जल संसाधन
जल संसाधन अध्याय से 2026-27 के प्रतिदर्श प्रश्न-पत्र में 3, फ़रवरी 2026 में 5 और मई 2026 में 4 अंक आए। 2026 के दोनों प्रश्न-पत्रों में भूगोल का स्रोत आधारित प्रश्न इसी से था (सरदार सरोवर परियोजना; उद्योगों और शहरों की पानी की माँग), प्रतिदर्श प्रश्न-पत्र में 2 अंक का प्रश्न (सूखा-प्रवण ज़िले के लिए पारंपरिक वर्षा जल संग्रहण), और 2025 में बाँध-नदी मिलान और कृष्णा-गोदावरी विवाद जैसे बहुविकल्पीय प्रश्न। आठ बाँधों की सूची में से कोई एक अक्सर मानचित्र प्रश्न में होता है।
सबसे ज़्यादा अंक इन गलतियों से कटते हैं: मानचित्र (सलाल और सेलम, राणा प्रताप सागर और सरदार सरोवर), जहाँ प्रश्न दोनों पक्ष माँगे वहाँ केवल "बाँध अच्छे हैं" या केवल "बाँध बुरे हैं" लिखना, और संग्रहण के तरीकों और उनके क्षेत्रों को आपस में मिला देना।
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जल दुर्लभता
- पृथ्वी का लगभग तीन-चौथाई भाग पानी है, पर उपयोग लायक मीठा पानी बहुत थोड़ा है, जो जल चक्र से नवीकृत होता है।
- कारण: अति-उपयोग और असमान पहुँच; बढ़ती जनसंख्या; सिंचाई और सूखे मौसम की फ़सलें, निजी कुएँ और नलकूप; उद्योग (पानी और जलविद्युत); शहर और आवासीय सोसाइटियों द्वारा भौम जल निकालना; प्रदूषण।
- संरक्षण क्यों: स्वास्थ्य खतरों से बचाव, खाद्य सुरक्षा और आजीविका, पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा।
बहुउद्देशीय परियोजनाएँ: सिंचाई, बिजली, पानी की आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण, मनोरंजन, नौचालन, मत्स्य पालन। भाखड़ा नांगल: जलविद्युत + सिंचाई। हीराकुड: जल संरक्षण + बाढ़ नियंत्रण। नेहरू: "आधुनिक भारत के मंदिर"।
बाँधों की समस्याएँ: तलछट का कम बहाव और जलाशय में गाद; नदियों का विखंडन; बाढ़ मैदानों का डूबना; विस्थापन (नर्मदा बचाओ आंदोलन, टिहरी बाँध आंदोलन); अधिक पानी वाली फ़सलें और लवणता; अमीर-गरीब की खाई; अंतरराज्यीय विवाद (कोयना को लेकर कृष्णा-गोदावरी); बाढ़ (2006, महाराष्ट्र और गुजरात); भूकंप, जल-जनित बीमारियाँ, प्रदूषण।
अतीत की जल संरचनाएँ: चंद्रगुप्त मौर्य के बाँध और झीलें; श्रृंगवेरपुर (पहली शताब्दी ईसा पूर्व); कलिंग, नागार्जुनकोंडा, बेन्नूर, कोल्हापुर; भोपाल झील (11वीं शताब्दी); हौज़ खास का तालाब (14वीं शताब्दी)।
वर्षा जल संग्रहण
| तरीका | क्षेत्र |
|---|---|
| गुल, कुल | पश्चिमी हिमालय |
| छत पर संग्रहण, टाँका | राजस्थान (बीकानेर, फलोदी, बाड़मेर) |
| बाढ़ जल वाहिकाएँ | बंगाल के बाढ़ मैदान |
| खादीन, जोहड़ | जैसलमेर, राजस्थान के अन्य भाग |
| बाँस ड्रिप सिंचाई (लगभग 200 वर्ष पुरानी) | मेघालय |
टाँका: पहली बारिश का पानी नहीं लिया जाता; 'पालर पानी'; राजस्थान नहर आने से कमी। आज: तमिलनाडु ने छत पर संग्रहण अनिवार्य किया; चेरापूंजी और मॉसिनराम के पास होकर भी शिलांग में संग्रहण।
मानचित्र पर बाँध: सलाल (चिनाब, जम्मू-कश्मीर), भाखड़ा नांगल (सतलुज), टिहरी (भागीरथी, उत्तराखंड), राणा प्रताप सागर (चंबल, राजस्थान), सरदार सरोवर (नर्मदा, गुजरात), हीराकुड (महानदी, ओडिशा), नागार्जुन सागर (कृष्णा, तेलंगाना-आंध्र प्रदेश), तुंगभद्रा (कर्नाटक)।
ध्यान दें
- हीराकुड बाढ़ नियंत्रण के लिए; भाखड़ा नांगल बिजली और सिंचाई के लिए।
- सलाल (बाँध, जम्मू-कश्मीर) और सेलम (इस्पात, तमिलनाडु) अलग हैं।
- बाँधों से बाढ़ भी आई है।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: हर प्रश्न पहले कॉपी पर हल कीजिए, फिर उत्तर पढ़िए। हर चरण के सामने लिखे अंक बताते हैं कि परीक्षक क्या देखता है। 1 अंक वाले बहुविकल्पीय और अभिकथन-कारण प्रश्न अंत की क्विज़ में हैं, साथ में ऐसे प्रश्न भी जो जाँचते हैं कि आपने अध्याय कितनी गहराई से समझा है; क्विज़ के हर उत्तर के साथ उसकी व्याख्या दी गई है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (2 और 3 अंक)
प्रश्न 1 (3 अंक)
आपकी मानचित्र सूची के तीन बाँध A, B और C नीचे दिए गए भारत के रेखा-मानचित्र पर अंकित हैं। निम्नलिखित जानकारी की सहायता से इन्हें पहचानिए और इनके सही नाम लिखिए।
A. जम्मू-कश्मीर के रियासी ज़िले में चिनाब पर बना बाँध।
B. हिमाचल प्रदेश और पंजाब की सीमा के पास सतलुज पर बना बाँध।
C. कर्नाटक में होसपेटे के पास बना बाँध, जिसका नाम उसी नदी के नाम पर है जिस पर वह बना है।

उत्तर।
आदर्श उत्तर:
A. सलाल बाँध, जम्मू-कश्मीर में चिनाब पर।
B. भाखड़ा नांगल बाँध, हिमाचल प्रदेश-पंजाब सीमा के पास सतलुज पर।
C. तुंगभद्रा बाँध, कर्नाटक में होसपेटे के पास तुंगभद्रा पर।
अंक योजना:
- A: सलाल (चिनाब पर, जम्मू-कश्मीर) — 1 अंक
- B: भाखड़ा नांगल (सतलुज पर) — 1 अंक
- C: तुंगभद्रा (तुंगभद्रा पर, कर्नाटक) — 1 अंक
प्रश्न 2 (3 अंक)
नीचे दिए गए भारत के रेखा-मानचित्र पर अपनी मानचित्र सूची के निम्नलिखित बाँधों को उपयुक्त चिह्नों से अंकित कीजिए और उनके नाम लिखिए।
(a) राजस्थान में चंबल नदी पर बना बाँध।
(b) ओडिशा में संबलपुर के पास महानदी पर बना बाँध।
(c) तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की सीमा पर कृष्णा नदी पर बना बाँध।

उत्तर।
आदर्श उत्तर:
(a) राणा प्रताप सागर, दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में चंबल पर।
(b) हीराकुड, ओडिशा में संबलपुर के पास महानदी पर।
(c) नागार्जुन सागर, तेलंगाना-आंध्र प्रदेश सीमा पर कृष्णा पर।
उत्तर-मानचित्र में ये त्रिभुज चिह्नों के साथ a, b और c से दिखाए गए हैं।
अंक योजना:
- (a) राणा प्रताप सागर, दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में चंबल पर, अंकित और नाम लिखा — 1 अंक
- (b) हीराकुड, ओडिशा में संबलपुर के पास महानदी पर, अंकित और नाम लिखा — 1 अंक
- (c) नागार्जुन सागर, तेलंगाना-आंध्र प्रदेश सीमा पर कृष्णा पर, अंकित और नाम लिखा — 1 अंक

प्रश्न 3 (2 अंक)
नीचे दिए गए भारत के रेखा-मानचित्र पर निम्नलिखित बाँधों को उपयुक्त चिह्नों से अंकित कीजिए और उनके नाम लिखिए।
(a) गुजरात में नर्मदा पर बना वह बाँध जिसके विरुद्ध नर्मदा बचाओ आंदोलन चला।
(b) उत्तराखंड में भागीरथी पर बना बाँध।

उत्तर।
आदर्श उत्तर:
(a) सरदार सरोवर, गुजरात में नर्मदा पर, मध्य प्रदेश की सीमा के पास।
(b) टिहरी, उत्तराखंड की गढ़वाल पहाड़ियों में भागीरथी पर।
उत्तर-मानचित्र में ये a और b से दिखाए गए हैं।
अंक योजना:
- (a) सरदार सरोवर, गुजरात में नर्मदा पर, अंकित और नाम लिखा — 1 अंक
- (b) टिहरी, उत्तराखंड में भागीरथी पर, अंकित और नाम लिखा — 1 अंक

प्रश्न 4 (2 अंक)
पृथ्वी की तीन-चौथाई सतह पानी से ढकी है, फिर भी कई क्षेत्रों में जल दुर्लभता है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- इस सारे पानी का केवल छोटा-सा भाग ही उपयोग लायक मीठा पानी है।
- जहाँ पर्याप्त पानी है, वहाँ भी अति-उपयोग और सामाजिक समूहों की असमान पहुँच से दुर्लभता पैदा होती है।
अंक योजना:
- इस पानी का केवल एक छोटा-सा भाग ही उपयोग लायक मीठा पानी है। — 1 अंक
- जहाँ मीठा पानी उपलब्ध है, वहाँ भी अति-शोषण, अत्यधिक उपयोग और अलग-अलग सामाजिक समूहों की पानी तक असमान पहुँच से दुर्लभता पैदा होती है। — 1 अंक
प्रश्न 5 (3 अंक)
हमें अपने जल संसाधनों का संरक्षण और प्रबंधन क्यों करना चाहिए? तीन कारण दीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- साफ़ और पर्याप्त पानी हमें बीमारियों और दूसरे स्वास्थ्य खतरों से बचाता है।
- खेती, उद्योग और हमारी आजीविका पानी पर चलते हैं, इसलिए इसका संरक्षण हमारे भोजन और रोज़गार को बचाता है।
- पानी का अति-उपयोग नदियों, आर्द्रभूमियों और पूरे प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुँचाता है।
अंक योजना:
- प्रदूषित और कम पानी से होने वाले स्वास्थ्य खतरों से खुद को बचाने के लिए। — 1 अंक
- खाद्य सुरक्षा और अपनी आजीविका तथा उत्पादक गतिविधियों को जारी रखने के लिए। — 1 अंक
- अपने प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों को निम्नीकरण से बचाने के लिए; पानी का अति-शोषण इस संसाधन को कमज़ोर करता है और पारिस्थितिक संकट पैदा कर सकता है। — 1 अंक
प्रश्न 6 (3 अंक)
बहुउद्देशीय नदी परियोजना क्या है? स्वतंत्रता के बाद ऐसी परियोजनाओं से खेती और उद्योग, दोनों के साथ-साथ बढ़ने की क्या उम्मीद थी?
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- बहुउद्देशीय परियोजना एक ही नदी से एक साथ कई ज़रूरतें पूरी करती है: सिंचाई, बिजली, पानी की आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण, नौचालन और मत्स्य पालन।
- इसकी नहरें कृषि उत्पादन बढ़ाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था मज़बूत करतीं।
- इसकी बिजली और पानी तेज़ औद्योगिक और शहरी विकास को चलाते, जिससे खेत और कारखाने साथ बढ़ते।
अंक योजना:
- ऐसी नदी परियोजना जो एक साथ कई उद्देश्य पूरे करे, जैसे सिंचाई, बिजली उत्पादन, घरों और उद्योगों को पानी, बाढ़ नियंत्रण, मनोरंजन, अंतःस्थलीय नौचालन और मत्स्य पालन। — 1 अंक
- खेती: नहरों का पानी कृषि उत्पादन बढ़ाता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास करता। — 1 अंक
- उद्योग: वही परियोजनाएँ तेज़ औद्योगीकरण और शहरों की वृद्धि के लिए बिजली और पानी देतीं, जिससे दोनों साथ-साथ बढ़ते। — 1 अंक
प्रश्न 7 (3 अंक)
किसी नदी पर बाँध बनाने से नदी और उसमें रहने वाले जीवों को होने वाले तीन नुकसान समझाइए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- तलछट जलाशय में रुक जाती है, इसलिए नीचे नदी की तली पथरीली हो जाती है और जलीय जीवों का आवास बिगड़ता है।
- नदी टुकड़ों में बँट जाती है, इसलिए मछलियाँ अंडे देने के लिए ऊपर-नीचे नहीं जा पातीं।
- जलाशय बाढ़ के मैदान के पौधों और मृदा को डुबो देता है, जो समय के साथ सड़ते हैं।
अंक योजना:
- तलछट: प्राकृतिक प्रवाह बिगड़ता है, इसलिए नीचे की ओर बहुत कम तलछट जाती है और जलाशय की तली में बहुत अधिक जम जाती है; नीचे की नदी की तली अधिक पथरीली और जलीय जीवों के लिए कमज़ोर आवास बन जाती है। — 1 अंक
- विखंडन: बाँध नदियों को टुकड़ों में बाँट देते हैं, इसलिए जलीय जीवों को, खासकर अंडे देने के लिए, प्रवास करने में कठिनाई होती है। — 1 अंक
- जलमग्नता: बाढ़ के मैदानों पर बने जलाशय वहाँ की वनस्पति और मृदा को डुबो देते हैं, जो समय के साथ सड़ जाती हैं। — 1 अंक
प्रश्न 8 (3 अंक)
राजस्थान के शुष्क पश्चिमी भाग में लगभग हर पारंपरिक घर में कभी टाँका होता था। इसमें वर्षा की पहली बौछार का पानी क्यों नहीं लिया जाता था, इसका पानी इतना कीमती क्यों माना जाता था, और आज यह प्रथा कम क्यों हो रही है?
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- पहली बारिश का पानी छोड़ दिया जाता था, क्योंकि वह छत और पाइपों की गंदगी धोता है।
- वर्षा जल, 'पालर पानी', सबसे शुद्ध माना जाता था और अगली बारिश तक चलता था, दूसरे स्रोत सूखने पर भी।
- अब सदावाहिनी राजस्थान नहर से भरपूर पानी मिलता है, इसलिए कम लोग वर्षा जल इकट्ठा करते हैं।
अंक योजना:
- पहली बौछार का पानी इसलिए नहीं लिया जाता था क्योंकि वह छत और पाइपों की गंदगी धो देती है। — 1 अंक
- वर्षा जल, यानी 'पालर पानी', प्राकृतिक पानी का सबसे शुद्ध रूप माना जाता था, और जमा पानी अगली बारिश तक चलता था, इसलिए जब दूसरे स्रोत सूख जाते तब गर्मियों में यह पीने के पानी का भरोसेमंद स्रोत था। — 1 अंक
- आज सदावाहिनी राजस्थान नहर से भरपूर पानी मिलता है, इसलिए छत पर वर्षा जल संग्रहण कम हो रहा है (फिर भी कुछ परिवार अपने टाँके रखते हैं, क्योंकि उन्हें नल के पानी का स्वाद पसंद नहीं)। — 1 अंक
प्रश्न 9 (3 अंक)
बहुउद्देशीय परियोजनाओं से मिली सुनिश्चित नहर सिंचाई ने कुछ कमान क्षेत्रों में खेती और ग्रामीण समाज को कैसे बदला है? तीन बदलाव समझाइए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- किसान अधिक पानी लेने वाली वाणिज्यिक फ़सलों की ओर मुड़ गए।
- भारी सिंचाई से कई जगह मृदा लवणीय हो गई।
- अमीर ज़मींदारों को भूमिहीन गरीबों से कहीं अधिक लाभ मिला, इसलिए उनके बीच की खाई बढ़ी।
अंक योजना:
- फ़सल प्रतिरूप बदला: बहुत-से किसान अधिक पानी लेने वाली और वाणिज्यिक फ़सलों की ओर मुड़ गए। — 1 अंक
- इसके गंभीर पारिस्थितिक परिणाम हुए, जैसे मृदा का लवणीकरण। — 1 अंक
- अमीर ज़मींदारों और भूमिहीन गरीबों के बीच सामाजिक खाई बढ़ गई। — 1 अंक
प्रश्न 10 (2 अंक)
राजस्थान के मरुस्थली ज़िले बाड़मेर और जालोर को गुजरात में दूर बने एक बाँध से सिंचाई का पानी मिलना है। परियोजना का नाम लिखिए, और बताइए कि इन ज़िलों को इसकी ज़रूरत क्यों है।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- नर्मदा पर सरदार सरोवर परियोजना, जो चार राज्यों को लाभ देती है।
- ये मरुस्थली ज़िले पूरी तरह सूखा-प्रवण हैं, और नहर का पक्का पानी इन्हें सूखे से सुरक्षित बना सकता है।
अंक योजना:
- नर्मदा पर सरदार सरोवर परियोजना, जो चार राज्यों, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान, में फैली है। — 1 अंक
- राजस्थान में इसका पूरा कमान क्षेत्र सूखा-प्रवण है, इसलिए नहर का पक्का पानी इसे सूखे से सुरक्षित बना सकता है। — 1 अंक
दीर्घ उत्तरीय और स्रोत आधारित प्रश्न
प्रश्न 11 (5 अंक)
एक ज़िले में पानी की कमी है। एक समूह पास की नदी पर एक बड़ा बहुउद्देशीय बाँध चाहता है; दूसरा चाहता है कि हर गाँव और कस्बा वर्षा जल का संग्रहण करे। दोनों तरीकों की किन्हीं पाँच बिंदुओं पर तुलना कीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- पैमाना: बाँध पूरे क्षेत्र की सिंचाई, बिजली और उद्योग के लिए भारी मात्रा में पानी जमा करता है; संग्रहण घर-घर और गाँव-गाँव होता है।
- भरोसा: बड़ा जलाशय सूखे महीनों तक चल सकता है; छत या खेत पर उतना ही पानी जमा होता है जितना वहाँ बरसे।
- लागत: बाँध में भारी पैसा, इंजीनियर और वर्षों का काम लगता है; संग्रहण सस्ता है और स्थानीय कौशल से होता है।
- भूमि और लोग: बाँध पूरी नदी बदल देता है और गाँव उजाड़ सकता है; संग्रहण किसी को नुकसान नहीं पहुँचाता।
- नियंत्रण: बाँध दूर से चलाया जाता है; संग्रहण पानी का उपयोग करने वाले लोग खुद सँभालते हैं, जो लोगों और पर्यावरण, दोनों के लिए व्यावहारिक विकल्प है।
अंक योजना:
- पैमाना और उपयोग: बड़ा बाँध पूरे क्षेत्र की सिंचाई, बिजली, उद्योग और बाढ़ नियंत्रण के लिए बहुत अधिक पानी जमा करता है; वर्षा जल संग्रहण घर, खेत या गाँव के स्तर पर काम करता है। — 1 अंक
- भरोसा: बड़ा जलाशय कई ज़िलों के लिए सूखे महीनों तक पानी चला सकता है; संग्रहित वर्षा जल उतना ही होता है जितना एक छत या खेत पर गिरे, और लंबे सूखे में कम पड़ सकता है। — 1 अंक
- लागत और कौशल: बाँध में भारी निवेश, इंजीनियर और बनने में कई वर्ष लगते हैं; वर्षा जल संग्रहण सस्ता और जल्दी बनने वाला है, और स्थानीय सामग्री तथा पारंपरिक ज्ञान पर चलता है। — 1 अंक
- भूमि और लोगों पर प्रभाव: बड़ा बाँध पूरी नदी को बदल देता है और गाँव उजाड़ सकता है; वर्षा जल संग्रहण न नदी को छेड़ता है, न लोगों को। — 1 अंक
- नियंत्रण: बाँध का संचालन दूर बैठे अधिकारी करते हैं; संग्रहण वही परिवार और गाँव सँभालते हैं जो पानी का उपयोग करते हैं, इसीलिए बहुत-से लोग इसे सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय, दोनों दृष्टियों से व्यावहारिक विकल्प मानते हैं। — 1 अंक
अथवा
'बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं से भारत को बड़े लाभ हुए हैं, पर उनकी कीमत भी चुकानी पड़ी है।' इन परियोजनाओं के दो लाभ और तीन समस्याएँ समझाइए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- सिंचाई: नहरें खेतों तक पानी लाती हैं, जिससे अधिक फ़सलें उगती हैं।
- बिजली और अन्य: इनसे जलविद्युत बनती है और घरों तथा उद्योगों को पानी मिलता है।
- विस्थापन: जलाशय भरने पर हज़ारों परिवारों की भूमि और आजीविका छिन जाती है।
- विवाद: पानी, लागत और लाभ बाँटने को लेकर राज्यों में झगड़े होते हैं।
- स्वास्थ्य और भूमि: ऐसी परियोजनाओं के साथ भूकंप, जल-जनित बीमारियाँ और कीट-रोग, और पानी के अति-उपयोग से प्रदूषण जुड़े हैं।
अंक योजना:
- लाभ: खेती के लिए सिंचाई, जिससे अधिक फ़सलें उगाई जा सकती हैं। — 1 अंक
- लाभ: जलविद्युत, घरों और उद्योगों को पानी, बाढ़ नियंत्रण, अंतःस्थलीय नौचालन, मनोरंजन या मत्स्य पालन (कोई एक)। — 1 अंक
- समस्या: स्थानीय समुदायों का बड़े पैमाने पर विस्थापन, जिनकी भूमि और आजीविका छिन जाती है। — 1 अंक
- समस्या: परियोजना की लागत और लाभ बाँटने को लेकर राज्यों के बीच विवाद। — 1 अंक
- समस्या: भूकंप, जल-जनित बीमारियाँ और कीट-रोग, और पानी के अत्यधिक उपयोग से प्रदूषण (कोई एक)। — 1 अंक
प्रश्न 12 (5 अंक)
भारत के हर क्षेत्र ने अपनी भूमि के अनुसार पानी जमा करने का अपना तरीका बनाया। नीचे दिए हर क्षेत्र के लिए इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक विधि का नाम लिखिए और बताइए कि उसने भूमि की कौन-सी समस्या हल की।
(i) पश्चिमी हिमालय के पर्वत
(ii) बंगाल के बाढ़ मैदान
(iii) जैसलमेर और राजस्थान के दूसरे भागों के सूखे खेत
(iv) बीकानेर, फलोदी और बाड़मेर के मरुस्थली घर
(v) मेघालय की पहाड़ी ढलानें
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- पश्चिमी हिमालय (खड़ी ढलानें): गुल या कुल नालों का पानी ढलानों के खेतों तक मोड़ते थे।
- बंगाल (बाढ़ मैदान): बाढ़ जल वाहिकाएँ बाढ़ का पानी खेतों तक ले जाती थीं।
- जैसलमेर और राजस्थान के दूसरे भाग (शुष्क भूमि): खादीन और जोहड़ खेतों में वर्षा जल रोककर मृदा को नम रखते थे।
- राजस्थान के मरुस्थली घर (भरोसेमंद सतही जल नहीं): छत का वर्षा जल भूमिगत टंकियों में पीने के लिए जमा होता था।
- मेघालय (पहाड़ी ढलानें): बाँस की नलियाँ नालों का पानी बूँद-बूँद पौधों तक पहुँचाती थीं।
अंक योजना:
- पश्चिमी हिमालय के पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्र: 'गुल' या 'कुल' नाम की जल-मोड़ नालियाँ ढलानों के खेतों तक नालों का पानी ले जाती थीं। — 1 अंक
- बंगाल के बाढ़ मैदान: लोगों ने बाढ़ का पानी खेतों की सिंचाई के लिए ले जाने को बाढ़ जल वाहिकाएँ बनाईं। — 1 अंक
- शुष्क और अर्ध-शुष्क राजस्थान: खेतों को वर्षा आधारित भंडारण संरचनाओं में बदला गया, जिनमें पानी रुककर मृदा को नम करता था, जैसे जैसलमेर में खादीन और राजस्थान के दूसरे भागों में जोहड़। — 1 अंक
- भरोसेमंद सतही जल से रहित राजस्थान के मरुस्थली कस्बे और गाँव: छत पर वर्षा जल संग्रहण से पीने का पानी भूमिगत टंकियों में जमा किया जाता था। — 1 अंक
- मेघालय की पहाड़ी ढलानें: लगभग 200 वर्ष पुरानी बाँस ड्रिप सिंचाई प्रणाली नालों और झरनों का पानी बाँस की नलियों से पौधों तक बूँद-बूँद पहुँचाती थी। — 1 अंक
अथवा
'भारत में पानी जमा करने और उसका उपयोग करने वाली संरचनाएँ बनाने की लंबी परंपरा रही है।' अतीत के पाँच उदाहरण देकर इस कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- मौर्य काल: चंद्रगुप्त मौर्य के समय बड़े पैमाने पर बाँध, झीलें और सिंचाई तंत्र बने।
- पहली शताब्दी ईसा पूर्व: इलाहाबाद के पास श्रृंगवेरपुर में गंगा का बाढ़ का पानी मोड़ा जाता था।
- दूसरे स्थान: कलिंग, नागार्जुनकोंडा, बेन्नूर और कोल्हापुर में उन्नत सिंचाई संरचनाएँ मिली हैं।
- ग्यारहवीं शताब्दी: भोपाल झील, अपने समय की सबसे बड़ी कृत्रिम झीलों में से एक।
- चौदहवीं शताब्दी: दिल्ली में हौज़ खास का तालाब, जो सीरी फ़ोर्ट क्षेत्र को पानी देता था।
अंक योजना:
- चंद्रगुप्त मौर्य के समय में बड़े पैमाने पर बाँध, झीलें और सिंचाई तंत्र बनाए गए। — 1 अंक
- पहली शताब्दी ईसा पूर्व में इलाहाबाद के पास श्रृंगवेरपुर में गंगा के बाढ़ के पानी को मोड़ने वाला उन्नत जल संग्रहण तंत्र था। — 1 अंक
- कलिंग (ओडिशा), नागार्जुनकोंडा (आंध्र प्रदेश), बेन्नूर (कर्नाटक) और कोल्हापुर (महाराष्ट्र) में उन्नत सिंचाई संरचनाओं के प्रमाण मिले हैं। — 1 अंक
- ग्यारहवीं शताब्दी में भोपाल झील बनाई गई, जो अपने समय की सबसे बड़ी कृत्रिम झीलों में से एक थी। — 1 अंक
- चौदहवीं शताब्दी में सीरी फ़ोर्ट क्षेत्र को पानी देने के लिए दिल्ली के हौज़ खास में एक तालाब बनाया गया। — 1 अंक
प्रश्न 13 (4 अंक)
नीचे दिए गए स्रोत को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
पानी में डूबा गाँव
गर्मियों में जब पानी उतरता है, तो झील के ऊपर पुराने मंदिर का शिखर अब भी दिखता है। कमला बाई उसकी ओर इशारा करके बताती हैं कि उनका घर ठीक उसके पीछे था। बीस साल पहले उनके गाँव के नीचे नदी पर एक बड़ा बाँध बना। जलाशय भरता गया और खेत, चरागाह और वह जंगल, जहाँ से औरतें ईंधन की लकड़ी लाती थीं, सब पानी में डूब गए।
परिवार को कुछ पैसे और नदी तथा जंगल से दूर, सूखी पथरीली ज़मीन पर एक पुनर्वास बस्ती में एक भूखंड मिला। उनके पति अब दिहाड़ी मज़दूरी करते हैं। जलाशय की नहरें सौ किलोमीटर से भी दूर की समृद्ध खेती तक पानी ले जाती हैं, और बिजलीघर दूर के शहरों को बिजली भेजता है। कमला बाई की नई बस्ती अब भी पानी की ठीक आपूर्ति का इंतज़ार कर रही है।
(a) भारत के किसी एक ऐसे जन-आंदोलन का नाम लिखिए जिसने मुख्य रूप से कमला बाई जैसी समस्याओं के कारण किसी बड़े बाँध का विरोध किया। (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
नर्मदा बचाओ आंदोलन (या टिहरी बाँध आंदोलन)।
अंक योजना:
- नर्मदा बचाओ आंदोलन या टिहरी बाँध आंदोलन (कोई एक)। — 1 अंक
(b) कमला बाई के परिवार ने बाँध के लिए क्या-क्या छोड़ा? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
अपनी भूमि और आजीविका, और उस जंगल तथा चरागाह तक पहुँच जिनका वे पहले उपयोग करते थे।
अंक योजना:
- अपनी भूमि और आजीविका, और चरागाह तथा जंगल जैसे संसाधनों तक पहुँच और उन पर नियंत्रण। — 1 अंक
(c) कमला बाई के गाँव ने अपनी भूमि खोई ताकि दूसरों को पानी और बिजली मिले। स्रोत की सहायता से स्पष्ट कीजिए कि ऐसी परियोजनाओं से सबसे अधिक लाभ किसे मिला है, और इन्हें अधिक न्यायपूर्ण बनाने का एक तरीका सुझाइए। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- लाभ नहर क्षेत्रों के बड़े किसानों, उद्योगों और पानी तथा बिजली पाने वाले दूर के शहरों को मिला।
- विस्थापितों का पूरा पुनर्वास होना चाहिए, यानी भूमि, काम और पानी, और बाँध के लाभों में हिस्सा।
अंक योजना:
- सबसे अधिक लाभ नहर क्षेत्रों के ज़मींदारों और बड़े किसानों, उद्योगपतियों और पानी तथा बिजली पाने वाले कुछ शहरी केंद्रों को मिलता है; विस्थापितों को बहुत कम मिलता है। — 1 अंक
- न्यायपूर्ण तरीका: विस्थापितों का पूरा पुनर्वास, यानी भूमि, आजीविका और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएँ, और परियोजना के पानी और बिजली में हिस्सा। (कोई भी उचित कदम मान्य।) — 1 अंक
प्रश्न 14 (4 अंक)
नीचे दिए गए स्रोत को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
पहाड़ से उतरता पानी
मेघालय में एक ऊँची ढलान पर एक नाला चट्टानों पर से उछलता हुआ बहता है। एक किसान ने उसके किनारे एक छोटा रास्ता काटकर उसमें चिरे हुए बाँस का एक टुकड़ा लगा दिया है। पानी उसमें फिसलता है और पहाड़ से नीचे अपनी यात्रा शुरू करता है।
पानी एक ही नली में दूर तक नहीं जाता। अलग-अलग आकार की बाँस की नालियाँ एक के बाद एक जुड़ी होती हैं; कुछ पानी को आगे ले जाती हैं, कुछ उसे बगल में मोड़ती हैं, और कुछ धारा को छोटी-छोटी धाराओं में बाँट देती हैं। सैकड़ों मीटर पार करते-करते ऊपर से आया लगभग 18-20 लीटर पानी एक पतली धार भर रह जाता है। हर पौधे की जड़ के पास यह केवल 20 से 80 बूँद प्रति मिनट की दर से गिरता है।
इस व्यवस्था में कुछ भी दुकान से नहीं खरीदा जाता। बाँस पास ही उगता है, बहाव ढलान से ही मिलता है, और परिवार लगभग दो सौ वर्षों से इस तरीके का उपयोग कर रहे हैं।
(a) स्रोत में बताई गई प्रणाली का नाम लिखिए। (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
मेघालय की बाँस ड्रिप सिंचाई प्रणाली।
अंक योजना:
- बाँस ड्रिप सिंचाई (मेघालय की)। — 1 अंक
(b) पौधे तक पहुँचते-पहुँचते बहाव को घटाकर केवल कुछ बूँद प्रति मिनट क्यों कर दिया जाता है? (1 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
ताकि हर पौधे को जड़ों पर धीमी, लगातार आपूर्ति मिले और लगभग कोई पानी बर्बाद न हो।
अंक योजना:
- ताकि हर पौधे को जड़ों पर ही धीमी, लगातार आपूर्ति मिले, और लगभग कोई पानी बर्बाद न हो या ढलान से बह न जाए। — 1 अंक
(c) दो कारण समझाइए कि इस प्रणाली को चलाने में किसान का खर्च बहुत कम क्यों होता है। (2 अंक)
उत्तर।
आदर्श उत्तर:
- पानी अपने आप ढलान से नीचे बहता है, इसलिए न पंप चाहिए, न बिजली का बिल।
- बाँस पास ही उगता है और परिवार प्रणाली बनाना जानते हैं, इसलिए कुछ खरीदना नहीं पड़ता।
अंक योजना:
- पानी गुरुत्व से ढलान पर नीचे बहता है, इसलिए पंप, ईंधन या बिजली की ज़रूरत नहीं होती। — 1 अंक
- बाँस पास ही उगता है और हुनर स्थानीय है, जो परिवारों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता है, इसलिए कुछ खरीदना नहीं पड़ता। (यह भी मान्य: प्रणाली की मरम्मत आसान है।) — 1 अंक