जिसमें कंकड़ ग्रंथियाँ अधिक हैं; खादर नया, बारीक और अधिक उपजाऊ है।
अंक योजना:
- यह सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्रों द्वारा जमा की गई है और पूरे उत्तरी मैदान तथा पूर्वी तटीय डेल्टाओं में फैली है, इसलिए खेती के लिए बहुत बड़ी समतल भूमि मिलती है। — 1 अंक
- यह बहुत उपजाऊ है, इसमें पोटाश, फ़ॉस्फ़ोरिक अम्ल और चूना पर्याप्त हैं, और यह गन्ना, धान, गेहूँ, अन्य अनाज और दालों के लिए उपयुक्त है; इसलिए इस पर गहन खेती होती है और बहुत लोग बसे हैं। — 1 अंक
- बांगर पुराना जलोढ़ है जिसमें कंकड़ ग्रंथियाँ अधिक होती हैं; खादर नया जलोढ़ है, जिसके कण बारीक होते हैं और जो अधिक उपजाऊ है। — 1 अंक
प्रश्न 8 (2 अंक)
हिमालय की घाटियों के निचले भागों में वन मृदा उपजाऊ, पर बर्फ़ से ढकी ऊँचाइयों पर कमज़ोर क्यों होती है?
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- बर्फ़ीली ऊँचाइयों पर मृदा का अनाच्छादन होता है, और वह अम्लीय तथा ह्यूमस में कम है।
- नीचे नदी वेदिकाओं और जलोढ़ पंखों पर नदियाँ बारीक जलोढ़ छोड़ती हैं और वन ह्यूमस देते हैं, इसलिए मृदा उपजाऊ है।
अंक योजना:
- बर्फ़ से ढकी ऊँचाइयों पर मृदा का अनाच्छादन होता रहता है और यह अम्लीय होती है, इसमें ह्यूमस कम होता है, इसलिए यह कमज़ोर है। — 1 अंक
- घाटियों के निचले भागों में, खासकर नदी वेदिकाओं और जलोढ़ पंखों पर, मृदा उपजाऊ होती है, क्योंकि नदियाँ बारीक जलोढ़ लाकर जमा करती हैं और वन ह्यूमस जोड़ते हैं। — 1 अंक
प्रश्न 9 (3 अंक)
सतत पोषणीय विकास का क्या अर्थ है? एक बढ़ते हुए कस्बे के लिए अपने जल और भूमि का उपयोग करते समय इसका पालन करने के दो तरीके सुझाइए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
सतत पोषणीय विकास का अर्थ है पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना विकास, ताकि भावी पीढ़ियों की ज़रूरतें पूरी हो सकें।
- जल: वर्षा जल का संग्रहण करना और गंदे पानी को नदी तक पहुँचने से पहले साफ़ करना।
- भूमि: खेतों और वनों के बजाय बंजर भूमि पर निर्माण करना, और खाली जगहों पर पेड़ लगाना।
अंक योजना:
- अर्थ: विकास पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना होना चाहिए, और वर्तमान विकास भावी पीढ़ियों की ज़रूरतों से समझौता न करे। — 1 अंक
- जल: वर्षा जल का संग्रहण, भूजल का पुनर्भरण और नदियों में छोड़ने से पहले गंदे पानी का शोधन, ताकि जल भविष्य के लिए बचा रहे। — 1 अंक
- भूमि: उपजाऊ खेतों और वनों की जगह बंजर या व्यर्थ भूमि पर निर्माण करना, और खाली जगहों पर पेड़ लगाना। (कोई अन्य उचित तरीका भी मान्य।) — 1 अंक
प्रश्न 10 (3 अंक)
भारत की भूमि पर मैदान, पर्वत और पठार हैं। कुल भू-क्षेत्र में हर एक का लगभग हिस्सा बताइए, और हर एक देश के लिए कैसे उपयोगी है, इसका एक तरीका लिखिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- मैदान, लगभग 43 प्रतिशत: खेती और उद्योगों के लिए भूमि।
- पर्वत, लगभग 30 प्रतिशत: कुछ नदियों को सालभर बहता रखते हैं और पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
- पठार, लगभग 27 प्रतिशत: खनिजों, जीवाश्म ईंधनों और वनों के समृद्ध भंडार।
अंक योजना:
- मैदान, लगभग 43 प्रतिशत: ये कृषि और उद्योगों के लिए भूमि देते हैं। — 1 अंक
- पर्वत, लगभग 30 प्रतिशत: ये कुछ नदियों का सतत प्रवाह बनाए रखते हैं और पर्यटन तथा पारिस्थितिकी के लिए उपयोगी हैं। — 1 अंक
- पठार, लगभग 27 प्रतिशत: इनमें खनिजों, जीवाश्म ईंधनों और वनों के समृद्ध भंडार हैं। — 1 अंक
दीर्घ उत्तरीय और स्रोत आधारित प्रश्न
प्रश्न 11 (5 अंक)
लैटेराइट मृदा और मरुस्थली मृदा की किन्हीं पाँच बिंदुओं पर तुलना कीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- जलवायु: लैटेराइट गर्म क्षेत्रों में बनती है जहाँ आर्द्र और शुष्क ऋतु बारी-बारी आती हैं; मरुस्थली मृदा गर्म, शुष्क जलवायु में बनती है।
- निर्माण: लैटेराइट वर्षा के तेज़ निक्षालन से बनती है; मरुस्थली मृदा में नमी नहीं होती और निचली परतों में कंकड़ जमा होता है।
- स्वभाव: लैटेराइट गहरी, अम्लीय और पोषक तत्वों में कमज़ोर है; मरुस्थली मृदा रेतीली, लवणीय और लाल से भूरी है।
- ह्यूमस: घने वन के नीचे लैटेराइट में ह्यूमस होता है, विरल वनस्पति में कम; मरुस्थली मृदा में लगभग नहीं।
- उपयोग: मृदा संरक्षण के बाद लैटेराइट पर दक्षिण में चाय, कॉफ़ी और काजू उगते हैं; मरुस्थली मृदा पर सिंचाई से ही खेती होती है, जैसे पश्चिमी राजस्थान में।
अंक योजना:
- जलवायु: लैटेराइट मृदा बारी-बारी से आर्द्र और शुष्क ऋतु वाली उष्ण और उपोष्ण जलवायु में बनती है; मरुस्थली मृदा उच्च तापमान और तेज़ वाष्पीकरण वाली शुष्क जलवायु में बनती है। — 1 अंक
- प्रक्रिया: लैटेराइट भारी वर्षा से हुए तीव्र निक्षालन का परिणाम है; मरुस्थली मृदा में नमी की कमी है, और नीचे कैल्शियम बढ़ने से इसके निचले संस्तरों में कंकड़ होता है। — 1 अंक
- स्वभाव: लैटेराइट गहरी से बहुत गहरी, अम्लीय (pH 6.0 से कम) और सामान्यतः पोषक तत्वों में कमज़ोर होती है; मरुस्थली मृदा लाल से भूरी, रेतीली और लवणीय होती है, कहीं-कहीं इतनी कि इससे साधारण नमक निकाला जाता है। — 1 अंक
- ह्यूमस: पर्णपाती और सदाबहार वनों के नीचे लैटेराइट ह्यूमस से भरपूर होती है, पर विरल वनस्पति के नीचे ह्यूमस में कम; मरुस्थली मृदा में ह्यूमस नहीं होता। — 1 अंक
- उपयोग: मृदा संरक्षण के बाद लैटेराइट पर कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु की पहाड़ियों में चाय और कॉफ़ी उगती है, और लाल लैटेराइट काजू के लिए उपयुक्त है; मरुस्थली मृदा उचित सिंचाई से कृषि योग्य बनती है, जैसे पश्चिमी राजस्थान में। (वितरण भी मान्य: लैटेराइट दक्षिणी राज्यों, महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट, ओडिशा, पश्चिम बंगाल के कुछ भागों और उत्तर-पूर्व में; मरुस्थली मृदा पश्चिमी राजस्थान में।) — 1 अंक
अथवा
सौराष्ट्र और मालवा के किसान काली मृदा को अपनी 'कपास की मृदा' कहते हैं। स्पष्ट कीजिए कि यह मृदा कैसे बनी और कहाँ पाई जाती है, कपास के लिए उपयुक्त इसकी दो विशेषताएँ बताइए, और किसानों के सामने आने वाली इसकी एक कठिनाई लिखिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- निर्माण: जलवायु और जनक शैल के मेल से; यह उत्तर-पश्चिमी दक्कन के लावा (बेसाल्ट) से बनी।
- कहाँ: महाराष्ट्र, सौराष्ट्र, मालवा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के पठार, तथा गोदावरी और कृष्णा घाटियाँ।
- नमी: इसकी बहुत बारीक चिकनी मिट्टी नमी अच्छी तरह रोकती है।
- पोषक तत्व: इसमें कैल्शियम कार्बोनेट, मैग्नीशियम, पोटाश और चूना भरपूर है, फ़ॉस्फ़ोरस कम।
- कठिनाई: भीगने पर चिपचिपी हो जाती है, इसलिए पहली बौछार के तुरंत बाद या मानसून से पहले जोतनी पड़ती है।
अंक योजना:
- निर्माण: जलवायु की दशाओं और जनक शैल के मेल से; यह उत्तर-पश्चिमी दक्कन पठार पर फैले लावा (बेसाल्ट) से बनी। — 1 अंक
- वितरण: महाराष्ट्र, सौराष्ट्र, मालवा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के पठार, और दक्षिण-पूर्व में गोदावरी तथा कृष्णा घाटियों तक। — 1 अंक
- विशेषता 1: यह अत्यंत बारीक चिकनी मिट्टी से बनी है और नमी रोकने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध है। — 1 अंक
- विशेषता 2: इसमें कैल्शियम कार्बोनेट, मैग्नीशियम, पोटाश और चूना भरपूर है (फ़ॉस्फ़ोरिक अंश कम है)। (यह भी मान्य: गर्मी में पड़ने वाली गहरी दरारें मृदा में हवा पहुँचाती हैं।) — 1 अंक
- कठिनाई: भीगने पर यह चिपचिपी हो जाती है, इसलिए पहली बौछार के तुरंत बाद या मानसून से पहले न जोतें तो इस पर काम करना कठिन होता है। — 1 अंक
प्रश्न 12 (5 अंक)
तीन खेतों के बारे में पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
खेत X उत्तराखंड में एक खड़ी पहाड़ी ढलान पर है, और हर मानसून में बारिश इसकी मृदा को ढलान से नीचे बहा ले जाती है।
खेत Y पश्चिमी राजस्थान में समतल, रेतीली भूमि पर है, जहाँ गर्मियों की तेज़ हवाएँ ऊपरी मृदा उड़ा ले जाती हैं।
खेत Z चंबल नदी के पास है। बहते जल ने इसकी चिकनी मृदा में गहरी नालियाँ काट दी हैं, और इसके कुछ भागों पर अब खेती नहीं हो सकती।
(a) खेत Y पर किस प्रकार का मृदा अपरदन हो रहा है, और खेत Z की क्षतिग्रस्त भूमि को क्या कहते हैं? (2)
(b) तीनों खेतों में से हर एक के लिए मृदा संरक्षण की एक उपयुक्त विधि सुझाइए और बताइए कि वह कैसे मदद करती है। (3)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
(a) खेत Y पर पवन अपरदन हो रहा है। खेत Z पर अवनालिकाओं ने भूमि को उत्खात भूमि बना दिया है, जिसे चंबल बेसिन में खड्ड कहते हैं।
(b)
- खेत X: सीढ़ीदार खेती। ढलान में काटी सीढ़ियाँ बारिश के पानी को धीमा करती हैं, जिससे मृदा टिकी रहती है।
- खेत Y: रक्षक मेखला। पेड़ों की कतारें पवन का वेग तोड़ती हैं और रेत को रोकती हैं।
- खेत Z: अवनालिकाओं को छोटी मेड़ों से बंद करना और उनमें और आसपास घास और पेड़ लगाना, ताकि जड़ें मृदा थामें और पानी धीमा बहे।
अंक योजना:
- (a) खेत Y: पवन अपरदन, क्योंकि हवा समतल भूमि से ढीली मृदा उड़ा ले जाती है। — 1 अंक
- (a) खेत Z: बहते जल ने अवनालिकाएँ काट दी हैं, जिससे भूमि उत्खात भूमि बन गई है; चंबल बेसिन में ऐसी भूमि को खड्ड कहते हैं। — 1 अंक
- (b) खेत X: सीढ़ीदार खेती; ढलान पर काटी गई सीढ़ियाँ पानी की गति धीमी करती हैं और मृदा को रोकती हैं (पश्चिमी और मध्य हिमालय में आम)। (ढलान के आर-पार समोच्च जुताई भी मान्य।) — 1 अंक
- (b) खेत Y: पेड़ों की रक्षक मेखला (या घास की पट्टियों वाली पट्टी कृषि) पवन के वेग को तोड़ती है और बालू के टीलों को स्थिर करती है। — 1 अंक
- (b) खेत Z: अवनालिकाओं को मिट्टी या पत्थर की छोटी मेड़ों से बंद करना और उन पर घास और पेड़ लगाना, ताकि जड़ें मृदा को बाँधें और पानी धीमा बहे। (पास के ढलान वाले खेतों में समोच्च जुताई या बहते जल के विरुद्ध कोई भी उचित उपाय भी मान्य।) — 1 अंक
अथवा
निम्नलिखित के उत्तर दीजिए।
(a) परत अपरदन और अवनालिका अपरदन में अंतर बताइए। (2)
(b) मानवीय गतिविधियाँ या खेती के गलत तरीके मृदा अपरदन कैसे करते हैं, इसके तीन तरीके समझाइए। (3)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
(a) परत अपरदन में पानी ढलान पर पतली परत की तरह बहता है और ऊपरी मृदा समान रूप से हटा देता है। अवनालिका अपरदन में बहता जल चिकनी मृदा में गहरी नालियाँ काटता है और भूमि उत्खात भूमि बन जाती है, जैसे चंबल के खड्ड।
(b)
- वन काटने से मृदा को थामने वाली जड़ें हट जाती हैं।
- अति पशुचारण घास खत्म करता है, और निर्माण तथा खनन भूमि को ढीला करते हैं।
- ढलान के ऊपर-नीचे जुताई से नालियाँ बनती हैं, इसलिए पानी मृदा के साथ तेज़ी से बहता है।
अंक योजना:
- (a) परत अपरदन: पानी ढलान पर बड़े क्षेत्र में एक परत की तरह बहता है और ऊपरी मृदा को समान रूप से बहा ले जाता है। — 1 अंक
- (a) अवनालिका अपरदन: बहता जल चिकनी मृदा में गहरी नालियाँ (अवनालिकाएँ) काटता है, और भूमि खेती लायक नहीं रहती (उत्खात भूमि; चंबल बेसिन में खड्ड)। — 1 अंक
- (b) वनों की कटाई से पौधों का वह आवरण हट जाता है जिसकी जड़ें मृदा को थामती हैं, इसलिए वर्षा और हवा उसे बहा ले जाती हैं। — 1 अंक
- (b) अति पशुचारण घास को खत्म कर देता है; निर्माण और खनन भूमि को खोदकर ढीला कर देते हैं। — 1 अंक
- (b) ढलान के ऊपर-नीचे जुताई से खूड़ें नालियों का काम करती हैं, इसलिए पानी तेज़ी से नीचे बहता है और मृदा साथ ले जाता है। — 1 अंक
प्रश्न 13 (4 अंक)
नीचे दिए गए स्रोत को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
पटवारी का रजिस्टर क्या बताता है
देवगढ़ एक नीची पहाड़ी की तलहटी में बसा 450 हेक्टेयर का गाँव है। इसका पटवारी गाँव की हर ज़मीन के उपयोग का रजिस्टर रखता है। उसका ताज़ा पन्ना यह दिखाता है।
280 हेक्टेयर पर फ़सलें बोई जाती हैं। इनमें से 120 हेक्टेयर पर किसान अब सर्दियों में दूसरी फ़सल भी लेते हैं; इसके लिए वे छह वर्ष पहले बने एक छोटे चेक डैम के पीछे रुके पानी का उपयोग करते हैं। पहाड़ी के 40 हेक्टेयर पर एक विरल वन है, और यह आँकड़ा बीस वर्षों में मुश्किल से बदला है। स्कूल, नई सड़क, एक ईंट-भट्ठा और घर मिलकर 25 हेक्टेयर घेरते हैं। गाँव का साझा चरागाह, जहाँ पशु चरते हैं, 30 हेक्टेयर में है। 15 हेक्टेयर का एक भूखंड सात वर्षों से नहीं बोया गया, क्योंकि उसके मालिक शहर चले गए। बाकी 60 हेक्टेयर पथरीली ढलानें हैं, जहाँ कुछ नहीं उग सकता।
(a) 15 हेक्टेयर वाला भूखंड भू-उपयोग की किस श्रेणी में दर्ज होगा? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
कृषि योग्य बंजर भूमि, क्योंकि इस पर पाँच वर्ष से अधिक समय से खेती नहीं हुई।
अंक योजना:
- कृषि योग्य बंजर भूमि, क्योंकि यह पाँच से अधिक कृषि वर्षों से बिना खेती के पड़ी है। — 1 अंक
(b) देवगढ़ का लगभग कितना भाग वनों के अधीन है, और यह राष्ट्रीय वन नीति (1952) द्वारा वांछित वन क्षेत्र से कैसे तुलना करता है? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
लगभग 9 प्रतिशत (450 में से 40 हेक्टेयर), जो नीति द्वारा वांछित 33 प्रतिशत से बहुत कम है।
अंक योजना:
- लगभग 9 प्रतिशत (450 में से 40 हेक्टेयर), जो भौगोलिक क्षेत्र के वांछित 33 प्रतिशत से बहुत कम है। — 1 अंक
(c) भू-उपयोग भौतिक कारकों और मानवीय कारकों, दोनों से तय होता है। स्रोत की सहायता से देवगढ़ के भू-उपयोग को तय करने वाला एक भौतिक कारक और एक मानवीय कारक समझाइए। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- भौतिक: पथरीली पहाड़ी ढलानों पर खेती नहीं हो सकती, इसलिए 60 हेक्टेयर खाली हैं और पहाड़ी पर वन है।
- मानवीय: चेक डैम, यानी प्रौद्योगिकी, से किसान 120 हेक्टेयर पर दूसरी फ़सल ले पाते हैं।
अंक योजना:
- भौतिक कारक: स्थलाकृति; पथरीली पहाड़ी ढलानों (60 हेक्टेयर) पर खेती नहीं हो सकती, और पहाड़ी पर वन छोड़ा गया है। — 1 अंक
- मानवीय कारक: प्रौद्योगिकी या जनसंख्या; चेक डैम से किसान दूसरी फ़सल ले पाते हैं, या बढ़ते गाँव को स्कूल, सड़क, भट्ठे और घरों के लिए भूमि चाहिए, या शहर जाने से एक भूखंड बिना बोए पड़ा है। — 1 अंक
प्रश्न 14 (4 अंक)
नीचे दिए गए स्रोत को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
धनी धरती, गरीब लोग
पूर्वी भारत के एक ज़िले की पहाड़ियों में कोयला, लौह अयस्क और बॉक्साइट हैं। हर दिन ट्रकों की कतारें ये खनिज बाहर ले जाती हैं। फिर भी खदानों के पास रहने वाले बहुत-से परिवारों के पास आज भी न बिजली है, न अच्छा स्कूल, और न पास में कोई अस्पताल। ज़्यादातर खनन पट्टे कुछ बड़ी कंपनियों के पास हैं, और मुनाफ़ा ज़िले से दूर खर्च होता है। जहाँ खदान खाली करके छोड़ दी गई है, वहाँ भूमि पर गहरे घाव हैं और चारों ओर बेकार चट्टानों के ढेर पड़े हैं।
इस ज़िले का अध्ययन करने वाली एक शोधकर्ता ने इसे कागज़ पर धनी और असल में गरीब बताया। उसने इसकी तुलना एक दूसरे ज़िले से की, जिसके पास खनिज बहुत कम हैं, फिर भी वह समृद्ध हो गया है, क्योंकि वहाँ अच्छी सड़कें, प्रशिक्षित कामगार और ठीक से काम करने वाले बैंक और सहकारी समितियाँ हैं। उसके अनुसार केवल खनिजों से विकास नहीं आता।
(a) घाव भरी भूमि और बेकार चट्टानों के ढेर संसाधनों के अंधाधुंध उपयोग की कौन-सी समस्या दिखाते हैं? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
पारिस्थितिक संकट: भूमि का निम्नीकरण हुआ है और पर्यावरण को नुकसान पहुँचा है।
अंक योजना:
- पारिस्थितिक संकट: भूमि निम्नीकरण और पर्यावरण को नुकसान। (कुछ लोगों के लालच के लिए संसाधनों का ह्रास भी मान्य।) — 1 अंक
(b) शोधकर्ता के अनुसार, विकास के लिए किसी क्षेत्र को संसाधनों के साथ और क्या चाहिए? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
उपयुक्त प्रौद्योगिकी और संस्थाएँ, जैसे सड़कें, प्रशिक्षित कामगार, बैंक और सहकारी समितियाँ।
अंक योजना:
- प्रौद्योगिकी और संस्थाओं में उसके अनुरूप बदलाव, जैसे अच्छी सड़कें, प्रशिक्षित कामगार और ठीक से काम करने वाले बैंक और सहकारी समितियाँ। — 1 अंक
(c) ज़िले के खनिज हमेशा नहीं रहेंगे। दो तरीके समझाइए जिनसे ज़िला सतत पोषणीय विकास के अनुरूप इनका उपयोग कर सके। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- खनन की कमाई का कुछ भाग स्कूल, कौशल और सड़कों पर लगाना, ताकि खदानें बंद होने पर भी लोग कमा सकें।
- सावधानी से खनन करना, और पुराने गड्ढे भरकर उन पर पेड़ लगाना, ताकि भूमि भावी पीढ़ियों के काम आए।
अंक योजना:
- खनन की कमाई का कुछ भाग स्थानीय लोगों के लिए स्थायी साधनों पर लगाना, जैसे स्कूल, कौशल, सड़कें और दूसरे रोज़गार, ताकि खदानें बंद होने के बाद भी ज़िला समृद्ध रहे। — 1 अंक
- सावधानी से और धीरे-धीरे खनन करना, और खाली हुई खदानों के गड्ढे भरकर पेड़ लगाना, ताकि भूमि और पर्यावरण भावी पीढ़ियों के काम आ सकें। (धातुओं का पुनर्चक्रण, खनिजों की बर्बादी न करना भी मान्य।) — 1 अंक