इस खंड के बारे में

यह खंड अध्याय 2 — भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक — से विगत वर्षों के बोर्ड परीक्षा प्रश्नों (CBSE और राज्य बोर्ड) को आदर्श उत्तरों सहित संग्रहित करता है, जो दर्शाता है कि इस अध्याय की परीक्षा कैसे ली जाती है।

बोर्ड के विगत वर्षों के प्रश्न

प्र1. किन्हीं तीन विशेषताओं के आधार पर संगठित और असंगठित क्षेत्रकों में अंतर कीजिए। (3 अंक)

उत्तर:

  • पंजीकरण और नियम: संगठित क्षेत्रक पंजीकृत होता है और कानूनों (Factories Act, Minimum Wages Act) का पालन करता है; असंगठित क्षेत्रक बड़े पैमाने पर सरकारी नियंत्रण से बाहर होता है और नियमों का पालन नहीं किया जाता।
  • नौकरी की सुरक्षा: संगठित-क्षेत्रक की नौकरियाँ सुरक्षित और नियमित होती हैं; असंगठित नौकरियाँ असुरक्षित और अनियमित होती हैं।
  • लाभ: संगठित-क्षेत्रक के श्रमिकों को सवैतनिक अवकाश, भविष्य निधि, ग्रेच्युटी, चिकित्सा लाभ और पेंशन मिलते हैं; असंगठित श्रमिकों को ऐसे कोई लाभ नहीं मिलते।

प्र2. प्रच्छन्न बेरोज़गारी क्या है? यह खुली बेरोज़गारी से कैसे भिन्न है? (3 अंक)

उत्तर: प्रच्छन्न बेरोज़गारी (अल्प-रोज़गार) तब होती है जब लोग काम करते हुए प्रतीत होते हैं परंतु अपनी क्षमता से कम काम करते हैं, ताकि कुछ को हटाने से उत्पादन कम न हो — उदा., एक छोटे खेत पर बहुत अधिक परिवार के सदस्य। खुली बेरोज़गारी तब होती है जब किसी व्यक्ति के पास बिल्कुल भी काम नहीं होता और वह स्पष्ट रूप से बेरोज़गार दिखाई देता है। प्रच्छन्न बेरोज़गारी छिपी हुई होती है, जबकि खुली बेरोज़गारी दिखाई देने वाली होती है।

प्र3. 'भारत में तृतीयक क्षेत्रक तेज़ी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है।' कोई तीन कारण दीजिए। (3 अंक)

उत्तर: (i) बुनियादी सेवाएँ — एक विकासशील देश को सरकार द्वारा स्कूल, अस्पताल, बैंक, परिवहन, पुलिस और रक्षा प्रदान करने की आवश्यकता होती है। (ii) अन्य क्षेत्रकों को सहायता — जैसे-जैसे कृषि और उद्योग बढ़ते हैं, वे अधिक परिवहन, व्यापार, भंडारण और बैंकिंग की माँग करते हैं। (iii) बढ़ती आय और नई सेवाएँ — उच्च आय पर्यटन और निजी स्कूली शिक्षा जैसी सेवाओं की माँग बढ़ाती है, और नई ICT-आधारित सेवाओं में तेज़ी से वृद्धि हुई है।

प्र4. ग्रामीण भारत में अधिक रोज़गार सृजित किए जाने के किन्हीं पाँच उपायों की व्याख्या कीजिए। (5 अंक)

उत्तर: (i) सिंचाई — कुएँ, बाँध और नहरें बनाएँ ताकि किसान दूसरी फसल उगा सकें। (ii) बैंकों से सस्ता कृषि ऋण ताकि गरीब किसान समय पर आदान खरीद सकें। (iii) परिवहन और भंडारण तथा बेहतर ग्रामीण सड़कें ताकि किसानों को उपज बेचने में मदद मिले। (iv) अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि-आधारित उद्योग — दाल मिल, शीत भंडारण, खाद्य प्रसंस्करण, शहद केंद्र। (v) सेवाएँ और सार्वजनिक कार्य — शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन में नौकरियाँ, और MGNREGA 2005 (अब Viksit Bharat-GRAMG 2025) जैसे कानूनों के तहत गारंटीशुदा कार्य।

प्र5. सार्वजनिक क्षेत्रक के लिए कुछ गतिविधियों पर व्यय करना क्यों महत्वपूर्ण है? उदाहरणों सहित समझाइए। (5 अंक)

उत्तर: सार्वजनिक क्षेत्रक को वहाँ व्यय करना चाहिए जहाँ निजी क्षेत्रक उचित लागत पर सेवाएँ प्रदान नहीं करेगा: (i) ऐसी गतिविधियाँ जिनमें भारी निवेश की आवश्यकता होती है या जहाँ शुल्क वसूलना कठिन होता है — सड़कें, पुल, रेलवे, बंदरगाह, बाँध, बिजली; (ii) सहायक गतिविधियाँ — छोटे उद्योगों को किफायती दरों पर बिजली की आपूर्ति करना ताकि वे टिके रहें, और उचित मूल्य पर अनाज खरीदकर राशन की दुकानों के माध्यम से सस्ते में बेचना; और (iii) उसकी प्राथमिक ज़िम्मेदारियाँस्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षित पानी, पोषण और सबसे गरीब क्षेत्रों की देखभाल। ये सुनिश्चित करती हैं कि विकास सभी तक पहुँचे।