अधिक रोज़गार कैसे पैदा करें

कृषि में काफ़ी अल्प-रोज़गार (underemployment) है, और कुछ लोगों को तो बिल्कुल भी रोज़गार नहीं मिलता। हम रोज़गार कैसे बढ़ा सकते हैं? कई व्यावहारिक कदम इसमें मदद कर सकते हैं, जिनकी शुरुआत लक्ष्मी के दो हेक्टेयर वाले खेत से करते हैं।

सिंचाई और बाँध। यदि सरकार पैसा खर्च करे, या कोई बैंक ऋण दे, ताकि लक्ष्मी के लिए एक कुआँ बनाया जा सके, तो वह अपनी ज़मीन की सिंचाई कर सकती है और गेहूँ जैसी दूसरी (रबी) फ़सल ले सकती है — जिससे परिवार के अधिक सदस्यों को रोज़गार मिलेगा। कई खेतों की सिंचाई के लिए एक नया बाँध और नहरें कृषि के भीतर ही बहुत सारा रोज़गार पैदा कर सकती हैं, जिससे अल्प-रोज़गार कम होगा।

साख, परिवहन और कृषि-आधारित उद्योग

सस्ती साख। लक्ष्मी को बीज, उर्वरक, उपकरण और पंपसेट भी चाहिए। गरीब होने के कारण उसे साहूकारों से ऊँचे ब्याज पर उधार लेना पड़ता है। यदि कोई स्थानीय बैंक उचित दर पर साख (ऋण) दे, तो वह समय पर आदान (inputs) खरीद सकती है और अच्छी खेती कर सकती है। इसलिए खेती को पानी और सस्ती कृषि साख दोनों की ज़रूरत है (चर्चा अध्याय 3 में)।

परिवहन और भंडारण। यदि सरकार परिवहन, भंडारण और बेहतर ग्रामीण सड़कों में निवेश करे, तो किसान अपनी उपज को ले जा सकते हैं और बेच सकते हैं — जिससे परिवहन और व्यापार में लगे लोगों के लिए भी काम पैदा होता है।

अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि-आधारित उद्योग। हम अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योगों और सेवाओं को बढ़ावा दे सकते हैं — उदाहरण के लिए, एक दाल मिल लगाना, आलू और प्याज के लिए एक शीत भंडार (कोल्ड स्टोरेज), या जंगलों के पास शहद संग्रह केंद्र। सब्ज़ियों और खेत की उपज के प्रसंस्करण से केवल बड़े शहरों में ही नहीं, बल्कि गाँवों के पास रोज़गार मिलता है।

अधिक रोज़गार सृजन के उपाय

सेवाएँ और काम का अधिकार

शिक्षा और स्वास्थ्य में रोज़गार पैदा करना भी विकास में मदद करता है। भारत की लगभग 60 प्रतिशत जनसंख्या 5-29 वर्ष आयु की है, लेकिन केवल लगभग 51 प्रतिशत ही शैक्षणिक संस्थानों में जाती है। तत्कालीन योजना आयोग (अब नीति आयोग / NITI Aayog) ने अनुमान लगाया कि अकेले शिक्षा क्षेत्र में लगभग 20 लाख नौकरियाँ पैदा की जा सकती हैं, और पर्यटन को बेहतर बनाने से एक वर्ष में 35 लाख से अधिक लोगों को रोज़गार मिल सकता है।

त्वरित, अल्पकालिक राहत के लिए, सरकार ने काम के अधिकार (Right to Work) को लागू करने वाला एक कानून बनाया। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम 2005 (MGNREGA 2005) ने सभी ग्रामीण लोगों को, जो काम करने में सक्षम और इच्छुक हैं, वर्ष में 100 दिन के रोज़गार की गारंटी दी; यदि सरकार काम देने में विफल रहती, तो वह एक बेरोज़गारी भत्ता देती थी। ऐसे काम को प्राथमिकता दी जाती थी जो ज़मीन से भविष्य के उत्पादन को बढ़ाए। 2025 में इस अधिनियम को विकसित भारत-गारंटी फ़ॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (Viksit Bharat-GRAMG 2025) से बदल दिया गया।

प्रश्न और उत्तर

प्र1. ग्रामीण (कृषि) क्षेत्रों में रोज़गार कैसे बढ़ाया जा सकता है?

उत्तर: ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार निम्नलिखित तरीकों से बढ़ाया जा सकता है: (i) सिंचाई प्रदान करके — कुएँ, बाँध और नहरें — ताकि किसान दूसरी फ़सल ले सकें; (ii) सस्ती कृषि साख देकर ताकि गरीब किसान समय पर बीज, उर्वरक और उपकरण खरीद सकें; (iii) परिवहन, भंडारण और ग्रामीण सड़कों में निवेश करके ताकि किसान अपनी उपज बेच सकें; और (iv) अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों में दाल मिल, शीत भंडार और खाद्य-प्रसंस्करण इकाइयों जैसे कृषि-आधारित उद्योग स्थापित करके।

प्र2. MGNREGA 2005 क्या है और इसे 'काम का अधिकार' क्यों कहा जाता है?

उत्तर: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम 2005 ने हर उस ग्रामीण परिवार को, जिसके वयस्क अकुशल शारीरिक काम करने के इच्छुक थे, वर्ष में 100 दिन के मज़दूरी रोज़गार की गारंटी दी। यदि सरकार काम देने में विफल रहती, तो उसे एक बेरोज़गारी भत्ता देना पड़ता था। चूँकि इसने रोज़गार को एक कानूनी गारंटी बना दिया जिसकी माँग लोग सरकार से कर सकते थे, इसलिए इसे काम का अधिकार कहा जाता है। 2025 में इसे विकसित भारत-GRAMG 2025 से बदल दिया गया।

प्र3. सिंचाई और विपणन (marketing) सुविधाएँ प्रदान करने से आय और रोज़गार कैसे बढ़ता है?

उत्तर: सिंचाई (कुएँ, बाँध, नहरें) किसानों को दूसरी फ़सल उगाने देती है, जिससे अधिक लोगों को रोज़गार मिलता है और उत्पादन बढ़ता है। विपणन सुविधाएँ — परिवहन, भंडारण और ग्रामीण सड़कें — किसानों को औने-पौने दाम पर बेचने के बजाय अच्छे दामों पर अपनी उपज बेचने देती हैं। मिलकर ये न केवल किसानों के लिए, बल्कि परिवहन और व्यापार में लगे लोगों के लिए भी उत्पादक काम पैदा करती हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कुल आय बढ़ती है।